वॉट्सऐप यूजरनेम फीचर विवाद : 'Meta' ने अब तक नहीं भेजा जवाब

वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर भेजे गए नोटिस पर मेटा (Meta) का जवाब अभी तक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को नहीं मिला है।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
WhatsApp username feature


वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम (Username) फीचर को लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) द्वारा भेजे गए नोटिस पर मेटा (Meta) का जवाब अभी तक मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुआ है। जबकि कंपनी को जवाब देने के लिए दी गई विस्तारित समय-सीमा गुरुवार को समाप्त हो रही है।

नई दिल्ली (New Delhi) में सीआईआई (Confederation of Indian Industry-CII) बिजनेस समिट (Business Summit) के दौरान आईटी सचिव एस. कृष्णन (S Krishnan) ने कहा कि सरकार मेटा (Meta) का जवाब मिलने और उसकी समीक्षा करने के बाद ही अगला कदम तय करेगी।

उन्होंने कहा, "हमें अभी तक नोटिस का जवाब नहीं मिला है। जवाब देने के लिए अभी थोड़ा समय बाकी है। आज जवाब दाखिल करने का अंतिम दिन है।" एस. कृष्णन (S Krishnan) ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार फिलहाल मेटा (Meta) से जुड़े दो अलग-अलग मामलों पर काम कर रही है। पहला वॉट्सऐप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर से जुड़ा है, जबकि दूसरा चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से संबंधित नोटिस का मामला है।

सरकार ने मेटा (Meta) से वॉट्सऐप (WhatsApp) की उस योजना पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिसके तहत उपयोगकर्ता मोबाइल नंबर साझा किए बिना यूनिक यूजरनेम (Unique Username) के जरिए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। केंद्र का मानना है कि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना यह फीचर शुरू होने पर फिशिंग (Phishing), प्रतिरूपण (Impersonation), ऑनलाइन ठगी (Online Scam) और तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' (Digital Arrest) जैसे साइबर अपराधों का खतरा बढ़ सकता है।

अब सभी की निगाहें मेटा (Meta) के जवाब और उसके बाद MeitY के अगले कदम पर टिकी हैं। सरकार का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनी का स्पष्टीकरण उपयोगकर्ता सुरक्षा, साइबर धोखाधड़ी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही से जुड़े सवालों का कितना संतोषजनक समाधान प्रस्तुत करता है।

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‘अब किसी चर्चा में नहीं जाना’ : राहुल देव ने टीवी डिबेट को लेकर रखी बात

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने टीवी चैनलों की चर्चाओं से दूरी बनाने की वजह बताई। उन्होंने धर्म पर बहस के तरीके, निष्पक्षता, घृणा, हिंसा और मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

Last Modified:
Saturday, 17 October, 2026
rahuldev

वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव (Rahul Dev) ने टीवी चैनलों की बहसों से दूरी बनाने के अपने फैसले के बारे में बताया है। फेसबुक (Facebook) पर लिखी पोस्ट में उन्होंने कहा कि पिछले साल दिल्ली छोड़ने से पहले उन्होंने कई चैनलों और उनके एंकरों को बता दिया था कि वह अब उनके कार्यक्रमों में नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि अब भी बुलावे आते हैं, लेकिन वह विनम्रता से मना कर देते हैं।

राहुल देव ने कहा कि धीरे-धीरे उन्हें महसूस होने लगा था कि जब कोई चैनल और उसकी चर्चाएं निष्पक्ष और गरिमापूर्ण नहीं रह गई हैं तो उनमें शामिल होकर वे चैनलों को ही सम्मान और प्रतिष्ठा देते हैं और अपनी गरिमा को आहत करते हैं।

उन्होंने बताया कि एक चैनल की चर्चा के अनुभव ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का नाम ‘धर्म संकट’ था, जिसमें एक प्रसिद्ध हिंदू धर्मगुरु भी शामिल थे। राहुल देव के मुताबिक वह पहले भी इस कार्यक्रम में जा चुके थे, क्योंकि उनकी धर्म में रुचि है। उन्होंने धर्मगुरु को सज्जन, विनम्र और शालीन बताया।

राहुल देव ने कहा कि चर्चा में चार या पांच पैनलिस्ट थे और धर्म जैसे विषय पर भी बहस गरमा गई। उन्होंने सवाल उठाया कि धर्म जैसे गूढ़ विषय पर इतने कम समय में इतने अगंभीर तरीके से बातचीत कैसे हो सकती है। उन्होंने कहा कि आम तौर पर चैनलों पर लोग खुद को सही और दूसरे को गलत साबित करने के लिए आते हैं, विषय चाहे कोई भी हो।

उन्होंने कार्यक्रम के नाम ‘धर्म संकट’ का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह मान लिया गया था कि धर्म संकट में है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भारत में धर्म शब्द आते ही उसे हिंदू धर्म से जोड़ दिया जाता है और हिंदू धर्म को सनातन धर्म मान लिया जाता है, जबकि दोनों के बीच अंतर को लेकर गंभीर चर्चा नहीं होती।

राहुल देव ने लिखा कि इसी बहस के दौरान उन्होंने धर्मगुरु से शांत तरीके से पूछा, “स्वामी जी, क्या जो सनातन है उस पर कोई संकट आ सकता है?” उनके मुताबिक धर्मगुरु गंभीर होकर सोचने लगे, लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कहते, एंकर ने तुरंत दूसरा सवाल शुरू कर दिया और दूसरे पैनलिस्ट की ओर मुड़ गया। राहुल देव ने कहा कि उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि अब किसी टीवी चर्चा में नहीं जाएंगे।

उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि क्या सचमुच तथाकथित सनातन धर्म पर संकट है? जो सनातन है, क्या उसे तोड़ा, मारा या आहत किया जा सकता है? उन्होंने पूछा कि जिस पर संकट की बात की जा रही है, वह वास्तव में सनातन है या कुछ और और इस संकट की प्रकृति और स्रोत क्या हैं।

राहुल देव ने कहा कि धर्म-संकट की चर्चा में इन सवालों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए और पूरे समाज में इन पर संवाद होना चाहिए। उन्होंने टीवी बहसों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि एंकरों का पूरा ध्यान चर्चा को गरमागरम और गतिशील बनाए रखने पर होता है, जबकि चैनल प्रबंधन की विचारधारा और उद्देश्य उनकी एंकरिंग पर हावी रहते हैं।

उन्होंने बताया कि जिस एंकर के कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे, वह उनके प्रिय एंकरों में रहा है और धर्म तथा शास्त्रों से भी अच्छी तरह परिचित है। राहुल देव ने कहा कि उन्होंने उसी समय एंकर से कहा था कि अब वह उसके चैनल में नहीं आएंगे। एंकर ने उन्हें गले लगाकर कहा, “सर आप तो सब समझते हैं।”

राहुल देव ने कहा कि इसके बाद से वह किसी टीवी चैनल पर नहीं गए हैं। हालांकि, यूट्यूब (YouTube) पर कुछ गिने-चुने लोगों की चर्चाओं में वह शामिल होते हैं, जिन्हें उन्हें जुड़ना ठीक लगता है। साथ ही उन्होंने माना कि वहां भी पत्रकारिता का संतुलन और निष्पक्षता कम ही दिखाई देती है।

उन्होंने खुद को पूरी तरह निष्पक्ष मानने से भी इनकार किया। राहुल देव के मुताबिक पूरी तरह निष्पक्ष और तटस्थ होना लंबी आध्यात्मिक-वैचारिक साधना और निस्संगता मांगता है। उन्होंने कहा कि वैचारिक रूप से वह किसी के साथ नहीं हैं, लेकिन वह स्पष्ट रूप से यह मानते हैं कि हर तरह की घृणा, धर्म-जाति-वर्ग के आधार पर द्वेष और भेदभाव, वैचारिक-वाचिक-शारीरिक हिंसा, प्रतिशोध और प्रतिहिंसा तथा धर्म के नाम पर होने वाले घोर अधर्म के खिलाफ होना जरूरी है।

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एटरनल ने नमन दत्ता को जोमैटो ब्रांड विज्ञापन की जिम्मेदारी सौंपी

नमन दत्ता एटरनल से जुड़े हैं, जहां वह जोमैटो ब्रांड विज्ञापन, पोस्ट-ऑर्डर स्क्रीन और नई विज्ञापन पहलों के लिए नॉन-एंडेमिक ब्रांड पार्टनरशिप की जिम्मेदारी संभालेंगे।

Last Modified:
Thursday, 15 October, 2026
naman

नमन दत्ता एटरनल (Eternal) से जुड़ गए हैं, जहां वह जोमैटो ब्रांड विज्ञापन (Zomato Brand Ads) की जिम्मेदारी संभालेंगे। वह जोमैटो (Zomato) की पोस्ट-ऑर्डर स्क्रीन और नई विज्ञापन पहलों के लिए नॉन-एंडेमिक ब्रांड पार्टनरशिप का नेतृत्व करेंगे।

नमन दत्ता ने ई4एम (e4m) से अपनी नियुक्ति की पुष्टि की है। एटरनल से जुड़ने से पहले वह क्रिकबज (Cricbuzz) में मैनेजर के पद पर काम कर रहे थे। यहां उन्होंने वेबसाइट और ऐप पर स्टूडियो आधारित कंटेंट इंटीग्रेशन और विज्ञापन से जुड़े काम संभाले।

दत्ता के पास डिजिटल विज्ञापन, मीडिया सेल्स और ब्रांड पार्टनरशिप का अनुभव है। क्रिकबज से पहले वह द इंडियन एक्सप्रेस ऑनलाइन (The Indian Express Online), न्यूजरूम एआई इंडिया (Newsroom AI India) और इंडिया टुडे ग्रुप (India Today Group) के साथ भी काम कर चुके हैं।

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अक्षय गांदोतरा को मेटा में मिली ग्लोबल मार्केटिंग की नई जिम्मेदारी

अक्षय गांदोतरा को मेटा में ग्लोबल मार्केटिंग लीड, बिजनेस मैसेजिंग नियुक्त किया गया है। वह व्हाट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म और बिजनेस एआई के लिए एग्जीक्यूटिव एंगेजमेंट प्रोग्राम तैयार करेंगे।

Last Modified:
Thursday, 15 October, 2026
meta

अक्षय गांदोतरा (Akshay Gandotra) को मेटा (Meta) में ग्लोबल मार्केटिंग लीड, बिजनेस मैसेजिंग (Global Marketing Lead, Business Messaging) नियुक्त किया गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

नई भूमिका में अक्षय व्हाट्सऐप बिजनेस प्लेटफॉर्म (WhatsApp Business Platform) और बिजनेस एआई (Business AI) के लिए एग्जीक्यूटिव एंगेजमेंट प्रोग्राम (Executive Engagement Program) तैयार करेंगे। उनका फोकस सी-सूट (C-suite) स्तर के अधिकारियों को यह समझाने पर होगा कि एआई और मैसेजिंग को एक साथ जोड़कर कारोबार के लिए किस तरह के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

इसके साथ ही, वह इन चर्चाओं को वास्तविक एंटरप्राइज बिजनेस ग्रोथ (Enterprise Business Growth) में बदलने की दिशा में भी काम करेंगे।

मेटा से पहले अक्षय गांदोतरा अमेजन वेब सर्विसेज (Amazon Web Services) में ग्लोबल पार्टनर मार्केटिंग लीडर-एसएपी (Global Partner Marketing Leader-SAP) के पद पर थे। वह अगस्त 2021 में अमेजन से जुड़े थे और वहां पांच साल से ज्यादा समय तक काम किया।

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Flipkart के एक हजार से ज्यादा पूर्व एम्प्लॉयीज ने Walmart और बोर्ड से लगाई ये गुहार

ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के 1,000 से ज्यादा पूर्व एम्प्लॉयीज ने अपने एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) को भुनाने का समान अवसर देने की मांग की है।

Last Modified:
Tuesday, 13 October, 2026
Flipkart541

ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के 1,000 से ज्यादा पूर्व एम्प्लॉयीज ने अपने एम्प्लॉयी स्टॉक ऑप्शन (ESOPs) को भुनाने का समान अवसर देने की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन एम्प्लॉयीज ने Walmart और फ्लिपकार्ट के बोर्ड से अपील की है कि उन्हें भी कंपनी के मौजूदा एम्प्लॉयीज की तरह अपने शेयर विकल्पों से पैसा हासिल करने के मौके दिए जाएं। कंपनी के आईपीओ (IPO) को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण पूर्व एम्प्लॉयीज की चिंता बढ़ गई है।

इस सामूहिक अपील में फ्लिपकार्ट के अलावा Myntra, Cleartrip, Shopsy और Supermoney के पूर्व एम्प्लॉयी भी शामिल हैं। इन लोगों ने मौजूदा एम्प्लॉयीज के लिए उपलब्ध शेयरों को भुनाने के अवसरों तक पहुंच, कंपनी छोड़ने के बाद निहित स्टॉक विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए अधिक समय और Walmart व फ्लिपकार्ट के प्रतिनिधियों से बातचीत के लिए एक तय संपर्क अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है।

अगली लिक्विडिटी योजना तक विकल्प इस्तेमाल करने की मांग

11 अक्टूबर को तैयार किए गए लिखित ज्ञापन में पूर्व एम्प्लॉयीज ने मांग की है कि कंपनी छोड़ने के बाद अपने निहित स्टॉक विकल्पों का इस्तेमाल करने की समय-सीमा को अगले लिक्विडिटी इवेंट तक बढ़ाया जाए। लिक्विडिटी इवेंट यानी ऐसा मौका, जब एम्प्लॉयी अपने शेयरों या स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल कर सकें।

पूर्व एम्प्लॉयीज का कहना है कि केवल कंपनी छोड़ देने के कारण उनके स्टॉक विकल्प खत्म नहीं होने चाहिए। उन्होंने अपनी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करने की भी मांग की है। यह अपील कंपनी के कुछ पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से पहले भेजे गए पत्र के बाद आई है। उन अधिकारियों ने भी कंपनी में काम करने के दौरान अर्जित इक्विटी के मामले में उचित व्यवहार की मांग की थी।

मौजूदा और पूर्व एम्प्लॉयीज के लिए अवसरों में अंतर का मुद्दा

इस पूरे मामले का मुख्य मुद्दा मौजूदा और पूर्व एम्प्लॉयीज को अपने स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल करने के लिए मिलने वाले अवसरों में अंतर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्लिपकार्ट के 30,000 से ज्यादा मौजूदा और पूर्व एम्प्लॉयीज को Walmart की ओर से अभी सुविधा दिए जाने वाले ESOP बायबैक के जरिए सामूहिक रूप से करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग 38,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इस अनुमानित राशि में करीब आधा हिस्सा पूर्व एम्प्लॉयीज का बताया गया है, जबकि मौजूदा एम्प्लॉयीज को लगभग 2 अरब डॉलर मिलने की संभावना है।

कई पूर्व एम्प्लॉयीज के पास एक दशक से ज्यादा पुराने स्टॉक विकल्प

फ्लिपकार्ट के कई पूर्व एम्प्लॉयीज को कंपनी के शुरुआती वर्षों यानी 2008 से 2016 के बीच स्टॉक विकल्प मिले थे। इनमें से कई एम्प्लॉयी इन विकल्पों को एक दशक से भी ज्यादा समय से अपने पास रखे हुए हैं।

पूर्व एम्प्लॉयीज का कहना है कि ये स्टॉक विकल्प उनके वेतन और मेहनत के बदले मिलने वाले मुआवजे का हिस्सा थे। उन्होंने कंपनी में काम करके इन्हें अर्जित किया था। इसलिए उन्हें अपने निहित स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल करने का उचित अवसर मिलना चाहिए।

उनकी मांग है कि उन्हें भविष्य में होने वाले बायबैक में सीमित हिस्सेदारी देने के बजाय अपने पात्र स्टॉक विकल्पों को भुनाने का सार्थक अवसर दिया जाए।

IPO को लेकर अनिश्चितता से बढ़ी चिंता

फ्लिपकार्ट के आईपीओ को लेकर स्पष्ट समय-सीमा नहीं होने से भी पूर्व एम्प्लॉयीज की चिंता बढ़ गई है। कंपनी ने सार्वजनिक रूप से शेयर जारी करने यानी शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की योजना को अपनी रणनीति का हिस्सा बताया है, लेकिन अभी तक इसकी कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Walmart ने फ्लिपकार्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कल्याण कृष्णमूर्ति से सार्वजनिक बाजार में उतरने की योजना पर आगे बढ़ने से पहले कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता को प्राथमिकता देने के लिए कहा है।

ऐसे में पूर्व एम्प्लॉयी चाहते हैं कि आईपीओ का इंतजार करते रहने के बजाय उन्हें अपने स्टॉक विकल्पों से पैसा हासिल करने के लिए उचित अवसर दिया जाए।

पहले भी एम्प्लॉयीज को मिल चुका है 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का लाभ

फ्लिपकार्ट पहले भी एम्प्लॉयीज के लिए कई लिक्विडिटी कार्यक्रम चला चुकी है। Moneycontrol के मुताबिक, जुलाई में हुए एक कार्यक्रम सहित इन योजनाओं के जरिए एम्प्लॉयीज को कुल 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा की वैल्यू हासिल हुई है।

पूर्व एम्प्लॉयीज का तर्क है कि कंपनी छोड़ने के कारण उन्हें भविष्य में मिलने वाले ऐसे अवसरों से अपने आप बाहर नहीं कर देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा है कि शुरुआती निवेशकों, संस्थापकों और मौजूदा एम्प्लॉयीज को अपनी हिस्सेदारी से पैसा हासिल करने के अवसर मिले हैं, जबकि कई पूर्व एम्प्लॉयी अब भी इंतजार कर रहे हैं।

पूर्व एम्प्लॉयीज ने क्या मांग रखी है?

पूर्व एम्प्लॉयीज के समूह ने स्पष्ट किया है कि उनका ज्ञापन कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के उद्देश्य से नहीं है। वे केवल उचित और समान व्यवहार चाहते हैं। उन्होंने Walmart के बोर्ड से लिखित जवाब देने और पात्र पूर्व एम्प्लॉयीज को भी शेयर विकल्पों से पैसा हासिल करने के अवसर देने पर विचार करने का अनुरोध किया है।

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प्रदर्शनों से जुड़े भ्रामक कंटेंट पर सख्ती बरतें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, सरकार ने दी सलाह

केंद्र सरकार ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को मौजूदा प्रदर्शनों से जुड़े गैरकानूनी कंटेंट पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की सलाह दी है।

Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
Miety87

केंद्र सरकार ने बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों को मौजूदा प्रदर्शनों से जुड़े गैरकानूनी कंटेंट पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने की सलाह दी है। सरकार ने कहा है कि अधिकृत सरकारी एजेंसियों, जिनमें कानून लागू कराने वाली एजेंसियां भी शामिल हैं, से मिलने वाली शिकायतों के आधार पर ऐसे कंटेंट पर कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाए।

इस घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 8 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को एक परामर्श जारी किया। इसमें प्रदर्शनों से जुड़ी ऐसी जानकारी के ऑनलाइन प्रसार पर चिंता जताई गई, जो झूठी, भ्रामक, बदली हुई या संदर्भ से हटाकर पेश की गई हो।

सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ने की जताई आशंका

मंत्रालय को आशंका है कि इस तरह के गैरकानूनी कंटेंट से सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक शांति प्रभावित हो सकती है। इससे कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं बढ़ने के साथ हिंसा भड़कने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

एक अधिकारी के मुताबिक, मंत्रालय ने बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे गैरकानूनी कंटेंट की पहचान करने और अधिकृत सरकारी निकायों से मिली शिकायतों के आधार पर उस पर प्राथमिकता से कार्रवाई करने की सलाह दी है।

AI से तैयार कंटेंट पर लेबल लगाने की सलाह

मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से यह भी कहा है कि वे अपने मंच पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से तैयार किए गए कंटेंट पर लेबल लगाएं। खास तौर पर ऐसी कंटेंट के मामले में यह जरूरी बताया गया है, जिसे मौजूदा घटनाओं को दिखाने के रूप में पेश किया जा रहा हो।

इसका मकसद लोगों को यह पहचानने में मदद करना है कि संबंधित कंटेंट कृत्रिम तरीके से तैयार की गई है।

सरकारी एजेंसियों के साथ समय पर सहयोग करने को कहा

मंत्रालय ने सोशल मीडिया कंपनियों को कानून लागू कराने वाली एजेंसियों और अन्य अधिकृत सरकारी निकायों के साथ समय पर सहयोग करने की भी सलाह दी है।

सूत्र के मुताबिक, कंपनियों को लागू कानून के तहत तय समयसीमा के भीतर जरूरी कार्रवाई करने, मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने और संबंधित एजेंसियों को आवश्यक सहायता देने के लिए कहा गया है। इस संबंध में सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 का पालन करने पर जोर दिया गया है।

यह परामर्श ऐसे समय में आया है, जब मौजूदा प्रदर्शनों से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की जा रही है और सरकार ने झूठी, भ्रामक या संदर्भ से हटाकर पेश किए गए कंटेंट से सार्वजनिक व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर चिंता जताई है।

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एलन मस्क के आरोपों पर भारत का पलटवार : कहा- दावे पूरी तरह बेबुनियाद

स्टारलिंक को लेकर एलन मस्क के एकाधिकार संबंधी आरोपों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संचार मंत्रालय ने दावों को बेबुनियाद बताते हुए देश की अनुमति व्यवस्था को निष्पक्ष बताया।

Last Modified:
Thursday, 08 October, 2026
elonmusk

स्पेसएक्स (SpaceX) के फाउंडर और उद्योगपति एलन मस्क (Elon Musk) के भारत के उद्योगपतियों पर लगाए गए आरोपों के बाद अब भारत की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। स्टारलिंक (Starlink) को लेकर मस्क के दावों को भारत के संचार मंत्रालय ने पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।

स्टारलिंक को भारत में कमर्शियल सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक यूजर के पोस्ट का जवाब देते हुए मस्क ने भारत में इस क्षेत्र में एकाधिकार को लेकर दावा किया।

मस्क ने एक्स (X) पर लिखा कि कुछ उद्योगपति भारत के लोगों पर अपने एकाधिकारवादी नियंत्रण को बनाए रखने के लिए स्टारलिंक को रोके जाने का कारण बन रहे हैं। उन्होंने इसे भारत की जनता के खिलाफ अपराध बताया।

इसके बाद टेलीकॉम मिनिस्ट्री (Telecom Ministry) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि भारत कभी भेदभाव नहीं करता। मंत्रालय के मुताबिक, सरकार ने सभी दूरसंचार सेवाओं के लिए निष्पक्ष और भेदभाव रहित अनुमति व्यवस्था लागू की है, जिसमें सैटेलाइट संचार सेवाएं भी शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा कि ऐसे में इस व्यवस्था या इसे लागू करने के तरीके को अनुचित या भेदभावपूर्ण बताना बेबुनियाद और गलत धारणा पर आधारित है। मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तीन कंपनियों को दूरसंचार लाइसेंस दिए गए हैं। ये लाइसेंस भारत में सैटेलाइट संचार सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के तहत दिए गए हैं।

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प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने पर विराट कोहली की टीम का बड़ा बयान

विराट कोहली के प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने को लेकर लगाए गए 5 करोड़ रुपये के दावे पर क्रिकेटर के प्रवक्ता ने इसे पूरी तरह झूठा और तथ्यहीन बताया है।

Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
virat

विराट कोहली (Virat Kohli) की टीम ने उनके प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) के वृंदावन स्थित आश्रम जाने को लेकर लगाए जा रहे दावों पर सफाई दी है। क्रिकेटर के प्रवक्ता ने फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा (Falahari Maharaj Dinesh Sharma) के उस दावे को पूरी तरह खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि एक प्रॉपर्टी से जुड़े समूह ने कोहली की आश्रम यात्रा की व्यवस्था के लिए 5 करोड़ रुपये खर्च किए थे।

श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा के इस दावे पर विराट कोहली के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान जारी किया। बयान में कहा गया कि विराट कोहली को लेकर फालाहारी महाराज दिनेश शर्मा की ओर से किए गए दावे पूरी तरह झूठे, बेबुनियाद और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

प्रवक्ता ने कोहली के बार-बार प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने की वजह भी स्पष्ट की। बयान के मुताबिक, कोहली महाराज के प्रति अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण ही आश्रम जाते हैं। प्रवक्ता ने मीडिया से भी अपील की कि ऐसी बातों को रिपोर्ट या आगे बढ़ाने से पहले तथ्यों की अच्छी तरह जांच की जाए। उन्होंने मीडिया से जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करने और किसी भी दावे को प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि करने को कहा।

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शुभजीत सेनगुप्ता बने टाइम्स नेटवर्क में वाइस प्रेसिडेंट : सोशल मीडिया की भी जिम्मेदारी

शुभजीत सेनगुप्ता ने टाइम्स नेटवर्क में वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ सोशल मीडिया एंड वीडियो मोनेटाइजेशन के रूप में वापसी की है। इससे पहले वह एचटी डिजिटल स्ट्रीम्स में कार्यरत थे।

Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
times

शुभजीत सेनगुप्ता (Shubhajit Sengupta) ने टाइम्स नेटवर्क (Times Network) में वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ सोशल मीडिया एंड वीडियो मोनेटाइजेशन (Vice President and Head of Social Media & Video Monetisation) के रूप में ज्वाइन किया है। करीब दो साल एचटी डिजिटल स्ट्रीम्स (HT Digital Streams) के साथ बिताने के बाद उन्होंने टाइम्स नेटवर्क में वापसी की है।

टाइम्स नेटवर्क से जुड़ने से पहले शुभजीत एचटी डिजिटल स्ट्रीम्स में हेड ऑफ वीडियो एंड सोशल मीडिया (Head of Video & Social Media) थे। यहां उन्होंने वीडियो बिजनेस, प्रोग्रामेटिक और आईपी-लेड मोनेटाइजेशन के जरिए रेवेन्यू बढ़ाने और अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस ग्रोथ की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने सोशल, एडिटोरियल और वीडियो रेवेन्यू से जुड़े कार्यों में 80 से अधिक प्रोफेशनल्स की टीम का नेतृत्व भी किया।

इससे पहले शुभजीत करीब तीन साल तक टाइम्स नेटवर्क के साथ डिजिटल वीडियो और सोशल मीडिया से जुड़ी विभिन्न भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट, डिजिटल वीडियो स्ट्रैटेजी (Associate Vice President, Digital Video Strategy) के तौर पर उन्होंने टाइम्स नाउ (Times Now), ईटी नाउ (ET Now), ईटी नाउ स्वदेश (ET Now Swadesh), टाइम्स नाउ नवभारत (Times Now Navbharat), मिरर नाउ (Mirror Now) और स्पोर्ट्स नाउ (Sports Now) जैसे ब्रांड्स की वीडियो टीमों का नेतृत्व किया। इस दौरान वीडियो रेवेन्यू को तीन गुना बढ़ाने में उनके योगदान का उल्लेख किया गया।

शुभजीत ने न्यूज़रूम वर्कफ्लो में एआई (AI) आधारित समाधानों को शामिल करने की टाइम्स नेटवर्क की कोशिशों का भी नेतृत्व किया। टाइम्स नेटवर्क से पहले वह नेटवर्क18 मीडिया एंड इन्वेस्टमेंट्स (Network18 Media & Investments) में डिप्टी ग्रुप हेड, डिजिटल वीडियोज (Deputy Group Head, Digital Videos) के पद पर कार्यरत थे।

शुभजीत ने अपने करियर की शुरुआत सीएनएन-आईबीएन (CNN-IBN) से की थी। यहां उन्होंने एसोसिएट एडिटर, स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट और ब्यूरो चीफ – नॉर्थईस्ट जैसी एडिटोरियल जिम्मेदारियां संभालीं। इसके बाद उन्होंने सीएनएन-न्यूज18 (CNN-News18) में दिल्ली ब्यूरो चीफ के रूप में भी काम किया। बाद में उन्होंने डिजिटल वीडियो और सोशल मीडिया लीडरशिप की दिशा में कदम बढ़ाया।

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जम्मू-कश्मीर सरकार बनाएगी ऑनलाइन न्यूज मीडिया के लिए नई नीति

जम्मू-कश्मीर सरकार ऑनलाइन न्यूज प्लेटफॉर्म के पंजीकरण और नियमन के लिए नई मीडिया नीति तैयार कर रही है। प्रस्तावित नीति में फर्जी और भ्रामक जानकारी से जुड़ी जवाबदेही तय होगी।

Last Modified:
Thursday, 01 October, 2026
mediapolicy

जम्मू-कश्मीर सरकार ऑनलाइन न्यूज प्लेटफॉर्म के पंजीकरण और नियमन के लिए नई मीडिया नीति तैयार कर रही है। सूचना मंत्री सकीना इटू (Sakina Itoo) ने 30 सितंबर को विधानसभा में इसकी जानकारी दी।

प्रस्तावित नई मीडिया नीति 2026 में प्रिंट प्रकाशनों के साथ ऑनलाइन न्यूज मीडिया को भी शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए प्रसारित होने वाली झूठी, भ्रामक या मनगढ़ंत जानकारी के लिए जवाबदेही तय करना है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक बशीर अहमद शाह वीरी (Bashir Ahmad Shah Veeri) के सवाल के जवाब में सकीना इटू ने बताया कि अली मोहम्मद सागर (Ali Mohammad Sagar) की अध्यक्षता वाली सदन की समिति ने सूचना विभाग को नीति और इसके दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए चार महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि विभाग तय समयसीमा के भीतर इस पर काम कर रहा है।

प्रस्तावित नीति में अपंजीकृत सोशल मीडिया न्यूज चैनलों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश और मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedures) भी शामिल होगी। इटू के मुताबिक, जिला प्रशासन को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय ऐसे चैनलों की विस्तृत सूची तैयार करनी होगी।

मंत्री ने कहा कि झूठी, भ्रामक या मनगढ़ंत जानकारी से जुड़े मामलों में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000), भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जा सकते हैं।

विधानसभा में इस मुद्दे पर अलग-अलग राय भी सामने आई। नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक तनवीर सादिक (Tanvir Sadiq) ने तस्वीरों से छेड़छाड़ (Image Morphing) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के खिलाफ सुरक्षा उपायों की मांग की। वहीं, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के विधायक वहीद-उर-रहमान पारा (Waheed-ur-Rehman Para) ने पाबंदियों का विरोध करते हुए कहा कि गलत सामग्री से निपटने का रास्ता सूचना तक ज्यादा पहुंच सुनिश्चित करना होना चाहिए।

सकीना इटू ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के महत्व को स्वीकार करते हुए कहा कि भ्रामक सोशल मीडिया सामग्री की जिम्मेदारी केवल पत्रकारों पर नहीं डाली जा सकती। उन्होंने राजनीतिक दलों और नेताओं की भूमिका की ओर भी इशारा किया। साथ ही, विधानसभा में बिना अनुमति रिकॉर्डिंग की चिंताओं को देखते हुए परिसर में लाए जाने वाले मोबाइल फोन पर कड़ी जांच का सुझाव दिया।

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सौरव गांगुली को बड़ी कानूनी राहत : 14.49 करोड़ रुपये का मध्यस्थता अवॉर्ड बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने सौरव गांगुली के पक्ष में 14.49 करोड़ रुपये के मध्यस्थता अवॉर्ड को चुनौती देने वाली परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

Last Modified:
Monday, 28 September, 2026
sourav

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) के पक्ष में दिए गए 14.49 करोड़ रुपये के मध्यस्थता अवॉर्ड (Arbitration Award) को चुनौती देने वाली परसेप्ट टैलेंट मैनेजमेंट लिमिटेड (Percept Talent Management Ltd.) की अपील पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट (Calcutta High Court) के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें अदालत ने मध्यस्थता अवॉर्ड को बरकरार रखा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद की शुरुआत 22 अक्टूबर 2003 को परसेप्ट और सौरव गांगुली के बीच हुए प्लेयर रिप्रेजेंटेशन एग्रीमेंट (Player Representation Agreement) से हुई थी। इस समझौते के तहत परसेप्ट को गांगुली के व्यावसायिक अधिकारों और व्यक्तित्व के कारोबारी इस्तेमाल के लिए उनका एकमात्र और विशेष प्रबंधक नियुक्त किया गया था। समझौते में राजस्व साझा करने और कमाई को एस्क्रो खाते (Escrow Account) के जरिए संचालित करने का प्रावधान था।

समझौते में यह भी कहा गया था कि अगर गांगुली लगातार छह महीने तक भारतीय टीम से बाहर रहते हैं, तो समझौता समाप्त किया जा सकता है। फरवरी 2006 में टीम से बाहर होने के बाद यह अवधि 1 अगस्त 2006 को पूरी हो गई। हालांकि, 30 नवंबर 2006 को टीम में वापसी के बाद भी परसेप्ट ने गांगुली का प्रतिनिधित्व जारी रखा और 21 नवंबर 2007 को समझौता समाप्त करने का नोटिस दिया।

इसके बाद विवाद मध्यस्थता (Arbitration) में पहुंचा। गांगुली ने न्यूनतम गारंटी राशि का भुगतान नहीं होने और एस्क्रो खाते से कथित अनधिकृत निकासी को लेकर दावे किए। मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने उनके दावों को स्वीकार करते हुए 14,49,91,000 रुपये की राशि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया। इसके अलावा 50 लाख रुपये की लागत भी निर्धारित की गई।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने बाद में मध्यस्थता अवॉर्ड को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि जिस संविदात्मक घटना के आधार पर परसेप्ट समझौता समाप्त करने का अधिकार जता रहा था, उसके बाद भी कंपनी ने गांगुली का प्रतिनिधित्व जारी रखा। ऐसे में बाद में समझौता समाप्त करने का उसका अधिकार समाप्त हो चुका था।

मीडिया नेटवर्क्स की रिपोर्ट्स के अनुसार, हाई कोर्ट ने यह भी माना कि कोलकाता नाइट राइडर्स (Kolkata Knight Riders) यानी केकेआर (KKR) से गांगुली की कमाई समझौते के तहत राजस्व साझा करने की व्यवस्था के दायरे में नहीं आती थी।

परसेप्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नकुल दीवान (Nakul Dewan) ने दलील दी कि मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने गांगुली की केकेआर से हुई कमाई को राजस्व साझा करने की व्यवस्था से गलत तरीके से बाहर रखा। उन्होंने कहा कि समझौते में प्रचार संबंधी सेवाओं को व्यापक रूप से शामिल किया गया था, जिसमें क्रिकेट मैचों से जुड़ी गतिविधियां भी शामिल थीं।

दीवान ने यह भी तर्क दिया कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम (Arbitration and Conciliation Act) की धारा 34 और 37 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने वाली अदालतें समझौते की शर्तों की नए सिरे से व्याख्या नहीं कर सकतीं। उन्होंने कहा कि संबंधित संविदात्मक प्रावधानों और साक्ष्यों पर भी उचित तरीके से विचार नहीं किया गया।

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