औरों के लिए लड़ता हूं, पर अपने लिए कहां बोल पाता हूं! हां मैं पत्रकार कहलाता हूं

‘न जाने कितने ऐसे पत्रकारों की हत्याएं हो चुकी हैं। कुछ हत्याएं सुर्खियां बन गई, और कुछ की रात के अंधेरे में कीमत चुका दी गई। यह पेशा काफी चुनौती भरा है, जिसे कुछ लोग ही करना चाहते हैं। आइए, हम आपको कुछ ऐसी और घटनाओं के बारे में बताते हैं, जहां रिपोर्टिंग करना, बिल्कुल काल के गाल में समाने जैसा था।’ हिंदी वेबपोर्टल ‘

समाचार4मीडिया ब्यूरो by
Published - Tuesday, 27 December, 2016
Last Modified:
Tuesday, 27 December, 2016
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