Bhaskar English में सुमित सिंह बने चीफ सब-एडिटर

दैनिक भास्कर समूह के अंग्रेजी न्यूज प्लेटफॉर्म Bhaskar English में पत्रकार सुमित सिंह ने चीफ सब-एडिटर के पद पर जिम्मेदारी संभाल ली है। उनकी नियुक्ति भोपाल में की गई है।

Last Modified:
Thursday, 04 June, 2026
SumitSingh5121


दैनिक भास्कर समूह के अंग्रेजी न्यूज प्लेटफॉर्म Bhaskar English में पत्रकार सुमित सिंह ने चीफ सब-एडिटर के पद पर जिम्मेदारी संभाल ली है। उनकी नियुक्ति भोपाल में की गई है।

Bhaskar English की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी। यह प्लेटफॉर्म दैनिक भास्कर के रिपोर्टर नेटवर्क के जरिए देश-दुनिया की खबरें अंग्रेजी पाठकों तक पहुंचाता है।  

Bhaskar English से जुड़ने से पहले सुमित सिंह दिल्ली में फ्रीलांस पत्रकार के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने Earth Journalism Network, Brussels Report, The Wire, Article 14, The Quint, Outlook India, The Week, Frontline, The New Indian Express, Newslaundry, Ground Report, Maktoob, NewsClick, The MookNayak, SheThePeopleTV, TwoCircles.net और The Probe सहित 25 से अधिक प्रकाशनों के लिए काम किया है।

दिसंबर 2024 में उन्होंने डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म The New Bengal Gazette की सह-स्थापना की थी। अपने करियर के दौरान उन्होंने फिलिस्तीन के विदेश मंत्री, नेपाल के जेन-ज़ी आंदोलन के एक नेता, इरोम शर्मिला और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के इंटरव्यू भी किए हैं।

सुमित सिंह इससे पहले Firstpost (Network18) में असिस्टेंट प्रोड्यूसर रह चुके हैं, जहां उन्होंने Firstpost Africa और Vantage with Palki Sharma जैसे कार्यक्रमों पर काम किया। इसके अलावा वह Mojo Story में भी विभिन्न भूमिकाओं में रहे और बरखा दत्त के कार्यक्रम Bottomline with Barkha से जुड़े रहे। वह Inside Out with Barkha Dutt पॉडकास्ट की लॉन्च टीम का भी हिस्सा थे।

उन्होंने DeKoder की चुनाव कवरेज टीम में भी काम किया है। सुमित सिंह को Earth Journalism Network की ओर से ग्रांट मिल चुकी है और वह 101Reporters, Asian-American Journalists Association, Millennium Fellowship तथा British Council के विभिन्न फेलोशिप कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे हैं।

उन्होंने AJK मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया से कन्वर्जेंट जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उनकी स्नातक शिक्षा हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई है। वह मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं। 

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दैनिक भास्कर डिजिटल में जयकिशोर सिंह बने 'Senior Manager-Government Business'

दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) डिजिटल ने जयकिशोर सिंह (Jaykishor Singh) को Senior Manager – Government Business नियुक्त किया है।

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
jaykishorsingh

दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) डिजिटल ने जयकिशोर सिंह (Jaykishor Singh) को सीनियर मैनेजर–गवर्नमेंट बिजनेस (Senior Manager – Government Business) नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।

जयकिशोर सिंह (Jaykishor Singh) ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh), उत्तराखंड (Uttarakhand), मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh), बिहार (Bihar) और झारखंड (Jharkhand) में कंपनी के सरकारी डिजिटल कारोबार (Government Digital Business) का नेतृत्व करेंगे।

जयकिशोर सिंह (Jaykishor Singh) इससे पहले मिर्ची (Mirchi) में ग्रुप मैनेजर (Group Manager) के पद पर कार्यरत थे। अपने करियर के दौरान वह एबीपी ग्रुप (ABP Group) के साथ भी जुड़े रहे हैं, जहां उन्होंने मीडिया और सरकारी कारोबार से संबंधित विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।

दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) डिजिटल में अपनी नई भूमिका में जयकिशोर सिंह सरकारी डिजिटल बिजनेस के विस्तार, रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करने और विभिन्न राज्यों में सरकारी अभियानों एवं डिजिटल पहलों को आगे बढ़ाने पर फोकस करेंगे।

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अशनीर ग्रोवर ने लॉन्च किया 'Fund My Staff', कर्मचारियों को मिलेगा आसान लोन

भारतपे (BharatPe) के सह-संस्थापक और 'शार्क टैंक इंडिया' के पूर्व निवेशक अशनीर ग्रोवर ने अपना नया फिनटेक स्टार्टअप 'Fund My Staff' लॉन्च किया है।

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
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भारतपे (BharatPe) के सह-संस्थापक और 'शार्क टैंक इंडिया' के पूर्व निवेशक अशनीर ग्रोवर ने अपना नया फिनटेक स्टार्टअप 'Fund My Staff' लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म का मकसद उन कर्मचारियों को आसानी से लोन दिलाना है, जिन्हें सीमित क्रेडिट हिस्ट्री या अन्य कारणों से बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने में परेशानी होती है।

अशनीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया के जरिए इस नए प्लेटफॉर्म की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह सेवा कंपनियों को अपने कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों में मदद करने का एक नया तरीका उपलब्ध कराएगी, बिना इस बोझ के कि कंपनी को खुद कर्मचारियों को लोन देना पड़े।

कैसे करेगा काम?

'Fund My Staff' के मॉडल में कंपनी खुद कर्मचारियों को लोन नहीं देगी। इसके बजाय कंपनी केवल गारंटर (Guarantor) की भूमिका निभाएगी। असली लोन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से पंजीकृत वित्तीय संस्थान देंगे।

इस प्रक्रिया में कर्मचारी प्लेटफॉर्म पर लोन के लिए आवेदन करेगा। इसके बाद कंपनी आवेदन की समीक्षा करेगी और तय करेगी कि कर्मचारी कितनी राशि तक लोन लेने का पात्र है। यदि कंपनी मंजूरी देती है, तो वह लोन चुकाने की गारंटी देगी। इसके बाद RBI से अधिकृत लेंडिंग पार्टनर कर्मचारी के खाते में लोन जारी करेगा। कर्मचारी बाद में हर महीने EMI के जरिए लोन चुकाएगा।

कंपनियों के लिए भी आसान व्यवस्था

प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनियां अपने कर्मचारियों को डिजिटल तरीके से जोड़ सकती हैं, उनके लिए लोन की सीमा तय कर सकती हैं और सभी आवेदन एक ही डैशबोर्ड पर मॉनिटर कर सकती हैं।

कंपनी का कहना है कि नियोक्ता (Employer) अपने पैसे से लोन नहीं देंगे, बल्कि सिर्फ कर्मचारी की भुगतान क्षमता पर भरोसा जताते हुए गारंटी देंगे। इससे कर्मचारियों को औपचारिक वित्तीय संस्थानों से आसानी से कर्ज मिल सकेगा।

RBI के नियमों के तहत करेगा काम

'Fund My Staff' खुद को Lending Service Provider (LSP) के रूप में संचालित करेगा। कंपनी के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर दिए जाने वाले सभी लोन RBI से पंजीकृत लेंडिंग पार्टनर्स द्वारा मंजूर और वितरित किए जाएंगे। इससे पूरी प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक के डिजिटल लेंडिंग नियमों के अनुरूप रहेगी।

बढ़ रही है वर्कप्लेस फाइनेंस की मांग

हाल के वर्षों में फिनटेक कंपनियां सैलरी आधारित लोन, Earned Wage Access और कर्मचारी वित्तीय कल्याण (Financial Wellness) जैसी सेवाओं पर तेजी से काम कर रही हैं। कंपनियां भी कर्मचारियों को बेहतर सुविधाएं देकर उन्हें लंबे समय तक अपने साथ बनाए रखने के लिए ऐसे समाधानों में रुचि दिखा रही हैं।

भारतपे के बाद नया कदम

भारतपे से अलग होने के बाद अशनीर ग्रोवर लगातार स्टार्टअप इकोसिस्टम में सक्रिय रहे हैं। निवेश, सार्वजनिक कार्यक्रमों और नए बिजनेस वेंचर्स के जरिए उन्होंने अपनी मौजूदगी बनाए रखी है। 'Fund My Staff' उनके नए उद्यम के रूप में सामने आया है।

कंपनी का मानना है कि इस मॉडल से खासकर उन वेतनभोगी कर्मचारियों को फायदा होगा, जो अपने करियर की शुरुआत में हैं या जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री मजबूत नहीं है। नियोक्ता की गारंटी मिलने से वित्तीय संस्थानों का जोखिम कम होगा और कर्मचारियों को औपचारिक लोन आसानी से मिल सकेगा।

 

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Meta की StoryKit ऐप को लेकर छिड़ी बहस, क्या अब बच्चों को AI सुनाएगा कहानियां?

कभी बच्चों को सोने से पहले कहानियां माता-पिता अपनी कल्पना से सुनाते थे, लेकिन अब यह काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी कर सकता है।

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
AI5412

कभी बच्चों को सोने से पहले कहानियां माता-पिता अपनी कल्पना से सुनाते थे, लेकिन अब यह काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी कर सकता है। Meta ने StoryKit नाम से एक नया AI आधारित ऐप टेस्ट करना शुरू किया है, जो बच्चों के लिए उनकी पसंद के अनुसार निजी (पर्सनलाइज्ड) कहानियां तैयार करता है। हालांकि, ऐप के शुरुआती परीक्षण के साथ ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस छिड़ गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, StoryKit में माता-पिता अपनी पसंद के किरदार, काल्पनिक दुनिया और कहानी का संदेश (जैसे दयालुता, साहस या सहानुभूति) चुन सकते हैं। इसके बाद AI पूरी कहानी तैयार करता है, जिसमें बैकग्राउंड म्यूजिक भी शामिल होता है।

तस्वीर अपलोड कर बना सकते हैं कहानी का किरदार

ऐप की खास बात यह है कि इसमें किसी पसंदीदा खिलौने या व्यक्ति की तस्वीर अपलोड करके उसे कहानी का किरदार बनाया जा सकता है। इसके बाद AI उसी आधार पर पूरी कहानी तैयार कर देता है। Meta का कहना है कि यह ऐप परिवारों को बच्चों की रुचि के मुताबिक अलग-अलग कहानियां बनाने में मदद करेगा।

कंपनी के अनुसार, फिलहाल StoryKit का परीक्षण कुछ चुनिंदा देशों में किया जा रहा है। इसका मकसद यह समझना है कि माता-पिता AI की मदद से कहानी सुनाने के इस नए तरीके को कितना पसंद करते हैं।

Meta ने सुरक्षा फीचर्स का भी किया दावा

Meta का कहना है कि ऐप में AI से जुड़े सुरक्षा फिल्टर लगाए गए हैं। इसमें कोई सोशल नेटवर्किंग फीचर नहीं है और इसका इस्तेमाल केवल 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग ही कर सकते हैं।

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

हालांकि, StoryKit के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना है कि सोने से पहले बच्चों को कहानी सुनाना केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि माता-पिता और बच्चों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का एक खास पल होता है, जिसे AI से नहीं बदला जाना चाहिए।

कुछ यूजर्स ने इसे "भविष्य की डरावनी तस्वीर" बताया, जबकि कई लोगों का कहना है कि बच्चों की कल्पनाशक्ति, रचनात्मकता और सोचने-समझने की क्षमता ऐसी कहानियों से विकसित होती है, जो परिवार के लोग खुद सुनाते हैं।

रचनात्मकता पर भी जताई चिंता

आलोचकों का मानना है कि अगर बच्चे हर कहानी AI से सुनेंगे, तो उनकी अपनी कल्पना करने, कहानी गढ़ने और लिखने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। उनका कहना है कि बच्चों को तैयार कहानियां देने के बजाय उन्हें खुद नई कहानियां सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

AI को घर-घर पहुंचाने की तैयारी

StoryKit, Meta की व्यापक AI रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अब चैटबॉट और ऑफिस टूल्स से आगे बढ़कर AI को रोजमर्रा की जिंदगी और पारिवारिक मनोरंजन का हिस्सा बनाना चाहती है।

हालांकि, इस ऐप के समर्थकों का कहना है कि व्यस्त माता-पिता के लिए यह एक उपयोगी साधन हो सकता है, क्योंकि इसकी मदद से वे कम समय में अपने बच्चों की पसंद और मूल्यों के अनुसार नई कहानियां तैयार कर सकेंगे।

फिलहाल StoryKit सीमित स्तर पर परीक्षण के दौर में है। आने वाले समय में इसका भविष्य काफी हद तक यूजर्स की प्रतिक्रिया, नियामकीय समीक्षा और इस बात पर निर्भर करेगा कि माता-पिता बच्चों की रात की कहानियों में AI को कितनी जगह देना चाहते हैं।

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Quint Digital ने ₹50 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स किए आवंटित, बोर्ड ने दी मंजूरी

डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने 50 करोड़ रुपये जुटाने के लिए 5,000 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के आवंटन को मंजूरी दे दी है।

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
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डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने 50 करोड़ रुपये जुटाने के लिए 5,000 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) के आवंटन को मंजूरी दे दी है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 22 जुलाई 2026 को पारित प्रस्ताव के जरिए इस आवंटन को स्वीकृति दी।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि जारी किए गए सभी NCDs अनरेटेड (Unrated), अनलिस्टेड (Unlisted), सिक्योर्ड (Secured) और रिडीमेबल (Redeemable) हैं। प्रत्येक NCD का फेस वैल्यू 1 लाख रुपये है। इस तरह कुल 5,000 NCDs के जरिए कंपनी ने 50 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जुटाई पूंजी

कंपनी ने बताया कि इन NCDs का आवंटन प्राइवेट प्लेसमेंट के माध्यम से पात्र निवेशकों को किया गया है। इससे पहले 22 मई 2026 को कंपनी के बोर्ड ने एक या अधिक चरणों में 100 करोड़ रुपये तक के 10,000 NCDs जारी करने की मंजूरी दी थी। अब उसी मंजूरी के तहत पहले चरण में 5,000 NCDs आवंटित किए गए हैं।

निवेशकों को मिलेगा 13.77% सालाना ब्याज

इन NCDs पर निवेशकों को 13.77 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलेगा, जिसका भुगतान हर तिमाही (Quarterly) किया जाएगा।

इन डिबेंचर्स का आवंटन 22 जुलाई 2026 को हुआ है, जबकि इनकी परिपक्वता (Maturity) 15 नवंबर 2028 को होगी।

स्टॉक एक्सचेंज पर नहीं होंगे सूचीबद्ध

कंपनी ने साफ किया है कि इन NCDs को किसी भी स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध (Listed) नहीं किया जाएगा। यानी इनकी ट्रेडिंग शेयर बाजार में नहीं होगी।

निवेशकों की सुरक्षा के लिए किए गए विशेष प्रबंध

कंपनी ने बताया कि ये NCDs पूरी तरह सिक्योर्ड हैं। इसके लिए कंपनी ने अपनी मौजूदा और भविष्य की कुछ संपत्तियों पर सुरक्षा अधिकार (Security Interest) बनाया है। इसके अलावा कॉरपोरेट गारंटी, कुछ परिसंपत्तियों पर चार्ज, प्राप्तियों (Receivables) पर सुरक्षा और अन्य गारंटी भी डिबेंचर ट्रस्टी के पक्ष में उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि निवेशकों के हित सुरक्षित रह सकें।

Quint Digital ने यह जानकारी SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के तहत बीएसई (BSE) को भेजी गई नियामकीय सूचना में दी है। कंपनी की ओर से यह सूचना कंपनी सेक्रेटरी एवं कंप्लायंस ऑफिसर तरुण बेलवाल ने जारी की है।

 

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FAST और ऐप आधारित टीवी सेवाओं पर लाइसेंसिंग के खिलाफ IAMAI, ट्राई से की ये अपील

इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से अपील की है कि FAST और ALTD सेवाओं को लाइसेंसिंग व्यवस्था के दायरे में न लाया जाए।

Last Modified:
Tuesday, 21 July, 2026
IAMAI65421

देश में इंटरनेट के जरिए मिलने वाली टीवी सेवाओं के लिए नए नियमों पर विचार चल रहा है। इसी बीच इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (IAMAI) ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) से अपील की है कि FAST (Free Ad-Supported Streaming Television) और ALTD (Application-Based Linear Television Distribution) सेवाओं को लाइसेंसिंग व्यवस्था के दायरे में न लाया जाए।

TRAI के परामर्श पत्र 'ALTD सेवाओं (FAST सेवाओं सहित) के लिए नियामक ढांचा तैयार करने' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए IAMAI ने कहा कि FAST और ALTD पूरी तरह इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन सेवाएं हैं। इसलिए इन्हें केबल टीवी या DTH जैसी पारंपरिक टीवी वितरण सेवाओं की तरह विनियमित करना उचित नहीं होगा।

IAMAI का कहना है कि इंटरनेट आधारित टीवी सेवाओं पर पुराने प्रसारण नियम लागू करने से भारत के मौजूदा डिजिटल कानूनों से टकराव पैदा होगा। साथ ही कंपनियों पर अतिरिक्त नियामकीय बोझ और अनुपालन (Compliance) की लागत बढ़ जाएगी, जबकि उपभोक्ताओं को इसका कोई खास फायदा नहीं मिलेगा।

एसोसिएशन ने कहा कि कई FAST सेवा प्रदाता पहले से ही कई देशों में एक ही तकनीकी प्लेटफॉर्म और कंटेंट सिस्टम के जरिए सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में केवल भारत के लिए अलग लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू करने से अनावश्यक जटिलताएं बढ़ेंगी।

IAMAI के मुताबिक, इससे निवेश प्रभावित हो सकता है, नई तकनीकों के विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और उपभोक्ताओं को मिलने वाले डिजिटल कंटेंट के विकल्प भी सीमित हो सकते हैं।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि FAST और ALTD सेवाएं पारंपरिक डिस्ट्रिब्यूशन प्लेटफॉर्म ऑपरेटर (DPO) जैसे केबल टीवी और DTH कंपनियों से पूरी तरह अलग हैं। ये कंपनियां न तो अंतिम स्तर (Last-Mile) का नेटवर्क चलाती हैं और न ही कंटेंट वितरण के लिए स्पेक्ट्रम जैसे सीमित सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल करती हैं।

IAMAI के अनुसार, ये सेवाएं उपभोक्ताओं के मौजूदा इंटरनेट कनेक्शन पर एप्लिकेशन के जरिए चलती हैं। इसलिए इन पर प्रसारण क्षेत्र जैसी लाइसेंसिंग लागू करने का कोई आधार नहीं बनता।

एसोसिएशन ने टेलीकम्युनिकेशंस एक्ट, 2023 का भी हवाला दिया। IAMAI का कहना है कि संसद ने इस कानून के दायरे से ओवर-द-टॉप (OTT) सेवाओं को जानबूझकर बाहर रखा है। साथ ही उस समय के केंद्रीय संचार मंत्री ने भी स्पष्ट किया था कि OTT प्लेटफॉर्म आईटी एक्ट, 2000 के तहत ही संचालित होंगे, न कि दूरसंचार कानून के तहत।

IAMAI ने यह भी कहा कि डिजिटल कंटेंट पहले से ही सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एवं डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत विनियमित है। इन नियमों की निगरानी इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) करते हैं।

एसोसिएशन का सुझाव है कि सरकार को नए इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स पर पुराने प्रसारण नियम लागू करने के बजाय पारंपरिक प्रसारण और वितरण सेवाओं पर लागू पुराने लाइसेंसिंग और टैरिफ नियमों को आसान बनाने पर विचार करना चाहिए।

गौरतलब है कि TRAI इस समय यह समीक्षा कर रहा है कि भारत में तेजी से बढ़ रही FAST चैनलों और ऐप आधारित लीनियर टीवी सेवाओं के लिए अलग नियामक ढांचे की जरूरत है या नहीं। इस पर होने वाला अंतिम फैसला आने वाले समय में यह तय करेगा कि इंटरनेट के जरिए मिलने वाली टीवी सेवाओं का संचालन और नियमन किस तरह किया जाएगा।

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जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच इंटरनेट बंद : IFF ने बताया लोकतंत्र के लिए खतरा

आईएफएफ ने सर्वोच्च न्यायालय के अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी इंटरनेट प्रतिबंध का आदेश सार्वजनिक होना चाहिए।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2026
delhiinternet

इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) ने 20 जुलाई 2026 को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली के जंतर-मंतर और आसपास के मध्य दिल्ली क्षेत्रों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने की कड़ी आलोचना की है। यह प्रतिबंध उस समय लगाया गया, जब 'चलो संसद' मार्च के लिए बड़ी संख्या में छात्र और युवा एकत्र हुए थे।

प्रशासन ने मार्च की अनुमति नहीं दी थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर संसद जाने वाले मार्गों को बंद कर दिया था। साथ ही पटेल चौक, राजीव चौक और जनपथ जैसे कई मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए। प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग की खबरों के बीच एहतियात के तौर पर मोबाइल इंटरनेट सेवाएं भी निलंबित कर दी गईं।

आईएफएफ का कहना है कि इंटरनेट बंद करने के संबंध में गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, दिल्ली सरकार या दिल्ली पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक नहीं किया गया है। संगठन का आरोप है कि बिना सार्वजनिक आदेश के इंटरनेट बंद करना पारदर्शिता और न्यायिक समीक्षा के सिद्धांतों के खिलाफ है। यदि नेटवर्क जैमर का इस्तेमाल किया गया है, तो सरकार को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि इसके लिए कानूनी आधार क्या था।

आईएफएफ ने सर्वोच्च न्यायालय के 'अनुराधा भसीन बनाम भारत संघ (2020)' फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी इंटरनेट प्रतिबंध का आदेश सार्वजनिक होना चाहिए, उसके कारण लिखित रूप में दर्ज होने चाहिए और यह कदम न्यूनतम आवश्यक सीमा तक ही सीमित होना चाहिए। साथ ही दूरसंचार अधिनियम, 2023 और दूरसंचार (अस्थायी सेवा निलंबन) नियम, 2024 के तहत भी इंटरनेट बंद करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसका पालन इस मामले में नहीं हुआ।

संगठन का कहना है कि इंटरनेट बंद होने से पत्रकारों, छोटे व्यापारियों, ऑनलाइन भुगतान पर निर्भर दुकानदारों, गिग वर्कर्स और आम नागरिकों को भारी परेशानी होती है। आईएफएफ ने तत्काल इंटरनेट सेवाएं बहाल करने, निलंबन आदेश सार्वजनिक करने, समीक्षा समिति की रिपोर्ट जारी करने और भविष्य में ऐसे मामलों में अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

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जागरण न्यू मीडिया से मेघा ममगईं ने दिया इस्तीफा

जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) की मैनेजिंग एडिटर (Managing Editor) हेल्थ एंड लाइफस्टाइल मेघा ममगईं(Megha Mamgain) ने नौ साल बाद संस्थान छोड़ दिया है।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2026
meghajagran

जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) की मैनेजिंग एडिटर – हेल्थ एंड लाइफस्टाइल (Managing Editor – Health & Lifestyle) मेघा ममगईं (Megha Mamgain) ने करीब नौ वर्षों के लंबे कार्यकाल के बाद संस्थान से इस्तीफा दे दिया है। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कंपनी के प्रमुख डिजिटल ब्रांड्स हरजिंदगी (HerZindagi) और ओनलीमायहेल्थ (OnlyMyHealth) की संपादकीय टीमों का नेतृत्व किया।

मेघा ममगईं (Megha Mamgain) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पर अपनी विदाई की जानकारी साझा करते हुए लिखा कि नौ वर्षों का यह सफर केवल ब्रांड्स बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस दौरान उन्होंने कार्य संस्कृति, विश्वास, दृढ़ता और लोगों के साथ मजबूत रिश्ते भी बनाए। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्होंने हरजिंदगी और ओनलीमायहेल्थ की अपनी टीमों को अलविदा कहा।

उन्होंने अपने अगले कदम के संकेत देते हुए लिखा कि अब समय कुछ नया और किसी नई जगह पर बनाने का है। उनके मुताबिक, शुरुआत से कुछ नया खड़ा करने का उत्साह आज भी उन्हें रोमांचित करता है।

जागरण न्यू मीडिया (Jagran New Media) से जुड़ने से पहले मेघा ममगईं (Megha Mamgain) लगभग 12 वर्षों तक सीएनएन-आईबीएन (CNN-IBN) के साथ कार्यरत रहीं। अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने एनडीटीवी (NDTV) और मिडीटेक (Miditech) में भी विभिन्न संपादकीय भूमिकाएं निभाईं।

फिलहाल मेघा ममगईं (Megha Mamgain) ने अपने अगले पेशेवर कदम की औपचारिक घोषणा नहीं की है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह जल्द ही एक नई शुरुआत करने जा रही हैं।

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ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की सुप्रीम कोर्ट में गुहार, 28% GST पर पुनर्विचार की मांग

ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है।

Last Modified:
Wednesday, 15 July, 2026
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ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। मी कंपनियों ने अदालत से हाल ही में दिए गए उस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी को संवैधानिक रूप से सही ठहराया गया था और 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पुराने टैक्स नोटिसों को भी वैध माना गया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को अपने फैसले में सरकार के उस निर्णय को सही ठहराया था, जिसके तहत ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर लगाए गए दांव (बेट) की पूरी राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। अदालत ने टैक्स विभाग द्वारा जारी पुराने टैक्स नोटिसों को भी चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

इस फैसले के बाद टैक्स विभाग के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पुरानी टैक्स वसूली का रास्ता साफ हो गया था। इसे ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका माना गया था।

अब ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने समीक्षा याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस मामले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर दोबारा विचार करे। कंपनियों का कहना है कि 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स दावों का भारी बोझ इस उद्योग की कई कंपनियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर सकता है।

माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इन समीक्षा याचिकाओं पर आने वाला फैसला भारत के ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के भविष्य के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।

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Instagram विज्ञापन विवाद में Meta पर सरकार सख्त, जवाब की समीक्षा जारी

केंद्र सरकार इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Meta के जवाब की जांच कर रही है।

Last Modified:
Monday, 13 July, 2026
SKrishnan5421

केंद्र सरकार इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Meta के जवाब की जांच कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि जवाब की समीक्षा पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को कहा कि Meta ने सरकार के नोटिस का जवाब भेज दिया है। यह जवाब शनिवार को मिला था और फिलहाल मंत्रालय इसकी जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, MeitY ने Meta को नोटिस जारी कर इंस्टाग्राम से ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट तुरंत हटाने का निर्देश दिया था, जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने या उसकी पहुंच उपलब्ध कराने का आरोप है। साथ ही कंपनी से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा गया था।

यह मामला 3 जुलाई को प्रकाशित BBC Eye की एक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चलाए जा रहे थे, जिनमें आपत्तिजनक सर्च शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने पर यूजर्स को कथित तौर पर Telegram के उन चैनलों पर भेजा जाता था, जहां ऐसी अवैध सामग्री 99 रुपये जैसी कम कीमत पर बेची जा रही थी।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि इनमें से कुछ विज्ञापनों को इंस्टाग्राम की ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम ने मंजूरी दी थी।

इन आरोपों पर Meta ने कहा कि कंपनी की बाल यौन शोषण सामग्री के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति है। कंपनी का कहना है कि वह ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे हटाने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करती है। हालांकि, Meta ने यह भी स्वीकार किया कि अपराधी लगातार उसके सुरक्षा तंत्र को चकमा देने की कोशिश करते रहते हैं।

कंपनी के अनुसार, वह अपनी मॉडरेशन तकनीक को लगातार मजबूत कर रही है, आपत्तिजनक वेबसाइटों के लिंक ब्लॉक कर रही है और अन्य टेक कंपनियों के साथ भी जानकारी साझा कर ऑनलाइन शोषण रोकने की दिशा में काम कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, MeitY ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापनों को मंजूरी कैसे मिली, उन्हें रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, कंपनी की मॉडरेशन प्रणाली कितनी प्रभावी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

BBC की जांच में यह भी दावा किया गया कि उसने भारत में एक टेस्ट अकाउंट बनाकर इंस्टाग्राम के विज्ञापन और रिकमेंडेशन सिस्टम की जांच की थी। कुछ ही दिनों में उस अकाउंट पर कथित तौर पर ऐसे विज्ञापन दिखाई देने लगे, जो Telegram चैनलों तक ले जा रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, जब ऐसे एक विज्ञापन की शिकायत की गई, तो शुरुआत में इंस्टाग्राम ने उसे अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं माना। हालांकि, BBC की ओर से सवाल पूछे जाने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाए, संबंधित अकाउंट निलंबित किए और उनसे जुड़े लिंक भी ब्लॉक कर दिए।

इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की विज्ञापन मॉडरेशन प्रणाली और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर तब जब पेड विज्ञापनों की मंजूरी में ऑटोमेटेड सिस्टम की भूमिका होती है।

इसी बीच केंद्र सरकार ने Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp, Telegram और Signal को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से उनके यूजरनेम आधारित फीचर और धोखाधड़ी, फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी है। इससे साफ है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है।

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गूगल को दिल्ली हाई कोर्ट से नहीं मिली अंतरिम राहत : ट्रेडमार्क मामले में झटका

यह मामला मई में आए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने गूगल (Google) को 'HINDWARE' और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में ब्लॉक करने का निर्देश दिया था।

Last Modified:
Saturday, 11 July, 2026
google

गूगल इंडिया (Google India) को ट्रेडमार्क उल्लंघन (Trademark Infringement) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से अंतरिम राहत नहीं मिली है। अदालत ने उस फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें गूगल (Google) को अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म गूगल ऐड्स (Google Ads) पर सैनिटरीवेयर (Sanitaryware) निर्माता हिंदवेयर (Hindware) के पंजीकृत ट्रेडमार्क का विज्ञापन कीवर्ड (Advertising Keyword) के रूप में उपयोग करने की अनुमति देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

यह मामला मई में आए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने गूगल (Google) को 'HINDWARE' और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। साथ ही कंपनी पर 30 लाख रुपये का हर्जाना (Damages) और कानूनी खर्च (Legal Costs) भी लगाया गया था।

इस फैसले को चुनौती देते हुए गूगल (Google) ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में अपील दायर की। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) ने दलील दी कि मामले में अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में उपभोक्ताओं के भ्रमित होने (Consumer Confusion), अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practices) या उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) जैसे मुद्दे शामिल नहीं हैं।

हालांकि, न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव (Justice V. Kameswar Rao) और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा (Justice Manmeet Pritam Singh Arora) की खंडपीठ (Division Bench) ने गूगल (Google) की अपील पर नोटिस जारी कर दिया, लेकिन हर्जाने और पहले लगाए गए प्रतिबंधों पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। इस दौरान अदालत गूगल (Google) की अपील पर विस्तार से विचार करेगी।

यह मामला डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर Google Ads जैसे ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर ट्रेडमार्क वाले कीवर्ड्स (Trademark Keywords) के उपयोग और उनकी जिम्मेदारी तय करने पर पड़ सकता है।

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