‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर व न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शामिल ‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर और लोकप्रिय न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे। उन्होंने 'नेटवर्क18' समूह जॉइन कर लिया है।
दरअसल, 'समाचार4मीडिया' ने ही विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से सबसे पहले खबर दी थी कि ‘टाइम्स नेटवर्क’ से विदाई तय मानी जा रही है, क्योंकि सुशांत सिन्हा का इस चैनल के साथ कॉन्ट्रैक्ट 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा है और नेटवर्क रिन्यू करने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों ने तो यहां तक कह दिया था कि वह जल्द ही ‘नेटवर्क18’ के साथ नई पारी शुरू करने जा रहे हैं और अब इस पर आधिकारिक मुहर लग गई है। सुशांत सिन्हा ने एक प्रोमो जारी किया है।
"आ रहा हूं BOSS.... तैयार रहिएगा"
— News18 India (@News18India) June 5, 2026
सुशांत सिन्हा News18 India पर#News18India | @SushantBSinha pic.twitter.com/pAPlhjO9M2
इस खबर से 'समाचार4मीडिया' ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाठकों का भरोसा उस पर क्यों है। दरअसल, यहां ये बताना जरूरी हो जाता है कि 'समाचार4मीडिया' की ही खबरों को कई वेबसाइट अपने प्लेटफॉर्म पर पब्लिश करती हैं।
यहां पढ़ें पुरानी खबर- टाइम्स नेटवर्क से सुशांत सिन्हा की विदाई तय, Network18 जाने की तैयारी!
गौरतलब है कि सुशांत सिन्हा हिंदी न्यूज इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा हैं। टाइम्स नाउ नवभारत पर ‘पाठशाला’ और ‘राष्ट्रगर्व’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने खास पहचान बनाई। करीब दो दशक के करियर में वह इंडिया टीवी, एनडीटीवी इंडिया, न्यूज24 और इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
गौरव मीडिया, ब्रैंडेड कंटेंट, सेल्स, ग्रोथ स्ट्रैटेजी और कस्टम मार्केटिंग के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
'एनडीटीवी' (NDTV) ने गौरव मेहरा को एनडीटीवी हिंदी व रीजनल चैनल्स के ब्रैंड स्टूडियो का रेवेन्यू हेड नियुक्त किया है। गौरव मीडिया, ब्रैंडेड कंटेंट, सेल्स, ग्रोथ स्ट्रैटेजी और कस्टम मार्केटिंग के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।
गौरव मेहरा NDTV में TV9 नेटवर्क से जुड़े हैं, जहां वे नेशनल हेड व वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे। इस भूमिका में उन्होंने ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट आधारित ग्रोथ को नेतृत्व दिया। इससे पहले वे नेटवर्क18 ग्रुप, जी एंटरटेनमेंट, रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क, CNBC-TV18, Idea Cellular और Vodafone India जैसी प्रमुख कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।
अमृतसर के DAV कॉलेज और Faculty of Management Studies (FMS) के पूर्व छात्र गौरव मेहरा ने अपने करियर के दौरान कई सफल ब्रैंडेड कंटेंट बिजनेस तैयार किए और उन्हें बड़े स्तर तक पहुंचाया। उन्होंने इंटीग्रेटेड कैंपेन, उद्देश्यपूर्ण स्टोरीटेलिंग, एडिटोरियल इंटीग्रेशन, डिजिटल, इन्फ्लुएंसर और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशंस के जरिए मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की है।
उनके प्रमुख कैंपेंस में Castrol Super Mechanic Contest, Mahindra Unlimit Bharat, Sensodyne Oral Health Awareness, Samsung Campaigns, Castrol Pragati Ki Paathshaala और Ultratech Baat Ghar Ki जैसे चर्चित प्रोजेक्ट शामिल हैं।
इस नियुक्ति पर NDTV के CEO और Editor-in-Chief Rahul Kanwal ने कहा, “गौरव के पास ब्रैंड्स, बाजार और कंटेंट आधारित रेवेन्यू मॉडल की गहरी समझ है। NDTV अपने हिंदी और क्षेत्रीय नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और ऐसे समय में स्केलेबल ब्रैंड सॉल्यूशंस और मजबूत साझेदारियां बनाने का उनका अनुभव हमारी ग्रोथ जर्नी को नई ताकत देगा।”
NDTV के Chief Experiences Officer Rahul Shaw ने कहा, “गौरव की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि हम ऐसे रेवेन्यू लीडर्स को टीम में शामिल कर रहे हैं जो बाजार की समझ के साथ सहयोग, रचनात्मकता और बेहतरीन निष्पादन की क्षमता रखते हैं। हम उनका स्वागत करते हैं और Brand Studio बिजनेस में उनके योगदान को लेकर उत्साहित हैं।”
अपनी नई जिम्मेदारी पर Gaurav Mehrraa ने कहा, “NDTV भारत के सबसे सम्मानित और विश्वसनीय मीडिया ब्रैंड्स में से एक है, जिसकी मजबूत मौजूदगी कई भाषाओं और प्लेटफॉर्म्स पर है। मैं टीम से जुड़कर बेहद उत्साहित हूं और ऐसे ब्रैंड सॉल्यूशंस विकसित करना चाहता हूं जो भरोसे, प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग और मापने योग्य परिणामों का बेहतरीन संयोजन पेश करें।”
राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Ltd) के शेयरों में हाल में आई तेज कीमतों की हलचल को लेकर स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Ltd) के शेयरों में हाल में आई तेज कीमतों की हलचल को लेकर स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार को ताजा व प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक्सचेंज ने 3 जून 2026 को कंपनी को यह नोटिस भेजा था।
इस संबंध में कंपनी ने 4 जून 2026 को BSE और NSE को अपना जवाब भेज दिया है।
कंपनी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उसके शेयरों में जो भी कीमतों का उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वह पूरी तरह से बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की गतिविधियों पर आधारित है। कंपनी प्रबंधन का इस मूल्य परिवर्तन पर कोई नियंत्रण नहीं है और न ही उसे शेयर कीमतों में आई इस महत्वपूर्ण तेजी या गिरावट के पीछे किसी विशेष कारण की जानकारी है।
Raj Television Network ने यह भी स्पष्ट किया कि वह SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 और स्टॉक एक्सचेंजों के साथ हुए समझौतों के तहत सभी जरूरी जानकारियों का समय-समय पर खुलासा करती रही है और आगे भी करती रहेगी।
नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले डाटा रिलीज से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।
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‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने न्यूज चैनलों की टेलीविज़न ऑडियंस रेटिंग्स पर लगी रोक को चार हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले से ब्रॉडकास्टर्स, एडवर्टाइजर्स और मीडिया प्लानर्स के बीच अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि पूरा सेक्टर वीकली व्यूअरशिप डेटा पर काफी हद तक निर्भर करता है।
‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया’ (BARC India) ने सोमवार को अपने सब्सक्राइबर्स को भेजे गए कम्युनिकेशन में इस फैसले की जानकारी दी।
BARC India के मुताबिक उसे मंत्रालय की ओर से नया निर्देश मिला है, जिसमें कहा गया है कि TV न्यूज चैनलों की रेटिंग्स रिपोर्टिंग को अगले चार हफ्तों तक या अगले आदेश तक रोके रखा जाए। नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले data release से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।
इससे पहले मई में भी मंत्रालय ने रेटिंग्स रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का आदेश दिया था। अब नई अवधि बढ़ने के बाद न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में ratings दोबारा शुरू होने को लेकर इंतजार और लंबा हो गया है।
TV न्यूज रेटिंग्स एडवर्टाइजर्स और मीडिया एजेंसीज़ के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर एडवर्टाइजिंग स्पेंड्स और कैंपेन प्लानिंग तय की जाती है।
प्रसार भारती ने अपनी फ्री-टू-एयर डीटीएच सेवा 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) पर खाली पड़े MPEG-4 कैरिज स्लॉट्स के लिए आयोजित 99वीं ई-नीलामी (e-auction) के नतीजों की घोषणा कर दी है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
प्रसार भारती ने अपनी फ्री-टू-एयर डीटीएच सेवा 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) पर खाली पड़े MPEG-4 कैरिज स्लॉट्स के लिए आयोजित 99वीं ई-नीलामी (e-auction) के नतीजों की घोषणा कर दी है। इस नीलामी में 10 टीवी चैनलों को स्लॉट आवंटित किए गए हैं।
सफल बोली लगाने वाले चैनलों में Republic TV, Bharat Express, Vistaar News, Nation 27, News India 24X7, R. Bangla, Living India News, Prag News, Rengoni और NE News शामिल हैं।
प्रसार भारती के अनुसार, इन नए स्लॉट्स का संचालन 5 जून 2026 से शुरू होगा और ये 31 मार्च 2027 तक वैध रहेंगे।
यह मध्य-वर्षीय (Mid-Year) ई-नीलामी, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले आयोजित 97वीं ई-नीलामी के बाद की गई है। उस नीलामी में पूरे साल के लिए 39 स्लॉट्स आवंटित किए गए थे। अप्रैल के बाद कुछ स्लॉट खाली हो जाने के कारण इन रिक्तियों को भरने के लिए 99वीं ई-नीलामी आयोजित की गई।
प्रसार भारती ने इस नीलामी के लिए 19 मई से 26 मई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए थे।
ई-नीलामी में उपलब्ध स्लॉट्स को विभिन्न कंटेंट श्रेणियों और क्षेत्रीय भाषा वर्गों में बांटा गया था, ताकि 'डीडी फ्री डिश' पर अलग-अलग भाषाओं और कंटेंट का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
इसके तहत G1 बकेट को न्यूज व करंट अफेयर्स (News & Current Affairs) वाले चैनलों के लिए रखा गया था, जिसकी आरक्षित कीमत 61.65 लाख रुपये तय की गई थी। वहीं G2 बकेट नॉन-न्यूज (Non-News) चैनलों के लिए था, जिसकी आरक्षित कीमत 60 लाख रुपये रखी गई थी।
क्षेत्रीय भाषा चैनलों के लिए भी अलग-अलग कैटेगरीज बनाई गई थीं। R1, R2 और R3 नाम के इन बकेट्स में दक्षिण भारतीय, पश्चिमी, पूर्वी और संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों को शामिल किया गया था।
इन क्षेत्रीय स्लॉट्स की आरक्षित कीमत 4.94 लाख रुपये से लेकर 34.83 लाख रुपये तक तय की गई थी।
प्रसार भारती का कहना है कि अलग-अलग स्तर की यह मूल्य निर्धारण व्यवस्था दर्शकों की मांग और विभिन्न क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय चैनलों की कमाई की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 'डीडी फ्री डिश' देश का सबसे बड़ा फ्री-टू-एयर टेलीविजन वितरण प्लेटफॉर्म माना जाता है और यहां स्लॉट हासिल करना प्रसारकों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से बड़ी राहत मिली है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से बड़ी राहत मिली है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि SEBI ने 2009 में किए गए कुछ समझौतों और उनके खुलासों (Disclosure) से जुड़े मामले में चल रही जांच प्रक्रिया को बंद कर दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी ने SEBI के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया और उस पर कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।
NDTV ने 2 जून 2026 को बीएसई और एनएसई को भेजे गए अपने पत्र में बताया कि वह 27 जनवरी 2020 को किए गए अपने पुराने खुलासे का संदर्भ दे रही है। उस समय कंपनी ने जानकारी दी थी कि SEBI ने उसे एक शो-कॉज नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के Regulation 30 का पालन नहीं किया और 2009 में किए गए कुछ समझौतों से जुड़ी जानकारियों का उचित खुलासा नहीं किया।
कंपनी ने अब बताया है कि SEBI के एजुडिकेटिंग ऑफिसर (Adjudicating Officer) ने 29 मई 2026 को जारी अपने आदेश में इस मामले का निपटारा कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने शो-कॉज नोटिस में लगाए गए आरोपों के अनुसार SEBI के लिस्टिंग नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है। इसलिए कंपनी के खिलाफ चल रही कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया है और कोई आर्थिक दंड नहीं लगाया गया।
NDTV के अनुसार, यह आदेश Adjudication Order No. Order/JS/DP/2026-27/32428 के तहत 29 मई 2026 को पारित किया गया। कंपनी को यह आदेश 1 जून 2026 को प्राप्त हुआ।
क्या था मामला?
SEBI ने NDTV के खिलाफ यह कार्रवाई 2009 में हुए कुछ समझौतों के खुलासे को लेकर शुरू की थी। यह मामला VCPL (विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड), RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के तत्कालीन प्रमोटरों के बीच हुए कुछ समझौतों से जुड़ा था।
SEBI का आरोप था कि इन समझौतों से संबंधित जानकारी के खुलासे में Regulation 30 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था और जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।
हालांकि, अब SEBI के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए वह खुलासा करने की बाध्यता (Disclosure Obligation) पैदा ही नहीं होती थी, जिसका उल्लेख शो-कॉज नोटिस में किया गया था। इसलिए कंपनी के खिलाफ चल रही एडजुडिकेशन प्रक्रिया को बिना किसी जुर्माने के समाप्त कर दिया गया।
कंपनी पर क्या होगा असर?
NDTV ने अपने खुलासे में साफ कहा है कि SEBI के इस आदेश का कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार, संचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी पर किसी तरह का आर्थिक दंड नहीं लगाया गया है और न ही इस आदेश से उसके संचालन पर कोई असर पड़ेगा।
देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया, जिसमें टीवी चैनलों पर हर घंटे सिर्फ 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन शामिल थे, ने ब्रॉडकास्टर्स और इंडस्ट्री संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। TRAI ने यह नियम साल 2013 में लागू किया था। इसके तहत किसी भी चैनल को एक घंटे में 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट अपने प्रमोशनल कंटेंट दिखाने की इजाजत है।
यह फैसला टीवी इंडस्ट्री, खासकर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर चैनलों पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है। पिछले कई सालों से कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव कवरेज के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं।
दरअसल, दिसंबर 2013 में हाई कोर्ट ने चैनलों को अस्थायी राहत देते हुए TRAI को सख्त कार्रवाई से रोक दिया था। तभी से यह मामला अदालत में लंबित था। अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि TRAI का नियम वैध है।
TRAI का कहना था कि जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दर्शकों के देखने के अनुभव को खराब करते हैं और कार्यक्रमों की निरंतरता टूटती है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स का तर्क था कि TRAI के पास विज्ञापनों की अवधि तय करने का अधिकार नहीं है। उनका यह भी कहना था कि अगर विज्ञापन समय घटा दिया गया, तो कई चैनलों के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ेगा।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के बाद चैनलों को अपनी प्रोग्रामिंग और कमाई की रणनीति बदलनी पड़ सकती है। विज्ञापन स्लॉट कम होने से चैनल प्रीमियम रेट बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि इससे विज्ञापनदाता डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ और तेजी से जा सकते हैं, जहां टारगेटेड और सस्ते विज्ञापन विकल्प मौजूद हैं।
मनोरंजन चैनल, मूवी चैनल और लाइव स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट करने वाले नेटवर्क्स को भी अब अपने एड शेड्यूल और इन्वेंट्री प्लानिंग में बदलाव करना पड़ सकता है। इंडस्ट्री अब कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रही है, जिससे यह साफ होगा कि नियम लागू करने का तरीका क्या होगा और लाइव इवेंट्स या स्पोर्ट्स प्रसारण को कोई छूट मिलेगी या नहीं।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टीवी इंडस्ट्री पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया वीडियो और OTT से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में टीवी नेटवर्क्स सब्सक्रिप्शन, ब्रांडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल कारोबार पर ज्यादा फोकस कर सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब टीवी चैनल एक घंटे में सिर्फ 12 मिनट ही विज्ञापन दिखा सकेंगे। इसमें 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट चैनल के खुद के प्रमोशनल कंटेंट के लिए होंगे।
इस फैसले के साथ ब्रॉडकास्टर्स और TRAI के बीच पिछले 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई है। हालांकि मीडिया इंडस्ट्री के कई खिलाड़ी अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर (FTA) चैनलों पर पड़ सकता है। वजह यह है कि इन चैनलों की कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है।
दरअसल, कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, चुनाव कवरेज, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव इवेंट्स के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं। अब 12 मिनट की सीमा लागू होने के बाद उनके पास बेचने के लिए कम विज्ञापन स्लॉट बचेंगे। इससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब चैनलों के सामने दो रास्ते होंगे। पहला, कम विज्ञापन स्लॉट होने की वजह से विज्ञापन दरें बढ़ाई जाएं। दूसरा, अपने बिजनेस मॉडल और प्रोग्रामिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव किया जाए। खासतौर पर हिंदी न्यूज चैनलों और रीजनल चैनलों पर ज्यादा दबाव बन सकता है, क्योंकि इन बाजारों में प्रतिस्पर्धा पहले से काफी ज्यादा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई सीमित है।
मीडिया एजेंसियों का मानना है कि इस फैसले के बाद टीवी विज्ञापनों की उपलब्धता कम हो जाएगी। ऐसे में प्राइम टाइम शो, बड़े एंटरटेनमेंट प्रोग्राम और लाइव स्पोर्ट्स के दौरान विज्ञापन स्लॉट की कीमतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि विज्ञापनदाता ज्यादा महंगे टीवी विज्ञापन स्वीकार करेंगे या नहीं, यह बड़ा सवाल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले ही ऐडवर्टाइजर्स को बेहतर टार्गेटिंग, पर्फॉमेंस ट्रैकिंग और फ्लैक्सिबल प्राइजिंग जैसे विकल्प दे रहे हैं। ऐसे में अगर टीवी चैनल विज्ञापन दरें बहुत ज्यादा बढ़ाते हैं, तो कई ब्रांड डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरफ तेजी से शिफ्ट हो सकते हैं।
इंडस्ट्री के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय टीवी ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में चैनलों को कम विज्ञापनों में ज्यादा कमाई का नया रास्ता तलाशना पड़ सकता है।
मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कंपनी के मुताबिक, उसने लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ का खिताब अपने नाम किया।
इस साल Zee ने कुल 15 अवॉर्ड जीते, जिनमें 3 गोल्ड, 6 सिल्वर, 5 ब्रॉन्ज और 1 मेरिट अवॉर्ड शामिल हैं। कंपनी की इस उपलब्धि को टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उसकी मजबूत पकड़ और दर्शकों के बीच बढ़ती लोकप्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
Zee Kannada, Zee Bangla, Zee Marathi और Zee Cinema जैसे चैनलों ने अलग-अलग कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन किया। Zee Kannada के शो ‘श्री राघवेंद्र महात्मे’ को ‘Best Launch of a TV Program Using Multi-Media’ कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड मिला। वहीं Zee Cinema पर ‘Pushpa 2: The Rule’ के वर्ल्ड टीवी प्रीमियर को भी दो अलग-अलग कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
कंपनी का कहना है कि बदलते मीडिया माहौल में भी उसका लीनियर टीवी नेटवर्क लगातार मजबूत बना हुआ है और दर्शकों के बीच उसकी पकड़ कायम है।
इस उपलब्धि पर Zee Entertainment Enterprises Ltd. के प्रवक्ता ने कहा कि लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ जीतना इस बात का सबूत है कि कंपनी लगातार ऐसा कंटेंट देने पर फोकस कर रही है, जो बड़े स्तर पर दर्शकों से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि यह सफलता टीम और पार्टनर्स की मेहनत का नतीजा है, जो लगातार नई कहानियों और दमदार किरदारों के जरिए स्टोरीटेलिंग को नई पहचान दे रहे हैं।
कंपनी ने हाल के वर्षों में अपनी कंटेंट रणनीति को और मजबूत किया है। मजबूत किरदारों और भारतीय संस्कृति से जुड़े नए शो लॉन्च करने की वजह से Zee ने एंटरटेनमेंट नेटवर्क में अपनी पकड़ और मजबूत की है। कंपनी फिलहाल 17.4% मार्केट शेयर के साथ भारत का नंबर-2 एंटरटेनमेंट नेटवर्क बनी हुई है।
हिंदी, बांग्ला, ओड़िया और कन्नड़ बाजारों में Zee की मजबूत स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही Zee Cinema ने नए शो और बड़ी फिल्म प्रीमियर के दम पर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है।
ABBY Awards को देश के सबसे प्रतिष्ठित क्रिएटिव और मीडिया अवॉर्ड्स में गिना जाता है। इसमें देशभर की बड़ी एजेंसियां, मार्केटर्स और क्रिएटिव लीडर्स हिस्सा लेते हैं। ऐसे में लगातार चौथी बार यह सम्मान जीतना Zee के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
देश की टीवी न्यूज इंडस्ट्री इस समय FAST TV और इंटरनेट के जरिए चलने वाले टीवी चैनलों को लेकर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। मामला TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें Application-based Linear Television Distribution (ALTD) और Free Ad-Supported Streaming Television (FAST) सेवाओं के लिए रेगुलेशन लाने की बात कही गई है।
TRAI ने 6 अप्रैल को इस विषय पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया था और कंपनियों से राय मांगी थी। इसके बाद टाइम्स नेटवर्क, एबीपी नेटवर्क, टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 जैसी बड़ी मीडिया कंपनियों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। इन प्रतिक्रियाओं से साफ हो गया है कि टीवी और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग के भविष्य को लेकर इंडस्ट्री के भीतर बड़ी बहस चल रही है।
टाइम्स नेटवर्क और एबीपी नेटवर्क का मानना है कि FAST चैनल्स और इंटरनेट आधारित टीवी प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन उन पर वैसी जिम्मेदारियां और नियम लागू नहीं हैं जैसे केबल, डीटीएच और IPTV प्लेटफॉर्म पर होते हैं। उनका कहना है कि इससे बाजार में असंतुलन पैदा हो रहा है।
टाइम्स नेटवर्क ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कई प्रीमियम चैनल, जो पहले पेड टीवी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थे, अब FAST प्लेटफॉर्म्स पर मुफ्त में दिखाए जा रहे हैं। इससे लोगों का पेड टीवी से दूरी बनाना बढ़ रहा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई पर असर पड़ रहा है।
कंपनी ने यह भी चिंता जताई कि स्मार्ट टीवी कंपनियां और ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोवाइडर्स अब यह तय करने लगे हैं कि कौन-सा चैनल दर्शकों को ज्यादा दिखाई देगा। भविष्य में ये कंपनियां चैनलों से “दिखाई देने” के बदले फीस भी मांग सकती हैं, जैसा पहले पारंपरिक टीवी डिस्ट्रीब्यूशन में देखा गया था।
एबीपी नेटवर्क ने भी कई मुद्दों पर टाइम्स नेटवर्क का समर्थन किया, लेकिन उसने पूरी तरह सख्त नियमों की बजाय “हल्के लेकिन सक्रिय रेगुलेशन” की बात कही। कंपनी का कहना है कि अगर FAST इकोसिस्टम बिना किसी निगरानी के बढ़ता रहा, तो कुछ बड़ी टेक कंपनियों का दबदबा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
एबीपी नेटवर्क ने एल्गोरिदम के जरिए अपने कंटेंट को बढ़ावा देने, विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी और दर्शकों के डेटा पर असमान नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी चिंता जताई। कंपनी ने मांग की कि ब्रॉडकास्टर्स के कंटेंट से जुड़े विज्ञापन इन्वेंटरी पर उनका ही नियंत्रण रहना चाहिए।
वहीं दूसरी तरफ टीवी टुडे नेटवर्क और नेटवर्क18 ने TRAI के इस प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। उनका कहना है कि FAST और ALTD सेवाएं असल में OTT और इंटरनेट आधारित एप्लिकेशन हैं, इसलिए इन्हें टेलीकॉम सर्विस की तरह रेगुलेट नहीं किया जा सकता।
टीवी टुडे नेटवर्क ने कहा कि ये सेवाएं सिर्फ इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करती हैं, लेकिन खुद टेलीकॉम सर्विस नहीं हैं। कंपनी का यह भी कहना है कि न्यूज और कंटेंट प्लेटफॉर्म पहले से ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, केबल टीवी नेटवर्क एक्ट, आईटी नियमों और सेल्फ-रेगुलेटरी संस्थाओं के दायरे में आते हैं। ऐसे में नए नियम सिर्फ अतिरिक्त बोझ बढ़ाएंगे।
नेटवर्क18 ने और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि FAST और ALTD सेवाओं को टेलीकॉम रेगुलेशन के दायरे में लाना कानूनी और संवैधानिक रूप से गलत हो सकता है। कंपनी का कहना है कि संसद ने पहले ही टेलीकॉम एक्ट के अंतिम मसौदे में OTT सेवाओं को बाहर रखा था।
नेटवर्क18 ने यह भी कहा कि इंटरनेट आधारित ऐप्स और टेलीकॉम नेटवर्क दोनों अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं। ऐसे में इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर लाइसेंस फीस, बैंक गारंटी और पुराने ब्रॉडकास्टिंग नियम लागू करना डिजिटल इंडिया और कारोबार आसान बनाने की नीति के खिलाफ होगा।
दरअसल, भारत में FAST TV बाजार तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्ट टीवी की बढ़ती पहुंच, सस्ता इंटरनेट और मुफ्त विज्ञापन आधारित कंटेंट की बढ़ती मांग इसकी बड़ी वजह मानी जा रही है। यही कारण है कि ब्रॉडकास्टर्स इसे एक बड़े मौके के साथ-साथ अपने पारंपरिक बिजनेस के लिए खतरे के रूप में भी देख रहे हैं।
अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर TRAI की अगली कार्रवाई पर टिकी है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर भारत के कनेक्टेड टीवी बाजार, डिजिटल विज्ञापन इंडस्ट्री और ब्रॉडकास्टर्स, टेक कंपनियों तथा रेगुलेटर्स के बीच ताकत के संतुलन पर पड़ सकता है।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज ने स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा ऐलान किया है। कंपनी अब ‘Unite8 Sports’ नाम से चार नए स्पोर्ट्स चैनल लॉन्च करने जा रही है। इसके जरिए Zee फुटबॉल, कबड्डी, क्रिकेट, बैडमिंटन, रेसलिंग, बॉक्सिंग और कॉम्बैट स्पोर्ट्स जैसे खेलों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
कंपनी के मुताबिक, वह चार चैनल लॉन्च करेगी- Unite8 Sports 1, Unite8 Sports 1 HD (हिंदी) और Unite8 Sports 2, Unite8 Sports 2 HD (अंग्रेजी)। इन चैनलों के जरिए अलग-अलग तरह के खेलों का लाइव एक्शन दर्शकों तक पहुंचाया जाएगा। चैनल लॉन्च करने के लिए जरूरी आवेदन भी कंपनी ने जमा कर दिए हैं।
Zee का कहना है कि भारत में लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की मांग तेजी से बढ़ रही है और दर्शकों की दिलचस्पी अब कई तरह के खेलों में बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनी अपने स्पोर्ट्स कारोबार का विस्तार कर रही है।
इस नए स्पोर्ट्स कारोबार की जिम्मेदारी भावेश जनावेल्कर को दी गई है। वह अब Unite8 Sports चैनलों के Chief Business Officer के तौर पर काम संभालेंगे। इससे पहले वह कंपनी के मराठी मूवी बिजनेस को संभाल रहे थे।
भावेश जनावलेकर ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में ऐसे खेलों की मांग बढ़ रही है, जिनकी वैश्विक पहचान हो लेकिन जिनसे देश के आम दर्शक भी जुड़ाव महसूस करें। उन्होंने कहा कि लाइव स्पोर्ट्स कंटेंट की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है और कंपनी इसी मौके का फायदा उठाना चाहती है।
कंपनी ने यह भी बताया कि वह FIFA के साथ बातचीत कर रही है, ताकि भारत में FIFA World Cup 2026 के मैचों का प्रसारण और स्ट्रीमिंग की जा सके।
Zee का मानना है कि नए स्पोर्ट्स चैनलों के जरिए वह तेजी से बढ़ रहे स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टिंग बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगी और लंबे समय में कारोबार को नई मजबूती मिलेगी।