यह बदलाव सिर्फ कंटेंट सुझाने तक सीमित नहीं है, AI अब डबिंग, विज्ञापन, कंटेंट निर्माण और यहां तक कि किसी शो की सफलता का अनुमान लगाने तक पहुंच चुका है।
by
Vikas Saxena
जब Netflix पर लाखों घंटे का कंटेंट मौजूद हो, Amazon Prime पर हजारों फिल्में और सीरीज उपलब्ध हों और JioHotstar पर क्रिकेट से लेकर वेब सीरीज तक का अंबार लगा हो, तो सवाल उठता है: आखिर दर्शक क्या देखेगा, यह फैसला कौन करता है? 2026 में इस सवाल का जवाब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बनता जा रहा है और यह बदलाव सिर्फ कंटेंट सुझाने तक सीमित नहीं है, AI अब डबिंग, विज्ञापन, कंटेंट निर्माण और यहां तक कि किसी शो की सफलता का अनुमान लगाने तक पहुंच चुका है।
OTT का बढ़ता साम्राज्य
पहले यह समझना जरूरी है कि OTT इंडस्ट्री किस रफ़्तार से बढ़ रहा है। Research and Markets की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक OTT स्ट्रीमिंग बाजार 2025 में $221 अरब से बढ़कर 2026 में $264.85 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, यानी एक साल में करीब 19.8% की वृद्धि। 2030 तक यह बाजार $551 अरब से भी अधिक हो जाएगा। इस विशाल और तेजी से बदलते बाजार में AI एक निर्णायक हथियार बनता जा रहा है।
AI रिकमेंडेशन: अब AI तय करता है आपकी पसंद
OTT प्लेटफॉर्म्स पर AI का सबसे व्यापक और प्रभावशाली उपयोग कंटेंट रिकमेंडेशन में हो रहा है। Netflix, Amazon Prime Video, YouTube और JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म AI की मदद से दर्शक की देखने की आदतें, पसंदीदा जॉनर, देखने का समय और यहां तक कि कहां वीडियो रोका गया, इन सभी डेटा बिंदुओं का विश्लेषण करते हैं।
परिणाम चौंकाने वाले हैं। DigitalDefynd की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, Netflix पर देखे जाने वाले कुल कंटेंट का लगभग 80% हिस्सा AI-संचालित रिकमेंडेशन इंजन के जरिए आता है और यह इंजन कंपनी को हर साल 1 अरब डॉलर से अधिक की बचत करता है, क्योंकि जब दर्शक को मनपसंद कंटेंट मिलता है, तो वह सब्सक्रिप्शन नहीं छोड़ता।
2026 में AI रिकमेंडेशन इंजन और भी परिष्कृत हो गए हैं। अब ये सिस्टम सिर्फ देखने का इतिहास नहीं, बल्कि दर्शक के मूड, दिन का समय, और यहां तक कि जेन-अल्फा जैसी नई पीढ़ी की बदलती प्राथमिकताओं का भी विश्लेषण करते हैं।
AI डबिंग: भाषा की दीवारें टूट रही हैं
OTT की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से भाषा रही है। एक कोरियन थ्रिलर या स्पैनिश ड्रामा को हिंदी या तेलुगु दर्शकों तक पहुंचाने में पहले हफ्तों का समय और लाखों रुपये खर्च होते थे। AI ने यह समीकरण बदल दिया है।
Research and Markets की रिपोर्ट के अनुसार AI डबिंग टूल्स बाजार 2025 में $1.15 अरब था, जो 2026 में 17.7% की दर से बढ़कर $1.35 अरब तक पहुंच गया है। 2030 तक इसके $2.56 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। आज के प्रमुख AI डबिंग सिस्टम 140 से अधिक भाषाओं में काम करते हैं और 93% मामलों में lip-sync सटीकता हासिल कर लेते हैं।
Amazon ने मार्च 2025 में Prime Video पर AI तकनीक से डबिंग का पायलट प्रोग्राम लॉन्च किया, जिसमें 12 लाइसेंस्ड फिल्मों और सीरीज को अंग्रेजी और लैटिन अमेरिकी स्पेनिश में डब किया गया। AWS का पार्टनर CAMB.AI 140 से अधिक भाषाओं में भावनाओं को समझने वाली बहुभाषी डबिंग की सुविधा प्रदान करता है। Netflix भी AI की मदद से संचालित कार्यप्रणालियों के जरिए स्थानीय भाषाओं के अनुसार सबटाइटल तैयार करना और प्रचार-प्रसार से जुड़ी सामग्री को कई भाषाओं में तैयार करने के लिए AI का उपयोग बढ़ा रहा है।
भारत के संदर्भ में यह बेहद महत्वपूर्ण है, जहां 22 संविधान-मान्य भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ हैं, AI-डबिंग क्षेत्रीय कंटेंट को राष्ट्रीय और वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का सबसे किफायती जरिया बन रही है।
सबटाइटल और एक्सेसिबिलिटी: मिनटों में काम
पहले किसी फिल्म की सबटाइटल फाइल तैयार करने में कई दिन लग जाते थे। अब AI की मदद से आवाज को टेक्स्ट में बदलने की तकनीक और स्वचालित कैप्शन निर्माण टूल्स यह काम कुछ मिनटों में कर देते हैं। YouTube पर हर मिनट 500 घंटे से अधिक कंटेंट अपलोड होता है, और AI auto-captioning इस विशाल कंटेंट को सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
यह बदलाव सिर्फ सुविधा के लिए नहीं है, यह करोड़ों श्रवण-बाधित दर्शकों के लिए भी जरूरी है। AI सबटाइटलिंग से कंटेंट वितरण की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, और AI आधारित डबिंग उपकरण के इस्तेमाल से मीडिया टीमें बिना अतिरिक्त स्टाफ के बड़े कार्यभार संभाल पा रही हैं।
AI और कंटेंट निर्माण: रचनात्मकता का नया आयाम
सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद सवाल यह है: क्या AI कंटेंट भी बनाएगा? आज AI स्क्रिप्ट के आइडिया, सिनॉप्सिस, ट्रेलर, थंबनेल और पोस्टर डिजाइन में पहले से उपयोग हो रहा है। कई प्लेटफॉर्म AI की मदद से कंटेंट की जानकारी तैयार करने, उसे टैग करने और एडिटिंग प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने का काम कर रहे हैं।
लेकिन इसके साथ ही लेखकों, एडिटर्स और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स की चिंताएँ भी बढ़ रही हैं। क्या एल्गोरिद्म-जनरेटेड कंटेंट मानवीय भावनाओं को उतनी ही गहराई से छू सकता है? क्या AI रचनात्मकता को एक फॉर्मूले में बदल देगा? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं, लेकिन इंडस्ट्री जगत में बहस तेज है।
विज्ञापन का नया चेहरा: AI-powered Ad Targeting
OTT प्लेटफॉर्म्स का एक बड़ा राजस्व स्रोत विज्ञापन बनता जा रहा है, और यहां AI ने पूरी तरह क्रांति ला दी है। 2026 में अमेरिका में अकेला प्रोग्रामेटिक डिस्प्ले विज्ञापन खर्च $203 अरब से अधिक पहुंचने का अनुमान है (Basis/eMarketer), और वैश्विक स्तर पर प्रोग्रामेटिक अब कुल डिजिटल डिस्प्ले विज्ञापन का लगभग 90% हिस्सा है।
CTV/OTT विज्ञापन के क्षेत्र में 2026 में 50% खरीद programmatic ढंग से होने की उम्मीद है। Advertiser Perceptions और Premion के एक survey के अनुसार 70% CTV विज्ञापनदाता 2026 में अपना खर्च औसतन 17% बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। AI की मदद से dynamic ad insertion संभव हो गई है, यानी एक ही मैच देख रहे दो दर्शकों को उनकी रुचि और व्यवहार के आधार पर पूरी तरह अलग-अलग विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं।
छोटे क्रिएटर्स को फायदा या नुकसान?
AI और एल्गोरिद्म का एक बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे बड़े स्टूडियो और बड़े बजट का कंटेंट और ज्यादा प्रमोट होगा, जबकि स्वतंत्र और छोटे निर्माताओं का कंटेंट दब जाएगा? यह चिंता वाजिब है। लेकिन दूसरी तरफ, AI टूल्स ने छोटे क्रिएटर्स को भी professional-grade डबिंग, सबटाइटल और marketing automation की सुविधा दी है, जो पहले उनकी पहुंच से बाहर थी। संतुलन कैसे बनाया जाए, यह 2026 का सबसे अहम नीतिगत सवाल है।
AI के खतरे: जब तकनीक दोधारी तलवार बने
हर तकनीक की तरह AI भी जोखिम से खाली नहीं है। OTT और मीडिया के संदर्भ में कुछ प्रमुख चुनौतियाँ हैं:
Deepfake और भ्रामक कंटेंट: International AI Safety Report 2026 के अनुसार AI-जनरेटेड डीपफेक्स वीडियो तेजी से यथार्थवादी होते जा रहे हैं और इन्हें पहचानना कठिन होता जा रहा है, एक अध्ययन में पाया गया कि लोग AI-जनरेटेड आवाजें 80% मामलों में असली समझ लेते हैं।
Filter Bubble: जब AI दर्शक को वही दिखाता रहे जो वह पहले से पसंद करता है, तो वह एक सूचना के बुलबुले में बंद हो जाता है। नई सोच, नए विचार और अलग दृष्टिकोण उस तक नहीं पहुंच पाते।
Algorithm Bias: अगर AI का प्रशिक्षण डेटा पक्षपातपूर्ण है, तो रिकमेंडेशन भी पक्षपातपूर्ण होंगी। यह सांस्कृतिक विविधता के लिए बड़ा खतरा है।
Copyright और Data Privacy: AI-generated content में copyright का मुद्दा अभी पूरी तरह अनसुलझा है। साथ ही, दर्शकों के व्यक्तिगत डेटा का उपयोग किस हद तक उचित है, यह बहस जारी है।
भविष्य की झलक: AI-संचालित OTT कैसा दिखेगा?
2026 OTT और AI के गठजोड़ का सिर्फ शुरुआती अध्याय है। आने वाले वर्षों में अत्यधिक व्यक्तिगत (हाइपर-पर्सनलाइज्ड) होमपेज, रियल-टाइम बहुभाषी स्ट्रीमिंग, आवाज़ के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा और AI-संचालित इंटरैक्टिव कंटेंट आम हो जाएंगे। AI द्वारा तैयार किए गए ट्रेलर्स का इस्तेमाल पहले से ही शुरू हो चुका है। साथ ही, व्यक्तिगत पसंद के अनुरूप विज्ञापन दिखाने वाला विज्ञापन इकोसिस्टम भी और अधिक उन्नत एवं प्रभावी होगा।
लेकिन इस बदलाव के साथ जिम्मेदारी भी है। जो प्लेटफॉर्म्स AI को सिर्फ मुनाफे का औजार बनाएंगे, वे दर्शकों का भरोसा खोएंगे। जो इसे दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने, विविधता को बढ़ाने और रचनात्मकता को सशक्त करने के लिए इस्तेमाल करेंगे, वे मनोरंजन की दुनिया पर राज करेंगे।
OTT का भविष्य AI से होकर गुजरता है, यह तय है। सवाल सिर्फ यह है कि इस रास्ते पर हम किस दिशा में चलते हैं।
केंद्र सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म को भारत में आम लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है।
by
Samachar4media Bureau
केंद्र सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म को भारत में आम लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसा कंटेंट दिखाया जा रहा था, जो देश के कानूनों का उल्लंघन करता था।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन OTT प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल इंटरमीडियरी के खिलाफ कार्रवाई की गई, वे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67A, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 और महिलाओं के अशोभनीय प्रतिनिधित्व (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन करते पाए गए।
मंत्री ने कहा कि इन कानूनों के तहत अश्लील कंटेंट का प्रकाशन या प्रसारण और महिलाओं का अशोभनीय चित्रण प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई।
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री कानून के दायरे में होनी चाहिए और किसी भी तरह के अश्लील या अवैध कंटेंट को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी उद्देश्य से पिछले दो वर्षों के दौरान 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को भारत में ब्लॉक किया गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल माहौल बनाए रखने के लिए भविष्य में भी कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म Z5 Global के लिए कृष्णेंदु चक्रवर्ती को एशिया पैसिफिक (APAC) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है।
by
Samachar4media Bureau
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म Z5 Global के लिए कृष्णेंदु चक्रवर्ती को एशिया पैसिफिक (APAC) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के जरिए कंपनी अपने ग्लोबल डिजिटल कारोबार को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Z5 की मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
नई जिम्मेदारी में कृष्णेंदु चक्रवर्ती Z5 Global के चीफ बिजनेस ऑफिसर सिजू प्रभाकरण को रिपोर्ट करेंगे। वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्लेटफॉर्म की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने, नए सब्सक्राइबर जोड़ने, राजस्व बढ़ाने, रणनीतिक साझेदारियां करने और नए बाजारों में विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस नियुक्ति पर खुशी जताते हुए सिजू प्रभाकरण ने कहा कि APAC क्षेत्र Z5 के लिए सबसे संभावनाओं वाले बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि अनुभवी नेतृत्व को टीम में शामिल करना कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, कृष्णेंदु की पार्टनरशिप और ऑडियंस एंगेजमेंट में विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय बाजारों में Z5 की मौजूदगी को और मजबूत करेगी।
कृष्णेंदु चक्रवर्ती के पास 21 साल से अधिक का नेतृत्व अनुभव है। उन्होंने डिजिटल मीडिया, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) बिजनेस, स्पोर्ट्स, कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और पारंपरिक मीडिया जैसे क्षेत्रों में काम किया है। Z5 से जुड़ने से पहले वह Meta में कार्यरत थे, जहां उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में क्रिएटर पार्टनरशिप का नेतृत्व किया और भारत में स्पोर्ट्स पार्टनरशिप की जिम्मेदारी भी संभाली।
कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति उसकी उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह डिजिटल कारोबार को मुनाफे वाला और बड़े स्तर पर विस्तार योग्य (Scalable) बनाना चाहती है। भारत और विदेशी बाजारों में मजबूत नेतृत्व के जरिए कंपनी डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते अवसरों का फायदा उठाने और लंबी अवधि में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों की बढ़ती मांग को देखते हुए Z5 अब मजबूत नेतृत्व, रणनीतिक साझेदारियों और नए बाजारों में बेहतर पहुंच के दम पर अपनी वैश्विक मौजूदगी को और विस्तार देने की तैयारी में है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, लेकिन जी एंटरटेनमेंट (Zee) अब इस साझेदारी को लंबे समय तक आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
by
Samachar4media Bureau
फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, लेकिन जी एंटरटेनमेंट (Zee) अब इस साझेदारी को लंबे समय तक आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी के CEO पुनीत गोयनका ने फीफा (FIFA) के साथ अपनी साझेदारी को भारत में फुटबॉल के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है और कहा है कि यह सफर अभी सिर्फ शुरू हुआ है।
19 जुलाई 2026 को फीफा टीम को लिखे एक पत्र में पुनीत गोयनका ने कहा कि इस साझेदारी की बदौलत फुटबॉल का रोमांच देशभर के करोड़ों दर्शकों तक पहुंचा है। उनका मानना है कि इससे भारत में फुटबॉल के लिए मजबूत माहौल तैयार करने में भी मदद मिली है।
गोयनका ने कहा कि Zee का लक्ष्य सिर्फ टूर्नामेंट का प्रसारण करना नहीं है, बल्कि फुटबॉल को भारत की खेल संस्कृति का अहम हिस्सा बनाना भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि कंपनी आने वाले वर्षों में भी फीफा के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करेगी और फुटबॉल से जुड़े कंटेंट में निवेश जारी रखेगी।
उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और पूरी फीफा टीम का आभार जताते हुए कहा कि उनके भरोसे और सहयोग से यह साझेदारी सफल रही।
पुनीत गोयनका ने दर्शकों और सब्सक्राइबर्स का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल के प्रति लोगों के उत्साह ने Zee को बेहतर से बेहतर देखने का अनुभव देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विज्ञापनदाताओं, डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स, सहयोगी कंपनियों और अन्य व्यावसायिक साझेदारों का भी उन्होंने आभार व्यक्त किया।
उन्होंने फुटबॉल एक्सपर्ट्स और प्रेजेंटर्स की भी सराहना की, जिनकी विश्लेषणात्मक प्रस्तुति और कवरेज ने खेल को भारतीय दर्शकों के और करीब पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अपने संदेश में गोयनका ने Zee की टीम की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने एक बड़े विजन को सफल प्रसारण अभियान में बदलकर दिखाया और इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि Zee भारत में नई पीढ़ी के फुटबॉल प्रशंसकों को प्रेरित करने और इस खेल के विकास में लगातार योगदान देता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन भारत भी फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेगा और दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी जगह बनाएगा।
मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि वैश्विक खेल आयोजनों के प्रसारण के जरिए ब्रॉडकास्टर्स दर्शकों और सब्सक्राइबर आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में Zee के लिए फीफा के साथ यह साझेदारी सिर्फ प्रसारण अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ाने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का भी अहम हिस्सा है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने अपने अब तक के सबसे बड़े मल्टी-लिंगुअल कंटेंट लाइनअप की घोषणा की है।
by
Samachar4media Bureau
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने अपने अब तक के सबसे बड़े मल्टी-लिंगुअल कंटेंट लाइनअप की घोषणा की है। कंपनी आने वाले समय में हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और बांग्ला समेत सात भाषाओं में नई वेब सीरीज, फिल्में, लाइव स्पोर्ट्स, एनीमेशन और बच्चों के लिए खास कार्यक्रम पेश करेगी। इसके साथ ही कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंटेंट पर भी जोर दे रही है।
ZEE5 का कहना है कि उसका मकसद अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों को उनकी पसंद का मनोरंजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए कंपनी ने कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ साझेदारी की है।
हिंदी कंटेंट में दर्शकों को कई नई ओरिजिनल सीरीज देखने को मिलेंगी। इनमें पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली के जीवन से प्रेरित 'कांबली', 'द स्कैम: लीक्ड', 'कॉफी किंग', आर. माधवन द्वारा होस्ट किया जाने वाला 'जीना इसी का नाम है 2.0' और मशहूर 'जी हॉरर शो' की वापसी शामिल है। वहीं लोकप्रिय सीरीज 'रंगबाज' का चौथा सीजन, 'जनावर 2' और 'बकैती' का दूसरा सीजन भी दर्शकों के सामने आएगा।
फिल्मों की बात करें तो ZEE5 कई बड़े सितारों की फिल्में भी लेकर आ रहा है। इनमें वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मौनी रॉय की 'है जवानी तो इश्क होना है', बॉबी देओल और सान्या मल्होत्रा की 'बंदर', कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता', मृणाल ठाकुर और हुमा कुरैशी की 'पूजा मेरी जान' तथा वाणी कपूर की 'सर्वगुण संपन्न' जैसी फिल्में शामिल हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट पर भी कंपनी का खास फोकस रहेगा। तमिल में नई वेब सीरीज और फिल्में, तेलुगु में नई ओरिजिनल सीरीज और टॉक शो, कन्नड़ में 'बिटकॉइन स्कैम' और 'ऑपरेशन बंगारा', मलयालम में नई फिल्में और रैप बैटल शो, मराठी में नई सीरीज और फिल्मों के साथ-साथ बांग्ला में भी कई लोकप्रिय फ्रेंचाइजी नए सीजन के साथ लौटेंगी।
मनोरंजन के अलावा ZEE5 लाइव स्पोर्ट्स पर भी बड़ा दांव लगाने जा रहा है। प्लेटफॉर्म पर FIFA, बुंडेसलीगा, ILT सीजन-5 और तमिलनाडु कबड्डी जैसे खेल आयोजनों का प्रसारण भी किया जाएगा।
बच्चों के लिए भी कंपनी ने कई नए कार्यक्रमों की घोषणा की है। इनमें 'शिवलोक के कुंडक्का मंडक्का', 'गरुड़- एक योद्धा की गाथा', 'विक्रम बेताल', 'राम-अंजनेय युद्ध', 'टेल्स ऑफ कृष्णा' और 'बैंडबुध और बुदबक 2.0' जैसे शो शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए भारतीय पौराणिक कथाओं और लोककथाओं को आधुनिक अंदाज में बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।
ZEE5 का मानना है कि ओटीटी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच क्षेत्रीय भाषाओं, लोकप्रिय फ्रेंचाइजी, लाइव स्पोर्ट्स और नई तकनीकों पर निवेश भविष्य की जरूरत है। इसी रणनीति के तहत कंपनी अपने कंटेंट पोर्टफोलियो को और मजबूत कर रही है, ताकि देशभर के दर्शकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर विविध और गुणवत्तापूर्ण मनोरंजन मिल सके।
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 बच्चों के लिए एक नई पौराणिक एनिमेटेड सीरीज लेकर आ रहा है। इस सीरीज के जरिए बच्चों को भारतीय पौराणिक कथाओं से एक नए और मनोरंजक अंदाज में जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
by
Samachar4media Bureau
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 बच्चों के लिए एक नई पौराणिक एनिमेटेड सीरीज लेकर आ रहा है। 'शिवलोक के कुंडक्का मंडक्का' नाम की यह ओरिजिनल सीरीज 17 जुलाई से प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। कंपनी का कहना है कि इस सीरीज के जरिए बच्चों को भारतीय पौराणिक कथाओं से एक नए और मनोरंजक अंदाज में जोड़ने की कोशिश की गई है।
यह सीरीज ZEE5 के KidZ सेक्शन का हिस्सा है और मशहूर लेखक आनंद नीलकांतन की लोकप्रिय बच्चों की किताब 'The Very, Extremely, Most Naughty Asura Tales for Kids' पर आधारित है।
कहानी दो शरारती असुर जुड़वां भाई-बहनों कुंडक्का और मंडक्का के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों अपने रोमांचक सफर के दौरान कई नई चुनौतियों का सामना करते हैं और साहस, दोस्ती तथा आत्मविश्वास जैसे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सीखते हैं।
ZEE5 का कहना है कि यह सीरीज रामायण और महाभारत की जानी-पहचानी कहानियों से अलग है। इसमें भारतीय पौराणिक कथाओं के ऐसे पात्रों और दुनिया को दिखाया गया है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। बच्चों को ध्यान में रखते हुए इसमें हास्य, रोमांच और आकर्षक एनिमेशन का खास मिश्रण रखा गया है।
यह सीरीज हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बांग्ला और अंग्रेजी सहित छह भाषाओं में उपलब्ध होगी, ताकि देशभर के बच्चे इसे अपनी पसंदीदा भाषा में देख सकें।
ZEE5 के हेड- KidZ, चंदन खंडेलवाल ने कहा कि प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक अंदाज में बच्चों तक पहुंचाना है। उनके अनुसार, ऐसी कहानियां पीढ़ियों से लोगों के बीच लोकप्रिय रही हैं और अब इन्हें नए दौर के बच्चों के लिए शानदार एनिमेशन और रोचक कहानी के साथ पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सीरीज सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ बैठकर देखने लायक बनाई गई है।
वहीं, लेखक आनंद नीलकांतन ने भी इस सीरीज को लेकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बच्चे कुंडक्का और मंडक्का के रोमांचक सफर का उतना ही आनंद लेंगे, जितना उन्हें इन पात्रों को लिखते समय मिला था। उनके मुताबिक, इन शरारती किरदारों को एनिमेशन के जरिए नई पहचान मिलना बेहद सुखद है।
पिछले कुछ समय से ओटीटी प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं पर आधारित ओरिजिनल कंटेंट तैयार करने पर खास ध्यान दे रहे हैं। ZEE5 की यह नई सीरीज भी इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। कंपनी की योजना इसे एक बड़े पौराणिक फ्रेंचाइजी के रूप में विकसित करने की है, जिसमें आगे चलकर नए किरदारों और नई कहानियों को भी जोड़ा जाएगा।
जियोस्टार (JioStar) को यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग (ETPL) के पहले सीजन का भारत में आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनाया गया है।
by
Samachar4media Bureau
जियोस्टार (JioStar) को यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग (ETPL) के पहले सीजन का भारत में आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनाया गया है। टूर्नामेंट के आयोजकों ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि दुनिया के कई प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स के साथ भी साझेदारी की गई है, ताकि लीग को वैश्विक स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।
आईसीसी (ICC) से मान्यता प्राप्त यह फ्रेंचाइजी टी20 लीग 26 अगस्त से 20 सितंबर 2026 तक खेली जाएगी। भारत में इसके सभी मुकाबलों का सीधा प्रसारण जियोस्टार अपने टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करेगा।
टूर्नामेंट में ग्लासगो, एम्स्टर्डम, एडिनबर्ग, डबलिन, बेलफास्ट और रॉटरडैम की छह शहर-आधारित फ्रेंचाइजी हिस्सा लेंगी। पूरे सीजन में कुल 32 मैच खेले जाएंगे।
भारत के अलावा, यूके और आयरलैंड में लीग का प्रसारण TNT Sports और HBO Max पर होगा। वहीं अमेरिका, कनाडा, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका (MENA) और दक्षिण-पूर्व एशिया में Willow और Cricbuzz टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए टूर्नामेंट का प्रसारण करेंगे।
ईटीपीएल की सह-संस्थापक प्रियंका कौल ने कहा कि जियोस्टार, TNT Sports और Willow जैसे ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स के साथ जुड़ने से लीग को दुनिया भर में बड़ी पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे फ्रेंचाइजी, खिलाड़ियों, प्रायोजकों और साझेदारों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिलेगा और यूरोपीय क्रिकेट को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।
क्रिकेट आयरलैंड के चेयरमैन ब्रायन मैकनीस ने कहा कि यह लीग यूरोप में क्रिकेट के विकास के लिए बड़ा कदम साबित होगी। उनके मुताबिक, इससे उभरते खिलाड़ियों को अवसर मिलेगा और पूरे यूरोप में क्रिकेट को नई गति मिलेगी।
जियोस्टार में स्पोर्ट्स के हेड ऑफ राइट्स एंड इनोवेशन प्रशांत खन्ना ने कहा कि यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में एक नया और रोमांचक टूर्नामेंट है। उन्होंने कहा कि इस लीग में यूरोप के उभरते खिलाड़ियों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय सितारे भी खेलेंगे, जिससे भारतीय दर्शकों को नया क्रिकेट अनुभव मिलेगा।
वहीं WBD Sports Europe के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ट्रोजन पैलॉट ने कहा कि ETPL उनके क्रिकेट पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह लीग यूके और आयरलैंड के क्रिकेट प्रशंसकों के बीच खासा लोकप्रिय होगी।
Willow के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर टॉड मायर्स ने कहा कि ETPL क्रिकेट के लगातार बढ़ते वैश्विक विस्तार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह लीग यूरोप में क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और नए खिलाड़ियों को मंच देने का बेहतरीन अवसर है।
गौरतलब है कि ETPL की फ्रेंचाइजी मालिकों के समूह में क्रिकेट जगत के कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें स्टीव वॉ, राहुल द्रविड़, जोंटी रोड्स, मैथ्यू हेडन, फाफ डु प्लेसिस और हेनरिक क्लासेन जैसे दिग्गज शामिल हैं। आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में लीग के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्ट साझेदारों की भी घोषणा की जाएगी।
ई-कॉमर्स और टेक कंपनी एमेजॉन (Amazon) ने बेन रोल्स्टन (Ben Rolleston) को एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के लिए प्राइम का हेड नियुक्त किया है।
by
Samachar4media Bureau
ई-कॉमर्स और टेक कंपनी एमेजॉन (Amazon) ने बेन रोल्स्टन (Ben Rolleston) को एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के लिए प्राइम का हेड नियुक्त किया है। इस नई भूमिका में वह पूरे APAC क्षेत्र में प्राइम सब्सक्राइबर बढ़ाने, ग्राहकों की भागीदारी (Customer Engagement) मजबूत करने और Prime से जुड़ी रणनीतियों का नेतृत्व करेंगे।
बेन रोल्स्टन ने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने लिखा कि वह एमेजॉन में ऑफ APAC क्षेत्र के लिए प्राइम के हेड के रूप में नई भूमिका संभालने को लेकर उत्साहित हैं। इस पद पर वह Prime Shopping, Prime Video, Prime Music और Prime के अन्य लाभों से जुड़े कमर्शियल ग्रोथ, सब्सक्राइबर बढ़ाने, रणनीतिक योजना, कस्टमर मार्केटिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर लाइफसाइकिल एंगेजमेंट की जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने इस अवसर के लिए अर्नो लेनोयर (Arno Lenior) का भी धन्यवाद दिया।
नई जिम्मेदारी संभालने से पहले रोल्स्टन एमेजॉन के APAC एंटरप्राइज बिजनेस डेवलपमेंट का नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय विकास रणनीति, गो-टू-मार्केट पहल और एंटरप्राइज पार्टनरशिप पर काम किया। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में Alexa के लिए सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट के प्रमुख भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने Echo, Fire TV और Alexa सेवाओं से जुड़ी साझेदारियों का नेतृत्व किया।
एमेजॉन से पहले बेन रोल्स्टन Audible Australia में कंट्री मैनेजर और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने बिजनेस ग्रोथ, कंटेंट, मार्केटिंग और प्रोडक्ट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व किया।
इसके अलावा उन्होंने Nine, Viacom International Media Networks, Singtel Optus, Rugby Union Players Association और APN News & Media जैसी कंपनियों में भी वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाएं निभाई हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया, कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन, कमर्शियल स्ट्रैटेजी, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और बिजनेस ग्रोथ का लंबा अनुभव है।
कॉर्पोरेट जिम्मेदारियों के साथ-साथ बेन रोल्स्टन Surfing NSW के चेयरमैन भी हैं। इस भूमिका में वह संगठन की रणनीतिक योजना, सामुदायिक जुड़ाव और कमर्शियल डेवलपमेंट से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने दावा किया है कि उसके स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Z5 और स्पोर्ट्स टीवी चैनलों की 95 फीसदी से अधिक प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बिक चुकी है।
by
Samachar4media Bureau
फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) 2026 के क्वार्टर फाइनल मुकाबलों के साथ टूर्नामेंट का रोमांच और भी बढ़ गया है। इसी बीच जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises) ने दावा किया है कि उसके स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म Z5 और स्पोर्ट्स टीवी चैनलों की 95 फीसदी से अधिक प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बिक चुकी है।
कंपनी के मुताबिक, टूर्नामेंट के दौरान अब तक 22 से ज्यादा बड़े ब्रैंड उसके साथ जुड़े हैं। इनमें ऑटोमोबाइल, टेक्नोलॉजी, बेवरेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर, स्पोर्ट्सवियर, फैशन, ई-कॉमर्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, ट्रैवल, रियल एस्टेट, पेंट्स, एनर्जी और एजुकेशन जैसे कई सेक्टर शामिल हैं।
क्वार्टर फाइनल और नॉकआउट मुकाबलों के दौरान विज्ञापनों की बढ़ती मांग का असर विज्ञापन दरों पर भी देखने को मिला है। कंपनी के अनुसार, 10 सेकंड के एक विज्ञापन की कीमत अब 20 लाख रुपये से 25 लाख रुपये के बीच पहुंच गई है।
इस मौके पर ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Advertisement Revenue) संदीप मेहरोत्रा ने कहा कि विज्ञापनदाताओं से मिला शानदार रिस्पॉन्स कंपनी की उम्मीदों से भी बेहतर रहा है। उन्होंने कहा कि 95 फीसदी से ज्यादा विज्ञापन इन्वेंट्री पहले ही बुक हो चुकी है और 22 से अधिक प्रमुख ब्रैंड इस टूर्नामेंट का हिस्सा बने हैं। उनके मुताबिक, FIFA World Cup 2026 ब्रैंड्स के लिए बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचने का एक मजबूत मंच बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट ने सिर्फ बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच ही नहीं दिलाई, बल्कि लाइव स्पोर्ट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म की ताकत को जोड़ते हुए इंटीग्रेटेड मार्केटिंग सॉल्यूशंस भी उपलब्ध कराए हैं। उनका कहना है कि विज्ञापनदाताओं का बढ़ता भरोसा कंपनी के मजबूत और अलग स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने के विजन को भी मजबूती देता है।
कंपनी ने बताया कि कई ब्रैंड्स ने ZEE5 की एडवांस टारगेटिंग क्षमता और अलग-अलग विज्ञापन फॉर्मेट का इस्तेमाल करते हुए कनेक्टेड टीवी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशन को जोड़कर मल्टी-प्लेटफॉर्म कैंपेन भी चलाए हैं।
ज़ी के अनुसार, FIFA World Cup 2026 के दौरान इंटरैक्टिव कॉन्टेस्ट और दर्शकों को जोड़ने वाली कई पहल के जरिए टीवी, डिजिटल और सोशल मीडिया पर भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली है। कंपनी ने कहा कि वह अपने स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार कर रही है, जिसमें Bundesliga और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जैसे बड़े स्पोर्ट्स प्रॉपर्टीज भी शामिल हैं।
यदि आपने सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के ट्विस्ट से भरपूर एपिसोड देखे हैं, तो आप माइक्रो-ड्रामा से परिचित हैं। इसकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते कई बड़ी मीडिया कंपनियां इसमें करोड़ों रुपये निवेश कर रही हैं।
by
Vikas Saxena
यदि आपने पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के एपिसोड वाली कोई कहानी देखी है, जिसमें हर एपिसोड के अंत में बड़ा ट्विस्ट आता है और अगला एपिसोड देखने की उत्सुकता बनी रहती है, तो आपने माइक्रो-ड्रामा की दुनिया की झलक देखी है।
कुछ साल पहले तक मनोरंजन का मतलब टीवी, फिल्में और OTT प्लेटफॉर्म थे। लेकिन अब दर्शकों, खासकर Gen Z और मोबाइल-फर्स्ट यूजर्स की बदलती पसंद ने एक नया बाजार तैयार कर दिया है। यही वजह है कि देश की बड़ी मीडिया कंपनियां अब माइक्रो-ड्रामा, वर्टिकल वीडियो और डिजिटल-फर्स्ट कंटेंट पर तेजी से दांव लगा रही हैं।
क्या है माइक्रो-ड्रामा?
माइक्रो-ड्रामा ऐसी वेब सीरीज होती हैं, जिनके एपिसोड आमतौर पर 1 से 3 मिनट लंबे होते हैं। इन्हें मोबाइल स्क्रीन के हिसाब से वर्टिकल फॉर्मेट में बनाया जाता है। हर एपिसोड का अंत इस तरह होता है कि दर्शक अगला एपिसोड तुरंत देखने के लिए उत्सुक हो जाए।
यह फॉर्मेट सबसे पहले चीन में लोकप्रिय हुआ और अब भारत में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। यहां रोमांस, फैमिली ड्रामा, सस्पेंस और कॉमेडी जैसी श्रेणियां सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं।
दर्शकों को कितना पसंद आ रहा है?
Meta और Ormax Media की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में माइक्रो-ड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 65% दर्शकों ने पिछले एक साल के भीतर पहली बार माइक्रो-ड्रामा देखना शुरू किया। करीब 89% लोग इन तक सोशल मीडिया फीड के जरिए पहुंचते हैं। एक सामान्य दर्शक हर सप्ताह औसतन 3.5 घंटे माइक्रो-ड्रामा देखता है, जबकि लगभग 90% लोग इन्हें अकेले देखना पसंद करते हैं। सबसे लोकप्रिय श्रेणियों में रोमांस, फैमिली ड्रामा और कॉमेडी शामिल हैं। यह अध्ययन 14 राज्यों में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 लोगों पर आधारित है।
बाजार किस दिशा में बढ़ रहा है?
भारत में माइक्रो-ड्रामा उद्योग अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन बड़ी मीडिया कंपनियों के लगातार निवेश से इसके तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों की संख्या इस फॉर्मेट को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
Yash Raj Films ने क्यों लगाया दांव?
बॉलीवुड की प्रमुख फिल्म कंपनी Yash Raj Films (YRF) ने हाल ही में Gen Z पर फोकस करने वाली डिजिटल कंपनी Rusk Media में निवेश किया है। निवेश राशि सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह पहली बार है जब YRF ने मोबाइल-फर्स्ट स्टोरीटेलिंग में कदम रखा है।
YRF के CEO अक्षय विधानी के मुताबिक, भारत में करीब 37.7 करोड़ मोबाइल-फर्स्ट दर्शक हैं। ऐसे में कंपनी सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां भी पहुंचना चाहती है जहां दर्शक अपना अधिक समय बिताते हैं।
JioStar भी मैदान में
देश की सबसे बड़ी मीडिया और स्ट्रीमिंग कंपनियों में शामिल JioStar ने भी माइक्रो-ड्रामा सेगमेंट में एंट्री कर ली है। कंपनी ने JioHotstar ऐप पर 'Tadka' नाम से एक नया माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
'Tadka' पर 30 से 90 सेकंड तक के वर्टिकल एपिसोड वाले ओरिजिनल शो उपलब्ध हैं। इसमें रोमांस, थ्रिलर, कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया कंटेंट शामिल है। कंपनी इसे मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों के लिए नए मनोरंजन अनुभव के रूप में पेश कर रही है।
Zee Entertainment भी पीछे नहीं
Zee Entertainment Enterprises ने पिछले साल माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म Bullet में निवेश किया था। इसके बाद कंपनी ने इसमें 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की घोषणा भी की। साथ ही Zee ने PhantomFX में 116 करोड़ रुपये तक का रणनीतिक निवेश किया है, ताकि विजुअल इफेक्ट्स, नई तकनीक और डिजिटल स्टोरीटेलिंग में अपनी क्षमता को मजबूत किया जा सके।
Saregama ने खरीदी डिजिटल कंपनी
संगीत और मनोरंजन कंपनी Saregama India ने डिजिटल कंटेंट कंपनी Pocket Aces में 90% से अधिक हिस्सेदारी कई चरणों में 308 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके बाद Pocket Aces के जरिए Finnet Media का भी अधिग्रहण किया गया, जो कंटेंट क्रिएशन और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करती है।
यह सौदा बताता है कि पारंपरिक मीडिया कंपनियां अब नई डिजिटल कंपनियां खड़ी करने के बजाय उन्हें खरीदकर तेजी से इस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
Rusk Media को मिला बड़ा निवेश
Rusk Media ने हाल ही में 100 करोड़ रुपये की प्री-सीरीज C फंडिंग जुटाई। इस फंडिंग का नेतृत्व Nazara Technologies ने किया, जबकि Info Edge Ventures, IvyCap Ventures और Audacity VC समेत कई निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल ओरिजिनल एनिमेशन और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के विस्तार में करेगी।
आखिर कंपनियां इतना पैसा क्यों लगा रही हैं?
इसकी सबसे बड़ी वजह है दर्शकों की बदलती आदत। आज का दर्शक लंबी फिल्म या वेब सीरीज देखने के बजाय यात्रा, ऑफिस ब्रेक या खाली समय में कुछ मिनटों में पूरी होने वाली कहानी देखना पसंद कर रहा है।
सोशल मीडिया के एल्गोरिद्म भी ऐसे कंटेंट को तेजी से लोगों तक पहुंचा रहे हैं। यही कारण है कि माइक्रो-ड्रामा का पूरा बिजनेस "मोबाइल-फर्स्ट" मॉडल पर आधारित होता जा रहा है।
कमाई कैसे होती है?
माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म विज्ञापन, प्रीमियम एपिसोड, इन-ऐप खरीदारी, ब्रैंड इंटीग्रेशन और सब्सक्रिप्शन जैसे कई मॉडलों से कमाई करते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी इस कारोबार की सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों से सीधे भुगतान कराना है। Meta-Ormax रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत कम लोग कंटेंट देखने के लिए सीधे भुगतान करते हैं। इसलिए फिलहाल कंपनियों का फोकस पहले बड़े पैमाने पर दर्शक आधार तैयार करने पर है।
आगे क्या?
भारतीय मनोरंजन उद्योग तेजी से बदल रहा है। जिस तरह एक दशक पहले OTT प्लेटफॉर्म्स ने टीवी देखने की आदत बदल दी थी, उसी तरह माइक्रो-ड्रामा अब मोबाइल मनोरंजन का नया अध्याय बनता दिखाई दे रहा है।
Yash Raj Films, JioStar, Zee Entertainment, Saregama और Nazara Technologies जैसी कंपनियों की रणनीति साफ बताती है कि वे इसे कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े डिजिटल कारोबार के रूप में देख रही हैं। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और निवेश, नए प्लेटफॉर्म तथा क्षेत्रीय भाषाओं में अधिक कंटेंट देखने को मिल सकता है।
फिलहाल इतना तय है कि मनोरंजन की दुनिया तेजी से मोबाइल स्क्रीन पर सिमट रही है और 2 मिनट की कहानी अब मीडिया कंपनियों के लिए भविष्य के सबसे बड़े डिजिटल अवसरों में से एक बनती जा रही है।
नेटफ्लिक्स (Netflix) ने भारत में पहली बार NextGen India Writers’ Program लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य नए और उभरते स्क्रीनराइटर्स को प्रशिक्षण, मेंटरशिप और प्रोफेशनल अवसर उपलब्ध कराना है।
by
Samachar4media Bureau
ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) ने भारत में पहली बार 'नेक्स्टजेन इंडिया राइटर्स प्रोग्राम' (NextGen India Writers’ Program) लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य नए और उभरते स्क्रीनराइटर्स (Screenwriters) की पहचान करना, उन्हें प्रशिक्षण देना और उनकी कहानियों को पेशेवर स्तर तक पहुंचाने में मदद करना है।
कंपनी के अनुसार, इस कार्यक्रम के लिए वे लेखक आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास अधिकतम तीन वर्ष का प्रोफेशनल राइटिंग (Professional Writing) अनुभव है। इस पहल की मेजबानी करने वाला भारत, फ्रांस (France) और नीदरलैंड (Netherlands) के बाद तीसरा देश बन गया है।
चयनित प्रतिभागियों को दो महीने के हाइब्रिड (Hybrid) प्रोग्राम में शामिल किया जाएगा। इस दौरान उन्हें इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स (Industry Experts) की मेंटरशिप (Mentorship), वर्कशॉप्स (Workshops) और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही प्रतिभागियों को अपनी कहानी को प्रोफेशनल 'सीरीज बाइबिल' (Series Bible) के रूप में विकसित करना भी सिखाया जाएगा, ताकि उसे वेब सीरीज (Web Series) में बदला जा सके।
नेटफ्लिक्स इंडिया (Netflix India) की वाइस प्रेसिडेंट (Vice President) मोनिका शेरगिल (Monika Shergill) ने कहा कि हर बेहतरीन कहानी की शुरुआत एक लेखक से होती है। भारत में ऐसे कई प्रतिभाशाली लोग हैं, जिनके पास शानदार कहानियां हैं, लेकिन उन्हें अब तक सही मंच नहीं मिल पाया। यह कार्यक्रम ऐसे नए टैलेंट को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि नेटफ्लिक्स (Netflix) का मानना है कि भारतीय मनोरंजन उद्योग का अगला दौर नए नजरिए और अलग सोच रखने वाले कहानीकारों के दम पर आगे बढ़ेगा। कंपनी ने बताया कि यह पहल नए क्रिएटिव टैलेंट (Creative Talent) को बढ़ावा देने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। इससे पहले 'द रेलवे मेन' (The Railway Men) और आगामी सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar) जैसे प्रोजेक्ट्स में भी नए रचनात्मक प्रतिभाओं को अवसर दिया जा चुका है।