क्या सिनेमाघरों का स्वर्ण युग लौट आया है या OTT अब भी आगे है?

मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
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मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है। लोग घरों में बंद हुए और OTT प्लेटफॉर्म्स ने अपनी सबसे बड़ी छलांग लगाई। Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar, सब एकसाथ भारतीय दर्शकों के ड्रॉइंग रूम में घुस आए। जब थिएटर खुले, तो सवाल यह था कि क्या दर्शक वापस आएंगे? आंकड़े कहते हैं, हां, लेकिन पुरानी शर्तों पर नहीं।

थिएटर की वापसी: रिकॉर्ड तोड़ा, पर खाली कुर्सियां अभी भी बोल रही हैं

Ormax Media की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 भारतीय बॉक्स ऑफिस का अब तक का सबसे बड़ा साल रहा। कुल ग्रॉस बॉक्स ऑफिस ₹13,395 करोड़ रहा, यह इतिहास में पहली बार था जब भारतीय बॉक्स ऑफिस ₹13,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया और 2023 के ₹12,226 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 37 फिल्में ₹100 करोड़ का क्लब पार कर गईं, जो 2024 की 22 फिल्मों से काफी ज्यादा थीं। 2026 में यह गति जारी है, जनवरी-मार्च 2026 में ₹3,440 करोड़ का बॉक्स ऑफिस दर्ज हुआ, जो 2025 की समान अवधि से 17% अधिक है।

तुलना के लिए देखें: 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस ₹11,833 करोड़ था, जो 2023 (₹12,226 करोड़) के बाद दूसरा सबसे बड़ा साल था। 2019 (कोविड-पूर्व) में यह आंकड़ा ₹10,948 करोड़ था।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है। संख्याएं बड़ी दिखती हैं क्योंकि टिकट की कीमतें बढ़ी हैं। 2019 में औसत टिकट मूल्य (ATP) ₹106 था, 2024 में ₹134 और 2025 में यह ₹161 हो गया, यानी 2019 के मुकाबले 52% की बढ़ोतरी। लेकिन दर्शकों की संख्या (फुटफॉल) उलटी दिशा में गई। 2019 में 103 करोड़ दर्शक थिएटर पहुंचे थे, जो 2024 में 88.3 करोड़ और 2025 में घटकर 83.2 करोड़ रह गए, 2019 की तुलना में 19% की गिरावट।

भारत में कुल 10,033 स्क्रीन हैं (2025)। PVR INOX, देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन, 111 शहरों में 1,749 स्क्रीन संचालित करती है। सिंगल स्क्रीन थिएटर की हालत ज्यादा चिंताजनक है, हर साल करीब 150 सिंगल स्क्रीन बंद होते हैं, जबकि नए मल्टीप्लेक्स स्क्रीन जुड़ते रहते हैं।

OTT: उछाल के बाद परिपक्वता का दौर

कोविड के दौरान जो OTT क्रांति आई, वह 2025-26 में एक नए चरण में है, तेज ग्रोथ की जगह अब रणनीतिक विस्तार ने ली है।

JioHotstar, फरवरी 2025 में JioCinema और Disney+ Hotstar के विलय से बना यह प्लेटफॉर्म, IPL 2025 तक 30 करोड़ सब्सक्राइबर तक पहुंचा और मार्च 2026 तक MAU 55 करोड़ (550 मिलियन) हो गए। IPL 2026 ने नए रिकॉर्ड बनाए, ओपनिंग वीकेंड में ही 51.5 करोड़ दर्शकों तक रीच (reach) बनी, वॉच-टाइम 2025 के मुकाबले 26% बढ़ा, और लीग स्टेज के दौरान cumulative रीच 1.1 अरब पार कर गई (IPL 2025 की फाइनल रीच 1.19 अरब थी)। डिजिटल रीच 15%, CTV रीच 25% और रीजनल लैंग्वेज वॉच-टाइम 42% बढ़ा। JioHotstar का FY26 में परिचालन राजस्व ₹31,048 करोड़ और PBT ₹3,228 करोड़ रहा।

Amazon Prime Video के भारत में करीब 2.5-3 करोड़ पेड सब्सक्राइबर हैं। Netflix के भारत में 2 करोड़ (20 मिलियन) पेड सब्सक्राइबर हो गए हैं, जो 2021 के महज 55 लाख से काफी वृद्धि है। Netflix का भारत में राजस्व 2025 में $905 मिलियन (लगभग ₹7,600 करोड़) तक पहुंचने का HSBC का अनुमान था।

OTT का मुद्रीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। Ormax OTT Audience Report 2025 के अनुसार कुल OTT यूजर्स 60.1 करोड़ के पार हैं, लेकिन active paid subscriptions केवल 14.82 करोड़ हैं, बाकी बड़ी संख्या मुफ्त या विज्ञापन-सहित कंटेंट पर निर्भर है।

AVOD बनाम SVOD का संघर्ष अब और स्पष्ट है। Amazon Prime Video ने 2025 में भारत में विज्ञापन-सहित बेस प्लान शुरू किया। Statista के अनुसार भारत का OTT वीडियो बाजार 2026 में $4.96 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक $6.76 अरब होने की संभावना है।

बड़ी फिल्में: थिएटर की असली लाइफलाइन

थिएटर बिजनेस का एक कड़वा सच यह है कि वह अब कुछ बड़ी इवेंट फिल्मों पर टिका है।

2024 की टॉप फिल्में: 'पुष्पा 2: द रूल' ₹1,403 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) के साथ सबसे बड़ी हिट रही। 'कल्कि 2898 AD' लगभग ₹758 करोड़ और 'स्त्री 2' ₹740 करोड़ डोमेस्टिक ग्रॉस पर रहीं।

2025 की टॉप फिल्में: 'धुरंधर' (₹950 करोड़) ने अब तक की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड बनाया, 'स्त्री 2' के ₹698 करोड़ के आंकड़े को पार करते हुए। 'कांतारा: ए लेजेंड चैप्टर 1' और 'छावा' भी ₹500 करोड़+ क्लब में रहीं। 'सैयारा', 'कूली' और एनिमेटेड फिल्म 'महावतार नरसिम्हा' ₹300 करोड़+ पर रहीं।

2026 की शुरुआत: 'धुरंधर: द रिवेंज' (मार्च 2026) ने ₹1,375 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) कमाकर हिंदी फिल्मों का नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया, वर्ल्डवाइड यह ₹1,813 करोड़ ($200 मिलियन+) तक पहुंची।

हिंदी सिनेमा के लिए उल्लेखनीय बात: 2025 में 93% हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मूल हिंदी फिल्मों से आया, डब दक्षिण भारतीय फिल्मों पर निर्भरता 31% (2024) से घटकर मात्र 7% रह गई।

मिड-बजट सिनेमा: OTT ने छीना, OTT ने दिया

20-80 करोड़ बजट वाली फिल्मों की कहानी सबसे दिलचस्प है। कोविड के बाद के कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स ने इन फिल्मों के लिए "गारंटीड डील" दी, रिलीज से पहले ही पैसे मिल जाते थे। इससे निर्माता थिएटर रिलीज का जोखिम उठाने से बचने लगे।

लेकिन 2025 में पासा पलटा। OTT प्लेटफॉर्म्स अब ज्यादा सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं। उन्होंने थिएटर-अप्रूव्ड फिल्मों को तरजीह देनी शुरू की है, जिसका मतलब है कि अच्छा थिएटरी प्रदर्शन OTT डील की कीमत बढ़ाता है। 'धुरंधर: द रिवेंज' जैसी फिल्म के डिजिटल अधिकार JioHotstar ने ₹150 करोड़ में खरीदे, जो पहली फिल्म से लगभग दोगुना था। यह बदलाव मिड-बजट फिल्मों को एक बार फिर थिएटर रिलीज की ओर धकेल रहा है।

थिएटरी विंडो: अदृश्य युद्ध जारी है

पहले फिल्में थिएटर में 8-12 हफ्ते रहती थीं। कोविड के बाद यह खिड़की सिकुड़ी। आज स्थिति यह है:

हिंदी फिल्में आम तौर पर 6-8 हफ्ते बाद OTT पर आती हैं, लेकिन कमजोर फिल्में कभी-कभी 4 हफ्ते में ही चली जाती हैं। तेलुगु और तमिल इंडस्ट्री में 3-4 हफ्ते की विंडो सामान्य हो चुकी है।

मल्टीप्लेक्स चेन्स इसका विरोध कर रही हैं। कई बड़े मल्टीप्लेक्स ने 8 हफ्ते से कम विंडो वाली फिल्मों को स्क्रीन देने से मना कर दिया। 'धुरंधर: द रिवेंज' IPL 2026 की समाप्ति के बाद (मई-जून 2026) JioHotstar पर आने का अनुमान है, यानी करीब 10 हफ्ते की थिएटरी विंडो।

थिएटर अब 'अनुभव' बेच रहे हैं

जब कंटेंट OTT पर मिलने लगा, तो थिएटर ने रणनीति बदली, वे अब सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि अनुभव बेचते हैं। IMAX ने भारत में फरवरी 2025 तक 31 स्क्रीन स्थापित किए हैं और 14 और आने वाले हैं। 4DX, रिक्लाइनर स्क्रीन, Premium Large Format (PLF), ये सब प्रीमियम टिकट के साथ F&B राजस्व बढ़ाने का तरीका हैं। PVR INOX अब फिल्म रिलीज से ज्यादा F&B और प्रीमियम फॉर्मेट से कमाई करने की ओर बढ़ रही है।

रीजनल सिनेमा: असली विजेता

अगर कोई सबसे ज्यादा फायदे में रहा, तो वह है रीजनल सिनेमा। 2024 में मलयालम सिनेमा ने पहली बार ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया और बाजार हिस्सेदारी 5% से दोगुनी होकर 10% हो गई; 2025 में यह गति बनी रही। कन्नड़ सिनेमा 2025 की एकमात्र दक्षिण भारतीय भाषा रही जिसने फुटफॉल में वृद्धि दर्ज की। गुजराती सिनेमा ने 2025 में 189% की वृद्धि के साथ ₹242 करोड़ का आंकड़ा छुआ।

OTT पर भी रीजनल कंटेंट की मांग बढ़ी है। JioHotstar और Netflix दोनों ही क्षेत्रीय भाषाओं में ओरिजिनल कंटेंट पर जोर दे रहे हैं। 'मंजुम्मेल बॉयज' (मलयालम), 'कांतारा', 'RRR' जैसी फिल्मों ने दिखाया कि भाषा अब बाधा नहीं है।

विज्ञापन बाजार: डिजिटल का बोलबाला

Ipsos के अनुसार, FY2025 में भारत का कुल विज्ञापन बाजार ₹1,11,000 करोड़ पार कर गया, जिसमें डिजिटल का हिस्सा ₹49,000 करोड़ (44% share) रहा, 20% की वार्षिक वृद्धि के साथ। FY2026 में यह 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ (कुल खर्च का 46%) तक पहुंचने का अनुमान है। CTV विज्ञापन खर्च 2022 के ₹450 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2024 में ₹1,500 करोड़ हो गया, और 2025 में ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था, 2027 तक ₹3,500 करोड़ का लक्ष्य है।

थिएटर विज्ञापन भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन डिजिटल की तुलना में उनका हिस्सा अभी बहुत कम है।

अब केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, साथ काम करने का दौर

2025-26 के आंकड़े एक स्पष्ट तस्वीर देते हैं, OTT और थिएटर अब एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि एक ही इकोसिस्टम के दो हिस्से हैं। बड़ी स्पेक्टेकल फिल्में थिएटर के लिए हैं, वहां बड़ा पर्दा, IMAX, 4DX, और सामूहिक अनुभव का कोई विकल्प नहीं। मिड-बजट और सीरीज कंटेंट OTT का प्राकृतिक घर बन रहा है।

लेकिन चुनौतियां असली हैं। फुटफॉल 2019 से 19% नीचे है और गिरावट जारी है। टिकटों की बढ़ती कीमतों के दम पर ग्रोथ हासिल करने की भी एक सीमा है। OTT प्लेटफॉर्म्स के पास 60 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 14.82 करोड़ लोग ही पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेते हैं। वहीं, दूसरी तरफ सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की संख्या लगातार घट रही है और कई थिएटर बंद हो रहे हैं।

अगले पांच साल में जो इंडस्ट्री उभरेगा, वह न पुराना थिएटर-प्रधान होगा, न पूरी तरह OTT-केंद्रित। यह होगा एक हाइब्रिड एंटरटेनमेंट अर्थव्यवस्था, जिसमें सिनेमाघर प्रीमियम अनुभव केंद्र होंगे, और OTT रोज़ की कहानियों का घर। 

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WAVES OTT ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड, दो साल से भी कम समय में हासिल की ये बड़ी उपलब्धि

प्रसार भारती के डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म WAVES OTT ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
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Friday, 05 June, 2026
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प्रसार भारती के डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म WAVES OTT ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। नवंबर 2024 में शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म ने अब 1 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने कहा कि यह उपलब्धि देश के सार्वजनिक डिजिटल मीडिया इकोसिस्टम के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय के अनुसार, यह सफलता इस बात का संकेत है कि भारत और दुनिया भर के दर्शक भरोसेमंद, समावेशी और विविधतापूर्ण कंटेंट उपलब्ध कराने वाले स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म को तेजी से अपना रहे हैं।

मंत्रालय ने बताया कि WAVES OTT के पास अब 1 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जबकि इसके डाउनलोड्स की संख्या 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा हो चुकी है। अब प्लेटफॉर्म अपने विकास के अगले चरण पर फोकस कर रहा है।

इस अगले चरण में कंटेंट साझेदारियों का विस्तार, विभिन्न डिवाइस और प्लेटफॉर्म पर पहुंच बढ़ाना, क्षेत्रीय और शैक्षणिक कंटेंट को और मजबूत करना शामिल है। साथ ही मार्च 2027 तक 2 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स का लक्ष्य भी रखा गया है।

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसार भारती ने कहा कि यह सफलता डिजिटल युग में सार्वजनिक सेवा मीडिया की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है। साथ ही यह उस सोच को भी सही साबित करती है, जिसके तहत टेलीविजन, रेडियो, ऑन-डिमांड कंटेंट, शिक्षा, संस्कृति और विरासत से जुड़ी सामग्री को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।

WAVES OTT पर फिलहाल 24 हजार से अधिक कंटेंट टाइटल और 15 हजार घंटे से ज्यादा कंटेंट उपलब्ध है। इसमें मनोरंजन, समाचार, शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और जनसेवा से जुड़ी सामग्री शामिल है।

यह प्लेटफॉर्म 140 से अधिक लाइव टीवी चैनल, 200 से ज्यादा रेडियो सेवाएं, लाइव इवेंट स्ट्रीमिंग, PM eVidya चैनलों के जरिए शैक्षणिक कंटेंट और प्रसार भारती के हजारों घंटे के आर्काइव कंटेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।

प्रसार भारती का मानना है कि WAVES OTT की यह उपलब्धि भारत में डिजिटल सार्वजनिक मीडिया की बढ़ती ताकत और स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रति बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।

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IPTV पाइरेसी नेटवर्क का भंडाफोड़, JioStar ने छत्तीसगढ़ में दर्ज कराई FIR

'जियोस्टार इंडिया' (JioStar India) ने छत्तीसगढ़ में कथित IPTV पाइरेसी नेटवर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

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Published - Monday, 01 June, 2026
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Monday, 01 June, 2026
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इमरान फ़ज़ल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेज4मीडिया ।।

'जियोस्टार इंडिया' (JioStar India) ने छत्तीसगढ़ में कथित IPTV पाइरेसी नेटवर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। कंपनी का आरोप है कि उसके टीवी चैनलों और OTT प्लेटफॉर्म 'जियोहॉटार' (JioHotstar) के कंटेंट को बिना अनुमति इंटरनेट आधारित सिस्टम के जरिए अवैध रूप से प्रसारित किया जा रहा था।

एक्सचेंज4मीडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, कोरिया जिले के बैकुंठपुर पुलिस स्टेशन में राजीव पंजियारा और Citynet Infra Pvt Ltd के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS), कॉपीराइट एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

JioStar की ओर से दर्ज शिकायत में कहा गया है कि कंपनी के कॉपीराइट वाले टीवी चैनलों और JioHotstar पर उपलब्ध कंटेंट को IPTV इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बिना किसी अधिकृत अनुमति के दोबारा प्रसारित किया जा रहा था।

30 मई 2026 को दर्ज एफआईआर के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303 और 314, कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 63 और 65 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जांच में सामने आया कथित अवैध IPTV नेटवर्क

शिकायत में कहा गया है कि JioStar अपने कई टीवी चैनलों और JioHotstar स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का संचालन करती है और उसके पास इन कंटेंट्स के विशेष कॉपीराइट और ब्रॉडकास्टिंग अधिकार हैं। कंपनी का आरोप है कि IPTV के जरिए उसके चैनलों और OTT कंटेंट का अवैध री-ट्रांसमिशन और सार्वजनिक प्रसारण किया जा रहा था, जिससे उसके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा था।

24 मई 2026 को की गई जांच के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों ने बैकुंठपुर के वार्ड नंबर 7, स्कूल पारा स्थित Citynet Infra Pvt Ltd से जुड़े एक नेटवर्क की पहचान की। एफआईआर में दावा किया गया है कि कंपनी के पास पारंपरिक केबल टीवी (CATV) नेटवर्क के जरिए कंटेंट वितरित करने की अनुमति हो सकती है, लेकिन IPTV सिस्टम, OTT री-ब्रॉडकास्टिंग, इंटरनेट प्रोटोकॉल आधारित स्ट्रीमिंग या अन्य डिजिटल माध्यमों से कंटेंट वितरित करने का कोई लाइसेंस या अधिकार नहीं था।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पता चला कि JioStar के कॉपीराइट वाले कंटेंट को IPTV चैनलों के माध्यम से अवैध रूप से प्रसारित किया जा रहा था।

Amazon Fire TV डिवाइस को बनाया गया सबूत

एफआईआर के मुताबिक जांचकर्ताओं ने कथित स्ट्रीमिंग गतिविधियों को "City Digital" Fire Stick नामक डिवाइस के जरिए रिकॉर्ड किया। यह डिवाइस Amazon Fire TV इंटरफेस से जुड़ा हुआ था और इसके जरिए विभिन्न IPTV चैनल कैटेगरी तक पहुंच बनाई जा रही थी, जहां कॉपीराइटेड कंटेंट उपलब्ध कराया जा रहा था।

जांच में मनोरंजन, फिल्म, खेल और बच्चों के कार्यक्रमों से जुड़े कई चैनलों का कथित तौर पर अवैध री-ट्रांसमिशन पाया गया।

मनोरंजन चैनलों में Star Plus, Star Bharat, Star Utsav, Colors और Colors Rishtey शामिल बताए गए हैं। फिल्म चैनलों में Star Gold, Star Gold 2, Star Gold Thrills और Star Gold Select का नाम सामने आया। वहीं खेल चैनलों में Star Sports 1, Star Sports 2, Star Sports 1 Hindi और Star Sports Select 2 शामिल थे। बच्चों के चैनलों में Disney Channel, Super Hungama, Hungama TV और Disney Junior को भी कथित तौर पर IPTV प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पाया गया।

जांचकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि इसी IPTV नेटवर्क पर CCN Aradhya 13 और CCN Aradhya नाम के स्थानीय चैनल भी प्रसारित किए जा रहे थे।

JioStar ने लगाया बड़े पैमाने पर कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप

कंपनी का कहना है कि JioHotstar का कॉपीराइटेड कंटेंट बिना किसी वैध अनुमति के 24 घंटे लगातार स्ट्रीम किया जा रहा था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित ऑपरेटर के पास JioStar के चैनलों या JioHotstar के कंटेंट को प्राप्त करने, दोबारा प्रसारित करने, स्ट्रीम करने, सार्वजनिक रूप से दिखाने या व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने की कोई अनुमति नहीं थी।

JioStar का दावा है कि यह गतिविधियां कॉपीराइटेड सामग्री के व्यावसायिक शोषण और बौद्धिक संपदा अधिकारों के अनधिकृत इस्तेमाल के दायरे में आती हैं।

कंपनी ने यह भी कहा कि डिजिटल नेटवर्क के जरिए कॉपीराइटेड कंटेंट को डाउनलोड करना, स्टोर करना, वितरित करना, दोबारा प्रसारित करना और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना कॉपीराइट कानून और आईटी कानून दोनों के तहत अपराध है।

IPTV पाइरेसी के खिलाफ बड़े अभियान का हिस्सा

यह एफआईआर IPTV आधारित पाइरेसी के खिलाफ ब्रॉडकास्टर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। IPTV पाइरेसी नेटवर्क भारत में कंटेंट चोरी के सबसे तेजी से बढ़ते तरीकों में से एक बन गए हैं।

आमतौर पर ऐसे नेटवर्क प्रीमियम टीवी चैनलों और OTT कंटेंट को इकट्ठा करके इंटरनेट आधारित ऐप्स और सेट-टॉप डिवाइस के जरिए बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं।

शिकायत में कहा गया है कि ऐसी गतिविधियों से कंटेंट मालिकों और ब्रॉडकास्टर्स को आर्थिक और प्रतिष्ठा दोनों स्तरों पर नुकसान होता है, क्योंकि इससे वैध सब्सक्रिप्शन और लाइसेंस प्राप्त वितरण नेटवर्क प्रभावित होते हैं।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में कहा गया है कि आरोपों के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक सबूत, वीडियो रिकॉर्डिंग, टाइमस्टैम्प, फॉरेंसिक फिंगरप्रिंट और अन्य तकनीकी सामग्री एकत्र कर जमा कराई गई है।

JioStar ने शिकायत के साथ कई कॉर्पोरेट दस्तावेज भी जमा किए हैं, जिनमें Star India Pvt Ltd से JioStar India Pvt Ltd में हुए बदलाव से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।

अब जांच एजेंसियां उपलब्ध सबूतों की समीक्षा करेंगी और तय करेंगी कि आरोपित पक्षों के खिलाफ कॉपीराइट, तकनीकी और संपत्ति संबंधी कानूनों के तहत आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है या नहीं।

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करण दयानिधि मारन ने लॉन्च किया तमिलनाडु का पहला माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म ‘KadhaiShorts’

इसके साथ ही ‘कधईक्लब’ (KadhaiClub) नाम से एक विशेष इकोसिस्टम भी शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्टिकल फिल्ममेकिंग और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के लिए नई प्रतिभाओं को तैयार करना है।

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Published - Friday, 29 May, 2026
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Friday, 29 May, 2026
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मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता के बीच मारन ग्रुप ने नई पहल करते हुए तमिलनाडु का पहला माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म ‘कधईशॉर्ट्स’ (KadhaiShorts) लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म की घोषणा करण दयानिधि मारन ने की। इसके साथ ही ‘कधईक्लब’ (KadhaiClub) नाम से एक विशेष इकोसिस्टम भी शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्टिकल फिल्ममेकिंग और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के लिए नई प्रतिभाओं को तैयार करना है।

‘कधईशॉर्ट्स’ को खास तौर पर मोबाइल दर्शकों के लिए डिजाइन किया गया है। प्लेटफॉर्म पर दो-दो मिनट के एपिसोड के रूप में ‘कुट्टी सीरीज’ पेश की जाएंगी, जिनमें तमिल संस्कृति, स्थानीय भावनाओं और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कहानियों को दिखाया जाएगा। लॉन्च के समय प्लेटफॉर्म पर छह अलग-अलग जॉनर की तमिल ओरिजिनल माइक्रो-ड्रामा सीरीज उपलब्ध कराई गई हैं।

कंपनी के मुताबिक, इस समय 100 से ज्यादा ओरिजिनल कंटेंट प्रोडक्शन में हैं। फिलहाल इसकी शुरुआत तमिल कंटेंट से की गई है, लेकिन चालू वित्त वर्ष के अंत तक तेलुगु, कन्नड़, हिंदी, मलयालम और बंगाली भाषाओं में भी हाइपरलोकल माइक्रो-ड्रामा लॉन्च किए जाएंगे।

दर्शकों तक प्रीमियम कंटेंट को किफायती तरीके से पहुंचाने के लिए प्लेटफॉर्म ने ‘पे-पर-सीरीज’ मॉडल अपनाया है। इसकी शुरुआती कीमत सिर्फ 20 रुपये रखी गई है। कंपनी का मानना है कि इससे हर वर्ग के दर्शकों तक डिजिटल मनोरंजन आसानी से पहुंच सकेगा।

मारन ग्रुप के वाइस चेयरमैन और ‘कधईशॉर्ट्स’ के फाउंडर करण दयानिधि मारन ने कहा, ‘दर्शकों की देखने की आदतें तेजी से बदल रही हैं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री अब उस बदलाव के साथ खुद को ढाल रही है। माइक्रो-ड्रामा सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि मोबाइल-फर्स्ट एंटरटेनमेंट का भविष्य है। हम इस क्षेत्र में सिर्फ मौजूद रहने नहीं, बल्कि नेतृत्व करने आए हैं।’

वहीं, ‘कधईशॉर्ट्स’ के सीईओ सबरीश वेंकट ने कहा कि भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है और लोग अब हाई-फ्रीक्वेंसी मोबाइल एंटरटेनमेंट की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दर्शक भावनात्मक कहानियों से दूर नहीं जा रहे, बल्कि ऐसे फॉर्मेट की तरफ बढ़ रहे हैं जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से फिट हो सके।

कंपनी हर महीने 10 नई वर्टिकल माइक्रो-ड्रामा सीरीज लॉन्च करेगी। इन सीरीज को सिनेमाई अंदाज में तैयार किया जाएगा ताकि कम समय में भी दर्शकों को मजबूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस हो सके। इसके साथ लॉन्च किए गए ‘कधईक्लब’ का उद्देश्य नए लेखकों, कलाकारों, एडिटर्स, सिनेमैटोग्राफर्स और डायरेक्टर्स को इस नए फॉर्मेट से जोड़ना है। कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म से अब तक 12 हजार से ज्यादा सदस्य जुड़ चुके हैं।

कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि मार्च 2027 तक 200 से ज्यादा प्रोफेशनल्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा और 4,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे। इसके अलावा मनोरंजन और सर्विस सेक्टर में 10 हजार से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की भी संभावना जताई गई है। कधईशॉर्ट्स भविष्य में ब्रैंड इंटीग्रेशन के नए मॉडल पर भी काम करेगा, जिसमें ब्रैंड्स को पारंपरिक विज्ञापन की बजाय कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा।

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OTTplay बंद करने के बाद HMVL का नया दांव, ब्रिटेन की कंपनी में करेगी निवेश

‘हिन्दुस्तान’ अखबार प्रकाशित करने वाली कंपनी हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने OTTplay कारोबार बंद करने के बाद अब नए डिजिटल बिजनेस पर बड़ा दांव लगाया है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 29 May, 2026
Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
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‘हिन्दुस्तान’ अखबार प्रकाशित करने वाली कंपनी हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने OTTplay कारोबार बंद करने के बाद अब नए डिजिटल बिजनेस पर बड़ा दांव लगाया है। कंपनी ने ब्रिटेन की लीगल टेक कंपनी Assetvault Limited (AasaanWill) में करीब 21.66 करोड़ रुपये तक निवेश करने का फैसला किया है।

कंपनी के बोर्ड ने 28 मई 2026 को हुई बैठक में इस निवेश को मंजूरी दी। HMVL यह निवेश AasaanWill के इक्विटी शेयर खरीदकर करेगी। कंपनी का कहना है कि यह निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न हासिल करने और अपने मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल कर नए कारोबार को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

AasaanWill ऑनलाइन Will Writing और succession planning सेवाएं देने वाली कंपनी है। यह प्लेटफॉर्म भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीयों, खासकर NRI परिवारों को डिजिटल तरीके से कानूनी वसीयत बनाने की सुविधा देता है। कंपनी की स्थापना 2016 में हुई थी और इसका मुख्य फोकस ऑनलाइन लीगल सेवाओं पर है।

HMVL यह निवेश दो चरणों में करेगी। पहले चरण में कंपनी करीब 11.16 करोड़ रुपये का निवेश कर लगभग 7 फीसदी हिस्सेदारी ले सकती है। दूसरे चरण का निवेश भविष्य की वैल्यूएशन के आधार पर तय होगा। इस पूरी डील के अगस्त 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। कंपनी ने कहा है कि निवेश से जुड़े जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल RBI और FEMA नियमों के तहत लिए जाएंगे।

इसके साथ ही HMVL ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड नतीजों को भी मंजूरी दी। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 739.64 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 673.10 करोड़ रुपये था। वहीं कंपनी के मुख्य कारोबार से टैक्स चुकाने के बाद 141.08 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ।

हालांकि OTTplay कारोबार बंद करने का असर कंपनी के नतीजों पर साफ दिखाई दिया। HMVL ने मार्च 2026 से OTTplay के नए सब्सक्रिप्शन बंद करने का फैसला लिया था। इस बंद हो रहे कारोबार की वजह से कंपनी को पूरे साल में करीब 92.39 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा कंपनी को कुछ पुराने समझौतों और जिम्मेदारियों के लिए अतिरिक्त पैसा भी अलग रखना पड़ा।

कंपनी ने यह भी बताया कि नए श्रम कानून लागू होने के कारण ग्रेच्युटी और एम्प्लॉयी लाभ से जुड़े खर्च बढ़े हैं। कंपनी ने इस अतिरिक्त खर्च को एक विशेष खर्च (Exceptional Item) के रूप में दिखाया है।

HMVL ने इस साल अपने शेयरधारकों को डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है। वहीं कंपनी के ऑडिटर्स ने भी कंपनी के वित्तीय नतीजों को सही माना है और किसी बड़ी गड़बड़ी या आपत्ति की बात नहीं कही है।

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तमिल सिनेमा के समर्थन में कमल हासन की बड़ी पहल, सरकारी OTT प्लेटफॉर्म की उठाई मांग

अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम प्रमुख कमल हासन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात कर तमिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े छह बड़े मुद्दों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 18 May, 2026
Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
KamalHasaan210

अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम प्रमुख कमल हासन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात कर तमिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े छह बड़े मुद्दों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इनमें सबसे प्रमुख मांग राज्य सरकार की अपनी ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरू करने की रही।

कमल हासन ने अपने एक्स अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि तमिल दर्शकों को सस्ती दरों पर तमिल फिल्में, स्वतंत्र सिनेमा और डॉक्यूमेंट्री उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार को अपना ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरू करना चाहिए।

उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री पर बढ़ते खर्च का भी मुद्दा उठाया। हासन ने सरकार से स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले 4 फीसदी एंटरटेनमेंट टैक्स को खत्म करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे तमिल फिल्म इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिलेगी।

कमल हासन ने पायरेसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में एक विशेष एंटी-पायरेसी टीम बनाई जानी चाहिए, जो ऑनलाइन लीक होने वाले कंटेंट को तुरंत हटाने की ताकत रखे।

उन्होंने राज्य के सिनेमाघरों में सभी फिल्मों के लिए रोज पांच शो चलाने की अनुमति देने की भी मांग की। हासन के मुताबिक इससे थिएटर मालिकों की कमाई बढ़ेगी और फिल्म प्रदर्शन कारोबार को सहारा मिलेगा।

इसके अलावा उन्होंने फिल्मों के ओटीटी रिलीज के लिए आठ हफ्ते की अनिवार्य विंडो तय करने की मांग की, ताकि थिएटर मालिकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को नुकसान न हो।

कमल हासन ने फिल्म प्रोडक्शन इंसेंटिव स्कीम शुरू करने की भी अपील की। उनका कहना है कि इससे तमिलनाडु फिर से देश का बड़ा फिल्म प्रोडक्शन हब बन सकता है, रोजगार बढ़ेगा और पर्यटन को भी फायदा मिलेगा।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि सिनेमा तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है और लाखों परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी है।

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OTT का बढ़ता खर्च: क्या दर्शक अब सब्सक्रिप्शंस से बनाने लगा है दूरी?

भारतीय दर्शक अब एक नई तरह की थकान महसूस कर रहा है। इंडस्ट्री की भाषा में इसे “Subscrption Fatigue” कहा जाता है, यानी OTT खर्चों से थकता दर्शक।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 14 May, 2026
Last Modified:
Thursday, 14 May, 2026
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मान लीजिए आप एक सामान्य शहरी परिवार हैं। महीने के अंत में बिजली का बिल, किराया और राशन जैसे जरूरी खर्चों के साथ अब एक नई जिम्मेदारी भी जुड़ गई है- OTT सब्सक्रिप्शंस। Netflix, Amazon Prime Video, JioHotstar, Sony LIV, Zee5 जैसे प्लेटफॉर्म्स, और अगर घर में क्रिकेट देखने वाले हैं तो अलग से स्पोर्ट्स पैक। ऐसे में यह खर्च आसानी से ₹1,500 प्रति महीने के पार पहुंच जाता है।

कोरोना काल के दौरान OTT प्लेटफॉर्म्स भारत में मनोरंजन का सबसे बड़ा माध्यम बनकर उभरे। लेकिन अब स्थिति बदल रही है। हर प्लेटफॉर्म अलग सब्सक्रिप्शन मांग रहा है, हर बड़ा कंटेंट किसी एक ही ऐप पर “एक्सक्लूसिव” हो गया है और हर साल कीमतें भी बढ़ रही हैं। इसका असर यह है कि भारतीय दर्शक अब एक नई तरह की थकान महसूस कर रहा है। इंडस्ट्री की भाषा में इसे “Subscrption Fatigue” कहा जाता है, यानी OTT खर्चों से थकता दर्शक।

पहले एक बिल था, अब एक दर्जन ऐप्स

केबल टीवी के दौर में मामला काफी आसान था- एक DTH कनेक्शन, एक मंथली रिचार्ज और सैकड़ों चैनल्स। लेकिन OTT के दौर में यह पूरा फॉर्मूला बदल गया है। अब हर प्लेटफॉर्म का अपना कंटेंट किला है और अपनी अलग दीवारें हैं।

Ormax Media की ताजा रिपोर्ट (2025) के मुताबिक भारत में OTT दर्शकों की संख्या 60.12 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यानी देश की 41% आबादी किसी न किसी रूप में ऑनलाइन वीडियो देखती है। इनमें से पेड सब्सक्रिप्शंस की संख्या 14.82 करोड़ है। भारत का OTT मार्केट 2025 में $5.4 बिलियन का हो चुका है और 2034 तक इसके $28.1 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

हालांकि इन चमकदार आंकड़ों के पीछे एक असुविधाजनक सच भी छिपा है। भारतीय दर्शक अब प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती संख्या और लगातार बढ़ती कीमतों से ऊबने लगा है। 

Subscrption Fatigue क्या है?

Subscrption Fatigue वह मनोवैज्ञानिक थकान है, जो तब पैदा होती है जब दर्शकों को लगने लगता है कि OTT प्लेटफॉर्म्स की संख्या जरूरत से ज्यादा हो गई है। लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि कौन-सा कंटेंट किस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

इसके साथ ही हर प्लेटफॉर्म अलग से पेमेंट मांग रहा है। किसी एक शो के लिए एक ऐप, तो दूसरी फिल्म के लिए दूसरा ऐप लेना पड़ता है। कंटेंट पूरी तरह बिखर गया है- एक शो यहां, दूसरा वहां।

दर्शकों की परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती। हर महीने OTT पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन कई लोगों को उसके मुकाबले उतनी “वैल्यू” महसूस नहीं होती। यही वजह है कि लोग अब OTT सब्सक्रिप्शंस से थकान महसूस करने लगे हैं।

यह सिर्फ भारत की समस्या नहीं है। अमेरिका जैसे मैच्योर OTT मार्केट्स में भी लोग अब अपने सब्सक्रिप्शंस को रोटेट करने लगे हैं। यानी एक महीने Netflix लिया, अगले महीने Disney+, फिर जरूरत खत्म होने पर कैंसल कर दिया। भारत में भी यही पैटर्न धीरे-धीरे उभरता दिखाई दे रहा है।

भारतीय घर का मंथली OTT बिल: असली हिसाब

आइए एक सामान्य शहरी परिवार का हिसाब देखते हैं, जो सभी मुख्य OTT प्लेटफॉर्म्स सब्सक्राइब करती है:

प्लेटफॉर्म

प्लान (2026)

Netflix (Standard)

₹499/माह

Amazon Prime Video

₹299/माह

JioHotstar (Premium)

₹299/माह

Sony LIV (Premium monthly)

₹399/माह

Zee5 (All Languages + KidZ)

₹299/माह

कुल मासिक खर्च (approx.)

~₹1,795/माह

यानी सिर्फ इन पांच OTT प्लेटफॉर्म्स पर ही अगर सालाना पैकेज लिया जाए, तो दर्शकों का खर्च लगभग ₹8,000 से ₹10,000 तक पहुंच जाता है। इसमें अगर Crunchyroll (anime), Lionsgate Play या कोई रीजनल OTT प्लेटफॉर्म भी जोड़ दिया जाए, तो यह खर्च और ज्यादा बढ़ जाता है।

MiQ की Advanced TV Report India के अनुसार भारतीय दर्शक औसतन 3 स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स subscribe करते हैं और इस पर करीब ₹1,360 प्रति माह खर्च करते हैं। यह आंकड़ा भारत के मध्यम वर्ग के लिए किसी बड़े बोझ से कम नहीं है, क्योंकि जरूरी खर्चों के बाद बचने वाली कमाई पर पहले से ही कई जिम्मेदारियां होती हैं।

Netflix ने मार्च 2026 में अमेरिका में अपने प्लान्स की कीमत एक बार फिर बढ़ाई। पिछले 6 साल में यह 5वीं बार है, जब कंपनी ने कीमतों में इजाफा किया है। हालांकि भारत में Netflix के प्लान्स फिलहाल नहीं बदले गए हैं- Mobile ₹149, Standard ₹499 और Premium ₹649- लेकिन पिछले ट्रेंड बताते हैं कि अमेरिका में कीमतें बढ़ने के 6-12 महीने बाद उसका असर भारत में भी देखने को मिलता है।

वहीं, JioHotstar ने जनवरी 2026 से अपने प्रीमियम सालाना प्लान की कीमत ₹1,499 से बढ़ाकर ₹2,199 कर दी। यानी इसमें करीब 47% की बढ़ोतरी हुई है।

Amazon Prime Video ने June 2025 से अपने स्टैंडर्ड प्लान में विज्ञापन दिखाने शुरू कर दिए हैं। अब विज्ञापन मुक्त कंटेंट देखने के लिए यूजर्स को ₹699 प्रति वर्ष या ₹129 प्रति माह अलग से चुकाने पड़ रहे हैं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या कीमत को लेकर संवेदनशील भारतीय बाजार यह बढ़ता OTT खर्च लंबे समय तक झेल पाएगा?

Telecom Bundling: थकान का अस्थायी इलाज

OTT इंडस्ट्री की असली लाइफलाइन फिलहाल Telecom Bundling बनती जा रही है।

Reliance Jio का ₹749 वाला पोस्टपेड प्लान Netflix Basic, Amazon Prime Lite और JioHotstar तीनों का एक्सेस एक साथ देता है। वहीं Airtel के Xstream bundles में भी कई OTT सर्विसेज शामिल हैं। यानी बड़ी संख्या में यूजर्स को OTT का डायरेक्ट बिल अलग से नहीं भरना पड़ता, क्योंकि उसका खर्च उनके मोबाइल रिचार्ज में ही जुड़ा होता है।

यह मॉडल इसलिए कारगर माना जा रहा है, क्योंकि इसमें यूज़र्स को अलग-अलग पेमेंट करने का झंझट नहीं रहता। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों की सब्सक्राइबर रिटेंशन बेहतर होती है और OTT प्लेटफॉर्म्स को एक भरोसेमंद सब्सक्राइबर बेस मिल जाता है।

हालांकि यह समाधान पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। Bundled प्लान्स में अक्सर सिर्फ बेसिक टियर ही मिलता है। HD या 4K क्वॉलिटी और प्रीमियम प्लान्स के लिए यूज़र्स को अलग से पैसे खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा जैसे-जैसे टेलीकॉम प्लान्स महंगे हो रहे हैं, वैसे-वैसे यह “फ्री” OTT भी लोगों को महंगा पड़ने लगा है।

पॉसवर्ड शेयरिंग: OTT का साइलेंट क्राइसेस

भारत में एक OTT सब्सक्रिप्शन को घर के कई लोग, दोस्त और रिश्तेदार मिलकर इस्तेमाल करते हैं। यह कोई सिक्रेट नहीं, बल्कि एक आम सामाजिक प्रैक्टिस बन चुकी है।

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर OTT प्लेटफॉर्म्स पॉसवर्ड शेयरिंग को प्रभावी तरीके से रोक दें, तो वे अपने पेड सब्सक्राइबर बेस को दोगुना तक बढ़ा सकते हैं।

Netflix ने पॉसवर्ड शेयरिंग रोकने के लिए दुनियाभर में सख्ती शुरू की थी। इसका फायदा कंपनी को तुरंत मिला। सिर्फ Q2 2023 में ही Netflix को 59 लाख नए सब्सक्राइबर्स मिले, जबकि इससे एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी ने 10 लाख सब्सक्राइबर्स खो दिए थे।

लेकिन भारत में यह तरीका उतना आसान नहीं है। यहां सबसे बड़ी समस्या एफोर्डबिलिटी (affordability) यानी लोगों की खर्च करने की क्षमता है। अगर कोई परिवार अब तक एक ही Netflix अकाउंट मिल-बांटकर चला रहा था और अब सभी को अलग सब्सक्रिप्शन लेना पड़े, तो कई लोग सीधा कहेंगे- “Netflix बंद कर दो।”

इसी वजह से भारत में पॉसवर्ड शेयरिंग को पायरेसी का एक “सॉफ्ट वर्जन” माना जाने लगा है। लोग पैसे कम खर्च करना चाहते हैं, लेकिन अपने पसंदीदा कंटेंट को छोड़ना भी नहीं चाहते।

 Ad-Supported OTT: फ्री का जादू वापस आ रहा है

OTT इंडस्ट्री इस समय एक बड़ा U-turn लेती दिखाई दे रही है। जिन प्लेटफॉर्म्स ने शुरुआत में सिर्फ सब्सक्रिप्शन मॉडल के दम पर अपनी पहचान बनाई थी, वे अब तेजी से ऐडवर्टाइजिंग की तरफ लौट रहे हैं।

SVOD यानी Subscription Video On Demand- यह Netflix-style पेड मॉडल है, जहां दर्शकों को कंटेंट देखने के लिए हर महीने या सालाना शुल्क देना पड़ता है। वहीं AVOD यानी ऐडवर्टाइजिंग Video On Demand- YouTube-style मॉडल है, जिसमें कंटेंट मुफ्त होता है, लेकिन बीच-बीच में विज्ञापन दिखाए जाते हैं।

अब OTT इंडस्ट्री का झुकाव तेजी से AVOD मॉडल की तरफ बढ़ रहा है।

Amazon Prime Video ने जून 2025 में अपने स्टैंडर्ड प्लान को AVOD मॉडल में बदल दिया। इसका मतलब यह है कि अब रेगुलर प्राइम मेंबर्स को भी कंटेंट देखते समय विज्ञापन दिखाई देते हैं। अगर कोई यूज़र विज्ञापन-मुक्त अनुभव चाहता है, तो उसे इसके लिए अलग से पैसे देने पड़ते हैं।

वहीं Netflix का ad-supported tier भी तेजी से नए सब्सक्राइबर्स जोड़ रहा है। FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के मुताबिक AVOD अब OTT रेवेन्यू ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन बनता जा रहा है और इसकी रफ्तार SVOD मॉडल से भी ज्यादा तेज है।

इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत मूल रूप से फ्री कंटेंट का बाजार माना जाता है। YouTube, MX Player और JioCinema के फ्री cricket स्ट्रीमिंग एक्सपेरिमेंट्स ने यह बात साफ कर दी है।

IPL 2023 में जब JioCinema ने फ्री स्ट्रीमिंग शुरू की, तो टूर्नामेंट के पहले 17 मैचेस में ही 550 करोड़ cumulative video views दर्ज किए गए। वहीं फाइनल मुकाबले के दौरान एक साथ 3.2 करोड़ concurrent व्युअर्स जुड़े, जो एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड था। यह वह स्केल है, जहां तक किसी भी पेड OTT प्लेटफॉर्म का पहुंचना बेहद मुश्किल माना जाता है।

इसी वजह से माना जा रहा है कि भारत में सिर्फ पैसे देकर चलने वाला OTT मॉडल लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।

Sports राइट्स: सबसे बड़ी Fragmentation की जड़

आज OTT की दुनिया में दर्शकों को अपनी पसंद के कंटेंट के हिसाब से अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स का सब्सक्रिप्शन लेना पड़ रहा है।

अगर आप क्रिकेट फैन हैं, तो JioHotstar जरूरी है, क्योंकि IPL राइट्स उसी के पास हैं। अगर आप फुटबॉल देखना पसंद करते हैं, तो उसके लिए अलग प्लेटफॉर्म चाहिए। WWE देखने वालों को Sony LIV लेना पड़ता है। Anime पसंद करने वाले दर्शकों के लिए Crunchyroll जरूरी हो जाता है। वहीं Hollywood का लेटेस्ट कंटेंट देखने के लिए Netflix या Prime का सहारा लेना पड़ता है।

यानी अब दर्शकों को कंटेंट के हिसाब से अलग-अलग OTT सब्सक्रिप्शंस लेने पड़ रहे हैं।

केबल टीवी के दौर में स्थिति काफी अलग थी। उस समय “one pack, many channels” का मॉडल चलता था। लेकिन OTT के दौर में अब “many ऐप्स, many bills” नई रियलटी बनती जा रही है।

स्पोर्ट्स राइट्स को लेकर प्लेटफॉर्म्स के बीच होड़ ने यह समस्या और बढ़ा दी है। अब लगभग हर बड़ी स्पोर्ट्स लीग किसी एक OTT प्लेटफॉर्म पर ही देखने को मिलती है। ऐसे में दर्शकों के पास दो ही रास्ते बचते हैं- या तो उस प्लेटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन लें, या फिर अपना पसंदीदा मैच और कंटेंट छोड़ दें।

रीजनल OTT: दिल जीता, जेब नहीं

Regional OTT: दिल जीता, जेब नहीं

भारत कई भाषाओं वाला देश है और रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स ने इस बात को अच्छी तरह समझा है।

Hoichoi (बंगाली), ManoramaMAX (मलयालम), Sun NXT (तमिल, तेलुगु) और Chaupal (पंजाबी) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने अपनी-अपनी भाषाओं के दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है।

Market Research Future के मुताबिक 2025 में रीजनल language content में 40% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह trend साफ दिखाता है कि दर्शक अपनी भाषा में कंटेंट देखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

लेकिन यहां भी सबसे बड़ी समस्या वही है- हर रीजनल ऐप का अलग subscription।

उदाहरण के तौर पर, अगर मुंबई में रहने वाला कोई मराठी परिवार Bengali content भी देखना चाहता है, तो उसे national OTT प्लेटफॉर्म्स के अलावा दो रीजनल ऐप्स का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स अपने survival के लिए telecom bundling या national aggregation का रास्ता अपनाएंगे? 2026 में यह OTT इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा strategic सवाल माना जा रहा है।

Aggregator ऐप्स: Cable Operator की वापसी?

OTT इंडस्ट्री में अब एक नई संभावना भी दिखाई दे रही है। जैसे पहले cable operators एक ही subscription में सैकड़ों चैनल्स उपलब्ध कराते थे, वैसे ही अब OTT aggregator ऐप्स का चलन बढ़ सकता है।

Tata Play Binge पहले से इस मॉडल पर काम कर रही है। इसमें users को एक ही app में कई OTT प्लेटफॉर्म्स का एक्सेस और एक ही billing system मिलता है।

Smart TV ecosystems और broadband bundles में भी यह trend तेजी से दिखाई देने लगा है।

अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर सफल हो जाता है, तो यह subscription fatigue का सबसे practical समाधान बन सकता है। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि OTT प्लेटफॉर्म्स आपस में revenue share करने के लिए कितने तैयार होते हैं।

Connected TV: Big Screen पर Big Business

सब्सक्रिप्शन fatigue के बीच एक बड़ा बदलाव Connected TV यानी CTV के रूप में भी देखने को मिल रहा है।

Ormax की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में active CTV users की संख्या 12.92 करोड़ तक पहुंच गई है। यह 2024 के मुकाबले 87% की बड़ी छलांग है।

FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के अनुसार यह करीब 6.8 करोड़ CTV households तक फैल चुका है, जिनमें से 4 करोड़ weekly active हैं।

इसी रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में CTV ऐडवर्टाइजिंग revenues 42% बढ़कर ₹9,900 करोड़ तक पहुंच गए।

वहीं WPP की TYNY 2026 report का अनुमान है कि 2026 में CTV ऐडवर्टाइजिंग में 22% की growth देखने को मिलेगी।

यह advertisers के लिए एक नई opportunity बनकर उभर रहा है। जैसे-जैसे लोग पेड सब्सक्रिप्शंस से हटकर फ्री और ad-supported प्लेटफॉर्म्स की तरफ बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे ब्रैंड्स को बड़े स्क्रीन पर टार्गेटेड ऐडवर्टाइजिंग का मौका मिल रहा है।

अनुमान है कि CTV ऐडवर्टाइजिंग 2026 तक ₹8,000 करोड़ तक पहुंच सकती है।

Consumer Psychology: “कुछ देखने को नहीं” का Paradox

OTT इंडस्ट्री में एक दिलचस्प स्थिति भी देखने को मिलती है। आज 600 करोड़ वीडियोज, हजारों शोज और दर्जनों प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय दर्शक अक्सर शिकायत करता है- “कुछ देखने को नहीं।”

यह स्थिति जरूरत से ज्यादा कंटेंट होने की वजह से बनती है। जब देखने के लिए बहुत ज्यादा विकल्प होते हैं, तो लोग समझ नहीं पाते कि आखिर क्या देखें।

Auto-debit frustration, मंथली सब्सक्रिप्शन रिमाइंडर्स और अलग-अलग ऐप्स में कंटेंट ढूंढने की परेशानी- यह सब मिलकर व्युअर्स को मानसिक रूप से थका देता है।

MiQ की रिपोर्ट के मुताबिक 67% भारतीय व्युअर्स आने वाले समय में अपने streaming सब्सक्रिप्शंस बढ़ाने की सोच रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ वही दर्शक प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती कीमतों से नाराज भी हैं।

यही उलझन भारतीय OTT बाजार की सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

Advertisers के लिए क्या मायने?

अगर दर्शक पेड सब्सक्रिप्शंस कम करते हैं और फ्री या ad-supported प्लेटफॉर्म्स की तरफ जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा फायदा डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री को मिल सकता है।

FICCI-EY की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग 2025 में 26% बढ़कर ₹94,700 करोड़ ($11.4 बिलियन) तक पहुंच गई। अनुमान है कि 2028 तक यह आंकड़ा ₹1,39,000 करोड़ तक पहुंच जाएगा।

YouTube अकेले 2030 तक भारत में $3.05 बिलियन का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू जनरेट करेगा।

OTT प्लेटफॉर्म्स पर ऐड इन्वेंट्री बढ़ने से ब्रैंड्स को टार्गेटेड और डेटा संचालित वीडियो ऐडवर्टाइजिंग का बेहतर मौका मिलेगा। वहीं Connected TV पर प्रीमियम ऐप प्लेसमेंट्स की वैल्यू भी लगातार बढ़ेगी।

OTT का Next Phase: क्या होगा आगे?

2026 और उसके बाद भारत का OTT landscape कई बड़े बदलावों से गुजर सकता है।

Consolidation: छोटे OTT प्लेटफॉर्म्स या तो बड़े प्लेटफॉर्म्स में merge हो सकते हैं या फिर बाजार से बाहर हो सकते हैं। बढ़ते competitive pressure में survival आसान नहीं रहेगा।

Flexible Pricing:  भविष्य में वीकली प्लान्स, event-based सब्सक्रिप्शंस (जैसे सिर्फ IPL सीजन के लिए) और माइक्रो-पेमेंट्स जैसे एक्सपेरिमेंट्स बढ़ सकते हैं।

Hybrid Models का विस्तार: फ्री + विज्ञापन वाला टियर लगभग हर प्लेटफॉर्म पर स्टैंडर्ड बन सकता है। वहीं सिर्फ पेड मॉडल धीरे-धीरे लग्जरी सेगमेंट तक सीमित हो सकता है।

AI-Powered Personalization: आने वाले समय में OTT प्लेटफॉर्म्स की कंटेंट सुझाव इतनी बेहतर हो सकती है कि लोगों को अलग-अलग ऐप्स पर जाकर कंटेंट ढूंढने की जरूरत न पड़े। उन्हें एक ही जगह अपनी पसंद का ज्यादा कंटेंट आसानी से मिल सकता है।

MPA यानी Media Partners Asia के मुताबिक 2030 तक भारत में SVOD सब्सक्रिप्शंस की संख्या 357 मिलियन तक पहुंच सकती है। इसके साथ भारत, China को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा SVOD सब्सक्रिप्शन मार्केट बन सकता है। लेकिन यह तभी संभव होगा, जब OTT प्लेटफॉर्म्स सही कीमत पर अच्छा कंटेंट देकर दर्शकों को बेहतर अनुभव दे पाएंगे।

बैलेंस ही असली जवाब

भारत में OTT की कहानी अब सिर्फ technology और entertainment तक सीमित नहीं रह गई है। यह लोगों की बदलती आदतों और डिजिटल मनोरंजन के बदलते कारोबार की कहानी बन चुकी है।

एक तरफ देश में 60 करोड़ से ज्यादा OTT व्युअर्स हैं, Connected TV की पहुंच तेजी से बढ़ रही है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा SVOD मार्केट बनने की तरफ बढ़ रहा है। लेकिन दूसरी तरफ OTT प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती कीमतें, अलग-अलग ऐप्स में बंटा कंटेंट, पॉसवर्ड शेयरिंग की समस्या और बढ़ता खर्च लोगों को परेशान भी कर रहा है।

मिडिल क्लास दर्शक हर महीने यही सोचता है- “इस बार कौन सा OTT बंद करूं?”

यही वजह है कि भारत में OTT का भविष्य सिर्फ महंगे सब्सक्रिप्शंस पर नहीं टिका होगा। आने वाले समय में वही प्लेटफॉर्म ज्यादा सफल होंगे, जो कम कीमत, अच्छे कंटेंट, विज्ञापन और आसान एक्सेस के बीच सही संतुलन बना पाएंगे।

जो प्लेटफॉर्म दर्शकों की जरूरत और उनकी जेब- दोनों को समझेगा, वही सबसे आगे निकलेगा।

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प्रसार भारती के ओटीटी प्लेटफॉर्म ‘Waves’ पर कानूनी विवाद गहराया

प्रसार भारती के OTT प्लेटफॉर्म ‘Waves’ को लेकर TDSAT में कानूनी विवाद बढ़ गया है। मामला अब OTT प्लेटफॉर्म्स पर टीवी चैनलों की स्ट्रीमिंग के नियमन और अधिकार क्षेत्र तक पहुंच गया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 13 May, 2026
Last Modified:
Wednesday, 13 May, 2026
prasarbharti

प्रसार भारती (Prasar Bharati) के OTT प्लेटफॉर्म ‘Waves’ को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भारत में OTT और पारंपरिक प्रसारण नियमों के बीच बड़े कानूनी और नीतिगत टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। मामला दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय अधिकरण (TDSAT) में चल रहा है, जहां इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) ने प्रसार भारती का समर्थन किया है।

विवाद की शुरुआत ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) की याचिका से हुई, जिसमें ‘Waves’ पर इंटरनेट के जरिए टीवी चैनलों की स्ट्रीमिंग को रोकने की मांग की गई है। AIDCF का आरोप है कि यह सेवा Uplinking और Downlinking Guidelines 2022 का उल्लंघन करती है और इससे लाइसेंस प्राप्त केबल नेटवर्क्स के कारोबार पर असर पड़ रहा है।

हालांकि 12 मई को हुई सुनवाई में प्रसार भारती ने इस याचिका का कड़ा विरोध किया। उसने कहा कि AIDCF केवल ‘Waves’ को निशाना बना रहा है, जबकि वही कंटेंट YouTube और अन्य निजी OTT प्लेटफॉर्म्स पर भी खुले तौर पर उपलब्ध है। प्रसार भारती ने दलील दी कि ‘Waves’ केवल उसी डिजिटल वितरण मॉडल का हिस्सा है, जिसे कई ब्रॉडकास्टर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से अपना रहे हैं।

मामले में IBDF ने भी TDSAT के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया। संगठन का कहना है कि OTT सेवाएं TRAI के पारंपरिक ब्रॉडकास्टिंग डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेमवर्क के दायरे में नहीं आतीं। IBDF ने TRAI के 2017 के टैरिफ और इंटरकनेक्शन नियमों का हवाला देते हुए कहा कि OTT प्लेटफॉर्म्स को कभी “डिस्ट्रिब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर” (DPO) नहीं माना गया।

दूसरी ओर AIDCF का कहना है कि OTT पर टीवी चैनलों को उनके लोगो और ब्रांडिंग के साथ दिखाया जाना केबल सेवाओं का सीधा विकल्प बन रहा है। खासकर छोटे शहरों और कस्बों में दर्शक चैनलों को उनके ब्रांड नाम से पहचानते हैं, जिससे केबल सब्सक्रिप्शन प्रभावित हो सकते हैं।

प्रसार भारती ने अपने जवाब में बताया कि ‘Waves’ पर 88 कंटेंट प्रोवाइडर्स और चैनल्स को औपचारिक समझौतों के तहत जोड़ा गया है। उसने यह भी कहा कि याचिका में इन कंटेंट पार्टनर्स को पक्षकार नहीं बनाया गया, जबकि किसी भी अंतरिम आदेश का सीधा असर उनके व्यावसायिक हितों पर पड़ेगा।

मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि यह मामला केवल ‘Waves’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि भारत में इंटरनेट आधारित टीवी स्ट्रीमिंग को मौजूदा प्रसारण कानूनों के तहत नियंत्रित किया जा सकता है या नहीं। मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 को होगी।

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2 मिनट की कहानी: क्या माइक्रो ड्रामा ऐप्स OTT का अगला बड़ा पड़ाव हैं?

सुबह नींद खुलते ही मोबाइल स्क्रीन ऑन हो जाती है। कोई चाय पीते-पीते दो मिनट का एपिसोड देख रहा है, तो कोई ऑफिस जाते वक्त मेट्रो में अगला पार्ट। मोबाइल स्क्रीन पर यह नई आदत सिर्फ टाइमपास नहीं है।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 12 May, 2026
Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
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सुबह नींद खुलते ही मोबाइल स्क्रीन ऑन हो जाती है। कोई चाय पीते-पीते दो मिनट का एपिसोड देख रहा है, तो कोई ऑफिस जाते वक्त मेट्रो में अगला पार्ट। लंच ब्रेक में कुछ मिनट की स्क्रॉलिंग, फिर रात को सोने से पहले “बस एक एपिसोड और…”।

मोबाइल स्क्रीन पर यह नई आदत सिर्फ टाइमपास नहीं है। यह भारत में तेजी से बदलती डिजिटल एंटरटेनमेंट संस्कृति की कहानी है और इस बदलाव का नया चेहरा है- ‘माइक्रो ड्रामा’ (Micro Drama)। छोटे-छोटे एपिसोड, तेज कहानी, लगातार Cliffhanger और मोबाइल-फर्स्ट फॉर्मेट… यही वजह है कि माइक्रो ड्रामा आज भारत में सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल कंटेंट फॉर्मेट्स में शामिल हो चुका है।

VC फर्म Lumikai की ‘State of India Interactive Media Report 2025’ के मुताबिक, भारत का माइक्रो ड्रामा मार्केट अपने पहले ही साल में लगभग 300 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस सेगमेंट ने करीब 45 करोड़ डाउनलोड और लगभग 10 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स (MAUs) हासिल किए हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह बाजार 4.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। 

यह सिर्फ एक नया OTT ट्रेंड नहीं है। यह दर्शकों की बदलती आदतों, मोबाइल-फर्स्ट एंटरटेनमेंट और सोशल मीडिया आधारित कंटेंट डिस्कवरी का नया दौर है।

Reels Culture से Micro Drama तक

भारत में Short Video Culture पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। TikTok के जाने के बाद Instagram Reels, YouTube Shorts और Moj जैसे प्लेटफॉर्म्स ने लोगों को छोटे वीडियो देखने की आदत डाल दी। अब वही आदत कहानी-आधारित कंटेंट में बदल रही है।

पहले OTT पर दर्शक 40-50 मिनट की वेब सीरीज देखते थे। अब वही दर्शक 1 से 3 मिनट के एपिसोड में पूरी कहानी देखना चाहते हैं। माइक्रो ड्रामा इसी बदलती Viewing Habit का परिणाम है।

इस फॉर्मेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह मोबाइल स्क्रीन के हिसाब से बनाया गया है। वीडियो Vertical Format में शूट होते हैं। एपिसोड छोटे होते हैं। कहानी तेज गति से आगे बढ़ती है और हर एपिसोड किसी बड़े मोड़ पर खत्म होता है, ताकि दर्शक अगला पार्ट तुरंत देखने लगे।

इसी वजह से माइक्रो ड्रामा का Consumption Pattern पारंपरिक OTT से बिल्कुल अलग है। लोग इसे TV पर बैठकर नहीं, बल्कि दिनभर छोटे-छोटे ब्रेक्स (Breaks) में देखते हैं।

Feed में मिलता है कंटेंट, Search में नहीं

माइक्रो ड्रामा की सफलता की सबसे बड़ी वजह उसका डिस्कवरी पैटर्न है। Meta और Ormax Media की संयुक्त रिपोर्ट ‘Micro Dramas: The India Story’ के मुताबिक, 89% दर्शक माइक्रो ड्रामा को Social Media Feeds और Recommendations के जरिए खोजते हैं। यानी लोग इन्हें Netflix की तरह Search नहीं करते, बल्कि Instagram या Facebook स्क्रॉल करते-करते देखना शुरू करते हैं।  

रिपोर्ट के अनुसार, 65% दर्शकों ने पिछले एक साल के भीतर ही माइक्रो ड्रामा देखना शुरू किया है। रिसर्च नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 14 राज्यों में 2,000 लोगों और 50 गहन इंटरव्यू के आधार पर की गई थी। यानी यह पूरा इकोसिस्टम अभी नया है, लेकिन इसकी ग्रोथ स्पीड बेहद तेज है।

भारत का नया मोबाइल-फर्स्ट एंटरटेनमेंट

Lumikai की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या 87.7 करोड़ तक पहुंच चुकी है। यही वजह है कि मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट तेजी से बढ़ रहा है। माइक्रो ड्रामा इसी मोबाइल-फर्स्ट बिहेवियर के हिसाब से बनाया गया फॉर्मेट है।

Meta-Ormax रिपोर्ट बताती है कि दर्शक हर हफ्ते औसतन 3.5 घंटे माइक्रो ड्रामा देखते हैं। लेकिन यह समय एक साथ नहीं, बल्कि दिनभर कई छोटे-छोटे Sessions में बंटा होता है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि लगभग 57% लोग माइक्रो ड्रामा देखते समय कोई दूसरा काम भी कर रहे होते हैं- जैसे यात्रा करना, काम के बीच ब्रेक लेना या रात में स्क्रॉलिंग करना। यानी माइक्रो ड्रामा “Appointment Viewing” नहीं, बल्कि “In-Between Viewing” बन चुका है।

कौन-कौन से प्लेटफॉर्म्स आगे?

भारत में अब माइक्रो ड्रामा का पूरा इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। Kuku TV, Story TV, QuickTV और कई नए स्टार्टअप्स इस स्पेस में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में छोटे एपिसोड आधारित कंटेंट बना रहे हैं।

Kuku TV जैसे प्लेटफॉर्म रिश्तों, परिवार, बदला, गांव-शहर, रोमांस और मेलोड्रामा जैसी कहानियों पर फोकस कर रहे हैं। इस कंटेंट की खास बात यह है कि यह “High Drama, High Emotion” मॉडल पर चलता है। हर एपिसोड में Shock Value, Emotion और Suspense होता है।

अब बड़े OTT प्लेटफॉर्म्स भी इस स्पेस को गंभीरता से देखने लगे हैं। इंडस्ट्री में माना जा रहा है कि आने वाले समय में बड़े OTT प्लेयर्स भी Short Episodic Vertical Content पर निवेश बढ़ा सकते हैं।

OTT का नया प्रतिद्वंद्वी?

भारत का पारंपरिक OTT बाजार पहले से बड़ा है, लेकिन माइक्रो ड्रामा की ग्रोथ स्पीड ज्यादा तेज दिखाई दे रही है। 

Lumikai रिपोर्ट के मुताबिक, माइक्रो ड्रामा सेगमेंट 2030 तक 4.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। Netflix और JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म्स ने भारत में OTT की मजबूत नींव बनाई, लेकिन माइक्रो ड्रामा दर्शकों के उस नए वर्ग को टारगेट कर रहा है, जो लंबे कंटेंट के बजाय Fast Consumption चाहता है। यही वजह है कि इंडस्ट्री इसे OTT का “Next Big Format” मानने लगी है।

चीन से आया मॉडल, भारत में नया रूप

माइक्रो ड्रामा का मॉडल सबसे पहले चीन में तेजी से लोकप्रिय हुआ। वहां Short Serialized Drama Apps ने अरबों डॉलर का बाजार बनाया। अब वही मॉडल भारतीय बाजार में लोकल कहानियों और भारतीय भावनाओं के साथ अपनाया जा रहा है।

भारत में यह फॉर्मेट खासतौर पर Tier-2 और Tier-3 शहरों में तेजी से बढ़ रहा है, जहां Mobile Internet Consumption तेजी से बढ़ा है। भारतीय दर्शकों के लिए रिश्तों, परिवार, गांव, प्यार, बदला और सामाजिक संघर्षों पर आधारित कहानियां ज्यादा काम कर रही हैं।

AI और Micro Drama

माइक्रो ड्रामा इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है।

Meta-Ormax रिपोर्ट के मुताबिक, 47% दर्शकों ने AI-Generated Micro Drama Content को “Unique” और “Creative” बताया। वहीं सिर्फ 6% दर्शकों ने AI Content को पूरी तरह खारिज किया। इसका मतलब है कि दर्शक AI आधारित कंटेंट को लेकर उतने नकारात्मक नहीं हैं, जितना पहले माना जा रहा था।

AI की मदद से Script Writing, Dubbing, Translation और Content Production की लागत कम हो सकती है। इससे छोटे प्लेटफॉर्म्स को तेजी से ज्यादा कंटेंट बनाने में मदद मिल रही है।

ब्रांड्स के लिए नया मौका

माइक्रो ड्रामा सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि ऐडवर्टाइजिंग और ब्रैंड इंटेग्रेशन (Brand Integration) का नया प्लेटफॉर्म भी बन रहा है। पारंपरिक OTT पर विज्ञापन महंगे होते हैं और दर्शक अक्सर Ads Skip कर देते हैं। लेकिन माइक्रो ड्रामा में ब्रैंड इंटेग्रेशन कहानी का हिस्सा बन सकता है।

Meta जैसी कंपनियां अब इस इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बन चुकी हैं, क्योंकि ज्यादातर Discovery Social Feeds के जरिए हो रही है। इसका फायदा ब्रैंड्स को भी मिल रहा है, क्योंकि वे सीधे मोबाइल-फर्स्ट ऑडियंस तक पहुंच पा रहे हैं।

लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि माइक्रो ड्रामा की ग्रोथ तेज है, लेकिन इंडस्ट्री के सामने कई गंभीर चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ा सवाल कंटेंट क्वॉलिटी का है। कई प्लेटफॉर्म्स बहुत तेजी से कंटेंट बना रहे हैं। लेकिन क्वॉन्टिटी बढ़ने के साथ क्वॉलिटी बनाए रखना आसान नहीं है।

Clickbait Titles, Overdramatic Thumbnails और Repetitive Stories भी इस इंडस्ट्री की बड़ी समस्या बनती जा रही हैं। इसके अलावा यूजर रिटेंशन भी बड़ी चुनौती है।

दर्शक छोटे एपिसोड तेजी से देखते हैं, लेकिन लंबे समय तक एक ही प्लेटफॉर्म पर टिके रहें, यह अभी साबित होना बाकी है। मॉनेटाइजेशन भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। अभी ज्यादातर प्लेटफॉर्म In-App Purchases, Subscription और ऐडवर्टाइजिंग मॉडल्स पर प्रयोग कर रहे हैं।

आगे क्या?

फिलहाल एक बात साफ है- माइक्रो ड्रामा कोई गुजरता हुआ ट्रेंड नहीं है। यह भारत के डिजिटल एंटरटेनमेंट में हो रहे बड़े बदलाव का हिस्सा है, जहां मोबाइल स्क्रीन ही नया टेलीविजन बन चुकी है।

दर्शक अब Long Attention Span वाले कंटेंट के बजाय Fast, Emotional और Easily Consumable कहानियां चाहते हैं और माइक्रो ड्रामा ठीक वही दे रहा है।

अगर आने वाले समय में बड़े OTT प्लेटफॉर्म्स, स्टार्टअप्स और प्रॉडक्शन हाउस इस फॉर्मेट में बेहतर क्वालिटी, मजबूत राइटिंग और स्थायी मॉनेटाइजेशन मॉडल ला पाए, तो माइक्रो ड्रामा भारतीय OTT इंडस्ट्री का अगला बड़ा अध्याय बन सकता है।

दो मिनट की कहानी में पूरी भावनाएं समेटने का यही हुनर आज माइक्रो ड्रामा की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।  

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गोवा के शास्त्रीय नृत्य कलाकारों के लिए बड़ा मौका, ऑडिशन के लिए दूरदर्शन ने मांगे आवेदन

प्रसार भारती के तहत आने वाले दूरदर्शन केंद्र पणजी ने शास्त्रीय नृत्य कलाकारों के लिए ऑडिशन की घोषणा की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 09 May, 2026
Last Modified:
Saturday, 09 May, 2026
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प्रसार भारती के तहत आने वाले दूरदर्शन केंद्र पणजी ने शास्त्रीय नृत्य कलाकारों के लिए ऑडिशन की घोषणा की है। यह ऑडिशन ‘बी’ ग्रेड और ‘बी हाई’ ग्रेड श्रेणी के लिए आयोजित किए जाएंगे।

इस ऑडिशन में गोवा में रहने वाले इच्छुक कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 30 जून 2026 तय की गई है।

आवेदन फॉर्म Prasar Bharati Website पर उपलब्ध है। उम्मीदवारों को फॉर्म में दिए गए QR कोड के जरिए निर्धारित प्रोसेसिंग फीस जमा करनी होगी और उसकी रसीद आवेदन पत्र के साथ लगानी होगी।

पूरी तरह भरे हुए आवेदन फॉर्म को किसी भी कार्य दिवस में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच व्यक्तिगत रूप से Doordarshan Kendra Altinho में जमा किया जा सकता है।

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कार्टून से कंटेंट तक: OTT प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम

बच्चों का एंटरटेनमेंट अब सिर्फ कार्टून तक सीमित नहीं रहा, बल्कि OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखने की आदत तेजी से बढ़ती जा रही है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 09 May, 2026
Last Modified:
Saturday, 09 May, 2026
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आज भारत के लाखों घरों में सुबह की शुरुआत कार्टून चैनल से नहीं, बल्कि OTT ऐप्स से होती है। बच्चे अब टीवी रिमोट से ज्यादा स्मार्टफोन और टैबलेट चलाना जानते हैं। “Cocomelon लगा दो”, “YouTube किड्स खोल दो” या “Netflix पर मेरा शो चलाओ” जैसी आवाजें अब आम हो चुकी हैं। जहां एक समय Cartoon Network और Pogo बच्चों की पहली पसंद हुआ करते थे, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने उनकी स्क्रीन की दुनिया पूरी तरह बदल दी है। बच्चों का एंटरटेनमेंट अब सिर्फ कार्टून तक सीमित नहीं रहा, बल्कि OTT प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट देखने की आदत तेजी से बढ़ती जा रही है।

CLSA की अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में OTT प्लेटफॉर्म्स के मंथली एक्टिव यूजर्स (MAUs) की कुल संख्या अब 145 करोड़ तक पहुंच गई है- पिछले तीन वर्षों में 20% की वृद्धि। इस आंकड़े में एक ही यूजर कई प्लेटफॉर्म पर होने से ओवरलैप है, लेकिन यह दर्शाता है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे सक्रिय स्ट्रीमिंग मार्केट बन गया है। इस विशाल डिजिटल दुनिया में सबसे नया और सबसे तेजी से उभरता हुआ सेगमेंट है- किड्स कंटेंट।

FICCI-EY की मार्च 2026 की रिपोर्ट 'Stories, Scale and Impact' के अनुसार भारत का मीडिया व एंटरटेनमेंट सेक्टर 2025 में 9% बढ़कर ₹2.78 ट्रिलियन पर पहुंच गया। इसमें डिजिटल मीडिया पहली बार सबसे बड़ा सेगमेंट बना- ₹1 ट्रिलियन का आंकड़ा पार करते हुए। और इस डिजिटल उछाल का सबसे बड़ा लाभार्थी बच्चों का कंटेंट है।

स्क्रीन टाइम का विस्फोट

2026 में एक चौंकाने वाला वैश्विक आंकड़ा सामने आया है- दुनिया भर में 2 साल की उम्र के 98% बच्चे रोजाना स्क्रीन देखते हैं। भारत में स्थिति और भी जटिल है। महाराष्ट्र में हुए एक अध्ययन के मुताबिक 9 से 17 साल के 22% बच्चे दिन में छह घंटे से ज्यादा स्क्रीन के सामने बिताते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर इसी आयुवर्ग के 60% से अधिक बच्चे हर रोज कम से कम तीन घंटे मोबाइल गेम या सोशल मीडिया पर गुजारते हैं।

5 से 8 साल के बच्चे औसतन 3 घंटे 28 मिनट प्रतिदिन स्क्रीन पर बिताते हैं, जबकि 2 से 4 साल के बच्चों का स्क्रीन टाइम 2 घंटे 8 मिनट दैनिक दर्ज किया गया है। ग्रामीण पश्चिम भारत के एक अध्ययन में पाया गया कि सिर्फ 17.2% बच्चे ही अनुशंसित 1 घंटे या उससे कम के स्क्रीन टाइम में थे।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि बच्चे टीवी से मोबाइल और टैबलेट की ओर तेजी से शिफ्ट हो गए हैं। ग्रामीण भारत के एक अध्ययन में पाया गया कि 98.9% बच्चे मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, जबकि टेलीविजन का उपयोग 92.9% पर आ गया, यानी मोबाइल ने TV को पीछे छोड़ दिया।

CLSA की रिपोर्ट के अनुसार YouTube India का सबसे बड़ा OTT Platform बना हुआ है- 77.2 करोड़ MAUs के साथ। इसके बाद JioHotstar 39 करोड़ MAUs, Netflix 9.2 करोड़ और Amazon Prime Video 6.7 करोड़ MAUs पर हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर किड्स कंटेंट एक अलग ही लहर बनाकर चल रहा है।

YouTube के सर्वाधिक देखे जाने वाले टॉप-5 चैनलों में Wow Kidz (5.02 बिलियन मासिक व्यूज) और Cocomelon जैसे बच्चों के चैनल शामिल हैं। YouTube शॉर्ट्स ने भी किड्स Viewing को नई रफ्तार दी है- 2025 की शुरुआत में शॉर्ट्स पर 70 से 90 बिलियन views रोजाना आ रहे थे। इसी को देखते हुए YouTube ने 2026 में पैरेंट्स के लिए शॉर्ट्स Timer Feature पेश किया है, जिससे बच्चों के शॉर्ट्स देखने का समय सीमित किया जा सके।

"YouTube किड्स, JioHotstar और Netflix के किड्स Profiles ने बच्चों के एंटरटेनमेंट को एक नई परिभाषा दे दी है, जहां रिमोट की जरूरत नहीं, बस एक उंगली का इशारा काफी है।"- डिजिटल मीडिया विश्लेषक

एजुकेशन का उभरता मार्केट

2026 में सबसे दिलचस्प ट्रेंड है एजुकेशन और एंटरेनमेंट का मेल। माता-पिता अब सिर्फ कार्टून नहीं, बल्कि ऐसा कंटेंट चाहते हैं जो बच्चे को कुछ सिखाए भी। इसी मांग ने एक नए मार्केट को जन्म दिया है।

Mordor Intelligence की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक एजुकेशन मार्केट 2026 में $5.87 बिलियन (लगभग ₹49,000 करोड़) तक पहुंच गया है और 2031 तक $9.12 बिलियन पहुंचने का अनुमान है- सालाना 9.22% CAGR के साथ। इस मार्केट में बच्चों की हिस्सेदारी 39% है, जो किसी भी अन्य एज ग्रुप से अधिक है। Asia-Pacific इस मार्केट में सबसे तेजी से बढ़ रहा है- 10.21% CAGR के साथ।

किड्स एजुकेशन स्ट्रीमिंग की अलग रिपोर्ट देखें तो यह मार्केट 2025 में $8.16 बिलियन का था और 2026 से 2034 के बीच 13.4% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। मोबाइल ऐप्स इस सेगमेंट का सबसे बड़ा डिस्ट्रीब्यूशन चैनल है जिसकी हिस्सेदारी 57.62% है।

भारत में एजुकेशन का जलवा साफ दिखता है। ChuChu TV, Wow Kidz और Chhota Bheem जैसे चैनल सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि बच्चों को गिनती, अक्षर, विज्ञान और पौराणिक कथाएं भी सिखाते हैं। BYJU's, Vedantu Kids और Khan Kids जैसे प्लेटफॉर्म अब एनिमेनेटेड कैरेक्टर्स और Gamification के जरिए पढ़ाई को मजेदार बना रहे हैं। 

एनिमेशन इंडस्ट्री: चुनौती के बीच उम्मीद

FICCI-EY की मार्च 2026 की रिपोर्ट ‘Stories, Scale and Impact’ भारतीय एनीमेशन इंडस्ट्री की एक अहम तस्वीर सामने रखती है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का स्टैंडलोन एनीमेशन सेक्टर 2025 में 6% घट गया और इसका रेवेन्यू ₹29 बिलियन (2024) से गिरकर ₹27 बिलियन (करीब $320 मिलियन) रह गया। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी बाजार में नए प्रोजेक्ट्स के ऑर्डर में 11% की कमी और दुनियाभर में प्रोडक्शन बजट में की गई कटौती रही।

हालांकि, एनीमेशन, VFX और Post-Production को मिलाकर देखा जाए तो तस्वीर थोड़ी बेहतर नजर आती है। यह कम्बाइंड सेगमेंट 2025 में 1.6% बढ़कर ₹105 बिलियन (करीब $1.26 बिलियन) तक पहुंच गया, जिसे इंडस्ट्री में स्थिरता लौटने का संकेत माना जा रहा है। FICCI-EY का अनुमान है कि यह सेगमेंट 2028 तक 10% CAGR की दर से बढ़कर ₹138 बिलियन तक पहुंच सकता है। वहीं, CII-GT की रिपोर्ट के अनुसार भारत का एनीमेशन और VFX सेक्टर 2023 के $1.3 बिलियन से बढ़कर 2026 तक $2.2 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।

चुनौतियों के बीच एक दिलचस्प trend भी तेजी से उभर रहा है। FICCI-EY 2026 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में माइथोलोजिकल और यंग एडल्ट एनीमेशन के लिए दर्शकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर  एडल्ट एनीमेशन का शेयर 2019 के 26% से बढ़कर 2024 में 41% तक पहुंच चुका है। वहीं भारत में माइथोलोजिकल आधारित एनीमेशन को घरेलू OTT प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से पसंद किया जा रहा है।

इसी बढ़ती मांग को देखते हुए JioStar FY26 में OTT कंटेंट पर ₹33,000 करोड़ (करीब $3.85 बिलियन) निवेश करने की घोषणा की है। इसमें भारतीय भाषा और स्थानीय एंटरटेनमेंट कंटेंट का बड़ा हिस्सा शामिल है।

FICCI-EY रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में माइथोलॉजिकल और यंग एडल्ट एनीमेशन का बढ़ना सिर्फ एक कंटेंट ट्रेंड नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं के अपनी संस्कृति से दोबारा जुड़ने का संकेत भी माना जा रहा है।

OTT का किड्स बिजनेस: असल सोने की खान

OTT Industry के लिए किड्स कंटेंट महज एक सेगमेंट नहीं, बल्कि फैमिली सेगमेंट का सबसे बड़ा ड्राइवर है। Ormax Media की 2025 रिपोर्ट बताती है कि Connected TV यूजर्स में एक ही साल में 85% की बढ़ोतरी हुई- 6.97 करोड़ से सीधे 12.92 करोड़ पर। यह India के "two-device market" बनने का संकेत है- जहां smartphone के साथ-साथ Smart TV पर भी कंटेंट देखा जा रहा है।

IBEF के अनुसार India का OTT Video रेवेन्यू 2025 में $4.44 बिलियन और 2027 तक $7 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। OTT सब्सक्रिप्शंस का रेवेन्यू 2021 के 90% से बढ़कर 2026 तक 95% तक पहुंचने का अनुमान है। जब कोई परिवार सब्सक्रिप्शन लेता है, तो उसके पीछे अक्सर बच्चे का पसंदीदा कार्टून होता है।

Children's Television का वैश्विक मार्केट 2025 में $142.6 बिलियन था और 2034 तक $238.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है- 5.9% CAGR से। इसमें Animated Series की हिस्सेदारी 41.3% यानी $58.9 बिलियन रही। Asia-Pacific इस मार्केट में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है- 7.8% CAGR के साथ। 

माता-पिता की चिंताएं: दूसरा पहलू

इस Digital किड्स Boom का एक अँधेरा पहलू भी है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Addiction और Attention Span की समस्या सबसे बड़ी है। YouTube शॉर्ट्स और Instagram Reels जैसे 15-60 सेकंड के videos देखने की आदत बच्चों को लंबे समय तक एकाग्र होने की क्षमता से दूर कर रही है। शोध बताते हैं कि अत्यधिक Screen Time से नींद पर असर, भाषा विकास में देरी और सामाजिक कौशल में कमी जैसी समस्याएं दर्ज हो रही हैं।

असुरक्षित कंटेंट का खतरा भी बड़ा है। YouTube ने 2025 की सिर्फ Q2 (अप्रैल-जून) में 1.14 करोड़ से ज्यादा वीडियो कम्युनिटी गाइडलाइंस उल्लंघन के कारण हटाए। ओपेन प्लेटफॉर्म्स पर Auto-Play Algorithm कभी-कभी बच्चों को अनुपयुक्त कंटेंट तक पहुंचा देता है।

Targeted Advertising भी एक बड़ी चिंता है। बच्चे यह नहीं समझ पाते कि animated advertisement और असली कंटेंट में क्या फ़र्क है। Toy कंपनीज, जंक फूड ब्रैंड और गेमिंग ऐप्स बच्चों की साइकोलॉजी को टार्गेट करके ऐड्स बनाती हैं। भारत में अभी किड्स Digital Advertising पर कोई कड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क नहीं है।

Data Privacy का मुद्दा भी उठ रहा है। Digital Personal Data Protection Act, 2023 के अंतर्गत बच्चों के डेटा को लेकर प्रावधान हैं, लेकिन उनका कार्यान्वयन अभी पूरी तरह नहीं हो पाया है।

आगे का रास्ता: संतुलन की जरूरत

किड्स कंटेंट का यह OTT बूम रोका नहीं जा सकता और शायद रोकना चाहिए भी नहीं। FICCI-EY की रिपोर्ट बताती है कि भारत का डिजिटल मीडिया सेगमेंट 2025 में पहली बार ₹1 ट्रिलियन पार कर गया और 2028 तक M&E सेक्टर ₹3.3 ट्रिलियन तक पहुंचेगा। इस ग्रोथ में नई मीडिया यानी डिजिटल का 50% से ज्यादा हिस्सा होगा।

विशेषज्ञ "Co-Viewing" की सलाह देते हैं- माता-पिता बच्चे के साथ बैठकर कंटेंट देखें और समझाएं। OTT प्लेटफॉर्म्स को Parental Controls और Age-Gating को और मजबूत करना होगा। सरकार को भी किड्स डिजिटल कंटेंट के लिए एक कम्प्रेहेन्सिव पॉलिसी (comprehensive policy) बनानी होगी, जिसमें विज्ञापनों के नियम, डेटा गोपनीयता और न्यूनतम शैक्षणिक कंटेंट को अनिवार्य करने जैसे प्रावधान शामिल हों।

CLSA के अनुसार भारत के स्मार्टफोन यूजर्स FY28 तक 88.5 करोड़ तक पहुंचेंगे। और Statista का अनुमान है कि 2029 तक YouTube India के यूजर्स 85.9 करोड़ हो जाएंगे। तब तक किड्स कंटेंट के ये आंकड़े और भी बड़े होंगे। सवाल यही है- क्या हम उस दुनिया के लिए तैयार हैं जहां बच्चे का पहला शिक्षक एक एल्गोरिदम होगा?

 

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