WhatsApp पर AI संभालेगा कस्टमर सर्विस, Meta ने लॉन्च किया Business Agent

वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म ने मेटा बिजनेस एजेंट नाम का नया AI आधारित असिस्टेंट लॉन्च किया है

Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2026
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अब कंपनियों को ग्राहकों के सवालों का जवाब देने के लिए हर समय बड़ी कस्टमर सर्विस टीम की जरूरत नहीं होगी। वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म ने मेटा बिजनेस एजेंट नाम का नया AI आधारित असिस्टेंट लॉन्च किया है, जो कारोबारियों की ओर से ग्राहकों से बातचीत करेगा, उनके सवालों के जवाब देगा और कई जरूरी काम अपने आप संभालेगा।

इस नए फीचर की घोषणा मुंबई में आयोजित वॉट्सऐप बिजनेस सम्मिट के तीसरे संस्करण में की गई। मेटा का कहना है कि यह AI टूल भारत में तेजी से बढ़ रहे Conversational Commerce यानी चैट के जरिए कारोबार को नई रफ्तार देगा।

ग्राहकों के सवालों का देगा तुरंत जवाब

मेटा बिजनेस एजेंट को इस तरह तैयार किया गया है कि वह ग्राहकों के सामान्य सवालों का तुरंत जवाब दे सके। इसके अलावा यह प्रोडक्ट कैटलॉग से सामान सुझाएगा, अपॉइंटमेंट बुक करेगा, संभावित ग्राहकों (Leads) की पहचान करेगा और खरीदारी से जुड़ी बातचीत में भी मदद करेगा।

अगर किसी ग्राहक की समस्या AI से हल नहीं हो पाती है, तो कंपनी यह तय कर सकेगी कि बातचीत को कब किसी वास्तविक कस्टमर सर्विस एग्जीक्यूटिव के पास भेजा जाए।

सिर्फ चैट नहीं, कारोबार भी संभालेगा

मेटा का कहना है कि यह AI असिस्टेंट केवल ग्राहकों से बातचीत ही नहीं करेगा, बल्कि उनके साथ हुई बातचीत का विश्लेषण भी करेगा। यह मिस हुई चैट का सार (Summary) तैयार करेगा और कंपनियों को यह समझने में मदद करेगा कि ग्राहक क्या चाहते हैं और उनकी टीम का प्रदर्शन कैसा है।

भारत बना सबसे तेजी से बढ़ता बाजार

मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और कंट्री हेड अरुण श्रीनिवास ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते Conversational Business बाजारों में शामिल है। अब ग्राहक फोन कॉल या ईमेल की बजाय सीधे मैसेजिंग ऐप के जरिए कंपनियों से जुड़ना पसंद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मेटा बिजनेस एजेंट कंपनियों को पहले से ज्यादा तेज और व्यक्तिगत (Personalised) ग्राहक सेवा देने में मदद करेगा।

बड़ी कंपनियों के लिए अलग प्लेटफॉर्म

मेटा ने मेटा बिजनेस एजेंट Platform भी पेश किया है। यह खास तौर पर बड़ी कंपनियों के लिए बनाया गया है, ताकि वे अपने AI एजेंट तैयार कर सकें और उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज कर सकें।

यह प्लेटफॉर्म Shopify, Zendesk और Shopee जैसे बिजनेस टूल्स के साथ भी जुड़ सकता है। वॉट्सऐप Business Platform इसके लिए मुख्य ग्राहक संपर्क माध्यम होगा।

वॉट्सऐप पर ही मिलेगा बिजनेस सर्च

मेटा ने वॉट्सऐप में नए Business Discovery फीचर्स की भी घोषणा की है। जल्द ही यूजर्स वॉट्सऐप के भीतर ही किसी बिजनेस को उसके नाम से खोज सकेंगे। साथ ही किसी बिजनेस का कॉन्टैक्ट अपने दोस्तों और परिवार के साथ भी आसानी से साझा कर पाएंगे। इससे ऐप छोड़े बिना ही कंपनियों तक पहुंचना आसान होगा।

वॉट्सऐप को बना रहा है पूरा बिजनेस प्लेटफॉर्म

मेटा की यह पहल दिखाती है कि कंपनी वॉट्सऐप को सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि एक ऐसे प्लेटफॉर्म में बदलना चाहती है जहां ग्राहक सेवा, खरीदारी, AI आधारित सहायता और बिजनेस से जुड़े ज्यादातर काम एक ही चैट विंडो में पूरे हो सकें। भारत में डिजिटल कारोबार और चैट-आधारित खरीदारी के तेजी से बढ़ते चलन को देखते हुए मेटा को उम्मीद है कि आने वाले समय में कंपनियों और ग्राहकों के बीच ज्यादातर बातचीत की शुरुआत वेबसाइट से नहीं, बल्कि एक वॉट्सऐप मैसेज से होगी। 

 

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अब Truecaller जैसे ऐप्स पर भी कस सकता है शिकंजा, TRAI ने मांगे नए अधिकार

TRAI ने सरकार से मांग की है कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) Act के तहत ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाए

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Wednesday, 08 July, 2026
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देश में बढ़ती स्पैम कॉल्स के बीच अब विवाद इस बात पर खड़ा हो गया है कि आखिर यह तय करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए कि कौन-सी कॉल स्पैम है और कौन-सी नहीं। इसी को लेकर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) ने बड़ा कदम उठाया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI ने सरकार से मांग की है कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) Act के तहत ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाए, जो अधिकृत (Authorised) नंबरों से आने वाली असली कॉल्स को भी स्पैम बताकर ब्लॉक या टैग कर देते हैं।

Truecaller जैसे ऐप्स पर रहेगी नजर

TRAI की इस पहल का असर Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे कॉलर आईडी और कॉल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म पर पड़ सकता है।

फिलहाल ये ऐप्स IT Act के तहत 'इंटरमीडियरी' की श्रेणी में आते हैं। इसलिए इन पर सीधे TRAI का अधिकार नहीं है, बल्कि इनसे जुड़े नियमों की जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) के दायरे में आती है।

क्या चाहता है TRAI?

TRAI का कहना है कि वह इन ऐप्स को सीधे नियंत्रित नहीं करना चाहता। उसकी मांग सिर्फ इतनी है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म दूरसंचार से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है या अधिकृत नंबरों को गलत तरीके से स्पैम बताता है, तो उसे कार्रवाई करने का अधिकार मिलना चाहिए।

इसके लिए TRAI ने खुद को IT Act के तहत एक 'Authorised Agency' घोषित करने की मांग की है। ऐसा होने पर वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आधिकारिक नोटिस जारी कर सकेगा और उनसे नियमों का पालन सुनिश्चित करा सकेगा।

सरकार ने सिद्धांत रूप से दिखाई सहमति

रिपोर्ट के अनुसार, MeitY ने TRAI के इस प्रस्ताव को सिद्धांत रूप से मंजूरी दे दी है। अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी DoT निभा सकता है।

टेलीकॉम कंपनियों की क्या है शिकायत?

टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि सरकार ने व्यावसायिक और सेवा संबंधी कॉल्स के लिए 140 और 1600 सीरीज के विशेष नंबर तय किए हैं। इन नंबरों से आने वाली कॉल्स अधिकृत होती हैं।

लेकिन कई बार कॉल मैनेजमेंट ऐप्स इन्हीं असली और जरूरी कॉल्स को भी स्पैम बताकर टैग कर देते हैं। इससे ग्राहकों तक बैंक, बीमा कंपनियों, अस्पतालों, डिलीवरी सेवाओं और अन्य जरूरी संस्थाओं की महत्वपूर्ण कॉल्स नहीं पहुंच पातीं।

टेलीकॉम कंपनियों का मानना है कि इससे सरकार की अधिकृत नंबरिंग व्यवस्था कमजोर होती है और उपभोक्ता जरूरी जानकारी से वंचित रह सकते हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा और सही कॉल के बीच संतुलन की चुनौती

भारत में जैसे-जैसे कॉलर आईडी और स्पैम फिल्टरिंग ऐप्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल भी अहम होता जा रहा है कि किसी कॉल को स्पैम घोषित करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए। एक ओर उपभोक्ताओं को फर्जी और धोखाधड़ी वाली कॉल्स से बचाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सही और अधिकृत कॉल्स गलती से ब्लॉक न हों।

इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए TRAI अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक निगरानी और जवाबदेही चाहता है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो भविष्य में Truecaller जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप्स को भी अधिक सख्त नियामकीय नियमों का पालन करना पड़ सकता है।

 

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ओपनएआई से जुड़ीं मिली कपूर : बनीं कंज्यूमर मार्केटिंग लीड

मिली कपूर (Mili Kapoor) ने ओपनएआई (OpenAI) में कंज्यूमर मार्केटिंग लीड के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। इससे पहले वह एप्पल (Apple) में प्रोडक्ट मार्केटिंग लीड – आईपैड (iPad) थीं।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2026
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मिली कपूर (Mili Kapoor) ने ओपनएआई (OpenAI) में कंज्यूमर मार्केटिंग लीड (Consumer Marketing Lead) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह दिल्ली (Delhi) से कार्य करेंगी। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से अपनी नई भूमिका की जानकारी साझा की।

अपने पोस्ट में मिली कपूर (Mili Kapoor) ने लिखा, "करियर के कुछ फैसले केवल नौकरी बदलने जैसे नहीं होते, बल्कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण पल का हिस्सा बनने जैसे होते हैं। मुझे यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि मैंने ओपनएआई (OpenAI) जॉइन कर लिया है।"

मिली कपूर (Mili Kapoor) इससे पहले एप्पल (Apple) में प्रोडक्ट मार्केटिंग लीड – आईपैड (Product Marketing Lead – iPad) के पद पर कार्यरत थीं। वह दिसंबर 2024 से जून 2026 तक कंपनी के साथ जुड़ी रहीं।

एप्पल (Apple) से पहले उन्होंने फिलिप्स (Philips) में कंज्यूमर मार्केटिंग लीडर (Consumer Marketing Leader) के रूप में भारत में कंपनी के पर्सनल हेल्थ (Personal Health) पोर्टफोलियो का नेतृत्व किया।

इसके अलावा वह नेस्ले प्रोफेशनल (Nestlé Professional) में मार्केटिंग हेड (Marketing Head), मेटा (Meta) में बिजनेस मार्केटिंग मैनेजर (Business Marketing Manager), नेस्ले पुरीना पेटकेयर (Nestlé Purina Petcare) में मार्केटिंग लीड (Marketing Lead), नेशनल ज्योग्राफिक चैनल इंडिया (National Geographic Channel India) में एवीपी – मार्केटिंग एवं ब्रांड स्ट्रेटेजी (AVP – Marketing & Brand Strategy), पर्नोड रिकार्ड (Pernod Ricard) में सीनियर मार्केटिंग मैनेजर (Senior Marketing Manager) और पेप्सिको (PepsiCo) में मार्केटिंग एवं सेल्स से जुड़ी विभिन्न भूमिकाओं में कार्य कर चुकी हैं।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वीएफ कॉरपोरेशन (VF Corporation) में डिजाइनर (Designer) के रूप में की थी। इसके बाद वह टेक्नोपैक एडवाइजर्स (Technopak Advisors) में एसोसिएट कंसल्टेंट (Associate Consultant) के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।

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'आजतक' ने लॉन्च किया Vertical TV, अब मोबाइल स्क्रीन पर मिलेगा नया लाइव न्यूज अनुभव

देश के प्रमुख हिंदी न्यूज चैनल Aaj Tak ने लाइव न्यूज देखने का तरीका बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2026
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देश के प्रमुख हिंदी न्यूज चैनल  'आजतक' (Aaj Tak) ने लाइव न्यूज देखने का तरीका बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। चैनल ने Aaj Tak Vertical TV लॉन्च किया है, जिसे कंपनी ने भारत का पहला AI-पावर्ड, रियल-टाइम एडैप्टिव वर्टिकल टीवी एक्सपीरियंस बताया है। इसका मकसद मोबाइल पर फुल-स्क्रीन में लाइव न्यूज देखने का बेहतर अनुभव देना है।

कंपनी के मुताबिक, यह सिर्फ टीवी स्क्रीन को काटकर (Crop) मोबाइल पर दिखाने वाला फीचर नहीं है, बल्कि पूरी लाइव ब्रॉडकास्ट को मोबाइल के वर्टिकल स्क्रीन के हिसाब से रियल-टाइम में दोबारा व्यवस्थित (Reframe) करता है। इससे एंकर, रिपोर्टर, ग्राफिक्स, ब्रेकिंग न्यूज और दूसरी जरूरी जानकारी साफ तौर पर दिखाई देती है।

Aaj Tak Vertical TV फिलहाल Aaj Tak App और चैनल के YouTube प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

AI करेगा तय कि स्क्रीन पर क्या सबसे जरूरी है

Aaj Tak का कहना है कि इस नई तकनीक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) हर लाइव फ्रेम का लगातार विश्लेषण करता है। इसके बाद यह तय करता है कि उस समय स्क्रीन पर सबसे जरूरी क्या है- एंकर, रिपोर्टर, कोई खास वीडियो, ग्राफिक्स या ब्रेकिंग न्यूज। उसी के हिसाब से स्क्रीन का लेआउट अपने आप बदल जाता है।

कंपनी का दावा है कि इस AI सिस्टम को पिछले पांच वर्षों के दर्शकों के व्यवहार, कंटेंट देखने के तरीके और स्क्रीन एंगेजमेंट के डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। यही वजह है कि यह मोबाइल स्क्रीन पर भी जरूरी जानकारी को बिना खोए बेहतर तरीके से दिखाने में सक्षम है।

मोबाइल के लिए खास डिजाइन किया गया नया फॉर्मेट

आमतौर पर टीवी न्यूज का प्रसारण क्षैतिज (Horizontal) स्क्रीन के लिए तैयार किया जाता है। ऐसे में जब वही वीडियो मोबाइल पर वर्टिकल स्क्रीन में देखा जाता है तो कई बार जरूरी ग्राफिक्स, टिकर या दूसरी अहम जानकारी कट जाती है।

Aaj Tak का कहना है कि उसका नया सिस्टम लाइव प्रसारण के दौरान इन सभी एलिमेंट्स को रियल-टाइम में दोबारा व्यवस्थित करता है, ताकि मोबाइल पर देखने वाले दर्शकों को पूरी जानकारी आसानी से मिल सके।

बदलती दर्शकों की आदतों को ध्यान में रखकर तैयार

आज के समय में बड़ी संख्या में लोग स्मार्टफोन पर ही न्यूज देखते हैं। सोशल मीडिया पर वर्टिकल वीडियो पहले से ही बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन लाइव न्यूज ब्रॉडकास्ट अभी तक इस फॉर्मेट में पूरी तरह नहीं आ पाया था। Aaj Tak का कहना है कि Vertical TV इसी कमी को दूर करने की कोशिश है।

कंपनी के मुताबिक, इस तकनीक में AI, ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग और यूजर एक्सपीरियंस को मिलाकर ऐसा इंटरफेस तैयार किया गया है, जो मोबाइल पर न्यूज देखने को ज्यादा सहज और प्राकृतिक बनाता है।

इंडिया टुडे ग्रुप ने क्या कहा?

इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी ने कहा कि मीडिया की दुनिया में जब भी दर्शकों की आदतें बदलती हैं, तकनीक को भी उसी हिसाब से बदलना पड़ता है। उन्होंने कहा कि Vertical TV कई वर्षों के रिसर्च, प्रयोग और इनोवेशन का नतीजा है। AI आधारित रीफ्रेमिंग और दर्शकों के व्यवहार की समझ को मिलाकर Aaj Tak ने मोबाइल पर लाइव न्यूज देखने के लिए भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक नया फॉर्मेट तैयार किया है।

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क्या AI कंपनियों में हिस्सेदारी लेंगी सरकारें, बदलने वाला है खेल?

अब दुनिया की सरकारें AI कंपनियों को केवल रेगुलेट करने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उनमें हिस्सेदारी लेने की संभावना पर भी विचार कर रही हैं।

Last Modified:
Saturday, 04 July, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ टेक्नोलॉजी कंपनियों का कारोबार नहीं रह गया है। धीरे-धीरे यह किसी देश की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल भविष्य का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। यही वजह है कि अब दुनिया की सरकारें AI कंपनियों को केवल रेगुलेट करने तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि उनमें हिस्सेदारी लेने की संभावना पर भी विचार कर रही हैं।

हाल के दिनों में अमेरिका की OpenAI और भारत की Sarvam AI से जुड़ी चर्चाओं ने इस मुद्दे को नई दिशा दी है। दोनों मामलों में सरकारों की संभावित हिस्सेदारी की बात सामने आई है। हालांकि अभी किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इन चर्चाओं ने यह साफ कर दिया है कि AI को लेकर सरकारों की सोच तेजी से बदल रही है।

अमेरिका में OpenAI को लेकर क्या चर्चा है?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ने अमेरिकी सरकार को कंपनी में करीब 5 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। बताया जा रहा है कि इस पर चर्चा ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका में AI कंपनियों की बढ़ती ताकत, उनके आर्थिक प्रभाव और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नजर पहले से ज्यादा सख्त हो गई है।

अमेरिकी प्रशासन हाल के महीनों में कई बड़े AI मॉडल्स की रिलीज, एडवांस्ड चिप्स की उपलब्धता और संवेदनशील AI तकनीकों के इस्तेमाल पर लगातार निगरानी बढ़ा रहा है। सरकार की चिंता यह भी है कि AI से भविष्य में बनने वाली बड़ी आर्थिक संपत्ति का फायदा केवल कुछ निजी कंपनियों तक सीमित न रह जाए।

इसी सोच के तहत OpenAI की ओर से यह विचार सामने आया कि यदि सरकार भी हिस्सेदार बने, तो AI से होने वाले लाभ में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में रास्ता निकाला जा सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ने यह सुझाव भी दिया कि भविष्य में दूसरी बड़ी AI कंपनियां भी ऐसा मॉडल अपना सकती हैं।

भारत में Sarvam AI का मामला

भारत में भी कुछ ऐसा ही परिदृश्य देखने को मिल रहा है। बेंगलुरु स्थित AI स्टार्टअप Sarvam AI इस समय करीब 300 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटा रही है। इस दौर में कंपनी का अनुमानित मूल्यांकन लगभग 1.5 बिलियन डॉलर बताया जा रहा है।

ETTech की रिपोर्ट के अनुसार, IndiaAI Mission के तहत सरकार कंपनी को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य तकनीकी संसाधन उपलब्ध करा रही है। इसी सहयोग के बदले सरकार कंपनी में 1 से 2 प्रतिशत तक हिस्सेदारी हासिल कर सकती है।

यह निवेश सीधे नकद राशि के रूप में नहीं होगा। इसके लिए कन्वर्टिबल इंस्ट्रूमेंट्स जैसे वित्तीय विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि सरकार और कंपनी, दोनों की ओर से अभी तक इस पर अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

आखिर सरकारें हिस्सेदारी क्यों चाहती हैं?

अब तक तकनीकी कंपनियों के मामले में सरकारों की भूमिका मुख्य रूप से नियम बनाने, रिसर्च को बढ़ावा देने और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने तक सीमित रहती थी। लेकिन AI के मामले में स्थिति अलग होती जा रही है।

AI का इस्तेमाल अब रक्षा, साइबर सुरक्षा, खुफिया एजेंसियों, सरकारी सेवाओं, बैंकिंग, स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण सार्वजनिक ढांचे में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सरकारें इस तकनीक पर पहले से कहीं ज्यादा निर्भर होती जा रही हैं।

यही वजह है कि कई देशों को चिंता है कि अगर भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीक पूरी तरह निजी कंपनियों के हाथ में रही, तो राष्ट्रीय हित प्रभावित हो सकते हैं।

केवल नियम बनाना काफी नहीं?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी कंपनी को रेगुलेट करना और उसमें हिस्सेदारी रखना दोनों अलग बातें हैं। सरकार नियमों के जरिए कंपनियों पर नियंत्रण तो रख सकती है, लेकिन हिस्सेदारी होने पर उसे कंपनी के कामकाज को बेहतर तरीके से समझने, रणनीतिक फैसलों की जानकारी पाने और लंबी अवधि के सहयोग का अवसर भी मिल सकता है।

हालांकि इतनी छोटी हिस्सेदारी से सरकार को कंपनी का संचालन करने का अधिकार नहीं मिलेगा, लेकिन उसका संस्थागत जुड़ाव जरूर मजबूत होगा।

AI Sovereignty की बढ़ती चर्चा

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में AI Sovereignty यानी AI संप्रभुता की अवधारणा तेजी से उभरी है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं रह गया है कि AI मॉडल किसने बनाया। सरकारें यह भी जानना चाहती हैं कि डेटा कहां रखा गया है, मॉडल किसके नियंत्रण में है और भविष्य में जरूरत पड़ने पर उस तकनीक तक पहुंच किसके पास होगी।

भारत में IndiaAI Mission और भारतीय भाषाओं पर आधारित AI मॉडल विकसित करने की पहल इसी सोच का हिस्सा मानी जा रही है। Sarvam AI भी इस दिशा में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। दूसरी ओर अमेरिका अपनी AI बढ़त बनाए रखने और रणनीतिक तकनीकों को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप रखने पर जोर दे रहा है।

राजनीतिक जोखिम भी बड़ी वजह

AI कंपनियों के सामने केवल तकनीकी चुनौतियां ही नहीं हैं। रोजगार पर असर, फेक कंटेंट, डेटा सुरक्षा, बाजार में बढ़ती एकाधिकार प्रवृत्ति और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी लगातार बहस हो रही है।

ऐसे में यदि सरकार किसी कंपनी में छोटी हिस्सेदार बनती है, तो दोनों पक्षों के बीच बेहतर तालमेल बन सकता है। इससे सरकार को यह भरोसा मिलेगा कि राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखा जाएगा, जबकि कंपनियों को भी नीतिगत स्थिरता मिलने की संभावना बढ़ेगी।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में AI से होने वाली आर्थिक कमाई का लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने के लिए भी ऐसे मॉडल अपनाए जा सकते हैं।

क्या भविष्य में यह आम बात बन जाएगी?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि हर देश AI कंपनियों में हिस्सेदारी लेगा। अधिकांश सरकारें अभी भी अनुदान, टैक्स छूट, सरकारी खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट जैसे पारंपरिक तरीकों पर ही काम कर रही हैं।

फिर भी OpenAI और Sarvam AI से जुड़ी चर्चाएं यह संकेत जरूर देती हैं कि AI को लेकर सरकारों की भूमिका तेजी से बदल रही है। आने वाले वर्षों में AI की प्रतिस्पर्धा केवल निजी कंपनियों के बीच नहीं होगी, बल्कि सरकारों और तकनीकी कंपनियों की साझेदारी भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती है।

यदि AI वास्तव में भविष्य की बिजली, इंटरनेट या दूरसंचार जैसी बुनियादी तकनीक बनता है, तो सरकारें केवल नियामक बनकर नहीं रहना चाहेंगी। वे इस तकनीक के विकास और उसके भविष्य में प्रत्यक्ष भागीदार बनने की कोशिश भी कर सकती हैं। 

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यूट्यूब की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं अमन चोपड़ा, जल्द लॉन्च होगा 'TAP'

टीवी न्यूज की दुनिया के चर्चित पत्रकार और ‘न्यूज18 इंडिया’ के सीनियर एडिटर एवं प्राइम टाइम शो 'देश नहीं झुकने देंगे' के होस्ट अमन चोपड़ा अब यूट्यूब की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं।

Last Modified:
Friday, 03 July, 2026
Aman Chopra

टीवी न्यूज की दुनिया के चर्चित पत्रकार और ‘न्यूज18 इंडिया’ के सीनियर एडिटर एवं प्राइम टाइम शो 'देश नहीं झुकने देंगे' के होस्ट अमन चोपड़ा अब यूट्यूब की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। उन्होंने 'TAP (The Aman Podcast)' नाम से अपना यूट्यूब चैनल लॉन्च करने की घोषणा की है।

अमन चोपड़ा ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा, "Let's TAP | New Beginning. एक TAP... और पूरा सच। कुछ नया, कुछ अलग। Coming Soon." इसके साथ उन्होंने एक पोस्टर भी जारी किया है। पोस्टर के मुताबिक यह प्लेटफॉर्म जल्द लॉन्च होगा।

बता दें कि अमन चोपड़ा ने करीब पांच साल पहले नेटवर्क18 समूह जॉइन किया था। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, वह अपने यूट्यूब चैनल के साथ आगे भी नेटवर्क18 से किसी न किसी रूप में जुड़े रहेंगे। हालांकि, उनकी भूमिका क्या होगी, इस बारे में फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।

अमन चोपड़ा को मीडिया में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी। इसके बाद उन्होंने राज्यसभा टीवी, न्यूज18, एबीपी न्यूज और जी न्यूज जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। पिछले करीब पांच वर्षों से वह न्यूज18 इंडिया में कार्यरत हैं।

राजनीतिक और चुनावी पत्रकारिता पर मजबूत पकड़ रखने वाले अमन चोपड़ा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इसके अलावा उन्होंने पब्लिक रिलेशन में पीजी डिप्लोमा और मास कम्युनिकेशन में एमए भी किया है।

कॉलेज के दिनों में अमन चोपड़ा थिएटर आर्टिस्ट भी रहे हैं और उन्होंने फ्रीलांस एंकरिंग भी की। अब टेलीविजन के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में भी अमन चोपड़ा अपनी नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। उनका नया यूट्यूब चैनल 'TAP (The Aman Podcast)' जल्द दर्शकों के बीच होगा।

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''Truecaller'' और ''Route Mobile'' की साझेदारी : सुरक्षित बिजनेस कम्युनिकेशन पर फोकस

इस साझेदारी के तहत रूट मोबाइल (Route Mobile) अपने एंटरप्राइज ग्राहकों को ट्रूकॉलर (Truecaller) के बिजनेस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगा।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
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ट्रूकॉलर (Truecaller) ने अपने बिजनेस मैसेजिंग (Business Messaging) प्लेटफॉर्म की वैश्विक पहुंच मजबूत करने के लिए रूट मोबाइल (Route Mobile) के साथ रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) की है। रूट मोबाइल (Route Mobile), प्रॉक्सिमस ग्लोबल (Proximus Global) का हिस्सा है और दुनिया भर के एंटरप्राइज ग्राहकों को क्लाउड कम्युनिकेशन (Cloud Communications) और डिजिटल एंगेजमेंट (Digital Engagement) समाधान उपलब्ध कराता है।

इस साझेदारी के तहत रूट मोबाइल (Route Mobile) अपने एंटरप्राइज ग्राहकों को ट्रूकॉलर (Truecaller) के बिजनेस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगा। इसका उद्देश्य कंपनियों को सुरक्षित, सत्यापित और इंटरैक्टिव मैसेजिंग (Secure, Verified and Interactive Messaging) के माध्यम से बड़े पैमाने पर ग्राहकों से जुड़ने में मदद करना है, क्योंकि व्यवसाय तेजी से भरोसेमंद डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों की ओर बढ़ रहे हैं।

इस सहयोग के जरिए कंपनियां ट्रूकॉलर (Truecaller) के दुनिया भर में मौजूद 50 करोड़ से अधिक मासिक सक्रिय यूजर्स (Monthly Active Users) तक कॉन्टेक्स्चुअल (Contextual) और रिच मीडिया (Rich Media) संदेश पहुंचा सकेंगी। इन संदेशों में तस्वीरें, दस्तावेज और वीडियो भी शामिल किए जा सकेंगे, जिससे ग्राहकों के साथ अधिक प्रभावी संवाद स्थापित किया जा सकेगा।

बिजनेस मैसेजिंग प्लेटफॉर्म (Business Messaging Platform) वन-वे (One-way) और टू-वे (Two-way) दोनों तरह के संचार को सपोर्ट करता है। इसकी प्रमुख सुविधाओं में सत्यापित बिजनेस पहचान (Verified Business Identities), क्लिकेबल लिंक (Clickable Links), स्मार्ट प्रायोरिटी नोटिफिकेशन (Smart Priority Notifications) और रीड रिसीट्स (Read Receipts) शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इन सुविधाओं से ग्राहकों की प्रतिक्रिया दर और एंगेजमेंट में सुधार होगा।

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बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने टाइनी सेनगुप्ता को सौंपी मार्केटिंग की कमान

बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने टाइनी सेनगुप्ता (Tiny Sengupta) को चीफ मार्केटिंग ऑफिसर नियुक्त किया है। वह बजाज (Bajaj) और मॉर्फी रिचर्ड्स ब्रांड्स की मार्केटिंग रणनीति का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
tinysengupta

बजाज इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (Bajaj Electricals Limited) ने टाइनी सेनगुप्ता (Tiny Sengupta) को चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 29 जून 2026 से प्रभावी हो गई है।

इस भूमिका में वह कंपनी के मार्केटिंग विभाग का नेतृत्व करेंगी और बजाज (Bajaj) तथा मॉर्फी रिचर्ड्स (Morphy Richards) ब्रांड्स के लिए इंटीग्रेटेड मार्केटिंग स्ट्रैटेजी (Integrated Marketing Strategy) और ब्रांड पोजिशनिंग (Brand Positioning) की जिम्मेदारी संभालेंगी।

टाइनी सेनगुप्ता (Tiny Sengupta) के पास हेल्थकेयर (Healthcare) और एफएमसीजी (FMCG) सेक्टर में 22 वर्षों से अधिक का मार्केटिंग अनुभव है। वह जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson), मैरिको (Marico), डाबर (Dabur), हेंकेल (Henkel) और जीएसके (GSK) जैसी कंपनियों के साथ काम कर चुकी हैं।

बजाज इलेक्ट्रिकल्स (Bajaj Electricals) से जुड़ने से पहले टाइनी सेनगुप्ता (Tiny Sengupta) जॉनसन एंड जॉनसन इंडिया (Johnson & Johnson India) में कंट्री डायरेक्टर – विजन केयर (Country Director, Vision Care) के पद पर कार्यरत थीं।

बजाज इलेक्ट्रिकल्स (Bajaj Electricals) के चेयरमैन शेखर बजाज (Shekhar Bajaj) ने कहा कि कंपनी के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है और उन्हें नेतृत्व टीम में टाइनी सेनगुप्ता (Tiny Sengupta) का स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि मार्केटिंग और ब्रांड निर्माण (Brand Building) में उनका अनुभव कंपनी की विकास यात्रा को गति देने और हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ (Managing Director & CEO) संजय सचदेवा (Sanjay Sachdeva) ने कहा कि टाइनी सेनगुप्ता (Tiny Sengupta) के नेतृत्व में कंपनी को भरोसा है कि बजाज (Bajaj) और मॉर्फी रिचर्ड्स (Morphy Richards) ब्रांड्स की ब्रांड इक्विटी (Brand Equity) और मजबूत होगी।

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सरकार की चिंता के बीच मेटा का बयान : अभी लाइव नहीं हुआ ''WhatsApp Username'' फीचर

व्हाट्सएप (WhatsApp) के Username फीचर को लेकर भारत सरकार की आपत्तियों के बीच मेटा (Meta) ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। कंपनी ने कहा कि फीचर अभी लाइव नहीं हुआ है।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
whatsappusername

व्हाट्सएप (WhatsApp) के नए यूजरनेम फीचर (Username Feature) को लेकर भारत सरकार और मेटा (Meta) के बीच चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में केंद्र सरकार ने मेटा (Meta) को नोटिस भेजकर भारत में इस फीचर का रोलआउट फिलहाल रोकने और तीन दिन के भीतर जवाब देने को कहा था।

सरकार को आशंका है कि यूजरनेम फीचर (Username Feature) का गलत इस्तेमाल कर साइबर ठग (Cyber Criminals) किसी बैंक (Bank), सरकारी विभाग (Government Department) या मशहूर व्यक्ति की पहचान बनाकर लोगों से धोखाधड़ी कर सकते हैं।

अब इस पूरे विवाद पर मेटा (Meta) ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। कंपनी का कहना है कि व्हाट्सएप (WhatsApp) का यूजरनेम फीचर (Username Feature) अभी तक किसी भी यूजर के लिए लाइव (Live) नहीं किया गया है। फिलहाल केवल यूजरनेम रिजर्वेशन (Username Reservation) की प्रक्रिया शुरू हुई है और अंतिम रोलआउट (Rollout) से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं।

मेटा (Meta) का दावा है कि इस फीचर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि फर्जी पहचान (Fake Identity) बनाना आसान नहीं होगा। कंपनी ने यह भी कहा कि सरकार की चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है और वह अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रही है।

मेटा (Meta) ने स्पष्ट किया कि व्हाट्सएप (WhatsApp) का यूजरनेम फीचर (Username Feature) अभी आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है। कंपनी के मुताबिक, फिलहाल केवल शुरुआती चरण में यूजरनेम रिजर्वेशन (Username Reservation) चल रही है। इसलिए सरकार को जिस तरह की साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) की आशंका है, उससे निपटने के लिए पहले से सुरक्षा उपाय तैयार किए गए हैं।

कंपनी के अनुसार, यूजरनेम फीचर (Username Feature) में कई सिक्योरिटी लेयर्स (Security Layers) जोड़ी गई हैं। बड़े नेताओं, सरकारी संस्थानों, ब्रांड्स (Brands) और मशहूर हस्तियों के नाम पहले से रिजर्व (Reserved) रहेंगे और कोई भी यूजर ऐसे यूजरनेम नहीं ले सकेगा। इसके अलावा, एक जैसे दिखने वाले या भ्रम पैदा करने वाले यूजरनेम (Usernames) की अतिरिक्त जांच की जाएगी।

बार-बार यूजरनेम गेस (Username Guess) या रिजर्व करने की कोशिश करने वाले अकाउंट्स (Accounts) को ब्लॉक किया जाएगा, जबकि संदिग्ध गतिविधियों पर एआई (Artificial Intelligence-AI) आधारित सिस्टम लगातार नजर रखेगा।

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ज़ी एंटरटेनमेंट ने हासिल किए बुंडेसलीगा के भारत प्रसारण अधिकार

ज़ी एंटरटेनमेंट ने अगले पांच वर्षों के लिए बुंडेसलीगा (Bundesliga) के भारत प्रसारण और डिजिटल अधिकार हासिल किए हैं। मुकाबले ज़ी5 (ZEE5) और यूनाइट8 स्पोर्ट्स (Unite8 Sports) पर दिखाए जाएंगे।

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
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ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment Enterprises Ltd.-ZEEL) ने अपने स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो (Sports Portfolio) का विस्तार करते हुए जर्मन फुटबॉल लीग "बुंडेसलीगा (Bundesliga)" के भारत में अगले पांच वर्षों के लिए विशेष प्रसारण (Broadcast) और डिजिटल (Digital) अधिकार हासिल कर लिए हैं।

इस समझौते के तहत "2026-27 सीजन" से बुंडेसलीगा (Bundesliga) के सभी मुकाबले विशेष रूप से "ज़ी5 (ZEE5)" और "यूनाइट8 स्पोर्ट्स (Unite8 Sports)" पर प्रसारित किए जाएंगे। दर्शकों को लाइव मैचों के साथ हाइलाइट्स (Highlights), प्री-मैच (Pre-match), पोस्ट-मैच (Post-match) शो और अन्य विशेष कार्यक्रम भी देखने को मिलेंगे।

यह साझेदारी ज़ी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) की वैश्विक खेलों में बढ़ती मौजूदगी का महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे पहले कंपनी फीफा (FIFA) के साथ भी रणनीतिक साझेदारी कर चुकी है। बुंडेसलीगा (Bundesliga) के अधिकार मिलने से ज़ी5 (ZEE5) के सब्सक्राइबर्स को यूरोप की सबसे लोकप्रिय और प्रतिस्पर्धी फुटबॉल लीग का कंटेंट मिलेगा, जिससे प्लेटफॉर्म का स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो और मजबूत होगा।

यूनाइट8 स्पोर्ट्स (Unite8 Sports) के चीफ बिजनेस ऑफिसर (Chief Business Officer) भावेश जनावलेकर (Bavesh Janavlekar) ने कहा कि बुंडेसलीगा (Bundesliga) दुनिया की सबसे रोमांचक फुटबॉल लीगों में से एक है, जहां शानदार क्लब, युवा प्रतिभाएं और जबरदस्त फैन कल्चर देखने को मिलता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय दर्शकों को हैरी केन (Harry Kane), जमाल मुसियाला (Jamal Musiala), माइकल ओलिसे (Michael Olise) और जोशुआ किमिच (Joshua Kimmich) जैसे विश्वस्तरीय खिलाड़ियों के मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा।

बुंडेसलीगा मीडिया (Bundesliga Media) के चीफ कमर्शियल ऑफिसर (Chief Commercial Officer) पीयर नौबर्ट (Peer Naubert) ने कहा कि भारत उनके लिए केवल एक बाजार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारी का महत्वपूर्ण केंद्र है। उनका उद्देश्य केवल मैचों का प्रसारण नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल ढांचे को मजबूत करना और नई प्रतिभाओं को अवसर देना भी है। उन्होंने कहा कि ज़ी (Z) के व्यापक नेटवर्क और स्थानीय विशेषज्ञता से बुंडेसलीगा (Bundesliga) करोड़ों भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों तक पहुंचेगी।

बुंडेसलीगा (Bundesliga) पिछले कई वर्षों से भारत में युवा विकास कार्यक्रमों, क्लब एक्टिवेशन (Club Activation) और फैन एंगेजमेंट (Fan Engagement) अभियानों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। पिछले चार सीजनों में भारत में लीग के प्रशंसकों की संख्या 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है, जो देश में फुटबॉल की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।

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ज़ी एंटरटेनमेंट ने सुदीप नागपुरकर को चीफ सेल्स ऑफिसर नियुक्त किया

ज़ी एंटरटेनमेंट (Zee Entertainment) ने सुदीप नागपुरकर (Sudeep Nagpurkar) को चीफ सेल्स ऑफिसर – सोशल प्लेटफॉर्म्स, क्रिएटर इकोनॉमी एंड पार्टनरशिप्स नियुक्त किया है।

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
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ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (Zee Entertainment Enterprises) ने सुदीप नागपुरकर (Sudeep Nagpurkar) को "चीफ सेल्स ऑफिसर – सोशल प्लेटफॉर्म्स, क्रिएटर इकोनॉमी एंड पार्टनरशिप्स (Chief Sales Officer – Social Platforms, Creator Economy & Partnerships)" नियुक्त किया है। वह नोएडा (Noida) से कार्य करेंगे और 'ज़ेड' (Z) में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर – एडवरटाइजमेंट रेवेन्यू (Chief Operating Officer – Advertisement Revenue) संदीप मेहरोत्रा (Sandeep Mehrotra) को रिपोर्ट करेंगे।

नियुक्ति पर संदीप मेहरोत्रा (Sandeep Mehrotra) ने कहा कि तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में कंटेंट (Content), टेक्नोलॉजी (Technology) और कॉमर्स (Commerce) का मेल दर्शकों की भागीदारी और कमाई के नए अवसर पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी भविष्य के लिए तैयार ऐसा रेवेन्यू इकोसिस्टम (Revenue Ecosystem) विकसित करना चाहती है, जो क्रिएटर इकोनॉमी (Creator Economy) और सोशल प्लेटफॉर्म्स (Social Platforms) से उभर रहे अवसरों का बेहतर लाभ उठा सके।

उन्होंने विश्वास जताया कि रणनीतिक साझेदारियां विकसित करने और मोनेटाइजेशन (Monetization) रणनीतियां बनाने में सुदीप का अनुभव कंपनी की डिजिटल क्षमताओं को और मजबूत करेगा। अपनी नियुक्ति पर सुदीप नागपुरकर (Sudeep Nagpurkar) ने कहा कि क्रिएटर इकोनॉमी (Creator Economy) और सोशल प्लेटफॉर्म्स (Social Platforms) दर्शकों के कंटेंट खोजने, देखने और उससे जुड़ने के तरीके को बदल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह ब्रांड्स के लिए उपभोक्ताओं से अधिक प्रामाणिक, प्रासंगिक और परिणाम-आधारित तरीके से जुड़ने का बड़ा अवसर है। उन्होंने कहा कि वह क्रिएटर्स (Creators), प्लेटफॉर्म्स (Platforms), विज्ञापनदाताओं (Advertisers) और अन्य साझेदारों के साथ मिलकर नए मोनेटाइजेशन मॉडल विकसित करने, नए रेवेन्यू स्रोत तैयार करने और दीर्घकालिक मूल्य देने वाला इकोसिस्टम बनाने के लिए उत्साहित हैं।

सुदीप नागपुरकर (Sudeep Nagpurkar) के पास कंज्यूमर टेक्नोलॉजी (Consumer Technology), बी2बी सास (B2B SaaS), रिटेल (Retail) और एफएमसीजी (FMCG) जैसे क्षेत्रों में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इससे पहले वह गूगल इंडिया (Google India) में हेड ऑफ इंडस्ट्री – एफएमसीजी (Head of Industry – FMCG) के पद पर कार्यरत थे।

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