जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने दावा किया है कि उसके स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Z5 और स्पोर्ट्स टीवी चैनलों की 95 फीसदी से अधिक प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बिक चुकी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) 2026 के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों के साथ टूर्नामेंट का रोमांच और भी बढ़ गया है। इसी बीच जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises) ने दावा किया है कि उसके स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Z5 और स्पोर्ट्स टीवी चैनलों की 95 फीसदी से अधिक प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बिक चुकी है।
कंपनी के मुताबिक, टूर्नामेंट के दौरान अब तक 22 से ज्यादा बड़े ब्रैंड उसके साथ जुड़े हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, बेवरेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर, स्पोर्ट्सवियर, फैशन, ई-कॉमर्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, ट्रैवल, रियल एस्टेट, पेंट्स, एनर्जी और एजुकेशन जैसे कई सेक्टर शामिल हैं।
क्वार्टर फाइनल और नॉकआउट मुकाबलों के दौरान विज्ञापनों की बढ़ती मांग का असर विज्ञापन दरों पर भी देखने को मिला है। कंपनी के अनुसार, 10 सेकंड के एक विज्ञापन की कीमत अब 20 लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच पहुंच गई है।
इस मौके पर ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Advertisement Revenue) संदीप मेहरोत्रा ने कहा कि विज्ञापनदाताओं से मिला शानदार रिस्पॉन्स कंपनी की उम्मीदों से भी बेहतर रहा है। उन्होंने कहा कि 95 फीसदी से ज्यादा विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बुक हो चुकी है और 22 से अधिक प्रमुख ब्रैंड इस टूर्नामेंट का हिस्सा बने हैं। उनके मुताबिक, FIFA World Cup 2026 ब्रैंड्स के लिए बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचने का एक मजबूत मंच बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट ने सिर्फ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच ही नहीं दिलाई, बल्कि लाइव स्पोर्ट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत को जोड़ते हुए इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सॉल्यूशंस भी उपलब्ध कराए हैं। उनका कहना है कि विज्ञापनदाताओं का बढ़ता भरोसा कंपनी के मजबूत और अलग स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के विजन को भी मजबूती देता है।
कंपनी ने बताया कि कई ब्रैंड्स ने ZEE5 की एडवांस टारगेटिंग क्षमता और अलग-अलग विज्ञापन फॉर्मेट का इस्तेमाल करते हुए कनेक्टेड टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन को जोड़कर मल्टी-प्लेटफॉर्म कैंपेन भी चलाए हैं।
ज़ी के अनुसार, FIFA World Cup 2026 के दौरान इंटरैक्टिव कॉन्टेस्ट और दर्शकों को जोड़ने वाली कई पहल के जरिए टीवी, डिजिटल और सोशल मीडिया पर भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली है। कंपनी ने कहा कि वह अपने स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार कर रही है, जिसमें Bundesliga और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जैसे बड़े स्पोर्ट्स प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं।
यदि आपने सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के ट्विस्ट से भरपूर एपिसोड देखे हैं, तो आप माइक्रो-ड्रामा से परिचित हैं। इसकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते कई बड़ी मीडिया कंपनियां इसमें करोड़ों रुपये निवेश कर रही हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
यदि आपने पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के एपिसोड वाली कोई कहानी देखी है, जिसमें हर एपिसोड के अंत में बड़ा ट्विस्ट आता है और अगला एपिसोड देखने की उत्सुकता बनी रहती है, तो आपने माइक्रो-ड्रामा की दुनिया की झलक देखी है।
कुछ साल पहले तक मनोरंजन का मतलब टीवी, फिल्में और OTT प्लेटफॉर्म थे। लेकिन अब दर्शकों, खासकर Gen Z और मोबाइल-फर्स्ट यूजर्स की बदलती पसंद ने एक नया बाजार तैयार कर दिया है। यही वजह है कि देश की बड़ी मीडिया कंपनियां अब माइक्रो-ड्रामा, वर्टिकल वीडियो और डिजिटल-फर्स्ट कंटेंट पर तेजी से दांव लगा रही हैं।
क्या है माइक्रो-ड्रामा?
माइक्रो-ड्रामा ऐसी वेब सीरीज होती हैं, जिनके एपिसोड आमतौर पर 1 से 3 मिनट लंबे होते हैं। इन्हें मोबाइल स्क्रीन के हिसाब से वर्टिकल फॉर्मेट में बनाया जाता है। हर एपिसोड का अंत इस तरह होता है कि दर्शक अगला एपिसोड तुरंत देखने के लिए उत्सुक हो जाए।
यह फॉर्मेट सबसे पहले चीन में लोकप्रिय हुआ और अब भारत में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। यहां रोमांस, फैमिली ड्रामा, सस्पेंस और कॉमेडी जैसी श्रेणियां सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं।
दर्शकों को कितना पसंद आ रहा है?
Meta और Ormax Media की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में माइक्रो-ड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 65% दर्शकों ने पिछले एक साल के भीतर पहली बार माइक्रो-ड्रामा देखना शुरू किया। करीब 89% लोग इन तक सोशल मीडिया फीड के जरिए पहुंचते हैं। एक सामान्य दर्शक हर सप्ताह औसतन 3.5 घंटे माइक्रो-ड्रामा देखता है, जबकि लगभग 90% लोग इन्हें अकेले देखना पसंद करते हैं। सबसे लोकप्रिय श्रेणियों में रोमांस, फैमिली ड्रामा और कॉमेडी शामिल हैं। यह अध्ययन 14 राज्यों में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 लोगों पर आधारित है।
बाजार किस दिशा में बढ़ रहा है?
भारत में माइक्रो-ड्रामा उद्योग अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन बड़ी मीडिया कंपनियों के लगातार निवेश से इसके तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों की संख्या इस फॉर्मेट को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
Yash Raj Films ने क्यों लगाया दांव?
बॉलीवुड की प्रमुख फिल्म कंपनी Yash Raj Films (YRF) ने हाल ही में Gen Z पर फोकस करने वाली डिजिटल कंपनी Rusk Media में निवेश किया है। निवेश राशि सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह पहली बार है जब YRF ने मोबाइल-फर्स्ट स्टोरीटेलिंग में कदम रखा है।
YRF के CEO अक्षय विधानी के मुताबिक, भारत में करीब 37.7 करोड़ मोबाइल-फर्स्ट दर्शक हैं। ऐसे में कंपनी सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां भी पहुंचना चाहती है जहां दर्शक अपना अधिक समय बिताते हैं।
JioStar भी मैदान में
देश की सबसे बड़ी मीडिया और स्ट्रीमिंग कंपनियों में शामिल JioStar ने भी माइक्रो-ड्रामा सेगमेंट में एंट्री कर ली है। कंपनी ने JioHotstar ऐप पर 'Tadka' नाम से एक नया माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
'Tadka' पर 30 से 90 सेकंड तक के वर्टिकल एपिसोड वाले ओरिजिनल शो उपलब्ध हैं। इसमें रोमांस, थ्रिलर, कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया कंटेंट शामिल है। कंपनी इसे मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों के लिए नए मनोरंजन अनुभव के रूप में पेश कर रही है।
Zee Entertainment भी पीछे नहीं
Zee Entertainment Enterprises ने पिछले साल माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म Bullet में निवेश किया था। इसके बाद कंपनी ने इसमें 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की घोषणा भी की। साथ ही Zee ने PhantomFX में 116 करोड़ रुपये तक का रणनीतिक निवेश किया है, ताकि विजुअल इफेक्ट्स, नई तकनीक और डिजिटल स्टोरीटेलिंग में अपनी क्षमता को मजबूत किया जा सके।
Saregama ने खरीदी डिजिटल कंपनी
संगीत और मनोरंजन कंपनी Saregama India ने डिजिटल कंटेंट कंपनी Pocket Aces में 90% से अधिक हिस्सेदारी कई चरणों में 308 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके बाद Pocket Aces के जरिए Finnet Media का भी अधिग्रहण किया गया, जो कंटेंट क्रिएशन और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करती है।
यह सौदा बताता है कि पारंपरिक मीडिया कंपनियां अब नई डिजिटल कंपनियां खड़ी करने के बजाय उन्हें खरीदकर तेजी से इस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
Rusk Media को मिला बड़ा निवेश
Rusk Media ने हाल ही में 100 करोड़ रुपये की प्री-सीरीज C फंडिंग जुटाई। इस फंडिंग का नेतृत्व Nazara Technologies ने किया, जबकि Info Edge Ventures, IvyCap Ventures और Audacity VC समेत कई निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल ओरिजिनल एनिमेशन और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के विस्तार में करेगी।
आखिर कंपनियां इतना पैसा क्यों लगा रही हैं?
इसकी सबसे बड़ी वजह है दर्शकों की बदलती आदत। आज का दर्शक लंबी फिल्म या वेब सीरीज देखने के बजाय यात्रा, ऑफिस ब्रेक या खाली समय में कुछ मिनटों में पूरी होने वाली कहानी देखना पसंद कर रहा है।
सोशल मीडिया के एल्गोरिद्म भी ऐसे कंटेंट को तेजी से लोगों तक पहुंचा रहे हैं। यही कारण है कि माइक्रो-ड्रामा का पूरा बिजनेस "मोबाइल-फर्स्ट" मॉडल पर आधारित होता जा रहा है।
कमाई कैसे होती है?
माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म विज्ञापन, प्रीमियम एपिसोड, इन-ऐप खरीदारी, ब्रैंड इंटीग्रेशन और सब्सक्रिप्शन जैसे कई मॉडलों से कमाई करते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी इस कारोबार की सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों से सीधे भुगतान कराना है। Meta-Ormax रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत कम लोग कंटेंट देखने के लिए सीधे भुगतान करते हैं। इसलिए फिलहाल कंपनियों का फोकस पहले बड़े पैमाने पर दर्शक आधार तैयार करने पर है।
आगे क्या?
भारतीय मनोरंजन उद्योग तेजी से बदल रहा है। जिस तरह एक दशक पहले OTT प्लेटफॉर्म्स ने टीवी देखने की आदत बदल दी थी, उसी तरह माइक्रो-ड्रामा अब मोबाइल मनोरंजन का नया अध्याय बनता दिखाई दे रहा है।
Yash Raj Films, JioStar, Zee Entertainment, Saregama और Nazara Technologies जैसी कंपनियों की रणनीति साफ बताती है कि वे इसे कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े डिजिटल कारोबार के रूप में देख रही हैं। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और निवेश, नए प्लेटफॉर्म तथा क्षेत्रीय भाषाओं में अधिक कंटेंट देखने को मिल सकता है।
फिलहाल इतना तय है कि मनोरंजन की दुनिया तेजी से मोबाइल स्क्रीन पर सिमट रही है और 2 मिनट की कहानी अब मीडिया कंपनियों के लिए भविष्य के सबसे बड़े डिजिटल अवसरों में से एक बनती जा रही है।
नेटफ्लिक्स (Netflix) ने भारत में पहली बार NextGen India Writers’ Program लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य नए और उभरते स्क्रीनराइटर्स को प्रशिक्षण, मेंटरशिप और प्रोफेशनल अवसर उपलब्ध कराना है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) ने भारत में पहली बार 'नेक्स्टजेन इंडिया राइटर्स प्रोग्राम' (NextGen India Writers’ Program) लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य नए और उभरते स्क्रीनराइटर्स (Screenwriters) की पहचान करना, उन्हें प्रशिक्षण देना और उनकी कहानियों को पेशेवर स्तर तक पहुंचाने में मदद करना है।
कंपनी के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए वे लेखक आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास अधिकतम तीन वर्ष का प्रोफेशनल राइटिंग (Professional Writing) अनुभव है। इस पहल की मेजबानी करने वाला भारत, फ्रांस (France) और नीदरलैंड (Netherlands) के बाद तीसरा देश बन गया है।
चयनित प्रतिभागियों को दो महीने के हाइब्रिड (Hybrid) प्रोग्राम में शामिल किया जाएगा। इस दौरान उन्हें इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स (Industry Experts) की मेंटरशिप (Mentorship), वर्कशॉप्स (Workshops) और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही प्रतिभागियों को अपनी कहानी को प्रोफेशनल 'सीरीज बाइबिल' (Series Bible) के रूप में विकसित करना भी सिखाया जाएगा, ताकि उसे वेब सीरीज (Web Series) में बदला जा सके।
नेटफ्लिक्स इंडिया (Netflix India) की वाइस प्रेसिडेंट (Vice President) मोनिका शेरगिल (Monika Shergill) ने कहा कि हर बेहतरीन कहानी की शुरुआत एक लेखक से होती है। भारत में ऐसे कई प्रतिभाशाली लोग हैं, जिनके पास शानदार कहानियां हैं, लेकिन उन्हें अब तक सही मंच नहीं मिल पाया। यह कार्यक्रम ऐसे नए टैलेंट को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि नेटफ्लिक्स (Netflix) का मानना है कि भारतीय मनोरंजन उद्योग का अगला दौर नए नजरिए और अलग सोच रखने वाले कहानीकारों के दम पर आगे बढ़ेगा। कंपनी ने बताया कि यह पहल नए क्रिएटिव टैलेंट (Creative Talent) को बढ़ावा देने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले 'द रेलवे मेन' (The Railway Men) और आगामी सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar) जैसे प्रोजेक्ट्स में भी नए रचनात्मक प्रतिभाओं को अवसर दिया जा चुका है।
मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है। लोग घरों में बंद हुए और OTT प्लेटफॉर्म्स ने अपनी सबसे बड़ी छलांग लगाई। Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar, सब एकसाथ भारतीय दर्शकों के ड्रॉइंग रूम में घुस आए। जब थिएटर खुले, तो सवाल यह था कि क्या दर्शक वापस आएंगे? आंकड़े कहते हैं, हां, लेकिन पुरानी शर्तों पर नहीं।
थिएटर की वापसी: रिकॉर्ड तोड़ा, पर खाली कुर्सियां अभी भी बोल रही हैं
Ormax Media की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 भारतीय बॉक्स ऑफिस का अब तक का सबसे बड़ा साल रहा। कुल ग्रॉस बॉक्स ऑफिस ₹13,395 करोड़ रहा, यह इतिहास में पहली बार था जब भारतीय बॉक्स ऑफिस ₹13,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया और 2023 के ₹12,226 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 37 फिल्में ₹100 करोड़ का क्लब पार कर गईं, जो 2024 की 22 फिल्मों से काफी ज्यादा थीं। 2026 में यह गति जारी है, जनवरी-मार्च 2026 में ₹3,440 करोड़ का बॉक्स ऑफिस दर्ज हुआ, जो 2025 की समान अवधि से 17% अधिक है।
तुलना के लिए देखें: 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस ₹11,833 करोड़ था, जो 2023 (₹12,226 करोड़) के बाद दूसरा सबसे बड़ा साल था। 2019 (कोविड-पूर्व) में यह आंकड़ा ₹10,948 करोड़ था।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है। संख्याएं बड़ी दिखती हैं क्योंकि टिकट की कीमतें बढ़ी हैं। 2019 में औसत टिकट मूल्य (ATP) ₹106 था, 2024 में ₹134 और 2025 में यह ₹161 हो गया, यानी 2019 के मुकाबले 52% की बढ़ोतरी। लेकिन दर्शकों की संख्या (फुटफॉल) उलटी दिशा में गई। 2019 में 103 करोड़ दर्शक थिएटर पहुंचे थे, जो 2024 में 88.3 करोड़ और 2025 में घटकर 83.2 करोड़ रह गए, 2019 की तुलना में 19% की गिरावट।
भारत में कुल 10,033 स्क्रीन हैं (2025)। PVR INOX, देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन, 111 शहरों में 1,749 स्क्रीन संचालित करती है। सिंगल स्क्रीन थिएटर की हालत ज्यादा चिंताजनक है, हर साल करीब 150 सिंगल स्क्रीन बंद होते हैं, जबकि नए मल्टीप्लेक्स स्क्रीन जुड़ते रहते हैं।
OTT: उछाल के बाद परिपक्वता का दौर
कोविड के दौरान जो OTT क्रांति आई, वह 2025-26 में एक नए चरण में है, तेज ग्रोथ की जगह अब रणनीतिक विस्तार ने ली है।
JioHotstar, फरवरी 2025 में JioCinema और Disney+ Hotstar के विलय से बना यह प्लेटफॉर्म, IPL 2025 तक 30 करोड़ सब्सक्राइबर तक पहुंचा और मार्च 2026 तक MAU 55 करोड़ (550 मिलियन) हो गए। IPL 2026 ने नए रिकॉर्ड बनाए, ओपनिंग वीकेंड में ही 51.5 करोड़ दर्शकों तक रीच (reach) बनी, वॉच-टाइम 2025 के मुकाबले 26% बढ़ा, और लीग स्टेज के दौरान cumulative रीच 1.1 अरब पार कर गई (IPL 2025 की फाइनल रीच 1.19 अरब थी)। डिजिटल रीच 15%, CTV रीच 25% और रीजनल लैंग्वेज वॉच-टाइम 42% बढ़ा। JioHotstar का FY26 में परिचालन राजस्व ₹31,048 करोड़ और PBT ₹3,228 करोड़ रहा।
Amazon Prime Video के भारत में करीब 2.5-3 करोड़ पेड सब्सक्राइबर हैं। Netflix के भारत में 2 करोड़ (20 मिलियन) पेड सब्सक्राइबर हो गए हैं, जो 2021 के महज 55 लाख से काफी वृद्धि है। Netflix का भारत में राजस्व 2025 में $905 मिलियन (लगभग ₹7,600 करोड़) तक पहुंचने का HSBC का अनुमान था।
OTT का मुद्रीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। Ormax OTT Audience Report 2025 के अनुसार कुल OTT यूजर्स 60.1 करोड़ के पार हैं, लेकिन active paid subscriptions केवल 14.82 करोड़ हैं, बाकी बड़ी संख्या मुफ्त या विज्ञापन-सहित कंटेंट पर निर्भर है।
AVOD बनाम SVOD का संघर्ष अब और स्पष्ट है। Amazon Prime Video ने 2025 में भारत में विज्ञापन-सहित बेस प्लान शुरू किया। Statista के अनुसार भारत का OTT वीडियो बाजार 2026 में $4.96 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक $6.76 अरब होने की संभावना है।
बड़ी फिल्में: थिएटर की असली लाइफलाइन
थिएटर बिजनेस का एक कड़वा सच यह है कि वह अब कुछ बड़ी इवेंट फिल्मों पर टिका है।
2024 की टॉप फिल्में: 'पुष्पा 2: द रूल' ₹1,403 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) के साथ सबसे बड़ी हिट रही। 'कल्कि 2898 AD' लगभग ₹758 करोड़ और 'स्त्री 2' ₹740 करोड़ डोमेस्टिक ग्रॉस पर रहीं।
2025 की टॉप फिल्में: 'धुरंधर' (₹950 करोड़) ने अब तक की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड बनाया, 'स्त्री 2' के ₹698 करोड़ के आंकड़े को पार करते हुए। 'कांतारा: ए लेजेंड चैप्टर 1' और 'छावा' भी ₹500 करोड़+ क्लब में रहीं। 'सैयारा', 'कूली' और एनिमेटेड फिल्म 'महावतार नरसिम्हा' ₹300 करोड़+ पर रहीं।
2026 की शुरुआत: 'धुरंधर: द रिवेंज' (मार्च 2026) ने ₹1,375 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) कमाकर हिंदी फिल्मों का नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया, वर्ल्डवाइड यह ₹1,813 करोड़ ($200 मिलियन+) तक पहुंची।
हिंदी सिनेमा के लिए उल्लेखनीय बात: 2025 में 93% हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मूल हिंदी फिल्मों से आया, डब दक्षिण भारतीय फिल्मों पर निर्भरता 31% (2024) से घटकर मात्र 7% रह गई।
मिड-बजट सिनेमा: OTT ने छीना, OTT ने दिया
20-80 करोड़ बजट वाली फिल्मों की कहानी सबसे दिलचस्प है। कोविड के बाद के कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स ने इन फिल्मों के लिए "गारंटीड डील" दी, रिलीज से पहले ही पैसे मिल जाते थे। इससे निर्माता थिएटर रिलीज का जोखिम उठाने से बचने लगे।
लेकिन 2025 में पासा पलटा। OTT प्लेटफॉर्म्स अब ज्यादा सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं। उन्होंने थिएटर-अप्रूव्ड फिल्मों को तरजीह देनी शुरू की है, जिसका मतलब है कि अच्छा थिएटरी प्रदर्शन OTT डील की कीमत बढ़ाता है। 'धुरंधर: द रिवेंज' जैसी फिल्म के डिजिटल अधिकार JioHotstar ने ₹150 करोड़ में खरीदे, जो पहली फिल्म से लगभग दोगुना था। यह बदलाव मिड-बजट फिल्मों को एक बार फिर थिएटर रिलीज की ओर धकेल रहा है।
थिएटरी विंडो: अदृश्य युद्ध जारी है
पहले फिल्में थिएटर में 8-12 हफ्ते रहती थीं। कोविड के बाद यह खिड़की सिकुड़ी। आज स्थिति यह है:
हिंदी फिल्में आम तौर पर 6-8 हफ्ते बाद OTT पर आती हैं, लेकिन कमजोर फिल्में कभी-कभी 4 हफ्ते में ही चली जाती हैं। तेलुगु और तमिल इंडस्ट्री में 3-4 हफ्ते की विंडो सामान्य हो चुकी है।
मल्टीप्लेक्स चेन्स इसका विरोध कर रही हैं। कई बड़े मल्टीप्लेक्स ने 8 हफ्ते से कम विंडो वाली फिल्मों को स्क्रीन देने से मना कर दिया। 'धुरंधर: द रिवेंज' IPL 2026 की समाप्ति के बाद (मई-जून 2026) JioHotstar पर आने का अनुमान है, यानी करीब 10 हफ्ते की थिएटरी विंडो।
थिएटर अब 'अनुभव' बेच रहे हैं
जब कंटेंट OTT पर मिलने लगा, तो थिएटर ने रणनीति बदली, वे अब सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि अनुभव बेचते हैं। IMAX ने भारत में फरवरी 2025 तक 31 स्क्रीन स्थापित किए हैं और 14 और आने वाले हैं। 4DX, रिक्लाइनर स्क्रीन, Premium Large Format (PLF), ये सब प्रीमियम टिकट के साथ F&B राजस्व बढ़ाने का तरीका हैं। PVR INOX अब फिल्म रिलीज से ज्यादा F&B और प्रीमियम फॉर्मेट से कमाई करने की ओर बढ़ रही है।
रीजनल सिनेमा: असली विजेता
अगर कोई सबसे ज्यादा फायदे में रहा, तो वह है रीजनल सिनेमा। 2024 में मलयालम सिनेमा ने पहली बार ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया और बाजार हिस्सेदारी 5% से दोगुनी होकर 10% हो गई; 2025 में यह गति बनी रही। कन्नड़ सिनेमा 2025 की एकमात्र दक्षिण भारतीय भाषा रही जिसने फुटफॉल में वृद्धि दर्ज की। गुजराती सिनेमा ने 2025 में 189% की वृद्धि के साथ ₹242 करोड़ का आंकड़ा छुआ।
OTT पर भी रीजनल कंटेंट की मांग बढ़ी है। JioHotstar और Netflix दोनों ही क्षेत्रीय भाषाओं में ओरिजिनल कंटेंट पर जोर दे रहे हैं। 'मंजुम्मेल बॉयज' (मलयालम), 'कांतारा', 'RRR' जैसी फिल्मों ने दिखाया कि भाषा अब बाधा नहीं है।
विज्ञापन बाजार: डिजिटल का बोलबाला
Ipsos के अनुसार, FY2025 में भारत का कुल विज्ञापन बाजार ₹1,11,000 करोड़ पार कर गया, जिसमें डिजिटल का हिस्सा ₹49,000 करोड़ (44% share) रहा, 20% की वार्षिक वृद्धि के साथ। FY2026 में यह 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ (कुल खर्च का 46%) तक पहुंचने का अनुमान है। CTV विज्ञापन खर्च 2022 के ₹450 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2024 में ₹1,500 करोड़ हो गया, और 2025 में ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था, 2027 तक ₹3,500 करोड़ का लक्ष्य है।
थिएटर विज्ञापन भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन डिजिटल की तुलना में उनका हिस्सा अभी बहुत कम है।
अब केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, साथ काम करने का दौर
2025-26 के आंकड़े एक स्पष्ट तस्वीर देते हैं, OTT और थिएटर अब एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि एक ही इकोसिस्टम के दो हिस्से हैं। बड़ी स्पेक्टेकल फिल्में थिएटर के लिए हैं, वहां बड़ा पर्दा, IMAX, 4DX, और सामूहिक अनुभव का कोई विकल्प नहीं। मिड-बजट और सीरीज कंटेंट OTT का प्राकृतिक घर बन रहा है।
लेकिन चुनौतियां असली हैं। फुटफॉल 2019 से 19% नीचे है और गिरावट जारी है। टिकटों की बढ़ती कीमतों के दम पर ग्रोथ हासिल करने की भी एक सीमा है। OTT प्लेटफॉर्म्स के पास 60 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 14.82 करोड़ लोग ही पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेते हैं। वहीं, दूसरी तरफ सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की संख्या लगातार घट रही है और कई थिएटर बंद हो रहे हैं।
अगले पांच साल में जो इंडस्ट्री उभरेगा, वह न पुराना थिएटर-प्रधान होगा, न पूरी तरह OTT-केंद्रित। यह होगा एक हाइब्रिड एंटरटेनमेंट अर्थव्यवस्था, जिसमें सिनेमाघर प्रीमियम अनुभव केंद्र होंगे, और OTT रोज़ की कहानियों का घर।
Dentsu और IWMBuzz Media ने मिलकर ‘Stream Culture 2026’ नामक एक नई सांस्कृतिक और उद्योग विश्लेषण रिपोर्ट जारी की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
Dentsu और IWMBuzz Media ने मिलकर ‘Stream Culture 2026’ नामक एक नई सांस्कृतिक और उद्योग विश्लेषण रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट का अनावरण मुंबई में आयोजित dentsu-IWMBuzz Digital Awards के आठवें सीजन के दौरान किया गया। रिपोर्ट में भारत के स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में तेजी से हो रहे बदलावों का विश्लेषण किया गया है और बताया गया है कि बदलती दर्शक पसंद, नए बिजनेस मॉडल, उभरती तकनीकें और सांस्कृतिक रुझान किस तरह स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री का भविष्य तय कर रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री अब “कंटेंट की भरमार” वाले दौर से निकलकर “प्रासंगिकता” यानी रिलिवेंस के दौर में प्रवेश कर चुकी है। पिछले एक दशक में सस्ता इंटरनेट, स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच और बड़े पैमाने पर कंटेंट निर्माण ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े कंटेंट बाजारों में शामिल कर दिया। लेकिन अब जब प्लेटफॉर्म परिपक्व हो रहे हैं, दर्शकों की अपेक्षाएं बदल रही हैं और मुनाफा उद्योग की प्राथमिकता बन रहा है, तो सबसे बड़ी चुनौती अधिक कंटेंट बनाना नहीं रह गई है। अब असली चुनौती ऐसी कहानियां तैयार करना है जो लोगों का ध्यान आकर्षित करें, समुदाय बनाएं, संस्कृति को प्रभावित करें और रिलीज के बाद भी लंबे समय तक चर्चा में बनी रहें।
‘Stream Culture 2026’ रिपोर्ट में चार बड़े बदलावों के तहत 12 नए संकेतों की पहचान की गई है। इनमें ‘भारत कैसे देखता है’, ‘मूल्य कैसे पैदा होता है’, ‘संस्कृति कैसे यात्रा करती है’ और ‘कहानियां कैसे बदल रही हैं’ जैसे विषय शामिल हैं। रिपोर्ट का कहना है कि आज दर्शकों का व्यवहार, कहानी कहने का तरीका, तकनीक और बिजनेस प्रदर्शन एक-दूसरे से अलग नहीं देखे जा सकते। ये सभी मिलकर एक ऐसे इकोसिस्टम का निर्माण कर रहे हैं जो तय करता है कि कौन-सा कंटेंट खोजा जाएगा, किस पर चर्चा होगी, क्या याद रखा जाएगा और किसे सफलता मिलेगी।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों में कहा गया है कि भारतीय दर्शकों के पास समय की कमी नहीं है, बल्कि उनकी सहनशीलता कम हो गई है। यदि कोई कहानी उनसे जुड़ती है तो वे उसे देखने में घंटों लगा सकते हैं, लेकिन अगर कंटेंट उन्हें सामान्य, दोहराव वाला या कमजोर लगता है तो वे उसे कुछ ही मिनटों में छोड़ देते हैं।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि अब कंटेंट की खोज खुद कंटेंट अनुभव का हिस्सा बन गई है। दर्शक क्या देखेंगे, क्या आजमाएंगे और क्या साझा करेंगे, यह तय करने में कंटेंट क्रिएटर्स, ऑनलाइन कम्युनिटीज और सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाएं पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
एक और दिलचस्प निष्कर्ष यह है कि मोबाइल-फर्स्ट और वर्टिकल वीडियो देखने का चलन बढ़ने के बावजूद घर का लिविंग रूम फिर से स्ट्रीमिंग का सबसे मूल्यवान स्क्रीन बनकर उभर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि परिवार के साथ मिलकर कंटेंट देखने की आदत एक बार फिर मजबूत हो रही है।
रिपोर्ट के अनुसार क्षेत्रीय भाषाओं का कंटेंट अब सिर्फ एक वैकल्पिक श्रेणी नहीं रह गया है। यह तेजी से भारत की मुख्यधारा सांस्कृतिक चर्चा को आकार दे रहा है। टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहरों और कस्बों के दर्शक अब स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री की अगली विकास लहर को आगे बढ़ा रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब स्ट्रीमिंग उद्योग की अदृश्य लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बुनियाद बनता जा रहा है। कंटेंट निर्माण, पर्सनलाइजेशन, कंटेंट डिस्कवरी और दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने जैसे लगभग हर क्षेत्र में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
शोध का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह भी है कि स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री अब “रीच” से “रिलिवेंस” और “लॉन्च” से “लॉन्गेविटी” की ओर बढ़ रही है। यानी किसी कंटेंट की सफलता सिर्फ उसके लॉन्च के समय बने शोर, व्यूज या नए सब्सक्राइबर्स की संख्या से नहीं मापी जाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक भविष्य में सफलता इस बात से तय होगी कि कोई कहानी कितने समय तक चर्चा में बनी रहती है, कितने समर्पित प्रशंसक तैयार करती है और समाज तथा संस्कृति पर कितना स्थायी प्रभाव छोड़ती है। दूसरे शब्दों में, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए अब सिर्फ कंटेंट बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि ऐसा कंटेंट बनाना जरूरी होगा जो लोगों के साथ लंबे समय तक जुड़ा रहे और सांस्कृतिक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।
रिपोर्ट के लिंक:
डिजिटल वर्जन: https://www.dentsu.com/in/en/reports/asa_streamculture2026
ऑडियो वर्जन: https://www.youtube.com/watch?v=LeIqdXVHtCI
'जियोस्टार' (JioHotstar) ने समीर त्रिपाठी को प्रमोट करते हुए डायरेक्टर (LCS) नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
'जियोस्टार' (JioHotstar) ने समीर त्रिपाठी को प्रमोट करते हुए डायरेक्टर (LCS) नियुक्त किया है। समीर त्रिपाठी ने खुद इस नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की।
नई भूमिका में समीर त्रिपाठी कई तेजी से बढ़ते उपभोक्ता क्षेत्रों का नेतृत्व करेंगे। इनमें ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, ज्वेलरी और लाइफस्टाइल जैसी प्रमुख कैटेगरी शामिल हैं। कंपनी के लिए ये सेक्टर काफी अहम माने जा रहे हैं और आने वाले समय में इनके विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।
अपनी पदोन्नति पर खुशी जताते हुए समीर त्रिपाठी ने कहा कि ये सभी सेक्टर भारत के उपभोक्ता बाजार में तेजी से हो रहे बदलावों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह ब्रांड्स के साथ मिलकर स्ट्रीमिंग और डिजिटल इनोवेशन की ताकत के जरिए प्रभावशाली ग्रोथ स्टोरीज बनाने के लिए उत्साहित हैं।
इस पदोन्नति से पहले समीर त्रिपाठी JioHotstar में Associate Director के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने इस भूमिका में कंपनी के साथ महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके बाद उन्हें यह नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
JioHotstar से जुड़ने से पहले समीर त्रिपाठी ने दो साल से अधिक समय तक Viacom18 Media Private Limited में काम किया था। वहां भी उन्होंने मीडिया और डिजिटल बिजनेस से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अपनी भूमिका निभाई।
अपने करियर के शुरुआती दौर में समीर त्रिपाठी कई प्रतिष्ठित मीडिया और डिजिटल कंपनियों के साथ काम कर चुके हैं। उन्होंने MX Player, The Viral Fever (TVF), ABP News और Eenadu Publication Pvt. Ltd. जैसी संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
मीडिया, डिजिटल कंटेंट और ब्रांड सॉल्यूशंस के क्षेत्र में लंबे अनुभव के साथ समीर त्रिपाठी की यह पदोन्नति JioHotstar के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में उपभोक्ता-केंद्रित कई बड़े बिजनेस सेक्टरों में नई वृद्धि और नवाचार देखने को मिलेगा।
मुंबई में 11 जून को आयोजित e4m Play Streaming Media Awards के सातवें संस्करण में स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बेहतरीन काम को सम्मानित किया गया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मुंबई में 11 जून को आयोजित e4m Play Streaming Media Awards के सातवें संस्करण में स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बेहतरीन काम को सम्मानित किया गया। इस भव्य समारोह में कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रैंड्स, प्लेटफॉर्म्स और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स को उनके नवाचार, रचनात्मकता और प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग के लिए अवॉर्ड्स दिए गए।
इस साल के अवॉर्ड्स में JioHotstar, Sony LIV, Netflix, Arha Media Broadcasting Pvt Ltd, Jio Studios और Prime Video ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई बड़े अवॉर्ड्स अपने नाम किए। JioHotstar ने कंटेंट कैटेगरी में 5, टैलेंट कैटेगरी में 8 और ब्रैंड इंटीग्रेशन एवं मार्केटिंग कैटेगरी में 6 अवॉर्ड्स जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
वहीं JioHotstar के माइक्रो ड्रामा प्लेटफॉर्म Tadka ने भी शानदार प्रदर्शन किया। Tadka को कंटेंट कैटेगरी में 1 और टैलेंट कैटेगरी में 14 अवॉर्ड्स मिले। Sony LIV ने कंटेंट कैटेगरी में 6 और टैलेंट कैटेगरी में 16 अवॉर्ड्स जीतकर अपनी मजबूत स्थिति साबित की।
Netflix को कंटेंट कैटेगरी में 6 और टैलेंट कैटेगरी में 11 अवॉर्ड्स मिले। वहीं Arha Media Broadcasting Pvt Ltd ने कंटेंट कैटेगरी में 5, टैलेंट कैटेगरी में 3 और ब्रैंड इंटीग्रेशन एवं मार्केटिंग कैटेगरी में 3 अवॉर्ड्स अपने नाम किए। Prime Video ने कंटेंट कैटेगरी में 8 बड़े अवॉर्ड्स जीते, जबकि Jio Studios को कंटेंट कैटेगरी में 1 और टैलेंट कैटेगरी में 7 अवॉर्ड्स मिले।
अवॉर्ड्स नाइट में कई ब्रैंड्स और एजेंसियों को उनके प्रभावशाली मार्केटिंग कैंपेन के लिए सम्मानित किया गया। इनमें Ching's Secret (Tata Consumer Products), Purnima Advertising Agency Pvt. Ltd., Omnicom Media, White Turtle Studios – A Trailer Park Group Company, Piramal Consumer Healthcare, Jaquar & Company Pvt. Ltd., Crescent Communications Pvt. Ltd. और Zone Media प्रमुख रहे।
e4m Play Streaming Media Awards 2026 में Association of Mutual Funds in India (AMFI) के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर वेंकट नागेश्वर चालासानी (Venkat Nageswar Chalasani) ने मार्केटिंग जूरी चेयर की भूमिका निभाई।
वहीं प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और संपादक Rahul Rawail कंटेंट और टैलेंट कैटेगरी के जूरी चेयर रहे। इसके अलावा विज्ञापन, मीडिया और मार्केटिंग जगत के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ और इंडस्ट्री के लीडर जूरी का हिस्सा बने।
ग्राउंडब्रेकिंग शोज़, प्रभावशाली कैंपेन और दमदार स्टोरीटेलिंग के जरिए विजेताओं ने रचनात्मकता की नई सीमाएं तय कीं। इसी वजह से e4m Play Streaming Media Awards आज स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में बेहतरीन काम को सम्मानित करने वाले प्रमुख मंचों में से एक बन चुका है।
यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स प्रतिभाओं, कंटेंट, ब्रैंड्स और प्लेटफॉर्म्स को उनकी उत्कृष्टता, रचनात्मकता और नवाचार के लिए सम्मानित करते हैं। साथ ही यह उन लोगों को पहचान दिलाते हैं जो इंडस्ट्री में नए मानक स्थापित कर रहे हैं और स्ट्रीमिंग मीडिया के भविष्य को आकार देने वाले विचारों और उपलब्धियों को सामने ला रहे हैं।
यहां देखें विजेताओं की पूरी सूची-

यह बदलाव सिर्फ कंटेंट सुझाने तक सीमित नहीं है, AI अब डबिंग, विज्ञापन, कंटेंट निर्माण और यहां तक कि किसी शो की सफलता का अनुमान लगाने तक पहुंच चुका है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जब Netflix पर लाखों घंटे का कंटेंट मौजूद हो, Amazon Prime पर हजारों फिल्में और सीरीज उपलब्ध हों और JioHotstar पर क्रिकेट से लेकर वेब सीरीज तक का अंबार लगा हो, तो सवाल उठता है: आखिर दर्शक क्या देखेगा, यह फैसला कौन करता है? 2026 में इस सवाल का जवाब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बनता जा रहा है और यह बदलाव सिर्फ कंटेंट सुझाने तक सीमित नहीं है, AI अब डबिंग, विज्ञापन, कंटेंट निर्माण और यहां तक कि किसी शो की सफलता का अनुमान लगाने तक पहुंच चुका है।
OTT का बढ़ता साम्राज्य
पहले यह समझना जरूरी है कि OTT इंडस्ट्री किस रफ़्तार से बढ़ रहा है। Research and Markets की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक OTT स्ट्रीमिंग बाजार 2025 में $221 अरब से बढ़कर 2026 में $264.85 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, यानी एक साल में करीब 19.8% की वृद्धि। 2030 तक यह बाजार $551 अरब से भी अधिक हो जाएगा। इस विशाल और तेजी से बदलते बाजार में AI एक निर्णायक हथियार बनता जा रहा है।
AI रिकमेंडेशन: अब AI तय करता है आपकी पसंद
OTT प्लेटफॉर्म्स पर AI का सबसे व्यापक और प्रभावशाली उपयोग कंटेंट रिकमेंडेशन में हो रहा है। Netflix, Amazon Prime Video, YouTube और JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म AI की मदद से दर्शक की देखने की आदतें, पसंदीदा जॉनर, देखने का समय और यहां तक कि कहां वीडियो रोका गया, इन सभी डेटा बिंदुओं का विश्लेषण करते हैं।
परिणाम चौंकाने वाले हैं। DigitalDefynd की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, Netflix पर देखे जाने वाले कुल कंटेंट का लगभग 80% हिस्सा AI-संचालित रिकमेंडेशन इंजन के जरिए आता है और यह इंजन कंपनी को हर साल 1 अरब डॉलर से अधिक की बचत करता है, क्योंकि जब दर्शक को मनपसंद कंटेंट मिलता है, तो वह सब्सक्रिप्शन नहीं छोड़ता।
2026 में AI रिकमेंडेशन इंजन और भी परिष्कृत हो गए हैं। अब ये सिस्टम सिर्फ देखने का इतिहास नहीं, बल्कि दर्शक के मूड, दिन का समय, और यहां तक कि जेन-अल्फा जैसी नई पीढ़ी की बदलती प्राथमिकताओं का भी विश्लेषण करते हैं।
AI डबिंग: भाषा की दीवारें टूट रही हैं
OTT की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से भाषा रही है। एक कोरियन थ्रिलर या स्पैनिश ड्रामा को हिंदी या तेलुगु दर्शकों तक पहुंचाने में पहले हफ्तों का समय और लाखों रुपये खर्च होते थे। AI ने यह समीकरण बदल दिया है।
Research and Markets की रिपोर्ट के अनुसार AI डबिंग टूल्स बाजार 2025 में $1.15 अरब था, जो 2026 में 17.7% की दर से बढ़कर $1.35 अरब तक पहुंच गया है। 2030 तक इसके $2.56 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। आज के प्रमुख AI डबिंग सिस्टम 140 से अधिक भाषाओं में काम करते हैं और 93% मामलों में lip-sync सटीकता हासिल कर लेते हैं।
Amazon ने मार्च 2025 में Prime Video पर AI तकनीक से डबिंग का पायलट प्रोग्राम लॉन्च किया, जिसमें 12 लाइसेंस्ड फिल्मों और सीरीज को अंग्रेजी और लैटिन अमेरिकी स्पेनिश में डब किया गया। AWS का पार्टनर CAMB.AI 140 से अधिक भाषाओं में भावनाओं को समझने वाली बहुभाषी डबिंग की सुविधा प्रदान करता है। Netflix भी AI की मदद से संचालित कार्यप्रणालियों के जरिए स्थानीय भाषाओं के अनुसार सबटाइटल तैयार करना और प्रचार-प्रसार से जुड़ी सामग्री को कई भाषाओं में तैयार करने के लिए AI का उपयोग बढ़ा रहा है।
भारत के संदर्भ में यह बेहद महत्वपूर्ण है, जहां 22 संविधान-मान्य भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ हैं, AI-डबिंग क्षेत्रीय कंटेंट को राष्ट्रीय और वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का सबसे किफायती जरिया बन रही है।
सबटाइटल और एक्सेसिबिलिटी: मिनटों में काम
पहले किसी फिल्म की सबटाइटल फाइल तैयार करने में कई दिन लग जाते थे। अब AI की मदद से आवाज को टेक्स्ट में बदलने की तकनीक और स्वचालित कैप्शन निर्माण टूल्स यह काम कुछ मिनटों में कर देते हैं। YouTube पर हर मिनट 500 घंटे से अधिक कंटेंट अपलोड होता है, और AI auto-captioning इस विशाल कंटेंट को सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
यह बदलाव सिर्फ सुविधा के लिए नहीं है, यह करोड़ों श्रवण-बाधित दर्शकों के लिए भी जरूरी है। AI सबटाइटलिंग से कंटेंट वितरण की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, और AI आधारित डबिंग उपकरण के इस्तेमाल से मीडिया टीमें बिना अतिरिक्त स्टाफ के बड़े कार्यभार संभाल पा रही हैं।
AI और कंटेंट निर्माण: रचनात्मकता का नया आयाम
सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद सवाल यह है: क्या AI कंटेंट भी बनाएगा? आज AI स्क्रिप्ट के आइडिया, सिनॉप्सिस, ट्रेलर, थंबनेल और पोस्टर डिजाइन में पहले से उपयोग हो रहा है। कई प्लेटफॉर्म AI की मदद से कंटेंट की जानकारी तैयार करने, उसे टैग करने और एडिटिंग प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने का काम कर रहे हैं।
लेकिन इसके साथ ही लेखकों, एडिटर्स और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स की चिंताएँ भी बढ़ रही हैं। क्या एल्गोरिद्म-जनरेटेड कंटेंट मानवीय भावनाओं को उतनी ही गहराई से छू सकता है? क्या AI रचनात्मकता को एक फॉर्मूले में बदल देगा? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं, लेकिन इंडस्ट्री जगत में बहस तेज है।
विज्ञापन का नया चेहरा: AI-powered Ad Targeting
OTT प्लेटफॉर्म्स का एक बड़ा राजस्व स्रोत विज्ञापन बनता जा रहा है, और यहां AI ने पूरी तरह क्रांति ला दी है। 2026 में अमेरिका में अकेला प्रोग्रामेटिक डिस्प्ले विज्ञापन खर्च $203 अरब से अधिक पहुंचने का अनुमान है (Basis/eMarketer), और वैश्विक स्तर पर प्रोग्रामेटिक अब कुल डिजिटल डिस्प्ले विज्ञापन का लगभग 90% हिस्सा है।
CTV/OTT विज्ञापन के क्षेत्र में 2026 में 50% खरीद programmatic ढंग से होने की उम्मीद है। Advertiser Perceptions और Premion के एक survey के अनुसार 70% CTV विज्ञापनदाता 2026 में अपना खर्च औसतन 17% बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। AI की मदद से dynamic ad insertion संभव हो गई है, यानी एक ही मैच देख रहे दो दर्शकों को उनकी रुचि और व्यवहार के आधार पर पूरी तरह अलग-अलग विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं।
छोटे क्रिएटर्स को फायदा या नुकसान?
AI और एल्गोरिद्म का एक बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे बड़े स्टूडियो और बड़े बजट का कंटेंट और ज्यादा प्रमोट होगा, जबकि स्वतंत्र और छोटे निर्माताओं का कंटेंट दब जाएगा? यह चिंता वाजिब है। लेकिन दूसरी तरफ, AI टूल्स ने छोटे क्रिएटर्स को भी professional-grade डबिंग, सबटाइटल और marketing automation की सुविधा दी है, जो पहले उनकी पहुंच से बाहर थी। संतुलन कैसे बनाया जाए, यह 2026 का सबसे अहम नीतिगत सवाल है।
AI के खतरे: जब तकनीक दोधारी तलवार बने
हर तकनीक की तरह AI भी जोखिम से खाली नहीं है। OTT और मीडिया के संदर्भ में कुछ प्रमुख चुनौतियाँ हैं:
Deepfake और भ्रामक कंटेंट: International AI Safety Report 2026 के अनुसार AI-जनरेटेड डीपफेक्स वीडियो तेजी से यथार्थवादी होते जा रहे हैं और इन्हें पहचानना कठिन होता जा रहा है, एक अध्ययन में पाया गया कि लोग AI-जनरेटेड आवाजें 80% मामलों में असली समझ लेते हैं।
Filter Bubble: जब AI दर्शक को वही दिखाता रहे जो वह पहले से पसंद करता है, तो वह एक सूचना के बुलबुले में बंद हो जाता है। नई सोच, नए विचार और अलग दृष्टिकोण उस तक नहीं पहुंच पाते।
Algorithm Bias: अगर AI का प्रशिक्षण डेटा पक्षपातपूर्ण है, तो रिकमेंडेशन भी पक्षपातपूर्ण होंगी। यह सांस्कृतिक विविधता के लिए बड़ा खतरा है।
Copyright और Data Privacy: AI-generated content में copyright का मुद्दा अभी पूरी तरह अनसुलझा है। साथ ही, दर्शकों के व्यक्तिगत डेटा का उपयोग किस हद तक उचित है, यह बहस जारी है।
भविष्य की झलक: AI-संचालित OTT कैसा दिखेगा?
2026 OTT और AI के गठजोड़ का सिर्फ शुरुआती अध्याय है। आने वाले वर्षों में अत्यधिक व्यक्तिगत (हाइपर-पर्सनलाइज्ड) होमपेज, रियल-टाइम बहुभाषी स्ट्रीमिंग, आवाज़ के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा और AI-संचालित इंटरैक्टिव कंटेंट आम हो जाएंगे। AI द्वारा तैयार किए गए ट्रेलर्स का इस्तेमाल पहले से ही शुरू हो चुका है। साथ ही, व्यक्तिगत पसंद के अनुरूप विज्ञापन दिखाने वाला विज्ञापन इकोसिस्टम भी और अधिक उन्नत एवं प्रभावी होगा।
लेकिन इस बदलाव के साथ जिम्मेदारी भी है। जो प्लेटफॉर्म्स AI को सिर्फ मुनाफे का औजार बनाएंगे, वे दर्शकों का भरोसा खोएंगे। जो इसे दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने, विविधता को बढ़ाने और रचनात्मकता को सशक्त करने के लिए इस्तेमाल करेंगे, वे मनोरंजन की दुनिया पर राज करेंगे।
OTT का भविष्य AI से होकर गुजरता है, यह तय है। सवाल सिर्फ यह है कि इस रास्ते पर हम किस दिशा में चलते हैं।
कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रैंड्स, प्लेटफॉर्म्स और प्रोफेशनल्स को सम्मानित करने के लिए e4m Play Streaming Media Awards 2026 का आयोजन 11 जून को किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उत्कृष्ट काम करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रैंड्स, प्लेटफॉर्म्स और प्रोफेशनल्स को सम्मानित करने के लिए e4m Play Streaming Media Awards 2026 का आयोजन 11 जून को किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स उन लोगों और संस्थाओं की उपलब्धियों को पहचान देने के लिए आयोजित किए जाते हैं, जिन्होंने अपने नवाचार, रचनात्मकता और दमदार स्टोरीटेलिंग के जरिए इंडस्ट्री पर खास प्रभाव छोड़ा है।
वर्षों से e4m Play Streaming Media Awards स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में बेहतरीन काम को सम्मानित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। ओरिजिनल कंटेंट, प्रभावशाली कैंपेन, नई प्लेटफॉर्म रणनीतियों और ऑडियंस एंगेजमेंट से जुड़ी पहल तक, ये अवॉर्ड्स उन प्रयासों को सामने लाते हैं जो तेजी से बदलती डिजिटल एंटरटेनमेंट दुनिया को नई दिशा दे रहे हैं।
यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रतिभाओं, कंटेंट, ब्रैंड्स और प्लेटफॉर्म्स की उत्कृष्टता, रचनात्मकता और नवाचार का जश्न मनाता है। मीडिया, एंटरटेनमेंट, विज्ञापन और स्ट्रीमिंग सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ियों को एक साथ लाते हुए e4m Play Streaming Media Awards 2026 उन लोगों और संगठनों को सम्मानित करेगा जो इंडस्ट्री में नए मानक स्थापित कर रहे हैं।
OTT प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स से लेकर मार्केटिंग एजेंसियों और इनोवेटर्स तक, e4m Play Streaming Media Awards की विभिन्न श्रेणियां इस इंडस्ट्री की विविधता और गतिशीलता को दर्शाती हैं। इस वर्ष, AMFI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) Venkat Nageswar Chalasani मार्केटिंग ज्यूरी चेयर रहे, जबकि फिल्म निर्देशक और एडिटर Rahul Rawail टैलेंट और कंटेंट श्रेणियों के ज्यूरी चेयर रहे। इसके अलावा विज्ञापन, मीडिया और मार्केटिंग जगत के कई प्रतिष्ठित नेता और विशेषज्ञ भी ज्यूरी का हिस्सा रहे।
कल आयोजित होने वाली यह भव्य अवॉर्ड्स नाइट टैलेंट और इनोवेशन का जश्न मनाएगी। साथ ही उन विचारों और उपलब्धियों को भी सामने लाएगी जो स्ट्रीमिंग मीडिया के भविष्य को आकार दे रहे हैं।
दुनिया की प्रमुख स्ट्रीमिंग कंपनी नेटफ्लिक्स ने अपने बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर जय होग को बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुनिया की प्रमुख स्ट्रीमिंग कंपनी नेटफ्लिक्स ने अपने बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर जय होग को बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। जय होग, नेटफ्लिक्स के को-फाउंडर व पूर्व चेयरमैन रीड हेस्टिंग्स की जगह लेंगे।
रीड हेस्टिंग्स ने अप्रैल में घोषणा की थी कि वह नेटफ्लिक्स के बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं। जय होग ग्रोथ इक्विटी फर्म TCV (Technology Crossover Ventures) के को-फाउंडर हैं। उनकी कंपनी लंबे समय से नेटफ्लिक्स में निवेशक रही है और कंपनी के विकास के सफर में अहम भूमिका निभाती रही है।
जय होग का नेटफ्लिक्स से जुड़ाव भी काफी पुराना है। वह वर्ष 1999 से नेटफ्लिक्स के बोर्ड का हिस्सा हैं और पिछले एक दशक से अधिक समय से लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
नेटफ्लिक्स के अलावा जय होग अन्य प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं। वह Zillow Group और Peloton Interactive के बोर्ड सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
कंपनी का मानना है कि नेटफ्लिक्स के साथ उनके लंबे अनुभव और नेतृत्व क्षमता से बोर्ड को नई दिशा मिलेगी और कंपनी की भविष्य की रणनीतियों को मजबूती मिलेगी।
प्रसार भारती के डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म WAVES OTT ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रसार भारती के डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म WAVES OTT ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। नवंबर 2024 में शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म ने अब 1 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने कहा कि यह उपलब्धि देश के सार्वजनिक डिजिटल मीडिया इकोसिस्टम के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय के अनुसार, यह सफलता इस बात का संकेत है कि भारत और दुनिया भर के दर्शक भरोसेमंद, समावेशी और विविधतापूर्ण कंटेंट उपलब्ध कराने वाले स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म को तेजी से अपना रहे हैं।
मंत्रालय ने बताया कि WAVES OTT के पास अब 1 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जबकि इसके डाउनलोड्स की संख्या 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा हो चुकी है। अब प्लेटफॉर्म अपने विकास के अगले चरण पर फोकस कर रहा है।
इस अगले चरण में कंटेंट साझेदारियों का विस्तार, विभिन्न डिवाइस और प्लेटफॉर्म पर पहुंच बढ़ाना, क्षेत्रीय और शैक्षणिक कंटेंट को और मजबूत करना शामिल है। साथ ही मार्च 2027 तक 2 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स का लक्ष्य भी रखा गया है।
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसार भारती ने कहा कि यह सफलता डिजिटल युग में सार्वजनिक सेवा मीडिया की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है। साथ ही यह उस सोच को भी सही साबित करती है, जिसके तहत टेलीविजन, रेडियो, ऑन-डिमांड कंटेंट, शिक्षा, संस्कृति और विरासत से जुड़ी सामग्री को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।
WAVES OTT पर फिलहाल 24 हजार से अधिक कंटेंट टाइटल और 15 हजार घंटे से ज्यादा कंटेंट उपलब्ध है। इसमें मनोरंजन, समाचार, शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और जनसेवा से जुड़ी सामग्री शामिल है।
यह प्लेटफॉर्म 140 से अधिक लाइव टीवी चैनल, 200 से ज्यादा रेडियो सेवाएं, लाइव इवेंट स्ट्रीमिंग, PM eVidya चैनलों के जरिए शैक्षणिक कंटेंट और प्रसार भारती के हजारों घंटे के आर्काइव कंटेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।
प्रसार भारती का मानना है कि WAVES OTT की यह उपलब्धि भारत में डिजिटल सार्वजनिक मीडिया की बढ़ती ताकत और स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रति बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।