WhatsApp ला रहा Noise Cancellation फीचर: बैकग्राउंड शोर होगा कम

WhatsApp नया Noise Cancellation फीचर टेस्ट कर रहा है, जो कॉल के दौरान बैकग्राउंड शोर कम करेगा। यह फीचर फिलहाल बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध है और जल्द सभी यूजर्स तक पहुंच सकता है।

Last Modified:
Tuesday, 07 April, 2026
WhatsApp


मैसेजिंग ऐप WhatsApp अपने यूजर्स के लिए एक नया Noise Cancellation फीचर टेस्ट कर रहा है, जिससे वॉयस और वीडियो कॉल के दौरान बैकग्राउंड शोर को कम किया जा सकेगा। फिलहाल यह फीचर कुछ बीटा यूजर्स के लिए उपलब्ध है और आने वाले समय में इसे सभी यूजर्स के लिए जारी किया जा सकता है।

इस फीचर का मुख्य उद्देश्य कॉल क्वालिटी को बेहतर बनाना है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां आसपास शोर ज्यादा होता है। इसके जरिए यूजर की आवाज को प्राथमिकता दी जाती है और बाकी अनचाही आवाजों को कम कर दिया जाता है, जिससे बातचीत अधिक स्पष्ट हो जाती है। यह फीचर रियल टाइम प्रोसेसिंग पर आधारित है, जो आसपास की आवाज जैसे ट्रैफिक, हवा या भीड़ की ध्वनि को पहचानकर उन्हें फिल्टर करता है। इसके बाद सिस्टम यूजर की आवाज को अलग करके साफ रूप में सामने वाले तक पहुंचाता है।

पूरा प्रोसेस ऑटोमैटिक तरीके से होता है, जिससे यूजर को किसी अतिरिक्त सेटिंग की जरूरत नहीं पड़ती। जिन यूजर्स को यह फीचर मिला है, वे इसे कॉल सेटिंग में देख सकते हैं। आमतौर पर यह फीचर डिफॉल्ट रूप से ऑन रहता है, लेकिन जरूरत के अनुसार इसे मैन्युअली बंद भी किया जा सकता है। कॉल के दौरान ही इसका विकल्प उपलब्ध रहता है, जिससे यूजर आसानी से इसे कंट्रोल कर सकता है।

इस फीचर से खासतौर पर उन लोगों को फायदा होगा जो बाहर या शोर वाले माहौल में काम करते हैं। इससे कॉल के दौरान ध्यान भटकाने वाली आवाजें कम होंगी और बातचीत अधिक सहज और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल यह फीचर एंड्रॉयड के कुछ बीटा यूजर्स के लिए जारी किया गया है और टेस्टिंग के बाद इसे व्यापक स्तर पर रोलआउट किया जाएगा। उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में ज्यादा यूजर्स को इसका फायदा मिलना शुरू हो जाएगा।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

तालोद फूड्स ने वैभव पटेल को बनाया ''हेड-ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन''

तालोद फूड्स ने वैभव पटेल (Vaibhav Patel) को हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन नियुक्त किया है। इससे पहले वह टेक्सपिन बेयरिंग्स (Texspin Bearings) में मैनेजर – ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन एवं पीआर थे।

Last Modified:
Tuesday, 07 July, 2026
talodfoods

तालोद फूड्स (Talod Foods) ने वैभव पटेल (Vaibhav Patel) को हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन (Head – Branding & Communication) नियुक्त किया है। कंपनी ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से उनकी नियुक्ति की घोषणा की।

अपने पोस्ट में कंपनी ने कहा, "वैभव पटेल (Vaibhav Patel), तालोद फूड्स (Talod Foods) में हेड – ब्रांडिंग एवं कम्युनिकेशन के रूप में आपका स्वागत है। हमें विश्वास है कि आपका अनुभव, नई सोच और रणनीतिक दृष्टिकोण तालोद ब्रांड को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।"

नई भूमिका में वैभव पटेल (Vaibhav Patel) कंपनी की ब्रांडिंग, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और ब्रांड रणनीति से जुड़े कार्यों का नेतृत्व करेंगे। तालोद फूड्स (Talod Foods) से पहले वैभव पटेल (Vaibhav Patel) टेक्सपिन बेयरिंग्स (Texspin Bearings) में मैनेजर – ब्रांडिंग, कम्युनिकेशन एवं पीआर (Manager – Branding, Communication & PR) के पद पर कार्यरत थे।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

AI युग में बदल रहा डिजिटल विज्ञापन : क्लिक नहीं अब 'Citation' बनेगा ताकत

भारत में AI प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन विज्ञापन बाजार अभी शुरुआती चरण में है। आने वाले समय में क्लिक नहीं, बल्कि AI Citation और भरोसा ब्रांड्स की नई पहचान बनेंगे।

Last Modified:
Monday, 06 July, 2026
aiworld

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन AI आधारित विज्ञापन बाजार अभी शुरुआती दौर में है। दिलचस्प बात यह है कि जिस प्लेटफॉर्म पर भारतीय उपयोगकर्ता सबसे अधिक समय बिता रहे हैं, वहां फिलहाल विज्ञापन देने की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। दूसरी ओर, कम उपयोग वाले प्लेटफॉर्म पहले ही विज्ञापन से कमाई शुरू कर चुके हैं। यही वजह है कि भारत में AI उपयोग और AI विज्ञापन बाजार के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।

कॉमस्कोर (Comscore) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में डेस्कटॉप पर AI विजिटेशन अवधि का 86% और मोबाइल पर 83% हिस्सा ओपनएआई (OpenAI) के प्लेटफॉर्म के पास है। इसके मुकाबले गूगल जेमिनी (Google Gemini) की हिस्सेदारी डेस्कटॉप पर केवल 4% और मोबाइल पर 9% है। माइक्रोसॉफ्ट कोपायलट (Microsoft Copilot), एंथ्रोपिक (Anthropic), परप्लेक्सिटी (Perplexity), डीपसीक (DeepSeek) और मेटा एआई (Meta AI) बाकी हिस्सेदारी साझा करते हैं। सबसे अधिक AI उपयोग 18 से 24 वर्ष के युवा कर रहे हैं, जो बातचीत, इमेज और वीडियो तैयार करने जैसे कार्यों के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं।

हालांकि उपयोगकर्ताओं का इतना बड़ा आधार होने के बावजूद ओपनएआई के पास भारत में अभी ऐसा कोई विज्ञापन प्लेटफॉर्म नहीं है, जहां ब्रांड सीधे विज्ञापन खरीद सकें। कॉमस्कोर एपीएसी के कंट्री मैनेजर विवेक जायसवाल का कहना है कि भारत में AI अभी प्रत्यक्ष विज्ञापन माध्यम नहीं बना है, लेकिन यह भविष्य के डिजिटल विज्ञापन की दिशा जरूर तय कर रहा है। फिलहाल पूरा उद्योग यह समझने में लगा है कि AI पर उपयोगकर्ताओं की मंशा (Intent) को विज्ञापन अवसरों में कैसे बदला जाए।

दूसरी ओर, डब्ल्यूपीपी मीडिया (WPP Media) का अनुमान है कि भारत का AI आधारित विज्ञापन बाजार 2026 में 2.5 अरब डॉलर से अधिक का हो जाएगा। फिलहाल इसका सबसे बड़ा लाभ गूगल को मिल रहा है, क्योंकि उसके AI Overviews पहले से ही सर्च इंजन के साथ जुड़े हुए हैं और उसकी विज्ञापन प्रणाली सक्रिय है। यानी फिलहाल विज्ञापन का पैसा उसी प्लेटफॉर्म तक पहुंच रहा है, जिसके पास विज्ञापन इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, भले ही उसके पास सबसे अधिक AI उपयोगकर्ता न हों।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI युग में अब केवल क्लिक या सर्च रैंकिंग महत्वपूर्ण नहीं रहेगी, बल्कि AI द्वारा दिए जाने वाले उत्तरों में किसी ब्रांड या वेबसाइट का उल्लेख (Citation) होना नई प्रतिस्पर्धा का आधार बन रहा है। कॉमस्कोर के अध्ययन में मनोरंजन श्रेणी में विकिपीडिया (Wikipedia), यूट्यूब (YouTube), रिटेल में अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) और वित्तीय सेवाओं में क्लियरटैक्स (ClearTax) जैसे प्लेटफॉर्म AI उत्तरों में सबसे अधिक उद्धृत किए जा रहे हैं।

इप्सोस (Ipsos) की विशेषज्ञ शालिनी सिन्हा का मानना है कि AI को नए विज्ञापन चैनल के बजाय मौजूदा मार्केटिंग रणनीति को मजबूत करने वाले उपकरण के रूप में देखना चाहिए। उनके अनुसार भारतीय उपभोक्ता केवल AI की सिफारिशों के आधार पर खरीदारी नहीं करते, बल्कि वे भरोसेमंद और पहचान वाले ब्रांडों को प्राथमिकता देते हैं। इसलिए ब्रांड निर्माण, विश्वसनीयता और उपभोक्ता विश्वास की भूमिका आगे भी उतनी ही महत्वपूर्ण रहेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में AI विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र अभी विकसित हो रहा है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा केवल विज्ञापन दिखाने की नहीं होगी, बल्कि AI के उत्तरों में जगह बनाने और उपभोक्ताओं के विश्वास को हासिल करने की होगी। यही तय करेगा कि भविष्य में भारत के डिजिटल विज्ञापन बाजार का सबसे बड़ा हिस्सा किसके पास जाएगा।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

''व्हाट्सएप यूजरनेम फीचर'' पर सरकार और मेटा के बीच हुई अहम बैठक

व्हाट्सएप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर को लेकर मेटा (Meta) के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की।

Last Modified:
Saturday, 04 July, 2026
metausernameraw

व्हाट्सएप (WhatsApp) के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर (Username Feature) को लेकर केंद्र सरकार और मेटा (Meta) के बीच चर्चा तेज हो गई है। गुरुवार को मेटा (Meta) के प्रतिनिधियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology-MeitY) के अधिकारियों से मुलाकात की। यह बैठक सरकार द्वारा कंपनी को नोटिस जारी किए जाने के एक दिन बाद हुई।

पीटीआई (PTI) के हवाले से सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय ने मेटा (Meta) को तलब कर यूजरनेम फीचर (Username Feature) और उससे जुड़ी संभावित सुरक्षा चुनौतियों पर स्पष्टीकरण मांगा। बैठक के दौरान अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना यह फीचर लागू किया जाता है, तो इसका दुरुपयोग साइबर अपराधी कर सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार, मेटा (Meta) को तीन दिनों के भीतर विस्तृत लिखित जवाब देने के लिए कहा गया है और कंपनी निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना औपचारिक उत्तर सौंपेगी।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने बुधवार को मेटा (Meta) को नोटिस जारी कर निर्देश दिया था कि भारत में व्हाट्सएप (WhatsApp) का यूजरनेम फीचर फिलहाल लॉन्च न किया जाए। सरकार ने कहा था कि जब तक इस विषय पर परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती और सरकार संतुष्ट नहीं हो जाती, तब तक इस फीचर का रोलआउट रोक कर रखा जाए।

सरकार का कहना है कि यदि व्हाट्सएप (WhatsApp) यूजर्स को मोबाइल नंबर के बजाय यूजरनेम के जरिए जोड़ने की सुविधा देता है, तो इससे ऑनलाइन फ्रॉड (Online Fraud), फिशिंग (Phishing), डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और फर्जी पहचान (Impersonation) के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।

नोटिस में सरकार ने मेटा (Meta) से यह भी पूछा है कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) और उससे जुड़े इंटरमीडियरी नियमों (Intermediary Rules) के तहत कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। सरकार का मानना है कि यह फीचर पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना साइबर अपराध (Cybercrime) के जोखिम को बढ़ा सकता है।

सरकार ने यह भी याद दिलाया कि एक महत्वपूर्ण सोशल मीडिया इंटरमीडियरी (Significant Social Media Intermediary) के रूप में व्हाट्सएप (WhatsApp) पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) के तहत निर्धारित ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) दायित्व लागू होते हैं। इनमें यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित कदम उठाना शामिल है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

माइक्रोसॉफ्ट में फिर छंटनी की तैयारी: हजारों एंप्लॉयीज हो सकते हैं प्रभावित

माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) अगले सप्ताह नई छंटनी का ऐलान कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी 2.5% से कम एंप्लॉयीज की नौकरी खत्म करने की तैयारी में है।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
microsoftlayoff

दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) एक बार फिर एंप्लॉयीज की छंटनी (Layoffs) की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अपने कुल एंप्लॉयीज के 2.5 प्रतिशत से कम हिस्से की नौकरी खत्म कर सकती है।

हालांकि यह प्रतिशत कम है, लेकिन माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के वैश्विक कर्मचारी आधार को देखते हुए इससे हजारों एंप्लॉयीज प्रभावित हो सकते हैं। बताया जा रहा है कि कंपनी अगले सप्ताह तक इस फैसले का आधिकारिक ऐलान कर सकती है। फिलहाल माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने इन रिपोर्ट्स की पुष्टि नहीं की है।

रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के अनुसार, 30 जून तक माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) के पास दुनिया भर में करीब 2 लाख 28 हजार फुल-टाइम (Full-time) कर्मचारी थे। यदि कंपनी 2.5 प्रतिशत से कम कर्मचारियों की भी छंटनी करती है, तो हजारों लोगों की नौकरी जा सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने कर्मचारियों को निकाला जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स (Business Units) के कर्मचारी इस फैसले की चपेट में आ सकते हैं।

बताया जा रहा है कि इस बार सबसे ज्यादा असर सेल्स (Sales) और कंसल्टिंग (Consulting) डिवीजन पर देखने को मिल सकता है। इन विभागों में कई पद समाप्त किए जा सकते हैं। कंपनी अपने खर्च को कम करने और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी के तहत कर्मचारियों की संख्या घटाने की योजना बनाई जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) का गेमिंग कारोबार एक्सबॉक्स (Xbox) भी इस छंटनी से अछूता नहीं रहेगा। एक्सबॉक्स (Xbox) टीम में भी कर्मचारियों की संख्या कम किए जाने की संभावना है। इससे पहले भी खबरें आई थीं कि कंपनी गेमिंग बिजनेस में लागत कम करने के लिए मार्केटिंग बजट (Marketing Budget) और अन्य खर्चों में कटौती कर रही है। हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) ने कई देशों में एक्सबॉक्स (Xbox) कंसोल की कीमतें भी बढ़ाई थीं।

यह पहली बार नहीं है जब माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) एंप्लॉयीज की संख्या कम करने जा रही है। जुलाई 2025 में कंपनी ने अपने वैश्विक एंप्लॉयीज में करीब 4 प्रतिशत की कटौती का ऐलान किया था।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

NEET-UG परीक्षा के बाद टेलीग्राम ने भारत में बहाल किया मैसेज एडिट फीचर

टेलीग्राम (Telegram) ने भारत में अपना मैसेज एडिट फीचर दोबारा शुरू कर दिया है। NEET-UG पुनर्परीक्षा के दौरान गलत सूचना रोकने के लिए इस सुविधा पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।

Last Modified:
Thursday, 02 July, 2026
telegramban

टेलीग्राम (Telegram) ने भारत में अपने मैसेज एडिट फीचर (Message Edit Feature) को फिर से बहाल कर दिया है। यह सुविधा 30 जून को समाप्त हुई उस अस्थायी अवधि के बाद दोबारा शुरू की गई है, जिसके तहत NEET-UG पुनर्परीक्षा (Re-examination) के दौरान गलत सूचना (Misinformation) के प्रसार को रोकने के लिए मैसेज एडिट करने पर रोक लगाई गई थी।

टेलीग्राम (Telegram) ने 16 जून को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (National Testing Agency-NTA) के अनुरोध पर मैसेज एडिट फीचर को बंद कर दिया था। इससे पहले NEET-UG परीक्षा पेपर लीक (Paper Leak) विवाद के बाद यह कदम उठाया गया था। हालांकि 22 जून को टेलीग्राम (Telegram) की सेवाएं बहाल कर दी गई थीं, लेकिन कंपनी को 30 जून तक मैसेज एडिट फीचर बंद रखने के निर्देश दिए गए थे।

सरकार का मानना था कि मैसेज एडिट फीचर का दुरुपयोग कर पुराने संदेशों में बदलाव करके यह गलत दावा किया जा सकता है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र (Question Paper) लीक हुआ था। पुराने पोस्ट में बदलाव रोककर फर्जी सबूत (Fake Evidence) और भ्रामक दावों के प्रसार को सीमित करने की कोशिश की गई।

अब प्रतिबंध अवधि समाप्त होने के बाद भारत में टेलीग्राम (Telegram) यूजर्स पहले की तरह अपने चैट्स (Chats) में संदेशों को एडिट कर सकेंगे। इस अस्थायी प्रतिबंध को न्यायिक समर्थन भी मिला था।

23 जून को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्र सरकार के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा था कि टेलीग्राम (Telegram) जैसे प्लेटफॉर्म पर बड़ी मात्रा में कंटेंट तेजी से प्रसारित किया जा सकता है और पुनर्परीक्षा के दौरान इसका दुरुपयोग कर लीक सामग्री या गलत जानकारी फैलाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह मामला इस बात का उदाहरण भी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (Digital Platforms) की सुविधाओं को बनाए रखने और महत्वपूर्ण सार्वजनिक परीक्षाओं को गलत सूचना से सुरक्षित रखने के बीच संतुलन बनाना सरकारों के लिए लगातार बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

भारत के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय और गूगल इंडिया की साझेदारी

पर्यटन मंत्रालय (Ministry of Tourism) ने गूगल इंडिया (Google India) के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे भारत के डिजिटल टूरिज्म इकोसिस्टम और पर्यटन प्रचार को नई मजबूती मिलेगी।

Last Modified:
Wednesday, 01 July, 2026
gogoleindia

पर्यटन मंत्रालय (Ministry of Tourism) ने भारत के डिजिटल टूरिज्म (Digital Tourism) इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए गूगल इंडिया (Google India) के साथ एक समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding-MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, यह किसी वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी (Global Technology Company) के साथ उसकी पहली व्यापक साझेदारी है।

इस साझेदारी का उद्देश्य पर्यटन विकास से जुड़ी मंत्रालय की योजनाओं को गूगल (Google) की तकनीक, डेटा इनसाइट्स (Data Insights) और डिजिटल एंगेजमेंट (Digital Engagement) विशेषज्ञता के साथ जोड़ना है, ताकि यात्रियों के लिए भारत के विभिन्न पर्यटन स्थलों की खोज, यात्रा योजना और अनुभव को बेहतर बनाया जा सके।

समझौते को तीन प्रमुख स्तंभों में विभाजित किया गया है। पहला स्तंभ ट्रैवल इनसाइट्स (Travel Insights) पर आधारित है, जिसके तहत गूगल (Google) ऐसे डैशबोर्ड उपलब्ध कराएगा जो वैश्विक यात्रा मांग (Global Travel Demand) और उभरते पर्यटन रुझानों (Tourism Trends) की जानकारी देंगे। इससे मंत्रालय बदलती यात्रियों की पसंद के अनुसार तेजी से डेटा-आधारित निर्णय ले सकेगा।

दूसरा स्तंभ डिजिटल डिस्कवरी (Digital Discovery) पर केंद्रित है। इसके तहत इनक्रेडिबल इंडिया (Incredible India) ऐप में गूगल मैप्स (Google Maps) के साथ बेहतर इंटीग्रेशन (Integration) की संभावनाओं पर काम किया जाएगा, जिससे यात्रियों को नेविगेशन (Navigation) और पर्यटन स्थलों की जानकारी अधिक सहज तरीके से मिल सके।

साथ ही यूट्यूब (YouTube) के माध्यम से भारत से जुड़े प्रामाणिक यात्रा कंटेंट (Travel Content) का निर्माण और वैश्विक स्तर पर प्रसार किया जाएगा, जिससे इनक्रेडिबल इंडिया (Incredible India) चैनल की पहुंच बढ़ाई जा सके।

तीसरा स्तंभ क्षमता निर्माण (Capacity Building) से जुड़ा है। गूगल (Google) मंत्रालय के अधिकारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) और कैंपेन मैनेजमेंट (Campaign Management) पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि भारत के पर्यटन प्रचार को डिजिटल माध्यमों पर और प्रभावी बनाया जा सके।

सरकार का मानना है कि तकनीक, डेटा और डिजिटल स्टोरीटेलिंग (Digital Storytelling) के बेहतर उपयोग से भारत का पर्यटन इकोसिस्टम बदलती वैश्विक यात्रा प्रवृत्तियों के अनुरूप अधिक सक्षम और प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

गूगल इंडिया का ऐलान: कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बिजनेस का नेतृत्व करेंगी रुक्मिणी वैष

गूगल इंडिया (Google India) ने रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) को हेड -कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स नियुक्त किया है। वह AI आधारित डिवाइस इकोसिस्टम से जुड़ी साझेदारियों और विकास का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Tuesday, 30 June, 2026
rukminivaish

गूगल इंडिया (Google India) ने रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) को हेड – कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Head – Consumer Electronics) नियुक्त किया है। वह कंपनी के कंज्यूमर डिवाइस (Consumer Devices) इकोसिस्टम से जुड़ी साझेदारियों और कारोबार के विस्तार का नेतृत्व करेंगी, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) तेजी से हार्डवेयर अनुभव का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

इससे पहले वह चार वर्षों से अधिक समय तक गूगल (Google) के लार्ज कस्टमर सॉल्यूशंस (Large Customer Solutions) बिजनेस में इंडस्ट्री मैनेजर (Industry Manager) के रूप में कार्यरत थीं। इस दौरान उन्होंने कंज्यूमर टेक्नोलॉजी (Consumer Technology) और रिटेल (Retail) सेक्टर से जुड़े ब्रांड्स के साथ डिजिटल रणनीतियों और प्रीमियमाइजेशन (Premiumisation) पहलों पर काम किया।

अपनी नई जिम्मेदारी पर रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) ने कहा कि स्मार्टफोन (Smartphones) और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics) उद्योग तेजी से बदल रहा है और हार्डवेयर अब उपभोक्ताओं के लिए AI का प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वह गूगल (Google) की मौजूदा साझेदारियों को आगे बढ़ाने और ब्रांड्स को तकनीकी बदलाव के अगले चरण में सहयोग देने के लिए उत्साहित हैं।

गूगल (Google) से पहले रुक्मिणी वैष (Rukmini Vaish) वर्ष 2022 तक ग्रोहे (GROHE) में हेड – ब्रांड एंड डिजिटल (Head of Brand & Digital) के पद पर कार्यरत थीं। वहां उन्होंने ब्रांडिंग, मार्केटिंग कम्युनिकेशन (Marketing Communications) और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (Direct-to-Consumer) पहलों का नेतृत्व किया।

उन्होंने हॉस्पिटैलिटी (Hospitality) वेंचर ट्रैवलफोक (TravelFolk) की स्थापना भी की और पालतू जानवरों के अनुकूल यात्रा प्लेटफॉर्म कॉलरफोक (CollarFolk) की सह-संस्थापक (Co-founder) भी रहीं। अपने करियर के शुरुआती वर्षों में उन्होंने एक्जो नोबेल इंडिया (AkzoNobel India) के डुलक्स पेंट्स (Dulux Paints) ब्रांड और वोडाफोन इंडिया (Vodafone India) में भी विभिन्न मार्केटिंग भूमिकाओं में काम किया।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

पीएम मोदी से मिले एमेजॉन के CEO एंडी जेसी: भारत में 48 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान

एमेजॉन (Amazon) ने 2026 से 2030 के बीच भारत में 48 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी AI, क्लाउड, AWS, ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करेगी।

Last Modified:
Friday, 26 June, 2026
modi

एमेजॉन (Amazon) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी (Andy Jassy) ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत के प्रति कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराते हुए वर्ष 2026 से 2030 के बीच देश में 48 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की।

कंपनी ने बताया कि इस निवेश के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए 2030 तक अतिरिक्त 13 अरब डॉलर निवेश किए जाएंगे। इसके साथ ही 2026-2030 की अवधि में भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर अमेजन (Amazon) का कुल नियोजित निवेश 21 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा।

एमेजॉन के अनुसार, यह निवेश 'अमेजन वेब सर्विसेज' (Amazon Web Services-AWS) के मुंबई (Mumbai) और हैदराबाद (Hyderabad) स्थित डेटा सेंटरों की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा। इससे स्टार्टअप्स, उद्यमों और सरकारी संस्थाओं को कस्टम AI चिप्स, मैनेज्ड AI सर्विसेज, क्लाउड टेक्नोलॉजी और डेवलपर टूल्स तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।

कंपनी ने यह भी कहा कि AI और क्लाउड के अलावा वह अपने ई-कॉमर्स (E-commerce) और क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) कारोबार को मजबूत करने के लिए भी बड़े पैमाने पर निवेश जारी रखेगी।

इसी योजना के तहत एमेजॉन इस वर्ष देशभर में 20 से अधिक नए फुलफिलमेंट सेंटर (Fulfilment Centres) और 100 से ज्यादा लास्ट-माइल डिलीवरी स्टेशन (Last-Mile Delivery Stations) शुरू करेगा। कंपनी का लक्ष्य विशेष रूप से टियर-3 और टियर-4 शहरों में अपनी डिलीवरी क्षमता और नेटवर्क को मजबूत करना है।

कंपनी का मानना है कि यह निवेश भारत के डिजिटल इकोसिस्टम, AI नवाचार, क्लाउड सेवाओं और ई-कॉमर्स इंफ्रास्ट्रक्चर को गति देने के साथ-साथ रोजगार और कारोबारी अवसरों को भी बढ़ावा देगा।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'जियोस्टार' ने लॉन्च किया AI कंटेंट प्लेटफॉर्म JAMS

'जियोस्टार' ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं AGM में JAMS लॉन्च किया । यह AI आधारित कंटेंट प्रोडक्शन प्लेटफॉर्म आइडिया से लेकर वीडियो, ऑडियो और फाइनल प्रोडक्शन तक पूरे क्रिएटिव प्रोसेस को सपोर्ट करेगा।

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
jams

'जियोस्टार' (JioStar) ने कंटेंट निर्माण के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए JAMS (JioStar GenAI Media Studios) लॉन्च किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में पेश किए गए इस प्लेटफॉर्म को एक एंड-टू-एंड AI नेटिव कंटेंट प्रोडक्शन पाइपलाइन के रूप में विकसित किया गया है, जो आइडियेशन, स्टोरीटेलिंग, इमेज, ऑडियो, वीडियो और फाइनल प्रोडक्शन तक पूरे क्रिएटिव वर्कफ्लो को सपोर्ट करेगा।

प्लेटफॉर्म का परिचय देते हुए 'आकाश अंबानी' (Akash Ambani) ने कहा कि JAMS भारत के लिए तैयार किया गया एक संपूर्ण AI कंटेंट इकोसिस्टम है, जो कंटेंट निर्माण की पूरी प्रक्रिया को एक ही मंच पर उपलब्ध कराएगा।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऐसे नए क्रिएटिव टेक्नोलॉजिस्ट्स तैयार करना है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्टोरीटेलिंग को जोड़कर भारत और वैश्विक दर्शकों के लिए नई तरह का कंटेंट बना सकें।

मीडिया उद्योग में AI का उपयोग अब तक कंटेंट रिकमेंडेशन, सर्च और वर्कफ्लो ऑटोमेशन तक सीमित रहा है, लेकिन JAMS के जरिए 'जियोस्टार' (JioStar) सीधे कंटेंट क्रिएशन प्रोसेस में AI को शामिल करने जा रहा है।

गौरतलब है कि कंपनी ने फरवरी में एमी अवॉर्ड विजेता 'स्टीफन बुजाज' (Stephan Bugaj) को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, GenAI Content & Technology नियुक्त किया था। उन्हें AI आधारित कंटेंट पाइपलाइन और इंटरैक्टिव स्टोरीटेलिंग मॉडल विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वित्त वर्ष 2026 में 'जियोस्टार' (JioStar) ने 36,248 करोड़ रुपये का सकल राजस्व, 4,885 करोड़ रुपये का EBITDA और 3,210 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

22 जून तक भारत में बंद रहेगा 'टेलीग्राम': सरकार ने जारी किया आदेश

केंद्र सरकार ने 'टेलीग्राम' पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि यह कदम पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
telegram

RE-NEET परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'टेलीग्राम' (Telegram) पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। बताया जा रहा है कि यह निर्णय 'राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी' (National Testing Agency-NTA) की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। सरकार ने यह आदेश 'सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000' (Information Technology Act 2000) की धारा 69A के तहत जारी किया है।

सरकारी आदेश के अनुसार भारत में 'टेलीग्राम' (Telegram) की सेवाओं को सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा। यह प्रतिबंध 22 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। इसके अलावा प्लेटफॉर्म को भारत में पहले से मौजूद संदेशों पर मैसेज एडिट (Message Edit) सुविधा भी अस्थायी रूप से बंद करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था 30 जून 2026 तक लागू रहेगी।

सरकार का मानना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में कई बार पुराने संदेश महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। ऐसे में मैसेज एडिट की सुविधा को रोककर संभावित सबूतों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के मामलों में 'टेलीग्राम' (Telegram) का नाम कई बार सामने आता रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार प्लेटफॉर्म पर बड़े समूह (Groups) बनाए जा सकते हैं, जिनमें हजारों लोग एक साथ जुड़े रहते हैं। यही वजह है कि किसी भी सूचना या सामग्री को बड़ी संख्या में लोगों तक तेजी से पहुंचाना आसान हो जाता है।

इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध बॉट्स (Bots) और ऑटोमेशन (Automation) सुविधाओं का दुरुपयोग भी कई मामलों में सामने आया है। साइबर ठग और धोखाधड़ी करने वाले तत्व इन सुविधाओं का इस्तेमाल ऑटोमेटेड संदेश भेजने और गतिविधियों को छिपाने के लिए करते हैं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए