देश के टीवी न्यूज इंडस्ट्री के सफल सीईओ, जिन्होंने बदली कारोबार की तस्वीर

भारत के टेलीविजन न्यूज इंडस्ट्री की कहानी सिर्फ संपादकों के जरिए नहीं बताई जा सकती। हर सफल न्यूज नेटवर्क के पीछे एक ऐसी लीडरशिप टीम रही है, जिसने पर्दे के पीछे रहकर सैकड़ों अहम फैसले लिए।

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Thursday, 09 July, 2026
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रुहैल अमीन, सीनियर स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ग्रुप ।।

भारत के टेलीविजन न्यूज इंडस्ट्री की कहानी सिर्फ संपादकों के जरिए नहीं बताई जा सकती। हर सफल न्यूज नेटवर्क के पीछे एक ऐसी लीडरशिप टीम रही है, जिसने पर्दे के पीछे रहकर सैकड़ों अहम फैसले लिए। जैसे- कहां निवेश करना है, कौन-सी नई तकनीक अपनानी है, नियमों में बदलाव का कैसे सामना करना है, बेहतर प्रतिभाओं को कैसे जोड़ना है, कमाई के नए रास्ते कैसे बनाने हैं और भविष्य में आने वाले बदलावों के लिए संगठन को कैसे तैयार करना है।

इन्हीं सीईओ ने उस दौर में कैरिज डील्स कीं, जब डिस्ट्रिब्यूशन ही दर्शकों तक पहुंच तय करता था। उन्होंने विज्ञापनदाताओं को भरोसा दिलाया कि न्यूज एक प्रीमियम विज्ञापन मंच है। नई तकनीकों में तब निवेश किया, जब वे आम नहीं थीं। उन्होंने टीवी ब्रैंड्स को टेलीविजन से आगे बढ़ाकर नए प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचाया और संगठनों को उस दौर के लिए तैयार किया, जब दर्शक सिर्फ टीवी स्क्रीन पर ही खबरें नहीं देखते थे।

जहां संपादकों ने न्यूजरूम की संपादकीय पहचान बनाई, वहीं इन बिजनेस लीडर्स ने ऐसे संस्थान खड़े किए, जिनकी बदौलत पत्रकारिता बड़े स्तर तक पहुंच सकी।

इस सीरीज के पहले भाग में हम उन अधिकारियों का सम्मान कर रहे हैं, जिन्होंने इस बदलाव का नेतृत्व किया। हर लीडर का काम करने का तरीका अलग था। हर किसी को अलग-अलग चुनौतियां मिलीं। लेकिन इन सभी ने मिलकर आधुनिक भारत में एक टेलीविजन न्यूज संगठन का नेतृत्व करने के मायने बदल दिए।

यहां नाम अंग्रेजी वर्णमाला (Alphabetical Order) के अनुसार दिए गए हैं।

अविनाश कौल: टेलीविजन स्क्रीन से आगे की सोच

भारत के टीवी न्यूज इकोसिस्टम के इतने अलग-अलग पहलुओं पर शायद ही किसी बिजनेस लीडर ने अविनाश कौल जितना असर डाला हो। 

अपने अलग-अलग नेतृत्वकारी पदों पर रहते हुए कौल ने हमेशा इस सोच को चुनौती दी कि टीवी चैनलों को खुद को सिर्फ ब्रॉडकास्टर मानना चाहिए। उनके नेतृत्व में डिस्ट्रिब्यूशन, डिजिटल इंटीग्रेशन, रणनीतिक साझेदारियां, दर्शकों का विस्तार और लंबे समय तक ब्रैंड बनाने पर उतना ही जोर दिया गया, जितना टीआरपी पर।

उनकी लीडरशिप उस बड़े बदलाव को दर्शाती है, जिसमें टीवी ब्रैंड धीरे-धीरे इंटीग्रेटेड मीडिया बिजनेस में बदलने लगे। बदलाव आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय कौल अक्सर पहले ही उसकी आहट पहचान लेते थे और संगठनों को उन क्षमताओं में निवेश करने के लिए प्रेरित करते थे, जो सिर्फ पारंपरिक टीवी तक सीमित न रहें।

कई मायनों में उनका करियर भी टीवी न्यूज इंडस्ट्री की यात्रा जैसा ही रहा है- एक तय समय पर टीवी देखने के दौर से लेकर आज के 24x7 मल्टी-प्लेटफॉर्म न्यूज माहौल तक।

हाल ही में अविनाश कौल की किताब 'The Next Mountain' प्रकाशित हुई है। इस किताब में उन्होंने अपने पेशेवर जीवन के उतार-चढ़ाव, अनिश्चितताओं और मुश्किल फैसलों के बारे में लिखा है। जल्द ही वह अपने नए वेंचर का भी ऐलान कर सकते हैं।

अविनाश पांडे: ऐसे संस्थान बनाने वाले लीडर, जो समय की कसौटी पर टिके रहें

हर इंडस्ट्री में कुछ लीडर ऐसे होते हैं, जो सिर्फ तिमाही नतीजों पर ध्यान देते हैं, जबकि कुछ ऐसे होते हैं जो ऐसे संस्थान बनाते हैं, जो मार्केट के उतार-चढ़ाव से भी लंबे समय तक टिके रहते हैं। अविनाश पांडे इसी दूसरी श्रेणी में आते हैं।

अपने पूरे करियर में उन्होंने ऐसा बिजनेस मॉडल तैयार करने की पहचान बनाई, जिसमें कमर्शियल ग्रोथ, ऑपरेशनल अनुशासन और संगठन की स्थिरता, तीनों पर बराबर ध्यान दिया गया। डिस्ट्रिब्यूशन, विज्ञापन, प्रोग्रामिंग रणनीति और बिजनेस ऑपरेशंस में उनकी गहरी पकड़ ने कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में भारत के कई बड़े ब्रॉडकास्ट नेटवर्क्स को मजबूत बनाया।

उनके सहयोगी उन्हें एक धैर्यवान संस्थान निर्माता के रूप में देखते हैं। उनका मानना था कि नेतृत्व का मूल्यांकन सिर्फ फैसलों से नहीं, बल्कि उन टीमों, सिस्टम्स और कार्य संस्कृति से होता है, जिन्हें कोई लीडर अपने पीछे छोड़कर जाता है। यही सोच उन्हें भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित बिजनेस लीडर्स में शामिल करती है।

वर्तमान में वह इंडस्ट्री ब्रॉडकास्टिंग व डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) के सेक्रेटरी जनरल हैं।

हर्ष भंडारी: कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले मार्केट में विकास की नई मिसाल

टीवी न्यूज जैसा कठिन बिजनेस बहुत कम सेक्टर्स में देखने को मिलता है। यहां मुनाफे पर लगातार दबाव रहता है, प्रतिस्पर्धा बेहद तेज होती है और दर्शकों की पसंद रातों-रात बदल सकती है। ऐसे चुनौतीपूर्ण माहौल में हर्ष भंडारी ने खुद को इंडस्ट्री के सबसे सफल बिजनेस लीडर्स में शामिल किया।

विज्ञापन मार्केट, क्लाइंट रिलेशनशिप और रेवेन्यू रणनीति की गहरी समझ रखने वाले भंडारी ने बिजनेस ऑपरेशंस को मजबूत किया और यह भी सुनिश्चित किया कि व्यावसायिक प्राथमिकताएं संपादकीय महत्वाकांक्षाओं के साथ मिलकर चलें, उनसे टकराएं नहीं।

उनका कार्यकाल यह साबित करता है कि टीवी न्यूज में लगातार विकास संयोग से नहीं होता। इसके लिए लगातार नए प्रयोग, अनुशासित कामकाज और विज्ञापनदाताओं व दर्शकों की बदलती जरूरतों को पहले से समझने की क्षमता जरूरी होती है।

वर्तमान में वह निवेश और मीडिया फर्म BluerockIndia के सीईओ हैं।

एम.के. आनंद: संस्थान खड़े करने वाले लीडर

भारत के ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों में एम.के. आनंद की एक अलग पहचान है। कई दशकों के लंबे करियर में आनंद संस्थान निर्माण का पर्याय बन गए। डिस्ट्रिब्यूशन, प्रोग्रामिंग की अर्थव्यवस्था, विज्ञापन मार्केट और संगठनात्मक नेतृत्व की उनकी समझ ने भारत के कई प्रभावशाली ब्रॉडकास्ट बिजनेस को आकार दिया।

हालांकि उनकी सबसे बड़ी विरासत उन लीडर्स को तैयार करना मानी जाती है, जिन्हें उन्होंने मार्गदर्शन दिया। आज भारतीय मीडिया इंडस्ट्री के कई वरिष्ठ अधिकारी या तो सीधे उनके साथ काम कर चुके हैं या उनकी मैनेजमेंट सोच से प्रभावित रहे हैं।

बहुत कम सीईओ ऐसे होते हैं, जो सिर्फ सफल कंपनियां ही नहीं, बल्कि पूरी पीढ़ी के नेतृत्व को तैयार करने का श्रेय भी हासिल कर सकें। फिलहाल एम.के. आनंद सलाहकार की भूमिका में सक्रिय हैं। वहीं, इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि वह भी जल्द अपने नए वेंचर की घोषणा कर सकते हैं।

वरुण कोहली: आधुनिक न्यूज बिजनेस को नई दिशा देने वाले

जब मीडिया का उपभोग अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर बंटने लगा, तब टीवी नेटवर्क्स के सामने सबसे बड़ा सवाल था—क्या वे सिर्फ टीवी कंपनियां बने रहें या खुद को मीडिया ब्रैंड में बदलें? वरुण कोहली उन अधिकारियों में शामिल रहे, जिन्होंने इस बदलाव को बहुत पहले समझ लिया था। 

अपने पूरे करियर में उन्होंने ऐसी रणनीति का समर्थन किया, जिसमें ब्रॉडकास्ट, डिजिटल, उपभोक्ता जुड़ाव और कमर्शियल इनोवेशन को एक साथ जोड़कर बिजनेस चलाया जाए। उन्होंने डिजिटल को टीवी का विस्तार नहीं, बल्कि भविष्य की न्यूज खपत का सबसे अहम हिस्सा माना।

उनकी सोच आज की हकीकत को दर्शाती है, जहां दर्शक टीवी और डिजिटल में फर्क नहीं करते। वे सिर्फ भरोसेमंद न्यूज ब्रैंड का अनुसरण करते हैं, चाहे वह किसी भी प्लेटफॉर्म पर हो। उम्मीद है कि वह भी जल्द अपने अगले  कदम का ऐलान करेंगे।

विकास खंचंदानी: कमर्शियल लीडरशिप को नई पहचान देने वाले

पिछले एक दशक में विज्ञापनदाताओं और न्यूज संगठनों के बीच का रिश्ता काफी बदल गया है। विकास खंचंदानी उन अधिकारियों में शामिल रहे, जिन्होंने इस बदलाव को सफलतापूर्वक संभाला।

सेल्स रणनीति, विज्ञापनदाताओं के साथ साझेदारी और मीडिया मोनेटाइजेशन में उनकी गहरी विशेषज्ञता ने न्यूज बिजनेस को सिर्फ एयरटाइम बेचने वाले मॉडल से निकालकर इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशन सॉल्यूशंस देने वाले मॉडल तक पहुंचाया। उनका करियर भी कमर्शियल लीडरशिप के बदलते स्वरूप को दर्शाता है, जहां सिर्फ रेवेन्यू मैनेजमेंट नहीं, बल्कि रणनीतिक बिजनेस डेवलपमेंट भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

वर्तमान में वह eSENDIT के को-फाउंडर और डायरेक्टर हैं। इसके साथ ही MiQ में स्ट्रैटेजिक एडवाइजर की भूमिका भी निभा रहे हैं।

भारत का टेलीविजन न्यूज इंडस्ट्री आज भी ऐसे कई शानदार बिजनेस लीडर्स के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है, जिनका प्रभाव सिर्फ उनके अपने संगठनों तक सीमित नहीं है।

इंडिया टुडे ग्रुप के ग्रुप सीईओ दिनेश भाटिया, Zee Media Corporation Ltd के सीईओ रक्तिम दास, ABP Network के सीईओ सुमंत दत्ता, TV9 Network के एमडी एवं सीईओ बरुण दास, NDTV के एडिटर-इन-चीफ एवं सीईओ राहुल कंवल और Times Network के सीईओ आशीष सहगल भी उन प्रमुख लीडर्स में शामिल हैं, जो भारत के टेलीविजन न्यूज बिजनेस को लगातार नई दिशा दे रहे हैं।

इस सीरीज के अगले भागों में हम इन लीडर्स की प्रोफाइल पेश करेंगे और बताएंगे कि न्यूज ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री को आकार देने में हर एक की क्या भूमिका रही है।

 

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टाइम्स ग्रुप में मधुर शाही की वापसी, ‘Times Influence’ में संभालेंगी रेवेन्यू ग्रोथ

मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
Madhur Shahi

‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) ने मधुर शाही को एसोसिएट वाइस प्रेजिडेंट–जोनल हेड, टाइम्स इन्फ्लुएंस–रेवेन्यू के पद पर नियुक्त किया है। मधुर शाही स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स, ब्रैंडेड कंटेंट, इंटीग्रेटेड मीडिया सॉल्यूशंस और आईपी-आधारित अवसरों के माध्यम से बिजनेस ग्रोथ को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह मुंबई से अपना कामकाज संभालेंगी और राजेश मदामपथ को रिपोर्ट करेंगी। मुंबई की बीसीए टीम तत्काल प्रभाव से उन्हें रिपोर्ट करेगी।

मीडिया सेल्स, ब्रैंडेड कंटेंट, स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स और बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र में मधुर शाही को 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने टेलीविजन, डिजिटल, प्रिंट, इवेंट्स और इंटीग्रेटेड मीडिया प्लेटफॉर्म्स में काम किया है।

मधुर शाही इससे पहले जून 2024 से एनडीटीवी नेटवर्क (NDTV Network) में ग्रुप लीड-वेस्ट के पद पर कार्यरत थीं। यहां वह पश्चिमी क्षेत्र के लिए कंटेंट स्ट्रैटेजी, इवेंट्स और महत्वपूर्ण ब्रैंड कोलैबोरेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व कर रही थीं। साथ ही ब्रैंडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप, आईपी मोनेटाइजेशन और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप्स की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।

बता दें कि टाइम्स नेटवर्क में मधुर शाही की यह वापसी भी है। इससे पहले वह करीब नौ वर्षों तक बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (Bennett Coleman & Co. Ltd.) से जुड़ी रही हैं। यहां उन्होंने प्रमुख कैटेगरी और कॉरपोरेट अकाउंट्स को संभाला तथा इंटीग्रेटेड मीडिया बिजनेस और प्रमुख प्रॉपर्टीज को विकसित करने और विस्तार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

पूर्व में वह वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (Worldwide Media Pvt. Ltd.), वीजेएम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (VJM Media Pvt. Ltd.) और टीवी लाइव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (T.V. Live India Pvt. Ltd.) में भी विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं।

मधुर शाही की नियुक्ति के बारे में टाइम्स नेटवर्क ने कहा है कि मीडिया इकोसिस्टम की उनकी मजबूत समझ, क्लाइंट्स और एजेंसियों के साथ गहरे संबंधों तथा ब्रैंडेड कंटेंट और इंटीग्रेटेड सॉल्यूशंस के क्षेत्र में उनके अनुभव से नेटवर्क को अपने अगले विकास चरण में लाभ मिलने की उम्मीद है।   

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गुंतास रंधावा ने 17 साल बाद यूनिलीवर से कहा अलविदा

गुंतास रंधावा ने Unilever में 17 साल की लंबी पारी के बाद कंपनी छोड़ दी है। वह हाल तक Hindustan Unilever में एक अहम जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
unilevar

गुंतास रंधावा (Guntas Randhawa) ने यूनिलीवर (Unilever) में करीब 17 साल बिताने के बाद कंपनी से विदाई ली है। वह हाल तक हिंदुस्तान यूनिलीवर (Hindustan Unilever) में India Head – Vitamins, Minerals and Supplements के पद पर थीं।

रंधावा ने 2009 में कंपनी के साथ Business Leadership Trainee के तौर पर अपना करियर शुरू किया था। करीब डेढ़ दशक से ज्यादा के कार्यकाल में उन्होंने कई वरिष्ठ पदों पर काम किया और अलग-अलग कारोबारों की जिम्मेदारियां संभालीं।

उनके अनुभव का दायरा हेल्थ और वेलनेस ब्रांड्स, सप्लीमेंट्स, प्रीमियम डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस और P&L मैनेजमेंट तक रहा है। उन्होंने ब्रांड्स की लंबी अवधि की ग्रोथ और बिजनेस विस्तार से जुड़े कामों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कंपनी से विदाई की जानकारी साझा करते हुए रंधावा ने लिंक्डइन पोस्ट में अपने 17 साल के अनुभव को याद किया। उन्होंने लिखा कि यूनिलीवर ने उन्हें यह समझने के लिए 17 साल दिए कि कोई ब्रांड लोगों की यादों में अपनी छोटी-सी जगह कैसे बनाता है और उस जगह को बनाए रखने के लिए लगातार क्या करना पड़ता है।

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कुणाल किशोर का जन्मदिन : Value 360 की कामयाबी ने बनाया खास

कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का सफर तय करने वाले कुणाल किशोर का जन्मदिन ऐसे समय आया है, जब Value 360 नए विकास चरण में है।

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Monday, 24 August, 2026
kunalkishor

वैल्यू 360 (Value 360) के मैनेजिंग डायरेक्टर और चेयरमैन कुणाल किशोर (Kunal Kishore) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। उनके लिए यह मौका इसलिए भी खास है क्योंकि दो दशक से ज्यादा लंबे कम्युनिकेशंस करियर के बाद उनके द्वारा खड़ा किया गया कारोबार अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है।

कुणाल किशोर की अगुआई में बनी वैल्यू 360 कम्युनिकेशंस (Value 360 Communications) इस साल एनएसई इमर्ज (NSE Emerge) पर सूचीबद्ध हुई है। कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़े भी कारोबार के विस्तार के साथ उसकी बढ़ती लाभप्रदता की तस्वीर पेश करते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 68.96 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 26.4 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में EBITDA 59.9 फीसदी बढ़कर 19.17 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा पहली बार 10 करोड़ रुपये के आंकड़े से ऊपर गया।

मई में हुई लिस्टिंग ने भी वैल्यू 360 के सफर में एक अहम अध्याय जोड़ा। कंपनी देश की पहली सूचीबद्ध इंटीग्रेटेड कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी बनी, जिससे पब्लिक मार्केट में पीआर बिजनेस के प्रदर्शन को मापने का एक नया नजरिया सामने आया।

किशोर का करियर ऐसे समय शुरू हुआ था, जब कम्युनिकेशंस इंडस्ट्री मुख्य रूप से पत्रकारों, मीडिया रिलेशन और कॉरपोरेट प्रतिष्ठा पर केंद्रित थी। अब डिजिटल, कंटेंट, इन्फ्लुएंसर्स और नए ब्रांड कम्युनिकेशन मॉडल इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। वर्ष 2020 में क्लैनकनेक्ट (ClanConnect) की शुरुआत भी इसी बदलाव की दिशा में एक कदम रही।

कंपनी की मौजूदा संरचना में भी बदलाव आया है। अतुल शर्मा (Atul Sharma) के सीईओ बनने के बाद किशोर की भूमिका अब रोजमर्रा के ऑपरेशनल फैसलों से आगे संगठन की व्यापक दिशा तय करने पर ज्यादा केंद्रित है। इसके साथ ही वह 2025-27 कार्यकाल के लिए पीआरसीएआई (PRCAI) के प्रेसिडेंट के तौर पर इंडस्ट्री से जुड़े मुद्दों में सक्रिय हैं।

ऐसे में कुणाल किशोर का यह जन्मदिन सिर्फ एक व्यक्तिगत पड़ाव नहीं, बल्कि उस कम्युनिकेशंस कारोबार के नए चरण का भी प्रतीक है, जिसे उन्होंने वर्षों की मेहनत से विकसित किया है।

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वोल्टास ने प्रसेनजीत बसु को दी नई बड़ी जिम्मेदारी

प्रसेनजीत बसु को वोल्टास लिमिटेड में हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह वोल्टास बेको में मार्केटिंग प्रमुख थे।

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Monday, 24 August, 2026
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वोल्टास लिमिटेड (Voltas Limited) ने प्रसेनजीत बसु (Prasenjit Basu) को हेड-मार्केटिंग और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की मार्केटिंग रणनीति और कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगे।

बसु इससे पहले वोल्टास बेको (Voltas Beko) में हेड-मार्केटिंग, प्रोडक्ट एंड ई-कॉमर्स के पद पर कार्यरत थे। वोल्टास बेको से पहले वह वोल्टास लिमिटेड में ही सीनियर जनरल मैनेजर-मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मार्केटिंग और बिजनेस स्ट्रैटेजी के क्षेत्र में बसु को कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रिटेल, एफएमसीजी और मीडिया सहित कई इंडस्ट्रीज का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग संगठनों में मार्केटिंग, ब्रांड और बिजनेस से जुड़े कार्यों का नेतृत्व किया है।

बसु के पिछले कार्य अनुभव में टेन स्पोर्ट्स नेटवर्क (TEN Sports Network), वीडियोकॉन कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Videocon Consumer Durables), रिलायंस डिजिटल रिटेल (Reliance Digital Retail) और एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG Electronics) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने बर्सन-मार्स्टेलर-जेनेसिस पीआर (Burson-Marsteller - Genesis PR), डीएलएफ यूनिवर्सल (DLF Universal) और कोडक (Kodak) के साथ भी काम किया है। वोल्टास में उनकी नई जिम्मेदारी ऐसे समय आई है, जब कंपनी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेगमेंट में अपनी ब्रांड और मार्केटिंग मौजूदगी को मजबूत करने पर लगातार काम कर रही है।

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दिल्ली HC की दो टूक, पर्सनालिटी राइट्स के नाम पर पैरोडी व सटायर नहीं रोका जा सकता

दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्सनैलिटी राइट्स यानी किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, चेहरा और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के इस्तेमाल को लेकर एक अहम सवाल उठाया है। कोर्ट यह देख रहा है कि क्या इन अधिकारों का इस्तेमाल सटायर, पैरोडी, कैरिकेचर या किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी को रोकने के लिए किया जा सकता है, खासकर तब जब मामला किसी व्यक्ति की व्यावसायिक छवि के गलत इस्तेमाल से जुड़ा न हो।

यह मुद्दा 'फिजिक्सवाला' के फाउंडर अलख पांडे की ओर से दायर एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान सामने आया। अलख पांडे ने आरोप लगाया है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना आपत्तिजनक तरीके से किया जा रहा है और उन्होंने इससे सुरक्षा की मांग की है।

मामले की सुनवाई जस्टिस अनूप जयराम भमभानी कर रहे हैं। कोर्ट ने संकेत दिया कि पांडे की ओर से मांगी गई सुरक्षा का दायरा जरूरत से ज्यादा व्यापक हो सकता है। अदालत अब यह जांचना चाहती है कि पर्सनैलिटी राइट्स कहीं ऐसे कंटेंट को रोकने का जरिया तो नहीं बन रहे, जो किसी व्यक्ति की व्यावसायिक पहचान का गलत इस्तेमाल किए बिना कानूनी तौर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता हो।

सटायर और पैरोडी पर भी कोर्ट की नजर

अदालत ने पहले के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि पर्सनैलिटी राइट्स का इस्तेमाल किसी कथित गलत काम से जुड़ी जानकारी के प्रसार को रोकने या कैरिकेचर, पैरोडी और व्यंग्य जैसे पूरे तरह के अभिव्यक्ति के रूपों को खत्म करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए, अगर उनमें किसी व्यक्ति के Personality या Publicity Rights का व्यावसायिक शोषण नहीं हो रहा है।

इसका मतलब यह है कि कोर्ट एक तरफ किसी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत और आपत्तिजनक इस्तेमाल से उसके अधिकारों की रक्षा करना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि इन अधिकारों का इस्तेमाल आलोचना, व्यंग्य या पैरोडी को रोकने के लिए न हो।

5 अगस्त के अंतरिम आदेश में क्या कहा था?

यह मुद्दा 5 अगस्त को दिए गए एक अंतरिम आदेश के साथ सामने आया। उस आदेश में कोर्ट ने कंटेंट हटाने के निर्देशों को कथित उल्लंघन की तीन श्रेणियों तक सीमित रखा था। इनमें अश्लील सामग्री, अपमानजनक कंटेंट और पांडे की पहचान या व्यक्तित्व का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल शामिल था।

कोर्ट ने आपत्तिजनक सामग्री अपलोड करने के आरोपी पक्षों को समन भी जारी किए और उनसे जवाब मांगा है। इसके अलावा Google, Telegram, X और Automatic Inc को मामले में बताए गए कुछ वेबसाइट्स के पीछे मौजूद लोगों से जुड़ी बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

दूसरी वेबसाइट्स की भी शिकायत कर सकते हैं अलख पांडे

कोर्ट ने अलख पांडे को यह अनुमति भी दी है कि अगर उन्हें लगता है कि दूसरी वेबसाइट्स भी उनके अधिकारों का उल्लंघन कर रही हैं, तो वह उनके बारे में संबंधित इंटरमीडियरी को जानकारी दे सकते हैं। ऐसे मामलों में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और डोमेन रजिस्ट्रार तकनीकी तौर पर यह जांच करेंगे कि संबंधित वेबसाइट का संबंध उस वेबसाइट से है या नहीं, जिसके खिलाफ कोर्ट पहले ही रोक का आदेश दे चुका है।

हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि इस तकनीकी जांच का मतलब यह नहीं है कि ISP या डोमेन रजिस्ट्रार खुद यह तय कर सकते हैं कि किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया जाए या नहीं। उनकी भूमिका केवल यह जांचने तक सीमित रहेगी कि अलख पांडे की ओर से बताई गई वेबसाइट पहले से प्रतिबंधित वेबसाइट का मिरर, अल्फान्यूमेरिक या रीडायरेक्ट वर्जन है या नहीं।

अलख पांडे की ओर से क्या आरोप लगाए गए?

अलख पांडे की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट जे. साईं दीपक ने कोर्ट के सामने आरोप रखा कि उनकी तस्वीर और पहचान का इस्तेमाल कई जगहों पर उनकी अनुमति के बिना किया जा रहा है।

उनकी ओर से कहा गया कि टेलीग्राम स्टीकर में अलख पांडे के चेहरे का इस्तेमाल किया जा रहा है और उन्हें व्यावसायिक तौर पर बेचा जा रहा है। इसके अलावा कुछ कंटेंट में कथित तौर पर आपत्तिजनक, अश्लील और यौन रूप से अपमानजनक सामग्री भी दिखाई जा रही है।

अलख पांडे की ओर से यह भी कहा गया कि वह आलोचना के प्रति अत्यधिक संवेदनशील नहीं हैं, लेकिन उनके मुताबिक कुछ सीमाओं का पालन किया जाना चाहिए।

पैरोडी वीडियो हटाने से कोर्ट ने किया इनकार

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने पांडे से जुड़ा एक पैरोडी और सटायरिक वीडियो भी पेश किया गया। कोर्ट ने वीडियो देखने के बाद उसे हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। यही पहलू इस मामले को खास बनाता है। कोर्ट अब यह अंतर समझने पर जोर दे रहा है कि किसी व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत व्यावसायिक या अश्लील इस्तेमाल एक अलग मामला है, जबकि सटायर, पैरोडी या व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति अलग श्रेणी में आ सकती है।

आगे की सुनवाई में दिल्ली हाई कोर्ट यह तय करने की दिशा में आगे बढ़ेगा कि पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा की सीमा क्या होनी चाहिए और किस स्थिति में इन अधिकारों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान की रक्षा के लिए किया जा सकता है, तथा किस स्थिति में इसका इस्तेमाल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

 

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इंडिया टुडे ग्रुप तलाशेगा दिल्ली के प्रदूषण का हल, शुरू किया ये कैंपेन

इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।

Last Modified:
Monday, 24 August, 2026
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दिल्ली के प्रदूषण की समस्या पर लंबे समय से चर्चा होती रही है, लेकिन अब इसे सिर्फ चर्चा तक सीमित रखने के बजाय समाधान तलाशने पर जोर दिया जा रहा है। इंडिया टुडे ग्रुप ने दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने के लिए ‘पॉल्यूशन का सॉल्यूशन’ (Pollution Ka Solution) नाम से पांच हफ्ते का एक कैंपेन शुरू किया है।

इस पहल का मकसद दिल्ली के प्रदूषण पर बार-बार बात करने और समस्या बताने से आगे बढ़कर ऐसे व्यावहारिक, बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले और नतीजे मापने योग्य समाधान तलाशना है, जिनसे शहर की हवा को वास्तव में बेहतर किया जा सके।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर खास फोकस

इस कैंपेन में वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण को दिल्ली की खराब हवा की एक प्रमुख वजह मानते हुए क्लीन मोबिलिटी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े उत्सर्जन पर खास ध्यान दिया जाएगा।

कैंपेन के तहत आम लोग भी अपने सुझाव और आइडिया दे सकेंगे। इसके लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए प्रस्ताव जमा किए जा सकते हैं। इसके बाद इन आइडिया की विशेषज्ञों और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की मदद से व्यवस्थित तरीके से जांच की जाएगी।

सिर्फ कागज पर अच्छे दिखने वाले सुझावों के बजाय ऐसे समाधानों को आगे बढ़ाने की कोशिश होगी, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके और जिनके नतीजों को मापा भी जा सके।

विशेषज्ञों की जूरी करेगी आइडिया का मूल्यांकन

कैंपेन में विज्ञान, प्रशासन, स्वास्थ्य, मीडिया और खेल जगत से जुड़े लोगों को जूरी में शामिल किया गया है। जूरी में IIT Kanpur के Director Prof. Manindra Agrawal, इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी, दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमेटी के नरेश प्रियदर्शी, Medanta – The Medicity में Pediatrics की सीनियर डायरेक्टर व HOD डॉ. नीलम मोहन और भारत की 1983 क्रिकेट विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव शामिल हैं।

इन विशेषज्ञों की टीम अलग-अलग सुझावों की उपयोगिता और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में लागू किए जाने की संभावना का आकलन करेगी।

जमीन पर भी परखे जा सकते हैं समाधान

इस कैंपेन की खास बात यह है कि सिर्फ आइडिया चुनकर आगे नहीं बढ़ा जाएगा। चुनिंदा प्रस्तावों को जमीन पर टेस्ट भी किया जा सकता है। इसका मकसद यह देखना होगा कि वास्तविक परिस्थितियों में कोई समाधान कितना प्रभावी है और क्या उससे प्रदूषण कम करने के मापने योग्य नतीजे मिलते हैं। यानी कैंपेन का फोकस केवल ‘अच्छा आइडिया’ खोजने पर नहीं, बल्कि उसे वास्तव में लागू करके उसके नतीजे देखने पर भी रहेगा।

पांच हफ्ते बाद होगा ग्रैंड फिनाले

पांच हफ्ते तक चलने वाला यह कैंपेन ग्रैंड फिनाले के साथ खत्म होगा। इसमें चुने गए समाधान विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों के सामने पेश किए जाएंगे। कैंपेन के तहत चुने गए विजेता आइडिया को दिल्ली के मुख्यमंत्री द्वारा बड़े स्तर पर लागू किए जाने के लिए विचार किया जाएगा।

इसके अलावा विजेता प्रस्ताव के लिए 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार भी रखा गया है। इससे ऐसे लोगों और टीमों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जो दिल्ली के प्रदूषण से निपटने के लिए कोई प्रभावी और व्यावहारिक समाधान लेकर सामने आ सकते हैं।

सवाल सिर्फ यह नहीं कि प्रदूषण कितना बढ़ा, बल्कि समाधान क्या है

‘Pollution Ka Solution’ कैंपेन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के प्रदूषण को लेकर होने वाली चर्चा का तरीका बदलना है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि दिल्ली की हवा कितनी खराब हो गई है, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि इसे बेहतर करने के लिए वास्तव में क्या किया जा सकता है।

इंडिया टुडे ग्रुप इस पहल को लोगों की भागीदारी, तथ्यों और जमीन पर समाधान लागू करने की सोच के साथ आगे बढ़ा रहा है। उम्मीद है कि इस कैंपेन के जरिए दिल्ली के प्रदूषण पर होने वाली अगली बहस में सिर्फ समस्या की चर्चा नहीं होगी, बल्कि ऐसा समाधान भी सामने आएगा जिसे वास्तव में लागू किया जा सके।

 

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प्रशांत वी. सिंह बने LiveMint के नए एडिटर, संभालेंगे हिंदी की भी जिम्मेदारी

प्रशांत वी. सिंह इससे पहले ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के साथ जुड़े थे, जहां वह फरवरी 2026 से अगस्त 2026 तक ‘बिजनेस टुडे’ में डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत रहे।

Last Modified:
Sunday, 23 August, 2026
Prashant V Singh

बिजनेस जर्नलिज्म और डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार प्रशांत वी. सिंह ने ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ (Hindustan Times) मीडिया समूह के साथ नई पारी शुरू की है। वह ग्रुप के बिजनेस न्यूज प्लेटफॉर्म ‘लाइवमिंट’ (LiveMint) और ‘लाइवमिंट हिंदी’ (LiveMint Hindi) के एडिटर और हेड की जिम्मेदारी संभालेंगे।

अपनी इस भूमिका में प्रशांत वी. सिंह लाइवमिंट की विश्वसनीय पत्रकारिता को और मजबूत करने के साथ-साथ डिजिटल और उभरते फॉर्मेट्स में इसकी एडिटोरियल स्ट्रैटेजी पर काम करेंगे। उनका फोकस तेजी से डिजिटल होते मीडिया परिवेश में पाठकों तक प्रासंगिक और उपयोगी बिजनेस न्यूज पहुंचाने के साथ-साथ वेब, ऐप, वीडियो और इवेंट्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाइवमिंट के साथ पाठकों की भागीदारी बढ़ाने पर रहेगा।

प्रशांत वी. सिंह इससे पहले ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ के साथ जुड़े थे, जहां वह फरवरी 2026 से अगस्त 2026 तक ‘बिजनेस टुडे’ में डिप्टी एग्जिक्यूटिव एडिटर के पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान वह बिजनेस टुडे के वेब, टीवी और प्रिंट के बीच तालमेल बनाने, ऑडियंस ग्रोथ, एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, डेटा और एनालिटिक्स के साथ-साथ एआई इंटीग्रेशन पर काम कर रहे थे।

इससे पहले वह ‘टाइम्स नेटवर्क’ में सीनियर एडिटर-बिजनेस और ‘ईटी नाउ डिजिटल’ व ‘ईटी नाउ स्वदेश डिजिटल’ के हेड की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उन्होंने ईटी नाउ और ईटी नाउ स्वदेश के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को लॉन्च करने में अहम भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने डिजिटल एक्सक्लूसिव, ग्राउंड रिपोर्टिंग, नई कैटेगरी और विभिन्न आईपी व इवेंट्स पर भी काम किया।

प्रशांत वी. सिंह ‘जी बिजनेस’ में करीब चार साल तक डिप्टी एडिटर के तौर पर भी काम कर चुके हैं। यहां उन्होंने अंग्रेजी और हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के रिवैंप और लॉन्च/री-लॉन्च के साथ ओरिजिनल वीडियो, एक्सक्लूसिव और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम किया।

वह ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। इससे पहले उन्होंने ‘जी मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड’ में स्पेशल कॉरेस्पोंडेंट, ‘सीएनएन-आईबीएन’ में चीफ सब एडिटर और ‘डेलीभास्कर डॉट कॉम’ में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम किया है। अपने करियर की शुरुआत में वह ‘दूरदर्शन न्यूज’ में स्क्रिप्ट राइटर और ‘दैनिक जागरण’ में इंटर्न-न्यूज (एडिटोरियल) के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

प्रशांत वी. सिंह के पास डिजिटल पत्रकारिता में करीब 19 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो, फोटो और डेटा स्टोरीज के साथ-साथ एडिटोरियल स्ट्रैटेजी, ऑडियंस ग्रोथ, एआई, पैनल डिस्कशन, इवेंट्स, आईपी, शो, सब्सक्रिप्शन, ऐप्स और पॉडकास्ट के क्षेत्र में काम किया है।

शिक्षा की बात करें तो प्रशांत वी. सिंह ने आई. के. गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन/मीडिया स्टडीज में एमएससी की है। उन्होंने आईएमटी गाजियाबाद के दिल्ली स्थित लाजपत नगर सेंटर से इंटरनेशनल बिजनेस में पीजीडीबीएम भी किया है। वर्ष 2024 में उन्होंने बेनेट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से ‘जेनेरेटिव एआई फॉर स्किल एन्हांसमेंट’ कार्यक्रम भी पूरा किया।

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नई दिल्ली में सर मार्टिन सोरेल का मार्केटिंग लीडर्स से संवाद, AI और भविष्य पर हुई चर्चा

भारत दौरे पर आए S4Capital और Monks के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने शुक्रवार, 21 अगस्त को नई दिल्ली में मार्केटिंग, बिजनेस और मीडिया जगत के वरिष्ठ लीडर्स के साथ खास बैठक की।

Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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भारत दौरे पर आए ग्लोबल विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री के दिग्गज S4Capital और Monks के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने शुक्रवार, 21 अगस्त को नई दिल्ली में मार्केटिंग, बिजनेस और मीडिया जगत के चुनिंदा सीनियर लीडर्स के साथ एक खास बैठक में हिस्सा लिया। इस शाम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), तेजी से बदलते मार्केटिंग इकोसिस्टम और ग्लोबल बिजनेस को नए सिरे से आकार देने वाली ताकतों पर बातचीत हुई।

मार्केटिंग का भविष्य

इस खास कार्यक्रम की मेजबानी BW बिजनेसवर्ल्ड ग्रुप के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ न एक्चेंज4मीडिया के फाउंडर व डॉ. अनुराग बत्रा ने की। यह सीमित और केवल आमंत्रित लोगों के लिए आयोजित शाम नई दिल्ली के The Park में स्थित Tyde में हुई।

इस बैठक में CMOs, फाउंडर्स, बिजनेस एग्जिक्यूटिव्स और मीडिया लीडर्स का चुनिंदा समूह शामिल हुआ। यहां आज बिजनेस के सामने मौजूद महत्वपूर्ण बदलावों पर खुलकर बातचीत हुई। चर्चाओं में AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और क्रिएटिविटी व प्रोडक्टिविटी पर उसके असर से लेकर बदलते कंज्यूमर बिहेवियर, बदलते मीडिया मॉडल और टेक्नोलॉजी आधारित माहौल के हिसाब से संगठनों को खुद को बदलने की जरूरत जैसे मुद्दे शामिल रहे।

शाम की शुरुआत डॉ. अनुराग बत्रा के स्वागत संबोधन से हुई। इसके बाद सर मार्टिन सोरेल ने शुरुआती विचार साझा किए। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मार्केटिंग, ग्लोबल बिजनेस और अलग-अलग बाजारों में हो रहे बड़े बदलावों पर अपने विचार रखे।

विज्ञापन जगत के सबसे प्रमुख वैश्विक चेहरों में शामिल सर मार्टिन सोरेल लंबे समय से टेक्नोलॉजी, डेटा, क्रिएटिविटी, मीडिया और कंज्यूमर बिहेवियर के बीच के संबंध पर अपनी बात रखते रहे हैं। S4Capital और Monks में अपने नेतृत्व के जरिए वह ग्लोबल विज्ञापन और मार्केटिंग इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों से लगातार जुड़े हुए हैं।

AI, बिजनेस और आगे क्या?

शुरुआती संबोधन के बाद सर मार्टिन सोरेल और डॉ. अनुराग बत्रा के बीच फायरसाइड चैट हुई, जिसे BW Businessworld की Group Editorial Director Noor Fathima Warsia ने मॉडरेट किया।

R-L: Parag Sawhney, GM, The Park New Delhi; Dr Annurag Batra, Chairman & Editor-in-Chief, BW Businessworld Media Group
and Founder, exchange4media Group;
Sir Martin Sorell, Founder & Executive Chairman, S4Capital; Noor Warsia, Group Editorial Director

इस बातचीत में मार्केटिंग और बिजनेस में AI की बदलती भूमिका पर चर्चा हुई। खास तौर पर इस बात पर जोर रहा कि AI के इस्तेमाल में अब सिर्फ प्रयोग करने से आगे बढ़कर इसे वास्तविक कामकाज में शामिल करने का दौर आ गया है। बातचीत में प्रोडक्टिविटी, क्रिएटिव बदलाव, प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और AI के बिजनेस ऑपरेशंस का हिस्सा बनने के साथ टीमों, टैलेंट और काम करने के तरीकों में संभावित बदलाव पर भी चर्चा हुई।

बातचीत में इंडस्ट्री में हो रहे दूसरे बड़े बदलावों को भी शामिल किया गया। इसमें कंज्यूमर की बदलती उम्मीदें, लगातार बदलते मीडिया और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम और क्रिएटिविटी, डेटा तथा बिजनेस स्ट्रैटेजी के बीच बढ़ता तालमेल शामिल रहा।

भारत के मार्केटिंग इकोसिस्टम की झलक

इस शाम टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर ब्रांड्स, फाइनेंशियल सर्विसेज, मीडिया और मार्केटिंग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।


इनमें Utsav Malhotra, Chief Operating Officer, Noise; Nitin Gupta, Managing Director, Fujifilm Sonosite; Himanshu Khanna, Group CMO, CK Birla Group; Ajay Kaul, Global Head, Growth Marketing, DiDi; Rajeev Jain, Senior Vice President, Corporate Marketing, DS Group; Satinder Juneja, CMO, Birlasoft; और Parag Sawhney, General Manager, The Park New Delhi शामिल रहे।

इस बैठक में Abhinav Iyer, Chief General Manager, Marketing & Strategy, The Muthoot Group; Nikita Malhotra, Head, Digital & Retail Marketing, Woodland; Nidhi Rastogi, Head of Marketing, Uniqlo India; और Ratin Duggal, GM, Marketing, ITC भी मौजूद रहे।

Monks की ओर से Monisha Chowla, Senior Vice President, Operations, APAC Centre of Excellence; Niranjan Singh, Head of Media, India; और Prabhjot Kaur, Senior Director, Operations, India ने हिस्सा लिया।

इस शाम मीडिया और इंडस्ट्री से जुड़े प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इनमें Zee Media के Raktim Das और NDTV के Gaurav Barjatya के साथ-साथ अनुभवी इंडस्ट्री लीडर्स, broadcast media veteran Avinash Pandey और LT Foods के पूर्व Chief Marketing Officer K. Ganapathy Subramaniam भी मौजूद रहे।

गेस्ट लिस्ट में अलग-अलग क्षेत्रों से आए लोगों की मौजूदगी ने ब्रांड, एजेंसी, मीडिया, टेक्नोलॉजी और बिजनेस से जुड़े अलग-अलग नजरियों को एक जगह ला दिया। इससे बातचीत केवल किसी एक सेक्टर या फंक्शन तक सीमित नहीं रही।

AI के प्रयोग से बिजनेस में इस्तेमाल तक

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मार्केटिंग से जुड़े कामों में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। AI का असर क्रिएटिव प्रोडक्शन, मीडिया, पर्सनलाइजेशन, कस्टमर एंगेजमेंट और संगठनों के डिजाइन जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है।

मार्केटिंग लीडर्स के सामने अब सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं रह गया है कि AI को अपनाया जाए या नहीं, बल्कि यह है कि इसे बिजनेस के कामकाज में प्रभावी तरीके से कैसे शामिल किया जाए। इसमें यह तय करना भी शामिल है कि AI कहां मापने योग्य प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है, इंसानी क्रिएटिविटी और मशीन की क्षमताएं किस तरह साथ काम कर सकती हैं और मार्केटिंग संगठनों को किन नई स्किल्स और स्ट्रक्चर की जरूरत होगी।

इसी माहौल में आयोजित इस शाम ने सीनियर लीडर्स को इन बदलावों के व्यावहारिक और रणनीतिक असर पर अपने विचार साझा करने का मौका दिया। साथ ही इन बदलावों को ग्लोबल बिजनेस में हो रहे बड़े बदलावों के संदर्भ में समझने का अवसर भी मिला।

औपचारिक बातचीत के बाद डिनर और अनौपचारिक नेटवर्किंग का दौर हुआ। इस दौरान मेहमानों को ज्यादा सहज माहौल में बातचीत को आगे बढ़ाने का मौका मिला।

यह शाम ऐसे समय में ग्लोबल इंडस्ट्री के नजरिए और भारत के वरिष्ठ मार्केटिंग लीडर्स को एक साथ लेकर आई, जब टेक्नोलॉजी, डेटा और AI तेजी से उस तरीके को बदल रहे हैं, जिसके जरिए बिजनेस अपनी पहचान बनाते हैं, लोगों तक पहुंचते हैं और प्रतिस्पर्धा करते हैं।

 

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जी एंटरटेनमेंट ने सनब्राइट को 20.94 करोड़ वारंट किए आवंटित

जी एंटरटेनमेंट ने प्रमोटर ग्रुप की कंपनी सनब्राइट मॉरीशस को 20.94 करोड़ कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं, जिसकी कुल वैल्यू करीब 2,640 करोड़ रुपये है।

Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd - ZEEL) ने फंड जुटाने की अपनी योजना के तहत प्रमोटर ग्रुप की इकाई सनब्राइट मॉरीशस इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड (Sunbright Mauritius Investments Ltd) को 20,94,47,805 पूरी तरह कन्वर्टिबल वारंट आवंटित किए हैं। यह आवंटन 21 अगस्त को 126 रुपये प्रति वारंट की कीमत पर किया गया, जिससे इश्यू की कुल राशि करीब 2,640 करोड़ रुपये बैठती है।

वारंट आवंटन से पहले कंपनी को शेयरधारकों और स्टॉक एक्सचेंजों की मंजूरी मिल चुकी थी। इसके अलावा, सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) से भी कंपनी को अनुकूल आदेश मिला था।

इश्यू की शर्तों के मुताबिक, प्रत्येक वारंट को 126 रुपये की कीमत पर 1 रुपये फेस वैल्यू वाले एक इक्विटी शेयर में बदला जा सकेगा। सनब्राइट ने अभी इश्यू प्राइस का 25 फीसदी हिस्सा यानी प्रति वारंट 31.50 रुपये का भुगतान किया है। इस तरह कंपनी को करीब 659.76 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि मिली है।

बाकी 75 फीसदी रकम यानी प्रति वारंट 94.50 रुपये का भुगतान आवंटन की तारीख से 18 महीने के भीतर करना होगा। इसकी अंतिम तारीख 21 फरवरी 2028 तय की गई है। पूरी राशि मिलने के बाद वारंट को इक्विटी शेयरों में बदला जाएगा। तब तक ZEEL की पेड-अप शेयर कैपिटल में कोई बदलाव नहीं होगा।

अगर सभी वारंट शेयरों में परिवर्तित हो जाते हैं, तो पूरी तरह डायल्यूटेड आधार पर सनब्राइट की ZEEL में हिस्सेदारी करीब 17.90 फीसदी हो जाएगी। इससे कंपनी में प्रमोटर ग्रुप की हिस्सेदारी मजबूत होगी।

इससे पहले SAT ने ZEEL को प्रमोटर ग्रुप को वारंट जारी कर फंड जुटाने की अनुमति दी थी। ट्रिब्यूनल ने कंपनी को अपने म्यूचुअल फंड निवेश का इस्तेमाल ऑपरेशनल खर्चों के लिए करने की भी मंजूरी दी थी।

नवीनतम आवंटन ZEEL की अतिरिक्त पूंजी जुटाने की कोशिश में एक अहम कदम माना जा रहा है, वहीं इससे प्रमोटर ग्रुप को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता भी मिला है।

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गोएफ लॉरेल को डिजिटास नॉर्थ अमेरिका में मिली नई जिम्मेदारी

गोएफ लॉरेल को डिजिटास नॉर्थ अमेरिका में वाइस प्रेसिडेंट डायरेक्टर, मीडिया इन्वेस्टमेंट नियुक्त किया गया है। यह पब्लिसिस ग्रुप के साथ उनकी दूसरी पारी है।

Last Modified:
Saturday, 22 August, 2026
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गोएफ लॉरेल (Goeff Laurel) को डिजिटास नॉर्थ अमेरिका (Digitas North America) में वाइस प्रेसिडेंट डायरेक्टर, मीडिया इन्वेस्टमेंट नियुक्त किया गया है। यह पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) के साथ उनकी दूसरी पारी है।

डिजिटास में नई जिम्मेदारी संभालने से पहले लॉरेल पीएचडी (PHD) के साथ जुड़े हुए थे, जहां उन्होंने इंटीग्रेटेड एसोसिएट डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस भूमिका में वह डिजिटल, वीडियो, लीनियर, कंटेंट और एक्सपीरिएंशियल से जुड़े मीडिया कार्यों को संभाल रहे थे।

इससे पहले लॉरेल ने डेंट्सू इंटरनेशनल (dentsu international) में मीडिया सुपरवाइजर के रूप में भी काम किया। वहां उनकी जिम्मेदारियों में डिजिटल कंटेंट, प्रोग्रामेटिक और प्रिंट मीडिया शामिल थे।

लॉरेल के अनुभव में मीडियाकॉम (Mediacom) और जेनिथ (Zenith) में निभाई गई वरिष्ठ भूमिकाएं भी शामिल हैं। मीडिया और इन्वेस्टमेंट से जुड़े क्षेत्रों में उनके अनुभव को देखते हुए नई भूमिका में वह डिजिटास नॉर्थ अमेरिका की मीडिया इन्वेस्टमेंट गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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