ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की सलाह दी है।
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Vikas Saxena
ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों के बीच विदेश मंत्रालय (MEA) ने लोगों को फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स से सावधान रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि कुछ लोग खुद को मंत्रालय का सलाहकार बताकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं और उनसे पैसे भी वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट कथित तौर पर हैक होने का मामला भी सामने आया है, जिसमें उनके नाम पर लोगों से पैसे मांगे गए।
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक फैक्ट-चेक हैंडल के जरिए जारी एडवाइजरी में कहा कि कुछ लोग सोशल मीडिया पर अपनी पहचान गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। ये लोग दावा कर रहे हैं कि वे व्यापार, माइग्रेशन और अन्य नीतिगत मामलों पर विदेश मंत्रालय को सलाह देते हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, कुछ फर्जी अकाउंट्स मंत्रालय के साथ काम करने का तरीका बताने के नाम पर पेड सेशन (पैसे लेकर सलाह देने वाले सत्र) भी चला रहे हैं और लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने साफ कहा कि इन लोगों का मंत्रालय से कोई संबंध नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी दावों और अकाउंट्स से सतर्क रहें तथा किसी भी आधिकारिक जानकारी या सहायता के लिए केवल सरकार के सत्यापित (Verified) प्लेटफॉर्म और आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें।
भाजपा सांसद संबित पात्रा के नाम से पत्रकार को आया फेक मैसेज
विदेश मंत्रालय की इस चेतावनी के बीच भाजपा सांसद संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट कथित तौर पर हैक होने का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि हैकर ने उनके अकाउंट का इस्तेमाल कर उनके दोस्तों, परिचितों और समर्थकों को आर्थिक मदद के नाम पर संदेश भेजे।
इस मामले का खुलासा रविवार को बिहार के वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूबर अजीत अंजुम ने फेसबुक पर किया। उन्होंने बताया कि उन्हें संबित पात्रा के वॉट्सऐप नंबर से एक संदेश मिला, जिसमें लिखा था, "हैलो, मुझे थोड़ी मदद चाहिए।"
अजीत अंजुम ने बताया कि पहले उन्हें हैरानी हुई कि एक सांसद उनसे आर्थिक मदद क्यों मांग रहे हैं, जबकि दोनों के बीच पिछले पांच-सात वर्षों से कोई बातचीत नहीं हुई थी। उन्होंने वॉट्सऐप कॉल करके पुष्टि करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद उसी नंबर से एक क्यूआर कोड भेजा गया और 65 हजार रुपये ट्रांसफर करने के लिए कहा गया। इसके बाद उन्हें शक हुआ कि संबित पात्रा का वॉट्सऐप अकाउंट हैक हो गया है और कोई ठग उनके नाम का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे मांग रहा है।
अजीत अंजुम ने अपनी X पोस्ट के साथ कथित वॉट्सऐप चैट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक संबित पात्रा की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल ठग फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाने के साथ-साथ WhatsApp अकाउंट हैक कर परिचित लोगों से पैसे मांगने जैसे तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में अगर किसी परिचित के नाम से अचानक पैसे मांगने का संदेश मिले, तो बिना पुष्टि किए कोई भी भुगतान न करें। पहले संबंधित व्यक्ति से फोन कॉल या किसी अन्य माध्यम से संपर्क कर यह सुनिश्चित कर लें कि संदेश वास्तव में उसी ने भेजा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ती ऐसी घटनाओं को देखते हुए लोगों को अधिक सतर्क रहने और केवल आधिकारिक व सत्यापित स्रोतों पर ही भरोसा करने की जरूरत है।
जॉय बोस के पास वैश्विक संगठनों में वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी, कैपेबिलिटी सिस्टम्स और टेक्नोलॉजी-लेड ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में करीब दो दशक का अनुभव है।
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Samachar4media Bureau
डॉ. जॉय बोस (Dr. Joie Bose) को कैपजेमिनी (Capgemini) में डायरेक्टर (Director) के पद पर प्रमोट किया गया है। वह पिछले तीन वर्षों से कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं। इससे पहले वह स्ट्रैटेजी एंड ट्रांसफॉर्मेशन लीडर (Strategy & Transformation Leader) की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।
जॉय बोस के पास वैश्विक संगठनों में वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी, कैपेबिलिटी सिस्टम्स और टेक्नोलॉजी-लेड ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में करीब दो दशक का अनुभव है। वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट कलकत्ता (IIM Calcutta) की भी पूर्व छात्रा हैं।
उन्होंने स्विस स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मैनेजमेंट, जिनेवा (Swiss School of Business and Management, Geneva) से डॉक्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (Doctor of Business Administration) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने यह डिग्री summa cum laude के साथ पूरी की।
कैपजेमिनी में अपनी नई भूमिका में जॉय बोस कंपनी के साथ अपने रणनीतिक और ट्रांसफॉर्मेशन अनुभव का इस्तेमाल करते हुए संगठन के नेतृत्व और बिजनेस पहलों में योगदान देंगी। उनका अनुभव खासतौर पर वर्कफोर्स रणनीति और तकनीक आधारित बदलाव के क्षेत्रों से जुड़ा रहा है।
यूट्यूब (YouTube) 24 अगस्त से व्यू गिनने का तरीका बदल रहा है। अब वीडियो की पहली फ्रेम शुरू होते ही उसे एक व्यू माना जाएगा, लेकिन कमाई के नियम नहीं बदलेंगे।
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यूट्यूब (YouTube) 24 अगस्त से वीडियो के व्यू गिनने का तरीका बदलने जा रहा है। नए नियम के तहत वीडियो चलना शुरू होते ही, यानी उसकी पहली फ्रेम दिखाई देने के साथ ही एक व्यू गिना जाएगा। यह बदलाव दुनियाभर में सभी वीडियो फॉर्मेट पर लागू होगा।
अब तक अलग-अलग वीडियो फॉर्मेट के लिए व्यू गिनने के तरीके में अंतर था। नए सिस्टम के जरिए यूट्यूब इस प्रक्रिया को एक जैसा बनाना चाहता है। यह तरीका शॉर्ट्स (Shorts) के लिए पिछले साल शुरू किए गए व्यू काउंटिंग सिस्टम के अनुरूप होगा।
नए नियम के बाद क्रिएटर्स के वीडियो के कुल व्यूज पहले की तुलना में तेजी से बढ़ते दिखाई दे सकते हैं। कंपनी का कहना है कि इससे क्रिएटर्स को अपनी पहुंच समझने और ब्रांड पार्टनर्स व स्पॉन्सर्स के सामने अपने स्तर को बताने में आसानी होगी।
हालांकि, सबसे अहम बात यह है कि इस बदलाव का क्रिएटर्स की कमाई या यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YouTube Partner Program) की पात्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यूट्यूब पुराने व्यू मेट्रिक को अब “एंगेज्ड व्यूज” (Engaged Views) के नाम से उपलब्ध रखेगा। यह डेटा यूट्यूब एनालिटिक्स के एडवांस्ड मोड में देखा जा सकेगा और इससे पता चलेगा कि कितने दर्शकों ने वीडियो को आगे भी देखना जारी रखा।
कमाई के लिए “एंगेज्ड शॉर्ट्स व्यूज” और “एंगेज्ड वॉच ऑवर्स” ही आधार बने रहेंगे। यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होने की मौजूदा शर्तों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। कंपनी कुछ दूसरे मेट्रिक्स के नाम भी बदल रही है। “Valid public Shorts views” को अब “Qualified Shorts views” और “Valid public watch hours” को “Qualified watch hours” कहा जाएगा।
मेटा (Meta) के खिलाफ अमेरिका में बड़ा मुकदमा शुरू हो रहा है। कंपनी पर फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) को बच्चों के लिए लत लगाने वाला बनाने का आरोप है।
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मेटा (Meta) के लिए अमेरिका में मंगलवार, 18 अगस्त से एक बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू होने जा रही है। कैलिफोर्निया की संघीय अदालत में होने वाली सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि क्या फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) को जानबूझकर इस तरह डिजाइन किया गया था कि बच्चे और किशोर इन प्लेटफॉर्म्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करें।
यह मामला 2023 में 29 अमेरिकी राज्यों के अटॉर्नी जनरल की ओर से दायर मुकदमे से जुड़ा है। फिलहाल कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी के आरोपों पर सुनवाई होगी। राज्यों का आरोप है कि मेटा ने ऐसे फीचर्स तैयार किए, जो कम उम्र के यूजर्स को प्लेटफॉर्म पर ज्यादा समय बिताने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही कंपनी पर युवाओं के लिए संभावित जोखिमों के बारे में यूजर्स को गुमराह करने का भी आरोप है।
राज्यों का एक अन्य आरोप है कि मेटा ने 13 साल से कम उम्र के बच्चों की निजी जानकारी माता-पिता की अनुमति के बिना जुटाई। यह संघीय बाल गोपनीयता नियमों का उल्लंघन बताया गया है। हालांकि, मेटा ने सभी आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उसने कम उम्र के यूजर्स की सुरक्षा के लिए कई उपाय और टूल तैयार किए हैं।
इस मामले में आर्थिक दांव भी बहुत बड़ा है। मेटा के वकीलों ने चेतावनी दी है कि राज्यों की कानूनी व्याख्या के आधार पर कंपनी पर करीब 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, कानूनी जानकारों ने इतनी बड़ी राशि के वास्तव में लगाए जाने पर सवाल उठाए हैं।
मामले की सुनवाई कई हफ्तों तक चल सकती है। इसमें मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) और इंस्टाग्राम प्रमुख एडम मोसेरी (Adam Mosseri) जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की गवाही भी हो सकती है।
बीजेपी (BJP) ने अपनी राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम में बदलाव करते हुए दीपक म्हास्के (Deepak Mhaske) को नया सोशल मीडिया संयोजक नियुक्त किया है।
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बीजेपी (BJP) ने अपनी राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम में बदलाव करते हुए दीपक म्हास्के (Deepak Mhaske) को पार्टी का नया सोशल मीडिया संयोजक (Social Media Convener) बनाया है। वह अमित मालवीय (Amit Malviya) की जगह यह जिम्मेदारी संभालेंगे। पार्टी ने यह बदलाव ऐसे समय किया है, जब कई राज्यों में चुनाव होने हैं।
दीपक म्हास्के सोशल मीडिया के सह-संयोजकों प्रीति गांधी (Priti Gandhi), शिवानंद द्विवेदी (Shivanand Dwivedi), आलोक भट्ट (Alok Bhatt) और अरुण यादव (Arun Yadav) के साथ काम करेंगे।
पार्टी ने अनिल बालूनी (Anil Baluni) को मीडिया और कम्युनिकेशन रणनीति की जिम्मेदारी भी सौंपी है। उन्हें मीडिया कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। उनके साथ ज्वाइंट कोऑर्डिनेटर के तौर पर आशीष उषा अग्रवाल (Ashish Usha Agarwal), प्रदीप भंडारी (Pradeep Bhandari) और सिद्धार्थ यादव (Siddharth Yadav) काम करेंगे।
छत्तीसगढ़ के रायपुर से आने वाले दीपक म्हास्के ने इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री हासिल की है। वह करीब 15 वर्षों से बीजेपी के आईटी और सोशल मीडिया से जुड़े कामकाज में सक्रिय हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के डिजिटल अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन चुनावों में पार्टी को जीत भी मिली।
दीपक म्हास्के कृषि पृष्ठभूमि वाले परिवार से आते हैं और पहली पीढ़ी के बीजेपी नेता हैं। उनके भाई तेज प्रताप म्हास्के (Tej Pratap Mhaske) आरएसएस (RSS) से जुड़े हुए हैं। दीपक म्हास्के ने खुद कभी चुनाव नहीं लड़ा है।
X की योजना के मुताबिक, जहां संभव होगा वहां ऐसे अनुरोध करने वाली सरकारी एजेंसी और कार्रवाई के लिए दिए गए कानूनी आधार या वजह की जानकारी भी साझा की जाएगी।
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एलन मस्क (Elon Musk) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सरकारी दखल को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि सरकारों की ओर से कंटेंट हटाने या उस पर रोक लगाने के लिए किए जाने वाले अनुरोध अब यूजर्स को ज्यादा साफ तौर पर दिखाई देंगे।
मस्क ने 15 अगस्त को X पर एक पोस्ट में कहा कि सरकारों की ओर से मांगी जाने वाली सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई देगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यूजर्स यह देख सकेंगे कि किसी सरकारी एजेंसी ने किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है या नहीं।
X की योजना के मुताबिक, जहां संभव होगा वहां ऐसे अनुरोध करने वाली सरकारी एजेंसी और कार्रवाई के लिए दिए गए कानूनी आधार या वजह की जानकारी भी साझा की जाएगी। कंपनी का यह कदम प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन और उसके वितरण को लेकर ज्यादा पारदर्शिता लाने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है। इसमें X के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम (Recommendation Algorithms) की भूमिका को भी ज्यादा स्पष्ट करने पर जोर दिया जा रहा है।
2022 में ट्विटर (Twitter) का अधिग्रहण करने और बाद में उसका नाम X करने के बाद से मस्क लगातार पारदर्शिता और फ्री स्पीच को अपनी नीति का अहम हिस्सा बताते रहे हैं। हालांकि, स्थानीय कानूनों के तहत जरूरी होने पर X अभी भी सरकारों के कंटेंट हटाने के आदेशों का पालन करता है।
सरकारी आदेशों को लेकर X का कई देशों में विवाद भी रहा है। 2024 में ब्राजील में कोर्ट के आदेशों के बाद कुछ अकाउंट्स पर कार्रवाई को लेकर विवाद हुआ था, जिसके चलते X को अस्थायी रूप से ब्लॉक भी किया गया था।
भारत में भी X ने ऑनलाइन कंटेंट हटाने के सरकारी तंत्र को चुनौती दी है। सितंबर 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने सरकार के सहयोग पोर्टल (Sahyog Portal) को लेकर X की याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद X ने फैसले के खिलाफ अपील की।
नई व्यवस्था का मतलब यह नहीं है कि सरकारें कंटेंट हटाने की मांग नहीं कर सकेंगी या X कानूनी आदेशों का पालन नहीं करेगा। इसका मकसद सिर्फ इतना है कि जब किसी कंटेंट या अकाउंट पर सरकारी हस्तक्षेप हो, तो यूजर्स को इसकी जानकारी ज्यादा स्पष्ट रूप से मिल सके।
एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकारी दखल को लेकर बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है।
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एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकारी दखल को लेकर बड़ा बदलाव करने का ऐलान किया है। कंपनी अब ऐसे सरकारी अनुरोधों को यूजर्स के लिए ज्यादा स्पष्ट और दिखाई देने वाला बनाने की तैयारी कर रही है, जिनके तहत किसी पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट पर रोक लगाने की मांग की जाती है।
नई व्यवस्था के तहत अगर कोई सरकारी अथॉरिटी किसी खास पोस्ट को हटाने या किसी अकाउंट को प्रतिबंधित करने का अनुरोध करती है, तो X यूजर्स को इसकी जानकारी देगा। प्लेटफॉर्म यह भी बताने की योजना बना रहा है कि किस सरकारी एजेंसी ने कार्रवाई की मांग की है और इसके लिए किस कानूनी आधार या वजह का हवाला दिया गया है।
Any censorship required by governments is now clearly visible https://t.co/eQMdoYlhkA
— Elon Musk (@elonmusk) August 15, 2026
सरकारी आदेश और X की अपनी मॉडरेशन में फर्क दिखेगा
इस बदलाव का मकसद सरकारी आदेशों के कारण होने वाली कंटेंट पाबंदियों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना है। X लंबे समय से खुद को फ्री स्पीच पर जोर देने वाले प्लेटफॉर्म के तौर पर पेश करता रहा है, लेकिन अलग-अलग देशों की सरकारों और नियामक एजेंसियों की ओर से मिलने वाले कंटेंट हटाने के अनुरोधों का भी उसे पालन करना पड़ता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर यूजर्स के लिए यह समझना आसान होगा कि किसी पोस्ट या अकाउंट पर कार्रवाई X की अपनी कंटेंट पॉलिसी के तहत हुई है या किसी सरकार के अनुरोध पर।
यानी अगर किसी पोस्ट पर सरकारी आदेश के कारण कार्रवाई होती है, तो यह जानकारी यूजर से छिपी नहीं रहेगी और उसे बताया जा सकता है कि कार्रवाई के पीछे किस सरकारी एजेंसी का अनुरोध था।
अलग-अलग देशों में अलग कानून
X को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सरकारों और नियामक संस्थाओं से आधिकारिक अनुरोध मिलते हैं। अलग-अलग देशों में इंटरनेट और सोशल मीडिया को लेकर अलग कानून और नियम हैं। इनमें यूरोपीय संघ, भारत और तुर्की जैसे बाजार भी शामिल हैं।
ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के सामने दोहरी चुनौती रहती है। एक तरफ सरकारें अपने देश के कानूनों को लागू करवाने के लिए कंटेंट हटाने या अकाउंट पर कार्रवाई की मांग करती हैं, वहीं दूसरी तरफ यूजर्स ऑनलाइन अभिव्यक्ति की आजादी और पारदर्शिता की मांग करते हैं।
X का नया सिस्टम इसी टकराव के बीच सरकारी हस्तक्षेप को ज्यादा स्पष्ट तरीके से सामने लाने की कोशिश माना जा रहा है।
Musk के दौर में सरकारी अनुरोधों पर ज्यादा कार्रवाई?
रिपोर्ट में Crypto Briefing के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि एलन मस्क के स्वामित्व में आने के बाद अलग-अलग रिपोर्टिंग अवधि में X ने सरकारों की ओर से किए गए 83% से 98.8% तक के कंटेंट हटाने के अनुरोधों का पालन किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह अनुपात X के पिछले प्रबंधन के दौरान दर्ज आंकड़ों से ज्यादा है।
हालांकि, अब X सरकारी अनुरोधों को ज्यादा स्पष्ट रूप से यूजर्स के सामने लाने की दिशा में बढ़ रहा है। इससे यूजर्स को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी कंटेंट पर लगी रोक प्लेटफॉर्म के अपने फैसले का नतीजा है या किसी सरकारी आदेश का।
फ्री स्पीच और सरकारी नियमों के बीच संतुलन की कोशिश
X का यह कदम ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में सोशल मीडिया कंपनियों पर सरकारी नियमों का पालन करने और यूजर्स की अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन बनाने का दबाव बढ़ रहा है।
अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो किसी पोस्ट को हटाए जाने या अकाउंट पर प्रतिबंध लगाए जाने की स्थिति में यूजर्स को उसके पीछे की सरकारी भूमिका के बारे में ज्यादा जानकारी मिल सकेगी। इससे X पर होने वाली कंटेंट मॉडरेशन प्रक्रिया पहले की तुलना में ज्यादा पारदर्शी नजर आ सकती है।
इंस्टाग्राम (Instagram) ने करीब 10 साल बाद अपने वर्डमार्क (Wordmark) को नया रूप दिया है। हालांकि, ऐप का मशहूर रंगीन कैमरा आइकन पहले जैसा ही रहेगा।
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इंस्टाग्राम (Instagram) ने अपनी विजुअल पहचान में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने करीब एक दशक बाद अपने वर्डमार्क (Wordmark) यानी लिखे हुए ‘Instagram’ नाम का नया डिजाइन पेश किया है। हालांकि, ऐप का मशहूर गुलाबी, नारंगी और बैंगनी रंग वाला कैमरा आइकन फिलहाल पहले जैसा ही रखा गया है।
नए वर्डमार्क में 2016 में पेश किए गए पुराने स्क्रिप्ट स्टाइल को बदलकर सामान्य टाइपफेस और कर्सिव (Cursive) डिजाइन का मिश्रण इस्तेमाल किया गया है। नए डिजाइन में ‘s’, ‘r’ और ‘g’ अक्षरों की घुमावदार शैली को खास तौर पर उभारा गया है, ताकि इंस्टाग्राम की पुरानी विजुअल पहचान की झलक भी बनी रहे।
इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी (Adam Mosseri) ने गुरुवार को नए डिजाइन को पेश किया। उन्होंने इसे पहले के मुकाबले ज्यादा साफ और आधुनिक बताया, जबकि कंपनी की पुरानी पहचान से जुड़े कुछ तत्वों को भी इसमें बनाए रखा गया है।
कहां दिखेगा नया डिजाइन?
नया वर्डमार्क ऐप के अंदर लिखे हुए ‘Instagram’ नाम में दिखाई देगा। इसके अलावा मार्केटिंग और दूसरे ब्रांड मटेरियल में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, फोन की होम स्क्रीन पर दिखाई देने वाला इंस्टाग्राम का रंगीन कैमरा आइकन नहीं बदला गया है। मेटा (Meta) की ओर से अभी यह नहीं बताया गया है कि भविष्य में ऐप के कैमरा आइकन को भी बदला जाएगा या नहीं।
करीब 10 साल बाद हुआ बदलाव
इंस्टाग्राम ने इससे पहले 2016 में अपनी विजुअल पहचान में बड़ा बदलाव किया था। उस समय कंपनी ने पुराने कैमरा डिजाइन वाले आइकन को हटाकर गुलाबी, नारंगी और बैंगनी रंग वाले ग्रेडिएंट कैमरा आइकन को पेश किया था। यह आइकन बाद में दुनिया के सबसे पहचाने जाने वाले ऐप आइकन में शामिल हो गया।
नए वर्डमार्क को लेकर यूजर्स की प्रतिक्रिया मिली-जुली रही है। कुछ लोगों ने सामान्य और कर्सिव अक्षरों के मिश्रण की आलोचना करते हुए कहा कि इससे ‘Instagram’ नाम को पढ़ना पहले की तुलना में थोड़ा मुश्किल लग रहा है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब इंस्टाग्राम खुद भी पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल चुका है। फोटो शेयरिंग ऐप के तौर पर शुरू हुआ प्लेटफॉर्म अब शॉर्ट वीडियो, एल्गोरिदम आधारित सुझाव, मैसेजिंग और ऑनलाइन खरीदारी जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। फिलहाल कंपनी ने अपनी पहचान के सिर्फ कम प्रमुख हिस्से यानी वर्डमार्क को बदला है, जबकि 2016 से पहचान बन चुके रंगीन कैमरा आइकन को बरकरार रखा गया है।
पारश्मोनी देओरी (Parashmoni Deori) ने GSK इंडिया (GSK India) में कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस मैनेजर (Corporate Communications Manager) के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है।
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पारश्मोनी देओरी (Parashmoni Deori) ने GSK इंडिया (GSK India) में कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस मैनेजर (Corporate Communications Manager) के तौर पर नई पारी शुरू की है। वह कंपनी की कम्युनिकेशंस एंड गवर्नमेंट अफेयर्स (Communications & Government Affairs) टीम का हिस्सा बनी हैं।
पारश्मोनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर कुछ नया करने की दिशा में एक और कदम है। करीब दो साल पहले भी उन्होंने अपने करियर में इसी तरह का बदलाव किया था।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग इंडस्ट्री में काम करने के बावजूद स्टोरीटेलिंग (Storytelling) उनके काम को जोड़ने वाली सबसे अहम कड़ी रही है। नई इंडस्ट्री उनके लिए भले ही नई है, लेकिन लोगों और ब्रांड्स से जुड़ी कहानियों को सामने लाने का उनका अनुभव यहां भी काम आएगा।
पारश्मोनी के पास कम्युनिकेशंस, ब्रांड बिल्डिंग, सोशल मीडिया और गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी (Go-to-Market Strategy) में आठ साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर के दौरान अलग-अलग इंडस्ट्री में काम किया है।
GSK इंडिया में अपनी नई भूमिका में वह कम्युनिकेशंस एंड गवर्नमेंट अफेयर्स टीम के साथ काम करेंगी। इस जिम्मेदारी में वह ब्रांड कम्युनिकेशंस (Brand Communications) और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (Strategic Communications) से जुड़े अपने अनुभव का इस्तेमाल करेंगी।
यूट्यूब (YouTube) ने पार्टनर प्रोग्राम (Partner Program) के लिए कमाई की शर्तें बढ़ाने का ऐलान किया है। नए क्रिएटर्स को अब ज्यादा व्यूज जुटाने होंगे।
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यूट्यूब (YouTube) से कमाई करने की तैयारी कर रहे नए कंटेंट क्रिएटर्स (Content Creators) के लिए आने वाले समय में मुश्किल बढ़ सकती है। कंपनी ने अपने यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम (YouTube Partner Program) के मोनेटाइजेशन नियमों में बदलाव का ऐलान किया है। नए नियम 1 फरवरी से लागू होंगे।
नए नियमों के मुताबिक, पार्टनर प्रोग्राम में शामिल होने के लिए क्रिएटर्स के पास कम से कम 1,000 सब्सक्राइबर (Subscribers) होने चाहिए। इसके साथ पिछले 12 महीनों में 8,000 योग्य वॉच ऑवर्स (Qualified Watch Hours) या पिछले 90 दिनों में 2 करोड़ योग्य शॉर्ट्स व्यूज (Qualified Shorts Views) में से कोई एक शर्त पूरी करनी होगी।
फिलहाल यूट्यूब पार्टनर प्रोग्राम के लिए 1,000 सब्सक्राइबर के साथ पिछले एक साल में 4,000 वॉच ऑवर्स या 90 दिनों में 1 करोड़ शॉर्ट्स व्यूज की जरूरत होती है। यानी नए नियमों में वॉच ऑवर्स और शॉर्ट्स व्यूज की सीमा दोगुनी की जा रही है।
शॉर्ट्स क्रिएटर्स (Shorts Creators) के लिए भी कमाई जारी रखने की शर्त रखी गई है। उन्हें हर 90 दिनों में 1 करोड़ व्यूज हासिल करने होंगे। अगर किसी क्रिएटर के व्यूज इस सीमा से नीचे चले जाते हैं तो उसे पार्टनर प्रोग्राम से पूरी तरह बाहर नहीं किया जाएगा, लेकिन उस 90 दिन की अवधि के लिए उसकी कमाई बंद हो जाएगी।
मौजूदा पार्टनर प्रोग्राम सदस्यों के लिए भी अगले साल से नए नियम लागू होंगे। उन्हें हर साल कम से कम 1,000 वॉच ऑवर्स या 10 लाख शॉर्ट्स व्यूज हासिल करने होंगे। हालांकि, नियमित रूप से कंटेंट अपलोड करने वाले क्रिएटर्स के लिए एक दूसरा रास्ता भी रखा गया है।
अगर कोई क्रिएटर हर 90 दिनों में कम से कम दो लंबे वीडियो या पांच शॉर्ट्स अपलोड करता है तो वह इन व्यूज और वॉच ऑवर्स वाली शर्त से बच सकता है और प्रोग्राम में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है। इसके अलावा, अगर किसी क्रिएटर ने लगातार छह महीने या उससे ज्यादा समय तक कोई नया कंटेंट अपलोड नहीं किया, तो यूट्यूब उसे पार्टनर प्रोग्राम से हटा सकता है।
MeitY के साथ हुई बैठक में मेटा (Meta) ने कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चूकों पर खेद जताया। सरकार ने एल्गोरिदम आधारित कंटेंट चयन पर सेफ हार्बर सुरक्षा को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया।
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) और मेटा (Meta) की वैश्विक नेतृत्व टीम के बीच हुई दो दिवसीय बैठक में कंटेंट मॉडरेशन (Content Moderation), बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM), डीपफेक (Deepfake) और भारतीय कानूनों के पालन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) की ओर से कंपनी ने कंटेंट मॉडरेशन में हुई चूकों पर खेद व्यक्त किया।
सूत्रों के मुताबिक, मेटा ने स्वीकार किया कि उसके प्लेटफॉर्म पर हानिकारक कंटेंट के प्रबंधन में कुछ कमियां रही हैं। साथ ही कंपनी ने यह भी माना कि कुछ विशेष प्रकार के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी राशि खर्च की गई थी और इस फैसले पर भी खेद जताया।
सरकारी अधिकारियों ने बैठक में स्पष्ट किया कि मेटा के एल्गोरिदम (Algorithms) सक्रिय रूप से यह तय करते हैं कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा। ऐसे में कंपनी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act-IT Act) के तहत इंटरमीडियरी (Intermediary) को मिलने वाली 'सेफ हार्बर' (Safe Harbour) कानूनी सुरक्षा का दावा नहीं कर सकती। अधिकारियों का कहना था कि एल्गोरिदम आधारित कंटेंट चयन कंपनी को एक निष्क्रिय मध्यस्थ की श्रेणी से अलग करता है।
सरकारी सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से जुड़े किसी वीडियो को हटाए जाने का मुद्दा नहीं उठाया गया। चर्चा का मुख्य फोकस प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, कंटेंट गवर्नेंस, हानिकारक सामग्री पर नियंत्रण और भारतीय कानूनों के अनुपालन को मजबूत बनाने पर रहा।