क्या AI के असर से बदल रही है मीडिया व मार्केटिंग की दुनिया?

एक दौर था जब किसी विज्ञापन को तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे, मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीमें काम करती थीं और फिर प्रोडक्शन की लंबी प्रक्रिया चलती थी। 2026 तक आते-आते यह पूरी दुनिया बदल चुकी है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 28 May, 2026
Last Modified:
Thursday, 28 May, 2026
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एक समय था जब किसी कंपनी का विज्ञापन तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे। बड़ी-बड़ी मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीम रणनीति बनाती थी, कॉपीराइटर और डिजाइनर कंटेंट तैयार करते थे, फिर प्रोडक्शन हाउस उसे अंतिम रूप देता था। लेकिन 2026 तक आते-आते यह पूरी तस्वीर बदल चुकी है। अब AI आधारित टूल कुछ ही मिनटों में सैकड़ों विज्ञापन तैयार कर सकते हैं, उन्हें सही ऑडियंस तक पहुंचा सकते हैं और उनके नतीजों का विश्लेषण भी कर सकते हैं- वह भी बेहद कम इंसानी दखल के साथ।

यह सिर्फ नई तकनीक का असर नहीं है, बल्कि मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री के काम करने के तरीके में आया एक बड़ा बदलाव है। ऐसा बदलाव, जो विज्ञापन, कंटेंट और ऑडियंस कनेक्शन की पूरी दुनिया को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।

एक ट्रिलियन डॉलर का मील का पत्थर

2026 में दुनिया भर का ऐडवर्टाइजिंग खर्च पहली बार 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के पार जाने वाला है। 'डेंट्सू' (Dentsu) की Global Ad Spend Forecast (दिसंबर 2025) के मुताबिक, वैश्विक ऐडवर्टाइजिंग खर्च 2026 में $1.04 ट्रिलियन तक पहुंचेगा, जो 2025 की तुलना में 5.1% की बढ़ोतरी है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की 3.1% वृद्धि दर से कहीं ज्यादा है। यह अपने आप में बताता है कि ब्रैंड्स के लिए ऐडवर्टाइजिंग अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि व्यापार बढ़ाने का सबसे अहम औजार बन चुका है।

इस पूरे मार्केट में AI की भूमिका केंद्रीय है। Dentsu का अनुमान है कि 2026 तक 71.6% ऐडवर्टाइजिंग खर्च एल्गोरिदम संचालित होगा- यानी इंसान नहीं, बल्कि AI तय करेगा कि कौन सा ऐड, किसे, कब और किस कीमत पर दिखाया जाए और 2028 तक यह आंकड़ा 76% तक पहुंचने का अनुमान है।

ऐडवर्टाइजिंग में AI का मार्केट खुद 2025 के $11.17 बिलियन से बढ़कर 2026 में $14.12 बिलियन हो चुका है, और 2030 तक यह $36.34 बिलियन तक पहुंचेगा- यह आंकड़े The Business Research Company की "AI in Advertising Global Market Report 2026" (फरवरी 2026) से लिए गए हैं।

Meta ने Google को पछाड़ा- AI ने बदला खेल

2026 का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग की सत्ता पलट है। EMARKETER की 13 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में Meta पहली बार Google को पीछे छोड़ देगा- वैश्विक डिजिटल विज्ञापन राजस्व में। यह 14 साल में पहली बार होगा।

आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर एकदम साफ हो जाती है। Meta का वैश्विक डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग खर्च 243.46 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो कुल बाजार का 26.8 प्रतिशत है। वहीं Google 239.54 बिलियन डॉलर के साथ 26.4 प्रतिशत हिस्सेदारी पर है, जबकि Amazon 82.07 बिलियन डॉलर के साथ 9.0 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है।

अगर तुलना करें तो 2025 में स्थिति बिल्कुल अलग थी। उस समय Google 214.06 बिलियन डॉलर के साथ आगे था, जबकि Meta 196.17 बिलियन डॉलर पर था। यानी सिर्फ एक साल में पूरा खेल बदल गया है।

अब 2026 में ये तीनों कंपनियां मिलकर वैश्विक डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का 62.3 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखने जा रही हैं, जो इनके बढ़ते दबदबे को साफ तौर पर दिखाता है।

Meta की इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे मुख्य वजह है- AI कंपनी का Advantage+ टूल और AI-generated ad creatives ने विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम दिए हैं। Meta की विकास दर 2025 के 22.1% से बढ़कर 2026 में 24.1% हो गई है, जबकि Google की विकास दर 11.9% पर स्थिर है।

EMARKETER के सीनियर एक्सपर्ट Zach Goldner के अनुसार, Meta की यह बढ़त किसी एक सोर्स से नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम से आ रही है- Facebook, Instagram, Reels और Threads सभी पर AI की ताकत काम कर रही है।

Google के लिए चुनौती यह भी है कि AI संचालित सर्च टूल और chatbots पारंपरिक सर्च आधारित ऐडवर्टाइजिंग को प्रभावित कर रहे हैं। Gartner का अनुमान है कि 2026 तक पारंपरिक सर्च वॉल्यूम में 25% की गिरावट आ सकती है।

Amazon भी कम नहीं है- 2025 के $68.64 बिलियन से बढ़कर 2026 में $82.07 बिलियन तक पहुंच रहा है।

प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग: AI का सबसे बड़ा मैदान

अगर AI और ऐडवर्टाइजिंग के मेल का सबसे साफ उदाहरण देखना हो, तो वह है प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग (programmatic Advertising)। यह वह तकनीक है जहां AI सेकंड के हजारवें हिस्से में तय करता है कि किसे कौन सा ऐड दिखाना है।

Basis Technologies की जनवरी 2026 रिपोर्ट (EMARKETER data के आधार पर) के अनुसार, अमेरिका में 2026 में प्रोग्रामेटिक डिस्प्ले ऐडवर्टाइजिंग खर्च 203 बिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगा, जो 2025 के 180.4 बिलियन डॉलर की तुलना में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।

Dentsu के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रोग्रामैटिक ट्रेंडिंग 81.4% डिजिटल ऐड स्पेंड को कंट्रोल करेगी- यानी हर $5 में से $4 से ज्यादा का ऐडवर्टाइजिंग खर्च अब AI संचालित ग्रामैटिक सिस्टम से होकर गुजर रहा है।

शॉर्ट-फॉर्म वीडियो इस पूरे इकोसिस्टम का नया केंद्र बन गया है। रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ने वाला डिजिटल चैनल है, जिसमें 14.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं ऑनलाइन वीडियो 11.5 प्रतिशत और सोशल मीडिया 11.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।

 AI मार्केटिंग का मार्केट: एक बड़ी इंडस्ट्री

सिर्फ  ऐडवर्टाइजिंग ही नहीं, बल्कि पूरी मार्केटिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पकड़ तेजी से मजबूत हो रही है। McKinsey की 2025 में प्रकाशित “स्टेट ऑफ AI इन 2025” रिपोर्ट के मुताबिक, अब 88 प्रतिशत ऑर्गनाइजेशंस अपने कम से कम एक कामकाजी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पिछले साल के 78 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। वहीं “स्टेट ऑफ ऑर्गेनाइजेशंस 2026” रिपोर्ट, जो 10,000 से अधिक सीनियर लीडर्स के सर्वे पर आधारित है, जो यह भी बताती है कि 88 प्रतिशत लीडर्स की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लागू कर चुकी हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मार्केटिंग पर खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। अब यह कंपनियों के कुल मार्केटिंग बजट का 9 प्रतिशत हो गया है, जो 2024 में 7 प्रतिशत था। इसके साथ ही, जो मार्केटिंग टीमें AI का इस्तेमाल कर रही हैं, वे हर हफ्ते औसतन 11 घंटे का समय बचा रही हैं और उनकी उत्पादकता में 44 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।

कुछ और अहम आंकड़े जो 2026 की तस्वीर बताते हैं:

आज के समय में ज्यादातर मार्केटर्स अपनी रणनीतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। McKinsey के 2026 State of AI सर्वे के मुताबिक, करीब 75 प्रतिशत मार्केटर्स अब AI का सहारा लेकर अपने कैंपेन प्लान और एग्जिक्यूट कर रहे हैं। AI से चलने वाले कैंपेन पारंपरिक तरीकों की तुलना में ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं। ऐसे कैंपेन लगभग 22 प्रतिशत बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट देते हैं, जिससे कंपनियों को ज्यादा फायदा मिल रहा है। 

पर्सनलाइजेशन में भी AI बड़ा बदलाव ला रहा है। AI के जरिए बनाए गए पर्सनलाइज्ड अनुभव से कन्वर्जन रेट में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा, AI से तैयार किए गए हेडलाइंस भी ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं, जिनसे क्लिक-थ्रू रेट में लगभग 25 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है।

ई-मेल मार्केटिंग में भी AI का असर साफ दिखाई दे रहा है। AI से चलने वाले ईमेल कैंपेन में 41 प्रतिशत तक ज्यादा रेवेन्यू आने की संभावना होती है।

एजेंसियां: बदलाव का नया दौर

जे.पी. मॉर्गन के विश्लेषण और डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, अमेरिका में 2026 में ऐडवर्टाइजिंग खर्च 415 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2025 के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि यह बढ़त एजेंसियों के लिए उतनी अच्छी खबर नहीं है, जितनी दिखती है। डिजिटल विज्ञापन अब ग्लोबल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का 68.7 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है और गूगल, मेटा और एमेजॉन जैसे प्लेटफॉर्म्स ने टार्गेटिंग, क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन और रिपोर्टिंग को काफी हद तक ऑटोमेट कर दिया है।

Forrester Research की 2023 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2030 तक एजेंसियां अपनी 7.5 प्रतिशत नौकरियों को ऑटोमेशन से बदल देंगी, जो अमेरिका में करीब 33,000 नौकरियों के बराबर है। लेकिन नवंबर 2025 में इस अनुमान को अपडेट करते हुए फॉरेस्टर ने कहा कि केवल 2026 में ही एजेंसी नौकरियों में 15 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, क्योंकि 2025 में भी औसतन 8 प्रतिशत कर्मचारियों की संख्या में कटौती देखी गई थी।

Forrester के अनुसार, जितनी ज्यादा मौलिकता होगी, उतना ही ऑटोमेशन का खतरा कम होगा। क्लेरिकल, प्रशासनिक और सेल्स से जुड़े कामों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा, जबकि क्रिएटिव और डेटा स्ट्रेटेजी से जुड़े रोल्स की मांग बढ़ेगी।

Meta का Advantage+ और Google का AI- असली बदलाव यहां है

Meta का Advantage+ कैंपेन सिस्टम ऐडवर्टाइजर्स को बस एक प्रोडक्ट URL, बजट और लक्ष्य देने की सुविधा देता है- बाकी सब AI खुद करता है। AI-generated creatives, audience modeling, bid optimization और performance learning- सब कुछ ऑटोमेटेड है।

Google अपने Performance Max campaigns में AI का इस्तेमाल करता है, जो automatically सभी Google properties- Search, YouTube, Display, Maps- पर best performing ads चलाता है।

Amazon के पास retail data की ताकत है। Acxiom- जिसे IPG ने 2018 में acquire किया था और जो अब Omnicom के पास है- 90% global credit card issuers और 75% U.S. retail banks के साथ काम करता है। यह ultra-precise targeting को possible बनाता है।

बाकी सभी काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खुद ही करता है। AI से तैयार किए गए क्रिएटिव्स, ऑडियंस मॉडलिंग, bid optimization और performance learning- ये सब पूरी तरह ऑटोमेटेड हो चुका है। 

गूगल अपने परफॉर्मेंस मैक्स कैंपेन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है, जो अपने आप गूगल के सभी प्लेटफॉर्म- सर्च, यूट्यूब, डिस्प्ले और मैप्स पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ऐड चलाता है। एमेजॉन के पास रिटेल डेटा की जबरदस्त ताकत है। Acxiom, जिसे 2018 में IPG ने खरीदा था और जो अब ओमनीकॉम के पास है, दुनिया के 90 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों और अमेरिका के 75 प्रतिशत रिटेल बैंकों के साथ काम करता है। इससे बेहद सटीक टार्गेटिंग संभव हो पाती है।

क्रिएटिव क्रांति: AI संचालित ऐड्स का उदय

ऐड बनाने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। AI टूल्स अब एक ही स्क्रिप्ट को 8 अलग AI personas से, अलग-अलग सेटि्ंग्स में प्रदान कर सकते हैं और इतनी बड़ी मात्रा पारंपरिक प्रोडक्शन तरीकों से कभी हासिल नहीं की जा सकती थी।

डेंट्सु के अनुसार, 2026 में 42% CMO ओरिजिनल कंटेंट और स्पॉन्सरशिप में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इससे यह साफ होता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ-साथ इंसानी क्रिएटिविटी की मांग भी बढ़ रही है।

डेटा प्राइवेसी और AI का टकराव

AI का यह सफर बिना चुनौतियों के नहीं है। थर्ड-पार्टी कुकीज का अंत हो चुका है और ऐडवर्टाइजर्स को अब फर्स्ट-पार्टी डेटा पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे डेटा क्लीन रूम का चलन बढ़ा है- ये ऐसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म होते हैं, जहां ब्रैंड्स और पब्लिशर्स बिना किसी का निजी डेटा उजागर किए अपना डेटा आपस में मिलाते हैं। इसी वजह से रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इसके पास फर्स्ट-पार्टी शॉपर डेटा होता है, जो कुकीज के बाद का सबसे मूल्यवान संसाधन बन चुका है।

भारत और एशिया-प्रशांत में AI ऐडवर्टाइजिंग का उभार

भारत के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, भारत का ऐडवर्टाइजिंग मार्केट 2026 में 8.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, जो 2025 के 7.8 प्रतिशत से ज्यादा है। इस बढ़त के पीछे ICC मेन्स टी20 क्रिकेट वर्ल्डकप, IPL 2026 और तेजी से बढ़ता डिजिटल विस्तार मुख्य कारण हैं।

भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग खर्च 19.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगा, जिसमें रिटेल मीडिया और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो की बड़ी भूमिका होगी। वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र कुल मिलाकर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 376.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, और भारत इस क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बनकर उभर रहा है।

Omnicom-IPG का महाविलय: एजेंसी का भविष्य

2026 में ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में एक और बड़ा बदलाव आया- Omnicom और IPG का विलय, जो 26 नवंबर 2025 को पूरा हुआ। इस संयुक्त कंपनी की सालाना आय 25 बिलियन डॉलर से अधिक है और इसमें करीब 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। हालांकि, विलय के बाद लगभग 4,000 नौकरियों में कटौती की घोषणा भी की गई है।

यह विलय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में बड़े पैमाने पर विस्तार और बेहतर तकनीकी क्षमताएं हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है। ओमनीकॉम ने सालाना 750 मिलियन डॉलर की बचत का लक्ष्य रखा है। इसके तहत FCB, MullenLowe और DDB जैसे प्रसिद्ध एजेंसी ब्रैंड्स को बंद किया जा रहा है, जबकि McCann, BBDO और TBWA को तीन वैश्विक क्रिएटिव नेटवर्क के रूप में रखा जाएगा।

मार्केटिंग का नया युग

2026 तक आते-आते यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि ऐडवर्टाइजिंग में AI अब कोई फ्यूचर ट्रेंड नहीं, बल्कि आज की जमीनी हकीकत है। $1.04 ट्रिलियन का वैश्विक विज्ञापन मार्केट, Meta का Google पर ऐतिहासिक बढ़त, प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग का $200 बिलियन का पड़ाव, और AI संचालित कैंपेन का बेहतर ROI- ये सब मिलकर एक नई दुनिया का निर्माण कर रहे हैं।

लेकिन इस बदलाव में सिर्फ दक्षता ही नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल भी है। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही क्रिएटिव तैयार करेगा, टार्गेटिंग करेगा और उसे बेहतर बनाएगा, तो इंसान की भूमिका क्या रह जाएगी? इसका जवाब शायद यही है- रणनीति, संवेदनशीलता और वह मानवीय स्पर्श, जो किसी एल्गोरिदम के पास नहीं होता।

जो ब्रैंड्स और एजेंसियां यह समझ जाएंगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक सहयोगी है, प्रतिस्पर्धी नहीं, वही इस नए एल्गोरिदम आधारित दौर में आगे निकलेंगी।

 

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ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों की सुप्रीम कोर्ट में गुहार, 28% GST पर पुनर्विचार की मांग

ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 15 July, 2026
Last Modified:
Wednesday, 15 July, 2026
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ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स नोटिसों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। मी कंपनियों ने अदालत से हाल ही में दिए गए उस फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग की है, जिसमें ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी को संवैधानिक रूप से सही ठहराया गया था और 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के पुराने टैक्स नोटिसों को भी वैध माना गया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को अपने फैसले में सरकार के उस निर्णय को सही ठहराया था, जिसके तहत ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर लगाए गए दांव (बेट) की पूरी राशि पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता है। अदालत ने टैक्स विभाग द्वारा जारी पुराने टैक्स नोटिसों को भी चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

इस फैसले के बाद टैक्स विभाग के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की पुरानी टैक्स वसूली का रास्ता साफ हो गया था। इसे ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री के लिए बड़ा झटका माना गया था।

अब ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने समीक्षा याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस मामले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर दोबारा विचार करे। कंपनियों का कहना है कि 28 प्रतिशत जीएसटी और पुराने टैक्स दावों का भारी बोझ इस उद्योग की कई कंपनियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर सकता है।

माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट में इन समीक्षा याचिकाओं पर आने वाला फैसला भारत के ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के भविष्य के लिए काफी अहम साबित हो सकता है।

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Instagram विज्ञापन विवाद में Meta पर सरकार सख्त, जवाब की समीक्षा जारी

केंद्र सरकार इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Meta के जवाब की जांच कर रही है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 13 July, 2026
Last Modified:
Monday, 13 July, 2026
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केंद्र सरकार इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (Child Sexual Abuse Material-CSAM) से जुड़े विज्ञापनों के मामले में Meta के जवाब की जांच कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने कहा है कि जवाब की समीक्षा पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

आईटी सचिव एस. कृष्णन ने सोमवार को कहा कि Meta ने सरकार के नोटिस का जवाब भेज दिया है। यह जवाब शनिवार को मिला था और फिलहाल मंत्रालय इसकी जांच कर रहा है। उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल, MeitY ने Meta को नोटिस जारी कर इंस्टाग्राम से ऐसे सभी विज्ञापन और कंटेंट तुरंत हटाने का निर्देश दिया था, जिनमें बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बढ़ावा देने या उसकी पहुंच उपलब्ध कराने का आरोप है। साथ ही कंपनी से सात दिन के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा गया था।

यह मामला 3 जुलाई को प्रकाशित BBC Eye की एक जांच रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चलाए जा रहे थे, जिनमें आपत्तिजनक सर्च शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने पर यूजर्स को कथित तौर पर Telegram के उन चैनलों पर भेजा जाता था, जहां ऐसी अवैध सामग्री 99 रुपये जैसी कम कीमत पर बेची जा रही थी।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि इनमें से कुछ विज्ञापनों को इंस्टाग्राम की ऑटोमेटेड मॉडरेशन सिस्टम ने मंजूरी दी थी।

इन आरोपों पर Meta ने कहा कि कंपनी की बाल यौन शोषण सामग्री के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' नीति है। कंपनी का कहना है कि वह ऐसे कंटेंट की पहचान और उसे हटाने के लिए उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल करती है। हालांकि, Meta ने यह भी स्वीकार किया कि अपराधी लगातार उसके सुरक्षा तंत्र को चकमा देने की कोशिश करते रहते हैं।

कंपनी के अनुसार, वह अपनी मॉडरेशन तकनीक को लगातार मजबूत कर रही है, आपत्तिजनक वेबसाइटों के लिंक ब्लॉक कर रही है और अन्य टेक कंपनियों के साथ भी जानकारी साझा कर ऑनलाइन शोषण रोकने की दिशा में काम कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, MeitY ने Meta से यह भी पूछा है कि ऐसे विज्ञापनों को मंजूरी कैसे मिली, उन्हें रोकने के लिए क्या सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, कंपनी की मॉडरेशन प्रणाली कितनी प्रभावी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

BBC की जांच में यह भी दावा किया गया कि उसने भारत में एक टेस्ट अकाउंट बनाकर इंस्टाग्राम के विज्ञापन और रिकमेंडेशन सिस्टम की जांच की थी। कुछ ही दिनों में उस अकाउंट पर कथित तौर पर ऐसे विज्ञापन दिखाई देने लगे, जो Telegram चैनलों तक ले जा रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, जब ऐसे एक विज्ञापन की शिकायत की गई, तो शुरुआत में इंस्टाग्राम ने उसे अपनी कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन नहीं माना। हालांकि, BBC की ओर से सवाल पूछे जाने के बाद Meta ने कई विज्ञापन हटाए, संबंधित अकाउंट निलंबित किए और उनसे जुड़े लिंक भी ब्लॉक कर दिए।

इस पूरे मामले के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की विज्ञापन मॉडरेशन प्रणाली और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठने लगे हैं, खासकर तब जब पेड विज्ञापनों की मंजूरी में ऑटोमेटेड सिस्टम की भूमिका होती है।

इसी बीच केंद्र सरकार ने Meta के स्वामित्व वाले WhatsApp, Telegram और Signal को भी नोटिस भेजा है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स से उनके यूजरनेम आधारित फीचर और धोखाधड़ी, फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग रोकने के लिए अपनाए गए सुरक्षा उपायों की जानकारी मांगी है। इससे साफ है कि सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है।

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गूगल को दिल्ली हाई कोर्ट से नहीं मिली अंतरिम राहत : ट्रेडमार्क मामले में झटका

यह मामला मई में आए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने गूगल (Google) को 'HINDWARE' और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में ब्लॉक करने का निर्देश दिया था।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 11 July, 2026
Last Modified:
Saturday, 11 July, 2026
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गूगल इंडिया (Google India) को ट्रेडमार्क उल्लंघन (Trademark Infringement) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से अंतरिम राहत नहीं मिली है। अदालत ने उस फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है, जिसमें गूगल (Google) को अपने विज्ञापन प्लेटफॉर्म गूगल ऐड्स (Google Ads) पर सैनिटरीवेयर (Sanitaryware) निर्माता हिंदवेयर (Hindware) के पंजीकृत ट्रेडमार्क का विज्ञापन कीवर्ड (Advertising Keyword) के रूप में उपयोग करने की अनुमति देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था।

यह मामला मई में आए उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने गूगल (Google) को 'HINDWARE' और उससे मिलते-जुलते शब्दों को विज्ञापन कीवर्ड के रूप में ब्लॉक करने का निर्देश दिया था। साथ ही कंपनी पर 30 लाख रुपये का हर्जाना (Damages) और कानूनी खर्च (Legal Costs) भी लगाया गया था।

इस फैसले को चुनौती देते हुए गूगल (Google) ने दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) में अपील दायर की। कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी (Abhishek Manu Singhvi) ने दलील दी कि मामले में अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले में उपभोक्ताओं के भ्रमित होने (Consumer Confusion), अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practices) या उपभोक्ता संरक्षण (Consumer Protection) जैसे मुद्दे शामिल नहीं हैं।

हालांकि, न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव (Justice V. Kameswar Rao) और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा (Justice Manmeet Pritam Singh Arora) की खंडपीठ (Division Bench) ने गूगल (Google) की अपील पर नोटिस जारी कर दिया, लेकिन हर्जाने और पहले लगाए गए प्रतिबंधों पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया।

अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी। इस दौरान अदालत गूगल (Google) की अपील पर विस्तार से विचार करेगी।

यह मामला डिजिटल विज्ञापन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका असर Google Ads जैसे ऑनलाइन विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर ट्रेडमार्क वाले कीवर्ड्स (Trademark Keywords) के उपयोग और उनकी जिम्मेदारी तय करने पर पड़ सकता है।

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AI के साथ बदली आउटडोर विज्ञापन की दुनिया, स्मार्ट हो रहे हैं डिजिटल होर्डिंग्स

भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं।

Vikas Saxena by
Published - Saturday, 11 July, 2026
Last Modified:
Saturday, 11 July, 2026
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भारत के बड़े शहरों में अब डिजिटल होर्डिंग सिर्फ विज्ञापन दिखाने का काम नहीं कर रहे, बल्कि हालात के हिसाब से खुद को बदल भी रहे हैं। दिन का समय, मौसम, ट्रैफिक, आसपास की भीड़ और लोगों की पसंद के आधार पर स्क्रीन पर दिखने वाले विज्ञापन कुछ ही सेकंड में बदल जाते हैं। AI, रियल-टाइम डेटा और ऑटोमेशन की मदद से आउट-ऑफ-होम (OOH) विज्ञापन अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट, तेज और असरदार बन चुके हैं।

एक समय था जब होर्डिंग और बिलबोर्ड पर एक ही विज्ञापन कई हफ्तों या महीनों तक लगा रहता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), लोकेशन डेटा, मौसम की जानकारी और ऑडियंस एनालिटिक्स की मदद से डिजिटल आउट-ऑफ-होम (DOOH) स्क्रीनें रियल-टाइम में विज्ञापन बदल सकती हैं। इससे ब्रांड सही समय पर सही जगह और सही दर्शकों तक अपना संदेश पहुंचा पा रहे हैं। यही वजह है कि AI आधारित DOOH विज्ञापन आज विज्ञापन उद्योग की सबसे तेजी से बढ़ती तकनीकों में शामिल हो गया है और सार्वजनिक स्थानों पर ब्रांड कम्युनिकेशन का तरीका भी तेजी से बदल रहा है।

तेजी से बढ़ता विशाल मार्केट

DOOH का ग्लोबल मार्केट 2026 में लगभग $20 से $22.5 अरब डॉलर के बीच आंका जा रहा है। Fortune Business Insights के अनुसार 2025 में यह मार्केट $20.17 अरब डॉलर था और 2026 में $22.51 अरब डॉलर तक पहुंचेगा, 2034 तक $56.1 अरब डॉलर होने का अनुमान है, 12.09% CAGR के साथ। Mordor Intelligence (जनवरी 2026) के मुताबिक 2026 में वैश्विक DOOH मार्केट $20.22 अरब डॉलर है और 2031 तक $32.98 अरब तक पहुंचेगा।

यह अंतर इसलिए है क्योंकि अलग-अलग रिसर्च कंपनियां अलग-अलग तरीके से आंकड़े तैयार करती हैं। लेकिन सभी की राय एक जैसी है कि यह मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।

भारत की तस्वीर: MarkNtel Advisors के अनुसार भारत का DOOH मार्केट 2024 में लगभग $284 मिलियन (करीब ₹2,350 करोड़) था और 2030 तक $620 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, लगभग 14% CAGR पर। PwC की Global Entertainment & Media Outlook 2025–29 रिपोर्ट बताती है कि भारत का कुल OOH राजस्व 2024 में $568 मिलियन था, जो 13.4% की दर से बढ़ा और 2029 तक $798 मिलियन तक पहुंचेगा। Adonmo के इंडस्ट्री आंकड़ों के अनुसार भारत का कुल OOH मार्केट (डिजिटल और पारंपरिक दोनों) 2025 में ₹6,500 करोड़ से ऊपर था।

प्रोग्रामेटिक DOOH: जब होर्डिंग बोलने लगे एल्गोरिद्म की भाषा

DOOH की इस क्रांति के केंद्र में है प्रोग्रामेटिक DOOH, यानी ऑटोमेटेड, डेटा-संचालित तरीके से विज्ञापन खरीदना और चलाना। पहले एक बिलबोर्ड बुक करने में 5-7 दिन लगते थे, मैनेजर को फोन, कॉन्ट्रैक्ट साइनिंग, इंतजार। अब प्रोग्रामेटिक DOOH के जरिए उसी जगह पर 24 घंटे से भी कम समय में कैंपेन लाइव हो सकती है। 

VIOOH के द्वारा 2026 में किए अध्ययन (1,050 विज्ञापनदाताओं पर) के अनुसार हाल के प्रोग्रामेटिक DOOH खरीदारों में से, पिछले 18 महीनों में औसतन 34% कैंपेन में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा था और यह अगले 18 महीनों में 48% तक पहुंचने का अनुमान है। Google DV360 और The Trade Desk जैसे प्रमुख DSP प्लेटफॉर्म अब OOH इन्वेंटरी को डिजिटल चैनलों के साथ एक ही मीडिया प्लान में खरीदने की सुविधा दे रहे हैं।

भारत की तस्वीर बिल्कुल अलग है। PwC की रिपोर्ट और एक्सचेंज4मीडिया के इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार भारत में प्रोग्रामेटिक DOOH का हिस्सा OOH खर्च का महज 1-2% है। PwC इसके पीछे इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कॉस्ट-शेयरिंग की चिंताएं और ऐडवर्टाइजिंग Agencies Association of India (AAAI) की formal स्वीकृति का न मिलना बताता है। हालांकि, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि 2026 में यह आंकड़ा 3-5% तक पहुंच सकता है और 2028 तक 15-20%।

मौसम, ट्रैफिक और वक्त के हिसाब से बदलते विज्ञापन

स्मार्ट DOOH की सबसे रोचक बात यह है कि ये स्क्रीनें आसपास के माहौल को 'पढ़' सकती हैं। इसके कई तरीके हैं:

मौसम आधारित विज्ञापन: जैसे ही तापमान एक तय सीमा से ऊपर जाता है, कोल्ड ड्रिंक या आइसक्रीम का विज्ञापन चल पड़ता है। बारिश होते ही छाते या रेनकोट की ब्रैंड दिखने लगती है। Aperol ने एक कैंपेन में यह तय किया कि उनका विज्ञापन केवल तभी दिखे जब तापमान 19°C से ऊपर हो, और वह भी गुरुवार से रविवार, दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे के बीच। Rain-X ने कनाडा में बर्फ, बारिश और ओले के लिए अलग-अलग क्रिएटिव तैयार किए जो मौसम के हिसाब से अपने आप बदल जाते थे। Dulux पेंट ने मौसम-ट्रिगर कैंपेन के जरिए अपने स्टोर में 130% अधिक ट्रैफिक दर्ज किया।

ट्रैफिक और समय आधारित विज्ञापन: सुबह की भीड़ में कॉफी का विज्ञापन, दोपहर में फास्ट फूड स्पेशल, शाम को मनोरंजन। हाईवे पर ट्रैफिक जाम में प्रीमियम ब्रैंड विज्ञापन, मेट्रो स्टेशनों पर सुबह की सवारी में फिनटेक ऐप। EMARKETER के AI in OOH FAQ (मई 2026) के अनुसार AI अब स्पोर्ट्स स्कोर्स, लोकल इवेंट्स और ट्रैफिक कंडिशंस के आधार पर contextual creative selection करता है।

लोकेशन और इवेंट आधारित विज्ञापन: मैच वाले दिन स्टेडियम के आसपास लगी स्क्रीन पर स्पोर्ट्स ड्रिंक के विज्ञापन दिखने लगते हैं। वहीं मॉल के अंदर लगे डिजिटल कियोस्क लोगों को उसी समय चल रहे ऑफर्स और डील्स दिखाते हैं। Amazon जैसे ब्रांड भी अब रियल-टाइम ऑफर्स दिखाकर ग्राहकों को तुरंत खरीदारी के लिए आकर्षित कर रहे हैं।

Blindspot के मुताबिक, मौसम के हिसाब से बदलने वाले DOOH विज्ञापनों को लोग ज्यादा याद रखते हैं। कंपनी का दावा है कि ऐसे विज्ञापनों में ब्रैंड रिकॉल करीब 90% तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य स्थिर विज्ञापनों में यह करीब 65% रहता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि करीब 80% लोग उन विज्ञापनों पर ज्यादा ध्यान देते हैं, जो उनके आसपास की स्थिति या माहौल से जुड़े होते हैं।

फेस डिटेक्शन और ऑडियंस एनालिटिक्स: होर्डिंग जो 'देखती' है

DOOH में अब AI आधारित ऑडियंस डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इसके जरिए डिजिटल स्क्रीन के आसपास मौजूद लोगों की अनुमानित उम्र, जेंडर या भीड़ के प्रकार को समझकर विज्ञापन बदले जाते हैं। इस तकनीक में आमतौर पर कैमरों और सेंसर की मदद ली जाती है, लेकिन कंपनियों का कहना है कि इसका मकसद किसी व्यक्ति की पहचान करना नहीं, बल्कि ऑडियंस पैटर्न को समझना होता है।

यह तकनीक फेशियल डिटेक्शन कहलाती है, जो फेशियल रिकग्निशन से अलग मानी जाती है। फेशियल रिकग्निशन किसी व्यक्ति की पहचान करने और डेटा सेव करने से जुड़ी होती है, जबकि फेशियल डिटेक्शन केवल सामने मौजूद लोगों की अनुमानित जनसांख्यिकीय जानकारी समझने की कोशिश करती है।

उदाहरण के तौर पर, कुछ कंपनियां टैबलेट स्क्रीन और डिजिटल डिस्प्ले के जरिए यह समझने की कोशिश करती हैं कि सामने किस तरह की ऑडियंस मौजूद है, ताकि उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।

इसके अलावा Affectiva और Hume AI जैसी कंपनियां अब इमोशन AI तकनीक पर भी काम कर रही हैं। यह तकनीक चेहरे के हावभाव के आधार पर लोगों की प्रतिक्रिया समझने में मदद करती है, ताकि विज्ञापनों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके।

MarketsandMarkets की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक इमोशन डिटेक्शन और रिकग्निशन मार्केट के 2026 तक 37.1 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया था। वहीं Fortune Business Insights के मुताबिक यह मार्केट 2025 में 42.83 अरब डॉलर का था और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से बढ़ने की संभावना है।

क्या DOOH अब डिजिटल जैसा Measurable हो गया?

DOOH की सबसे बड़ी कमजोरी हमेशा यह रही है कि इसे मापना मुश्किल था। ऑनलाइन विज्ञापन में क्लिक, इंप्रेशन, कन्वर्जन, सब कुछ सटीक आंका जा सकता है। होर्डिंग के साथ यह सुविधा नहीं थी।

लेकिन 2025-26 में यह समस्या धीरे-धीरे कम हो रही है। अब कंपनियां मोबाइल लोकेशन डेटा की मदद से यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि विज्ञापन देखने के बाद कितने लोग स्टोर तक पहुंचे। इसके अलावा QR कोड स्कैन, ब्रांड सर्वे और रिटेल फुटफॉल स्टडी जैसे तरीकों से भी यह मापा जा रहा है कि विज्ञापन का असर कितना हुआ और कंपनियों को उससे कितना फायदा मिला।

IAB ने जुलाई 2025 में DOOH Measurement Guide जारी की थी, जिसका मकसद डिजिटल आउट-ऑफ-होम विज्ञापनों के लिए एक जैसे मापन मानक तय करना है। हालांकि, इसका इस्तेमाल अभी शुरुआती स्तर पर ही है।

Broadsign के एक सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर विज्ञापनदाता उन DOOH प्लेटफॉर्म्स में ज्यादा निवेश करना चाहते हैं, जहां डायनेमिक और कॉन्टेक्स्ट के हिसाब से विज्ञापन दिखाने की सुविधा हो।

भारत में भी OOH इंडस्ट्री तेजी से तकनीक अपना रही है। Indian Outdoor Advertising Association (IOAA) ने 2024 में GPS आधारित ऑडियंस मेजरमेंट सिस्टम शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर में OOH विज्ञापनों की पहुंच और दर्शकों को बेहतर तरीके से मापना है।

हालांकि, इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी एक समान मापन प्रणाली की कमी है। अलग-अलग कंपनियां विज्ञापनों की पहुंच और प्रभाव को अलग-अलग तरीके से मापती हैं, जिससे पूरे बाजार के लिए एक कॉमन स्टैंडर्ड बनाना मुश्किल हो रहा है।

प्राइवेसी की चिंता: क्या 'स्मार्ट' होर्डिंग हमें देख रहे हैं?

जैसे-जैसे DOOH स्मार्ट होती जा रही है, सवाल उठ रहे हैं, क्या यह हमारी निजता का उल्लंघन है? यह चिंता पूरी तरह निराधार नहीं है, और दुनिया भर की सरकारें इस पर कड़े नियम बना रही हैं।

चीन ने अप्रैल 2026 में Personal Information Protection Law के तहत सख्त नियमों का नया रोडमैप जारी किया। इसके तहत Cyberspace Administration of China (CAC), Ministry of Industry and Information Technology (MIIT) और Ministry of Public Security (MPS) ने मिलकर कई अभियान शुरू किए हैं। इनमें इंटरनेट विज्ञापनों और यूजर डेटा के इस्तेमाल पर खास फोकस किया गया है।

नए नियमों में यूजर्स को पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन बंद करने का आसान विकल्प देना और बिना फोन नंबर दिए बेसिक सेवाएं उपलब्ध कराना जरूरी किया गया है। इससे डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

अमेरिका में Illinois का Biometric Information Privacy Act (BIPA) सबसे सख्त कानूनों में माना जाता है। इसके उल्लंघन के मामलों में Facebook पर 650 मिलियन डॉलर और Google पर 100 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया जा चुका है। वहीं Connecticut में 2026 में एक नया बिल पास हुआ, जिसमें फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और लोकेशन डेटा शेयरिंग पर सख्त नियम प्रस्तावित किए गए हैं।

हालांकि, DOOH इंडस्ट्री में ज्यादातर तकनीक फेशियल डिटेक्शन पर आधारित होती है, न कि फेशियल रिकग्निशन पर। कंपनियों का कहना है कि इसमें किसी व्यक्ति की पहचान या डेटा स्टोर नहीं किया जाता।

अब Edge Computing जैसी तकनीक भी तेजी से इस्तेमाल हो रही है। इसमें डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय उसी डिवाइस पर प्रोसेस किया जाता है, जिससे निजता बेहतर तरीके से सुरक्षित रहती है।

भारत में DOOH: महानगरों से टियर-2 शहरों तक की यात्रा

भारत में DOOH अभी मुख्यतः शीर्ष 12 मेट्रो शहरों में केंद्रित है। Adonmo के अनुसार 2024 तक देश में करीब 1.5 लाख डिजिटल स्क्रीनें थीं, जिनमें से 75% इन्हीं 12 शहरों में थीं। Adonmo के इंडस्ट्री डेटा के अनुसार भारत में DOOH कुल OOH मार्केट का महज 12% है, जबकि अमेरिका में 40% और चीन में 90%।

Mordor Intelligence के अनुसार भारत के OOH इंडस्ट्री में static OOH का 2024 में 68% हिस्सा था, जबकि DOOH सालाना 7.2% की दर से बढ़ रहा है, जो कुल OOH मार्केट वृद्धि से दोगुना है। PwC के अनुसार DOOH भारत में 16.5% CAGR से बढ़ेगा, पारंपरिक OOH के 2% CAGR से आठ गुना तेज, और 2029 तक OOH का 44.1% हिस्सा होगा, जो 2024 में 28.8% था।

बदलाव आ रहा है:

  • सरकार की Smart Cities Mission के तहत 100 शहरों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है।
  • दिसंबर 2024 तक भारत का operational metro network 993 किलोमीटर पार कर गया, जबकि 51 शहरों में 997 किलोमीटर और निर्माणाधीन है।
  • Times OOH ने मुंबई मेट्रो लाइन 3 का विज्ञापन अधिकार हासिल किया (जुलाई 2024)।
  • AdOnMo ने सितंबर 2024 में $25 मिलियन की फंडिंग जुटाई। AdOnMo, जो भारत के elevator media मार्केट में अग्रणी है, के पास 26 शहरों में 50,000 से अधिक स्मार्ट स्क्रीनें हैं।
  • FICCI और EY की 2024 रिपोर्ट के अनुसार 2026 तक digital media भारत के OOH मार्केट के कुल राजस्व का 15% बन जाएगी, जिसमें transit media 40% हिस्सा रखेगी।

भारत में DOOH की मार्केट साइज को लेकर इंडस्ट्री विशेषज्ञों में मतभेद हैं। Adgully की जनवरी 2026 की in-depth रिपोर्ट के अनुसार DOOH 2024 में कुल OOH खर्च का 28-30% था और 2026 तक 35% से अधिक होने का अनुमान है।  

छोटे शहरों तक पहुंचने की चुनौती: एक DOOH face की स्थापना लागत $10,000 से $50,000 के बीच है और बिजली खर्च ऑपरेटिंग कॉस्ट का 20% तक हो सकता है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बिजली की अनिश्चितता और connectivity की कमी बड़ी बाधा है। फिर भी LED panel की गिरती कीमतें और 5G का विस्तार इस रास्ते को धीरे-धीरे खोल रहे हैं।

AI Creatives: जब मशीन खुद बनाती है विज्ञापन

DOOH का अगला मोर्चा है, AI-generated creatives। अब विज्ञापन डिजाइन करने के लिए हफ्तों की जरूरत नहीं। AI प्लेटफॉर्म रिलय टाइम डेटा (मौसम, ट्रैफिक, स्पोर्ट्स स्कोर्स) के आधार पर खुद-ब-खुद अलग-अलग creative तैयार करते हैं।

डायनेमिक क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (DCO) की मदद से अब एक ही कैंपेन के कई अलग-अलग विज्ञापन तैयार किए जा रहे हैं। यानी अलग ऑडियंस, अलग जगह और अलग समय के हिसाब से विज्ञापन अपने आप बदल सकते हैं। JCDecaux ने फरवरी 2026 में एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसकी मदद से 80 देशों में प्रोग्रामेटिक DOOH विज्ञापनों को एक ही सिस्टम से मैनेज किया जा सकता है। इसमें रियल-टाइम बिडिंग, बदलते विज्ञापन और कार्बन रिपोर्टिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

वहीं Clear Channel Outdoor के EVP और CMO Dan Levi ने EMARKETER की जनवरी 2026 की रिपोर्ट में कहा कि जैसे-जैसे एजेंसियां अपने प्लानिंग टूल्स में एआई को शामिल कर रही हैं, वैसे-वैसे उन्हें तेजी से बेहतर और काम की जानकारियां मिल रही हैं।

OOH और डिजिटल का संगम: Omnichannel का नया युग

2026 में DOOH का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब यह अकेले काम नहीं करता। अब एक उपभोक्ता सुबह सड़क पर किसी ब्रैंड का होर्डिंग देखता है, फिर दोपहर में उसी ब्रैंड का विज्ञापन उसके मोबाइल पर दिखाई देता है और रात में वही संदेश किसी स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर भी नजर आता है। यानी अब विज्ञापन हर प्लेटफॉर्म पर आपस में जुड़े हुए तरीके से दिखाए जा रहे हैं।

OAAA और Harris Poll की 2024 की एक स्टडी के मुताबिक, 73% लोगों ने कहा कि उन्हें DOOH विज्ञापन पसंद आते हैं। वहीं टीवी विज्ञापनों को पसंद करने वालों की संख्या 50% और ऑनलाइन विज्ञापनों के लिए सिर्फ 37% रही। इसी स्टडी में 76% लोगों ने माना कि OOH विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने किसी न किसी तरह की प्रतिक्रिया दी।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

स्मार्ट DOOH तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी हैं।

सबसे बड़ी समस्या मापन की है। अभी तक इंडस्ट्री में ऐसा कोई एक समान सिस्टम नहीं है, जिससे सभी कंपनियां विज्ञापनों का असर एक ही तरीके से माप सकें। भारत में यह समस्या और बड़ी है, क्योंकि यहां प्रोग्रामेटिक DOOH अभी शुरुआती दौर में है।

दूसरी चुनौती यह है कि अभी भी ज्यादातर आउटडोर विज्ञापन पारंपरिक होर्डिंग्स पर ही आधारित हैं। OAAA के मुताबिक, OOH बाजार का बड़ा हिस्सा अब भी स्टैटिक बिलबोर्ड्स का है। यानी एआई और स्मार्ट तकनीक का फायदा फिलहाल सिर्फ डिजिटल स्क्रीन तक सीमित है।

डेटा प्राइवेसी और नियम-कानून भी बड़ी चुनौती बन रहे हैं। चीन, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनाए जा रहे हैं, जिसका असर एआई आधारित विज्ञापनों पर पड़ सकता है।

भारत में एक और दिक्कत यह है कि OOH इंडस्ट्री काफी बंटी हुई है। यहां हजारों छोटे-छोटे वेंडर्स हैं, अलग-अलग शहरों के अलग नियम हैं और कोई एक केंद्रीय मानक नहीं है। इसी वजह से पूरे देश में एक जैसी तकनीक लागू करना आसान नहीं है।

अब होर्डिंग सिर्फ तस्वीर नहीं रहे

2026 तक आते-आते DOOH ने यह साफ कर दिया है कि अब होर्डिंग सिर्फ दीवार पर लगी तस्वीर नहीं रह गए हैं। अब वे मौसम, ट्रैफिक और आसपास के माहौल के हिसाब से विज्ञापन बदल सकते हैं और सही समय पर सही संदेश दिखा सकते हैं।

भारत जैसे देश में, जहां स्मार्ट सिटी, मेट्रो और हाईवे तेजी से बढ़ रहे हैं, वहां स्मार्ट DOOH का बाजार भी तेजी से फैल रहा है। हालांकि प्राइवेसी, मापन और तकनीकी ढांचे जैसी चुनौतियां अभी बाकी हैं, लेकिन इंडस्ट्री जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उससे साफ है कि आने वाले समय में आउटडोर विज्ञापन पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डेटा आधारित होने वाले हैं।

 

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जेनपैक्ट ने पल्लवी ए. सिंह को बनाया ''VP -AI & Data Advisory''

पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी (Technology) और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (Business Transformation) के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 10 July, 2026
Last Modified:
Friday, 10 July, 2026
genpect

जेनपैक्ट (Genpact) ने पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) को हैदराबाद (Hyderabad) में वाइस प्रेसिडेंट – एआई एंड डेटा एडवाइजरी (Vice President – AI & Data Advisory) नियुक्त किया है। उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के माध्यम से साझा की।

नई भूमिका में पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) कंपनियों के बोर्ड (Board) और शीर्ष प्रबंधन (Executive Teams) के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) रणनीतियां तैयार करने, निवेश प्राथमिकताओं (Investment Priorities) को निर्धारित करने और व्यावसायिक लक्ष्यों (Business Goals) के अनुरूप रोडमैप विकसित करने का कार्य करेंगी।

पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी (Technology) और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (Business Transformation) के क्षेत्र में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

जेनपैक्ट (Genpact) से पहले वह प्रोविडेंस इंडिया (Providence India) में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर – एआई एंड डेटा, एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन (Executive Director – AI & Data, Enterprise Transformation) के पद पर कार्यरत थीं। इस भूमिका में उन्होंने एंटरप्राइज स्तर पर AI और डेटा आधारित परिवर्तन पहलों का नेतृत्व किया।

अपने करियर के दौरान पल्लवी ए. सिंह (Pallavi A. Singh) नोवार्टिस (Novartis), फ्रैंकलिन टेम्पलटन (Franklin Templeton) और पिटनी बोव्स (Pitney Bowes) जैसी वैश्विक कंपनियों में भी नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभा चुकी हैं।

जेनपैक्ट (Genpact) को उम्मीद है कि AI, डेटा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के क्षेत्र में उनका व्यापक अनुभव ग्राहकों को भविष्य की तकनीकी रणनीतियां तैयार करने और व्यवसायिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

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कंटेंट रिकमेंडेशन के लिए ''तबूला'' ने भारत में बढ़ाई ओप्पो-रियलमी साझेदारी

तबूला ने ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) के साथ अपनी साझेदारी का विस्तार करते हुए भारत और थाईलैंड में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन यूजर्स तक टैबूला न्यूज़ (Taboola News) पहुंचाने की घोषणा की है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 09 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
taboola

कंटेंट रिकमेंडेशन प्लेटफॉर्म तबूला (Taboola) ने स्मार्टफोन निर्माता ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी का विस्तार किया है। इस विस्तार के तहत तबूला न्यूज़ (Taboola News) अब भारत और थाईलैंड में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन डिवाइसेज पर उपलब्ध होगी।

तबूला (Taboola), ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) वर्ष 2023 से साथ काम कर रहे हैं। अब तक यह सेवा यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom), फिलीपींस (Philippines), सिंगापुर (Singapore) और अर्जेंटीना (Argentina) जैसे बाजारों में उपलब्ध थी। नई साझेदारी के साथ भारत और थाईलैंड भी इस सूची में शामिल हो गए हैं।

समझौते के तहत ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) अपने स्मार्टफोन्स की लॉक स्क्रीन (Lock Screen) पर तबूला (Taboola) के कंटेंट रिकमेंडेशन को इंटीग्रेट करना जारी रखेंगे। यह सेवा उपयोगकर्ताओं को उनकी रुचि के अनुसार तबूला (Taboola) के पब्लिशर नेटवर्क से व्यक्तिगत (Personalised) समाचार और अन्य कंटेंट उपलब्ध कराएगी।

तबूला (Taboola) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (Chief Executive Officer-CEO) एडम सिंगोल्डा (Adam Singolda) ने कहा, "ओप्पो (OPPO) और रियलमी (realme) हमेशा अपने ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने पर केंद्रित रहे हैं और तबूला न्यूज़ (Taboola News) उसी प्रयास का हिस्सा है।

हमारी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के दौरान हमने उनके नवाचार के प्रति समर्पण को देखा है। हमें खुशी है कि तबूला न्यूज़ (Taboola News) अब दुनिया भर में लाखों अतिरिक्त स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं तक प्रासंगिक कंटेंट पहुंचाने में योगदान दे रही है।"

ओप्पो (OPPO) ओवरसीज बिजनेस (Overseas Business) के निदेशक टैंक ज़ेंग (Tank Zeng) ने कहा, "हमारा फोकस हमेशा उपयोगकर्ताओं को मूल्यवान अनुभव प्रदान करने पर रहा है। तबूला न्यूज़ (Taboola News) के माध्यम से हमें दुनिया भर के भरोसेमंद पब्लिशर्स का कंटेंट उपलब्ध कराने का लाभ मिला है। इस विस्तारित साझेदारी के जरिए हम अपने उपयोगकर्ताओं तक और बेहतर अनुभव पहुंचाने के लिए उत्साहित हैं।"

तबूला न्यूज़ (Taboola News) पब्लिशर्स को मोबाइल डिवाइसेज के जरिए अपने कंटेंट का वितरण करने में मदद करती है। वहीं, स्मार्टफोन निर्माता अपने डिवाइसेज में व्यक्तिगत समाचार फीड (Personalised News Feed) को आसानी से इंटीग्रेट कर उपयोगकर्ताओं की सहभागिता बढ़ा सकते हैं।

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HT Media की बोर्ड बैठक 11 जुलाई को, फंड जुटाने के प्रस्ताव पर होगी चर्चा

मीडिया कंपनी HT Media Limited नई पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 11 जुलाई को होगी, जिसमें फंड जुटाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 09 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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मीडिया कंपनी HT Media Limited नई पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 11 जुलाई 2026 (शनिवार) को होगी, जिसमें फंड जुटाने से जुड़े विभिन्न विकल्पों पर विचार किया जाएगा।

कंपनी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बीएसई (BSE) को भेजी गई सूचना में कहा है कि बोर्ड बैठक में इक्विटी शेयर, कन्वर्टिबल सिक्योरिटीज, बॉन्ड या डिबेंचर जारी करने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इसके लिए प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue), राइट्स इश्यू (Rights Issue) या किसी अन्य उपयुक्त माध्यम का इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी जरूरत पड़ने पर इन विकल्पों के संयोजन पर भी विचार करेगी।

HT Media ने कहा कि फंड जुटाने का कोई भी फैसला संबंधित नियामकीय और वैधानिक मंजूरियों के अधीन होगा। यदि आवश्यक हुआ, तो इसके लिए कंपनी अपने शेयरधारकों की मंजूरी भी लेगी।

कंपनी ने यह भी बताया कि SEBI के इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों और कंपनी की आचार संहिता के तहत ट्रेडिंग विंडो पहले की तरह बंद रहेगी। यह प्रतिबंध कंपनी के सभी नामित कर्मचारियों, निदेशकों और उनके करीबी रिश्तेदारों पर लागू रहेगा।

ट्रेडिंग विंडो 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे (स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड) घोषित होने के 48 घंटे बाद तक बंद रहेगी।

फिलहाल कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह कितनी राशि जुटाने की योजना बना रही है। इस बारे में अंतिम फैसला 11 जुलाई को होने वाली बोर्ड बैठक में लिया जा सकता है।

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'डीएनए हिंदी' में एडिटोरियल टीम को लीड कर रहीं कुसुम लता ने दिया इस्तीफा

डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'डीएनए हिंदी' (DNA Hindi) में टीम को लीड कर रहीं चीफ सब एडिटर कुसुम लता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 09 July, 2026
Last Modified:
Thursday, 09 July, 2026
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डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन लिमिटेड (Diligent Media Corporation Limited) के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म 'डीएनए हिंदी' (DNA Hindi) में टीम को लीड कर रहीं चीफ सब एडिटर कुसुम लता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

कंपनी के मुताबिक, कुसुम लता ने अपने करियर में नए अवसरों को एक नई दिशा देने के मद्देनजर यह फैसला लिया है। उनका इस्तीफा 5 जून 2026 को कार्यदिवस समाप्त होने के बाद से प्रभावी हो गया। हालांकि कंपनी ने कुसुम लता के इस्तीफे की जानकारी स्टॉक मार्केट को 8 जुलाई को दी है।

कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि इस्तीफे की सूचना स्टॉक एक्सचेंज को देने में देरी हुई। हालांकि, कंपनी का कहना है कि यह देरी अनजाने में हुई प्रशासनिक चूक की वजह से हुई और इसके पीछे किसी तरह की दुर्भावना या जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करने की मंशा नहीं थी। कंपनी ने कहा कि वह आगे भी सेबी के सभी प्रकटीकरण संबंधी नियमों का समय पर पालन करती रहेगी।

कुसुम लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और उन्हें करीब 15 वर्षों का अनुभव है। डीएनए हिंदी से जुड़ने से पहले वह The Lallantop, Network18, NDTV और DB Digital जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं। डीएनए हिंदी में उन्होंने एडिटोरियल लीड और चीफ सब एडिटर- टीम लीड के रूप में जिम्मेदारी निभाई। अपने करियर के दौरान उन्होंने न्यूज़ डेस्क का संचालन, टीम मैनेजमेंट और शिफ्ट लीड करने जैसी अहम भूमिकाएं निभाई हैं। इसके अलावा एक्सप्लेनर और लॉन्ग-फॉर्म लेखन में भी उनकी अच्छी पकड़ रही है। जेंडर, राष्ट्रीय मुद्दों, हाइपरलोकल खबरों और पर्सनल फाइनेंस जैसे विषयों पर उन्होंने लगातार लेखन किया है। वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग की भी उन्हें अच्छी समझ है।

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अब Truecaller जैसे ऐप्स पर भी कस सकता है शिकंजा, TRAI ने मांगे नए अधिकार

TRAI ने सरकार से मांग की है कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) Act के तहत ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाए

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 08 July, 2026
Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2026
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देश में बढ़ती स्पैम कॉल्स के बीच अब विवाद इस बात पर खड़ा हो गया है कि आखिर यह तय करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए कि कौन-सी कॉल स्पैम है और कौन-सी नहीं। इसी को लेकर टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) ने बड़ा कदम उठाया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, TRAI ने सरकार से मांग की है कि उसे सूचना प्रौद्योगिकी (IT) Act के तहत ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार दिया जाए, जो अधिकृत (Authorised) नंबरों से आने वाली असली कॉल्स को भी स्पैम बताकर ब्लॉक या टैग कर देते हैं।

Truecaller जैसे ऐप्स पर रहेगी नजर

TRAI की इस पहल का असर Truecaller, Hiya और Whoscall जैसे कॉलर आईडी और कॉल मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म पर पड़ सकता है।

फिलहाल ये ऐप्स IT Act के तहत 'इंटरमीडियरी' की श्रेणी में आते हैं। इसलिए इन पर सीधे TRAI का अधिकार नहीं है, बल्कि इनसे जुड़े नियमों की जिम्मेदारी इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिक मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) के दायरे में आती है।

क्या चाहता है TRAI?

TRAI का कहना है कि वह इन ऐप्स को सीधे नियंत्रित नहीं करना चाहता। उसकी मांग सिर्फ इतनी है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म दूरसंचार से जुड़े नियमों का उल्लंघन करता है या अधिकृत नंबरों को गलत तरीके से स्पैम बताता है, तो उसे कार्रवाई करने का अधिकार मिलना चाहिए।

इसके लिए TRAI ने खुद को IT Act के तहत एक 'Authorised Agency' घोषित करने की मांग की है। ऐसा होने पर वह डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को आधिकारिक नोटिस जारी कर सकेगा और उनसे नियमों का पालन सुनिश्चित करा सकेगा।

सरकार ने सिद्धांत रूप से दिखाई सहमति

रिपोर्ट के अनुसार, MeitY ने TRAI के इस प्रस्ताव को सिद्धांत रूप से मंजूरी दे दी है। अब इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी DoT निभा सकता है।

टेलीकॉम कंपनियों की क्या है शिकायत?

टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि सरकार ने व्यावसायिक और सेवा संबंधी कॉल्स के लिए 140 और 1600 सीरीज के विशेष नंबर तय किए हैं। इन नंबरों से आने वाली कॉल्स अधिकृत होती हैं।

लेकिन कई बार कॉल मैनेजमेंट ऐप्स इन्हीं असली और जरूरी कॉल्स को भी स्पैम बताकर टैग कर देते हैं। इससे ग्राहकों तक बैंक, बीमा कंपनियों, अस्पतालों, डिलीवरी सेवाओं और अन्य जरूरी संस्थाओं की महत्वपूर्ण कॉल्स नहीं पहुंच पातीं।

टेलीकॉम कंपनियों का मानना है कि इससे सरकार की अधिकृत नंबरिंग व्यवस्था कमजोर होती है और उपभोक्ता जरूरी जानकारी से वंचित रह सकते हैं।

उपभोक्ता सुरक्षा और सही कॉल के बीच संतुलन की चुनौती

भारत में जैसे-जैसे कॉलर आईडी और स्पैम फिल्टरिंग ऐप्स का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह सवाल भी अहम होता जा रहा है कि किसी कॉल को स्पैम घोषित करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए। एक ओर उपभोक्ताओं को फर्जी और धोखाधड़ी वाली कॉल्स से बचाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सही और अधिकृत कॉल्स गलती से ब्लॉक न हों।

इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए TRAI अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक निगरानी और जवाबदेही चाहता है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो भविष्य में Truecaller जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप्स को भी अधिक सख्त नियामकीय नियमों का पालन करना पड़ सकता है।

 

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WhatsApp पर AI संभालेगा कस्टमर सर्विस, Meta ने लॉन्च किया Business Agent

वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म ने मेटा बिजनेस एजेंट नाम का नया AI आधारित असिस्टेंट लॉन्च किया है

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 08 July, 2026
Last Modified:
Wednesday, 08 July, 2026
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अब कंपनियों को ग्राहकों के सवालों का जवाब देने के लिए हर समय बड़ी कस्टमर सर्विस टीम की जरूरत नहीं होगी। वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म ने मेटा बिजनेस एजेंट नाम का नया AI आधारित असिस्टेंट लॉन्च किया है, जो कारोबारियों की ओर से ग्राहकों से बातचीत करेगा, उनके सवालों के जवाब देगा और कई जरूरी काम अपने आप संभालेगा।

इस नए फीचर की घोषणा मुंबई में आयोजित वॉट्सऐप बिजनेस सम्मिट के तीसरे संस्करण में की गई। मेटा का कहना है कि यह AI टूल भारत में तेजी से बढ़ रहे Conversational Commerce यानी चैट के जरिए कारोबार को नई रफ्तार देगा।

ग्राहकों के सवालों का देगा तुरंत जवाब

मेटा बिजनेस एजेंट को इस तरह तैयार किया गया है कि वह ग्राहकों के सामान्य सवालों का तुरंत जवाब दे सके। इसके अलावा यह प्रोडक्ट कैटलॉग से सामान सुझाएगा, अपॉइंटमेंट बुक करेगा, संभावित ग्राहकों (Leads) की पहचान करेगा और खरीदारी से जुड़ी बातचीत में भी मदद करेगा।

अगर किसी ग्राहक की समस्या AI से हल नहीं हो पाती है, तो कंपनी यह तय कर सकेगी कि बातचीत को कब किसी वास्तविक कस्टमर सर्विस एग्जीक्यूटिव के पास भेजा जाए।

सिर्फ चैट नहीं, कारोबार भी संभालेगा

मेटा का कहना है कि यह AI असिस्टेंट केवल ग्राहकों से बातचीत ही नहीं करेगा, बल्कि उनके साथ हुई बातचीत का विश्लेषण भी करेगा। यह मिस हुई चैट का सार (Summary) तैयार करेगा और कंपनियों को यह समझने में मदद करेगा कि ग्राहक क्या चाहते हैं और उनकी टीम का प्रदर्शन कैसा है।

भारत बना सबसे तेजी से बढ़ता बाजार

मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और कंट्री हेड अरुण श्रीनिवास ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते Conversational Business बाजारों में शामिल है। अब ग्राहक फोन कॉल या ईमेल की बजाय सीधे मैसेजिंग ऐप के जरिए कंपनियों से जुड़ना पसंद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मेटा बिजनेस एजेंट कंपनियों को पहले से ज्यादा तेज और व्यक्तिगत (Personalised) ग्राहक सेवा देने में मदद करेगा।

बड़ी कंपनियों के लिए अलग प्लेटफॉर्म

मेटा ने मेटा बिजनेस एजेंट Platform भी पेश किया है। यह खास तौर पर बड़ी कंपनियों के लिए बनाया गया है, ताकि वे अपने AI एजेंट तैयार कर सकें और उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से कस्टमाइज कर सकें।

यह प्लेटफॉर्म Shopify, Zendesk और Shopee जैसे बिजनेस टूल्स के साथ भी जुड़ सकता है। वॉट्सऐप Business Platform इसके लिए मुख्य ग्राहक संपर्क माध्यम होगा।

वॉट्सऐप पर ही मिलेगा बिजनेस सर्च

मेटा ने वॉट्सऐप में नए Business Discovery फीचर्स की भी घोषणा की है। जल्द ही यूजर्स वॉट्सऐप के भीतर ही किसी बिजनेस को उसके नाम से खोज सकेंगे। साथ ही किसी बिजनेस का कॉन्टैक्ट अपने दोस्तों और परिवार के साथ भी आसानी से साझा कर पाएंगे। इससे ऐप छोड़े बिना ही कंपनियों तक पहुंचना आसान होगा।

वॉट्सऐप को बना रहा है पूरा बिजनेस प्लेटफॉर्म

मेटा की यह पहल दिखाती है कि कंपनी वॉट्सऐप को सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि एक ऐसे प्लेटफॉर्म में बदलना चाहती है जहां ग्राहक सेवा, खरीदारी, AI आधारित सहायता और बिजनेस से जुड़े ज्यादातर काम एक ही चैट विंडो में पूरे हो सकें। भारत में डिजिटल कारोबार और चैट-आधारित खरीदारी के तेजी से बढ़ते चलन को देखते हुए मेटा को उम्मीद है कि आने वाले समय में कंपनियों और ग्राहकों के बीच ज्यादातर बातचीत की शुरुआत वेबसाइट से नहीं, बल्कि एक वॉट्सऐप मैसेज से होगी। 

 

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