जन्मदिन विशेष : GTC Network की CEO पल्लवी श्रीवास्तव की प्रेरक यात्रा

जीटीसी नेटवर्क की मुख्य कार्यकारी अधिकारी पल्लवी श्रीवास्तव आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। उन्होंने क्षेत्रीय प्रसारण, डिजिटल विस्तार और वैश्विक वितरण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

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Wednesday, 08 July, 2026
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जीटीसी नेटवर्क (GTC Network-Galactic Television & Communications Pvt Ltd) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) पल्लवी श्रीवास्तव (Pallavi Srivastava) आज अपना जन्मदिन मना रही हैं। यह अवसर एक ऐसी मीडिया प्रोफेशनल की यात्रा का भी प्रतीक है, जिन्होंने बिजनेस रणनीति और ब्रॉडकास्टिंग के संगम पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।

पल्लवी श्रीवास्तव (Pallavi Srivastava) के नेतृत्व में जीटीसी नेटवर्क (GTC Network) ने रैखिक टेलीविजन (Linear Television), डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Digital Platforms) और वैश्विक वितरण (Global Distribution) के क्षेत्र में लगातार विस्तार किया है। उनका विशेष फोकस भारत और विदेशों में पंजाबी भाषा के दर्शकों तक नेटवर्क की पहुंच को मजबूत बनाने पर रहा है।

वर्तमान में वह जीटीसी पंजाबी (GTC Punjabi), पंजाबी शॉर्ट्स (Punjabi Shorts) और जीटीसी न्यूज़ (GTC News) सहित नेटवर्क के तीन चैनलों के व्यवसाय का नेतृत्व कर रही हैं। इन चैनलों की पहुंच डीडी फ्रीडिश (DD Free Dish), टाटा प्ले (Tata Play), एयरटेल (Airtel), स्काई यूके (Sky UK) और दुनिया भर के 20 से अधिक ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म्स तक है।

बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (Business Administration) की पृष्ठभूमि रखने वाली पल्लवी श्रीवास्तव (Pallavi Srivastava) को मीडिया रेवेन्यू (Media Revenue), बिजनेस ग्रोथ (Business Growth), कंटेंट, डिस्ट्रीब्यूशन और रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) का व्यापक अनुभव है। हाल के वर्षों में उन्होंने तकनीक आधारित वितरण मॉडल, नए कंटेंट प्रॉपर्टीज और प्लेटफॉर्म विस्तार के जरिए क्षेत्रीय मीडिया को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जीटीसी नेटवर्क (GTC Network) से पहले पल्लवी श्रीवास्तव (Pallavi Srivastava) पीटीसी नेटवर्क (PTC Network) में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer-COO) के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वहां उन्होंने बिजनेस इंटीग्रेशन (Business Integration), नए रेवेन्यू मॉडल और मीडिया व्यवसाय में विभिन्न इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर काम किया।

सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट (Symbiosis Institute of Business Management) की पूर्व छात्रा पल्लवी श्रीवास्तव (Pallavi Srivastava) लोगों और प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर संगठनों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं।

ऐसे समय में जब क्षेत्रीय प्रसारक पारंपरिक टेलीविजन से आगे बढ़कर डिजिटल और वैश्विक दर्शकों तक अपनी पहुंच का विस्तार कर रहे हैं, पल्लवी श्रीवास्तव (Pallavi Srivastava) का नेतृत्व भारत के बदलते मीडिया परिदृश्य का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। 

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पद्मश्री आलोक मेहता बने Varta24 Media के मैनेजिंग एडिटर व चीफ स्ट्रैटेजिक ऑफिसर

आलोक मेहता इससे पहले वर्ष 2022 से आईटीवी समूह (ITV Group) के इंडिया न्यूज (India News) में एडिटोरियल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे।

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Wednesday, 08 July, 2026
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वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, प्रसारक, मीडिया रणनीतिकार और पद्मश्री से सम्मानित आलोक मेहता ने Varta24 Media के साथ नई पारी की शुरुआत की है। कंपनी ने उन्हें मैनेजिंग एडिटर एवं चीफ स्ट्रैटेजिक ऑफिसर नियुक्त किया है। कंपनी का कहना है कि उनकी नियुक्ति से संपादकीय नेतृत्व को नई मजबूती मिलेगी और रणनीतिक कम्युनिकेशंस पहलों को विस्तार देने में मदद मिलेगी। आलोक मेहता इससे पहले वर्ष 2022 से आईटीवी समूह (ITV Group) के इंडिया न्यूज (India News) में एडिटोरियल डायरेक्टर के पद पर कार्यरत थे।

बता दें कि आलोक मेहता भारतीय पत्रकारिता के सबसे सम्मानित नामों में गिने जाते हैं। पत्रकारिता, संपादकीय नेतृत्व, जनसंचार और मीडिया प्रबंधन के क्षेत्र में उन्हें पांच दशक से अधिक का अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने हिंदी पत्रकारिता को नई दिशा देने के साथ-साथ अनेक युवा पत्रकारों का मार्गदर्शन भी किया है।

उन्होंने वर्ष 1971 से 1975 तक हिंदुस्थान समाचार में और 1976 से 1979 तक साप्ताहिक हिंदुस्तान में कार्य किया। वर्ष 1979 से 1982 के बीच वह जर्मनी के कोलोन स्थित वॉयस ऑफ जर्मनी में हिंदी संपादक रहे। इसके बाद उन्होंने लगभग एक दशक तक दिल्ली से वॉयस ऑफ अमेरिका की हिंदी सेवा के रेडियो और वेबसाइट के लिए नियमित टिप्पणीकार के रूप में योगदान दिया। अपने करियर में आलोक मेहता ने आउटलुक हिंदी, नवभारत टाइम्स, हिंदुस्तान, नई दुनिया, दैनिक भास्कर, नेशनल दुनिया और गवर्नेंस नाउ हिंदी जैसे कई प्रमुख प्रकाशनों का नेतृत्व किया है।

संपादकीय उपलब्धियों के अलावा उन्होंने मीडिया संस्थानों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। वह दो वर्ष तक एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और चार वर्ष तक महासचिव रहे। इसके अलावा वह राष्ट्रीय एकता परिषद तथा प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य भी रह चुके हैं।

आलोक मेहता एक प्रतिष्ठित लेखक भी हैं। उनकी नवीनतम चर्चित पुस्तक 'The Revolutionary Raj: Narendra Modi's 25 Years' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इस पुस्तक की भूमिका केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखी है।

इस नियुक्ति पर Varta24 Media के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ नरेश वशिष्ठ ने कहा, ‘Varta24 Media के साथ आलोक मेहता का जुड़ना हमारे संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उनका व्यापक पत्रकारिता अनुभव, संपादकीय दृष्टि और रणनीतिक सोच हमारी विश्वसनीय पत्रकारिता और नवाचार आधारित संचार सेवाओं को नई मजबूती देगी। हमें खुशी है कि वह हमारे संपादकीय और रणनीतिक प्रयासों का नेतृत्व करेंगे।’

वहीं, आलोक मेहता ने कहा, ‘मीडिया इंडस्ट्र तेजी से बदल रही है, जिससे नए अवसरों के साथ नई जिम्मेदारियां भी सामने आ रही हैं। Varta24 Media ने मजबूत डिजिटल उपस्थिति और लगातार बढ़ती राष्ट्रीय पहुंच के साथ एक प्रभावशाली बहुआयामी मंच तैयार किया है। मैं टीम के साथ मिलकर विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक जनचर्चा और रणनीतिक संचार को और मजबूत करने की दिशा में काम करने को उत्सुक हूं।’

गौरतलब है कि Varta24 Media देश के तेजी से विस्तार कर रहे एकीकृत मीडिया संगठनों में शामिल है। कंपनी की डिजिटल पहुंच 1 करोड़ (10 मिलियन) से अधिक फॉलोअर्स तक है। यह न्यूज मीडिया, एडवरटाइजिंग, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशन के चार प्रमुख क्षेत्रों में कार्य करती है। इसके कार्यालय दिल्ली-नोएडा, लखनऊ, हैदराबाद और मुंबई में स्थित हैं।

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उद्योगपति मोहित कंबोज ने '4PM' न्यूज को भेजा कानूनी नोटिस

उद्योगपति मोहित कंबोज भारतीय, उनकी नाबालिग बेटी मिश्का कंबोज भारतीय और एस्पेक्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज की ओर से '4PM' न्यूज नेटवर्क और उसके एडिटर-इन-चीफ संजय शर्मा को कानूनी नोटिस भेजा गया है।

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Wednesday, 08 July, 2026
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उद्योगपति मोहित कंबोज भारतीय, उनकी नाबालिग बेटी मिश्का कंबोज भारतीय और एस्पेक्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज की ओर से '4PM' न्यूज नेटवर्क और उसके एडिटर-इन-चीफ संजय शर्मा को कानूनी नोटिस भेजा गया है। 2 जुलाई 2026 को जारी इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि 30 जून 2026 को यूट्यूब, इंस्टाग्राम और एक्स पर प्रकाशित सामग्री में उनके और उनके परिवार के बारे में गलत, मानहानिकारक और तथ्यहीन दावे किए गए, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

कानूनी नोटिस के मुताबिक, 4PM न्यूज नेटवर्क के एक यूट्यूब कार्यक्रम में यह दावा किया गया कि महाराष्ट्र में बड़े सरकारी तबादलों, सरकारी सौदों और कथित हजारों करोड़ रुपये के लेन-देन के पीछे मोहित कंबोज का प्रभाव है। नोटिस में इन आरोपों को पूरी तरह निराधार, काल्पनिक और दुर्भावनापूर्ण बताया गया है। परिवार का कहना है कि इन दावों के समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत या विश्वसनीय तथ्य पेश नहीं किए गए।

नोटिस में सबसे गंभीर आपत्ति मोहित कंबोज की 16 वर्षीय बेटी मिश्का कंबोज को लेकर की गई टिप्पणियों पर जताई गई है। इसमें दावा किया गया है कि वीडियो में मिश्का की शादी होने और उस कथित समारोह में बॉलीवुड हस्तियों तथा राजनीतिक नेताओं के शामिल होने जैसी बातें कही गईं। कानूनी नोटिस के अनुसार, मिश्का एक स्कूली छात्रा हैं, अविवाहित हैं और उनका राजनीति या सार्वजनिक जीवन से कोई संबंध नहीं है। परिवार का कहना है कि इस तरह के दावों से एक नाबालिग की प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि वीडियो में मोहित कंबोज को महाराष्ट्र की राजनीति में प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में पेश किया गया, जबकि उनका किसी राजनीतिक दल, सरकारी विभाग या प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। वकीलों का कहना है कि बिना पर्याप्त साक्ष्यों के इस तरह के आरोप लगाना जिम्मेदार पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

परिवार का आरोप है कि यही सामग्री बाद में इंस्टाग्राम रील और एक्स पोस्ट के जरिए भी साझा की गई, जिससे कथित तौर पर मानहानिकारक सामग्री का व्यापक प्रसार हुआ। नोटिस के अनुसार, संबंधित यूट्यूब वीडियो को नोटिस जारी होने तक करीब 1.07 लाख बार देखा जा चुका था।

कानूनी नोटिस में 4PM न्यूज नेटवर्क से 48 घंटे के भीतर संबंधित यूट्यूब वीडियो, इंस्टाग्राम रील, एक्स पोस्ट और उनसे जुड़ी सभी क्लिप, थंबनेल तथा प्रचार सामग्री हटाने की मांग की गई है। इसके अलावा बिना शर्त सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने, भविष्य में ऐसे आरोप दोबारा न लगाने का लिखित आश्वासन देने और मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड व स्रोत सुरक्षित रखने को भी कहा गया है।

नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर इन मांगों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित पक्षों के खिलाफ दीवानी और आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही साइबर क्राइम प्राधिकरण, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, NBDSA और अन्य संबंधित मंचों पर शिकायत दर्ज कराने की बात भी कही गई है।

नोटिस के अंत में कहा गया है कि मोहित कंबोज, उनकी बेटी मिश्का और एस्पेक्ट ग्रुप ऑफ कंपनीज की कथित रूप से हुई मानहानि और प्रतिष्ठा को पहुंचे नुकसान के लिए 1000 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग करते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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नूर फातिमा वारसिया : 23 वर्षों की संपादकीय यात्रा का प्रेरक सफर

BW Businessworld की ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर नूर फातिमा वारसिया आज अपना 46वां जन्मदिन मना रही हैं। इसी के साथ उन्होंने पत्रकारिता में 23 वर्षों का उल्लेखनीय सफर भी पूरा कर लिया है।

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Wednesday, 08 July, 2026
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BW Businessworld की ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर (Group Editorial Director) नूर फातिमा वारसिया (Noor Fathima Warsia) आज अपना 46वां जन्मदिन मना रही हैं। यह दिन उनके लिए एक और वजह से भी खास है, क्योंकि आज उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में 23 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह सफर केवल खबरों को प्रकाशित करने का नहीं, बल्कि गंभीर, विश्वसनीय और प्रभावशाली पत्रकारिता की पहचान बनाने का रहा है।

नूर फातिमा वारसिया (Noor Fathima Warsia) ने अपने करियर की शुरुआत एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) से की थी। उस दौर में यह मंच भारत में मीडिया, विज्ञापन और मार्केटिंग उद्योग की रिपोर्टिंग को नई दिशा दे रहा था। उन्होंने केवल इस उद्योग को कवर नहीं किया, बल्कि अपनी सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग के जरिए इसकी विश्वसनीयता को भी मजबूत किया। उनके लिए पत्रकारिता हमेशा तथ्यों के साथ-साथ उन विचारों और बदलावों को समझने का माध्यम रही, जो उद्योग और समाज को प्रभावित करते हैं।

इसके बाद उन्होंने BW Businessworld समूह से जुड़कर अपनी संपादकीय भूमिका का विस्तार किया। आज वह समूह के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के संपादकीय संचालन का नेतृत्व कर रही हैं। अपने करियर में उन्होंने वैश्विक उद्योग जगत के कई प्रमुख नेताओं के साक्षात्कार किए हैं, कान्स (Cannes) जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों को कवर किया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI), मीडिया, अर्थव्यवस्था तथा डिजिटल परिवर्तन जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श को आगे बढ़ाया है।

नूर फातिमा वारसिया (Noor Fathima Warsia) की सबसे बड़ी विशेषता उद्योग में आने वाले बदलावों को समय रहते पहचानने की क्षमता मानी जाती है। वह शोर और वास्तविक बदलाव के बीच अंतर समझने के लिए जानी जाती हैं। यही दृष्टिकोण उनकी संपादकीय पहचान बन चुका है, चाहे वह किसी वैश्विक मंच पर चर्चा का संचालन कर रही हों या दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) के मार्केटिंग परिदृश्य पर विश्लेषण लिख रही हों।

तकनीक को लेकर भी उनका दृष्टिकोण संतुलित रहा है। वह मानती हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकें पत्रकारों की मदद कर सकती हैं, लेकिन संपादकीय निर्णय और मानवीय विवेक का स्थान नहीं ले सकतीं। उनके नेतृत्व में तकनीक को सहयोगी के रूप में देखा जाता है, निर्णयकर्ता के रूप में नहीं।

सहकर्मी उन्हें एक ऐसी संपादक के रूप में याद करते हैं, जो धैर्यपूर्वक मार्गदर्शन करती हैं, बारीकी से संपादन करती हैं और हर लेख में पाठकों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। प्रशिक्षुओं से लेकर वरिष्ठ पत्रकारों तक, उन्होंने अनेक पत्रकारों का मार्गदर्शन किया है।

आज जब डिजिटल मीडिया तेज़ी और त्वरित उपभोग की ओर बढ़ रहा है, नूर फातिमा वारसिया (Noor Fathima Warsia) तथ्यपरक, संतुलित और गहन पत्रकारिता की पक्षधर बनी हुई हैं। उनके 46वें जन्मदिन और पत्रकारिता के 23 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह उपलब्धि केवल वर्षों की नहीं, बल्कि उन उच्च संपादकीय मानकों की भी है, जिन्हें उन्होंने अपने पूरे करियर में कायम रखा है।

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वरिष्ठ पत्रकार गरिमा सिंह ने ‘न्यूज24’ से दिया इस्तीफा

गरिमा सिंह ने करीब तीन साल पहले इस चैनल में बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर जॉइन किया था।

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Wednesday, 08 July, 2026
Garima Singh Anchor

हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज24’ (News24) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिली इस खबर के मुताबिक सीनियर न्यूज एंकर और वरिष्ठ टीवी पत्रकार गरिमा सिंह ने ‘न्यूज24’ में अपनी पारी को विराम दे दिया है। उन्होंने करीब तीन साल पहले यहां बतौर सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर जॉइन किया था। अपनी इस पारी में वह इस चैनल पर ‘सबसे बड़ा सवाल’ (Sabse Bada Sawal) शो होस्ट कर रही थीं। 

गरिमा सिंह ने इस्तीफा क्यों दिया और उनका अगला कदम किया होगा, फिलहाल इस बारे में कुछ पता नहीं चला है। 

बता दें कि गरिमा सिंह इससे पहले हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत एक्सप्रेस’ (Bharat Express) में बतौर एग्जिक्यूटिव एडिटर अपनी जिम्मेदारी संभाल रही थीं और प्राइम टाइम शो ‘सत्य’ होस्ट करती थीं।

मीडिया इंडस्ट्री में जाना-माना नाम गरिमा सिंह पूर्व में ‘सहारा मीडिया’ (Sahara Media) में भी बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। उन्हें बतौर चैनल हेड इस समूह के तीन चैनलों ‘सहारा समय’ (राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली/एनसीआर) की कमान सौंपी गई थी।

मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रहने वाली गरिमा सिंह को मीडिया में काम करने का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। टीवी पत्रकारिता के इस चीखाचाखी के दौर में नफासत, सौम्यता और मुस्कुराहट संग गरिमामय लहजे के साथ कठिन और चुभने वाले सवाल पूछने की गरिमा सिंह की शैली वाकई काबिल-ए-तारीफ है।

गरिमा सिंह ने वर्ष 2003 में रिपोर्टर के तौर पर ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran) से पत्रकारिता की शुरुआत की, फिर ‘टोटल टीवी’ (Total TV) में करीब तीन साल क्राइम रिपोर्टिंग के बाद वर्ष 2008 में वह ‘लाइव इंडिया’ (Live India) पहुंचीं। इसके बाद ‘पी7 न्यूज’,‘नेटवर्क 18’, ‘समाचार प्लस’ और ‘जी न्यूज’ जैसे संस्थानों के साथ भी उन्होंने काम किया है।

गरिमा सिंह 'द कैपिटल पोस्ट' (अंग्रेजी अखबार और डिजिटल चैनल) में बतौर एडिटर-इन-चीफ भी अपनी जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। इस दौरान उनके कईं इंटरव्यू खासे चर्चा में रहे। उस दौरान उमा भारती, साक्षी महाराज, जनरल वीके सिंह, आरिफ मोहम्मद खान, अन्नू कपूर जैसी हस्तियों के अलावा लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल के साथ इंटरव्यू खासा लोकप्रिय हुआ। इसके अलावा किसान आंदोलन के दौरान गरिमा सिंह द्वारा लिए गए किसान नेता राकेश टिकैत के इंटरव्यू ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं। यह इंटरव्यू कई दिनों तक सोशल मीडिया पर काफी ट्रेंड हुआ था। वर्ष 2015 में गरिमा सिंह को बेस्ट एंकर का अवार्ड भी दिया गया था। गरिमा सिंह धारदार खबर लिखने के साथ-साथ कविताएं भी लिखती हैं।

देश के ऐसे ‘असली हीरोज’ जिनके बारे में अभी तक न दिखाया गया और न जिनके बारे में बताया गया, उनकी कहानियों पर केंद्रित और ‘न्यूज24’ पर प्रसारित हुए शो ‘इंडियाज टाइगर’ (IndiasTiger) में वह इंदिरा गांधी के ऐतिहासिक किरदार में भी नजर आ चुकी हैं।

 

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''Hocco'' ने रोली श्रीवास्तव को बनाया चीफ मार्केटिंग ऑफिसर

होक्को (Hocco) ने रोली श्रीवास्तव (Roli Shrivastava) को पदोन्नत कर चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) नियुक्त किया है। वह अब कंपनी के सभी प्रमुख ब्रांड्स की मार्केटिंग रणनीति का नेतृत्व करेंगी।

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Wednesday, 08 July, 2026
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होक्को (Hocco) ने रोली श्रीवास्तव (Roli Shrivastava) को पदोन्नत कर चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। कंपनी ने उनकी नई जिम्मेदारी की घोषणा करते हुए कहा कि वह अब समूह के सभी प्रमुख ब्रांड्स की मार्केटिंग रणनीति का नेतृत्व करेंगी।

रोली श्रीवास्तव (Roli Shrivastava) वर्ष 2018 में होक्को (Hocco) से जुड़ी थीं। पिछले आठ वर्षों में उन्होंने कंपनी के विभिन्न व्यवसायों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने रचनात्मक सोच, उपभोक्ता की समझ और टीमवर्क के आधार पर कई ब्रांड अभियानों का नेतृत्व किया।

उन्होंने होक्को आइसक्रीम्स (Hocco Ice Creams) के लॉन्च में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा 'होक्को आमची' (Hocco Aamchi), हल्दीराम्स (Haldiram's) के साथ 'बर्फी आइसक्रीम' (Barfi Ice Cream) सहयोग, होक्को लीमो (Hocco LEEMO) और होक्को बन मस्का BIX (Hocco Bun Maska BIX) जैसे अभियानों का भी नेतृत्व किया।

नई भूमिका में रोली श्रीवास्तव (Roli Shrivastava) होक्को आइसक्रीम्स (Hocco Ice Creams), होक्को रेस्टोरेंट्स (Hocco Restaurants), होक्को ईटरीज (Hocco Eateries), होक्को फूड्स (Hocco Foods) और हुबर एंड हॉली आइसक्रीम्स (Huber & Holly Ice Creams) सहित कंपनी के सभी प्रमुख ब्रांड्स की मार्केटिंग गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालेंगी।

कंपनी के अनुसार, उनका फोकस ऐसे ब्रांड्स विकसित करने पर रहेगा जो उपभोक्ताओं के लिए सार्थक, सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक और लंबे समय तक पसंद किए जाने वाले बन सकें।

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बाइटडांस इंडोनेशिया के शैलेश अय्यर का निधन

बाइटडांस इंडोनेशिया (ByteDance Indonesia) के हेड ऑफ एजेंसी एंड पार्टनरशिप्स शैलेश अय्यर का निधन हो गया। पब्लिसिस ग्रुप इंडोनेशिया ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी है।

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Wednesday, 08 July, 2026
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दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) के विज्ञापन और डिजिटल मार्केटिंग जगत के जाने-माने पेशेवर शैलेश अय्यर (Shailesh Iyer) का निधन हो गया है। वह हाल ही में बाइटडांस इंडोनेशिया (ByteDance Indonesia) में हेड ऑफ एजेंसी एंड पार्टनरशिप्स (Head of Agency & Partnerships) के पद पर कार्यरत थे।

उनके निधन की जानकारी पब्लिसिस ग्रुप इंडोनेशिया (Publicis Groupe Indonesia) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर एक भावुक पोस्ट के जरिए साझा की।

पब्लिसिस ग्रुप इंडोनेशिया (Publicis Groupe Indonesia) ने अपने संदेश में कहा, "हम अपने पूर्व सहयोगी और पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) परिवार के सम्मानित सदस्य शैलेश अय्यर (Shailesh Iyer) के निधन से गहरा दुख व्यक्त करते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अपनी प्रतिबद्धता, नेतृत्व और सहयोगियों के साथ बनाए गए संबंधों के माध्यम से संगठन पर अमिट छाप छोड़ी। उनके साथ काम करने वाले सभी लोग उन्हें सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करेंगे।"

कंपनी ने शैलेश अय्यर (Shailesh Iyer) के परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस कठिन समय में उनकी प्रार्थनाएं उनके साथ हैं।

शैलेश अय्यर (Shailesh Iyer) ने अपने करियर में कई वैश्विक विज्ञापन और मार्केटिंग कंपनियों के साथ काम किया। बाइटडांस इंडोनेशिया (ByteDance Indonesia) से पहले वह वीएमएल (VML) और पब्लिसिस (Publicis) जैसी प्रमुख एजेंसियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुके थे। विज्ञापन, ब्रांड रणनीति और डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में उनके योगदान को उद्योग में व्यापक सम्मान प्राप्त था।

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ड्रीम स्पोर्ट्स से अलग हुए अमित शर्मा, अब बने 'Stealth' के को-फाउंडर

अपनी लिंक्डइन पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ड्रीम स्पोर्ट्स के साथ उनका करीब एक दशक का शानदार सफर अब समाप्त हो गया है और अब वह अपनी नई यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं।

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Wednesday, 08 July, 2026
Amit Sharma

‘ड्रीम स्पोर्ट्स’ (Dream Sports) के को-फाउंडर, ड्रीम प्ले के को-फाउंडर और पूर्व चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) अमित शर्मा ने कंपनी से अलग होने की घोषणा की है। अब वह अपने नए वेंचर 'Stealth' से को-फाउंडर के रूप में जुड़े हैं।

इसकी जानकारी अमित शर्मा ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट के जरिए साझा की। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि ड्रीम स्पोर्ट्स के साथ उनका करीब एक दशक का शानदार सफर अब समाप्त हो गया है और अब वह अपनी नई यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं।

अमित शर्मा ने बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने अमेरिका में 12 साल बिताने के बाद भारत लौटने का फैसला किया था। उस समय उनके इस फैसले पर कई लोगों ने सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अपने करियर के दौरान उन्हें याहू (Yahoo) और नेटफ्लिक्स (Netflix) जैसी कंपनियों में बेहद प्रतिभाशाली लोगों के साथ काम करने का अवसर मिला।

उन्होंने बताया कि जब वह ड्रीम11 से जुड़े थे, तब कंपनी में कुल 45 एंप्लॉयीज थे और टेक्नोलॉजी टीम में केवल 20 सदस्य थे। ड्रीम11 में उन्हें पहली बार खेल और टेक्नोलॉजी के प्रति अपने जुनून को एक साथ जोड़ने का मौका मिला।

अमित शर्मा के अनुसार, समय के साथ उनकी टीम ने टेक्नोलॉजी विभाग को 20 लोगों से बढ़ाकर 600 सदस्यों तक पहुंचाया। यह पूरी टीम मुंबई में तैयार की गई और उन्होंने मिलकर देश के सबसे जटिल तकनीकी सिस्टम तथा सबसे लोकप्रिय ऐप्स में से कुछ का निर्माण किया।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी पूरी टीम को देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और सहयोग के बिना यह संभव नहीं था। साथ ही उन्होंने अपने सहयोगियों का भी धन्यवाद किया, जिनसे उन्हें लगातार सीखने का अवसर मिला। अमित शर्मा ने ड्रीम स्पोर्ट्स के सह-संस्थापक हर्ष जैन और भावित सेठ का भी विशेष आभार जताया, जिन्होंने उन पर भरोसा किया और यह जिम्मेदारी सौंपी।

अपने अगले कदम के बारे में अमित शर्मा ने कहा कि अब वह फिर से कुछ नया बनाने जा रहे हैं और इस बार उनका फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होगा। उन्होंने फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा नहीं की और कहा कि इसके लिए लोगों को थोड़ा इंतजार करना होगा।

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टाइम्स इनोवेटिव मीडिया में रोहित चोपड़ा बने डिप्टी CEO

टाइम्स ग्रुप की आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन कंपनी Times Innovative Media Limited (TIML) ने अपने वरिष्ठ अधिकारी रोहित चोपड़ा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

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Wednesday, 08 July, 2026
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टाइम्स ग्रुप की आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन कंपनी टाइम्स इनोवेटिव मीडिया लिमिटेड (TIML) ने अपने वरिष्ठ अधिकारी रोहित चोपड़ा को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कंपनी ने उन्हें डिप्टी चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (Deputy CEO) नियुक्त किया है। इस नियुक्ति की जानकारी Times OOH ने अपने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए साझा की।

रोहित चोपड़ा पिछले 16 वर्षों से TIML के साथ जुड़े हुए हैं। नई जिम्मेदारी मिलने से पहले वह कंपनी में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) के पद पर कार्यरत थे। कंपनी में उनके लंबे अनुभव और नेतृत्व को देखते हुए उन्हें यह पदोन्नति दी गई है।

रोहित चोपड़ा के पास FMCG, रिटेल और मीडिया सेक्टर में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई बड़ी कंपनियों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। TIML से पहले वह Bunge India Pvt. Ltd., VIP Industries Ltd./Blowplast Ltd. और Coca-Cola India/Hindustan Coca-Cola जैसी कंपनियों में वरिष्ठ नेतृत्व पदों पर काम कर चुके हैं।

कंपनी को उम्मीद है कि रोहित चोपड़ा के नेतृत्व में TIML अपनी आउट-ऑफ-होम विज्ञापन सेवाओं को और मजबूत करेगी तथा कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सफलता हासिल करेगी।

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'क्वीन' के सीक्वल को लेकर कानूनी विवाद, Phantom Studios ने JioStar पर किया मुकदमा

साल 2014 की सुपरहिट फिल्म 'क्ववीन' (Queen) के कथित सीक्वल को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है।

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2026
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साल 2014 की सुपरहिट फिल्म 'क्ववीन' (Queen) के कथित सीक्वल को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। Phantom Studios ने JioStar India के खिलाफ Bombay High Court में 250 करोड़ रुपये का मुकदमा दायर किया है। कंपनी का आरोप है कि 'Queen Forever' नाम से बनाई जा रही फिल्म, मूल फिल्म Queen का अनधिकृत (Unauthorized) सीक्वल है और इससे दोनों कंपनियों के बीच हुए सह-निर्माण (Co-production) और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) समझौतों का उल्लंघन हुआ है।

मामले की सुनवाई इस सप्ताह Justice Gauri Godse की अदालत में होने की संभावना है।

Phantom Studios का कहना है कि साल 2012 के को-प्रोडक्शन एग्रीमेंट और 2022 के संशोधित समझौते के तहत Queen फिल्म से जुड़े सभी बौद्धिक संपदा अधिकार और उससे बनने वाले सीक्वल, प्रीक्वल, रीमेक और अन्य प्रोजेक्ट्स पर उसका और JioStar का बराबर-बराबर अधिकार है। कंपनी का दावा है कि इन समझौतों के मुताबिक दोनों पक्षों की सहमति के बिना कोई भी अकेले इस फ्रेंचाइज़ी का इस्तेमाल नहीं कर सकता।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि JioStar ने सह-निर्माता Trigger Happy Entertainment के साथ मिलकर 'Queen Forever' पर काम शुरू कर दिया और Phantom Studios को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई। कंपनी का कहना है कि न तो उसकी सहमति ली गई और न ही उसे इस परियोजना में शामिल किया गया।

Phantom Studios ने अदालत से मांग की है कि JioStar और Trigger Happy Entertainment को Queen पर आधारित किसी भी सीक्वल, रीमेक या अन्य प्रोजेक्ट को बनाने, रिलीज करने या व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने से रोका जाए, जब तक Phantom की मंजूरी न हो। साथ ही कंपनी ने अंतरिम आदेश की भी मांग की है, ताकि 'Queen Forever' या 'Queen 2' के नाम से चल रहे निर्माण, शूटिंग, प्रचार और अन्य गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जा सके।

कंपनी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि JioStar को Queen Forever से जुड़े सभी समझौते और रचनात्मक दस्तावेज अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा Phantom ने फिल्म से होने वाली संभावित कमाई में अपनी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी को भी मान्यता देने की मांग की है।

मुकदमे में कहा गया है कि इस नई फिल्म का निर्देशन Vikas Bahl कर रहे हैं और इसमें मुख्य भूमिका Kangana Ranaut निभा रही हैं। दोनों ही Queen का हिस्सा रह चुके हैं। Phantom का कहना है कि यही बात इस दावे को मजबूत करती है कि Queen Forever को उसी फिल्म की अगली कड़ी के रूप में पेश किया जा रहा है।

कंपनी का यह भी कहना है कि फिल्म के शीर्षक में 'Queen' शब्द का इस्तेमाल, उसी निर्देशक और मुख्य अभिनेत्री को शामिल करना दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री में यह धारणा बना सकता है कि यह 2014 की Queen का आधिकारिक सीक्वल है। इससे मूल फिल्म की लोकप्रियता और प्रतिष्ठा का फायदा उठाने की कोशिश की जा रही है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि 2025 से ही मीडिया रिपोर्टों और विकास बहल तथा कंगना रनौत के इंटरव्यू में 'Queen 2' और उसके सीक्वल पर काम होने की बातें सामने आ रही थीं। इसके बाद Phantom Studios ने कई कानूनी नोटिस और चेतावनी पत्र भेजे। हालांकि, कंपनी का आरोप है कि JioStar लगातार यह कहता रहा कि यह एक पूरी तरह नई और स्वतंत्र फिल्म है, जबकि Phantom का मानना है कि यह Queen की कहानी और उसकी पहचान से जुड़ा प्रोजेक्ट है।

अब इस पूरे विवाद पर अंतिम फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद ही सामने आएगा।

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न्यूजरूम में एल्गोरिदम्स की एंट्री, क्या बदल रहा है खबरों का चेहरा?

एक समय था जब न्यूजरूम में खबरों का फैसला एडिटर करता था। लेकिन अब यह भूमिका धीरे-धीरे एल्गोरिदम्स निभाने लगे हैं।

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Wednesday, 08 July, 2026
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एक समय था जब न्यूजरूम में आखिरी फैसला एडिटर का होता था। कौन-सी खबर सबसे ऊपर जाएगी, किस मुद्दे को प्रमुखता मिलेगी और किसे कम जगह मिलेगी, यह सब एडिटोरियल समझ और पत्रकारिता के मूल्यों के आधार पर तय होता था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। आज खबरों की पहुंच और उनकी प्राथमिकता पर इंसानों से ज्यादा एल्गोरिदम्स का असर बढ़ता जा रहा है। Google, Meta, TikTok और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम्स तय कर रहे हैं कि लोग क्या देखेंगे और क्या नहीं। यह सिर्फ तकनीक में आया बदलाव नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के काम करने के तरीके और उसकी स्वतंत्रता के सामने खड़ी एक बड़ी चुनौती है।

गूगल का 'जीरो-क्लिक' साम्राज्य

पहले अगर किसी को कोई खबर पढ़नी होती थी, तो वो गूगल पर सर्च करता, किसी न्यूज साइट पर जाता, और खबर पढ़ता। अब यह सफर बहुत छोटा हो गया है, इतना छोटा कि पब्लिशर तक पहुंचने की जरूरत ही नहीं रही।

गूगल के AI ओवरव्यूज ने यह खेल बदल दिया है। Similarweb के मई 2025 के डेटा के मुताबिक, गूगल पर न्यूज से जुड़े सर्च में 69% सवाल ऐसी हैं, जहां लोगों को जवाब सीधे गूगल पर ही मिल जाता है और उन्हें किसी न्यूज वेबसाइट पर क्लिक करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसे ‘zero-click’ सर्च कहा जाता है। मई 2024 में अमेरिका में AI Overviews लॉन्च होने से पहले यह आंकड़ा 56% था। यानी सिर्फ एक साल में इसमें 13% पॉइंट्स की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, SparkToro के 2025 डेटा के अनुसार, गूगल की कुल 58.5% सर्च बिना किसी क्लिक के ही खत्म हो जाती हैं।

इसका सीधा असर न्यूज पब्लिशर्स पर पड़ा है। Chartbeat के डेटा के अनुसार, जो 2,500 से ज्यादा न्यूज वेबसाइट्स को ट्रैक करता है, 2025 में गूगल से आने वाला सर्च ट्रैफिक 33% तक गिर गया। यह तुलना नवंबर 2024 से नवंबर 2025 के बीच की है। अमेरिका में यह गिरावट और ज्यादा, यानी 38% रही। Reuters Institute की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 51 देशों के 280 मीडिया लीडर्स का मानना है कि अगले तीन साल में सर्च इंजन रेफ्ररल में 43% तक और गिरावट आ सकती है। इनमें से करीब एक-पांचवें पब्लिशर्स को लगता है कि यह नुकसान 75% से भी ज्यादा हो सकता है।

कुछ कंपनियों पर इसका असर और गंभीर रहा। HubSpot ने अपनी organic traffic में 70 से 80% तक की गिरावट दर्ज की। वहीं, एजुकेशन प्लेटफॉर्म Chegg ने अपनी 49% नॉन-सब्सक्राइबर ट्रैफिक खो दी। इसके बाद Chegg ने गूगल के खिलाफ प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाते हुए कानूनी मामला दायर किया। कंपनी का आरोप है कि गूगल ने पब्लिशर्स के कंटेंट का इस्तेमाल अपने AI को ट्रेन करने में किया और अब वही AI लोगों को सीधे जवाब देकर पब्लिशर्स की जगह ले रहा है।

Pew Research Center के जुलाई 2025 के अध्ययन में 900 अमेरिकी वयस्कों की 68,879 गूगल सर्च को ट्रैक किया गया। इसमें पाया गया कि जब AI Overview दिखता है, तब सिर्फ 8% यूजर्स ही किसी ट्रेडिशनल लिंक पर क्लिक करते हैं। जबकि बिना AI Overview के यह आंकड़ा 15% रहता है। इतना ही नहीं, AI Overview में दिए गए लिंक पर सिर्फ 1% लोग ही क्लिक करते हैं।

Reuters Institute के सर्वे में पब्लिशर्स कानेट स्कोर -25 रहा, जब उनसे पूछा गया कि वे 2026 में गूगल सर्च पर ज्यादा काम करेंगे या कम। इसका मतलब यह है कि ज्यादातर पब्लिशर्स अब गूगल सर्च में अपना निवेश घटाने की तैयारी में हैं।

Facebook का 'War on News', और उसका अधूरा अंत

Meta ने 2018 में Facebook पर एक बड़ा बदलाव किया, जिसका असर न्यूज इंडस्ट्री पर साफ दिखा। कंपनी ने कहा कि वह लोगों के बीच “meaningful social connections” बढ़ाना चाहती है। इसके बाद Facebook ने अपने algorithm में न्यूज और सामाजिक-राजनीतिक कंटेंट को कम दिखाना शुरू कर दिया। बाद में इसे ‘War on News’ कहा गया।

University of Warsaw और University of California Davis के शोधकर्ताओं की जुलाई 2025 की एक स्टडी में 2016 से फरवरी 2025 के बीच 40 न्यूज संगठनों के 52 लाख से ज्यादा Facebook posts और करीब 787 करोड़ user reactions का अध्ययन किया गया। इसमें सामने आया कि 2021 से 2024 के बीच न्यूज पोस्ट्स पर reactions में 78% की भारी गिरावट आई, जबकि गैर-न्यूज पेजों पर engagement बढ़ती रही।

2025 में Meta ने यह policy वापस ले ली, लेकिन तब तक काफी नुकसान हो चुका था। Reuters Institute और Press Gazette की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 की तुलना में Facebook से न्यूज वेबसाइट्स पर आने वाला ट्रैफिक 43% तक गिर चुका था। पॉलिसी वापस लेने के बाद भी यह गिरावट पूरी तरह नहीं संभल सकी।

वहीं, X (पहले Twitter) में एलन मस्क के आने के बाद प्लेटफॉर्म का एल्गोरिदम ज्यादा राजनीतिक रंग में नजर आने लगा। Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, X के 58% users को लगता है कि ऑनलाइन कंटेंट में असली और नकली जानकारी में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। इसके बावजूद, अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद के बाद X पर खबरें देखने वाले लोगों की संख्या 8% पॉइंट्स बढ़ गई और यह वयस्क आबादी के 23% तक पहुंच गई।

TikTok: नया गेटकीपर

अगर गूगल और Facebook पुराने गेटकीपर्स हैं, तो TikTok नया उभरता हुआ गेटकीपर है। Reuters Institute की Digital News Report 2025 के मुताबिक, जो 48 देशों और करीब 1,00,000 लोगों पर आधारित है, TikTok न्यूज का सबसे तेजी बढ़ता प्लेटफॉर्म बन गया है। Global sample में 17% लोग TikTok पर न्यूज लेते हैं। 18 से 24 साल के युवाओं में 44% का प्राइमरी न्यूज सोर्स सोशल मीडिया है।

थाइलैंड में 49% लोग TikTok पर न्यूज देखते हैं, जो पिछले साल से 10% पॉइंट्स ज्यादा है। मलेशिया में यह 48%, केन्या में 40% है। 2026 की शुरुआत तक TikTok के वैश्विक स्तर पर 1.9 बिलियन मंथली एक्टिव यूजर्स हो चुके हैं।

लेकिन TikTok का एल्गोरिदम काफी सख्त तरीके से काम करता है। वह यह नहीं देखता कि किसी क्रिएटर के कितने फॉलोअर्स हैं, बल्कि यह देखता है कि वीडियो के पहले घंटे में कितने likes, comments, watch time और video completion मिले।

सितंबर 2025 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक, TikTok का algorithm उन वीडियो को ज्यादा बढ़ावा देता है जो लोगों का ध्यान लंबे समय तक बनाए रखें और ज्यादा इंट्रैक्शन हासिल करें। इसका असर यह होता है कि एडिटर्स और क्रिएटर्स ऐसी खबरों को प्राथमिकता देने लगते हैं जो ज्यादा अटेंशन खींचें। यानी कई बार गंभीर लेकिन धीमी खबरें दब जाती हैं, जबकि ज्यादा नाटकीय और सतही खबरें तेजी से वायरल हो जाती हैं।

News Consumption का बदलता चेहरा

पिछले पांच वर्षों में न्यूज कंजप्शन का तरीका मौलिक रूप से बदला है। Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट सीधे कहती है: 2020 में 52% लोग सोशल वीडियोज के जरिए न्यूज देखते थे, जो 2025 में बढ़कर 65% हो गया। किसी भी format में वीडियो न्यूज देखने वाले 67% से बढ़कर 75% हो गए।

अमेरिका में पहली बार सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स ने टीवी न्यूज और न्यूज वेबसाइट्स दोनों को पीछे छोड़ दिया है। अब 54% अमेरिकी लोग सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स के जरिए खबरें देखते हैं, जबकि टीवी न्यूज देखने वालों की संख्या 50% और न्यूज वेबसाइट्स का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 48% है।

Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, टीवी, प्रिंट और न्यूज वेबसाइट्स के साथ लोगों की जुड़ाव लगातार घट रहा है, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उनकी निर्भरता बढ़ती जा रही है।

न्यूजरूम के अंदर: Algorithm की घुसपैठ

खतरा सिर्फ बाहर से नहीं है। अब algorithm न्यूजरूम के अंदर भी अपनी जगह बना चुका है।

Nieman Lab की 2026 predictions रिपोर्ट में कहा गया है कि AI अब सिर्फ एक टूल नहीं, बल्कि newsroom की “editorial infrastructure” बनती जा रही है। Harvard Innovation Labs के Nikita Roy के मुताबिक, न्यूजरूम्स को खुद को सिर्फ article बनाने वाली फैक्ट्री नहीं, बल्कि “AI-native knowledge engines” में बदलना होगा।

वहीं, Maryland University के Professor Daniel Trielli ने 2026 में चेतावनी दी कि पत्रकारिता धीरे-धीरे इंसानों के बजाय AI systems के हिसाब से तैयार की जा रही है। उन्होंने इसे ‘agentic journalism’ कहा है। इसका मतलब है कि editorial control कम होता जाएगा और algorithm पर निर्भरता बढ़ती जाएगी।

Nieman Lab के Parker Molloy ने दिसंबर 2025 में लिखा था, “जो आने वाला है, वह धीरे-धीरे आत्मसमर्पण जैसा होगा। पत्रकार ऐसे systems का इस्तेमाल करने लगेंगे, जिन पर वे बिना सोचे भरोसा करेंगे।” यानी कई editors को शायद यह एहसास भी न हो कि वे algorithm के हिसाब से काम करने लगे हैं।

Global South यानी विकासशील देशों के publishers की स्थिति और ज्यादा मुश्किल होती जा रही है। International Fund for Public Media (IFPM) की director Irene Jay Liu ने JournalismAI Festival 2025 में बताया कि Brazil, South Africa और Indonesia के बड़े publishers ने पिछले एक साल में 50 से 60% तक traffic खो दिया।

एडिटोरियल स्वतंत्रता बनाम प्लेटफॉर्म पर निर्भरता

यह बहस अब सिर्फ सिद्धांत तक सीमित नहीं रही। Frontiers in Communication में 2025 में प्रकाशित एक शोध, जो इंडोनेशिया के स्थानीय न्यूजरूम्स पर आधारित था, बताता है कि algorithm आधारित कमाई का मॉडल, audience engagement के आधार पर मिलने वाली visibility और platforms पर बढ़ती निर्भरता, लंबी और गंभीर पत्रकारिता को धीरे-धीरे किनारे कर रही है।

यानी जब पत्रकारिता पूरी तरह platform के logic पर चलने लगती है, तब investigative journalism आर्थिक रूप से टिक पाना मुश्किल हो जाता है।

Columbia Journalism Review ने अक्टूबर 2025 की अपनी analysis में इसे आसान शब्दों में समझाया। रिपोर्ट के मुताबिक, टेक प्लेटफॉर्म्स लंबे समय से मीडिया कंपनियों के साथ दोहरा व्यवहार करते रहे हैं — पहले वे publishers को ज्यादा reach का लालच देते हैं और फिर अचानक उनका traffic कम कर देते हैं।

Reuters Institute की 2025 रिपोर्ट में भी पाठकों ने साफ कहा कि वे चाहते हैं पत्रकार अपना समय ताकतवर लोगों की जांच-पड़ताल और गहराई वाली रिपोर्टिंग में लगाएं, न कि सिर्फ clicks पाने के लिए algorithm के पीछे भागें। यानी audience अब भी गंभीर और असली पत्रकारिता चाहती है, लेकिन algorithm अक्सर ऐसी पत्रकारिता को पीछे धकेल देता है।

क्या कोई रास्ता है?

Reuters Institute की जनवरी 2026 रिपोर्ट में 280 मीडिया लीडर्स ने इस संकट से निकलने के कुछ रास्ते सुझाए हैं। अब publishers तेजी से newsletters, podcasts और direct audience connection पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि platforms पर उनकी निर्भरता कम हो सके।

ऑस्ट्रेलिया की मीडिया कंपनी Nine की Senior Audience Editor Sophia Phan का कहना है कि search से आने वाला traffic लगातार घट रहा है, इसलिए अब readers से सीधे जुड़ने के बेहतर तरीके तलाशने होंगे।

इसी वजह से paywall का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। 2026 में ज्यादातर quality publishers अपना content paywall के पीछे रख रहे हैं। Substack अप्रैल 2025 में 42.5% year-over-year growth के साथ अमेरिका की top 19 news websites में शामिल हो गया।

हालांकि, यह रास्ता हर publisher के लिए आसान नहीं है। जिन मीडिया संस्थानों के पास मजबूत brand trust है, वही इस मॉडल में टिक पा रहे हैं। छोटे और स्थानीय न्यूजरूम्स के लिए स्थिति ज्यादा गंभीर है। Chartbeat के 2026 डेटा के मुताबिक, 1,000 से 10,000 daily pageviews वाले छोटे publishers ने दो साल में search traffic में 60% तक की गिरावट झेली है।

गेटकीपर बदल गया है

एक समय था जब यह तय करने की ताकत editors के पास होती थी कि लोगों तक कौन-सी खबर पहुंचेगी। बाद में यह ताकत मीडिया मालिकों के हाथ में चली गई। लेकिन आज यह शक्ति algorithms के पास है — Google, Meta और TikTok जैसे platforms के algorithms के पास।

फर्क सिर्फ इतना नहीं है कि ताकत बदल गई है, बल्कि यह भी है कि पहले editor से सवाल किया जा सकता था। Media owners को अदालत तक ले जाया जा सकता था। लेकिन algorithm न जवाब देता है, न यह बताता है कि उसने क्या और क्यों चुना। उसका मकसद सिर्फ एक होता है- ज्यादा engagement, ज्यादा retention और ज्यादा revenue।

इस दौड़ में सबसे ज्यादा नुकसान उस पत्रकारिता का होता है जो सच सामने लाती है, ताकतवर लोगों से सवाल पूछती है और असुविधाजनक मुद्दों को उठाती है।

Reuters Institute के 2026 forecast की एक लाइन इस पूरे संकट को साफ शब्दों में बताती है। रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया संस्थान अब सिर्फ खबरें नहीं बना रहे, बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं — उन platforms के खिलाफ, जिन्होंने खबरों को एक product और journalists को सिर्फ content creators बनाकर छोड़ दिया है।

अब असली सवाल यह नहीं है कि algorithm पत्रकारिता को बदल रहा है या नहीं। असली सवाल यह है कि क्या पत्रकारिता में अब भी इतनी ताकत बची है कि वह algorithm के दबाव के खिलाफ खड़ी रह सके।

 

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