क्या Gen Z को जीतने के लिए ब्रैंड्स को बदलनी पड़ रही अपनी सोच?

Gen Z केवल प्रॉडक्ट नहीं खरीदती, वे अनुभव, पहचान और मूल्य खरीदती है। इनके लिए ब्रैंड का मतलब सिर्फ एक लोगो नहीं, बल्कि यह है कि वह ब्रैंड किस बात के लिए खड़ा है।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 06 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 06 June, 2026
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आज अगर किसी ब्रैंड का करोड़ों रुपये का टीवी विज्ञापन किसी बड़े सेलिब्रिटी के साथ प्रसारित होता है, तो इसकी कोई गारंटी नहीं कि युवा दर्शक उसे देख भी रहे हों। उस समय संभव है कि 20-25 साल का उपभोक्ता इंस्टाग्राम रील्स स्क्रॉल कर रहा हो, किसी इन्फ्लुएंसर की सिफारिश सुन रहा हो, यूट्यूब शॉर्ट्स देख रहा हो या दोस्तों के साथ किसी ट्रेंडिंग कंटेंट पर चर्चा कर रहा हो। यही है Gen Z,एक ऐसी पीढ़ी जो पारंपरिक विज्ञापनों से ज्यादा डिजिटल कंटेंट, इन्फ्लुएंसर्स और वास्तविक अनुभवों पर भरोसा करती है। मार्केटिंग की दुनिया में यह वर्ग आज सबसे चुनौतीपूर्ण भी है और सबसे प्रभावशाली भी, क्योंकि इसके फैसले आने वाले वर्षों में ब्रैंड्स की सफलता और असफलता तय करेंगे।

1997 से 2012 के बीच जन्मे इस वर्ग की उम्र 2026 में 14 से 29 वर्ष के बीच है। भारत में इनकी संख्या 37.7 करोड़ से अधिक है, यानी देश की आबादी का लगभग 27% हिस्सा। वैश्विक स्तर पर Gen Z दुनिया की कुल आबादी का 24.6% है, जो करीब 2 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। BCG और Snapchat की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत में Gen Z पहले से ही कुल उपभोक्ता खर्च के 43% ($860 अरब) को प्रभावित कर रही है। 2035 तक इनका प्रत्यक्ष खर्च (direct spending) $1.8 ट्रिलियन और कुल स्पेंडिंग पावर (खर्च करने की क्षमता) $2 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है, यानी 2035 में भारत में खर्च होने वाला हर दूसरा रुपया Gen Z से आएगा। जो ब्रैंड आज इस पीढ़ी को नहीं समझेगा, वह कल के मार्केट में अप्रासंगिक हो जाएगा।

Gen Z का खरीदारी व्यवहार: पुरानी पीढ़ियों से बिल्कुल अलग

Gen Z केवल प्रॉडक्ट नहीं खरीदती, वे अनुभव, पहचान और मूल्य खरीदती है। इनके लिए ब्रैंड का मतलब सिर्फ एक लोगो नहीं, बल्कि यह है कि वह ब्रैंड किस बात के लिए खड़ा है।

खरीदारी से पहले ये ऑनलाइन रिसर्च को अनिवार्य मानते हैं, BCG-Snap रिपोर्ट बताती है कि Gen Z, Millennials की तुलना में 1.5 गुना अधिक रिसर्च करके खरीदारी करती है। यूजर-जनरेटेड कंटेंट, रिव्यू और दोस्तों की सिफारिशें इनके फैसलों पर गहरा असर डालती हैं। FOMO (Fear of Missing Out) यानी "कहीं मैं पीछे न रह जाऊं" की भावना इनकी खरीदारी को आवेगपूर्ण और तेज बनाती है। शोध बताते हैं कि Gen Z, पुराने पीढ़ियों की तुलना में सोशल मीडिया के जरिए 2.5 गुना अधिक आवेगपूर्ण खरीदारी करती है।

सोशल मीडिया: नया मार्केट, नए नियम

अगर आपको Gen Z तक पहुंचना है तो आपको उनके मैदान में उतरना होगा और वह मैदान है सोशल मीडिया।

2026 में Gen Z प्रतिदिन औसतन 4 घंटे सोशल मीडिया पर बिताती है, जो 2025 के 3 घंटे 18 मिनट से काफी अधिक है। भारत में Gen Z, देश के कुल सोशल मीडिया यूजर्स का 40% हिस्सा है और इनकी अनुमानित सालाना खरीद शक्ति ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक है।

प्लेटफॉर्म की प्राथमिकताओं की बात करें तो:

  • Instagram 89% Gen Z यूजर्स की पसंद है (72% इसे कस्टमर केयर के लिए भी चुनते हैं)
  • YouTube 84% के साथ दूसरे स्थान पर, भारत में विशेष रूप से लोकप्रिय, शॉर्ट-फॉर्म वीडियो यूसेज में 22% की वार्षिक वृद्धि
  • TikTok (वैश्विक संदर्भ में) 83% डेली एक्टिव यूसेज के साथ सबसे अधिक एंगेजमेंट देता है; 77% Gen Z इसे प्रॉडक्ट डिस्कवरी के लिए उपयोग करते हैं

भारत में YouTube और WhatsApp का दबदबा है, जबकि Instagram Reels ने ब्रैंड कम्युनिकेशन को पूरी तरह बदल दिया है। मीम मार्केटिंग और वायरल कैंपेन अब किसी भी टीवी विज्ञापन से ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं।

सेलिब्रिटी से ज्यादा इन्फ्लुएंसर पर भरोसा

Gen Z की मार्केटिंग में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर, करोड़ों के मेहनताने वाले सेलिब्रिटी से ज्यादा असरदार हैं।

आंकड़े बताते हैं कि 87% Gen Z उपभोक्ता इन्फ्लुएंसर की सिफारिश पर प्रॉडक्ट खरीदने को तैयार होते हैं, यह प्रतिशत Millennials (78%) और Gen X (77%) से काफी अधिक है। 77% Gen Z ने वास्तव में किसी इन्फ्लुएंसर की सिफारिश के बाद खरीदारी की है। एक अन्य अध्ययन बताता है कि 82.4% Gen Z उपभोक्ता इन्फ्लुएंसर कंटेंट के जरिए नए प्रॉडक्ट खोजते हैं।

वैश्विक सलाहकार फर्म अर्नस्ट एंड यंग (EY) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग का मार्केट 2026 तक ₹3,375 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, 18% की CAGR से बढ़ता हुआ। 47% ब्रैंड्स अब माइक्रो और नैनो इन्फ्लुएंसर को प्राथमिकता देते हैं क्योंकि ये कम खर्च में दर्शकों के साथ ज्यादा भरोसेमंद और वास्तविक जुड़ाव बनाने में सक्षम होते हैं।

Nykaa ने अपनी रणनीति में क्रांतिकारी बदलाव करते हुए सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की जगह 200+ ब्यूटी माइक्रो-इन्फ्लुएंसर से साझेदारी की, हर एक के 10,000 से 50,000 फॉलोअर्स। नतीजा? Q2 FY25 में Nykaa का मार्केटिंग खर्च साल-दर-साल 40% बढ़ा। boAt ने भी युवा कंटेंट क्रिएटर्स के साथ साझेदारी कर अपनी अलग ब्रांड पहचान बनाई है और आज यह भारत के सबसे लोकप्रिय ऑडियो ब्रैंड्स में से एक बन चुका है।

पारंपरिक विज्ञापन से कंटेंट मार्केटिंग की ओर

Gen Z सीधे विज्ञापन से बचती है, लेकिन वही बात अगर मनोरंजक कहानी के रूप में आए तो वे उसे पसंद करते हैं और शेयर करते हैं।

Zomato इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। कंपनी का #EnjoyLargeMealsOnZomato अभियान रील्स पर हास्य और भावनात्मक कहानी कहने के अनोखे मिश्रण की वजह से काफी लोकप्रिय हुआ। सोशल मीडिया पर Zomato की मौजूदगी- मीम्स, चुटीले जवाब और लोगों से जुड़ने वाला कंटेंट, Gen Z से किसी दोस्त की तरह संवाद करती है, किसी पारंपरिक ब्रैंड की तरह नहीं।

वहीं, Mamaearth और Swiggy ने भी ब्रैंडेड कंटेंट, रील्स और पॉडकास्ट जैसे माध्यमों का इस्तेमाल कर अपनी बात Gen Z की भाषा में पहुंचाई। Myntra ने Gen Z क्रिएटर्स के साथ मिलकर फैशन हॉल वीडियो और स्टाइलिंग टिप्स के जरिए खुद को एक ऐसे ब्रैंड के रूप में स्थापित किया है, जिससे युवा आसानी से जुड़ाव महसूस करते हैं।

पर्सनलाइजेशन और AI: हर किसी के लिए अलग अनुभव

Gen Z अब हर चीज़ में व्यक्तिगत अनुभव चाहती है। Netflix की व्यक्तिगत पसंद के आधार पर दी जाने वाली सिफारिशें, Spotify की ‘Discover Weekly’ प्लेलिस्ट और Amazon के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित उत्पाद सुझाव Gen Z को यह महसूस कराते हैं कि यह प्लेटफॉर्म खास तौर पर उसी के लिए बनाया गया है।

आज 41% Gen Z ऑनलाइन जानकारी खोजने के लिए Google से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लेती है। इसका सीधा मतलब है कि ब्रैंड्स को अपनी AI और कंटेंट रणनीति ऐसी बनानी होगी, जो हर प्लेटफॉर्म के अनुरूप हो और वहां के उपयोगकर्ताओं के व्यवहार के हिसाब से काम करे।

Purpose-Driven Branding: सिर्फ प्रॉडक्ट नहीं, विचारधारा बेचें

Gen Z के लिए किसी ब्रैंड का "क्या" जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उसका "क्यों" भी है। यानी यह पीढ़ी सिर्फ उत्पाद नहीं देखती, बल्कि यह भी जानना चाहती है कि ब्रैंड किन मूल्यों और सिद्धांतों के साथ खड़ा है। Morning Consult के एक सर्वे के अनुसार, 83% Gen Z उपभोक्ता उन्हीं ब्रैंड्स को चुनना पसंद करते हैं, जिनके मूल्य और सोच उनके अपने विचारों से मेल खाते हों। वहीं, Nielsen की 2025 की रिपोर्ट बताती है कि 73% Gen Z उपभोक्ता पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ उत्पादों के लिए अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार हैं। यह आंकड़ा 2024 की तुलना में 5% अधिक है।

वैश्विक स्तर पर Patagonia और Ben & Jerry's जैसे ब्रैंड पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के कारण Gen Z की पसंद बने हुए हैं। भारत में Tata Consumer Products की कुछ पहलें और Mamaearth की ‘टॉक्सिन-फ्री’ तथा ‘प्राकृतिक’ उत्पादों पर आधारित ब्रैंडिंग भी इसी सोच को दर्शाती है।

विविधता (Diversity), समावेशिता (Inclusion) और सामाजिक जिम्मेदारी (Social Responsibility) अब सिर्फ मार्केटिंग के आकर्षक नारे नहीं रह गए हैं, बल्कि Gen Z इन्हीं मानकों पर किसी ब्रैंड की विश्वसनीयता और पहचान को परखती है।

ई-कॉमर्स से सोशल कॉमर्स तक: खरीदारी अब स्क्रॉल में होती है

Instagram Shopping, YouTube Shopping और Live Commerce ने खरीदारी के तरीके को बदल दिया है। 52% Gen Z (18-29 आयु वर्ग) पहले से ही सोशल प्लेटफॉर्म पर सीधे खरीदारी कर चुके हैं। भारत में 97.4% सोशल मीडिया उपयोगकर्ता स्मार्टफोन से प्लेटफॉर्म एक्सेस करते हैं, यानी यहां का मार्केट पूरी तरह मोबाइल-फर्स्ट है।

Quick Commerce, जैसे Zomato Blinkit और Swiggy Instamart, Gen Z की "अभी चाहिए" मानसिकता को पूरी तरह से कैप्चर करता है।

चुनौतियां: Gen Z को जीतना आसान नहीं

इतने अवसरों के बावजूद, Gen Z तक पहुंचना और उन्हें बनाए रखना कठिन है:

चयनात्मक ध्यान (Selective Attention): Gen Z का ध्यान कम नहीं हुआ है, बल्कि वह बहुत चयनात्मक हो गया है। McKinsey की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z का "सिर्फ 8 सेकंड का ध्यान" होने वाली धारणा एक मिथक है। हकीकत यह है कि यह पीढ़ी गैर-जरूरी या उबाऊ कंटेंट को तुरंत छोड़ देती है, लेकिन अगर कोई विषय उसे पसंद आ जाए तो उस पर घंटों समय बिताती है। आंकड़ों के मुताबिक, 59% Gen Z पहले किसी विषय पर शॉर्ट वीडियो देखती है और फिर उसी विषय पर विस्तार से जानकारी पाने के लिए लंबा कंटेंट तलाशती है।

विज्ञापन थकान (Ad Fatigue): Gen Z सोशल मीडिया पर काफी समय बिताती है। 61% युवा देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हैं, लेकिन 55% ऐसे भी हैं जिन्होंने कभी न कभी सोशल मीडिया से दूरी बनाने के लिए ‘सोशल मीडिया डिटॉक्स’ अपनाया है। इसका मतलब है कि यह पीढ़ी जरूरत से ज्यादा मार्केटिंग और विज्ञापनों को पहचान लेती है और उनसे बचने की कोशिश करती है।

ब्रैंड निष्ठा की कमी (Lack of Brand Loyalty): यह पीढ़ी पारंपरिक और स्थापित ब्रैंड्स के बजाय नए रुझानों और नवाचारों को ज्यादा महत्व देती है। BCG-Snap रिपोर्ट के अनुसार, Gen Z नए और अलग तरह के उत्पादों को आजमाने में अधिक रुचि रखती है। इसलिए किसी एक ब्रैंड के प्रति लंबे समय तक वफादार बने रहना इस पीढ़ी की खासियत नहीं है।

विश्वसनीयता की कड़ी कसौटी (Authenticity Test): Gen Z किसी भी ब्रैंड या इन्फ्लुएंसर की वास्तविकता को बहुत जल्दी परख लेती है। अगर उसे जरा भी महसूस हो कि कोई प्रचार सिर्फ पैसे लेकर किया गया है या उसमें ईमानदारी की कमी है, तो वह तुरंत उस ब्रैंड या इन्फ्लुएंसर पर से भरोसा खो देती है। इसलिए इस पीढ़ी के साथ जुड़ने के लिए प्रामाणिकता और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण हैं।

भविष्य की दिशा: AI इन्फ्लुएंसर, AR/VR और गेमिंग मार्केटिंग का बढ़ता प्रभाव

2026 के बाद मार्केटिंग की दुनिया और भी तेजी से बदलने वाली है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से संचालित वर्चुअल इन्फ्लुएंसर वैश्विक मार्केट में अपनी जगह बना रहे हैं और कई ब्रैंड्स इन्हें अपने प्रचार अभियानों में शामिल कर रहे हैं। वहीं, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और वर्चुअल रियलिटी (VR) आधारित सुविधाएं, जैसे Myntra का वर्चुअल फिटिंग रूम, खरीदारी के अनुभव को अधिक वास्तविक और आकर्षक बना रही हैं। इसके अलावा, गेमिंग मार्केटिंग भी तेजी से उभर रहा क्षेत्र है, जहां ब्रैंड्स गेम्स के भीतर विज्ञापनों और प्रायोजित आयोजनों के जरिए Gen Z गेमर्स तक अपनी पहुंच बना रहे हैं।

EY की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की क्रिएटर इकोनॉमी का आकार 2024 में करीब 12,500 करोड़ रुपये था, जिसके 2030 तक बढ़कर 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, BCG की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय क्रिएटर इकोनॉमी 2030 तक उपभोक्ता खर्च को 1 ट्रिलियन डॉलर तक प्रभावित कर सकती है, जो इसकी बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

दरअसल, Gen Z ने मार्केटिंग के पुराने नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। अब ब्रैंड्स सिर्फ उत्पाद नहीं बेचते, बल्कि रिश्ते, अनुभव और भरोसा बेचते हैं। जो ब्रैंड इस पीढ़ी से दोस्त की तरह संवाद करना सीखेगा, उनकी भाषा और संस्कृति को समझेगा, सामाजिक मुद्दों पर अपनी जिम्मेदारी दिखाएगा और माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स की ताकत का सही इस्तेमाल करेगा, वही आने वाले वर्षों में मार्केट में बढ़त हासिल कर सकेगा।

भारत में 37.7 करोड़ से अधिक Gen Z उपभोक्ता हैं। 2035 तक उनकी सामूहिक खर्च करने की क्षमता 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और वे रोजाना औसतन चार घंटे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बिताते हैं। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि Gen Z सिर्फ एक उपभोक्ता वर्ग नहीं है, बल्कि वह पीढ़ी है जो आने वाले समय में मार्केट और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगी।

 

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हवास मीडिया नेटवर्क ने स्पर्श गांगुली को बनाया ट्रेडिंग का हेड

हवास मीडिया नेटवर्क (Havas Media Network India) ने अपने नेतृत्व दल को मजबूत करते हुए स्पर्श गांगुली (Sparsh Ganguli) को हेड ऑफ ट्रेडिंग (Head of Trading) नियुक्त किया है

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Published - Friday, 10 July, 2026
Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
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हवास मीडिया नेटवर्क (Havas Media Network India) ने अपने नेतृत्व दल को मजबूत करते हुए स्पर्श गांगुली (Sparsh Ganguli) को ट्रेडिंग का हेड (Head of Trading) नियुक्त किया है। वह मुंबई से काम करेंगे और सीधे कंपनी के सीईओ मोहित जोशी को रिपोर्ट करेंगे। स्पर्श पूरे भारत में Havas Media Network India के ट्रेडिंग ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।

कंपनी ने बताया कि अपनी नई भूमिका में स्पर्श गांगुली का मुख्य फोकस रणनीतिक मीडिया साझेदारियों (Strategic Media Partnerships) को मजबूत करने और ट्रेडिंग क्षमताओं को बेहतर बनाकर कंपनी के व्यावसायिक प्रदर्शन (Commercial Excellence) को नई ऊंचाई तक ले जाने पर रहेगा।

स्पर्श गांगुली के पास मीडिया, ऐडवर्टाइजिंग व एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है। Havas से जुड़ने से पहले वह Astus Group में कंट्री हेड- इंडिया के पद पर कार्यरत थे।

इससे पहले उन्होंने Matrix Publicities and Media India Pvt. Ltd. (WPP Group) में 12 साल से ज्यादा समय तक बिजनेस हेड के रूप में काम किया और कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अपने करियर के दौरान स्पर्श GroupM ESP, Sahara One Media & Entertainment, Sony Entertainment Television और Star TV जैसी प्रमुख कंपनियों में भी नेतृत्व की जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उन्हें मीडिया ट्रेडिंग, मीडिया बाइंग, मीडिया सेल्स, डिजिटल रणनीति, रणनीतिक साझेदारियों और बिजनेस मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।

इस नियुक्ति पर Havas Media Network India के सीईओ मोहित जोशी ने कहा कि स्पर्श गांगुली का कंपनी में स्वागत करते हुए उन्हें बेहद खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रेडिंग, रणनीतिक साझेदारियों और बिजनेस लीडरशिप में उनका लंबा अनुभव कंपनी की लीडरशिप टीम को और मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि Havas Media Network India अपने ग्राहकों के लिए इंटीग्रेटेड सेवाओं को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में स्पर्श की विशेषज्ञता मजबूत मीडिया साझेदारियां बनाने, बेहतर व्यावसायिक प्रदर्शन हासिल करने और कंपनी की विकास यात्रा को तेज करने में अहम भूमिका निभाएगी।

वहीं, अपनी नई जिम्मेदारी पर स्पर्श गांगुली ने कहा कि Havas Media Network India ऐसे समय में जॉइन करके वह काफी उत्साहित हैं, जब कंपनी तेजी से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि Havas ने अपनी इंटीग्रेटेड कार्यशैली, उद्यमशील संस्कृति और ग्राहकों के लिए बेहतर कारोबारी परिणाम देने की प्रतिबद्धता के कारण उद्योग में मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने भरोसा जताया कि वह कंपनी की टीमों के साथ मिलकर मीडिया इकोसिस्टम में साझेदारियों को और मजबूत करेंगे तथा ग्राहकों और अन्य हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने की दिशा में काम करेंगे।

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ट्रैवल सेक्टर में बड़ा सौदा : नवीन कुंडू ने VOYAGE 1 का अधिग्रहण किया

नवीन कुंडू ने दुबई स्थित VOYAGE 1 में बहुमत हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है। इसके साथ ही कंपनी का एकीकरण उनके डेस्टिनेशन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म Tourism Futures.AI के साथ किया जाएगा।

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Published - Friday, 10 July, 2026
Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
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ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुभवी पेशेवर नवीन कुंडू (Naveen Kundu) ने दुबई (Dubai) स्थित ट्रैवल मैनेजमेंट कंपनी वॉयेज 1 (VOYAGE 1) में बहुमत हिस्सेदारी (Majority Stake) का अधिग्रहण कर लिया है। इस सौदे के तहत वॉयेज 1 (VOYAGE 1) का एकीकरण उनके डेस्टिनेशन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म टूरिज्म फ्यूचर्स.एआई (Tourism Futures.AI) के साथ किया जाएगा।

नई स्वामित्व संरचना (Ownership Structure) के तहत नवीन कुंडू (Naveen Kundu) कंपनी के चेयरमैन (Chairman of the Board) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) के रूप में एकीकृत कारोबार का नेतृत्व करेंगे। इस दौरान वह कंपनी की संस्थापक टीम के साथ मिलकर काम करेंगे।

वॉयेज 1 (VOYAGE 1) की स्थापना विशाल धनसिंघानी (Vishal Dhansinghani) और अमित कुमार (Amit Kumar) ने की थी। कंपनी ने डेस्टिनेशन मैनेजमेंट (Destination Management) और वैश्विक यात्रा सेवाओं के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।

इस एकीकरण पर नवीन कुंडू (Naveen Kundu) ने कहा, "डेस्टिनेशन मैनेजमेंट की पारंपरिक संरचना अब बड़े बदलाव के लिए तैयार है। लविन (Lavin), अमित (Amit) और विशाल (Vishal) द्वारा विकसित मजबूत परिचालन नेटवर्क को Tourism Futures.AI की इंटेलिजेंट ऑटोमेशन (Intelligent Automation) क्षमताओं के साथ जोड़कर हम दुनिया का पहला वास्तविक स्मार्ट डेस्टिनेशन मैनेजमेंट कंपनी (Smart DMC) नेटवर्क बना रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि वॉयेज 1 (VOYAGE 1) केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डेटा आधारित इंटेलिजेंस (Data-driven Intelligence) के जरिए बाजार की मांग का पूर्वानुमान लगाएगा, अपने बी2बी (B2B) डिस्ट्रीब्यूशन पार्टनर्स को ग्राहक अधिग्रहण (Customer Acquisition) बढ़ाने में मदद करेगा और विभिन्न महाद्वीपों में बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराएगा।

इस अधिग्रहण को ट्रैवल टेक्नोलॉजी (Travel Technology) और डेस्टिनेशन मार्केटिंग (Destination Marketing) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित समाधान वैश्विक यात्रा उद्योग को नई दिशा देने की ओर बढ़ रहे हैं।

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विशाल एन. शर्मा ने संभाली ''J Brrothers'' की भारत संचालन की कमान

जियोस्टार (JioStar) के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर विशाल एन. शर्मा (Vishal N Sharma) को अमेरिकी कैनाबिस कंपनी J Brrothers LLC ने भारत संचालन का प्रमुख नियुक्त किया है।

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Friday, 10 July, 2026
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जियोस्टार (JioStar) के पूर्व मार्केटिंग डायरेक्टर विशाल एन. शर्मा (Vishal N Sharma) को अमेरिकी कैनाबिस कंपनी जे ब्रदर्स एलएलसी (J Brrothers LLC) ने भारत में अपने परिचालन का प्रमुख (Head of India Operations) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति के तहत भारत में अपने संचालन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशाल एन. शर्मा (Vishal N Sharma) के पास मीडिया (Media), टेलीकम्युनिकेशंस (Telecommunications), फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals), कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics) और एफएमसीजी (FMCG) सहित विभिन्न क्षेत्रों में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने रेवेन्यू ग्रोथ (Revenue Growth), ब्रांड ट्रांसफॉर्मेशन (Brand Transformation), आईपी मोनेटाइजेशन (IP Monetization) और मार्केट एक्सपेंशन (Market Expansion) जैसे क्षेत्रों में काम किया है।

उन्होंने सन फार्मा (Sun Pharma), ग्लेनमार्क (Glenmark), जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson), द संदेश लिमिटेड (The Sandesh Limited), यूनिनॉर (Uninor), वीडियोकॉन (Videocon) और ओप्पो (OPPO) जैसी कंपनियों में भी विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं।

जे ब्रदर्स एलएलसी (J Brrothers LLC) अमेरिका की अग्रणी कैनाबिस (Cannabis) कंपनियों में शामिल है, जो मेडिकल (Medical) और मनोरंजक उपयोग (Recreational) के लिए सुरक्षित, किफायती और टिकाऊ उत्पाद उपलब्ध कराती है। कंपनी अपनी वैश्विक विकास रणनीति के तहत भारत में अपने परिचालन का विस्तार कर रही है।

नई जिम्मेदारी पर विशाल एन. शर्मा (Vishal N Sharma) ने कहा, "मैं कंपनी के विकास के इस महत्वपूर्ण चरण में इस गतिशील अमेरिकी संगठन से जुड़कर उत्साहित हूं। भारत में प्रतिभा, नवाचार और परिचालन क्षमताओं की अपार संभावनाएं हैं। मेरी प्राथमिकता एक विश्वस्तरीय संगठन तैयार करना है, जो ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग (Branding & Marketing), इन्वेंटरी मैनेजमेंट (Inventory Management), फाइनेंस (Finance), रिपोर्टिंग (Reporting) और डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) को एकीकृत कर व्यवसाय को अधिक चुस्त, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाए।"

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Havas ने स्पेन की एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग एजेंसी MUT का किया अधिग्रहण

ग्लोबल कम्युनिकेशन ग्रुप Havas ने स्पेन की बार्सिलोना स्थित एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और सस्टेनेबल इवेंट्स में एक्सपर्ट एजेंसी MUT के अधिग्रहण की घोषणा की है।

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Published - Thursday, 09 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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ग्लोबल कम्युनिकेशन ग्रुप Havas ने स्पेन की बार्सिलोना स्थित एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और सस्टेनेबल इवेंट्स में एक्सपर्ट एजेंसी MUT के अधिग्रहण की घोषणा की है। इस सौदे के जरिए Havas स्पेन में अपनी एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग सेवाओं को और मजबूत करेगा। साथ ही कंपनी अब अपने ग्राहकों को ब्रांड एक्सपीरियंस और लाइव इवेंट्स के जरिए लोगों से बेहतर जुड़ने में और अधिक मदद कर सकेगी।

साल 2010 में CEO नाचो गोमेज (Nacho Gómez) द्वारा स्थापित MUT में करीब 30 विशेषज्ञों की टीम काम करती है। एजेंसी ने कई बड़े और प्रभावशाली प्रोजेक्ट्स पूरे किए हैं। MUT खुद को "Positive Creativity" पार्टनर के रूप में पेश करती है और ऐसे ब्रांड एक्सपीरियंस व इवेंट्स तैयार करती है, जिनसे समाज, पर्यावरण और कारोबार—तीनों पर सकारात्मक असर पड़े।

रणनीति, रचनात्मकता और इनोवेशन को साथ लेकर काम करने वाली MUT ब्रांड्स, लोगों और समाज के लिए लंबे समय तक मूल्य बनाने पर ध्यान देती है। एजेंसी के प्रमुख क्लाइंट्स में Audi, Freixenet, T-Systems, Bodegas Torres, Veepee, Totogi, NTT DATA और Zurich Seguros जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। स्पेन में MUT को देश की प्रमुख इवेंट एजेंसियों में गिना जाता है।

अधिग्रहण के बाद MUT को Havas Spain में शामिल किया जाएगा। इससे Havas की ब्रांड एक्सपीरियंस, लाइव इवेंट्स और सस्टेनेबल इवेंट सॉल्यूशंस से जुड़ी क्षमताएं और मजबूत होंगी। कंपनी का कहना है कि यह सौदा स्पेन में उसकी ग्रोथ रणनीति का अहम हिस्सा है, क्योंकि स्पेन Havas के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है।

इस अधिग्रहण के बाद भी नाचो गोमेज MUT के CEO बने रहेंगे। इससे कंपनी के मौजूदा बिजनेस मॉडल और उसकी अलग पहचान को बरकरार रखा जाएगा।

Havas के चेयरमैन और CEO यानिक बोलोरे (Yannick Bolloré) ने कहा कि उन्हें नाचो गोमेज और पूरी MUT टीम का Havas परिवार में स्वागत करते हुए खुशी हो रही है। उन्होंने कहा कि एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग और लाइव इवेंट्स में MUT की मजबूत विशेषज्ञता Havas की उस रणनीति से पूरी तरह मेल खाती है, जिसके तहत कंपनी तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रही है। उनके मुताबिक, इस साझेदारी से स्पेन में Havas की एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग सेवाएं और मजबूत होंगी तथा ग्राहकों को बेहतर कंटेंट और प्रभावशाली अनुभवों के जरिए लोगों से गहरा जुड़ाव बनाने में मदद मिलेगी।

Havas Spain के CEO जॉर्ज इरिजार (Jorge Irizar) ने कहा कि सस्टेनेबल इवेंट्स के क्षेत्र में MUT की मजबूत पहचान है और यह एजेंसी आइडिया से लेकर उसे सफलतापूर्वक लागू करने तक बेहतरीन काम करती है। उन्होंने कहा कि यह अधिग्रहण Havas की विविधीकरण रणनीति को मजबूत करेगा और ग्राहकों को पहले से अधिक व्यापक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

वहीं MUT के CEO नाचो गोमेज ने कहा कि Havas से जुड़ना उनकी कंपनी के लिए एक स्वाभाविक कदम है। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियां लगातार बदलती दुनिया में ब्रांड बनाने की एक जैसी सोच रखती हैं। उनके मुताबिक, शुरुआत से ही MUT का मानना रहा है कि रचनात्मकता और बेहतरीन अनुभव न सिर्फ ब्रांड्स के लिए मूल्य पैदा करते हैं, बल्कि समाज पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। उन्होंने कहा कि Havas जैसा साझेदार मिलने से उन्हें भविष्य को लेकर भरोसा है और दोनों कंपनियां मिलकर एक्सपीरिएंशियल मार्केटिंग को ब्रांड्स की ग्रोथ, लोगों से बेहतर जुड़ाव और सकारात्मक बदलाव का मजबूत माध्यम बना सकेंगी।

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रेमंड ग्रुप ने शालिनी सिंह को हेड- कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस बनाया

रेमंड ग्रुप (Raymond Group) ने शालिनी सिंह (Shalini Singh) को हेड – कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस नियुक्त किया है। वह कंपनी की रणनीतिक संचार, प्रतिष्ठा प्रबंधन और स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट का नेतृत्व करेंगी।

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Published - Thursday, 09 July, 2026
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Thursday, 09 July, 2026
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रेमंड ग्रुप (Raymond Group) ने 7 मई 2026 से शालिनी सिंह (Shalini Singh) को हेड – कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Head – Corporate Communications) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह समूह के कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस फंक्शन का नेतृत्व करेंगी और रणनीतिक संचार (Strategic Communications), प्रतिष्ठा प्रबंधन (Reputation Management) तथा स्टेकहोल्डर एंगेजमेंट (Stakeholder Engagement) को मजबूत बनाने पर काम करेंगी।

अपनी नियुक्ति की घोषणा करते हुए शालिनी सिंह (Shalini Singh) ने कहा, "रेमंड ग्रुप (Raymond Group) में हेड – कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस के रूप में नई शुरुआत करना मेरे लिए सम्मान की बात है। उत्कृष्टता, नवाचार और उद्देश्य की समृद्ध विरासत वाले रेमंड के साथ जुड़ना एक रोमांचक अवसर है। मैं नेतृत्व टीम, सहयोगियों और स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर भरोसा, मजबूत प्रतिष्ठा, उद्देश्यपूर्ण स्टोरीटेलिंग और रणनीतिक संचार के माध्यम से कंपनी की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए उत्साहित हूं।"

शालिनी सिंह (Shalini Singh) के पास कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस, पब्लिक अफेयर्स (Public Affairs), सस्टेनेबिलिटी (Sustainability) और प्रतिष्ठा प्रबंधन के क्षेत्र में 27 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने रिन्यूएबल एनर्जी (Renewables), पावर (Power), सीमेंट (Cement), ऑटोमोटिव (Automotive), फार्मास्यूटिकल्स (Pharmaceuticals), आईटी (IT), टेलीकॉम (Telecom), टेक्सटाइल्स (Textiles) और गारमेंट्स (Garments) सहित कई उद्योगों में काम किया है।

रेमंड ग्रुप (Raymond Group) से पहले वह आरपीजी ग्रुप (RPG Group), होल्सिम इंडिया (Holcim India), अडानी ग्रुप (Adani Group), टाटा पावर (Tata Power) सहित कई प्रमुख कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुकी हैं।

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डेंट्सू -मेटा की साझेदारी: AI से बदलेगी इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग

डेंट्सू (Dentsu) ने मेटा (Meta) के साथ रणनीतिक साझेदारी कर AI और API आधारित नया क्रिएटर मार्केटिंग फ्रेमवर्क पेश किया है, जिससे ब्रांड्स बड़े पैमाने पर इन्फ्लुएंसर अभियानों का बेहतर प्रबंधन कर सकेंगे।

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Published - Wednesday, 08 July, 2026
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Wednesday, 08 July, 2026
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डिजिटल मार्केटिंग में तेजी से बढ़ती क्रिएटर इकॉनमी (Creator Economy) के बीच डेंट्सू (Dentsu) ने मेटा (Meta) के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस पहल का उद्देश्य ब्रांड्स को बड़े पैमाने पर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग (Influencer Marketing) अभियानों का अधिक प्रभावी ढंग से संचालन, निगरानी और मूल्यांकन करने में मदद करना है।

आज कंपनियां केवल कुछ बड़े इन्फ्लुएंसर्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सैकड़ों और हजारों माइक्रो (Micro) तथा नैनो (Nano) क्रिएटर्स के साथ अभियान चला रही हैं। ऐसे में सही क्रिएटर्स की पहचान, अभियान प्रबंधन और प्रदर्शन का विश्लेषण करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, डेंट्सू (Dentsu) ने मेटा (Meta) के API और तकनीकी क्षमताओं का उपयोग करते हुए एक उन्नत क्रिएटर मार्केटिंग फ्रेमवर्क विकसित किया है। यह सिस्टम ब्रांड्स को उपयुक्त क्रिएटर्स की पहचान करने, अभियान शुरू करने और डेटा आधारित तरीके से उनके प्रदर्शन का आकलन करने में मदद करेगा। इससे इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और बड़े स्तर पर संचालित की जा सकेगी।

डेंट्सू (Dentsu) पहले से ही अपने AI आधारित प्लेटफॉर्म 'क्रिएटर एंड ट्रेंड्स स्टूडियो (Creator & Trends Studio-CATS)' का उपयोग कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म दर्शकों की रुचि, कंटेंट की थीम और सोशल मीडिया पर उभरते ट्रेंड्स का विश्लेषण कर उपयुक्त क्रिएटर्स की पहचान करता है। इससे ब्रांड्स बदलते डिजिटल रुझानों के अनुरूप सही समय पर सही दर्शकों तक पहुंचने में सक्षम होते हैं।

इस मॉडल को कई वैश्विक कंपनियां पहले ही अपना चुकी हैं। गालडर्मा (Galderma) और एलिजाबेथ आर्डेन (Elizabeth Arden) ने इस तकनीक का उपयोग कर विज्ञापन प्रदर्शन, ब्रांड रिकॉल और बिक्री में सकारात्मक परिणाम हासिल किए हैं। वहीं लॉरियल (L'Oréal) हर वर्ष लगभग पांच लाख क्रिएटर्स के साथ काम करती है, जबकि यूनिलीवर (Unilever) ने फीफा विश्व कप (FIFA World Cup) अभियान के दौरान करीब 50 हजार इन्फ्लुएंसर्स को जोड़ा था।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की सफलता केवल अधिक क्रिएटर्स के साथ जुड़ने में नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) और ऑटोमेशन (Automation) के जरिए उनके प्रभावी प्रबंधन में होगी। ऐसे में डेंट्सू (Dentsu) और मेटा (Meta) की यह साझेदारी डिजिटल विज्ञापन उद्योग में इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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आज शाम 6 बजे होगा अतुल हेगड़े का अंतिम संस्कार

YAAP Digital के संस्थापक एवं चेयरमैन अतुल हेगड़े (Atul Hegde) का अंतिम संस्कार मंगलवार शाम मुंबई में किया जाएगा। परिवार ने अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार का कार्यक्रम जारी किया है।

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Published - Tuesday, 07 July, 2026
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Tuesday, 07 July, 2026
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YAAP Digital के संस्थापक एवं चेयरमैन अतुल हेगड़े (Atul Hegde) का अंतिम संस्कार मंगलवार शाम मुंबई (Mumbai) में किया जाएगा। उनके परिवार की ओर से जारी बयान के अनुसार, अंतिम यात्रा शाम 5:00 बजे अंधेरी पश्चिम (Andheri West) स्थित ओबेरॉय स्प्रिंग्स (Oberoi Springs) स्थित उनके निवास से शुरू होगी।

परिवार के अनुसार, अंतिम संस्कार की रस्में शाम 6:00 बजे ओशिवारा हिंदू श्मशान भूमि (Oshiwara Hindu Smashan Bhoomi) के साउथ गेट (South Gate) पर संपन्न होंगी। अतुल हेगड़े (Atul Hegde) का सुबह हृदयाघात (Heart Attack) के कारण निधन हो गया था। उन्होंने सुबह करीब 8 बजे अंतिम सांस ली। 

अतुल हेगड़े (Atul Hegde) भारतीय विज्ञापन (Advertising), डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) और स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रमुख नामों में शामिल थे। दो दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस लीडर, उद्यमी और निवेशक के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्होंने YAAP Digital की स्थापना की और इसे भारत सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंटेंट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग (Influencer Marketing), डिजिटल मीडिया (Digital Media), डेटा और टेक्नोलॉजी आधारित मार्केटिंग समाधानों वाली एक प्रमुख कंपनी के रूप में विकसित किया।

YAAP Digital के अलावा वह शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स और निवेश गतिविधियों से भी जुड़े रहे। रेनमेकर वेंचर्स (Rainmaker Ventures) के सह-संस्थापक के रूप में उन्होंने कई उभरते उद्यमों का मार्गदर्शन और समर्थन किया।

हाल के वर्षों में उनके नेतृत्व में YAAP Digital ने उल्लेखनीय वित्तीय प्रदर्शन किया। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में कंपनी का कर पश्चात लाभ (Profit After Tax-PAT) लगभग दोगुना हो गया था। अतुल हेगड़े (Atul Hegde) का लक्ष्य एक स्वदेशी, फुल-स्टैक और टेक्नोलॉजी-संचालित एजेंसी नेटवर्क तैयार करना था।

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FY26 में सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) का मुनाफा 16% बढ़ा

सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) ने FY26 में 16% की मुनाफे की वृद्धि दर्ज की। एशिया कप 2025, मजबूत विज्ञापन आय और कंटेंट पर नियंत्रित खर्च ने कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बनाया।

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Published - Tuesday, 07 July, 2026
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Tuesday, 07 July, 2026
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सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India-SPNI) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अपने समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) में 16 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की है। द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया कप 2025 (Asia Cup 2025), विज्ञापन आय में बढ़ोतरी और कंटेंट पर अनुशासित खर्च ने कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को मजबूत किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ FY26 में बढ़कर 556 करोड़ रुपये हो गया, जो FY25 में 481 करोड़ रुपये था। वहीं परिचालन से प्राप्त राजस्व (Revenue from Operations) 9 प्रतिशत बढ़कर 6,830 करोड़ रुपये और कुल आय (Total Income) 9.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7,064 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी के बेहतर प्रदर्शन में उसके स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो (Sports Portfolio) की अहम भूमिका रही। विशेष रूप से एशिया कप 2025 (Asia Cup 2025), जिसमें भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच तीन मुकाबले खेले गए और भारत ने खिताब जीता, ने टेलीविजन विज्ञापन बाजार में मजबूत मांग पैदा की।

एसपीएनआई (SPNI) ने 2024 में एशियन क्रिकेट काउंसिल (Asian Cricket Council-ACC) के 2031 तक के मीडिया अधिकार लगभग 17 करोड़ डॉलर (170 million dollars) में हासिल किए थे। इससे कंपनी को इस अवधि के दौरान कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंटों के प्रसारण अधिकार प्राप्त हुए।

कंपनी ने अपने स्पोर्ट्स निवेश से बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए भारत (India) के क्रिकेट दौरों के डिजिटल स्ट्रीमिंग अधिकार जियोहॉटस्टार (JioHotstar) को सब-लाइसेंस भी किए। इस व्यवस्था में भारत-इंग्लैंड (India-England) टेस्ट सीरीज और बाद में जारी सीमित ओवरों की सीरीज भी शामिल रही। इससे कंपनी को स्पोर्ट्स अधिकारों पर होने वाले खर्च का एक हिस्सा वसूलने और डिजिटल दर्शकों तक व्यापक पहुंच बनाने में मदद मिली।

स्पोर्ट्स के अलावा कंपनी के नॉन-फिक्शन (Non-fiction) मनोरंजन कार्यक्रमों ने भी विज्ञापन आय बढ़ाने में योगदान दिया। कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati) और व्हील ऑफ फॉर्च्यून (Wheel of Fortune) जैसे कार्यक्रमों ने पूरे वर्ष विज्ञापनदाताओं को आकर्षित किया और नेटवर्क के टेलीविजन कारोबार को मजबूती दी।

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सब्सक्रिप्शन आय (Subscription Revenue) पर दबाव बना हुआ है। बदलती दर्शक आदतों और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स (Digital Streaming Platforms) की बढ़ती लोकप्रियता के कारण भारत का पेड-टीवी (Pay-TV) उद्योग लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (Sony Entertainment Television) सामान्य मनोरंजन (General Entertainment) श्रेणी में अपनी स्थिर मौजूदगी बनाए हुए है, लेकिन हिंदी फिक्शन (Hindi Fiction) कार्यक्रमों में उसे अभी भी बड़ी सफलता का इंतजार है, जहां प्रतिस्पर्धी ब्रॉडकास्टर्स का दबदबा बना हुआ है।

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2030 तक 36 अरब डॉलर के पार पहुंचेगा AI विज्ञापन बाजार

रिसर्च एंड मार्केट्स (Research and Markets) की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक AI विज्ञापन बाजार 2025 के 11.17 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 36.34 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।

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Published - Tuesday, 07 July, 2026
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Tuesday, 07 July, 2026
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वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित विज्ञापन बाजार आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ने वाला है। रिसर्च एंड मार्केट्स (Research and Markets) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 11.17 अरब डॉलर का यह बाजार 2030 तक बढ़कर 36.34 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस दौरान बाजार 26.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (Compound Annual Growth Rate-CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में ही AI आधारित विज्ञापन बाजार 14.12 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसका प्रमुख कारण ब्रांड्स द्वारा AI आधारित विज्ञापन टूल्स पर बढ़ता निवेश है, जिनका उपयोग मीडिया बाइंग (Media Buying) को स्वचालित करने, विज्ञापन अभियानों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को अधिक व्यक्तिगत अनुभव (Personalised Experience) देने के लिए किया जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल विज्ञापन खर्च (Digital Advertising Spend) में बढ़ोतरी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) का विस्तार, उपभोक्ता डेटा की बढ़ती उपलब्धता और मार्केटिंग ऑटोमेशन (Marketing Automation) को अपनाने से इस बाजार को मजबूती मिल रही है। AI का उपयोग विज्ञापन निवेश पर बेहतर रिटर्न (Return on Advertising Spend-ROAS) हासिल करने और अभियानों की दक्षता बढ़ाने के लिए भी किया जा रहा है।

आने वाले वर्षों में प्राइवेसी-अनुरूप विज्ञापन समाधान (Privacy-compliant Advertising Solutions), AI आधारित क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (Creative Optimisation), ओम्नीचैनल मार्केटिंग (Omnichannel Marketing), प्रेडिक्टिव ऑडियंस एनालिटिक्स (Predictive Audience Analytics) और रियल-टाइम कैंपेन इंटेलिजेंस (Real-time Campaign Intelligence) इस बाजार की वृद्धि को और गति देंगे। साथ ही प्रोग्रामेटिक एडवरटाइजिंग (Programmatic Advertising) और पर्सनलाइज्ड कैंपेन (Personalised Campaigns) भी प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर बने रहेंगे।

रिपोर्ट में सेल्सफोर्स (Salesforce) के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया है कि 81 प्रतिशत उपभोक्ता अधिक व्यक्तिगत अनुभव चाहते हैं। वहीं एसएपी (SAP) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका (United States) के 64 प्रतिशत खरीदारों का मानना था कि AI ने उनके रिटेल अनुभव को बेहतर बनाया है।

रिपोर्ट में प्रमुख टेक कंपनियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों का भी उल्लेख किया गया है। अमेज़न (Amazon) ने 2025 में AI आधारित वीडियो जेनरेटर (Video Generator) का उन्नत संस्करण लॉन्च किया, जिससे विज्ञापनदाता तेजी से वीडियो विज्ञापन तैयार कर सकते हैं। वहीं ऐपियर (Appier) ने अपनी जेनरेटिव AI क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एडक्रिएटिव.एआई (AdCreative.ai) का 3.87 करोड़ डॉलर (38.7 million dollars) में अधिग्रहण किया।

रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में गूगल (Google), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), मेटा (Meta), एडोबी (Adobe), अमेज़न (Amazon), अलीबाबा (Alibaba), सेल्सफोर्स (Salesforce), टिकटॉक (TikTok), द ट्रेड डेस्क (The Trade Desk) और नील्सन (Nielsen) जैसी कंपनियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।

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अतुल हेगड़े को अर्नब मित्रा की भावभीनी श्रद्धांजलि

अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने दिवंगत अतुल हेगड़े (Atul Hegde) को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ जुड़ी एक याद साझा की और कहा कि उन्होंने नेतृत्व का सबसे बड़ा सबक अतुल हेगड़े से सीखा।

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Published - Tuesday, 07 July, 2026
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Tuesday, 07 July, 2026
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दिवंगत विज्ञापन जगत के वरिष्ठ पेशेवर अतुल हेगड़े (Atul Hegde) को याद करते हुए अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने एक भावुक पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा कि अतुल हेगड़े उन दुर्लभ नेताओं में से थे, जो किसी की गलती सुधारते थे, लेकिन सामने वाले को कभी छोटा महसूस नहीं होने देते थे।

अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने 2007 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय उनकी टीम एक महत्वपूर्ण डेडलाइन पूरी नहीं कर पाई थी। उस प्रोजेक्ट की जवाबदेही अतुल हेगड़े (Atul Hegde) को दुबई (Dubai) में देनी थी। उस समय अर्नब बिजनेस हेड थे और अतुल कंपनी के सीईओ (CEO) थे।

उन्होंने स्वीकार किया कि गलती की जिम्मेदारी लेने के बजाय उन्होंने अपने एक जूनियर सहयोगी को अतुल हेगड़े के पास भेज दिया। हालांकि, अतुल ने उस कर्मचारी को वापस भेज दिया और अर्नब को स्वयं बुलाया।

अर्नब ने लिखा कि उन्हें लगा था कि उन्हें कड़ी फटकार मिलेगी, लेकिन इसके बजाय अतुल हेगड़े ने केवल एक बात कही, जिसने उनके नेतृत्व के नजरिए को हमेशा के लिए बदल दिया। उन्होंने कहा, "अपने जूनियर्स को कभी अपने सीनियर्स के सामने मत छोड़ो। नाम, शोहरत और शर्म—तीनों की जिम्मेदारी नेता की होती है।"

अर्नब मित्रा के अनुसार, यह बात किसी डांट से कहीं अधिक प्रभावशाली थी, क्योंकि अतुल हेगड़े केवल डेडलाइन की बात नहीं कर रहे थे, बल्कि उन्हें एक बेहतर नेता बनने का अर्थ समझा रहे थे।

उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिचय अतुल हेगड़े से केवल कॉरपोरेट दुनिया में नहीं था। दोनों मुंबई (Mumbai) के ओवल मैदान (Oval Maidan) में सीएजी शील्ड (CAG Shield) क्रिकेट टूर्नामेंट भी साथ खेलते थे। अर्नब जहां मीडियम फास्ट बॉलर थे, वहीं अतुल एक शांत और संयमित बल्लेबाज थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह अतुल क्रिकेट की पिच पर धैर्य और आत्मविश्वास के साथ खेलते थे, उसी तरह बोर्डरूम में भी उनका व्यक्तित्व संतुलित और प्रभावशाली रहता था।

अर्नब ने लिखा कि अतुल हेगड़े भारतीय विज्ञापन उद्योग के उस दौर का प्रतिनिधित्व करते थे, जब विचारों को समय देकर विकसित किया जाता था, काम की गुणवत्ता सर्वोपरि होती थी और नेतृत्व व्यवहार से सीखा जाता था।

अपनी श्रद्धांजलि के अंत में अर्नब मित्रा ने लिखा कि उन्होंने वर्षों तक अतुल हेगड़े की उस सीख को अपने हर संगठन और हर टीम में अपनाने की कोशिश की, लेकिन कभी उन्हें यह बता नहीं पाए कि उनके शब्दों ने उनके जीवन पर कितना गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा, "आराम से विश्राम करो, मेरे दोस्त। तुमने एक शानदार पारी खेली। मेरे लिए तुम हमेशा 'नॉट आउट' रहोगे।"

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