AI के साथ बदली आउटडोर विज्ञापन की दुनिया, स्मार्ट हो रहे हैं डिजिटल होर्डिंग्स

भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं।

Vikas Saxena by
Published - Tuesday, 01 September, 2026
Last Modified:
Tuesday, 01 September, 2026
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भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं। दिन का समय, मौसम, ट्रैफिक, आसपास की भीड़ और लोगों की पसंद के आधार पर स्क्रीन पर दिखने वाले विज्ञापन कुछ ही सेकंड में बदल जाते हैं। AI, रियल-टाइम डेटा और ऑटोमेशन की मदद से आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट, तेज और असरदार बन चुके हैं।

एक समय था जब होर्डिंग और बिलबोर्ड पर एक ही विज्ञापन कई हफ्तों या महीनों तक लगा रहता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लोकेशन डेटा, मौसम की जानकारी और ऑडियंस एनालिटिक्स की मदद से डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) स्क्रीनें रियल-टाइम में विज्ञापन बदल सकती हैं। इससे ब्रांड सही समय पर सही जगह और सही दर्शकों तक अपना संदेश पहुंचा पा रहे हैं। यही वजह है कि AI आधारित DOOH विज्ञापन आज विज्ञापन उद्योग की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हो गया है और सार्वजनिक स्थानों पर ब्रांड कम्युनिकेशन का तरीका भी तेजी से बदल रहा है।

तेजी से बढ़ता विशाल मार्केट

DOOH का ग्लोबल मार्केट 2026 में लगभग $20 से $22.5 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। Fortune Business Insights के अनुसार 2025 में यह मार्केट $20.17 अरब डॉलर था और 2026 में $22.51 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, 2034 तक $56.1 अरब डॉलर होने का अनुमान है, 12.09% CAGR के साथ। Mordor Intelligence (जनवरी 2026) के मुताबिक 2026 में वैश्विक DOOH मार्केट $20.22 अरब डॉलर है और 2031 तक $32.98 अरब तक पहुंचेगा।

यह अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग रिसर्च कंपनियां अलग-अलग तरीके से आंकड़े तैयार करती हैं। लेकिन सभी की राय एक जैसी है कि यह मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।

भारत की तस्वीर: MarkNtel Advisors के अनुसार भारत का DOOH मार्केट 2024 में लगभग $284 मिलियन (करीब ₹2,350 करोड़) था और 2030 तक $620 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, लगभग 14% CAGR पर। PwC की Global Entertainment & Media Outlook 2025–29 रिपोर्ट बताती है कि भारत का कुल OOH राजस्व 2024 में $568 मिलियन था, जो 13.4% की दर से बढ़ा और 2029 तक $798 मिलियन तक पहुंचेगा। Adonmo के इंडस्ट्री आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल OOH मार्केट (डिजिटल और पारंपरिक दोनों) 2025 में ₹6,500 करोड़ से ऊपर था।

प्रोग्रामेटिक DOOH: जब होर्डिंग बोलने लगे एल्गोरिद्म की भाषा

DOOH की इस क्रांति के केंद्र में है प्रोग्रामेटिक DOOH, यानी ऑटोमेटेड, डेटा-संचालित तरीके से विज्ञापन खरीदना और चलाना। पहले एक बिलबोर्ड बुक करने में 5-7 दिन लगते थे, मैनेजर को फोन, कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग, इंतजार। अब प्रोग्रामेटिक DOOH के जरिए उसी जगह पर 24 घंटे से भी कम समय में कैंपेन लाइव हो सकती है। 

VIOOH के द्वारा 2026 में किए अध्ययन (1,050 विज्ञापनदाताओं पर) के अनुसार हाल के प्रोग्रामेटिक DOOH खरीदारों में से, पिछले 18 महीनों में औसतन 34% कैंपेन में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा था और यह अगले 18 महीनों में 48% तक पहुंचने का अनुमान है। Google DV360 और The Trade Desk जैसे प्रमुख DSP प्लेटफॉर्म अब OOH इन्वेंटरी को डिजिटल चैनलों के साथ एक ही मीडिया प्लान में खरीदने की सुविधा दे रहे हैं।

भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है। PwC की रिपोर्ट और एक्सचेंज4मीडिया के इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार भारत में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा OOH खर्च का महज 1-2% है। PwC इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कॉस्ट-शेयरिंग की चिंताएं और ऐडवर्टाइजिंग Agencies Association of India (AAAI) की formal स्वीकृति का न मिलना बताता है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में यह आंकड़ा 3-5% तक पहुंच सकता है और 2028 तक 15-20%।

मौसम, ट्रैफिक और वक्त के हिसाब से बदलते विज्ञापन

स्मार्ट DOOH की सबसे रोचक बात यह है कि ये स्क्रीनें आसपास के माहौल को 'पढ़' सकती हैं। इसके कई तरीके हैं:

मौसम आधारित विज्ञापन: जैसे ही तापमान एक तय सीमा से ऊपर जाता है, कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम का विज्ञापन चल पड़ता है। बारिश होते ही छाते या रेनकोट की ब्रैंड दिखने लगती है। Aperol ने एक कैंपेन में यह तय किया कि उनका विज्ञापन केवल तभी दिखे जब तापमान 19°C से ऊपर हो, और वह भी गुरुवार से रविवार, दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे के बीच। Rain-X ने कनाडा में बर्फ, बारिश और ओले के लिए अलग-अलग क्रिएटिव तैयार किए जो मौसम के हिसाब से अपने आप बदल जाते थे। Dulux पेंट ने मौसम-ट्रिगर कैंपेन के जरिए अपने स्टोर में 130% अधिक ट्रैफिक दर्ज किया।

ट्रैफिक और समय आधारित विज्ञापन: सुबह की भीड़ में कॉफी का विज्ञापन, दोपहर में फास्ट फूड स्पेशल, शाम को मनोरंजन। हाईवे पर ट्रैफिक जाम में प्रीमियम ब्रैंड विज्ञापन, मेट्रो स्टेशनों पर सुबह की सवारी में फिनटेक ऐप। EMARKETER के AI in OOH FAQ (मई 2026) के अनुसार AI अब स्पोर्ट्स स्कोर्स, लोकल इवेंट्स और ट्रैफिक कंडिशंस के आधार पर contextual creative selection करता है।

लोकेशन और इवेंट आधारित विज्ञापन: मैच वाले दिन स्टेडियम के आसपास लगी स्क्रीन पर स्पोर्ट्स ड्रिंक के विज्ञापन दिखने लगते हैं। वहीं मॉल के अंदर लगे डिजिटल कियोस्क लोगों को उसी समय चल रहे ऑफर्स और डील्स दिखाते हैं। Amazon जैसे ब्रांड भी अब रियल-टाइम ऑफर्स दिखाकर ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए आकर्षित कर रहे हैं।

Blindspot के मुताबिक, मौसम के हिसाब से बदलने वाले DOOH विज्ञापनों को लोग ज्यादा याद रखते हैं। कंपनी का दावा है कि ऐसे विज्ञापनों में ब्रैंड रिकॉल करीब 90% तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य स्थिर विज्ञापनों में यह करीब 65% रहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 80% लोग उन विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जो उनके आसपास की स्थिति या माहौल से जुड़े होते हैं।

फेस डिटेक्शन और ऑडियंस एनालिटिक्स: होर्डिंग जो 'देखती' है

DOOH में अब AI आधारित ऑडियंस डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इसके जरिए डिजिटल स्क्रीन के आसपास मौजूद लोगों की अनुमानित उम्र, जेंडर या भीड़ के प्रकार को समझकर विज्ञापन बदले जाते हैं। इस तकनीक में आमतौर पर कैमरों और सेंसर की मदद ली जाती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि ऑडियंस पैटर्न को समझना होता है।

यह तकनीक फेशियल डिटेक्शन कहलाती है, जो फेशियल रिकग्निशन से अलग मानी जाती है। फेशियल रिकग्निशन किसी व्यक्ति की पहचान करने और डेटा सेव करने से जुड़ी होती है, जबकि फेशियल डिटेक्शन केवल सामने मौजूद लोगों की अनुमानित जनसांख्यिकीय जानकारी समझने की कोशिश करती है।

उदाहरण के तौर पर, कुछ कंपनियां टैबलेट स्क्रीन और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए यह समझने की कोशिश करती हैं कि सामने किस तरह की ऑडियंस मौजूद है, ताकि उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।

इसके अलावा Affectiva और Hume AI जैसी कंपनियां अब इमोशन AI तकनीक पर भी काम कर रही हैं। यह तकनीक चेहरे के हावभाव के आधार पर लोगों की प्रतिक्रिया समझने में मदद करती है, ताकि विज्ञापनों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।

MarketsandMarkets की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इमोशन डिटेक्शन और रिकग्निशन मार्केट के 2026 तक 37.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। वहीं Fortune Business Insights के मुताबिक यह मार्केट 2025 में 42.83 अरब डॉलर का था और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

क्या DOOH अब डिजिटल जैसा Measurable हो गया?

DOOH की सबसे बड़ी कमजोरी हमेशा यह रही है कि इसे मापना मुश्किल था। ऑनलाइन विज्ञापन में क्लिक, इंप्रेशन, कन्वर्जन, सब कुछ सटीक आंका जा सकता है। होर्डिंग के साथ यह सुविधा नहीं थी।

लेकिन 2025-26 में यह समस्या धीरे-धीरे कम हो रही है। अब कंपनियां मोबाइल लोकेशन डेटा की मदद से यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि विज्ञापन देखने के बाद कितने लोग स्टोर तक पहुंचे। इसके अलावा QR कोड स्कैन, ब्रांड सर्वे और रिटेल फुटफॉल स्टडी जैसे तरीकों से भी यह मापा जा रहा है कि विज्ञापन का असर कितना हुआ और कंपनियों को उससे कितना फायदा मिला।

IAB ने जुलाई 2025 में DOOH Measurement Guide जारी की थी, जिसका मकसद डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापनों के लिए एक जैसे मापन मानक तय करना है। हालांकि, इसका इस्तेमाल अभी शुरुआती स्तर पर ही है।

Broadsign के एक सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर विज्ञापनदाता उन DOOH प्लेटफॉर्म्स में ज्यादा निवेश करना चाहते हैं, जहां डायनेमिक और कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से विज्ञापन दिखाने की सुविधा हो।

भारत में भी OOH इंडस्ट्री तेजी से तकनीक अपना रही है। Indian Outdoor Advertising Association (IOAA) ने 2024 में GPS आधारित ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में OOH विज्ञापनों की पहुंच और दर्शकों को बेहतर तरीके से मापना है।

हालांकि, इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी एक समान मापन प्रणाली की कमी है। अलग-अलग कंपनियां विज्ञापनों की पहुंच और प्रभाव को अलग-अलग तरीके से मापती हैं, जिससे पूरे बाजार के लिए एक कॉमन स्टैंडर्ड बनाना मुश्किल हो रहा है।

प्राइवेसी की चिंता: क्या 'स्मार्ट' होर्डिंग हमें देख रहे हैं?

जैसे-जैसे DOOH स्मार्ट होती जा रही है, सवाल उठ रहे हैं, क्या यह हमारी निजता का उल्लंघन है? यह चिंता पूरी तरह निराधार नहीं है, और दुनिया भर की सरकारें इस पर कड़े नियम बना रही हैं।

चीन ने अप्रैल 2026 में Personal Information Protection Law के तहत सख्त नियमों का नया रोडमैप जारी किया। इसके तहत Cyberspace Administration of China (CAC), Ministry of Industry and Information Technology (MIIT) और Ministry of Public Security (MPS) ने मिलकर कई अभियान शुरू किए हैं। इनमें इंटरनेट विज्ञापनों और यूजर डेटा के इस्तेमाल पर खास फोकस किया गया है।

नए नियमों में यूजर्स को पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन बंद करने का आसान विकल्प देना और बिना फोन नंबर दिए बेसिक सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी किया गया है। इससे डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

अमेरिका में Illinois का Biometric Information Privacy Act (BIPA) सबसे सख्त कानूनों में माना जाता है। इसके उल्लंघन के मामलों में Facebook पर 650 मिलियन डॉलर और Google पर 100 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं Connecticut में 2026 में एक नया बिल पास हुआ, जिसमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और लोकेशन डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।

हालांकि, DOOH इंडस्ट्री में ज्यादातर तकनीक फेशियल डिटेक्शन पर आधारित होती है, न कि फेशियल रिकग्निशन पर। कंपनियों का कहना है कि इसमें किसी व्यक्ति की पहचान या डेटा स्टोर नहीं किया जाता।

अब Edge Computing जैसी तकनीक भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसमें डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय उसी डिवाइस पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहती है।

भारत में DOOH: महानगरों से टियर-2 शहरों तक की यात्रा

भारत में DOOH अभी मुख्यतः शीर्ष 12 मेट्रो शहरों में केंद्रित है। Adonmo के अनुसार 2024 तक देश में करीब 1.5 लाख डिजिटल स्क्रीनें थीं, जिनमें से 75% इन्हीं 12 शहरों में थीं। Adonmo के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार भारत में DOOH कुल OOH मार्केट का महज 12% है, जबकि अमेरिका में 40% और चीन में 90%।

Mordor Intelligence के अनुसार भारत के OOH इंडस्ट्री में static OOH का 2024 में 68% हिस्सा था, जबकि DOOH सालाना 7.2% की दर से बढ़ रहा है, जो कुल OOH मार्केट वृद्धि से दोगुना है। PwC के अनुसार DOOH भारत में 16.5% CAGR से बढ़ेगा, पारंपरिक OOH के 2% CAGR से आठ गुना तेज, और 2029 तक OOH का 44.1% हिस्सा होगा, जो 2024 में 28.8% था।

बदलाव आ रहा है:

  • सरकार की Smart Cities Mission के तहत 100 शहरों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है।
  • दिसंबर 2024 तक भारत का operational metro network 993 किलोमीटर पार कर गया, जबकि 51 शहरों में 997 किलोमीटर और निर्माणाधीन है।
  • Times OOH ने मुंबई मेट्रो लाइन 3 का विज्ञापन अधिकार हासिल किया (जुलाई 2024)।
  • AdOnMo ने सितंबर 2024 में $25 मिलियन की फंडिंग जुटाई। AdOnMo, जो भारत के elevator media मार्केट में अग्रणी है, के पास 26 शहरों में 50,000 से अधिक स्मार्ट स्क्रीनें हैं।
  • FICCI और EY की 2024 रिपोर्ट के अनुसार 2026 तक digital media भारत के OOH मार्केट के कुल राजस्व का 15% बन जाएगी, जिसमें transit media 40% हिस्सा रखेगी।

भारत में DOOH की मार्केट साइज को लेकर इंडस्ट्री विशेषज्ञों में मतभेद हैं। Adgully की जनवरी 2026 की in-depth रिपोर्ट के अनुसार DOOH 2024 में कुल OOH खर्च का 28-30% था और 2026 तक 35% से अधिक होने का अनुमान है।  

छोटे शहरों तक पहुंचने की चुनौती: एक DOOH face की स्थापना लागत $10,000 से $50,000 के बीच है और बिजली खर्च ऑपरेटिंग कॉस्ट का 20% तक हो सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली की अनिश्चितता और connectivity की कमी बड़ी बाधा है। फिर भी LED panel की गिरती कीमतें और 5G का विस्तार इस रास्ते को धीरे-धीरे खोल रहे हैं।

AI Creatives: जब मशीन खुद बनाती है विज्ञापन

DOOH का अगला मोर्चा है, AI-generated creatives। अब विज्ञापन डिजाइन करने के लिए हफ्तों की जरूरत नहीं। AI प्लेटफॉर्म रिलय टाइम डेटा (मौसम, ट्रैफिक, स्पोर्ट्स स्कोर्स) के आधार पर खुद-ब-खुद अलग-अलग creative तैयार करते हैं।

डायनेमिक क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (DCO) की मदद से अब एक ही कैंपेन के कई अलग-अलग विज्ञापन तैयार किए जा रहे हैं। यानी अलग ऑडियंस, अलग जगह और अलग समय के हिसाब से विज्ञापन अपने आप बदल सकते हैं। JCDecaux ने फरवरी 2026 में एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसकी मदद से 80 देशों में प्रोग्रामेटिक DOOH विज्ञापनों को एक ही सिस्टम से मैनेज किया जा सकता है। इसमें रियल-टाइम बिडिंग, बदलते विज्ञापन और कार्बन रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

वहीं Clear Channel Outdoor के EVP और CMO Dan Levi ने EMARKETER की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे एजेंसियां अपने प्लानिंग टूल्स में एआई को शामिल कर रही हैं, वैसे-वैसे उन्हें तेजी से बेहतर और काम की जानकारियां मिल रही हैं।

OOH और डिजिटल का संगम: Omnichannel का नया युग

2026 में DOOH का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यह अकेले काम नहीं करता। अब एक उपभोक्ता सुबह सड़क पर किसी ब्रैंड का होर्डिंग देखता है, फिर दोपहर में उसी ब्रैंड का विज्ञापन उसके मोबाइल पर दिखाई देता है और रात में वही संदेश किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी नजर आता है। यानी अब विज्ञापन हर प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़े हुए तरीके से दिखाए जा रहे हैं।

OAAA और Harris Poll की 2024 की एक स्टडी के मुताबिक, 73% लोगों ने कहा कि उन्हें DOOH विज्ञापन पसंद आते हैं। वहीं टीवी विज्ञापनों को पसंद करने वालों की संख्या 50% और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए सिर्फ 37% रही। इसी स्टडी में 76% लोगों ने माना कि OOH विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने किसी न किसी तरह की प्रतिक्रिया दी।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

स्मार्ट DOOH तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।

सबसे बड़ी समस्या मापन की है। अभी तक इंडस्ट्री में ऐसा कोई एक समान सिस्टम नहीं है, जिससे सभी कंपनियां विज्ञापनों का असर एक ही तरीके से माप सकें। भारत में यह समस्या और बड़ी है, क्योंकि यहां प्रोग्रामेटिक DOOH अभी शुरुआती दौर में है।

दूसरी चुनौती यह है कि अभी भी ज्यादातर आउटडोर विज्ञापन पारंपरिक होर्डिंग्स पर ही आधारित हैं। OAAA के मुताबिक, OOH बाजार का बड़ा हिस्सा अब भी स्टैटिक बिलबोर्ड्स का है। यानी एआई और स्मार्ट तकनीक का फायदा फिलहाल सिर्फ डिजिटल स्क्रीन तक सीमित है।

डेटा प्राइवेसी और नियम-कानून भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं, जिसका असर एआई आधारित विज्ञापनों पर पड़ सकता है।

भारत में एक और दिक्कत यह है कि OOH इंडस्ट्री काफी बंटी हुई है। यहां हजारों छोटे-छोटे वेंडर्स हैं, अलग-अलग शहरों के अलग नियम हैं और कोई एक केंद्रीय मानक नहीं है। इसी वजह से पूरे देश में एक जैसी तकनीक लागू करना आसान नहीं है।

अब होर्डिंग सिर्फ तस्वीर नहीं रहे

2026 तक आते-आते DOOH ने यह साफ कर दिया है कि अब होर्डिंग सिर्फ दीवार पर लगी तस्वीर नहीं रह गए हैं। अब वे मौसम, ट्रैफिक और आसपास के माहौल के हिसाब से विज्ञापन बदल सकते हैं और सही समय पर सही संदेश दिखा सकते हैं।

भारत जैसे देश में, जहां स्मार्ट सिटी, मेट्रो और हाईवे तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां स्मार्ट DOOH का बाजार भी तेजी से फैल रहा है। हालांकि प्राइवेसी, मापन और तकनीकी ढांचे जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन इंडस्ट्री जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में आउटडोर विज्ञापन पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डेटा आधारित होने वाले हैं।

 

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क्विंट डिजिटल ने वॉरंट की आखिरी किस्त के लिए 6 नवंबर से शुरू की भुगतान प्रक्रिया

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 10 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 10 October, 2026
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मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त (First and Final Call) के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 9 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस किस्त के तहत कंपनी कुल ₹4,13,07,005 यानी करीब ₹4.13 करोड़ जुटाएगी।

कंपनी ने यह जानकारी 9 अक्टूबर, 2026 को बीएसई लिमिटेड (BSE Limited) को दी। यह सूचना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग से जुड़े नियमों, 2015 के नियम 30 और 42 के तहत जारी की गई है।

क्या है पूरा मामला?

क्विंट डिजिटल ने 19 अगस्त, 2026 के ऑफर लेटर के तहत राइट्स इश्यू (Rights Issue) के जरिए 82,61,401 अलग किए जा सकने वाले वॉरंट जारी किए थे। प्रत्येक वॉरंट का इश्यू प्राइस ₹10 रखा गया था। आवेदन के समय निवेशकों से प्रति वॉरंट ₹5 प्राप्त किए गए थे, जबकि बाकी ₹5 का भुगतान पहली और अंतिम किस्त के तौर पर किया जाना है। अब कंपनी ने इस बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।

15 अक्टूबर होगी रिकॉर्ड डेट

कंपनी ने 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय किया है। इस तारीख के आधार पर उन आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों की पहचान की जाएगी, जिन्हें पहली और अंतिम किस्त के भुगतान के लिए नोटिस भेजा जाएगा।

इन वॉरंट का आईएसआईएन (ISIN) नंबर INE641R13020 है। इनकी श्रेणी आंशिक रूप से भुगतान किए गए अलग किए जा सकने वाले वॉरंट की है।

6 से 20 नवंबर तक कर सकेंगे भुगतान

कंपनी के मुताबिक, पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की अवधि 6 नवंबर, 2026, शुक्रवार से 20 नवंबर, 2026, शुक्रवार तक रहेगी। दोनों तारीखें इस अवधि में शामिल हैं। हालांकि, राइट्स इश्यू कमेटी को अपने विवेक के अनुसार भुगतान की अवधि बढ़ाने का अधिकार दिया गया है।

कंपनी के निदेशक मंडल ने पहली और अंतिम किस्त से संबंधित नोटिस और अन्य जरूरी दस्तावेजों को भी मंजूरी दे दी है। इस किस्त से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी संबंधित नोटिस में दी जाएगी, जिसे कंपनी आने वाले समय में आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों को भेजेगी।

वॉरंट में कारोबार पर भी पड़ेगा असर

क्विंट डिजिटल ने स्पष्ट किया है कि उसके आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट में शेयर बाजारों पर कारोबार 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार से निलंबित कर दिया जाएगा। पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की प्रक्रिया के लिए आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड (ICICI Bank Limited) को बैंक के तौर पर नियुक्त किया गया है।

बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी

कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक दोपहर 1 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हुई। बैठक में वॉरंट पर पहली और अंतिम किस्त मांगने, रिकॉर्ड डेट तय करने, भुगतान की अवधि निर्धारित करने और संबंधित नोटिस व दस्तावेजों को मंजूरी देने के फैसले लिए गए। 

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'इंडिया टुडे' ने लॉन्च किया ‘Life Tak’, रामायण पर आधारित सीरीज 18 अक्टूबर से होगी स्ट्रीम

रामायण की कहानी को नए अंदाज में पेश करेगी ‘रघुपति राघव राजा राम’, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से टीजर लॉन्च किया

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 09 October, 2026
Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
India Today Group

‘इंडिया टुडे’ (India Today) ग्रुप ने डिजिटल फिक्शन और इंफोटेनमेंट के क्षेत्र में कदम रखते हुए अपना नया मोबाइल-फर्स्ट माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म ‘Life Tak’ लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत के साथ ग्रुप ने अपनी पहली प्रमुख शॉर्ट-फॉर्म सीरीज ‘रघुपति राघव राजा राम’ (RRRR) का टीजर भी जारी किया। इसका अनावरण मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के मंच पर किया गया। सीरीज का आधिकारिक टीजर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया।

रामायण की कहानी नए अंदाज में होगी पेश: ‘रघुपति राघव राजा राम’ में रामायण की पारंपरिक कहानी को आधुनिक और तेज रफ्तार अंदाज में पेश किया जाएगा। यह सीरीज खास तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखने वाले दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें सांस्कृतिक और पारंपरिक कहानी को आधुनिक प्रोडक्शन तकनीक के साथ जोड़ा गया है। इसका वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट आधुनिक दर्शकों की शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट देखने की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

AI तकनीक पर भी रहेगा जोर: इंडिया टुडे ग्रुप के मुताबिक, यह सीरीज उसके ऐसे क्रिएटिव और टेक्नोलॉजी आधारित इकोसिस्टम की पहली पेशकश है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विजुअल इंजीनियरिंग, स्क्रिप्ट तैयार करने वाले टूल्स और क्रिएटिव वर्ल्ड-बिल्डिंग का मेल है। इस पहल के जरिए पारंपरिक और नई कहानियों को आज के दर्शकों के लिए नए रूप में पेश किया जाएगा। ‘Life Tak’ के माध्यम से इंडिया टुडे ग्रुप सिनेमाई गुणवत्ता वाले कंटेंट को वर्टिकल वीडियो के तेजी से बढ़ते डिजिटल दौर में दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

18 अक्टूबर से देख सकेंगे दर्शक: ‘रघुपति राघव राजा राम’ का प्रीमियर 18 अक्टूबर 2026 को होगा। दर्शक इसके एपिसोड ‘Life Tak’ के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट (@lifetak), यूट्यूब और फेसबुक चैनलों के साथ-साथ आजतक ऐप पर भी देख सकेंगे।

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Meta में रवि गर्ग को मिली बड़ी जिम्मेदारी, APAC में एंटरप्राइज बिजनेस का संभालेंगे नेतृत्व

रवि गर्ग ने जुलाई 2021 से सितंबर 2026 तक वॉट्सऐप में बिजनेस मैसेजिंग एंड पेमेंट्स के कंट्री डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

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Published - Friday, 09 October, 2026
Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
RaviGarg52130

मेटा (Meta) में रवि गर्ग को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। वॉट्सऐप में भारत के बिजनेस मैसेजिंग और पेमेंट्स बिजनेस का पांच साल से ज्यादा समय तक नेतृत्व करने के बाद अब वह Meta में एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र में एंटरप्राइज बिजनेस के मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका संभालेंगे।

रवि गर्ग ने जुलाई 2021 से सितंबर 2026 तक वॉट्सऐप में बिजनेस मैसेजिंग एंड पेमेंट्स के कंट्री डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भारत में प्लेटफॉर्म की बिजनेस मैसेजिंग और पेमेंट्स सेवाओं को शुरू करने और उनका विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस कारोबार को शुरुआती स्तर से खड़ा किया और आगे बढ़ाया।

अपनी नई भूमिका में रवि गर्ग का मुख्य ध्यान एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में Meta के एंटरप्राइज बिजनेस का विस्तार करने पर होगा। कंपनियां अपने उत्पादों, सेवाओं और बाजार तक पहुंचने की रणनीतियों में बदलाव लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपना रही हैं। ऐसे में वह इस क्षेत्र के कारोबारों के बीच Meta की सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ाने पर काम करेंगे।

उनकी जिम्मेदारी में बिजनेस मैसेजिंग, Meta Business Agents और Muse APIs सहित Meta की सेवाओं को क्षेत्र की कंपनियों तक पहुंचाना शामिल होगा।

Meta और वॉट्सऐप से पहले रवि गर्ग ने Microsoft में 13 साल तक वरिष्ठ पदों पर काम किया। वहां उन्होंने सेल्स, रणनीति, बिजनेस प्लानिंग और चैनल मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। इसके अलावा, वह Nazara Technologies में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer) के पद पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने Sify में भी जनरल मैनेजमेंट से जुड़ी जिम्मेदारी निभाई है।

 

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Yaap Digital को 25 करोड़ रुपये की कर्ज सुविधा मंजूर, नए ऑडिटर की भी नियुक्ति

Yaap Digital Limited के बोर्ड ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 09 October, 2026
Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
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Yaap Digital Limited के बोर्ड ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। कंपनी ने HSBC Bank से 25 करोड़ रुपये तक की वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन/ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही कंपनी ने 25 करोड़ रुपये तक की रकम उधार लेने को भी मंजूरी दी है।

कंपनी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड को दी जानकारी में बताया कि बोर्ड की बैठक 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शुरू हुई और 12:50 बजे खत्म हुई। यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की गई है।

25 करोड़ रुपये तक उधार लेने की मंजूरी

बोर्ड ने HSBC Bank से 25 करोड़ रुपये तक की वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन/ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने को मंजूरी दी है। इसके अलावा, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 179 के तहत कंपनी ने 25 करोड़ रुपये तक की रकम उधार लेने को भी मंजूरी दी है।

पुराने ऑडिटर Shweta Jain & Co LLP ने दिया इस्तीफा

बोर्ड ने M/s Shweta Jain & Co LLP, Chartered Accountants के वैधानिक ऑडिटर के पद से इस्तीफे को भी संज्ञान में लिया है। कंपनी के मुताबिक, यह इस्तीफा 23 सितंबर 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हुआ। फर्म का रजिस्ट्रेशन नंबर 127673W/W101149 है।

कंपनी के मुताबिक, ऑडिटर ने इस्तीफे की वजह दूसरे पेशेवर कामों में व्यस्तता बताई है। ऑडिटर ने यह भी पुष्टि की है कि बताए गए कारण के अलावा इस्तीफा देने की कोई अन्य महत्वपूर्ण वजह नहीं है।

NGPC & Co. को नया वैधानिक ऑडिटर बनाया

ऑडिट कमेटी की 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में की गई सिफारिश के आधार पर बोर्ड ने M/s NGPC & Co., Chartered Accountants को कंपनी का नया वैधानिक ऑडिटर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। यह नियुक्ति Shweta Jain & Co LLP के इस्तीफे से पैदा हुई आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए की गई है। हालांकि, यह नियुक्ति कंपनी के सदस्यों की मंजूरी के अधीन है।

NGPC & Co. का फर्म रजिस्ट्रेशन नंबर 145474W और पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट नंबर 017777 है। कंपनी ने बताया कि इसकी नियुक्ति 8 अक्टूबर 2026 से की गई है।

2017 में हुई थी फर्म की शुरुआत

कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, NGPC & Co. की स्थापना 2017 में सीए नवनीत एस. गज्जा और सीए पुष्पा यू. चांडवानी ने की थी। दोनों के पास 20 साल से ज्यादा का पेशेवर अनुभव है। सीए चंपा पुरोहित 1 अप्रैल 2024 को फर्म में पार्टनर के तौर पर शामिल हुई थीं।

यह फर्म ऑडिट एंड एश्योरेंस, अकाउंटिंग, इनकम टैक्स, जीएसटी, कंपनी कानून से जुड़े मामले, मैनेजमेंट कंसल्टेंसी, फिक्स्ड एसेट्स वेरिफिकेशन, स्टॉक वेरिफिकेशन, इंफॉर्मेशन सिस्टम ऑडिट और फेमा जैसी सेवाएं देती है।

कंपनी के अनुसार, फर्म के पास अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभवी प्रोफेशनल्स और एसोसिएट्स हैं। यह लागू कानूनी और नैतिक नियमों के तहत गुणवत्तापूर्ण, समय पर और प्रभावी पेशेवर सेवाएं देने पर ध्यान देती है।

NGPC & Co. ने कंपनी के वैधानिक ऑडिटर के रूप में काम करने के लिए अपनी सहमति भी दे दी है। फर्म ने पुष्टि की है कि वह इस नियुक्ति के लिए योग्य है और कंपनी अधिनियम, 2013 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार उसकी नियुक्ति पर कोई अयोग्यता लागू नहीं होती।

Gozoop Online के शेयरों के अधिग्रहण से जुड़ा फैसला

बोर्ड ने Gozoop Online Private Limited के शेयरों के Tranche 2 Acquisition के लिए शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को नकद भुगतान करने को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही इस संबंध में संशोधन समझौता यानी Amendment Agreement करने को भी मंजूरी दी गई है।

कंपनी ने कहा है कि 30 मार्च 2026 को किए गए Share Purchase and Shareholders’ Agreement (SPSHA) में प्रस्तावित संशोधन समझौते से जुड़ी जानकारी संबंधित पक्षों द्वारा उस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद साझा की जाएगी।

यह संशोधन समझौता Yaap Digital Limited यानी खरीदार, शेयर बेचने वाले शेयरधारकों और Gozoop Online Private Limited के बीच प्रस्तावित है। कंपनी ने कहा कि संशोधन समझौते के निष्पादित होने के बाद उससे जुड़ी जरूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

Yaap Digital Limited पहले Yaap Digital Private Limited के नाम से जानी जाती थी। कंपनी की ओर से यह जानकारी कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी शिवानी शिवशंकर तिवारी ने दी है।  

 

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सर्वम एआई में शशिकुमार श्रीधरन की एंट्री : ग्लोबल बिजनेस विस्तार पर रहेगा फोकस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन को सर्वम एआई में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्लोबल एआई ग्रोथ को आगे बढ़ाएंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
sarvamAI

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन (Shashikumar Sridharan) को सर्वम एआई (Sarvam AI) में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर (President and Chief Business Officer) नियुक्त किया गया है। नई भूमिका में वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने और ग्रोथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंपनी भारत और ग्लोबल मार्केट्स में अपनी एआई (AI) पेशकशों का विस्तार कर रही है।

शशिकुमार श्रीधरन हाल ही में गूगल क्लाउड इंडिया (Google Cloud India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) पद से हटे हैं। उनकी जगह गूगल क्लाउड इंडिया में डिजिटल नेटिव्स बिजनेस (Digital Natives Business) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कुमार (Amit Kumar) को अंतरिम लीडर नियुक्त किया गया है। गूगल क्लाउड के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट करण बाजवा (Karan Bajwa) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए नेतृत्व में बदलाव की जानकारी दी थी।

सर्वम एआई हाल ही में अपनी फंडिंग को लेकर भी चर्चा में रहा है। कंपनी ने 300 मिलियन डॉलर की सीरीज बी (Series B) फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 1.5 बिलियन डॉलर हो गया है।

इस फंडिंग राउंड में एचसीएलटेक (HCLTech) और बेसमर वेंचर पार्टनर्स (Bessemer Venture Partners) ने निवेश किया है। कंपनी के मौजूदा निवेशकों खोसला वेंचर्स (Khosla Ventures) और पीक XV पार्टनर्स (Peak XV Partners) ने भी इस राउंड में अपना समर्थन जारी रखा है। नई भूमिका में श्रीधरन का फोकस सर्वम एआई की बिजनेस स्ट्रैटेजी को मजबूत करने और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी के एआई बिजनेस के विस्तार को गति देने पर रहेगा।

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क्विंट डिजिटल के बोर्ड की बैठक 9 अक्टूबर को, 82.61 लाख वारंट्स पर होगा फैसला

क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है। कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट से जुड़ी फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी पर विचार किया जाएगा।

कंपनी के मुताबिक, ये वारंट 10 रुपये अंकित मूल्य के हैं और इन्हें 11 सितंबर 2026 को राइट्स आधार पर जारी और आवंटित किया गया था। इन वारंट का आवंटन कंपनी की 19 अगस्त 2026 की लेटर ऑफ ऑफर के तहत किया गया था।

रिकॉर्ड डेट भी तय हो सकती है

क्विंट डिजिटल ने बताया कि बोर्ड बैठक में इन वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी नोटिस पर विचार कर उसे मंजूरी दी जा सकती है। इसके साथ ही बोर्ड रिकॉर्ड डेट तय करने पर भी विचार करेगा। इसके अलावा कॉल मनी के भुगतान का कार्यक्रम और इससे जुड़े अन्य जरूरी व इससे जुड़े मामलों पर भी फैसला लिया जाएगा।

82.61 लाख वारंट पर होगी कॉल मनी

कंपनी ने अपनी सूचना में बताया है कि बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी से जुड़े मामलों पर विचार किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने इस सूचना में यह नहीं बताया है कि प्रति वारंट कितनी कॉल मनी देनी होगी।  

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डीबी कॉर्प के शेयरों को लेकर बड़ी अपडेट, तिमाही में नहीं मिली कोई डिमैट रिक्वेस्ट

डीबी कॉर्प लिमिटेड ने 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए शेयरों से जुड़ी एक अहम जानकारी शेयर बाजार को दी है।

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Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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डीबी कॉर्प लिमिटेड ने 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए शेयरों से जुड़ी एक अहम जानकारी शेयर बाजार को दी है। कंपनी ने बताया कि इस तिमाही के दौरान उसे शेयरों को डिमैट कराने से जुड़ी कोई भी रिक्वेस्ट नहीं मिली।

कंपनी ने 6 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई को दी जानकारी में बताया कि उसने सेबी के डिपॉजिटरीज एंड पार्टिसिपेंट्स रेग्युलेशन, 2018 के रेग्युलेशन 74(5) के तहत जरूरी प्रमाणपत्र जमा किया है।

यह प्रमाणपत्र कंपनी के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने जारी किया है।

सभी शेयर पहले से इलेक्ट्रॉनिक रूप में हैं

केफिन टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के दौरान डिमैट रिक्वेस्ट प्रोसेसिंग के लिए कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ। इसका कारण यह बताया गया है कि डीबी कॉर्प के सभी शेयर पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक यानी डिमैट रूप में रखे गए हैं।

इसलिए तिमाही के दौरान किसी शेयर को भौतिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलने के लिए कोई डिमैट अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ।

कंपनी ने शेयर बाजार को सौंपा प्रमाणपत्र

डीबी कॉर्प ने केफिन टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी इस पुष्टि प्रमाणपत्र को बीएसई और एनएसई के रिकॉर्ड में लेने का अनुरोध किया है। कंपनी ने यह जानकारी सेबी के डिपॉजिटरीज एंड पार्टिसिपेंट्स रेग्युलेशन, 2018 के रेग्युलेशन 74(5) के तहत दी है। कंपनी के शेयर बीएसई पर 533151 और एनएसई पर DBCORP नाम से सूचीबद्ध हैं।

 

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9 अक्टूबर से जेमिनी में बदलेगा मॉडल एक्सेस : फ्री और AI प्लस यूजर्स पर असर

गूगल जेमिनी में 9 अक्टूबर से मॉडल एक्सेस प्लान के हिसाब से बदलेगा। फ्री यूजर्स को फ्लैश-लाइट, AI प्लस यूजर्स को फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल मिलेंगे। प्रो मॉडल के लिए प्लान होगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
Google Gemini

गूगल जेमिनी (Google Gemini) इस्तेमाल करने वालों के लिए 9 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव होने वाला है। कंपनी अलग-अलग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल (AI Models) का एक्सेस यूजर के प्लान के हिसाब से तय करेगी। इसका असर फ्री यूजर्स के साथ एआई प्लस सब्सक्राइबर्स पर भी पड़ेगा।

नए नियमों के बाद फ्री यूजर्स को सिर्फ फ्लैश-लाइट मॉडल (Flash-Lite Model) मिलेगा। वहीं, एआई प्लस यूजर्स फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल (Flash Model) इस्तेमाल कर सकेंगे। एआई प्लस यूजर्स को प्रो मॉडल (Pro Model) का एक्सेस नहीं मिलेगा।

भारत में एआई प्लस प्लान की कीमत 399 रुपये प्रति महीना है। इस प्लान में यूजर्स फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल इस्तेमाल कर पाएंगे, लेकिन जेमिनी प्रो जैसे ज्यादा पावरफुल मॉडल उपलब्ध नहीं होंगे। बड़े और ज्यादा पावरफुल जेमिनी मॉडल इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को गूगल एआई प्रो (Google AI Pro) या गूगल एआई अल्ट्रा (Google AI Ultra) लेना होगा।

गूगल एआई प्रो की कीमत 1,950 रुपये और गूगल एआई अल्ट्रा की शुरुआती कीमत 6,500 रुपये प्रति महीना है। इन दोनों प्लान में यूजर्स को फ्लैश-लाइट, फ्लैश और प्रो मॉडल का एक्सेस मिलता रहेगा।

कंपनी जेमिनी ऐप में मॉडल चुनने के तरीके में भी बदलाव कर रही है। यूजर्स हर उपलब्ध मॉडल के लिए कम, मीडियम और ज्यादा एफर्ट लेवल (Effort Level) चुन सकेंगे। ज्यादा एफर्ट लेवल पर मॉडल किसी काम को पूरा करने और बेहतर जवाब देने के लिए ज्यादा क्षमता इस्तेमाल करेगा। हालांकि, इससे यूजर्स की इस्तेमाल सीमा भी जल्दी खत्म हो सकती है।

गूगल के मुताबिक, नए एफर्ट लेवल से जेमिनी ऐप में काम करने का तरीका गूगल एआई स्टूडियो (Google AI Studio) और एंटिग्रिटी के विकल्पों जैसा होगा।

ये बदलाव कंपनी के नए जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) मॉडल की घोषणा के कुछ दिनों बाद आ रहे हैं। गूगल ने आर्गन को अपना अब तक का सबसे पावरफुल एआई मॉडल बताया है। हालांकि, फिलहाल यह मॉडल कुछ खास साझेदारों के लिए उपलब्ध है। एआई प्लस यूजर्स को बदलाव की जानकारी ईमेल से मिलेगी।

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न्यूजरूम के लिए YouTube ने लॉन्च किए नए टूल्स, कमाई से लेकर AI सेफ्टी तक पर फोकस

नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 03 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 03 October, 2026
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यूट्यूब (YouTube) ने न्यूज ऑर्गनाइजेशंस और न्यूजरूम के लिए कई नए टूल्स पेश किए हैं। इनका मकसद न्यूज स्टोरी को बेहतर तरीके से तैयार करने, दर्शकों के व्यवहार को समझने, नियमित कमाई बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पत्रकारों की पहचान और कंटेंट के गलत इस्तेमाल से सुरक्षा देने में मदद करना है।

इन नए फीचर्स की घोषणा न्यूयॉर्क में आयोजित YouTube के 14वें न्यूज वर्किंग ग्रुप में की गई। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के 100 से ज्यादा न्यूज पार्टनर्स शामिल हुए और डिजिटल पत्रकारिता के भविष्य पर चर्चा की गई।

YouTube के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर न्यूज देखने का चलन लगातार बढ़ रहा है। 2025 में दुनियाभर के यूजर्स ने 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज कंटेंट देखा। इनमें से 12 अरब घंटे से ज्यादा कंटेंट कनेक्टेड टीवी पर देखा गया। इससे पता चलता है कि लोग अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर पर ही नहीं, बल्कि टीवी पर भी YouTube के जरिए न्यूज देख रहे हैं।

YouTube Studio में मिलेंगे ज्यादा डेटा और इनसाइट्स

नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है। इससे एडिटोरियल टीम यह समझ सकेगी कि उनकी कवरेज को दर्शकों का कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है और किन विषयों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

इसका इस्तेमाल सिर्फ वीडियो के लाइव होने के बाद व्यूज देखने तक सीमित नहीं रहेगा। न्यूजरूम यह समझ सकेंगे कि दर्शक किस तरह की खबरों और कंटेंट पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसके आधार पर वे आगे की कवरेज और एडिटोरियल संसाधनों को लेकर फैसले ले सकेंगे।

वीडियो तैयार करते समय भी मिलेगा AI फीडबैक

YouTube वीडियो तैयार करने के दौरान भी फीडबैक देने वाले फीचर्स ला रहा है। ये टूल्स नैरेटिव फ्लो, पेसिंग और स्टोरीटेलिंग स्ट्रक्चर जैसे पहलुओं पर इनपुट दे सकेंगे। यानी वीडियो पब्लिश होने से पहले ही न्यूजरूम को यह समझने में मदद मिल सकती है कि कहानी को किस तरह और बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है।

थंबनेल की भी होगी टेस्टिंग

YouTube ने थंबनेल को लेकर भी नए फीचर्स पेश किए हैं। डायनेमिक थंबनेल के जरिए ऑडियंस के अलग-अलग हिस्सों को प्रदर्शन के आधार पर अलग वर्जन दिखाए जा सकेंगे। इससे हर दर्शक को एक ही थंबनेल दिखाने के बजाय अलग-अलग विकल्पों को आजमाया जा सकेगा।

इसके अलावा आने वाले वीडियो A/B टेस्टिंग टूल के जरिए न्यूज ऑर्गनाइजेशन अलग-अलग हुक, स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट और विजुअल्स को टेस्ट कर सकेंगे। इससे यह तुलना करने में मदद मिलेगी कि किस तरीके से दर्शकों की बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है।

पुरानी खबरों को फिर से सामने लाने में मदद करेगा Ask Studio

YouTube अपने AI-पावर्ड Ask Studio का इस्तेमाल पुरानी कवरेज को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने के लिए भी कर रहा है। यह पुराने वीडियो को देखकर नए थंबनेल जैसे बदलाव सुझा सकता है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन की पुरानी और उपयोगी रिपोर्टिंग को दोबारा ऑडियंस के सामने लाने में मदद मिल सकती है, बजाय इसके कि नई वीडियो के आने के बाद पुरानी स्टोरी पीछे छूट जाए।

मेंबरशिप के जरिए नियमित कमाई पर भी जोर

YouTube ने न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए कमाई से जुड़े फीचर्स पर भी ध्यान दिया है। प्लेटफॉर्म के मुताबिक, Channel Memberships के जरिए पिछले पांच साल में क्रिएटर्स को 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का भुगतान किया गया है। अब YouTube में मेंबर्स के लिए एक अलग इन-ऐप हब भी जोड़ा जा रहा है। इसमें सदस्य सिर्फ मेंबर्स के लिए उपलब्ध कंटेंट आसानी से खोज सकेंगे।

संभावित सदस्य सब्सक्राइब करने से पहले members-only वीडियो का प्रीव्यू भी देख सकेंगे। इसके अलावा YouTube members-only communities भी शुरू कर रहा है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन अपने दर्शकों के साथ ज्यादा सीधा और नियमित जुड़ाव बना सकेंगे।

AI से पत्रकारों की आवाज और चेहरे की सुरक्षा

नए अपडेट का सबसे संवेदनशील हिस्सा पत्रकारों और क्रिएटर्स की डिजिटल पहचान से जुड़ा है। जनरेटिव AI की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज की नकल करना आसान हो गया है। ऐसे में YouTube पत्रकारों और क्रिएटर्स को उनकी पहचान के गलत इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण देने की दिशा में काम कर रहा है।

YouTube के पास पहले से Likeness Detection फीचर है। इसके जरिए क्रिएटर्स अपनी दृश्य पहचान यानी चेहरे के अनधिकृत इस्तेमाल को पहचान और मैनेज कर सकते हैं।

अब YouTube Speaking-Voice Detection को Facial Detection के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है। इसका मकसद ऐसे कंटेंट को पहचानना आसान बनाना है जिसमें किसी क्रिएटर या पत्रकार के चेहरे और आवाज की नकल की गई हो।

Likeness Detection को YouTube के मोबाइल ऐप में भी लाया जाएगा। इसके बाद न्यूज क्रिएटर्स मोबाइल से ही सिस्टम सेट कर सकेंगे, अपनी पहचान के संभावित इस्तेमाल की समी`क्षा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उस पर कार्रवाई कर सकेंगे।

एक ही जगह पर न्यूज के कई पहलुओं पर फोकस

YouTube के नए टूल्स न्यूज बिजनेस के कई हिस्सों को कवर करते हैं। इनमें ऑडियंस की पसंद समझना, स्टोरी को बेहतर बनाना, अलग-अलग पैकेजिंग को टेस्ट करना, पुराने कंटेंट को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाना, मेंबरशिप से कमाई बढ़ाना और पत्रकारों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा शामिल है।

2025 में YouTube पर 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज देखे जाने और इनमें 12 अरब घंटे से ज्यादा कनेक्टेड टीवी पर देखे जाने के आंकड़ों के बीच इन नए फीचर्स का न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए महत्व बढ़ जाता है।

अब न्यूज संस्थानों के सामने इन टूल्स को एक साथ इस्तेमाल करने की चुनौती होगी- दर्शकों की पसंद समझने से लेकर खबर को बेहतर तरीके से पेश करने, उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने, दर्शकों को दोबारा जोड़ने, कुछ दर्शकों को पेड मेंबर बनाने और AI के दौर में पत्रकारों की डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने तक।

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TOI Digital से जुड़ीं मेघना डेका, बनीं नेशनल एडिटर व वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड

टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 02 October, 2026
Last Modified:
Friday, 02 October, 2026
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टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल (TOI Digital) ने मेघना डेका को नेशनल एडिटर और वीडियो स्ट्रैटेजी की हेड नियुक्त किया है। अपनी नई भूमिका में मेघना, TOI Digital के वीडियो कारोबार की रणनीति और उसके विस्तार की जिम्मेदारी संभालेंगी। वह टाइम्स ऑफ इंडिया डिजिटल की एग्जिक्यूटिव एडिटर-वीडियो अदिति प्रसाद को रिपोर्ट करेंगी।

मेघना की जिम्मेदारी में टाइम्स ऑफ इंडिया के मौजूदा वीडियो पोर्टफोलियो के साथ-साथ नए वीडियो प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना शामिल होगा। खास तौर पर वह Times Axis, TOI Bharat और Defence HQ के यूट्यूब चैनलों को अलग पहचान वाले वीडियो प्लेटफॉर्म के तौर पर विकसित करने और उनका विस्तार करने पर काम करेंगी।

इसके अलावा वह संपादकीय और बिजनेस टीमों के साथ मिलकर नए वीडियो फॉर्मेट, फ्रेंचाइजी और दर्शकों से जुड़ने के नए अवसरों पर भी काम करेंगी। यह काम TOI Digital के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के लिए किया जाएगा।

ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव

मेघना डेका को ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में 22 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह इससे पहले Times Now में एडिटर-आउटपुट और प्राइम-टाइम एंकर के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने ‘Decoding Now with Meghna Deka’ और ‘Setting the Agenda’ जैसे कार्यक्रमों को एंकर किया है।

Times Now में हेड ऑफ आउटपुट के तौर पर उन्होंने पिछले करीब 8 साल तक चैनल की रणनीति को लीड किया। इससे पहले वह CNN-News18, India Today, NewsX और NDTV में भी संपादकीय भूमिकाओं में काम कर चुकी हैं और एंकरिंग की है।

वीडियो अब न्यूज देखने का अहम जरिया: अदिति प्रसाद

मेघना डेका की नियुक्ति पर अदिति प्रसाद, एग्जीक्यूटिव एडिटर-वीडियो, Times of India Digital ने कहा कि आज वीडियो इस बात का अहम हिस्सा बन गया है कि दर्शक न्यूज को कैसे खोजते और देखते हैं।

उन्होंने कहा कि मेघना ने दो दशक से ज्यादा समय न्यूजरूम में बिताया है और Times Now में प्राइम-टाइम न्यूज के प्रमुख चेहरों में रही हैं। उनके मुताबिक मेघना को अच्छी तरह पता है कि दर्शकों का ध्यान किस तरह बनाए रखा जा सकता है।

अदिति प्रसाद ने कहा कि अब लक्ष्य सिर्फ वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मजबूत वीडियो ब्रैंड तैयार करना है। उन्होंने कहा कि Defence HQ और Times Axis जैसे प्लेटफॉर्म्स से यह पता चला है कि दर्शकों के बीच फोकस्ड और भरोसेमंद वीडियो कंटेंट की मांग है।

'सिर्फ ज्यादा वीडियो बनाने से बात नहीं बनेगी': मेघना डेका

अपनी नियुक्ति पर मेघना डेका ने कहा कि उन्होंने वर्षों तक दर्शकों को सिर्फ हेडलाइन से आगे की पूरी कहानी समझाने की कोशिश की है और वीडियो इसके लिए एक प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने कहा कि न्यूज वीडियो का अगला दौर सिर्फ ज्यादा से ज्यादा वीडियो बनाने से तय नहीं होगा। इसके बजाय ऐसे फॉर्मेट जरूरी होंगे, जिनकी अपनी अलग पहचान और आवाज हो और जिन्हें दर्शक दोबारा देखना चाहें।

मेघना ने कहा कि Times of India की पहुंच और भरोसे के साथ-साथ Times Axis और Defence HQ जैसे प्लेटफॉर्म पहले से दिशा दिखा रहे हैं और ऐसे समय में कुछ नया तैयार करने का यह महत्वपूर्ण मौका है।

 

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