तबूला ने ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) के साथ अपनी साझेदारी का विस्तार करते हुए भारत और थाईलैंड में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन यूजर्स तक टैबूला न्यूज़ (Taboola News) पहुंचाने की घोषणा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंटेंट रिकमेंडेशन प्लेटफॉर्म तबूला (Taboola) ने स्मार्टफोन निर्माता ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है। इस विस्तार के तहत तबूला न्यूज़ (Taboola News) अब भारत और थाईलैंड में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन डिवाइसेज पर उपलब्ध होगी।
तबूला (Taboola), ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) वर्ष 2023 से साथ काम कर रहे हैं। अब तक यह सेवा यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom), फिलीपींस (Philippines), सिंगापुर (Singapore) और अर्जेंटीना (Argentina) जैसे बाजारों में उपलब्ध थी। नई साझेदारी के साथ भारत और थाईलैंड भी इस सूची में शामिल हो गए हैं।
समझौते के तहत ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) अपने स्मार्टफोन्स की लॉक स्क्रीन (Lock Screen) पर तबूला (Taboola) के कंटेंट रिकमेंडेशन को इंटीग्रेट करना जारी रखेंगे। यह सेवा उपयोगकर्ताओं को उनकी रुचि के अनुसार तबूला (Taboola) के पब्लिशर नेटवर्क से व्यक्तिगत (Personalised) समाचार और अन्य कंटेंट उपलब्ध कराएगी।
तबूला (Taboola) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) एडम सिंगोल्डा (Adam Singolda) ने कहा, "ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) हमेशा अपने ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने पर केंद्रित रहे हैं और तबूला न्यूज़ (Taboola News) उसी प्रयास का हिस्सा है।
हमारी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के दौरान हमने उनके नवाचार के प्रति समर्पण को देखा है। हमें खुशी है कि तबूला न्यूज़ (Taboola News) अब दुनिया भर में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं तक प्रासंगिक कंटेंट पहुंचाने में योगदान दे रही है।"
ओप्पो (OPPO) ओवरसीज बिजनेस (Overseas Business) के निदेशक टैंक ज़ेंग (Tank Zeng) ने कहा, "हमारा फोकस हमेशा उपयोगकर्ताओं को मूल्यवान अनुभव प्रदान करने पर रहा है। तबूला न्यूज़ (Taboola News) के माध्यम से हमें दुनिया भर के भरोसेमंद पब्लिशर्स का कंटेंट उपलब्ध कराने का लाभ मिला है। इस विस्तारित साझेदारी के जरिए हम अपने उपयोगकर्ताओं तक और बेहतर अनुभव पहुंचाने के लिए उत्साहित हैं।"
तबूला न्यूज़ (Taboola News) पब्लिशर्स को मोबाइल डिवाइसेज के जरिए अपने कंटेंट का वितरण करने में मदद करती है। वहीं, स्मार्टफोन निर्माता अपने डिवाइसेज में व्यक्तिगत समाचार फीड (Personalised News Feed) को आसानी से इंटीग्रेट कर उपयोगकर्ताओं की सहभागिता बढ़ा सकते हैं।
भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
DOOH का ग्लोबल मार्केट 2026 में लगभग $20 से $22.5 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। Fortune Business Insights के अनुसार 2025 में यह मार्केट $20.17 अरब डॉलर था और 2026 में $22.51 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, 2034 तक $56.1 अरब डॉलर होने का अनुमान है, 12.09% CAGR के साथ। Mordor Intelligence (जनवरी 2026) के मुताबिक 2026 में वैश्विक DOOH मार्केट $20.22 अरब डॉलर है और 2031 तक $32.98 अरब तक पहुंचेगा।
यह अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग रिसर्च कंपनियां अलग-अलग तरीके से आंकड़े तैयार करती हैं। लेकिन सभी की राय एक जैसी है कि यह मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।
भारत की तस्वीर: MarkNtel Advisors के अनुसार भारत का DOOH मार्केट 2024 में लगभग $284 मिलियन (करीब ₹2,350 करोड़) था और 2030 तक $620 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, लगभग 14% CAGR पर। PwC की Global Entertainment & Media Outlook 2025–29 रिपोर्ट बताती है कि भारत का कुल OOH राजस्व 2024 में $568 मिलियन था, जो 13.4% की दर से बढ़ा और 2029 तक $798 मिलियन तक पहुंचेगा। Adonmo के इंडस्ट्री आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल OOH मार्केट (डिजिटल और पारंपरिक दोनों) 2025 में ₹6,500 करोड़ से ऊपर था।
प्रोग्रामेटिक DOOH: जब होर्डिंग बोलने लगे एल्गोरिद्म की भाषा
DOOH की इस क्रांति के केंद्र में है प्रोग्रामेटिक DOOH, यानी ऑटोमेटेड, डेटा-संचालित तरीके से विज्ञापन खरीदना और चलाना। पहले एक बिलबोर्ड बुक करने में 5-7 दिन लगते थे, मैनेजर को फोन, कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग, इंतजार। अब प्रोग्रामेटिक DOOH के जरिए उसी जगह पर 24 घंटे से भी कम समय में कैंपेन लाइव हो सकती है।
VIOOH के द्वारा 2026 में किए अध्ययन (1,050 विज्ञापनदाताओं पर) के अनुसार हाल के प्रोग्रामेटिक DOOH खरीदारों में से, पिछले 18 महीनों में औसतन 34% कैंपेन में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा था और यह अगले 18 महीनों में 48% तक पहुंचने का अनुमान है। Google DV360 और The Trade Desk जैसे प्रमुख DSP प्लेटफॉर्म अब OOH इन्वेंटरी को डिजिटल चैनलों के साथ एक ही मीडिया प्लान में खरीदने की सुविधा दे रहे हैं।
भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है। PwC की रिपोर्ट और एक्सचेंज4मीडिया के इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार भारत में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा OOH खर्च का महज 1-2% है। PwC इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कॉस्ट-शेयरिंग की चिंताएं और ऐडवर्टाइजिंग Agencies Association of India (AAAI) की formal स्वीकृति का न मिलना बताता है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में यह आंकड़ा 3-5% तक पहुंच सकता है और 2028 तक 15-20%।
मौसम, ट्रैफिक और वक्त के हिसाब से बदलते विज्ञापन
स्मार्ट DOOH की सबसे रोचक बात यह है कि ये स्क्रीनें आसपास के माहौल को 'पढ़' सकती हैं। इसके कई तरीके हैं:
मौसम आधारित विज्ञापन: जैसे ही तापमान एक तय सीमा से ऊपर जाता है, कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम का विज्ञापन चल पड़ता है। बारिश होते ही छाते या रेनकोट की ब्रैंड दिखने लगती है। Aperol ने एक कैंपेन में यह तय किया कि उनका विज्ञापन केवल तभी दिखे जब तापमान 19°C से ऊपर हो, और वह भी गुरुवार से रविवार, दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे के बीच। Rain-X ने कनाडा में बर्फ, बारिश और ओले के लिए अलग-अलग क्रिएटिव तैयार किए जो मौसम के हिसाब से अपने आप बदल जाते थे। Dulux पेंट ने मौसम-ट्रिगर कैंपेन के जरिए अपने स्टोर में 130% अधिक ट्रैफिक दर्ज किया।
ट्रैफिक और समय आधारित विज्ञापन: सुबह की भीड़ में कॉफी का विज्ञापन, दोपहर में फास्ट फूड स्पेशल, शाम को मनोरंजन। हाईवे पर ट्रैफिक जाम में प्रीमियम ब्रैंड विज्ञापन, मेट्रो स्टेशनों पर सुबह की सवारी में फिनटेक ऐप। EMARKETER के AI in OOH FAQ (मई 2026) के अनुसार AI अब स्पोर्ट्स स्कोर्स, लोकल इवेंट्स और ट्रैफिक कंडिशंस के आधार पर contextual creative selection करता है।
लोकेशन और इवेंट आधारित विज्ञापन: मैच वाले दिन स्टेडियम के आसपास लगी स्क्रीन पर स्पोर्ट्स ड्रिंक के विज्ञापन दिखने लगते हैं। वहीं मॉल के अंदर लगे डिजिटल कियोस्क लोगों को उसी समय चल रहे ऑफर्स और डील्स दिखाते हैं। Amazon जैसे ब्रांड भी अब रियल-टाइम ऑफर्स दिखाकर ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
Blindspot के मुताबिक, मौसम के हिसाब से बदलने वाले DOOH विज्ञापनों को लोग ज्यादा याद रखते हैं। कंपनी का दावा है कि ऐसे विज्ञापनों में ब्रैंड रिकॉल करीब 90% तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य स्थिर विज्ञापनों में यह करीब 65% रहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 80% लोग उन विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जो उनके आसपास की स्थिति या माहौल से जुड़े होते हैं।
फेस डिटेक्शन और ऑडियंस एनालिटिक्स: होर्डिंग जो 'देखती' है
DOOH में अब AI आधारित ऑडियंस डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इसके जरिए डिजिटल स्क्रीन के आसपास मौजूद लोगों की अनुमानित उम्र, जेंडर या भीड़ के प्रकार को समझकर विज्ञापन बदले जाते हैं। इस तकनीक में आमतौर पर कैमरों और सेंसर की मदद ली जाती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि ऑडियंस पैटर्न को समझना होता है।
यह तकनीक फेशियल डिटेक्शन कहलाती है, जो फेशियल रिकग्निशन से अलग मानी जाती है। फेशियल रिकग्निशन किसी व्यक्ति की पहचान करने और डेटा सेव करने से जुड़ी होती है, जबकि फेशियल डिटेक्शन केवल सामने मौजूद लोगों की अनुमानित जनसांख्यिकीय जानकारी समझने की कोशिश करती है।
उदाहरण के तौर पर, कुछ कंपनियां टैबलेट स्क्रीन और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए यह समझने की कोशिश करती हैं कि सामने किस तरह की ऑडियंस मौजूद है, ताकि उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।
इसके अलावा Affectiva और Hume AI जैसी कंपनियां अब इमोशन AI तकनीक पर भी काम कर रही हैं। यह तकनीक चेहरे के हावभाव के आधार पर लोगों की प्रतिक्रिया समझने में मदद करती है, ताकि विज्ञापनों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।
MarketsandMarkets की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इमोशन डिटेक्शन और रिकग्निशन मार्केट के 2026 तक 37.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। वहीं Fortune Business Insights के मुताबिक यह मार्केट 2025 में 42.83 अरब डॉलर का था और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से बढ़ने की संभावना है।
क्या DOOH अब डिजिटल जैसा Measurable हो गया?
DOOH की सबसे बड़ी कमजोरी हमेशा यह रही है कि इसे मापना मुश्किल था। ऑनलाइन विज्ञापन में क्लिक, इंप्रेशन, कन्वर्जन, सब कुछ सटीक आंका जा सकता है। होर्डिंग के साथ यह सुविधा नहीं थी।
IAB ने जुलाई 2025 में DOOH Measurement Guide जारी की थी, जिसका मकसद डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापनों के लिए एक जैसे मापन मानक तय करना है। हालांकि, इसका इस्तेमाल अभी शुरुआती स्तर पर ही है।
Broadsign के एक सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर विज्ञापनदाता उन DOOH प्लेटफॉर्म्स में ज्यादा निवेश करना चाहते हैं, जहां डायनेमिक और कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से विज्ञापन दिखाने की सुविधा हो।
भारत में भी OOH इंडस्ट्री तेजी से तकनीक अपना रही है। Indian Outdoor Advertising Association (IOAA) ने 2024 में GPS आधारित ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में OOH विज्ञापनों की पहुंच और दर्शकों को बेहतर तरीके से मापना है।
हालांकि, इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी एक समान मापन प्रणाली की कमी है। अलग-अलग कंपनियां विज्ञापनों की पहुंच और प्रभाव को अलग-अलग तरीके से मापती हैं, जिससे पूरे बाजार के लिए एक कॉमन स्टैंडर्ड बनाना मुश्किल हो रहा है।
प्राइवेसी की चिंता: क्या 'स्मार्ट' होर्डिंग हमें देख रहे हैं?
जैसे-जैसे DOOH स्मार्ट होती जा रही है, सवाल उठ रहे हैं, क्या यह हमारी निजता का उल्लंघन है? यह चिंता पूरी तरह निराधार नहीं है, और दुनिया भर की सरकारें इस पर कड़े नियम बना रही हैं।
चीन ने अप्रैल 2026 में Personal Information Protection Law के तहत सख्त नियमों का नया रोडमैप जारी किया। इसके तहत Cyberspace Administration of China (CAC), Ministry of Industry and Information Technology (MIIT) और Ministry of Public Security (MPS) ने मिलकर कई अभियान शुरू किए हैं। इनमें इंटरनेट विज्ञापनों और यूजर डेटा के इस्तेमाल पर खास फोकस किया गया है।
नए नियमों में यूजर्स को पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन बंद करने का आसान विकल्प देना और बिना फोन नंबर दिए बेसिक सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी किया गया है। इससे डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
अमेरिका में Illinois का Biometric Information Privacy Act (BIPA) सबसे सख्त कानूनों में माना जाता है। इसके उल्लंघन के मामलों में Facebook पर 650 मिलियन डॉलर और Google पर 100 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं Connecticut में 2026 में एक नया बिल पास हुआ, जिसमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और लोकेशन डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।
हालांकि, DOOH इंडस्ट्री में ज्यादातर तकनीक फेशियल डिटेक्शन पर आधारित होती है, न कि फेशियल रिकग्निशन पर। कंपनियों का कहना है कि इसमें किसी व्यक्ति की पहचान या डेटा स्टोर नहीं किया जाता।
अब Edge Computing जैसी तकनीक भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसमें डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय उसी डिवाइस पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहती है।
भारत में DOOH: महानगरों से टियर-2 शहरों तक की यात्रा
भारत में DOOH अभी मुख्यतः शीर्ष 12 मेट्रो शहरों में केंद्रित है। Adonmo के अनुसार 2024 तक देश में करीब 1.5 लाख डिजिटल स्क्रीनें थीं, जिनमें से 75% इन्हीं 12 शहरों में थीं। Adonmo के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार भारत में DOOH कुल OOH मार्केट का महज 12% है, जबकि अमेरिका में 40% और चीन में 90%।
Mordor Intelligence के अनुसार भारत के OOH इंडस्ट्री में static OOH का 2024 में 68% हिस्सा था, जबकि DOOH सालाना 7.2% की दर से बढ़ रहा है, जो कुल OOH मार्केट वृद्धि से दोगुना है। PwC के अनुसार DOOH भारत में 16.5% CAGR से बढ़ेगा, पारंपरिक OOH के 2% CAGR से आठ गुना तेज, और 2029 तक OOH का 44.1% हिस्सा होगा, जो 2024 में 28.8% था।
बदलाव आ रहा है:
भारत में DOOH की मार्केट साइज को लेकर इंडस्ट्री विशेषज्ञों में मतभेद हैं। Adgully की जनवरी 2026 की in-depth रिपोर्ट के अनुसार DOOH 2024 में कुल OOH खर्च का 28-30% था और 2026 तक 35% से अधिक होने का अनुमान है।
छोटे शहरों तक पहुंचने की चुनौती: एक DOOH face की स्थापना लागत $10,000 से $50,000 के बीच है और बिजली खर्च ऑपरेटिंग कॉस्ट का 20% तक हो सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली की अनिश्चितता और connectivity की कमी बड़ी बाधा है। फिर भी LED panel की गिरती कीमतें और 5G का विस्तार इस रास्ते को धीरे-धीरे खोल रहे हैं।
AI Creatives: जब मशीन खुद बनाती है विज्ञापन
DOOH का अगला मोर्चा है, AI-generated creatives। अब विज्ञापन डिजाइन करने के लिए हफ्तों की जरूरत नहीं। AI प्लेटफॉर्म रिलय टाइम डेटा (मौसम, ट्रैफिक, स्पोर्ट्स स्कोर्स) के आधार पर खुद-ब-खुद अलग-अलग creative तैयार करते हैं।
डायनेमिक क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (DCO) की मदद से अब एक ही कैंपेन के कई अलग-अलग विज्ञापन तैयार किए जा रहे हैं। यानी अलग ऑडियंस, अलग जगह और अलग समय के हिसाब से विज्ञापन अपने आप बदल सकते हैं। JCDecaux ने फरवरी 2026 में एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसकी मदद से 80 देशों में प्रोग्रामेटिक DOOH विज्ञापनों को एक ही सिस्टम से मैनेज किया जा सकता है। इसमें रियल-टाइम बिडिंग, बदलते विज्ञापन और कार्बन रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
वहीं Clear Channel Outdoor के EVP और CMO Dan Levi ने EMARKETER की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे एजेंसियां अपने प्लानिंग टूल्स में एआई को शामिल कर रही हैं, वैसे-वैसे उन्हें तेजी से बेहतर और काम की जानकारियां मिल रही हैं।
OOH और डिजिटल का संगम: Omnichannel का नया युग
2026 में DOOH का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यह अकेले काम नहीं करता। अब एक उपभोक्ता सुबह सड़क पर किसी ब्रैंड का होर्डिंग देखता है, फिर दोपहर में उसी ब्रैंड का विज्ञापन उसके मोबाइल पर दिखाई देता है और रात में वही संदेश किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी नजर आता है। यानी अब विज्ञापन हर प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़े हुए तरीके से दिखाए जा रहे हैं।
OAAA और Harris Poll की 2024 की एक स्टडी के मुताबिक, 73% लोगों ने कहा कि उन्हें DOOH विज्ञापन पसंद आते हैं। वहीं टीवी विज्ञापनों को पसंद करने वालों की संख्या 50% और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए सिर्फ 37% रही। इसी स्टडी में 76% लोगों ने माना कि OOH विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने किसी न किसी तरह की प्रतिक्रिया दी।
चुनौतियां अभी भी बाकी हैं
स्मार्ट DOOH तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।
सबसे बड़ी समस्या मापन की है। अभी तक इंडस्ट्री में ऐसा कोई एक समान सिस्टम नहीं है, जिससे सभी कंपनियां विज्ञापनों का असर एक ही तरीके से माप सकें। भारत में यह समस्या और बड़ी है, क्योंकि यहां प्रोग्रामेटिक DOOH अभी शुरुआती दौर में है।
दूसरी चुनौती यह है कि अभी भी ज्यादातर आउटडोर विज्ञापन पारंपरिक होर्डिंग्स पर ही आधारित हैं। OAAA के मुताबिक, OOH बाजार का बड़ा हिस्सा अब भी स्टैटिक बिलबोर्ड्स का है। यानी एआई और स्मार्ट तकनीक का फायदा फिलहाल सिर्फ डिजिटल स्क्रीन तक सीमित है।
डेटा प्राइवेसी और नियम-कानून भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं, जिसका असर एआई आधारित विज्ञापनों पर पड़ सकता है।
भारत में एक और दिक्कत यह है कि OOH इंडस्ट्री काफी बंटी हुई है। यहां हजारों छोटे-छोटे वेंडर्स हैं, अलग-अलग शहरों के अलग नियम हैं और कोई एक केंद्रीय मानक नहीं है। इसी वजह से पूरे देश में एक जैसी तकनीक लागू करना आसान नहीं है।
अब होर्डिंग सिर्फ तस्वीर नहीं रहे
2026 तक आते-आते DOOH ने यह साफ कर दिया है कि अब होर्डिंग सिर्फ दीवार पर लगी तस्वीर नहीं रह गए हैं। अब वे मौसम, ट्रैफिक और आसपास के माहौल के हिसाब से विज्ञापन बदल सकते हैं और सही समय पर सही संदेश दिखा सकते हैं।
भारत जैसे देश में, जहां स्मार्ट सिटी, मेट्रो और हाईवे तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां स्मार्ट DOOH का बाजार भी तेजी से फैल रहा है। हालांकि प्राइवेसी, मापन और तकनीकी ढांचे जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन इंडस्ट्री जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में आउटडोर विज्ञापन पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डेटा आधारित होने वाले हैं।
मीडिया कंपनी HT Media Limited नई पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 11 जुलाई को होगी, जिसमें फंड जुटाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया कंपनी HT Media Limited नई पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 11 जुलाई 2026 (शनिवार) को होगी, जिसमें फंड जुटाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
कंपनी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बीएसई (BSE) को भेजी गई सूचना में कहा है कि बोर्ड बैठक में इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, बॉन्ड या डिबेंचर जारी करने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इसके लिए प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue), राइट्स इश्यू (Rights Issue) या किसी अन्य उपयुक्त माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी जरूरत पड़ने पर इन विकल्पों के संयोजन पर भी विचार करेगी।
HT Media ने कहा कि फंड जुटाने का कोई भी फैसला संबंधित नियामकीय और वैधानिक मंजूरियों के अधीन होगा। यदि आवश्यक हुआ, तो इसके लिए कंपनी अपने शेयरधारकों की मंजूरी भी लेगी।
कंपनी ने यह भी बताया कि SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों और कंपनी की आचार संहिता के तहत ट्रेडिंग विंडो पहले की तरह बंद रहेगी। यह प्रतिबंध कंपनी के सभी नामित कर्मचारियों, निदेशकों और उनके करीबी रिश्तेदारों पर लागू रहेगा।
ट्रेडिंग विंडो 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे (स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड) घोषित होने के 48 घंटे बाद तक बंद रहेगी।
फिलहाल कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह कितनी राशि जुटाने की योजना बना रही है। इस बारे में अंतिम फैसला 11 जुलाई को होने वाली बोर्ड बैठक में लिया जा सकता है।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'डीएनए हिंदी' (DNA Hindi) में टीम को लीड कर रहीं चीफ सब एडिटर कुसुम लता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (Diligent Media Corporation Limited) के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'डीएनए हिंदी' (DNA Hindi) में टीम को लीड कर रहीं चीफ सब एडिटर कुसुम लता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
कंपनी के मुताबिक, कुसुम लता ने अपने करियर में नए अवसरों को एक नई दिशा देने के मद्देनजर यह फैसला लिया है। उनका इस्तीफा 5 जून 2026 को कार्यदिवस समाप्त होने के बाद से प्रभावी हो गया। हालांकि कंपनी ने कुसुम लता के इस्तीफे की जानकारी स्टॉक मार्केट को 8 जुलाई को दी है।
कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि इस्तीफे की सूचना स्टॉक एक्सचेंज को देने में देरी हुई। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह देरी अनजाने में हुई प्रशासनिक चूक की वजह से हुई और इसके पीछे किसी तरह की दुर्भावना या जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने की मंशा नहीं थी। कंपनी ने कहा कि वह आगे भी सेबी के सभी प्रकटीकरण संबंधी नियमों का समय पर पालन करती रहेगी।
कुसुम लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और उन्हें करीब 15 वर्षों का अनुभव है। डीएनए हिंदी से जुड़ने से पहले वह The Lallantop, Network18, NDTV और DB Digital जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं। डीएनए हिंदी में उन्होंने एडिटोरियल लीड और चीफ सब एडिटर- टीम लीड के रूप में जिम्मेदारी निभाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने न्यूज़ डेस्क का संचालन, टीम मैनेजमेंट और शिफ्ट लीड करने जैसी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा एक्सप्लेनर और लॉन्ग-फॉर्म लेखन में भी उनकी अच्छी पकड़ रही है। जेंडर, राष्ट्रीय मुद्दों, हाइपरलोकल खबरों और पर्सनल फाइनेंस जैसे विषयों पर उन्होंने लगातार लेखन किया है। वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग की भी उन्हें अच्छी समझ है।
TRAI ने सरकार से मांग की है कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) Act के तहत ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाए
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश में बढ़ती स्पैम कॉल्स के बीच अब विवाद इस बात पर खड़ा हो गया है कि आखिर यह तय करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए कि कौन-सी कॉल स्पैम है और कौन-सी नहीं। इसी को लेकर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) ने बड़ा कदम उठाया है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI ने सरकार से मांग की है कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) Act के तहत ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाए, जो अधिकृत (Authorised) नंबरों से आने वाली असली कॉल्स को भी स्पैम बताकर ब्लॉक या टैग कर देते हैं।
Truecaller जैसे ऐप्स पर रहेगी नजर
TRAI की इस पहल का असर Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे कॉलर आईडी और कॉल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म पर पड़ सकता है।
फिलहाल ये ऐप्स IT Act के तहत 'इंटरमीडियरी' की श्रेणी में आते हैं। इसलिए इन पर सीधे TRAI का अधिकार नहीं है, बल्कि इनसे जुड़े नियमों की जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) के दायरे में आती है।
क्या चाहता है TRAI?
TRAI का कहना है कि वह इन ऐप्स को सीधे नियंत्रित नहीं करना चाहता। उसकी मांग सिर्फ इतनी है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म दूरसंचार से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है या अधिकृत नंबरों को गलत तरीके से स्पैम बताता है, तो उसे कार्रवाई करने का अधिकार मिलना चाहिए।
इसके लिए TRAI ने खुद को IT Act के तहत एक 'Authorised Agency' घोषित करने की मांग की है। ऐसा होने पर वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आधिकारिक नोटिस जारी कर सकेगा और उनसे नियमों का पालन सुनिश्चित करा सकेगा।
सरकार ने सिद्धांत रूप से दिखाई सहमति
रिपोर्ट के अनुसार, MeitY ने TRAI के इस प्रस्ताव को सिद्धांत रूप से मंजूरी दे दी है। अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी DoT निभा सकता है।
टेलीकॉम कंपनियों की क्या है शिकायत?
टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि सरकार ने व्यावसायिक और सेवा संबंधी कॉल्स के लिए 140 और 1600 सीरीज के विशेष नंबर तय किए हैं। इन नंबरों से आने वाली कॉल्स अधिकृत होती हैं।
लेकिन कई बार कॉल मैनेजमेंट ऐप्स इन्हीं असली और जरूरी कॉल्स को भी स्पैम बताकर टैग कर देते हैं। इससे ग्राहकों तक बैंक, बीमा कंपनियों, अस्पतालों, डिलीवरी सेवाओं और अन्य जरूरी संस्थाओं की महत्वपूर्ण कॉल्स नहीं पहुंच पातीं।
टेलीकॉम कंपनियों का मानना है कि इससे सरकार की अधिकृत नंबरिंग व्यवस्था कमजोर होती है और उपभोक्ता जरूरी जानकारी से वंचित रह सकते हैं।
उपभोक्ता सुरक्षा और सही कॉल के बीच संतुलन की चुनौती
भारत में जैसे-जैसे कॉलर आईडी और स्पैम फिल्टरिंग ऐप्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल भी अहम होता जा रहा है कि किसी कॉल को स्पैम घोषित करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए। एक ओर उपभोक्ताओं को फर्जी और धोखाधड़ी वाली कॉल्स से बचाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सही और अधिकृत कॉल्स गलती से ब्लॉक न हों।
इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए TRAI अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक निगरानी और जवाबदेही चाहता है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो भविष्य में Truecaller जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप्स को भी अधिक सख्त नियामकीय नियमों का पालन करना पड़ सकता है।
वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म ने मेटा बिजनेस एजेंट नाम का नया AI आधारित असिस्टेंट लॉन्च किया है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
अब कंपनियों को ग्राहकों के सवालों का जवाब देने के लिए हर समय बड़ी कस्टमर सर्विस टीम की जरूरत नहीं होगी। वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म ने मेटा बिजनेस एजेंट नाम का नया AI आधारित असिस्टेंट लॉन्च किया है, जो कारोबारियों की ओर से ग्राहकों से बातचीत करेगा, उनके सवालों के जवाब देगा और कई जरूरी काम अपने आप संभालेगा।
इस नए फीचर की घोषणा मुंबई में आयोजित वॉट्सऐप बिजनेस सम्मिट के तीसरे संस्करण में की गई। मेटा का कहना है कि यह AI टूल भारत में तेजी से बढ़ रहे Conversational Commerce यानी चैट के जरिए कारोबार को नई रफ्तार देगा।
ग्राहकों के सवालों का देगा तुरंत जवाब
मेटा बिजनेस एजेंट को इस तरह तैयार किया गया है कि वह ग्राहकों के सामान्य सवालों का तुरंत जवाब दे सके। इसके अलावा यह प्रोडक्ट कैटलॉग से सामान सुझाएगा, अपॉइंटमेंट बुक करेगा, संभावित ग्राहकों (Leads) की पहचान करेगा और खरीदारी से जुड़ी बातचीत में भी मदद करेगा।
अगर किसी ग्राहक की समस्या AI से हल नहीं हो पाती है, तो कंपनी यह तय कर सकेगी कि बातचीत को कब किसी वास्तविक कस्टमर सर्विस एग्जीक्यूटिव के पास भेजा जाए।
सिर्फ चैट नहीं, कारोबार भी संभालेगा
मेटा का कहना है कि यह AI असिस्टेंट केवल ग्राहकों से बातचीत ही नहीं करेगा, बल्कि उनके साथ हुई बातचीत का विश्लेषण भी करेगा। यह मिस हुई चैट का सार (Summary) तैयार करेगा और कंपनियों को यह समझने में मदद करेगा कि ग्राहक क्या चाहते हैं और उनकी टीम का प्रदर्शन कैसा है।
भारत बना सबसे तेजी से बढ़ता बाजार
मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और कंट्री हेड अरुण श्रीनिवास ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते Conversational Business बाजारों में शामिल है। अब ग्राहक फोन कॉल या ईमेल की बजाय सीधे मैसेजिंग ऐप के जरिए कंपनियों से जुड़ना पसंद कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मेटा बिजनेस एजेंट कंपनियों को पहले से ज्यादा तेज और व्यक्तिगत (Personalised) ग्राहक सेवा देने में मदद करेगा।
बड़ी कंपनियों के लिए अलग प्लेटफॉर्म
मेटा ने मेटा बिजनेस एजेंट Platform भी पेश किया है। यह खास तौर पर बड़ी कंपनियों के लिए बनाया गया है, ताकि वे अपने AI एजेंट तैयार कर सकें और उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज कर सकें।
यह प्लेटफॉर्म Shopify, Zendesk और Shopee जैसे बिजनेस टूल्स के साथ भी जुड़ सकता है। वॉट्सऐप Business Platform इसके लिए मुख्य ग्राहक संपर्क माध्यम होगा।
वॉट्सऐप पर ही मिलेगा बिजनेस सर्च
मेटा ने वॉट्सऐप में नए Business Discovery फीचर्स की भी घोषणा की है। जल्द ही यूजर्स वॉट्सऐप के भीतर ही किसी बिजनेस को उसके नाम से खोज सकेंगे। साथ ही किसी बिजनेस का कॉन्टैक्ट अपने दोस्तों और परिवार के साथ भी आसानी से साझा कर पाएंगे। इससे ऐप छोड़े बिना ही कंपनियों तक पहुंचना आसान होगा।
वॉट्सऐप को बना रहा है पूरा बिजनेस प्लेटफॉर्म
मेटा की यह पहल दिखाती है कि कंपनी वॉट्सऐप को सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि एक ऐसे प्लेटफॉर्म में बदलना चाहती है जहां ग्राहक सेवा, खरीदारी, AI आधारित सहायता और बिजनेस से जुड़े ज्यादातर काम एक ही चैट विंडो में पूरे हो सकें। भारत में डिजिटल कारोबार और चैट-आधारित खरीदारी के तेजी से बढ़ते चलन को देखते हुए मेटा को उम्मीद है कि आने वाले समय में कंपनियों और ग्राहकों के बीच ज्यादातर बातचीत की शुरुआत वेबसाइट से नहीं, बल्कि एक वॉट्सऐप मैसेज से होगी।
मिली कपूर (Mili Kapoor) ने ओपनएआई (OpenAI) में कंज्यूमर मार्केटिंग लीड के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एप्पल (Apple) में प्रोडक्ट मार्केटिंग लीड – आईपैड (iPad) थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मिली कपूर (Mili Kapoor) ने ओपनएआई (OpenAI) में कंज्यूमर मार्केटिंग लीड (Consumer Marketing Lead) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह दिल्ली (Delhi) से कार्य करेंगी। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।
अपने पोस्ट में मिली कपूर (Mili Kapoor) ने लिखा, "करियर के कुछ फैसले केवल नौकरी बदलने जैसे नहीं होते, बल्कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण पल का हिस्सा बनने जैसे होते हैं। मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि मैंने ओपनएआई (OpenAI) जॉइन कर लिया है।"
मिली कपूर (Mili Kapoor) इससे पहले एप्पल (Apple) में प्रोडक्ट मार्केटिंग लीड – आईपैड (Product Marketing Lead – iPad) के पद पर कार्यरत थीं। वह दिसंबर 2024 से जून 2026 तक कंपनी के साथ जुड़ी रहीं।
एप्पल (Apple) से पहले उन्होंने फिलिप्स (Philips) में कंज्यूमर मार्केटिंग लीडर (Consumer Marketing Leader) के रूप में भारत में कंपनी के पर्सनल हेल्थ (Personal Health) पोर्टफोलियो का नेतृत्व किया।
इसके अलावा वह नेस्ले प्रोफेशनल (Nestlé Professional) में मार्केटिंग हेड (Marketing Head), मेटा (Meta) में बिजनेस मार्केटिंग मैनेजर (Business Marketing Manager), नेस्ले पुरीना पेटकेयर (Nestlé Purina Petcare) में मार्केटिंग लीड (Marketing Lead), नेशनल ज्योग्राफिक चैनल इंडिया (National Geographic Channel India) में एवीपी – मार्केटिंग एवं ब्रांड स्ट्रेटेजी (AVP – Marketing & Brand Strategy), पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) में सीनियर मार्केटिंग मैनेजर (Senior Marketing Manager) और पेप्सिको (PepsiCo) में मार्केटिंग एवं सेल्स से जुड़ी विभिन्न भूमिकाओं में कार्य कर चुकी हैं।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वीएफ कॉरपोरेशन (VF Corporation) में डिजाइनर (Designer) के रूप में की थी। इसके बाद वह टेक्नोपैक एडवाइजर्स (Technopak Advisors) में एसोसिएट कंसल्टेंट (Associate Consultant) के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।
देश के प्रमुख हिंदी न्यूज चैनल Aaj Tak ने लाइव न्यूज देखने का तरीका बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के प्रमुख हिंदी न्यूज चैनल 'आजतक' (Aaj Tak) ने लाइव न्यूज देखने का तरीका बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चैनल ने Aaj Tak Vertical TV लॉन्च किया है, जिसे कंपनी ने भारत का पहला AI-पावर्ड, रियल-टाइम एडैप्टिव वर्टिकल टीवी एक्सपीरियंस बताया है। इसका मकसद मोबाइल पर फुल-स्क्रीन में लाइव न्यूज देखने का बेहतर अनुभव देना है।
कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ टीवी स्क्रीन को काटकर (Crop) मोबाइल पर दिखाने वाला फीचर नहीं है, बल्कि पूरी लाइव ब्रॉडकास्ट को मोबाइल के वर्टिकल स्क्रीन के हिसाब से रियल-टाइम में दोबारा व्यवस्थित (Reframe) करता है। इससे एंकर, रिपोर्टर, ग्राफिक्स, ब्रेकिंग न्यूज और दूसरी जरूरी जानकारी साफ तौर पर दिखाई देती है।
Aaj Tak Vertical TV फिलहाल Aaj Tak App और चैनल के YouTube प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
AI करेगा तय कि स्क्रीन पर क्या सबसे जरूरी है
Aaj Tak का कहना है कि इस नई तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर लाइव फ्रेम का लगातार विश्लेषण करता है। इसके बाद यह तय करता है कि उस समय स्क्रीन पर सबसे जरूरी क्या है- एंकर, रिपोर्टर, कोई खास वीडियो, ग्राफिक्स या ब्रेकिंग न्यूज। उसी के हिसाब से स्क्रीन का लेआउट अपने आप बदल जाता है।
कंपनी का दावा है कि इस AI सिस्टम को पिछले पांच वर्षों के दर्शकों के व्यवहार, कंटेंट देखने के तरीके और स्क्रीन एंगेजमेंट के डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। यही वजह है कि यह मोबाइल स्क्रीन पर भी जरूरी जानकारी को बिना खोए बेहतर तरीके से दिखाने में सक्षम है।
मोबाइल के लिए खास डिजाइन किया गया नया फॉर्मेट
आमतौर पर टीवी न्यूज का प्रसारण क्षैतिज (Horizontal) स्क्रीन के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे में जब वही वीडियो मोबाइल पर वर्टिकल स्क्रीन में देखा जाता है तो कई बार जरूरी ग्राफिक्स, टिकर या दूसरी अहम जानकारी कट जाती है।
Aaj Tak का कहना है कि उसका नया सिस्टम लाइव प्रसारण के दौरान इन सभी एलिमेंट्स को रियल-टाइम में दोबारा व्यवस्थित करता है, ताकि मोबाइल पर देखने वाले दर्शकों को पूरी जानकारी आसानी से मिल सके।
बदलती दर्शकों की आदतों को ध्यान में रखकर तैयार
आज के समय में बड़ी संख्या में लोग स्मार्टफोन पर ही न्यूज देखते हैं। सोशल मीडिया पर वर्टिकल वीडियो पहले से ही बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन लाइव न्यूज ब्रॉडकास्ट अभी तक इस फॉर्मेट में पूरी तरह नहीं आ पाया था। Aaj Tak का कहना है कि Vertical TV इसी कमी को दूर करने की कोशिश है।
कंपनी के मुताबिक, इस तकनीक में AI, ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग और यूजर एक्सपीरियंस को मिलाकर ऐसा इंटरफेस तैयार किया गया है, जो मोबाइल पर न्यूज देखने को ज्यादा सहज और प्राकृतिक बनाता है।
इंडिया टुडे ग्रुप ने क्या कहा?
इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने कहा कि मीडिया की दुनिया में जब भी दर्शकों की आदतें बदलती हैं, तकनीक को भी उसी हिसाब से बदलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि Vertical TV कई वर्षों के रिसर्च, प्रयोग और इनोवेशन का नतीजा है। AI आधारित रीफ्रेमिंग और दर्शकों के व्यवहार की समझ को मिलाकर Aaj Tak ने मोबाइल पर लाइव न्यूज देखने के लिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक नया फॉर्मेट तैयार किया है।
अब दुनिया की सरकारें AI कंपनियों को केवल रेगुलेट करने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उनमें हिस्सेदारी लेने की संभावना पर भी विचार कर रही हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ टेक्नोलॉजी कंपनियों का कारोबार नहीं रह गया है। धीरे-धीरे यह किसी देश की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल भविष्य का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। यही वजह है कि अब दुनिया की सरकारें AI कंपनियों को केवल रेगुलेट करने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उनमें हिस्सेदारी लेने की संभावना पर भी विचार कर रही हैं।
हाल के दिनों में अमेरिका की OpenAI और भारत की Sarvam AI से जुड़ी चर्चाओं ने इस मुद्दे को नई दिशा दी है। दोनों मामलों में सरकारों की संभावित हिस्सेदारी की बात सामने आई है। हालांकि अभी किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इन चर्चाओं ने यह साफ कर दिया है कि AI को लेकर सरकारों की सोच तेजी से बदल रही है।
अमेरिका में OpenAI को लेकर क्या चर्चा है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ने अमेरिकी सरकार को कंपनी में करीब 5 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। बताया जा रहा है कि इस पर चर्चा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका में AI कंपनियों की बढ़ती ताकत, उनके आर्थिक प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नजर पहले से ज्यादा सख्त हो गई है।
अमेरिकी प्रशासन हाल के महीनों में कई बड़े AI मॉडल्स की रिलीज, एडवांस्ड चिप्स की उपलब्धता और संवेदनशील AI तकनीकों के इस्तेमाल पर लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। सरकार की चिंता यह भी है कि AI से भविष्य में बनने वाली बड़ी आर्थिक संपत्ति का फायदा केवल कुछ निजी कंपनियों तक सीमित न रह जाए।
इसी सोच के तहत OpenAI की ओर से यह विचार सामने आया कि यदि सरकार भी हिस्सेदार बने, तो AI से होने वाले लाभ में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में रास्ता निकाला जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ने यह सुझाव भी दिया कि भविष्य में दूसरी बड़ी AI कंपनियां भी ऐसा मॉडल अपना सकती हैं।
भारत में Sarvam AI का मामला
भारत में भी कुछ ऐसा ही परिदृश्य देखने को मिल रहा है। बेंगलुरु स्थित AI स्टार्टअप Sarvam AI इस समय करीब 300 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा रही है। इस दौर में कंपनी का अनुमानित मूल्यांकन लगभग 1.5 बिलियन डॉलर बताया जा रहा है।
ETTech की रिपोर्ट के अनुसार, IndiaAI Mission के तहत सरकार कंपनी को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य तकनीकी संसाधन उपलब्ध करा रही है। इसी सहयोग के बदले सरकार कंपनी में 1 से 2 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।
यह निवेश सीधे नकद राशि के रूप में नहीं होगा। इसके लिए कन्वर्टिबल इंस्ट्रूमेंट्स जैसे वित्तीय विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सरकार और कंपनी, दोनों की ओर से अभी तक इस पर अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
आखिर सरकारें हिस्सेदारी क्यों चाहती हैं?
अब तक तकनीकी कंपनियों के मामले में सरकारों की भूमिका मुख्य रूप से नियम बनाने, रिसर्च को बढ़ावा देने और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने तक सीमित रहती थी। लेकिन AI के मामले में स्थिति अलग होती जा रही है।
AI का इस्तेमाल अब रक्षा, साइबर सुरक्षा, खुफिया एजेंसियों, सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकारें इस तकनीक पर पहले से कहीं ज्यादा निर्भर होती जा रही हैं।
यही वजह है कि कई देशों को चिंता है कि अगर भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक पूरी तरह निजी कंपनियों के हाथ में रही, तो राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते हैं।
केवल नियम बनाना काफी नहीं?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी कंपनी को रेगुलेट करना और उसमें हिस्सेदारी रखना दोनों अलग बातें हैं। सरकार नियमों के जरिए कंपनियों पर नियंत्रण तो रख सकती है, लेकिन हिस्सेदारी होने पर उसे कंपनी के कामकाज को बेहतर तरीके से समझने, रणनीतिक फैसलों की जानकारी पाने और लंबी अवधि के सहयोग का अवसर भी मिल सकता है।
हालांकि इतनी छोटी हिस्सेदारी से सरकार को कंपनी का संचालन करने का अधिकार नहीं मिलेगा, लेकिन उसका संस्थागत जुड़ाव जरूर मजबूत होगा।
AI Sovereignty की बढ़ती चर्चा
पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में AI Sovereignty यानी AI संप्रभुता की अवधारणा तेजी से उभरी है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं रह गया है कि AI मॉडल किसने बनाया। सरकारें यह भी जानना चाहती हैं कि डेटा कहां रखा गया है, मॉडल किसके नियंत्रण में है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर उस तकनीक तक पहुंच किसके पास होगी।
भारत में IndiaAI Mission और भारतीय भाषाओं पर आधारित AI मॉडल विकसित करने की पहल इसी सोच का हिस्सा मानी जा रही है। Sarvam AI भी इस दिशा में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। दूसरी ओर अमेरिका अपनी AI बढ़त बनाए रखने और रणनीतिक तकनीकों को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप रखने पर जोर दे रहा है।
राजनीतिक जोखिम भी बड़ी वजह
AI कंपनियों के सामने केवल तकनीकी चुनौतियां ही नहीं हैं। रोजगार पर असर, फेक कंटेंट, डेटा सुरक्षा, बाजार में बढ़ती एकाधिकार प्रवृत्ति और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी लगातार बहस हो रही है।
ऐसे में यदि सरकार किसी कंपनी में छोटी हिस्सेदार बनती है, तो दोनों पक्षों के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है। इससे सरकार को यह भरोसा मिलेगा कि राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखा जाएगा, जबकि कंपनियों को भी नीतिगत स्थिरता मिलने की संभावना बढ़ेगी।
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI से होने वाली आर्थिक कमाई का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए भी ऐसे मॉडल अपनाए जा सकते हैं।
क्या भविष्य में यह आम बात बन जाएगी?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हर देश AI कंपनियों में हिस्सेदारी लेगा। अधिकांश सरकारें अभी भी अनुदान, टैक्स छूट, सरकारी खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट जैसे पारंपरिक तरीकों पर ही काम कर रही हैं।
फिर भी OpenAI और Sarvam AI से जुड़ी चर्चाएं यह संकेत जरूर देती हैं कि AI को लेकर सरकारों की भूमिका तेजी से बदल रही है। आने वाले वर्षों में AI की प्रतिस्पर्धा केवल निजी कंपनियों के बीच नहीं होगी, बल्कि सरकारों और तकनीकी कंपनियों की साझेदारी भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती है।
यदि AI वास्तव में भविष्य की बिजली, इंटरनेट या दूरसंचार जैसी बुनियादी तकनीक बनता है, तो सरकारें केवल नियामक बनकर नहीं रहना चाहेंगी। वे इस तकनीक के विकास और उसके भविष्य में प्रत्यक्ष भागीदार बनने की कोशिश भी कर सकती हैं।
टीवी न्यूज की दुनिया के चर्चित पत्रकार और ‘न्यूज18 इंडिया’ के सीनियर एडिटर एवं प्राइम टाइम शो 'देश नहीं झुकने देंगे' के होस्ट अमन चोपड़ा अब यूट्यूब की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
टीवी न्यूज की दुनिया के चर्चित पत्रकार और ‘न्यूज18 इंडिया’ के सीनियर एडिटर एवं प्राइम टाइम शो 'देश नहीं झुकने देंगे' के होस्ट अमन चोपड़ा अब यूट्यूब की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। उन्होंने 'TAP (The Aman Podcast)' नाम से अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च करने की घोषणा की है।
अमन चोपड़ा ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, "Let's TAP | New Beginning. एक TAP... और पूरा सच। कुछ नया, कुछ अलग। Coming Soon." इसके साथ उन्होंने एक पोस्टर भी जारी किया है। पोस्टर के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म जल्द लॉन्च होगा।
जय श्री राम...
— Aman Chopra (@AmanChopra_) July 3, 2026
?️ Let's TAP | New Beginning
एक TAP... और पूरा सच।
कुछ नया, कुछ अलग।
Coming Soon #TAP #TheAmanPodcast #TAPWithAmanhttps://t.co/fijmwbDzIA
बता दें कि अमन चोपड़ा ने करीब पांच साल पहले नेटवर्क18 समूह जॉइन किया था। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वह अपने यूट्यूब चैनल के साथ आगे भी नेटवर्क18 से किसी न किसी रूप में जुड़े रहेंगे। हालांकि, उनकी भूमिका क्या होगी, इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमन चोपड़ा को मीडिया में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा टीवी, न्यूज18, एबीपी न्यूज और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पिछले करीब पांच वर्षों से वह न्यूज18 इंडिया में कार्यरत हैं।
राजनीतिक और चुनावी पत्रकारिता पर मजबूत पकड़ रखने वाले अमन चोपड़ा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने पब्लिक रिलेशन में पीजी डिप्लोमा और मास कम्युनिकेशन में एमए भी किया है।
कॉलेज के दिनों में अमन चोपड़ा थिएटर आर्टिस्ट भी रहे हैं और उन्होंने फ्रीलांस एंकरिंग भी की। अब टेलीविजन के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में भी अमन चोपड़ा अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनका नया यूट्यूब चैनल 'TAP (The Aman Podcast)' जल्द दर्शकों के बीच होगा।
इस साझेदारी के तहत रूट मोबाइल (Route Mobile) अपने एंटरप्राइज ग्राहकों को ट्रूकॉलर (Truecaller) के बिजनेस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ट्रूकॉलर (Truecaller) ने अपने बिजनेस मैसेजिंग (Business Messaging) प्लेटफॉर्म की वैश्विक पहुंच मजबूत करने के लिए रूट मोबाइल (Route Mobile) के साथ रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) की है। रूट मोबाइल (Route Mobile), प्रॉक्सिमस ग्लोबल (Proximus Global) का हिस्सा है और दुनिया भर के एंटरप्राइज ग्राहकों को क्लाउड कम्युनिकेशन (Cloud Communications) और डिजिटल एंगेजमेंट (Digital Engagement) समाधान उपलब्ध कराता है।
इस साझेदारी के तहत रूट मोबाइल (Route Mobile) अपने एंटरप्राइज ग्राहकों को ट्रूकॉलर (Truecaller) के बिजनेस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगा। इसका उद्देश्य कंपनियों को सुरक्षित, सत्यापित और इंटरैक्टिव मैसेजिंग (Secure, Verified and Interactive Messaging) के माध्यम से बड़े पैमाने पर ग्राहकों से जुड़ने में मदद करना है, क्योंकि व्यवसाय तेजी से भरोसेमंद डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों की ओर बढ़ रहे हैं।
इस सहयोग के जरिए कंपनियां ट्रूकॉलर (Truecaller) के दुनिया भर में मौजूद 50 करोड़ से अधिक मासिक सक्रिय यूजर्स (Monthly Active Users) तक कॉन्टेक्स्चुअल (Contextual) और रिच मीडिया (Rich Media) संदेश पहुंचा सकेंगी। इन संदेशों में तस्वीरें, दस्तावेज और वीडियो भी शामिल किए जा सकेंगे, जिससे ग्राहकों के साथ अधिक प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सकेगा।
बिजनेस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (Business Messaging Platform) वन-वे (One-way) और टू-वे (Two-way) दोनों तरह के संचार को सपोर्ट करता है। इसकी प्रमुख सुविधाओं में सत्यापित बिजनेस पहचान (Verified Business Identities), क्लिकेबल लिंक (Clickable Links), स्मार्ट प्रायोरिटी नोटिफिकेशन (Smart Priority Notifications) और रीड रिसीट्स (Read Receipts) शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इन सुविधाओं से ग्राहकों की प्रतिक्रिया दर और एंगेजमेंट में सुधार होगा।