वरिष्ठ पत्रकार


राजनीतिक गलियारों के अलावा सरकारी एजेंसियां और देश-विदेश की निजी एजेंसियां भी वर्षों से अधिकृत अथवा गैरकानूनी ढंग से भारत में जासूसी करती रही हैं

आलोक मेहता 4 months ago

लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की आलोचना-विरोध की पूरी गुंजाइश है, लेकिन क्या यह इतना गंभीर मामला है, जिससे आधुनिक भारत की छवि बिगड़ रही है

आलोक मेहता 5 months ago

मुख्यमंत्री इतनी सी बात नहीं समझ सकते कि बाहर से आने वाले पत्रकार कम से कम पूर्वाग्रही हो सकते हैं। स्थानीय पत्रकार तो स्वयं बाढ़ या अन्य कारणों से सरकार से निजी नाराजगी रख सकता है

आलोक मेहता 5 months ago

समय का पहिया आगे बढ़ने के साथ सरकार और समाज द्वारा बुरी बातें ही नहीं, कई बार अच्छी सलाह भी भुला दी जाती हैं

आलोक मेहता 9 months ago