यदि आपने सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के ट्विस्ट से भरपूर एपिसोड देखे हैं, तो आप माइक्रो-ड्रामा से परिचित हैं। इसकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते कई बड़ी मीडिया कंपनियां इसमें करोड़ों रुपये निवेश कर रही हैं।
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Vikas Saxena
यदि आपने पिछले कुछ महीनों में सोशल मीडिया पर 1-2 मिनट के एपिसोड वाली कोई कहानी देखी है, जिसमें हर एपिसोड के अंत में बड़ा ट्विस्ट आता है और अगला एपिसोड देखने की उत्सुकता बनी रहती है, तो आपने माइक्रो-ड्रामा की दुनिया की झलक देखी है।
कुछ साल पहले तक मनोरंजन का मतलब टीवी, फिल्में और OTT प्लेटफॉर्म थे। लेकिन अब दर्शकों, खासकर Gen Z और मोबाइल-फर्स्ट यूजर्स की बदलती पसंद ने एक नया बाजार तैयार कर दिया है। यही वजह है कि देश की बड़ी मीडिया कंपनियां अब माइक्रो-ड्रामा, वर्टिकल वीडियो और डिजिटल-फर्स्ट कंटेंट पर तेजी से दांव लगा रही हैं।
क्या है माइक्रो-ड्रामा?
माइक्रो-ड्रामा ऐसी वेब सीरीज होती हैं, जिनके एपिसोड आमतौर पर 1 से 3 मिनट लंबे होते हैं। इन्हें मोबाइल स्क्रीन के हिसाब से वर्टिकल फॉर्मेट में बनाया जाता है। हर एपिसोड का अंत इस तरह होता है कि दर्शक अगला एपिसोड तुरंत देखने के लिए उत्सुक हो जाए।
यह फॉर्मेट सबसे पहले चीन में लोकप्रिय हुआ और अब भारत में भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है। यहां रोमांस, फैमिली ड्रामा, सस्पेंस और कॉमेडी जैसी श्रेणियां सबसे ज्यादा पसंद की जा रही हैं।
दर्शकों को कितना पसंद आ रहा है?
Meta और Ormax Media की संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक भारत में माइक्रो-ड्रामा तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 65% दर्शकों ने पिछले एक साल के भीतर पहली बार माइक्रो-ड्रामा देखना शुरू किया। करीब 89% लोग इन तक सोशल मीडिया फीड के जरिए पहुंचते हैं। एक सामान्य दर्शक हर सप्ताह औसतन 3.5 घंटे माइक्रो-ड्रामा देखता है, जबकि लगभग 90% लोग इन्हें अकेले देखना पसंद करते हैं। सबसे लोकप्रिय श्रेणियों में रोमांस, फैमिली ड्रामा और कॉमेडी शामिल हैं। यह अध्ययन 14 राज्यों में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 लोगों पर आधारित है।
बाजार किस दिशा में बढ़ रहा है?
भारत में माइक्रो-ड्रामा उद्योग अभी शुरुआती दौर में है, लेकिन बड़ी मीडिया कंपनियों के लगातार निवेश से इसके तेजी से बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। स्मार्टफोन की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों की संख्या इस फॉर्मेट को तेजी से आगे बढ़ा रही है।
Yash Raj Films ने क्यों लगाया दांव?
बॉलीवुड की प्रमुख फिल्म कंपनी Yash Raj Films (YRF) ने हाल ही में Gen Z पर फोकस करने वाली डिजिटल कंपनी Rusk Media में निवेश किया है। निवेश राशि सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन यह पहली बार है जब YRF ने मोबाइल-फर्स्ट स्टोरीटेलिंग में कदम रखा है।
YRF के CEO अक्षय विधानी के मुताबिक, भारत में करीब 37.7 करोड़ मोबाइल-फर्स्ट दर्शक हैं। ऐसे में कंपनी सिर्फ सिनेमाघरों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वहां भी पहुंचना चाहती है जहां दर्शक अपना अधिक समय बिताते हैं।
JioStar भी मैदान में
देश की सबसे बड़ी मीडिया और स्ट्रीमिंग कंपनियों में शामिल JioStar ने भी माइक्रो-ड्रामा सेगमेंट में एंट्री कर ली है। कंपनी ने JioHotstar ऐप पर 'Tadka' नाम से एक नया माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
'Tadka' पर 30 से 90 सेकंड तक के वर्टिकल एपिसोड वाले ओरिजिनल शो उपलब्ध हैं। इसमें रोमांस, थ्रिलर, कॉमेडी, फैमिली ड्रामा और युवा दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया कंटेंट शामिल है। कंपनी इसे मोबाइल-फर्स्ट दर्शकों के लिए नए मनोरंजन अनुभव के रूप में पेश कर रही है।
Zee Entertainment भी पीछे नहीं
Zee Entertainment Enterprises ने पिछले साल माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म Bullet में निवेश किया था। इसके बाद कंपनी ने इसमें 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की घोषणा भी की। साथ ही Zee ने PhantomFX में 116 करोड़ रुपये तक का रणनीतिक निवेश किया है, ताकि विजुअल इफेक्ट्स, नई तकनीक और डिजिटल स्टोरीटेलिंग में अपनी क्षमता को मजबूत किया जा सके।
Saregama ने खरीदी डिजिटल कंपनी
संगीत और मनोरंजन कंपनी Saregama India ने डिजिटल कंटेंट कंपनी Pocket Aces में 90% से अधिक हिस्सेदारी कई चरणों में 308 करोड़ रुपये में खरीदी। इसके बाद Pocket Aces के जरिए Finnet Media का भी अधिग्रहण किया गया, जो कंटेंट क्रिएशन और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के क्षेत्र में काम करती है।
यह सौदा बताता है कि पारंपरिक मीडिया कंपनियां अब नई डिजिटल कंपनियां खड़ी करने के बजाय उन्हें खरीदकर तेजी से इस बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
Rusk Media को मिला बड़ा निवेश
Rusk Media ने हाल ही में 100 करोड़ रुपये की प्री-सीरीज C फंडिंग जुटाई। इस फंडिंग का नेतृत्व Nazara Technologies ने किया, जबकि Info Edge Ventures, IvyCap Ventures और Audacity VC समेत कई निवेशकों ने भी इसमें भाग लिया। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल ओरिजिनल एनिमेशन और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के विस्तार में करेगी।
आखिर कंपनियां इतना पैसा क्यों लगा रही हैं?
इसकी सबसे बड़ी वजह है दर्शकों की बदलती आदत। आज का दर्शक लंबी फिल्म या वेब सीरीज देखने के बजाय यात्रा, ऑफिस ब्रेक या खाली समय में कुछ मिनटों में पूरी होने वाली कहानी देखना पसंद कर रहा है।
सोशल मीडिया के एल्गोरिद्म भी ऐसे कंटेंट को तेजी से लोगों तक पहुंचा रहे हैं। यही कारण है कि माइक्रो-ड्रामा का पूरा बिजनेस "मोबाइल-फर्स्ट" मॉडल पर आधारित होता जा रहा है।
कमाई कैसे होती है?
माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म विज्ञापन, प्रीमियम एपिसोड, इन-ऐप खरीदारी, ब्रैंड इंटीग्रेशन और सब्सक्रिप्शन जैसे कई मॉडलों से कमाई करते हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अभी इस कारोबार की सबसे बड़ी चुनौती दर्शकों से सीधे भुगतान कराना है। Meta-Ormax रिपोर्ट के मुताबिक, बहुत कम लोग कंटेंट देखने के लिए सीधे भुगतान करते हैं। इसलिए फिलहाल कंपनियों का फोकस पहले बड़े पैमाने पर दर्शक आधार तैयार करने पर है।
आगे क्या?
भारतीय मनोरंजन उद्योग तेजी से बदल रहा है। जिस तरह एक दशक पहले OTT प्लेटफॉर्म्स ने टीवी देखने की आदत बदल दी थी, उसी तरह माइक्रो-ड्रामा अब मोबाइल मनोरंजन का नया अध्याय बनता दिखाई दे रहा है।
Yash Raj Films, JioStar, Zee Entertainment, Saregama और Nazara Technologies जैसी कंपनियों की रणनीति साफ बताती है कि वे इसे कोई अस्थायी ट्रेंड नहीं, बल्कि भविष्य के बड़े डिजिटल कारोबार के रूप में देख रही हैं। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में और निवेश, नए प्लेटफॉर्म तथा क्षेत्रीय भाषाओं में अधिक कंटेंट देखने को मिल सकता है।
फिलहाल इतना तय है कि मनोरंजन की दुनिया तेजी से मोबाइल स्क्रीन पर सिमट रही है और 2 मिनट की कहानी अब मीडिया कंपनियों के लिए भविष्य के सबसे बड़े डिजिटल अवसरों में से एक बनती जा रही है।
भारत में कंटेंट देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है और माइक्रोड्रामा अब सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं रह गया है। यह लोगों के रोजमर्रा के मनोरंजन का हिस्सा बनता जा रहा है।
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Samachar4media Bureau
भारत में कंटेंट देखने का तरीका तेजी से बदल रहा है और माइक्रोड्रामा अब सिर्फ एक नया ट्रेंड नहीं रह गया है। यह लोगों के रोजमर्रा के मनोरंजन का हिस्सा बनता जा रहा है। ShareChat और Moj ने Kantar के साथ मिलकर ‘State of Microdrama in India’ रिपोर्ट जारी की है, जिसमें माइक्रोड्रामा के बढ़ते चलन, दर्शकों की पसंद और विज्ञापन के लिए इसकी संभावनाओं का खुलासा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 80% दर्शक माइक्रोड्रामा पसंद कर रहे हैं, जबकि 86% दर्शक रोजाना 15 मिनट से ज्यादा समय इसे देखने में बिताते हैं। वहीं, 54% दर्शक दोबारा माइक्रोड्रामा देखने के लिए लौटते हैं। इससे संकेत मिलता है कि यह फॉर्मेट अब लोगों के लिए सिर्फ नया या आकर्षक कंटेंट नहीं, बल्कि नियमित मनोरंजन का हिस्सा बन चुका है।
विज्ञापन के लिए भी माइक्रोड्रामा बना मजबूत प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट में माइक्रोड्रामा को ब्रैंड्स के लिए भी एक प्रभावी विज्ञापन माध्यम बताया गया है। इसके मुताबिक, माइक्रोड्रामा में विज्ञापन देखने वाले दर्शकों में 84% ब्रैंड रिकॉल और 82% खरीदारी की इच्छा (Purchase Intent) दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े पारंपरिक शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट के मुकाबले बेहतर हैं। यानी माइक्रोड्रामा न सिर्फ दर्शकों को जोड़ रहा है, बल्कि ब्रैंड्स को भी अपनी बात ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचाने का मौका दे रहा है।
सोशल मीडिया फीड से मिल रहा है माइक्रोड्रामा
माइक्रोड्रामा की लोकप्रियता बढ़ने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, 77% दर्शक सोशल मीडिया फीड के जरिए माइक्रोड्रामा खोजते हैं।
इससे पता चलता है कि सोशल मीडिया सिर्फ कंटेंट देखने का प्लेटफॉर्म नहीं रह गया है, बल्कि नए कंटेंट फॉर्मेट को दर्शकों तक पहुंचाने का एक बड़ा जरिया भी बन चुका है।
सिर्फ कम आय वाले दर्शकों तक सीमित नहीं
माइक्रोड्रामा को लेकर यह धारणा भी टूट रही है कि इसे मुख्य रूप से कम आय वाले या कैजुअल दर्शक देखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 68% माइक्रोड्रामा दर्शक ऐसे परिवारों से आते हैं, जिनकी सालाना आय 10 लाख रुपये से ज्यादा है।
इसके अलावा, 64% दर्शक साल में दो से ज्यादा बार यात्रा करते हैं, जबकि 63% के पास अपना घर है। यानी माइक्रोड्रामा देखने वाले दर्शकों का आधार काफी व्यापक है और इसमें अलग-अलग आर्थिक वर्गों के लोग शामिल हैं।
ज्यादा देखने वाले दर्शक ऑनलाइन ज्यादा खर्च करते हैं
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि माइक्रोड्रामा के ज्यादा कंटेंट देखने वाले दर्शक हर महीने ऑनलाइन कम सक्रिय दर्शकों की तुलना में ज्यादा खर्च करते हैं।
इससे संकेत मिलता है कि जैसे-जैसे दर्शक माइक्रोड्रामा की एपिसोडिक कहानियों से ज्यादा जुड़ते हैं, वैसे-वैसे प्लेटफॉर्म, क्रिएटर्स और ब्रैंड्स के लिए इस फॉर्मेट की व्यावसायिक संभावनाएं भी बढ़ती जाती हैं।
शॉर्ट वीडियो की सुविधा और लंबी कहानी का मजा
ShareChat और Moj की Chief Business Officer Neha Markanda ने कहा कि माइक्रोड्रामा अब एक अलग एंटरटेनमेंट कैटेगरी के रूप में विकसित हो रहा है।
उनके मुताबिक, दर्शक सिर्फ छोटे वीडियो नहीं चाहते, बल्कि ऐसी कहानियां पसंद कर रहे हैं जो मोबाइल पर आसानी से देखी जा सकें और साथ ही उनमें लंबी कहानी जैसा जुड़ाव और भावनात्मक गहराई भी हो।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में माइक्रोड्रामा क्रिएटर्स को ज्यादा बेहतर कहानियां बनाने, ब्रैंड्स को कहानी के जरिए दर्शकों से जुड़ने और प्लेटफॉर्म्स को लंबे समय तक ऑडियंस एंगेजमेंट बढ़ाने के नए मौके दे सकता है।
भारत के डिजिटल कंटेंट बाजार में बड़ा बदलाव
Kantar South Asia के मीडिया व एनालिटिक्स के हेड इबू इसाक (Ebu Isaac) ने कहा कि रिसर्च के दौरान माइक्रोड्रामा का तेजी से उभरना भारत के डिजिटल कंटेंट लैंडस्केप में हो रहे बड़े बदलाव को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल पर बार-बार कंटेंट देखने की आदत और एपिसोडिक कहानियों के आकर्षण ने माइक्रोड्रामा के लिए मजबूत एंगेजमेंट तैयार किया है। आने वाले समय में यह कैटेगरी लोगों के मनोरंजन के तरीके और ब्रैंड्स के लिए दर्शकों का ध्यान खींचने की रणनीति को बदल सकती है।
14 शहरों में हुई स्टडी
‘State of Microdrama in India’ रिपोर्ट के लिए 4 से 25 मई 2026 के बीच देश के 14 शहरों में 1,045 लोगों के बीच क्वांटिटेटिव स्टडी की गई।
इसमें 18 से 44 साल की उम्र के स्मार्टफोन और सोशल मीडिया यूजर्स को शामिल किया गया। रिसर्च में अलग-अलग NCCS A, B और C सेगमेंट के लोगों को शामिल किया गया।
विज्ञापन की प्रभावशीलता और दर्शकों का ध्यान समझने के लिए 21 से 29 मई 2026 के बीच 450 लोगों के साथ अलग से Attention Module भी किया गया। इसमें माइक्रोड्रामा, लॉन्ग-फॉर्म कंटेंट और शॉर्ट वीडियो/रील्स में दर्शकों के ध्यान की तुलना की गई।
माइक्रोड्रामा के लिए बढ़ रहे हैं नए मौके
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि माइक्रोड्रामा अब सिर्फ छोटे-छोटे वीडियो का फॉर्मेट नहीं रह गया है। कहानी, मोबाइल की सुविधा और लगातार नए एपिसोड देखने की आदत इसे तेजी से लोकप्रिय बना रही है।
ऐसे में आने वाले समय में क्रिएटर्स के लिए नई कहानियां बनाने, प्लेटफॉर्म्स के लिए यूजर एंगेजमेंट बढ़ाने और ब्रैंड्स के लिए कहानी के जरिए ग्राहकों से जुड़ने के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
मीडिया और एंटरटनमेंट कंपनियां अब ऐसी सुविधाओं पर ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिनसे सुनने और देखने में परेशानी वाले लोगों के लिए (Accessibility Features) OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखना आसान हो सके।
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Samachar4media Bureau
इमरान फजल, असिटेंट एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
भारत की मीडिया और एंटरटनमेंट कंपनियां अब ऐसी सुविधाओं पर ज्यादा निवेश कर रही हैं, जिनसे सुनने और देखने में परेशानी वाले लोगों के लिए (Accessibility Features) OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखना आसान हो सके। सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी OTT प्लेटफॉर्म के लिए प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने इंडस्ट्री को स्ट्रीमिंग सेवाओं को ज्यादा समावेशी बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया है।
हालांकि प्रस्तावित दिशानिर्देशों में इन सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का रोडमैप दिया गया है, लेकिन देश के प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पहले ही उपशीर्षक और बंद कैप्शन से आगे बढ़कर पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं का विस्तार कर रहे हैं। कंपनियां अब इसे केवल नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं, बल्कि अपने प्रॉडक्ट को बेहतर बनाने और दूसरों से अलग पहचान देने वाली सुविधा के रूप में देख रही हैं। इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कई भाषाओं में इंटरफेस, सांकेतिक भाषा की व्याख्या और आवाज के जरिए कंटेंट खोजने जैसी सुविधाओं को प्लेटफॉर्म में शामिल किया जा रहा है।
यह बदलाव दिखाता है कि पहले पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं को केवल नियमों का पालन करने के तौर पर देखा जाता था, लेकिन अब इन्हें प्रॉडक्ट डिजाइन, यूजर्स एक्सपीरियंस और कंटेंट खोजने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से फरवरी में जारी प्रस्तावित दिशानिर्देशों में OTT प्रकाशकों को चरणबद्ध तरीके से अपनी कंटेंट को ज्यादा सुलभ बनाने के लिए कहा गया है। इसके तहत बंद कैप्शन, ऑडियो विवरण और भारतीय सांकेतिक भाषा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनके यूजर इंटरफेस सहायक तकनीकों को समर्थन दें। ढांचे के तहत प्लेटफॉर्म को ऐसी कंटेंट की पहचान करने और समय के साथ उसे दर्शकों के लिए आसानी से खोजने योग्य बनाने पर भी काम करना होगा।
पहुंच आसान बनाना अब प्रॉडक्ट रणनीति का हिस्सा
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि नियामक ढांचे ने तकनीक, कंटेंट और प्रॉडक्ट टीमों के बीच पहुंच आसान बनाने को लेकर बातचीत तेज कर दी है। अब OTT कंपनियां किसी कार्यक्रम या फिल्म के जारी होने के बाद इन सुविधाओं को जोड़ने के बजाय प्रॉडक्ट तैयार करने के दौरान ही इन्हें शामिल कर रही हैं।
उदाहरण के तौर पर, जियोस्टार का कहना है कि पहुंच आसान बनाना अब उसके स्ट्रीमिंग अनुभव को तैयार करने का एक बुनियादी सिद्धांत बन गया है।
जियोहॉटस्टार के मुख्य प्रॉडक्ट अधिकारी भरत राम ने कहा, "जियोस्टार में पहुंच आसान बनाना कोई ऐसी सुविधा नहीं है जिसे हम बाद में जोड़ते हैं, बल्कि यह एक डिजाइन सिद्धांत है, जो तय करता है कि हम अपने प्रॉडक्ट्स और अनुभवों को कैसे तैयार करते हैं।"
प्लेटफॉर्म पहले से ही 12 भाषाओं में प्रमुख खेल आयोजनों के साथ भारतीय सांकेतिक भाषा की व्याख्या और ऑडियो विवरण की सुविधा देता है। कई फिल्में और धारावाहिक भी ऑडियो विवरण और बंद कैप्शन के साथ उपलब्ध हैं।
राम ने कहा कि कंपनी मिशन एक्सेसिबिलिटी और इंडिया साइनिंग हैंड्स जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर अपने प्रॉडक्ट्स में पहुंच आसान बनाने वाली सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। साथ ही इन सुविधाओं को प्लेटफॉर्म की मूल तकनीकी व्यवस्था में भी शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "OpenAI के साथ हमारी साझेदारी अलग-अलग यूजर्स की जरूरतों के लिए कंटेंट खोजने की प्रक्रिया को ज्यादा सहज और बातचीत जैसी बनाने में मदद कर रही है।"
कंपनी अलग तरह से सोचने और सीखने वाले यूजर्स के लिए भी सुविधाएं विकसित करने में निवेश कर रही है। इससे पता चलता है कि पहुंच को अब केवल नियमों का पालन करने के बजाय समावेशी डिजाइन के व्यापक नजरिए से देखा जा रहा है।
राम के मुताबिक, पहुंच आसान बनाने के लिए मूल रूप से विकसित की गई कई सुविधाओं, जैसे उपशीर्षक, कई भाषाओं का अनुभव और आवाज के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा ने सभी दर्शकों के देखने के अनुभव को बेहतर बनाया है।
उन्होंने कहा, "जैसे-जैसे भारत का पहुंच संबंधी तंत्र विकसित हो रहा है, हम स्ट्रीमिंग के भविष्य को सिर्फ ज्यादा व्यक्तिगत बनाने के बजाय डिजाइन के स्तर पर समावेशी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"
प्लेटफॉर्म उपशीर्षक से आगे बढ़कर कर रहे नए प्रयोग
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया से पता चलता है कि नियमों का पालन अब केवल अनिवार्य पहुंच संबंधी सुविधाओं तक सीमित नहीं है।
नेटफ्लिक्स का कहना है कि उसके दुनियाभर के करीब एक-तिहाई सदस्य कंटेंट खोजने और देखने के लिए पहले से ही पहुंच संबंधी सुविधाओं और उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। इससे पता चलता है कि ये सुविधाएं अब मुख्यधारा का हिस्सा बन चुकी हैं।
पिछले एक साल में स्ट्रीमिंग कंपनी ने पहुंच संबंधी सुविधाओं में अपना निवेश काफी बढ़ाया है। केवल 2025 में ही उसने 34 भाषाओं में 13,000 घंटे से ज्यादा ऑडियो विवरण जोड़े। यह साल-दर-साल 30 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि है।
उसके संग्रह में अब 30 से ज्यादा भाषाओं में उपशीर्षक, सुनने में परेशानी वाले लोगों के लिए उपशीर्षक, ऑडियो विवरण और डबिंग की सुविधा उपलब्ध है।
कंपनी ने "भाषा के आधार पर खोज" सुविधा भी शुरू की है। इसके जरिए सदस्य अलग-अलग उपकरणों पर खोज पट्टी से भाषा के साथ-साथ पहुंच संबंधी सुविधाओं के आधार पर भी फिल्में और कार्यक्रम खोज सकते हैं।
यह सुविधा दिखाती है कि अब पहुंच को सिर्फ कंटेंट चलाने तक सीमित रखने के बजाय उसे खोजने की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
नेटफ्लिक्स के देखने के आंकड़े भी इस बदलाव को दिखाते हैं। करीब एक दशक पहले मंच पर गैर-अंग्रेजी भाषा की कंटेंट कुल देखने का 10 प्रतिशत से भी कम थी। आज यह एक-तिहाई से ज्यादा है। वहीं 2025 में करीब 70 प्रतिशत देखने का हिस्सा ऐसे सदस्यों का था, जिन्होंने अपने देश के बाहर बनाई गई कंटेंट देखी।
कंपनी ने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के साथ मिलकर विशेष स्क्रीनिंग भी आयोजित की हैं, जिनमें पहले से शामिल ऑडियो विवरण की सुविधा थी।
नेटफ्लिक्स की मूल कंटेंट में दृष्टिबाधित दर्शकों के लिए चेहरे के भाव, जगह और दृश्यों में बदलाव जैसी दृश्य चीजों का वर्णन करने वाली आवाज भी शामिल होती है। इसके अलावा मंच स्क्रीन रीडर, सहायक सुनने वाले उपकरण और अपनी जरूरत के अनुसार बदले जा सकने वाले उपशीर्षकों को भी समर्थन देता है।
सोनी और जी भी पहुंच संबंधी योजना के साथ आगे बढ़ रहे
अन्य प्रसारक और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी बदलते नियामक माहौल के साथ पहुंच संबंधी सुविधाओं को मजबूत कर रहे हैं।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क की डिजिटल सेवाओं, जिनमें सोनीलिव और क्रंचीरोल शामिल हैं, के लिए तैयार योजना में सहायक तकनीकों के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया है। इसमें बेहतर स्क्रीन रीडर समर्थन, कीबोर्ड से संचालन, रंगों के अंतर को बेहतर करना और सभी के लिए आसान इंटरफेस डिजाइन शामिल हैं।
कंपनी प्रॉडक्ट तैयार करने की प्रक्रिया में ही पहुंच संबंधी सुविधाओं को शामिल करने पर जोर दे रही है। इसके लिए लगातार परीक्षण और यूजर्स की प्रतिक्रिया का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि इसे केवल एक बार की नियम पालन प्रक्रिया न माना जाए।
वहीं जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि वह मंत्रालय की ओर से तय समय-सारणी के अनुसार पहुंच संबंधी सुविधाएं लागू कर रहा है।
कंपनी के एक प्रवक्ता ने कहा, "एक जिम्मेदार इंडस्ट्री पार्टनर के तौर पर जी, सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों का पालन कर रहा है और यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी प्रयास कर रहा है कि उसके कंटेंट प्रस्ताव सभी मंचों पर हर उपभोक्ता के लिए आसानी से उपलब्ध हों।"
उन्होंने कहा, "हम मंत्रालय की ओर से तय समय-सारणी के अनुसार नई पहुंच संबंधी सुविधाओं को शामिल करने की प्रक्रिया में हैं। हम एक सही मायने में समावेशी और सुलभ एंटरटनमेंट व्यवस्था बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि हमारी आकर्षक कंटेंट देश के हर दर्शक के लिए बिना किसी रुकावट के उपलब्ध हो सके।"
नियमों का पालन बढ़ा रहा नए प्रयोगों का दायरा
इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों का कहना है कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने पहुंच संबंधी सुविधाओं के लिए एक साझा ढांचा तैयार किया है और कंपनियों को नए प्रयोग करने की गुंजाइश भी दी है।
उपशीर्षक और ऑडियो विवरण से आगे बढ़कर प्लेटफॉर्म अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंटेंट खोज, कई भाषाओं में संचालन, बातचीत के जरिए खोज, पहुंच संबंधी संकेतक और यूजर की जरूरत के अनुसार बदले जा सकने वाले इंटरफेस में भी निवेश कर रहे हैं।
मंत्रालय के ढांचे में प्लेटफॉर्म को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि सुलभ कंटेंट को संकेतकों, फिल्टर और खोज सुविधा के जरिए आसानी से खोजा जा सके। साथ ही पहुंच संबंधी क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
यह बदलाव इस बात में भी दिखाई दे रहा है कि स्ट्रीमिंग कंपनियां आज पहुंच को किस तरह देख रही हैं। अब इसे पर्दे के पीछे नियमों का पालन करने वाली व्यवस्था के बजाय प्लेटफॉर्म के पूरे अनुभव का हिस्सा बनाया जा रहा है। कंपनियां सिफारिश करने वाली व्यवस्थाओं को बेहतर कर रही हैं, कंटेंट से जुड़ी जानकारी बढ़ा रही हैं और अलग-अलग जरूरत वाले यूजर्स के लिए संचालन को ज्यादा आसान बना रही हैं।
नई पीढ़ी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से इन प्रयासों को और तेजी मिलने की उम्मीद है। इससे स्वचालित उपशीर्षक, ऑडियो विवरण, भाषा अनुवाद और आवाज के जरिए बातचीत को बेहतर बनाया जा सकता है।
पूरी इंडस्ट्री्ट्री में हो रहा बदलाव
भारत के OTT इंडस्ट्री के लिए पहुंच आसान बनाना अब सिर्फ नियामक नियमों का पालन करने की मजबूरी नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने का एक तरीका भी बनता जा रहा है।
दिव्यांग लोगों के लिए शुरुआत में विकसित की गई सुविधाएं- जैसे उपशीर्षक, कई भाषाओं वाले इंटरफेस, आवाज के जरिए संचालन और बातचीत के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा- अब आम दर्शकों के बीच भी तेजी से इस्तेमाल हो रही हैं। इसकी वजह यह है कि लोग अलग-अलग उपकरणों, भाषाओं और परिस्थितियों में कंटेंट देख रहे हैं।
सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रस्तावित दिशानिर्देशों ने भले ही इस बदलाव को शुरू करने के लिए नियामक दबाव दिया हो, लेकिन इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया बताती है कि इससे कहीं बड़ा बदलाव हो रहा है।
जैसे-जैसे स्ट्रीमिंग सेवाओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, कंपनियां यह समझ रही हैं कि अगली बड़ी चुनौती सिर्फ बेहतर और प्रीमियम कंटेंट तैयार करना नहीं है। अब यह भी जरूरी है कि हर दर्शक के लिए कंटेंट सुलभ हो, उसे आसानी से खोजा जा सके और हर व्यक्ति उसे बिना किसी परेशानी के इस्तेमाल कर सके।
हिन्दुस्तान टाइम्स (HT) मीडिया समूह के OTT प्लेटफॉर्म OTTplay के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) इंदरप्रीत सिंह ने कंपनी छोड़ दी है।
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Samachar4media Bureau
हिन्दुस्तान टाइम्स (HT) मीडिया ग्रुप के OTT प्लेटफॉर्म OTTplay के चीफ बिजनेस ऑफिसर (CBO) इंदरप्रीत सिंह ने कंपनी छोड़ दी है। इसकी जानकारी उन्होंने खुद लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए साझा की।
इंदरप्रीत सिंह ने लिखा कि आज हिन्दुस्तान टाइम्स में उनका आखिरी दिन है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान Mint Premium, HT Premium और OTTplay जैसे तीन अलग-अलग बिजनेस वेंचर्स पर काम किया। उनके मुताबिक, इन तीनों प्लेटफॉर्म को शुरुआत से तैयार किया गया, कई चुनौतियों का सामना किया गया और समय-समय पर उन्हें नए सिरे से विकसित भी किया गया।
उन्होंने कहा कि इन प्रोजेक्ट्स ने उन्हें यह सिखाया कि किसी बिजनेस को बड़े स्तर तक कैसे पहुंचाया जाए, ग्राहकों को लंबे समय तक कैसे जोड़ा जाए और ऐसे दर्शकों के लिए कैसे काम किया जाए, जो सिर्फ उसी कंटेंट के लिए भुगतान करते हैं जिसे वे वास्तव में मूल्यवान मानते हैं।
इंदरप्रीत सिंह ने अपनी पोस्ट में अपनी टीम, कंपनी के नेतृत्व और बिजनेस पार्टनर्स का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह सफर अकेले संभव नहीं था। टीम ने हर विचार पर खुलकर चर्चा की, नेतृत्व ने नए आइडियाज पर भरोसा जताया और पार्टनर्स ने हर कदम पर साथ दिया।
गौरतलब है कि इंदरप्रीत सिंह का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ महीने पहले Hindustan Media Ventures Limited (HMVL) ने अपने OTT एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म OTTplay के लिए नए सब्सक्रिप्शन पैक बंद करने का फैसला किया था। कंपनी ने 31 मार्च 2026 से नए सब्सक्रिप्शन ऑफर रोक दिए थे और कहा था कि वह इस बिजनेस की दीर्घकालिक संभावनाओं की समीक्षा कर रही है।
इंदरप्रीत सिंह ने दिसंबर 2020 में HT Media जॉइन किया था। लगभग साढ़े पांच साल के कार्यकाल के बाद अब उन्होंने कंपनी से विदाई ले ली है।
केंद्र सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म को भारत में आम लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है।
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Samachar4media Bureau
केंद्र सरकार ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट पर सख्त रुख अपनाते हुए पिछले दो वर्षों में 50 ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म को भारत में आम लोगों की पहुंच से बाहर कर दिया है। सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर ऐसा कंटेंट दिखाया जा रहा था, जो देश के कानूनों का उल्लंघन करता था।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिन OTT प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल इंटरमीडियरी के खिलाफ कार्रवाई की गई, वे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67A, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 और महिलाओं के अशोभनीय प्रतिनिधित्व (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 की धारा 4 का उल्लंघन करते पाए गए।
मंत्री ने कहा कि इन कानूनों के तहत अश्लील कंटेंट का प्रकाशन या प्रसारण और महिलाओं का अशोभनीय चित्रण प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई।
सरकार का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध सामग्री कानून के दायरे में होनी चाहिए और किसी भी तरह के अश्लील या अवैध कंटेंट को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी उद्देश्य से पिछले दो वर्षों के दौरान 50 OTT प्लेटफॉर्म्स को भारत में ब्लॉक किया गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इंटरनेट पर सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल माहौल बनाए रखने के लिए भविष्य में भी कानून का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म Z5 Global के लिए कृष्णेंदु चक्रवर्ती को एशिया पैसिफिक (APAC) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है।
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने अपने ओटीटी प्लेटफॉर्म Z5 Global के लिए कृष्णेंदु चक्रवर्ती को एशिया पैसिफिक (APAC) का बिजनेस हेड नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के जरिए कंपनी अपने ग्लोबल डिजिटल कारोबार को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में Z5 की मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
नई जिम्मेदारी में कृष्णेंदु चक्रवर्ती Z5 Global के चीफ बिजनेस ऑफिसर सिजू प्रभाकरण को रिपोर्ट करेंगे। वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्लेटफॉर्म की ग्रोथ स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने, नए सब्सक्राइबर जोड़ने, राजस्व बढ़ाने, रणनीतिक साझेदारियां करने और नए बाजारों में विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगे।
इस नियुक्ति पर खुशी जताते हुए सिजू प्रभाकरण ने कहा कि APAC क्षेत्र Z5 के लिए सबसे संभावनाओं वाले बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि अनुभवी नेतृत्व को टीम में शामिल करना कंपनी की वैश्विक विकास रणनीति का अहम हिस्सा है। उनके मुताबिक, कृष्णेंदु की पार्टनरशिप और ऑडियंस एंगेजमेंट में विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय बाजारों में Z5 की मौजूदगी को और मजबूत करेगी।
कृष्णेंदु चक्रवर्ती के पास 21 साल से अधिक का नेतृत्व अनुभव है। उन्होंने डिजिटल मीडिया, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) बिजनेस, स्पोर्ट्स, कंज्यूमर टेक्नोलॉजी और पारंपरिक मीडिया जैसे क्षेत्रों में काम किया है। Z5 से जुड़ने से पहले वह Meta में कार्यरत थे, जहां उन्होंने एशिया-प्रशांत क्षेत्र में क्रिएटर पार्टनरशिप का नेतृत्व किया और भारत में स्पोर्ट्स पार्टनरशिप की जिम्मेदारी भी संभाली।
कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति उसकी उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह डिजिटल कारोबार को मुनाफे वाला और बड़े स्तर पर विस्तार योग्य (Scalable) बनाना चाहती है। भारत और विदेशी बाजारों में मजबूत नेतृत्व के जरिए कंपनी डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते अवसरों का फायदा उठाने और लंबी अवधि में अपनी प्रतिस्पर्धी स्थिति को और मजबूत करने की योजना पर काम कर रही है।
स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों की बढ़ती मांग को देखते हुए Z5 अब मजबूत नेतृत्व, रणनीतिक साझेदारियों और नए बाजारों में बेहतर पहुंच के दम पर अपनी वैश्विक मौजूदगी को और विस्तार देने की तैयारी में है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, लेकिन जी एंटरटेनमेंट (Zee) अब इस साझेदारी को लंबे समय तक आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
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फीफा वर्ल्ड कप 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, लेकिन जी एंटरटेनमेंट (Zee) अब इस साझेदारी को लंबे समय तक आगे बढ़ाने की तैयारी में है। कंपनी के CEO पुनीत गोयनका ने फीफा (FIFA) के साथ अपनी साझेदारी को भारत में फुटबॉल के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है और कहा है कि यह सफर अभी सिर्फ शुरू हुआ है।
19 जुलाई 2026 को फीफा टीम को लिखे एक पत्र में पुनीत गोयनका ने कहा कि इस साझेदारी की बदौलत फुटबॉल का रोमांच देशभर के करोड़ों दर्शकों तक पहुंचा है। उनका मानना है कि इससे भारत में फुटबॉल के लिए मजबूत माहौल तैयार करने में भी मदद मिली है।
गोयनका ने कहा कि Zee का लक्ष्य सिर्फ टूर्नामेंट का प्रसारण करना नहीं है, बल्कि फुटबॉल को भारत की खेल संस्कृति का अहम हिस्सा बनाना भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि कंपनी आने वाले वर्षों में भी फीफा के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत करेगी और फुटबॉल से जुड़े कंटेंट में निवेश जारी रखेगी।
उन्होंने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और पूरी फीफा टीम का आभार जताते हुए कहा कि उनके भरोसे और सहयोग से यह साझेदारी सफल रही।
पुनीत गोयनका ने दर्शकों और सब्सक्राइबर्स का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल के प्रति लोगों के उत्साह ने Zee को बेहतर से बेहतर देखने का अनुभव देने के लिए प्रेरित किया। साथ ही विज्ञापनदाताओं, डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स, सहयोगी कंपनियों और अन्य व्यावसायिक साझेदारों का भी उन्होंने आभार व्यक्त किया।
उन्होंने फुटबॉल एक्सपर्ट्स और प्रेजेंटर्स की भी सराहना की, जिनकी विश्लेषणात्मक प्रस्तुति और कवरेज ने खेल को भारतीय दर्शकों के और करीब पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
अपने संदेश में गोयनका ने Zee की टीम की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने एक बड़े विजन को सफल प्रसारण अभियान में बदलकर दिखाया और इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि Zee भारत में नई पीढ़ी के फुटबॉल प्रशंसकों को प्रेरित करने और इस खेल के विकास में लगातार योगदान देता रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन भारत भी फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करेगा और दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी जगह बनाएगा।
मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि वैश्विक खेल आयोजनों के प्रसारण के जरिए ब्रॉडकास्टर्स दर्शकों और सब्सक्राइबर आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में Zee के लिए फीफा के साथ यह साझेदारी सिर्फ प्रसारण अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता बढ़ाने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का भी अहम हिस्सा है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने अपने अब तक के सबसे बड़े मल्टी-लिंगुअल कंटेंट लाइनअप की घोषणा की है।
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ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने अपने अब तक के सबसे बड़े मल्टी-लिंगुअल कंटेंट लाइनअप की घोषणा की है। कंपनी आने वाले समय में हिंदी, तमिल, तेलुगु, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और बांग्ला समेत सात भाषाओं में नई वेब सीरीज, फिल्में, लाइव स्पोर्ट्स, एनीमेशन और बच्चों के लिए खास कार्यक्रम पेश करेगी। इसके साथ ही कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंटेंट पर भी जोर दे रही है।
ZEE5 का कहना है कि उसका मकसद अलग-अलग भाषाओं में दर्शकों को उनकी पसंद का मनोरंजन उपलब्ध कराना है। इसके लिए कंपनी ने कई बड़े प्रोडक्शन हाउस के साथ साझेदारी की है।
हिंदी कंटेंट में दर्शकों को कई नई ओरिजिनल सीरीज देखने को मिलेंगी। इनमें पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली के जीवन से प्रेरित 'कांबली', 'द स्कैम: लीक्ड', 'कॉफी किंग', आर. माधवन द्वारा होस्ट किया जाने वाला 'जीना इसी का नाम है 2.0' और मशहूर 'जी हॉरर शो' की वापसी शामिल है। वहीं लोकप्रिय सीरीज 'रंगबाज' का चौथा सीजन, 'जनावर 2' और 'बकैती' का दूसरा सीजन भी दर्शकों के सामने आएगा।
फिल्मों की बात करें तो ZEE5 कई बड़े सितारों की फिल्में भी लेकर आ रहा है। इनमें वरुण धवन, पूजा हेगड़े और मौनी रॉय की 'है जवानी तो इश्क होना है', बॉबी देओल और सान्या मल्होत्रा की 'बंदर', कंगना रनौत की 'भारत भाग्य विधाता', मृणाल ठाकुर और हुमा कुरैशी की 'पूजा मेरी जान' तथा वाणी कपूर की 'सर्वगुण संपन्न' जैसी फिल्में शामिल हैं।
क्षेत्रीय भाषाओं के कंटेंट पर भी कंपनी का खास फोकस रहेगा। तमिल में नई वेब सीरीज और फिल्में, तेलुगु में नई ओरिजिनल सीरीज और टॉक शो, कन्नड़ में 'बिटकॉइन स्कैम' और 'ऑपरेशन बंगारा', मलयालम में नई फिल्में और रैप बैटल शो, मराठी में नई सीरीज और फिल्मों के साथ-साथ बांग्ला में भी कई लोकप्रिय फ्रेंचाइजी नए सीजन के साथ लौटेंगी।
मनोरंजन के अलावा ZEE5 लाइव स्पोर्ट्स पर भी बड़ा दांव लगाने जा रहा है। प्लेटफॉर्म पर FIFA, बुंडेसलीगा, ILT सीजन-5 और तमिलनाडु कबड्डी जैसे खेल आयोजनों का प्रसारण भी किया जाएगा।
बच्चों के लिए भी कंपनी ने कई नए कार्यक्रमों की घोषणा की है। इनमें 'शिवलोक के कुंडक्का मंडक्का', 'गरुड़- एक योद्धा की गाथा', 'विक्रम बेताल', 'राम-अंजनेय युद्ध', 'टेल्स ऑफ कृष्णा' और 'बैंडबुध और बुदबक 2.0' जैसे शो शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए भारतीय पौराणिक कथाओं और लोककथाओं को आधुनिक अंदाज में बच्चों तक पहुंचाया जाएगा।
ZEE5 का मानना है कि ओटीटी बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच क्षेत्रीय भाषाओं, लोकप्रिय फ्रेंचाइजी, लाइव स्पोर्ट्स और नई तकनीकों पर निवेश भविष्य की जरूरत है। इसी रणनीति के तहत कंपनी अपने कंटेंट पोर्टफोलियो को और मजबूत कर रही है, ताकि देशभर के दर्शकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर विविध और गुणवत्तापूर्ण मनोरंजन मिल सके।
ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 बच्चों के लिए एक नई पौराणिक एनिमेटेड सीरीज लेकर आ रहा है। इस सीरीज के जरिए बच्चों को भारतीय पौराणिक कथाओं से एक नए और मनोरंजक अंदाज में जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
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ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 बच्चों के लिए एक नई पौराणिक एनिमेटेड सीरीज लेकर आ रहा है। 'शिवलोक के कुंडक्का मंडक्का' नाम की यह ओरिजिनल सीरीज 17 जुलाई से प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम होगी। कंपनी का कहना है कि इस सीरीज के जरिए बच्चों को भारतीय पौराणिक कथाओं से एक नए और मनोरंजक अंदाज में जोड़ने की कोशिश की गई है।
यह सीरीज ZEE5 के KidZ सेक्शन का हिस्सा है और मशहूर लेखक आनंद नीलकांतन की लोकप्रिय बच्चों की किताब 'The Very, Extremely, Most Naughty Asura Tales for Kids' पर आधारित है।
कहानी दो शरारती असुर जुड़वां भाई-बहनों कुंडक्का और मंडक्का के इर्द-गिर्द घूमती है। दोनों अपने रोमांचक सफर के दौरान कई नई चुनौतियों का सामना करते हैं और साहस, दोस्ती तथा आत्मविश्वास जैसे जीवन के महत्वपूर्ण सबक सीखते हैं।
ZEE5 का कहना है कि यह सीरीज रामायण और महाभारत की जानी-पहचानी कहानियों से अलग है। इसमें भारतीय पौराणिक कथाओं के ऐसे पात्रों और दुनिया को दिखाया गया है, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। बच्चों को ध्यान में रखते हुए इसमें हास्य, रोमांच और आकर्षक एनिमेशन का खास मिश्रण रखा गया है।
यह सीरीज हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, बांग्ला और अंग्रेजी सहित छह भाषाओं में उपलब्ध होगी, ताकि देशभर के बच्चे इसे अपनी पसंदीदा भाषा में देख सकें।
ZEE5 के हेड- KidZ, चंदन खंडेलवाल ने कहा कि प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भारतीय पौराणिक कथाओं को आधुनिक अंदाज में बच्चों तक पहुंचाना है। उनके अनुसार, ऐसी कहानियां पीढ़ियों से लोगों के बीच लोकप्रिय रही हैं और अब इन्हें नए दौर के बच्चों के लिए शानदार एनिमेशन और रोचक कहानी के साथ पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह सीरीज सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के साथ बैठकर देखने लायक बनाई गई है।
वहीं, लेखक आनंद नीलकांतन ने भी इस सीरीज को लेकर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बच्चे कुंडक्का और मंडक्का के रोमांचक सफर का उतना ही आनंद लेंगे, जितना उन्हें इन पात्रों को लिखते समय मिला था। उनके मुताबिक, इन शरारती किरदारों को एनिमेशन के जरिए नई पहचान मिलना बेहद सुखद है।
पिछले कुछ समय से ओटीटी प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए भारतीय संस्कृति और पौराणिक कथाओं पर आधारित ओरिजिनल कंटेंट तैयार करने पर खास ध्यान दे रहे हैं। ZEE5 की यह नई सीरीज भी इसी दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। कंपनी की योजना इसे एक बड़े पौराणिक फ्रेंचाइजी के रूप में विकसित करने की है, जिसमें आगे चलकर नए किरदारों और नई कहानियों को भी जोड़ा जाएगा।
जियोस्टार (JioStar) को यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग (ETPL) के पहले सीजन का भारत में आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनाया गया है।
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जियोस्टार (JioStar) को यूरोपियन T20 प्रीमियर लीग (ETPL) के पहले सीजन का भारत में आधिकारिक ब्रॉडकास्ट पार्टनर बनाया गया है। टूर्नामेंट के आयोजकों ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि दुनिया के कई प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स के साथ भी साझेदारी की गई है, ताकि लीग को वैश्विक स्तर पर दर्शकों तक पहुंचाया जा सके।
आईसीसी (ICC) से मान्यता प्राप्त यह फ्रेंचाइजी टी20 लीग 26 अगस्त से 20 सितंबर 2026 तक खेली जाएगी। भारत में इसके सभी मुकाबलों का सीधा प्रसारण जियोस्टार अपने टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर करेगा।
टूर्नामेंट में ग्लासगो, एम्स्टर्डम, एडिनबर्ग, डबलिन, बेलफास्ट और रॉटरडैम की छह शहर-आधारित फ्रेंचाइजी हिस्सा लेंगी। पूरे सीजन में कुल 32 मैच खेले जाएंगे।
भारत के अलावा, यूके और आयरलैंड में लीग का प्रसारण TNT Sports और HBO Max पर होगा। वहीं अमेरिका, कनाडा, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका (MENA) और दक्षिण-पूर्व एशिया में Willow और Cricbuzz टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए टूर्नामेंट का प्रसारण करेंगे।
ईटीपीएल की सह-संस्थापक प्रियंका कौल ने कहा कि जियोस्टार, TNT Sports और Willow जैसे ब्रॉडकास्ट पार्टनर्स के साथ जुड़ने से लीग को दुनिया भर में बड़ी पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे फ्रेंचाइजी, खिलाड़ियों, प्रायोजकों और साझेदारों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिलेगा और यूरोपीय क्रिकेट को भी वैश्विक मंच पर नई पहचान मिलेगी।
क्रिकेट आयरलैंड के चेयरमैन ब्रायन मैकनीस ने कहा कि यह लीग यूरोप में क्रिकेट के विकास के लिए बड़ा कदम साबित होगी। उनके मुताबिक, इससे उभरते खिलाड़ियों को अवसर मिलेगा और पूरे यूरोप में क्रिकेट को नई गति मिलेगी।
जियोस्टार में स्पोर्ट्स के हेड ऑफ राइट्स एंड इनोवेशन प्रशांत खन्ना ने कहा कि यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में एक नया और रोमांचक टूर्नामेंट है। उन्होंने कहा कि इस लीग में यूरोप के उभरते खिलाड़ियों के साथ कई अंतरराष्ट्रीय सितारे भी खेलेंगे, जिससे भारतीय दर्शकों को नया क्रिकेट अनुभव मिलेगा।
वहीं WBD Sports Europe के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ट्रोजन पैलॉट ने कहा कि ETPL उनके क्रिकेट पोर्टफोलियो को और मजबूत करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह लीग यूके और आयरलैंड के क्रिकेट प्रशंसकों के बीच खासा लोकप्रिय होगी।
Willow के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर टॉड मायर्स ने कहा कि ETPL क्रिकेट के लगातार बढ़ते वैश्विक विस्तार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह लीग यूरोप में क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और नए खिलाड़ियों को मंच देने का बेहतरीन अवसर है।
गौरतलब है कि ETPL की फ्रेंचाइजी मालिकों के समूह में क्रिकेट जगत के कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें स्टीव वॉ, राहुल द्रविड़, जोंटी रोड्स, मैथ्यू हेडन, फाफ डु प्लेसिस और हेनरिक क्लासेन जैसे दिग्गज शामिल हैं। आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में लीग के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय ब्रॉडकास्ट साझेदारों की भी घोषणा की जाएगी।
ई-कॉमर्स और टेक कंपनी एमेजॉन (Amazon) ने बेन रोल्स्टन (Ben Rolleston) को एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के लिए प्राइम का हेड नियुक्त किया है।
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ई-कॉमर्स और टेक कंपनी एमेजॉन (Amazon) ने बेन रोल्स्टन (Ben Rolleston) को एशिया-प्रशांत (APAC) क्षेत्र के लिए प्राइम का हेड नियुक्त किया है। इस नई भूमिका में वह पूरे APAC क्षेत्र में प्राइम सब्सक्राइबर बढ़ाने, ग्राहकों की भागीदारी (Customer Engagement) मजबूत करने और Prime से जुड़ी रणनीतियों का नेतृत्व करेंगे।
बेन रोल्स्टन ने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने लिखा कि वह एमेजॉन में ऑफ APAC क्षेत्र के लिए प्राइम के हेड के रूप में नई भूमिका संभालने को लेकर उत्साहित हैं। इस पद पर वह Prime Shopping, Prime Video, Prime Music और Prime के अन्य लाभों से जुड़े कमर्शियल ग्रोथ, सब्सक्राइबर बढ़ाने, रणनीतिक योजना, कस्टमर मार्केटिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कस्टमर लाइफसाइकिल एंगेजमेंट की जिम्मेदारी निभाएंगे। उन्होंने इस अवसर के लिए अर्नो लेनोयर (Arno Lenior) का भी धन्यवाद दिया।
नई जिम्मेदारी संभालने से पहले रोल्स्टन एमेजॉन के APAC एंटरप्राइज बिजनेस डेवलपमेंट का नेतृत्व कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय विकास रणनीति, गो-टू-मार्केट पहल और एंटरप्राइज पार्टनरशिप पर काम किया। इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में Alexa के लिए सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट के प्रमुख भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने Echo, Fire TV और Alexa सेवाओं से जुड़ी साझेदारियों का नेतृत्व किया।
एमेजॉन से पहले बेन रोल्स्टन Audible Australia में कंट्री मैनेजर और मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने बिजनेस ग्रोथ, कंटेंट, मार्केटिंग और प्रोडक्ट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व किया।
इसके अलावा उन्होंने Nine, Viacom International Media Networks, Singtel Optus, Rugby Union Players Association और APN News & Media जैसी कंपनियों में भी वरिष्ठ नेतृत्व की भूमिकाएं निभाई हैं। उनके पास डिजिटल मीडिया, कंटेंट डिस्ट्रीब्यूशन, कमर्शियल स्ट्रैटेजी, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और बिजनेस ग्रोथ का लंबा अनुभव है।
कॉर्पोरेट जिम्मेदारियों के साथ-साथ बेन रोल्स्टन Surfing NSW के चेयरमैन भी हैं। इस भूमिका में वह संगठन की रणनीतिक योजना, सामुदायिक जुड़ाव और कमर्शियल डेवलपमेंट से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।