BCCI के पूर्व CEO राहुल जौहरी Flash Sports & Media Holdings, Inc. के बोर्ड में शामिल

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) राहुल जौहरी को फ्लैश स्पोर्ट्स एंड मीडिया होल्डिंग्स के निदेशक मंडल (Board of Directors) में शामिल किया गया है।

Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के पूर्व चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) राहुल जौहरी को फ्लैश स्पोर्ट्स एंड मीडिया होल्डिंग्स (Flash Sports & Media Holdings, Inc) के निदेशक मंडल (Board of Directors) में शामिल किया गया है। कंपनी ने इसकी आधिकारिक घोषणा की है।

कंपनी ने कहा कि राहुल जौहरी की नियुक्ति उनके उस विजन का अहम हिस्सा है, जिसके तहत वह क्रिकेट पर केंद्रित एक वैश्विक स्पोर्ट्स और मीडिया प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहती है।

राहुल जौहरी को स्पोर्ट्स और मीडिया इंडस्ट्री का करीब 35 वर्षों का अनुभव है। बीसीसीआई के पहले CEO के रूप में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट संचालन, इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) और नेशनल क्रिकेट अकादमी (NCA) सहित क्रिकेट के कई अहम क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाली थी।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने 3 अरब डॉलर (USD 3 Billion) से अधिक मूल्य के बीसीसीआई मीडिया अधिकारों (Media Rights) की सेल्स का नेतृत्व किया था। इसे भारतीय स्पोर्ट्स इतिहास की सबसे बड़ी मीडिया राइट्स डील्स में से एक माना जाता है। इसके अलावा उन्होंने क्रिकेट में ई-ऑक्शन (e-auction) की शुरुआत कर मीडिया और कमर्शियल राइट्स की बिक्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाया।

कंपनी का मानना है कि मीडिया राइट्स के व्यवसाय, क्रिकेट जगत में मजबूत नेटवर्क और मीडिया कंपनियों को विकसित करने के राहुल जौहरी के अनुभव से उसके विस्तार की योजनाओं को गति मिलेगी। इसमें मीडिया राइट्स हासिल करना, स्पॉन्सरशिप बढ़ाना, फ्रेंचाइजी डेवलपमेंट और विभिन्न क्रिकेट बाजारों में अपनी लीग्स का विस्तार करना शामिल है।

फ्लैश स्पोर्ट्स एंड मीडिया होल्डिंग्स के चेयरमैन और CEO ब्रैडली नैट्रास ने कहा कि राहुल जौहरी क्रिकेट कारोबार के सबसे सम्मानित नेताओं में से एक हैं। उन्हें मीडिया राइट्स, ब्रॉडकास्टर्स और क्रिकेट प्रॉपर्टीज की गहरी समझ है। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत कम ऐसे अधिकारी हैं, जिनके पास व्यावसायिक दृष्टि, राइट्स होल्डर्स और ब्रॉडकास्टर्स के साथ मजबूत भरोसा और आधुनिक क्रिकेट की बड़ी प्रॉपर्टीज को विकसित करने का अनुभव हो। उनके बोर्ड में शामिल होने से कंपनी के बड़े वैश्विक लक्ष्य साफ दिखाई देते हैं।

वहीं राहुल जौहरी ने कहा कि क्रिकेट इस समय अपने सबसे रोमांचक व्यावसायिक दौर में प्रवेश कर रहा है। नई लीग्स, नए बाजार और नए दर्शक वैश्विक क्रिकेट की तस्वीर बदल रहे हैं। उन्होंने कहा कि फ्लैश स्पोर्ट्स एंड मीडिया ने बिल्कुल सही समय पर एक मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार किया है और वह इसके बोर्ड का हिस्सा बनकर बेहद खुश हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि वह कंपनी के साथ मिलकर विश्वस्तरीय क्रिकेट प्रॉपर्टीज विकसित करने और उनकी व्यावसायिक संभावनाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान देंगे।

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तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं : सरेंडर का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को दो हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। उन्हें 22 सितंबर तक सरेंडर सर्टिफिकेट जमा करना होगा।

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
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तहलका (Tehelka) के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल (Tarun Tejpal) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से तत्काल राहत नहीं मिली है। अदालत ने उनकी उस मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसमें उन्होंने सरेंडर करने से छूट देने की अपील की थी। कोर्ट ने उन्हें दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, तेजपाल को 22 सितंबर तक सरेंडर करना होगा और इसके बाद आत्मसमर्पण का प्रमाण पत्र अदालत में जमा करना होगा। प्रमाण पत्र जमा होने के बाद ही मामले से जुड़ी आगे की कार्यवाही और सुनवाई का रास्ता आगे बढ़ेगा।

सुनवाई के दौरान तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कोर्ट से उनकी सरेंडर से छूट संबंधी इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (Interlocutory Application) को 31 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया था। उनकी ओर से दलील दी गई कि जब तक इस आवेदन पर सुनवाई नहीं होती, तब तक तेजपाल को आत्मसमर्पण से राहत दी जानी चाहिए।

गोवा सरकार (Goa Government) ने इस मांग का विरोध किया। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) अदालत में पेश हुए। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के नियमों और पहले दिए गए फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि दोषी व्यक्ति को पहले अदालत के सामने सरेंडर करना जरूरी है।

सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि यदि कोई दोषी आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो उसकी अपील को तब तक सूचीबद्ध नहीं किया जा सकता, जब तक उसके साथ सरेंडर से छूट मांगने वाली अर्जी भी मौजूद न हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए तेजपाल को निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया।

यह मामला 2013 में सामने आए रेप केस से जुड़ा है। इस मामले में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को बरी कर दिया था। इसके बाद गोवा सरकार ने उस फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।

मामले में 6 अगस्त को बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) की गोवा बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाई कोर्ट ने तेजपाल को दोषी ठहराते हुए उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

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राहुल पाधगन बने InCred Financial Services में AVP

राहुल पाधगन ने InCred Financial Services में AVP – Corporate Communications के तौर पर नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह JM Financial से जुड़े थे।

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
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राहुल पाधगन (Rahul Padghan) ने InCred Financial Services में AVP – Corporate Communications के तौर पर नई पारी शुरू की है। उन्होंने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

पाधगन JM Financial Ltd से InCred Financial Services में आए हैं, जहां वह करीब दो साल तक AVP – Corporate Communications के पद पर कार्यरत रहे। इससे पहले वह blinkX के साथ भी AVP – Corporate Communications की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

उनके करियर में HDFC Securities का भी महत्वपूर्ण अनुभव रहा है। वह कंपनी के साथ तीन साल से अधिक समय तक जुड़े रहे और इस दौरान कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी, राइटिंग और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में काम किया।

पाधगन के पास कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और रणनीतिक संचार का अनुभव है। InCred Financial Services में अपनी नई भूमिका के तहत वह कंपनी के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन से जुड़े कार्यों और रणनीति की जिम्मेदारी संभालेंगे।

उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब वित्तीय सेवा क्षेत्र में कंपनियों के लिए मजबूत कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और स्पष्ट ब्रांड पोजिशनिंग की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।

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Sandesh Limited के चेयरमैन व MD के पद पर फाल्गुनभाई पटेल की फिर होगी नियुक्ति

गुजरात स्थित मीडिया कंपनी The Sandesh Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी 83वीं Annual Report जारी कर दी है।

Last Modified:
Tuesday, 25 August, 2026
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गुजरात स्थित मीडिया कंपनी The Sandesh Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 की अपनी 83वीं Annual Report जारी कर दी है। कंपनी की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनौतीपूर्ण कारोबारी माहौल के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के ऑपरेशनल प्रदर्शन में मजबूती देखने को मिली। कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व 49.76% बढ़कर ₹437.82 करोड़ हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹292.34 करोड़ था। हालांकि, मुनाफे में पिछले साल के मुकाबले कमी दर्ज की गई।

ऑपरेशनल रेवेन्यू में करीब 50% की बढ़ोतरी

कंपनी के स्टैंडअलोन आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में ऑपरेशंस से राजस्व ₹437.82 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹292.34 करोड़ था। इस तरह इसमें 49.76% की बढ़ोतरी हुई। कंपनी की कुल आय भी बढ़कर ₹456.06 करोड़ हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹329.40 करोड़ थी।

हालांकि, कंपनी का EBITDA करीब ₹106.31 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹105.94 करोड़ से लगभग समान स्तर पर रहा। EBITDA मार्जिन 32.16% से घटकर 23.31% हो गया।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का टैक्स से पहले मुनाफा ₹97.18 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹98.99 करोड़ था। टैक्स के बाद कंपनी का मुनाफा यानी PAT ₹67.40 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹77.46 करोड़ से कम है। PAT मार्जिन भी 26.50% से घटकर 15.40% रहा।

कंसोलिडेटेड आधार पर भी आय बढ़ी

कंपनी और उसकी सहायक कंपनी को मिलाकर कंसोलिडेटेड आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 में ऑपरेशंस से राजस्व ₹439.70 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹294.18 करोड़ था।

कंसोलिडेटेड कुल आय ₹458.07 करोड़ रही, जो पिछले साल के ₹331.48 करोड़ से अधिक है। हालांकि, कंसोलिडेटेड PAT घटकर ₹65.84 करोड़ रहा, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह ₹77.12 करोड़ था। कंसोलिडेटेड PAT मार्जिन 26.21% से घटकर 14.97% हो गया।

शेयरधारकों को ₹5 प्रति शेयर डिविडेंड देने का प्रस्ताव

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹10 फेस वैल्यू वाले प्रत्येक इक्विटी शेयर पर ₹5 का अंतिम डिविडेंड देने की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव पर 15 सितंबर 2026 को होने वाली वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।

कंपनी के मुताबिक, डिविडेंड के लिए कुल ₹3.78 करोड़ के भुगतान का प्रस्ताव है। अगर शेयरधारक इसे मंजूरी देते हैं तो रिकॉर्ड डेट 14 अगस्त 2026 तक रजिस्टर में दर्ज सदस्यों को इसका भुगतान किया जाएगा। कंपनी ने बताया है कि डिविडेंड का भुगतान 12 अक्टूबर 2026 या उससे पहले किया जाना प्रस्तावित है।

15 सितंबर को होगी वार्षिक आम बैठक

The Sandesh Limited की 83वीं वार्षिक आम बैठक 15 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यम से होगी। बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड वित्तीय विवरणों को मंजूरी के लिए रखा जाएगा।

बैठक में डिविडेंड के प्रस्ताव के अलावा राहुल राजीवकुमार शाह को रोटेशन के आधार पर दोबारा निदेशक नियुक्त करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

फाल्गुनभाई पटेल की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव

AGM में कंपनी के चेयरमैन & मैनेजिंग डायरेक्टर फाल्गुनभाई पटेल को पांच साल के लिए दोबारा चेयरमैन & मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने का विशेष प्रस्ताव भी रखा गया है। प्रस्तावित कार्यकाल 1 अप्रैल 2027 से 31 मार्च 2032 तक रहेगा।

कंपनी ने प्रस्ताव में उनके लिए अधिकतम ₹7 करोड़ सालाना पारिश्रमिक की सीमा रखी है। इसके अलावा कंपनी की बोनस योजना के तहत परफॉर्मेंस बोनस, बोर्ड की मंजूरी के अनुसार वैरिएबल पेआउट और कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर मुनाफे के प्रतिशत के रूप में कमीशन का प्रावधान भी प्रस्ताव में शामिल है। कमीशन कंपनी के नेट प्रॉफिट के 5% से अधिक नहीं होगा।

कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में फाल्गुनभाई पटेल को ₹4.98 करोड़ का पारिश्रमिक और ₹19.50 लाख का पोस्ट-एम्प्लॉयमेंट बेनिफिट मिला। पिछले वित्त वर्ष में उनका पारिश्रमिक ₹3.74 करोड़ था।

पन्नाबेन पटेल के निदेशक पद पर बने रहने का प्रस्ताव

AGM में पन्नाबेन एफ. पटेल को नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में जारी रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है। कंपनी के मुताबिक, वह 17 अक्टूबर 2027 को 75 वर्ष की उम्र पूरी करेंगी। इसके बावजूद प्रस्ताव के जरिए उन्हें नॉन एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में पद पर बने रहने की मंजूरी मांगी गई है।

₹1,500 करोड़ तक की उधारी के लिए संपत्तियों पर चार्ज बनाने का प्रस्ताव

कंपनी AGM में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखने जा रही है। इसके तहत बोर्ड को कंपनी की चल और अचल संपत्तियों तथा अन्य परिसंपत्तियों पर मॉर्गेज, चार्ज, प्लेज या हाइपोथिकेशन जैसी सुरक्षा बनाने की मंजूरी देने का प्रस्ताव है।

यह व्यवस्था बैंकों, NBFCs, वित्तीय संस्थानों और अन्य कर्जदाताओं से लिए जाने वाले कर्ज को सुरक्षित करने के लिए होगी। प्रस्ताव में इस तरह की उधारी की कुल सीमा ₹1,500 करोड़ रखी गई है।

लोन, गारंटी और निवेश की सीमा ₹2,000 करोड़ करने का प्रस्ताव

कंपनी ने Companies Act की धारा 186 के तहत लोन देने, गारंटी या सिक्योरिटी देने और दूसरी कंपनियों की सिक्योरिटीज में निवेश करने की सीमा बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ करने का प्रस्ताव भी रखा है।

प्रस्ताव के मुताबिक, कंपनी के कुल लोन, निवेश, गारंटी और सिक्योरिटी की बकाया राशि किसी भी समय ₹2,000 करोड़ से ज्यादा नहीं होगी।

Sandesh Digital का The Sandesh में विलय करने की तैयारी

The Sandesh Limited की 100 फीसदी स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Sandesh Digital Private Limited भी सालाना रिपोर्ट में महत्वपूर्ण रूप से सामने आई है। यह कंपनी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए न्यूज, वीडियो और विज्ञापन उपलब्ध कराने के कारोबार में काम करती है।

वित्त वर्ष 2025-26 में Sandesh Digital का ऑपरेशंस से राजस्व ₹2.09 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹2.05 करोड़ था। हालांकि, इस दौरान कंपनी को टैक्स से पहले ₹1.65 करोड़ का घाटा हुआ। टैक्स के बाद घाटा ₹1.56 करोड़ रहा। पिछले वित्त वर्ष में टैक्स के बाद घाटा ₹33.51 लाख था।

इसी बीच, 5 अगस्त 2026 को The Sandesh के बोर्ड ने Sandesh Digital Private Limited का The Sandesh Limited में विलय करने की योजना को मंजूरी दे दी। हालांकि, इस विलय के लिए शेयरधारकों, NCLT, स्टॉक एक्सचेंज और अन्य संबंधित वैधानिक मंजूरियां लेनी होंगी। कंपनी के मुताबिक, विलय का मकसद आपसी कंपनी लेनदेन को कम करना, प्रशासनिक खर्च घटाना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है।

डिजिटल मीडिया पर कंपनी का बढ़ता फोकस

कंपनी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में डिजिटल मीडिया को भारत के मीडिया और मनोरंजन उद्योग के प्रमुख विकास क्षेत्रों में से एक बताया है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इंटरनेट की पहुंच बढ़ने और डिजिटल कंटेंट की खपत में लगातार इजाफे के साथ डिजिटल विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन, कंटेंट निर्माण और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं में आगे भी बढ़ने की काफी संभावना है।

कंपनी का कहना है कि उसकी मोबाइल ऐप और डिजिटल एडिशन जैसी पहलें उसे प्रिंट और क्षेत्रीय मीडिया कारोबार के साथ-साथ डिजिटल क्षेत्र में भी इस ग्रोथ का फायदा उठाने की स्थिति में रखती हैं।

FY26 में CSR पर ₹1.92 करोड़ खर्च

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने Corporate Social Responsibility यानी CSR गतिविधियों पर कुल ₹1.92 करोड़ खर्च किए। इसमें ₹25 लाख Old Age Home के संचालन और रखरखाव पर, ₹1.32 करोड़ मेडिकल उपकरणों की खरीद पर और ₹35 लाख बच्चों और महिलाओं के विकास से जुड़ी गतिविधियों पर खर्च किए गए।

ऑडिटर की रिपोर्ट में कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं

Annual Report के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए Statutory Auditor की रिपोर्ट में कोई Qualification, Reservation, Disclaimer या Adverse Remark नहीं है। ऑडिटर्स ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष के दौरान कंपनी में किसी तरह की धोखाधड़ी की जानकारी Audit Committee को रिपोर्ट नहीं की गई।

राजस्व बढ़ा, लेकिन मुनाफे पर दबाव

कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 में The Sandesh Limited के ऑपरेशंस से राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, खर्च बढ़ने और अन्य कारणों के चलते कंपनी के टैक्स के बाद मुनाफे में कमी आई।

अब कंपनी की 83वीं सालाना आम बैठक (AGM) में डिविडेंड, निदेशकों की नियुक्ति और दोबारा नियुक्ति, उधारी के लिए कंपनी की संपत्तियों पर सुरक्षा बनाने और निवेश व लोन की सीमा बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी।

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टाइम्स ग्रुप में मधुर शाही की वापसी, ‘Times Influence’ में संभालेंगी रेवेन्यू ग्रोथ

मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
Madhur Shahi

‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने मधुर शाही को एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट–जोनल हेड, टाइम्स इन्फ्लुएंस–रेवेन्यू के पद पर नियुक्त किया है। मधुर शाही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स, ब्रैंडेड कंटेंट, इंटीग्रेटेड मीडिया सॉल्यूशंस और आईपी-आधारित अवसरों के माध्यम से बिजनेस ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह मुंबई से अपना कामकाज संभालेंगी और राजेश मदामपथ को रिपोर्ट करेंगी। मुंबई की बीसीए टीम तत्काल प्रभाव से उन्हें रिपोर्ट करेगी।

मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने टेलीविजन, डिजिटल, प्रिंट, इवेंट्स और इंटीग्रेटेड मीडिया प्लेटफॉर्म्स में काम किया है।

मधुर शाही इससे पहले जून 2024 से एनडीटीवी नेटवर्क (NDTV Network) में ग्रुप लीड-वेस्ट के पद पर कार्यरत थीं। यहां वह पश्चिमी क्षेत्र के लिए कंटेंट स्ट्रैटेजी, इवेंट्स और महत्वपूर्ण ब्रैंड कोलैबोरेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रही थीं। साथ ही ब्रैंडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप, आईपी मोनेटाइजेशन और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।

बता दें कि टाइम्स नेटवर्क में मधुर शाही की यह वापसी भी है। इससे पहले वह करीब नौ वर्षों तक बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (Bennett Coleman & Co. Ltd.) से जुड़ी रही हैं। यहां उन्होंने प्रमुख कैटेगरी और कॉरपोरेट अकाउंट्स को संभाला तथा इंटीग्रेटेड मीडिया बिजनेस और प्रमुख प्रॉपर्टीज को विकसित करने और विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पूर्व में वह वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Worldwide Media Pvt. Ltd.), वीजेएम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (VJM Media Pvt. Ltd.) और टीवी लाइव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (T.V. Live India Pvt. Ltd.) में भी विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।

मधुर शाही की नियुक्ति के बारे में टाइम्स नेटवर्क ने कहा है कि मीडिया इकोसिस्टम की उनकी मजबूत समझ, क्लाइंट्स और एजेंसियों के साथ गहरे संबंधों तथा ब्रैंडेड कंटेंट और इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस के क्षेत्र में उनके अनुभव से नेटवर्क को अपने अगले विकास चरण में लाभ मिलने की उम्मीद है।   

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गुंतास रंधावा ने 17 साल बाद यूनिलीवर से कहा अलविदा

गुंतास रंधावा ने Unilever में 17 साल की लंबी पारी के बाद कंपनी छोड़ दी है। वह हाल तक Hindustan Unilever में एक अहम जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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गुंतास रंधावा (Guntas Randhawa) ने यूनिलीवर (Unilever) में करीब 17 साल बिताने के बाद कंपनी से विदाई ली है। वह हाल तक हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) में India Head – Vitamins, Minerals and Supplements के पद पर थीं।

रंधावा ने 2009 में कंपनी के साथ Business Leadership Trainee के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। करीब डेढ़ दशक से ज्यादा के कार्यकाल में उन्होंने कई वरिष्ठ पदों पर काम किया और अलग-अलग कारोबारों की जिम्मेदारियां संभालीं।

उनके अनुभव का दायरा हेल्थ और वेलनेस ब्रांड्स, सप्लीमेंट्स, प्रीमियम डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस और P&L मैनेजमेंट तक रहा है। उन्होंने ब्रांड्स की लंबी अवधि की ग्रोथ और बिजनेस विस्तार से जुड़े कामों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कंपनी से विदाई की जानकारी साझा करते हुए रंधावा ने लिंक्डइन पोस्ट में अपने 17 साल के अनुभव को याद किया। उन्होंने लिखा कि यूनिलीवर ने उन्हें यह समझने के लिए 17 साल दिए कि कोई ब्रांड लोगों की यादों में अपनी छोटी-सी जगह कैसे बनाता है और उस जगह को बनाए रखने के लिए लगातार क्या करना पड़ता है।

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कुणाल किशोर का जन्मदिन : Value 360 की कामयाबी ने बनाया खास

कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का सफर तय करने वाले कुणाल किशोर का जन्मदिन ऐसे समय आया है, जब Value 360 नए विकास चरण में है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
kunalkishor

वैल्यू 360 (Value 360) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन कुणाल किशोर (Kunal Kishore) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनके लिए यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि दो दशक से ज्यादा लंबे कम्युनिकेशंस करियर के बाद उनके द्वारा खड़ा किया गया कारोबार अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।

कुणाल किशोर की अगुआई में बनी वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस (Value 360 Communications) इस साल एनएसई इमर्ज (NSE Emerge) पर सूचीबद्ध हुई है। कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़े भी कारोबार के विस्तार के साथ उसकी बढ़ती लाभप्रदता की तस्वीर पेश करते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 68.96 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 26.4 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में EBITDA 59.9 फीसदी बढ़कर 19.17 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा पहली बार 10 करोड़ रुपये के आंकड़े से ऊपर गया।

मई में हुई लिस्टिंग ने भी वैल्यू 360 के सफर में एक अहम अध्याय जोड़ा। कंपनी देश की पहली सूचीबद्ध इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी बनी, जिससे पब्लिक मार्केट में पीआर बिजनेस के प्रदर्शन को मापने का एक नया नजरिया सामने आया।

किशोर का करियर ऐसे समय शुरू हुआ था, जब कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री मुख्य रूप से पत्रकारों, मीडिया रिलेशन और कॉरपोरेट प्रतिष्ठा पर केंद्रित थी। अब डिजिटल, कंटेंट, इन्फ्लुएंसर्स और नए ब्रांड कम्युनिकेशन मॉडल इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। वर्ष 2020 में क्लैनकनेक्ट (ClanConnect) की शुरुआत भी इसी बदलाव की दिशा में एक कदम रही।

कंपनी की मौजूदा संरचना में भी बदलाव आया है। अतुल शर्मा (Atul Sharma) के सीईओ बनने के बाद किशोर की भूमिका अब रोजमर्रा के ऑपरेशनल फैसलों से आगे संगठन की व्यापक दिशा तय करने पर ज्यादा केंद्रित है। इसके साथ ही वह 2025-27 कार्यकाल के लिए पीआरसीएआई (PRCAI) के प्रेसिडेंट के तौर पर इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों में सक्रिय हैं।

ऐसे में कुणाल किशोर का यह जन्मदिन सिर्फ एक व्यक्तिगत पड़ाव नहीं, बल्कि उस कम्युनिकेशंस कारोबार के नए चरण का भी प्रतीक है, जिसे उन्होंने वर्षों की मेहनत से विकसित किया है।

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वोल्टास ने प्रसेनजीत बसु को दी नई बड़ी जिम्मेदारी

प्रसेनजीत बसु को वोल्टास लिमिटेड में हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह वोल्टास बेको में मार्केटिंग प्रमुख थे।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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वोल्टास लिमिटेड (Voltas Limited) ने प्रसेनजीत बसु (Prasenjit Basu) को हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की मार्केटिंग रणनीति और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगे।

बसु इससे पहले वोल्टास बेको (Voltas Beko) में हेड-मार्केटिंग, प्रोडक्ट एंड ई-कॉमर्स के पद पर कार्यरत थे। वोल्टास बेको से पहले वह वोल्टास लिमिटेड में ही सीनियर जनरल मैनेजर-मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मार्केटिंग और बिजनेस स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में बसु को कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रिटेल, एफएमसीजी और मीडिया सहित कई इंडस्ट्रीज का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग संगठनों में मार्केटिंग, ब्रांड और बिजनेस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व किया है।

बसु के पिछले कार्य अनुभव में टेन स्पोर्ट्स नेटवर्क (TEN Sports Network), वीडियोकॉन कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Videocon Consumer Durables), रिलायंस डिजिटल रिटेल (Reliance Digital Retail) और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG Electronics) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने बर्सन-मार्स्टेलर-जेनेसिस पीआर (Burson-Marsteller - Genesis PR), डीएलएफ यूनिवर्सल (DLF Universal) और कोडक (Kodak) के साथ भी काम किया है। वोल्टास में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब कंपनी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट में अपनी ब्रांड और मार्केटिंग मौजूदगी को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।

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दिल्ली HC की दो टूक, पर्सनालिटी राइट्स के नाम पर पैरोडी व सटायर नहीं रोका जा सकता

दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है। कोर्ट यह देख रहा है कि क्या इन अधिकारों का इस्तेमाल सटायर, पैरोडी, कैरिकेचर या किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी को रोकने के लिए किया जा सकता है, खासकर तब जब मामला किसी व्यक्ति की व्यावसायिक छवि के गलत इस्तेमाल से जुड़ा न हो।

यह मुद्दा 'फिजिक्सवाला' के फाउंडर अलख पांडे की ओर से दायर एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आया। अलख पांडे ने आरोप लगाया है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना आपत्तिजनक तरीके से किया जा रहा है और उन्होंने इससे सुरक्षा की मांग की है।

मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भमभानी कर रहे हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि पांडे की ओर से मांगी गई सुरक्षा का दायरा जरूरत से ज्यादा व्यापक हो सकता है। अदालत अब यह जांचना चाहती है कि पर्सनैलिटी राइट्स कहीं ऐसे कंटेंट को रोकने का जरिया तो नहीं बन रहे, जो किसी व्यक्ति की व्यावसायिक पहचान का गलत इस्तेमाल किए बिना कानूनी तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता हो।

सटायर और पैरोडी पर भी कोर्ट की नजर

अदालत ने पहले के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पर्सनैलिटी राइट्स का इस्तेमाल किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी के प्रसार को रोकने या कैरिकेचर, पैरोडी और व्यंग्य जैसे पूरे तरह के अभिव्यक्ति के रूपों को खत्म करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, अगर उनमें किसी व्यक्ति के Personality या Publicity Rights का व्यावसायिक शोषण नहीं हो रहा है।

इसका मतलब यह है कि कोर्ट एक तरफ किसी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत और आपत्तिजनक इस्तेमाल से उसके अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि इन अधिकारों का इस्तेमाल आलोचना, व्यंग्य या पैरोडी को रोकने के लिए न हो।

5 अगस्त के अंतरिम आदेश में क्या कहा था?

यह मुद्दा 5 अगस्त को दिए गए एक अंतरिम आदेश के साथ सामने आया। उस आदेश में कोर्ट ने कंटेंट हटाने के निर्देशों को कथित उल्लंघन की तीन श्रेणियों तक सीमित रखा था। इनमें अश्लील सामग्री, अपमानजनक कंटेंट और पांडे की पहचान या व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल शामिल था।

कोर्ट ने आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोपी पक्षों को समन भी जारी किए और उनसे जवाब मांगा है। इसके अलावा Google, Telegram, X और Automatic Inc को मामले में बताए गए कुछ वेबसाइट्स के पीछे मौजूद लोगों से जुड़ी बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

दूसरी वेबसाइट्स की भी शिकायत कर सकते हैं अलख पांडे

कोर्ट ने अलख पांडे को यह अनुमति भी दी है कि अगर उन्हें लगता है कि दूसरी वेबसाइट्स भी उनके अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं, तो वह उनके बारे में संबंधित इंटरमीडियरी को जानकारी दे सकते हैं। ऐसे मामलों में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और डोमेन रजिस्ट्रार तकनीकी तौर पर यह जांच करेंगे कि संबंधित वेबसाइट का संबंध उस वेबसाइट से है या नहीं, जिसके खिलाफ कोर्ट पहले ही रोक का आदेश दे चुका है।

हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि इस तकनीकी जांच का मतलब यह नहीं है कि ISP या डोमेन रजिस्ट्रार खुद यह तय कर सकते हैं कि किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया जाए या नहीं। उनकी भूमिका केवल यह जांचने तक सीमित रहेगी कि अलख पांडे की ओर से बताई गई वेबसाइट पहले से प्रतिबंधित वेबसाइट का मिरर, अल्फान्यूमेरिक या रीडायरेक्ट वर्जन है या नहीं।

अलख पांडे की ओर से क्या आरोप लगाए गए?

अलख पांडे की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट जे. साईं दीपक ने कोर्ट के सामने आरोप रखा कि उनकी तस्वीर और पहचान का इस्तेमाल कई जगहों पर उनकी अनुमति के बिना किया जा रहा है।

उनकी ओर से कहा गया कि टेलीग्राम स्टीकर में अलख पांडे के चेहरे का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्हें व्यावसायिक तौर पर बेचा जा रहा है। इसके अलावा कुछ कंटेंट में कथित तौर पर आपत्तिजनक, अश्लील और यौन रूप से अपमानजनक सामग्री भी दिखाई जा रही है।

अलख पांडे की ओर से यह भी कहा गया कि वह आलोचना के प्रति अत्यधिक संवेदनशील नहीं हैं, लेकिन उनके मुताबिक कुछ सीमाओं का पालन किया जाना चाहिए।

पैरोडी वीडियो हटाने से कोर्ट ने किया इनकार

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पांडे से जुड़ा एक पैरोडी और सटायरिक वीडियो भी पेश किया गया। कोर्ट ने वीडियो देखने के बाद उसे हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। यही पहलू इस मामले को खास बनाता है। कोर्ट अब यह अंतर समझने पर जोर दे रहा है कि किसी व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत व्यावसायिक या अश्लील इस्तेमाल एक अलग मामला है, जबकि सटायर, पैरोडी या व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति अलग श्रेणी में आ सकती है।

आगे की सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट यह तय करने की दिशा में आगे बढ़ेगा कि पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की सीमा क्या होनी चाहिए और किस स्थिति में इन अधिकारों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की रक्षा के लिए किया जा सकता है, तथा किस स्थिति में इसका इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

 

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इंडिया टुडे ग्रुप तलाशेगा दिल्ली के प्रदूषण का हल, शुरू किया ये कैंपेन

इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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दिल्ली के प्रदूषण की समस्या पर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन अब इसे सिर्फ चर्चा तक सीमित रखने के बजाय समाधान तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।

इस पहल का मकसद दिल्ली के प्रदूषण पर बार-बार बात करने और समस्या बताने से आगे बढ़कर ऐसे व्यावहारिक, बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले और नतीजे मापने योग्य समाधान तलाशना है, जिनसे शहर की हवा को वास्तव में बेहतर किया जा सके।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर खास फोकस

इस कैंपेन में वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को दिल्ली की खराब हवा की एक प्रमुख वजह मानते हुए क्लीन मोबिलिटी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े उत्सर्जन पर खास ध्यान दिया जाएगा।

कैंपेन के तहत आम लोग भी अपने सुझाव और आइडिया दे सकेंगे। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए प्रस्ताव जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद इन आइडिया की विशेषज्ञों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मदद से व्यवस्थित तरीके से जांच की जाएगी।

सिर्फ कागज पर अच्छे दिखने वाले सुझावों के बजाय ऐसे समाधानों को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके और जिनके नतीजों को मापा भी जा सके।

विशेषज्ञों की जूरी करेगी आइडिया का मूल्यांकन

कैंपेन में विज्ञान, प्रशासन, स्वास्थ्य, मीडिया और खेल जगत से जुड़े लोगों को जूरी में शामिल किया गया है। जूरी में IIT Kanpur के Director Prof. Manindra Agrawal, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के नरेश प्रियदर्शी, Medanta – The Medicity में Pediatrics की सीनियर डायरेक्टर व HOD डॉ. नीलम मोहन और भारत की 1983 क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव शामिल हैं।

इन विशेषज्ञों की टीम अलग-अलग सुझावों की उपयोगिता और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में लागू किए जाने की संभावना का आकलन करेगी।

जमीन पर भी परखे जा सकते हैं समाधान

इस कैंपेन की खास बात यह है कि सिर्फ आइडिया चुनकर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। चुनिंदा प्रस्तावों को जमीन पर टेस्ट भी किया जा सकता है। इसका मकसद यह देखना होगा कि वास्तविक परिस्थितियों में कोई समाधान कितना प्रभावी है और क्या उससे प्रदूषण कम करने के मापने योग्य नतीजे मिलते हैं। यानी कैंपेन का फोकस केवल ‘अच्छा आइडिया’ खोजने पर नहीं, बल्कि उसे वास्तव में लागू करके उसके नतीजे देखने पर भी रहेगा।

पांच हफ्ते बाद होगा ग्रैंड फिनाले

पांच हफ्ते तक चलने वाला यह कैंपेन ग्रैंड फिनाले के साथ खत्म होगा। इसमें चुने गए समाधान विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के सामने पेश किए जाएंगे। कैंपेन के तहत चुने गए विजेता आइडिया को दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा बड़े स्तर पर लागू किए जाने के लिए विचार किया जाएगा।

इसके अलावा विजेता प्रस्ताव के लिए 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी रखा गया है। इससे ऐसे लोगों और टीमों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जो दिल्ली के प्रदूषण से निपटने के लिए कोई प्रभावी और व्यावहारिक समाधान लेकर सामने आ सकते हैं।

सवाल सिर्फ यह नहीं कि प्रदूषण कितना बढ़ा, बल्कि समाधान क्या है

‘Pollution Ka Solution’ कैंपेन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के प्रदूषण को लेकर होने वाली चर्चा का तरीका बदलना है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि दिल्ली की हवा कितनी खराब हो गई है, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि इसे बेहतर करने के लिए वास्तव में क्या किया जा सकता है।

इंडिया टुडे ग्रुप इस पहल को लोगों की भागीदारी, तथ्यों और जमीन पर समाधान लागू करने की सोच के साथ आगे बढ़ा रहा है। उम्मीद है कि इस कैंपेन के जरिए दिल्ली के प्रदूषण पर होने वाली अगली बहस में सिर्फ समस्या की चर्चा नहीं होगी, बल्कि ऐसा समाधान भी सामने आएगा जिसे वास्तव में लागू किया जा सके।

 

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प्रशांत वी. सिंह बने LiveMint के नए एडिटर, संभालेंगे हिंदी की भी जिम्मेदारी

प्रशांत वी. सिंह इससे पहले ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के साथ जुड़े थे, जहां वह फरवरी 2026 से अगस्त 2026 तक ‘बिजनेस टुडे’ में डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत रहे।

Last Modified:
Sunday, 23 August, 2026
Prashant V Singh

बिजनेस जर्नलिज्म और डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार प्रशांत वी. सिंह ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) मीडिया समूह के साथ नई पारी शुरू की है। वह ग्रुप के बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म ‘लाइवमिंट’ (LiveMint) और ‘लाइवमिंट हिंदी’ (LiveMint Hindi) के एडिटर और हेड की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अपनी इस भूमिका में प्रशांत वी. सिंह लाइवमिंट की विश्वसनीय पत्रकारिता को और मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल और उभरते फॉर्मेट्स में इसकी एडिटोरियल स्ट्रैटेजी पर काम करेंगे। उनका फोकस तेजी से डिजिटल होते मीडिया परिवेश में पाठकों तक प्रासंगिक और उपयोगी बिजनेस न्यूज पहुंचाने के साथ-साथ वेब, ऐप, वीडियो और इवेंट्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाइवमिंट के साथ पाठकों की भागीदारी बढ़ाने पर रहेगा।

प्रशांत वी. सिंह इससे पहले ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के साथ जुड़े थे, जहां वह फरवरी 2026 से अगस्त 2026 तक ‘बिजनेस टुडे’ में डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान वह बिजनेस टुडे के वेब, टीवी और प्रिंट के बीच तालमेल बनाने, ऑडियंस ग्रोथ, एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, डेटा और एनालिटिक्स के साथ-साथ एआई इंटीग्रेशन पर काम कर रहे थे।

इससे पहले वह ‘टाइम्स नेटवर्क’ में सीनियर एडिटर-बिजनेस और ‘ईटी नाउ डिजिटल’ व ‘ईटी नाउ स्वदेश डिजिटल’ के हेड की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने ईटी नाउ और ईटी नाउ स्वदेश के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने डिजिटल एक्सक्लूसिव, ग्राउंड रिपोर्टिंग, नई कैटेगरी और विभिन्न आईपी व इवेंट्स पर भी काम किया।

प्रशांत वी. सिंह ‘जी बिजनेस’ में करीब चार साल तक डिप्टी एडिटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रिवैंप और लॉन्च/री-लॉन्च के साथ ओरिजिनल वीडियो, एक्सक्लूसिव और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम किया।

वह ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इससे पहले उन्होंने ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, ‘सीएनएन-आईबीएन’ में चीफ सब एडिटर और ‘डेलीभास्कर डॉट कॉम’ में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम किया है। अपने करियर की शुरुआत में वह ‘दूरदर्शन न्यूज’ में स्क्रिप्ट राइटर और ‘दैनिक जागरण’ में इंटर्न-न्यूज (एडिटोरियल) के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

प्रशांत वी. सिंह के पास डिजिटल पत्रकारिता में करीब 19 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो, फोटो और डेटा स्टोरीज के साथ-साथ एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, ऑडियंस ग्रोथ, एआई, पैनल डिस्कशन, इवेंट्स, आईपी, शो, सब्सक्रिप्शन, ऐप्स और पॉडकास्ट के क्षेत्र में काम किया है।

शिक्षा की बात करें तो प्रशांत वी. सिंह ने आई. के. गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन/मीडिया स्टडीज में एमएससी की है। उन्होंने आईएमटी गाजियाबाद के दिल्ली स्थित लाजपत नगर सेंटर से इंटरनेशनल बिजनेस में पीजीडीबीएम भी किया है। वर्ष 2024 में उन्होंने बेनेट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ‘जेनेरेटिव एआई फॉर स्किल एन्हांसमेंट’ कार्यक्रम भी पूरा किया।

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