देशभर में लगातार फलते-फूलते कंटेंट इकोसिस्टम की रक्षा और डिजिटल पाइरेसी पर लगाम लगाने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने एक सख्त कदम उठाया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
देशभर में लगातार फलते-फूलते कंटेंट इकोसिस्टम की रक्षा और डिजिटल पाइरेसी पर लगाम लगाने के लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने एक सख्त कदम उठाया है। मंत्रालय ने इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) और अन्य मध्यस्थों को लगभग 700 वेबसाइट्स को ब्लॉक करने का निर्देश दिया है, जो फिल्मों, वेब सीरीज, डॉक्यूमेंट्रीज और अन्य प्रीमियम कंटेंट की पायरेटेड कॉपियां होस्ट कर रही थीं।
इस कार्रवाई को और प्रभावी बनाने के लिए एक अंतर्विभागीय समिति (IMC) का गठन किया गया है, जिसमें गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (MeitY), उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) और दूरसंचार विभाग (DoT) के प्रतिनिधि शामिल हैं। यह समिति विदेशी सर्वर पर होस्ट की गई साइट्स और सीमा पार पाइरेसी नेटवर्क से निपटने के लिए समन्वित एक्शन प्लान तैयार करेगी। इसकी जानकारी सूचना-प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने हाल ही में राज्यसभा में दी।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि क्या इन वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के आदेशों का पालन कर लिया गया है या सरकार ने अनुपालन के लिए कोई समयसीमा तय की है।
यह सख्ती ऐसे समय में की गई है जब कंटेंट क्रिएटर्स, स्टूडियोज और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पायरेटेड कंटेंट के इंटरनेट और डार्क वेब पर तेजी से फैलने को लेकर गहरी चिंता जता रहे हैं। थिएटर में रिलीज से लेकर एक्सक्लूसिव ओटीटी ओरिजिनल्स तक, बहुमूल्य कंटेंट अक्सर रिलीज के कुछ घंटों में ही लीक हो रहा है, जिससे राजस्व मॉडल पर असर पड़ रहा है और क्रिएटिव निवेश हतोत्साहित हो रहा है।
हर साल 25% तक राजस्व की चोरी
एक्सचेंज4मीडिया की एक पूर्व रिपोर्ट में बताया गया था कि OTT प्लेटफॉर्म्स हर साल अपने कुल राजस्व का लगभग 25% पाइरेसी के चलते गंवा देते हैं। EY और IAMAI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में भारत के एंटरटेनमेंट उद्योग को पाइरेसी के कारण 22,400 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ—जिसमें 13,700 करोड़ रुपये की चपत सिनेमाघरों को और 8,700 करोड़ रुपये की हानि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को हुई।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि 51% उपभोक्ताओं ने पाइरेटेड कंटेंट का उपभोग किया, यानी लगभग आधा संभावित राजस्व सीधा नाली में चला गया।
पाइरेसी वेबसाइट्स पर मोटी कमाई वाले विज्ञापन
डिजिटल सिटिजन्स एलायंस और व्हाइट बुलेट की एक 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, जो साइबर अपराधी चोरी की हुई फिल्में, टीवी शोज, गेम्स और लाइव इवेंट्स वेबसाइट्स और ऐप्स के जरिए उपलब्ध कराते हैं, वे सालाना 1.34 अरब डॉलर का विज्ञापन राजस्व कमाते हैं, जिसमें कई नामचीन वैश्विक कंपनियों के विज्ञापन भी शामिल हैं।
इस शोध में पाया गया कि ऐमजॉन, फेसबुक और गूगल के विज्ञापन उन पाइरेसी ऐप्स पर सबसे ज्यादा दिखे, इन तीनों ने ऐसे ऐप्स पर आने वाले प्रमुख ब्रैंड विज्ञापनों का 73% हिस्सा दर्ज किया। हालांकि, हाल के दिनों में पाइरेसी वेबसाइट्स और ऐप्स पर ऐमजॉन के विज्ञापनों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है, जिससे संकेत मिलता है कि डिजिटल विज्ञापन से पाइरेसी को आर्थिक बल मिलता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली पाइरेसी वेबसाइट्स हर साल 1.08 अरब डॉलर का वैश्विक विज्ञापन राजस्व अर्जित करती हैं। इनमें शीर्ष पांच वेबसाइट्स ने औसतन 18.3 मिलियन डॉलर की कमाई सिर्फ विज्ञापनों से की। इनमें से कई वेबसाइट्स लगातार अपने डोमेन बदलती रहती हैं ताकि कार्रवाई से बचा जा सके और विज्ञापन ब्लॉक लिस्ट्स को चकमा दिया जा सके।
प्रोड्यूसर्स करते हैं करोड़ों का खर्च सुरक्षा पर
पाइरेसी कंटेंट इंडस्ट्री के लिए सिर्फ वित्तीय नहीं, बल्कि नवाचार, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और उपभोक्ता भरोसे के लिहाज से भी एक बड़ी प्रणालीगत चुनौती बन गई है। यह एक बहु-अरब डॉलर की अवैध इंडस्ट्री बन चुकी है जो उपभोक्ताओं को धोखा देती है और उन्हें विभिन्न प्रकार के साइबर खतरों के जोखिम में डालती है।
अधिकांश स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स दो या उससे अधिक साइबर सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझेदारी करते हैं ताकि उनके कंटेंट को कई परतों वाली सुरक्षा दी जा सके। इस पर अक्सर उन्हें 30 लाख रुपये से लेकर 5 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है, जो उनकी कंटेंट रणनीति पर निर्भर करता है। ये एजेंसियां खास तकनीकी टूल्स और नेटवर्क के जरिए पायरेटेड कॉन्टेंट का पता लगाती हैं।
OTT कंपनियां सिर्फ सुरक्षा में ही नहीं, बल्कि कंटेंट लीक होने के बाद हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी संसाधनों और ऊर्जा की बड़ी मात्रा खर्च करती हैं। उनकी टीमें सर्वर पर आए असामान्य अनुरोधों के पैटर्न का अध्ययन करती हैं और पायरेटेड कंटेंट होस्ट करने वालों से संपर्क कर उसे हटाने का अनुरोध करती हैं।
हालांकि ज्यादातर मामलों में ऐसा कंटेंट हटा लिया जाता है, लेकिन Telegram और Popcorn Time जैसे बड़े मोबाइल कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स भारतीय न्यायिक क्षेत्र में नहीं आते, और वे अक्सर ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का हवाला देकर ऐसे अनुरोधों को खारिज कर देते हैं, ऐसा OTT कंपनियों का आरोप है।
डिलिजेंट मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Diligent Media Corporation Limited) की नॉन-एग्जिक्यूटिव स्वतंत्र महिला निदेशक (Independent Woman Director) गरिमा भारद्वाज ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिलिजेंट मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Diligent Media Corporation Limited) की नॉन-एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट (वुमेन) डायरेक्टर गरिमा भारद्वाज ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने इस संबंध में 5 जून 2026 को शेयर बाजारों को जानकारी दी।
कंपनी द्वारा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को भेजी गई सूचना के अनुसार, गरिमा भारद्वाज (DIN: 10632970) ने नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट (महिला) डायरेक्टर के पद से इस्तीफा सौंप दिया है। उनका इस्तीफा 5 जून 2026 को कारोबार समाप्त होने के बाद से प्रभावी माना जाएगा।
कंपनी ने बताया कि गरिमा भारद्वाज ने निजी कारणों और अन्य पेशेवर जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का फैसला किया है। इसी वजह से वे कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) के तहत गठित विभिन्न समितियों से भी अलग हो जाएंगी।
डिलिजेंट मीडिया ने अपनी फाइलिंग में कहा है कि सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत आवश्यक सभी जानकारियां और गरिमा भारद्वाज का इस्तीफा पत्र कंपनी ने एक्सचेंजों को उपलब्ध करा दिया है।
फाइलिंग के अनुसार, गरिमा भारद्वाज किसी अन्य सूचीबद्ध कंपनी में निदेशक के रूप में कार्यरत नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके इस्तीफे के पीछे पत्र में बताए गए कारणों के अलावा कोई अन्य महत्वपूर्ण या छिपा हुआ कारण नहीं है।
अपने इस्तीफा पत्र में गरिमा भारद्वाज ने कहा कि वह 5 जून 2026 से नॉन-एग्जीक्यूटिव स्वतंत्र महिला निदेशक के पद से इस्तीफा दे रही हैं। उन्होंने लिखा कि निजी कारणों और अन्य पेशेवर प्रतिबद्धताओं के चलते वह कंपनी में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफे के बाद वे कंपनी के निदेशक मंडल की विभिन्न समितियों में सदस्य या अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिकाओं से भी मुक्त हो जाएंगी।
गरिमा भारद्वाज ने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग और समर्थन के लिए कंपनी के बोर्ड और प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कंपनी के साथ काम करने का अवसर और उन पर जताए गए विश्वास के लिए वह धन्यवाद देती हैं।
उन्होंने बोर्ड से अनुरोध किया कि उनके इस्तीफे को स्वीकार करते हुए संबंधित वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएं। साथ ही उन्होंने डिलिजेंट मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड के उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की कामना भी की।
गरिमा भारद्वाज एक अनुभवी विधि विशेषज्ञ (लीगल प्रोफेशनल) हैं, जिन्हें कानून के विभिन्न क्षेत्रों में दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्हें सिविल लॉ, क्रिमिनल लॉ, आर्बिट्रेशन, रेंट कंट्रोल, लेबर एवं इंडस्ट्रियल लॉ, सर्विस लॉ, कॉर्पोरेट एवं कमर्शियल लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) और मैट्रिमोनियल लॉ जैसे विषयों में गहरी विशेषज्ञता प्राप्त है।
वह नियमित रूप से दिल्ली की जिला अदालतों, दिल्ली हाई कोर्ट की ओरिजिनल और अपीलीय पीठ, भारत के सर्वोच्च न्यायालय, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में पेश होती रही हैं।
शैक्षणिक रूप से भी उनका रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी (ऑनर्स) बॉटनी और एलएलबी की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली से जजिंग एंड कोर्ट मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय एनर्जी एंड एनवायरनमेंट ग्रुप द्वारा आयोजित तथा दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा प्रायोजित ‘एनर्जी एंड एनवायरनमेंट अवेयरनेस’ सर्टिफिकेट कोर्स भी पूरा किया है।
जुलाई 2004 से स्वतंत्र रूप से वकालत कर रहीं गरिमा भारद्वाज अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता और कानूनी दक्षता के लिए जानी जाती हैं। अपने व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता के कारण उन्होंने कानूनी जगत में एक सम्मानित पहचान बनाई है।
उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी (ऑनर्स) बॉटनी के दौरान सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड छात्रा के रूप में ‘स्मृति लीलावती नंदा मेमोरियल सिल्वर मेडल’ से भी सम्मानित किया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘स्टोरी TV’ (Story TV) के कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में राहत देते हुए कई वेबसाइट्स और टेलीग्राम चैनलों पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली हाईकोर्ट ने माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म ‘स्टोरी TV’ (Story TV) को कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स और टेलीग्राम चैनलों को कंपनी का कंटेंट बिना अनुमति प्रसारित करने से रोक दिया है। जस्टिस ज्योति सिंह (Jyoti Singh) ने 29 मई 2026 को इस मामले में अंतरिम राहत देते हुए आदेश जारी किया।
अदालत ने कहा कि संबंधित प्लेटफॉर्म्स और उनके संचालक ‘स्टोरी TV’ (Story TV) के कॉपीराइट कंटेंट को होस्ट, स्ट्रीम, डाउनलोड, शेयर या किसी भी अन्य माध्यम से उपलब्ध नहीं करा सकते। कंपनी के अनुसार मई 2026 के तीसरे सप्ताह में उसे पता चला कि microtv.my.id, microtv.one और reeltv.buzz जैसी वेबसाइट्स कथित रूप से उसके कंटेंट को बिना अनुमति स्टोर और वितरित कर रही थीं।
इससे यूजर्स कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के बाहर भी कंटेंट देख और डाउनलोड कर पा रहे थे। अदालत ने माना कि मामला केवल कंटेंट होस्टिंग तक सीमित नहीं है। कुछ प्लेटफॉर्म्स कथित तौर पर इंडेक्सिंग और रीडायरेक्शन सेवाएं भी दे रहे थे, जबकि कुछ टेलीग्राम चैनलों के जरिए पायरेटेड कंटेंट के लिंक साझा किए जा रहे थे।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि चिन्हित URL को आदेश मिलने के 36 घंटे के भीतर हटाया जाए। डोमेन रजिस्ट्रार्स को संबंधित डोमेन नाम ब्लॉक या सस्पेंड करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
दैनिक भास्कर समूह के अंग्रेजी न्यूज प्लेटफॉर्म Bhaskar English में पत्रकार सुमित सिंह ने चीफ सब-एडिटर के पद पर जिम्मेदारी संभाल ली है। उनकी नियुक्ति भोपाल में की गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दैनिक भास्कर समूह के अंग्रेजी न्यूज प्लेटफॉर्म Bhaskar English में पत्रकार सुमित सिंह ने चीफ सब-एडिटर के पद पर जिम्मेदारी संभाल ली है। उनकी नियुक्ति भोपाल में की गई है।
Bhaskar English की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी। यह प्लेटफॉर्म दैनिक भास्कर के रिपोर्टर नेटवर्क के जरिए देश-दुनिया की खबरें अंग्रेजी पाठकों तक पहुंचाता है।
Bhaskar English से जुड़ने से पहले सुमित सिंह दिल्ली में फ्रीलांस पत्रकार के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने Earth Journalism Network, Brussels Report, The Wire, Article 14, The Quint, Outlook India, The Week, Frontline, The New Indian Express, Newslaundry, Ground Report, Maktoob, NewsClick, The MookNayak, SheThePeopleTV, TwoCircles.net और The Probe सहित 25 से अधिक प्रकाशनों के लिए काम किया है।
दिसंबर 2024 में उन्होंने डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म The New Bengal Gazette की सह-स्थापना की थी। अपने करियर के दौरान उन्होंने फिलिस्तीन के विदेश मंत्री, नेपाल के जेन-ज़ी आंदोलन के एक नेता, इरोम शर्मिला और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के इंटरव्यू भी किए हैं।
सुमित सिंह इससे पहले Firstpost (Network18) में असिस्टेंट प्रोड्यूसर रह चुके हैं, जहां उन्होंने Firstpost Africa और Vantage with Palki Sharma जैसे कार्यक्रमों पर काम किया। इसके अलावा वह Mojo Story में भी विभिन्न भूमिकाओं में रहे और बरखा दत्त के कार्यक्रम Bottomline with Barkha से जुड़े रहे। वह Inside Out with Barkha Dutt पॉडकास्ट की लॉन्च टीम का भी हिस्सा थे।
उन्होंने DeKoder की चुनाव कवरेज टीम में भी काम किया है। सुमित सिंह को Earth Journalism Network की ओर से ग्रांट मिल चुकी है और वह 101Reporters, Asian-American Journalists Association, Millennium Fellowship तथा British Council के विभिन्न फेलोशिप कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे हैं।
उन्होंने AJK मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया से कन्वर्जेंट जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उनकी स्नातक शिक्षा हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई है। वह मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं।
डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अपनी प्रमुख सहयोगी कंपनी ListenFirst Media Quintype Technologies Inc. में बड़े नेतृत्व बदलाव की घोषणा की है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अपनी प्रमुख सहयोगी कंपनी ListenFirst Media Quintype Technologies Inc. में बड़े नेतृत्व बदलाव की घोषणा की है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि मौजूदा CEO मिरांडा मैकवीनी (Miranda McWeeney) अपने पद से हट रही हैं। हालांकि, वह कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं होंगी और अब एडवाइजरी बोर्ड में शामिल होकर कंपनी को रणनीतिक सलाह और मार्गदर्शन देती रहेंगी।
कंपनी ने उनकी जगह रुचा पंडित को नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 1 जून 2026 से प्रभावी हो गई है।
रुचा पंडित फिलहाल कंपनी में टेक इनेबल सर्विसेज व पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थीं। कंपनी के अनुसार, उनके पास इंडस्ट्री का व्यापक अनुभव है और उन्होंने नेतृत्व की भूमिका में मजबूत प्रदर्शन किया है। इसी अनुभव को देखते हुए उन्हें CEO की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
Quint Digital ने मिरांडा मैकवीनी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त करती है। साथ ही कंपनी को विश्वास है कि नए नेतृत्व में उसका विकास और सफलता का सफर आगे भी जारी रहेगा।
मीडिया कंपनी HT Media Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की परिचालन आय (Revenue from Operations) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मीडिया कंपनी HT Media Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की परिचालन आय (Revenue from Operations) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन कुछ एकमुश्त खर्चों और कारोबार में आई चुनौतियों के कारण कंपनी को पूरे साल घाटा हुआ है। साथ ही कंपनी के बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Mosaic Media Ventures Pvt. Ltd. में 5 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दी है।
कंपनी की कुल परिचालन आय वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,803.31 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 1,745.84 करोड़ रुपये थी। वहीं कंपनी का EBITDA भी बढ़कर 298.42 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 275.49 करोड़ रुपये था।
हालांकि, पूरे वित्त वर्ष में कंपनी को 54.27 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने 1.95 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। मार्च 2026 तिमाही में भी कंपनी को 13.56 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।
कंपनी ने बताया कि नए लेबर कोड्स के प्रभाव, रेडियो कारोबार की परिसंपत्तियों में मूल्यह्रास (Impairment) और कुछ अन्य विशेष मदों (Exceptional Items) के कारण वित्तीय प्रदर्शन प्रभावित हुआ। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने कुल 114.23 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल लॉस दर्ज किए।
सेगमेंट के आधार पर देखें तो अखबार और प्रकाशन कारोबार कंपनी की सबसे मजबूत इकाई बना रहा। इस कारोबार से कंपनी को वित्त वर्ष 2025-26 में 1,500.43 करोड़ रुपये की आय हुई, जो पिछले साल के 1,385.95 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं रेडियो और डिजिटल कारोबार अभी भी दबाव में रहे।
बोर्ड ने कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Mosaic Media Ventures Private Limited के इक्विटी शेयरों में 5 करोड़ रुपये तक निवेश करने को भी मंजूरी दी है। यह निवेश कंपनी के डिजिटल और मीडिया कारोबार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कंपनी के वैधानिक ऑडिटर S.R. Batliboi & Co. LLP ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों पर ‘अनमॉडिफाइड ओपिनियन’ दी है, यानी ऑडिट रिपोर्ट में किसी तरह की बड़ी आपत्ति नहीं जताई गई है।
HT Media के चेयरपर्सन एवं एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भार्तिया की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इन नतीजों को मंजूरी दी गई।
एक दौर था जब किसी विज्ञापन को तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे, मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीमें काम करती थीं और फिर प्रोडक्शन की लंबी प्रक्रिया चलती थी। 2026 तक आते-आते यह पूरी दुनिया बदल चुकी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
एक समय था जब किसी कंपनी का विज्ञापन तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे। बड़ी-बड़ी मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीम रणनीति बनाती थी, कॉपीराइटर और डिजाइनर कंटेंट तैयार करते थे, फिर प्रोडक्शन हाउस उसे अंतिम रूप देता था। लेकिन 2026 तक आते-आते यह पूरी तस्वीर बदल चुकी है। अब AI आधारित टूल कुछ ही मिनटों में सैकड़ों विज्ञापन तैयार कर सकते हैं, उन्हें सही ऑडियंस तक पहुंचा सकते हैं और उनके नतीजों का विश्लेषण भी कर सकते हैं- वह भी बेहद कम इंसानी दखल के साथ।
यह सिर्फ नई तकनीक का असर नहीं है, बल्कि मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री के काम करने के तरीके में आया एक बड़ा बदलाव है। ऐसा बदलाव, जो विज्ञापन, कंटेंट और ऑडियंस कनेक्शन की पूरी दुनिया को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।
एक ट्रिलियन डॉलर का मील का पत्थर
2026 में दुनिया भर का ऐडवर्टाइजिंग खर्च पहली बार 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के पार जाने वाला है। 'डेंट्सू' (Dentsu) की Global Ad Spend Forecast (दिसंबर 2025) के मुताबिक, वैश्विक ऐडवर्टाइजिंग खर्च 2026 में $1.04 ट्रिलियन तक पहुंचेगा, जो 2025 की तुलना में 5.1% की बढ़ोतरी है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की 3.1% वृद्धि दर से कहीं ज्यादा है। यह अपने आप में बताता है कि ब्रैंड्स के लिए ऐडवर्टाइजिंग अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि व्यापार बढ़ाने का सबसे अहम औजार बन चुका है।
इस पूरे मार्केट में AI की भूमिका केंद्रीय है। Dentsu का अनुमान है कि 2026 तक 71.6% ऐडवर्टाइजिंग खर्च एल्गोरिदम संचालित होगा- यानी इंसान नहीं, बल्कि AI तय करेगा कि कौन सा ऐड, किसे, कब और किस कीमत पर दिखाया जाए और 2028 तक यह आंकड़ा 76% तक पहुंचने का अनुमान है।
ऐडवर्टाइजिंग में AI का मार्केट खुद 2025 के $11.17 बिलियन से बढ़कर 2026 में $14.12 बिलियन हो चुका है, और 2030 तक यह $36.34 बिलियन तक पहुंचेगा- यह आंकड़े The Business Research Company की "AI in Advertising Global Market Report 2026" (फरवरी 2026) से लिए गए हैं।
Meta ने Google को पछाड़ा- AI ने बदला खेल
2026 का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग की सत्ता पलट है। EMARKETER की 13 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में Meta पहली बार Google को पीछे छोड़ देगा- वैश्विक डिजिटल विज्ञापन राजस्व में। यह 14 साल में पहली बार होगा।
Meta की इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे मुख्य वजह है- AI कंपनी का Advantage+ टूल और AI-generated ad creatives ने विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम दिए हैं। Meta की विकास दर 2025 के 22.1% से बढ़कर 2026 में 24.1% हो गई है, जबकि Google की विकास दर 11.9% पर स्थिर है।
EMARKETER के सीनियर एक्सपर्ट Zach Goldner के अनुसार, Meta की यह बढ़त किसी एक सोर्स से नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम से आ रही है- Facebook, Instagram, Reels और Threads सभी पर AI की ताकत काम कर रही है।
Google के लिए चुनौती यह भी है कि AI संचालित सर्च टूल और chatbots पारंपरिक सर्च आधारित ऐडवर्टाइजिंग को प्रभावित कर रहे हैं। Gartner का अनुमान है कि 2026 तक पारंपरिक सर्च वॉल्यूम में 25% की गिरावट आ सकती है।
Amazon भी कम नहीं है- 2025 के $68.64 बिलियन से बढ़कर 2026 में $82.07 बिलियन तक पहुंच रहा है।
प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग: AI का सबसे बड़ा मैदान
अगर AI और ऐडवर्टाइजिंग के मेल का सबसे साफ उदाहरण देखना हो, तो वह है प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग (programmatic Advertising)। यह वह तकनीक है जहां AI सेकंड के हजारवें हिस्से में तय करता है कि किसे कौन सा ऐड दिखाना है।
Basis Technologies की जनवरी 2026 रिपोर्ट (EMARKETER data के आधार पर) के अनुसार, अमेरिका में 2026 में प्रोग्रामेटिक डिस्प्ले ऐडवर्टाइजिंग खर्च 203 बिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगा, जो 2025 के 180.4 बिलियन डॉलर की तुलना में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
Dentsu के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रोग्रामैटिक ट्रेंडिंग 81.4% डिजिटल ऐड स्पेंड को कंट्रोल करेगी- यानी हर $5 में से $4 से ज्यादा का ऐडवर्टाइजिंग खर्च अब AI संचालित ग्रामैटिक सिस्टम से होकर गुजर रहा है।
शॉर्ट-फॉर्म वीडियो इस पूरे इकोसिस्टम का नया केंद्र बन गया है। रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ने वाला डिजिटल चैनल है, जिसमें 14.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं ऑनलाइन वीडियो 11.5 प्रतिशत और सोशल मीडिया 11.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।
AI मार्केटिंग का मार्केट: एक बड़ी इंडस्ट्री
सिर्फ ऐडवर्टाइजिंग ही नहीं, बल्कि पूरी मार्केटिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पकड़ तेजी से मजबूत हो रही है। McKinsey की 2025 में प्रकाशित “स्टेट ऑफ AI इन 2025” रिपोर्ट के मुताबिक, अब 88 प्रतिशत ऑर्गनाइजेशंस अपने कम से कम एक कामकाजी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पिछले साल के 78 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। वहीं “स्टेट ऑफ ऑर्गेनाइजेशंस 2026” रिपोर्ट, जो 10,000 से अधिक सीनियर लीडर्स के सर्वे पर आधारित है, जो यह भी बताती है कि 88 प्रतिशत लीडर्स की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लागू कर चुकी हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मार्केटिंग पर खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। अब यह कंपनियों के कुल मार्केटिंग बजट का 9 प्रतिशत हो गया है, जो 2024 में 7 प्रतिशत था। इसके साथ ही, जो मार्केटिंग टीमें AI का इस्तेमाल कर रही हैं, वे हर हफ्ते औसतन 11 घंटे का समय बचा रही हैं और उनकी उत्पादकता में 44 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।
कुछ और अहम आंकड़े जो 2026 की तस्वीर बताते हैं:
आज के समय में ज्यादातर मार्केटर्स अपनी रणनीतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। McKinsey के 2026 State of AI सर्वे के मुताबिक, करीब 75 प्रतिशत मार्केटर्स अब AI का सहारा लेकर अपने कैंपेन प्लान और एग्जिक्यूट कर रहे हैं। AI से चलने वाले कैंपेन पारंपरिक तरीकों की तुलना में ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं। ऐसे कैंपेन लगभग 22 प्रतिशत बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट देते हैं, जिससे कंपनियों को ज्यादा फायदा मिल रहा है।
पर्सनलाइजेशन में भी AI बड़ा बदलाव ला रहा है। AI के जरिए बनाए गए पर्सनलाइज्ड अनुभव से कन्वर्जन रेट में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा, AI से तैयार किए गए हेडलाइंस भी ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं, जिनसे क्लिक-थ्रू रेट में लगभग 25 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है।
ई-मेल मार्केटिंग में भी AI का असर साफ दिखाई दे रहा है। AI से चलने वाले ईमेल कैंपेन में 41 प्रतिशत तक ज्यादा रेवेन्यू आने की संभावना होती है।
एजेंसियां: बदलाव का नया दौर
जे.पी. मॉर्गन के विश्लेषण और डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, अमेरिका में 2026 में ऐडवर्टाइजिंग खर्च 415 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2025 के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि यह बढ़त एजेंसियों के लिए उतनी अच्छी खबर नहीं है, जितनी दिखती है। डिजिटल विज्ञापन अब ग्लोबल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का 68.7 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है और गूगल, मेटा और एमेजॉन जैसे प्लेटफॉर्म्स ने टार्गेटिंग, क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन और रिपोर्टिंग को काफी हद तक ऑटोमेट कर दिया है।
Forrester Research की 2023 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2030 तक एजेंसियां अपनी 7.5 प्रतिशत नौकरियों को ऑटोमेशन से बदल देंगी, जो अमेरिका में करीब 33,000 नौकरियों के बराबर है। लेकिन नवंबर 2025 में इस अनुमान को अपडेट करते हुए फॉरेस्टर ने कहा कि केवल 2026 में ही एजेंसी नौकरियों में 15 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, क्योंकि 2025 में भी औसतन 8 प्रतिशत कर्मचारियों की संख्या में कटौती देखी गई थी।
Forrester के अनुसार, जितनी ज्यादा मौलिकता होगी, उतना ही ऑटोमेशन का खतरा कम होगा। क्लेरिकल, प्रशासनिक और सेल्स से जुड़े कामों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा, जबकि क्रिएटिव और डेटा स्ट्रेटेजी से जुड़े रोल्स की मांग बढ़ेगी।
Meta का Advantage+ और Google का AI- असली बदलाव यहां है
Meta का Advantage+ कैंपेन सिस्टम ऐडवर्टाइजर्स को बस एक प्रोडक्ट URL, बजट और लक्ष्य देने की सुविधा देता है- बाकी सब AI खुद करता है। AI-generated creatives, audience modeling, bid optimization और performance learning- सब कुछ ऑटोमेटेड है।
Google अपने Performance Max campaigns में AI का इस्तेमाल करता है, जो automatically सभी Google properties- Search, YouTube, Display, Maps- पर best performing ads चलाता है।
Amazon के पास retail data की ताकत है। Acxiom- जिसे IPG ने 2018 में acquire किया था और जो अब Omnicom के पास है- 90% global credit card issuers और 75% U.S. retail banks के साथ काम करता है। यह ultra-precise targeting को possible बनाता है।
बाकी सभी काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खुद ही करता है। AI से तैयार किए गए क्रिएटिव्स, ऑडियंस मॉडलिंग, bid optimization और performance learning- ये सब पूरी तरह ऑटोमेटेड हो चुका है।
गूगल अपने परफॉर्मेंस मैक्स कैंपेन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है, जो अपने आप गूगल के सभी प्लेटफॉर्म- सर्च, यूट्यूब, डिस्प्ले और मैप्स पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ऐड चलाता है। एमेजॉन के पास रिटेल डेटा की जबरदस्त ताकत है। Acxiom, जिसे 2018 में IPG ने खरीदा था और जो अब ओमनीकॉम के पास है, दुनिया के 90 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों और अमेरिका के 75 प्रतिशत रिटेल बैंकों के साथ काम करता है। इससे बेहद सटीक टार्गेटिंग संभव हो पाती है।
क्रिएटिव क्रांति: AI संचालित ऐड्स का उदय
ऐड बनाने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। AI टूल्स अब एक ही स्क्रिप्ट को 8 अलग AI personas से, अलग-अलग सेटि्ंग्स में प्रदान कर सकते हैं और इतनी बड़ी मात्रा पारंपरिक प्रोडक्शन तरीकों से कभी हासिल नहीं की जा सकती थी।
डेटा प्राइवेसी और AI का टकराव
AI का यह सफर बिना चुनौतियों के नहीं है। थर्ड-पार्टी कुकीज का अंत हो चुका है और ऐडवर्टाइजर्स को अब फर्स्ट-पार्टी डेटा पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे डेटा क्लीन रूम का चलन बढ़ा है- ये ऐसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म होते हैं, जहां ब्रैंड्स और पब्लिशर्स बिना किसी का निजी डेटा उजागर किए अपना डेटा आपस में मिलाते हैं। इसी वजह से रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इसके पास फर्स्ट-पार्टी शॉपर डेटा होता है, जो कुकीज के बाद का सबसे मूल्यवान संसाधन बन चुका है।
भारत और एशिया-प्रशांत में AI ऐडवर्टाइजिंग का उभार
भारत के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, भारत का ऐडवर्टाइजिंग मार्केट 2026 में 8.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, जो 2025 के 7.8 प्रतिशत से ज्यादा है। इस बढ़त के पीछे ICC मेन्स टी20 क्रिकेट वर्ल्डकप, IPL 2026 और तेजी से बढ़ता डिजिटल विस्तार मुख्य कारण हैं।
भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग खर्च 19.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगा, जिसमें रिटेल मीडिया और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो की बड़ी भूमिका होगी। वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र कुल मिलाकर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 376.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, और भारत इस क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बनकर उभर रहा है।
Omnicom-IPG का महाविलय: एजेंसी का भविष्य
2026 में ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में एक और बड़ा बदलाव आया- Omnicom और IPG का विलय, जो 26 नवंबर 2025 को पूरा हुआ। इस संयुक्त कंपनी की सालाना आय 25 बिलियन डॉलर से अधिक है और इसमें करीब 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। हालांकि, विलय के बाद लगभग 4,000 नौकरियों में कटौती की घोषणा भी की गई है।
यह विलय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में बड़े पैमाने पर विस्तार और बेहतर तकनीकी क्षमताएं हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है। ओमनीकॉम ने सालाना 750 मिलियन डॉलर की बचत का लक्ष्य रखा है। इसके तहत FCB, MullenLowe और DDB जैसे प्रसिद्ध एजेंसी ब्रैंड्स को बंद किया जा रहा है, जबकि McCann, BBDO और TBWA को तीन वैश्विक क्रिएटिव नेटवर्क के रूप में रखा जाएगा।
मार्केटिंग का नया युग
2026 तक आते-आते यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि ऐडवर्टाइजिंग में AI अब कोई फ्यूचर ट्रेंड नहीं, बल्कि आज की जमीनी हकीकत है। $1.04 ट्रिलियन का वैश्विक विज्ञापन मार्केट, Meta का Google पर ऐतिहासिक बढ़त, प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग का $200 बिलियन का पड़ाव, और AI संचालित कैंपेन का बेहतर ROI- ये सब मिलकर एक नई दुनिया का निर्माण कर रहे हैं।
लेकिन इस बदलाव में सिर्फ दक्षता ही नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल भी है। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही क्रिएटिव तैयार करेगा, टार्गेटिंग करेगा और उसे बेहतर बनाएगा, तो इंसान की भूमिका क्या रह जाएगी? इसका जवाब शायद यही है- रणनीति, संवेदनशीलता और वह मानवीय स्पर्श, जो किसी एल्गोरिदम के पास नहीं होता।
जो ब्रैंड्स और एजेंसियां यह समझ जाएंगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक सहयोगी है, प्रतिस्पर्धी नहीं, वही इस नए एल्गोरिदम आधारित दौर में आगे निकलेंगी।
OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि AI नौकरियों के लिए ‘महाविनाश’ नहीं ला रहा। उन्होंने माना कि वाइट-कॉलर नौकरियों पर असर को लेकर उनकी पुरानी आशंकाएं जरूरत से ज्यादा थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में नौकरियों पर खतरे की चर्चा के बीच OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि AI नौकरियों के लिए किसी “महाविनाश” जैसी स्थिति नहीं ला रहा है और वाइट-कॉलर नौकरियों के खत्म होने को लेकर उनकी पुरानी चिंताएं जरूरत से ज्यादा थीं।
सैम ऑल्टमैन मंगलवार को सिडनी में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (Commonwealth Bank of Australia - CBA) की ओर से आयोजित किया गया था, जहां उन्होंने बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉमिन (Matt Comyn) के साथ बातचीत की।
ऑल्टमैन ने कहा कि साल 2022 में ChatGPT लॉन्च होने के बाद उन्हें डर था कि एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर नौकरियों पर बड़ा असर पड़ेगा। हालांकि अब तक रोजगार पर असर उनकी उम्मीद से काफी कम रहा है।
उन्होंने माना कि तकनीक के विकास को लेकर उनका अनुमान सही था, लेकिन समाज और अर्थव्यवस्था पर इसके असर का आकलन पूरी तरह सही नहीं निकला। सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उस समय खतरा वास्तविक लग रहा था, इसलिए उस पर चर्चा जरूरी थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में AI का असर और बढ़ सकता है।
आज HSBC, अमेजन (Amazon), स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) और CBA जैसी कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके बावजूद ऑल्टमैन का मानना है कि इंसानी बातचीत और समझ की जगह मशीनें आसानी से नहीं ले सकतीं।
RBI ने मोबाइल वॉलेट्स के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं। अब वॉलेट बैलेंस, P2P ट्रांसफर और कैश लोडिंग की लिमिट तय कर दी गई है, जिससे फिनटेक कंपनियों में चिंता बढ़ गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी मोबाइल वॉलेट्स के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। इस फैसले के बाद मोबिक्विक (Mobikwik), फोनपे (PhonePe), अमेजन पे (Amazon Pay), पाइन लैब्स (Pine Labs) और एयरटेल पेमेंट्स बैंक (Airtel Payments Bank) जैसी कंपनियों को नए नियमों के तहत काम करना होगा।
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब किसी भी मोबाइल वॉलेट में अधिकतम मासिक बैलेंस 2 लाख रुपये तक ही रखा जा सकेगा। वहीं व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) फंड ट्रांसफर की सीमा घटाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हर महीने वॉलेट में अधिकतम 10 हजार रुपये तक ही नकद जमा किए जा सकेंगे।
इन नियमों के बाद फिनटेक इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। पॉलिसी कंसेंसस सेंटर (Policy Consensus Centre - PCC) द्वारा आयोजित एक बैठक में कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि इन प्रतिबंधों से मोबाइल वॉलेट्स कमजोर हो सकते हैं और बैंकिंग सिस्टम व UPI को ज्यादा बढ़ावा मिल सकता है।
दरअसल RBI की सख्ती के पीछे डिजिटल वॉलेट्स के बढ़ते दुरुपयोग को मुख्य वजह माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) ने हाल में कई संदिग्ध लेन-देन पकड़े थे। इनमें सट्टेबाजी, गैंबलिंग और रियल-मनी गेमिंग से जुड़े ट्रांजैक्शन शामिल बताए गए हैं।
डिजिटल मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने बोर्ड स्तर पर कई अहम फैसले लिए हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने बोर्ड स्तर पर कई अहम फैसले लिए हैं। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 22 मई 2026 को हुई बैठक में कई डायरेक्टर्स की दोबारा नियुक्ति और नए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति को मंजूरी दी।
कंपनी के मुताबिक, बोर्ड ने आगामी वार्षिक आम बैठक (Annual General Meeting) में शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन वंदना मलिक, ऋतु कपूर और आभा कपूर की पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी है।
ऋतु कपूर फिर संभालेंगी अहम जिम्मेदारी
ऋतु कपूर कंपनी की को-फाउंडर, सीईओ व मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। उन्हें डिजिटल मीडिया में इनोवेशन और फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म 'वेबकूफ' (WebQoof) शुरू करने के लिए जाना जाता है। उन्होंने “My Report” और “Talking Stalking” जैसे अभियानों के जरिए नागरिक पत्रकारिता और महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी आगे बढ़ाया।
वंदना मलिक का मीडिया में लंबा अनुभव
वंदना मलिक पिछले तीन दशकों से मीडिया इंडस्ट्री से जुड़ी रही हैं। उन्होंने TV18 और अन्य मीडिया प्लेटफॉर्म्स में एंटरटेनमेंट कंटेंट और प्रोग्रामिंग से जुड़े कई अहम रोल निभाए हैं। वे पहले नेटवर्क18 मीडिया व इन्वेस्टमेंट्स के बोर्ड में भी रह चुकी हैं।
आभा कपूर को मिला दूसरा कार्यकाल
आभा कपूर को कंपनी ने इंडिपेेंडेंट वुमेन डायरेक्टर के तौर पर दूसरा पांच साल का कार्यकाल देने का फैसला किया है। उनका नया कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 30 दिसंबर 2031 तक रहेगा। आभा कपूर कॉरपोरेट गवर्नेंस और मीडिया-एंटरटेनमेंट सेक्टर में टैलेंट बिल्डिंग के लिए जानी जाती हैं।
नए इंटरनल ऑडिटर की नियुक्ति
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए Raghu Nath Rai & Co. को नया इंटर्नल ऑडिटर नियुक्त किया है। यह फर्म 1967 से काम कर रही है और ऑडिट, टैक्सेशन, रिस्क एडवाइजरी और फाइनेंशियल कंसल्टिंग जैसे क्षेत्रों में अनुभव रखती है।
कंपनी के मुताबिक, ये सभी नियुक्तियां शेयरधारकों की मंजूरी के बाद प्रभावी होंगी।
सरकार ने DigiLocker और CISCE के नाम पर चल रही फर्जी वेबसाइट को लेकर अलर्ट जारी किया है। MeitY ने लोगों को निजी जानकारी, आधार डिटेल और OTP साझा न करने की सख्त चेतावनी दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर ठग अब सरकारी सेवाओं के नाम पर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने DigiLocker और CISCE के नाम पर चल रही एक फर्जी वेबसाइट को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। सरकार के मुताबिक http://digilocker.cisceboard.org नाम की एक फर्जी वेबसाइट इंटरनेट पर सक्रिय है। यह वेबसाइट देखने में बिल्कुल असली DigiLocker और CISCE पोर्टल जैसी लगती है, जिससे आम यूजर्स आसानी से धोखा खा सकते हैं।
MeitY ने नागरिकों को इस वेबसाइट से दूर रहने की सलाह दी है। मंत्रालय ने कहा है कि लोग इस पोर्टल पर अपना नाम, पता, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर या आधार से जुड़ी कोई भी जानकारी साझा न करें। साथ ही किसी भी ओटीपी (OTP) को यहां दर्ज करने से बचें। सरकार ने चेतावनी दी है कि यह वेबसाइट शुल्क या किसी अन्य बहाने से ऑनलाइन भुगतान की मांग भी कर सकती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का लेन-देन न करने की सलाह दी गई है।
मंत्रालय ने लोगों को याद दिलाया है कि भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइटों के अंत में आमतौर पर “.gov.in” या “.nic.in” लिखा होता है। इसके अलावा व्हाट्सएप, एसएमएस या ईमेल के जरिए मिलने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचने को कहा गया है। सरकार ने लोगों से इस जानकारी को परिवार और दोस्तों के साथ साझा करने की अपील की है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग साइबर ठगी से सुरक्षित रह सकें।