बचे-खुचे कम्युनिस्ट लेखक संघों के चेहरे पर लगा प्रगतिशीलता के मुखौटे का रंग बदरंग हो गया है। फासीवाद फासीवाद चिल्लानेवाले स्वयं फासीवादी मानसिकता की जकड़न में हैं।
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।