जब 1990 के दशक में भारत का IT सेक्टर उभर रहा था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन Infosys और TCS जैसी कंपनियां वैश्विक टेक इंडस्ट्री की रीढ़ बन जाएंगी।
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Vikas Saxena
जब 1990 के दशक में भारत का IT सेक्टर उभर रहा था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन Infosys और TCS जैसी कंपनियां वैश्विक टेक इंडस्ट्री की रीढ़ बन जाएंगी। आज, ठीक उसी मोड़ पर Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality यानी AVGC-XR सेक्टर खड़ा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सरकार, इंडस्ट्री और युवा, तीनों एक साथ तैयार हैं।
मार्केट का आकार: आंकड़े क्या कहते हैं?
वैश्विक Animation, VFX और Gaming का संयुक्त मार्केट 2024 में 260 से 460 अरब डॉलर के बीच आंका गया है, अलग-अलग शोध एजेंसियां अलग-अलग दायरे में मापती हैं। इसमें भारत की हिस्सेदारी फिलहाल 2.5 से 3 अरब डॉलर के करीब है, जो वैश्विक मार्केट का एक बेहद छोटा हिस्सा है। लेकिन यही वह खाई है जो एक बड़े अवसर की तरह दिखती है।
Animation और VFX अकेले 2023 में 1.3 अरब डॉलर के थे और CII-GT की रिपोर्ट के अनुसार 2026 तक यह 2.2 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ऑनलाइन गेमिंग 2026 तक 4.6 अरब डॉलर तक जाने की उम्मीद है। समग्र AVGC-XR सेक्टर 2026 में 3 अरब डॉलर पार कर जाएगा और 2030 तक 26 अरब डॉलर का इंडस्ट्री बन सकता है, यानी आज की तुलना में करीब 9 गुना वृद्धि।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह गुलाबी नहीं है। FICCI-EY की मार्च 2025 की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में समग्र Animation और VFX सेगमेंट में 9% की गिरावट आई, जिसमें Animation उपखंड में अकेले 19% और VFX उपखंड में 14% की गिरावट रही, मुख्यतः हॉलीवुड हड़ताल के बाद वैश्विक आउटसोर्सिंग में कमी के कारण। फिर भी AI-आधारित Animation का खंड तेज़ी से बढ़ रहा है, 2023 में $61.6 मिलियन से 47.9% CAGR से बढ़कर 2033 तक $931.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
IT की तरह क्या Animation भी बदल देगा भारत की अर्थव्यवस्था?
IT सेक्टर ने 1990 और 2000 के दशक में जो किया, AVGC-XR वही दोहरा सकता है। भारत के पास वैश्विक Animation और VFX सेवाओं में 40 से 60 प्रतिशत लागत लाभ है। AVGC-XR सेक्टर का निर्यात 2025 में 1.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और 2030 तक यह दोगुना हो सकता है।
भारतीय स्टूडियो पहले ही Disney, Warner Bros., DreamWorks, Sony, Netflix और Amazon जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ काम कर रहे हैं। BOT VFX जैसे स्टूडियो, जिनकी स्थापना 2008 में हुई, आज लगभग 800 कलाकारों की टीम के साथ Deadpool & Wolverine, Wicked और Twisters जैसे प्रोजेक्ट में योगदान दे रहे हैं। यह सफर IT की कहानी से बहुत अलग नहीं है।
रोजगार का महासंग्राम: 2 लाख से 23 लाख तक का सफर
फिलहाल AVGC-XR सेक्टर में लगभग 2.6 लाख पेशेवर काम कर रहे हैं। लेकिन अनुमान बताते हैं कि 2032 तक यह संख्या 23 लाख तक पहुंच सकती है। AVGC Promotion Task Force का लक्ष्य अगले दस वर्षों में 20 लाख AVGC-XR पेशेवर (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष) तैयार करना है।
सरकार इस लक्ष्य को गंभीरता से ले रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2026 में ₹250 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है, जिससे देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित किए जाएंगे। इन लैब्स की जिम्मेदारी मुंबई स्थित Indian Institute of Creative Technologies (IICT) को दी गई है, जिसकी स्थापना पर सरकार ने ₹391.15 करोड़ का एकमुश्त बजटीय समर्थन दिया है।
राज्यों की दौड़: Animation Capital कौन बनेगा?
Animation Hub बनने की होड़ में भारत के राज्य एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में जुटे हैं।
महाराष्ट्र ने सितंबर 2025 में ₹3,268 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ अपनी AVGC-XR Policy 2025 को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई। नीति का लक्ष्य 2050 तक ₹50,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना और अगले 25 वर्षों में 2 लाख हाई-टेक रोजगार पैदा करना है। AVGC-XR को इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया है, जिससे स्टांप ड्यूटी में छूट और 24x7 संचालन की सुविधा मिलेगी। मुंबई और पुणे से आगे नाशिक, नागपुर, कोल्हापुर जैसे टियर-2 शहरों में भी AVGC-XR पार्क बनाए जाएंगे।
तमिलनाडु ने मार्च 2026 में AVGC-XR Policy 2026 अधिसूचित की, जिसका लक्ष्य 2030 तक 200 से अधिक स्टार्टअप, 2 लाख रोजगार और भारत के कुल AVGC-XR मार्केट का 20 प्रतिशत हासिल करना है। चेन्नई में ₹50 करोड़ का Center of Excellence बनेगा और R&D के लिए ₹250 करोड़ का फंड दिया जाएगा।
कर्नाटक देश का पहला राज्य है जिसने 2012 में AVGC नीति बनाई और अब कर्नाटक AVGC-XR Policy 2024-2029 के तहत बेंगलुरु को एशिया का प्रमुख Animation Hub बनाने की कोशिश चल रही है।
केरल का लक्ष्य 2029 तक 50,000 रोजगार और 250 प्रतिष्ठान तैयार करना है।
तेलंगाना पहले से IMAGE City के जरिए हैदराबाद को VFX हब के रूप में स्थापित कर चुका है।
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राज्य |
प्रमुख लक्ष्य |
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महाराष्ट्र |
₹50,000 करोड़ निवेश, 2 लाख रोजगार (25 वर्षों में, 2050 तक) |
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तमिलनाडु |
2 लाख रोजगार, 20% मार्केट हिस्सेदारी (2030 तक) |
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कर्नाटक |
Policy 2024-2029, Operational CoE |
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केरल |
50,000 रोजगार, 250 प्रतिष्ठान (2029 तक) |
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तेलंगाना |
IMAGE City, Hyderabad VFX Hub |
सरकार का बड़ा दांव: "Create in India"
साल 2022 में AVGC-XR Task Force के गठन के बाद से केंद्र सरकार Animation, VFX, Gaming और XR सेक्टर को लगातार बढ़ावा दे रही है। WAVES Summit का आयोजन, IICT (Indian Institute of Creative Technologies) की स्थापना और बजट 2026 में Creator Labs की घोषणा इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस क्षेत्र को "Create in India" अभियान का अहम हिस्सा बनाना चाहती है, ठीक वैसे ही जैसे कभी IT सेक्टर को बढ़ावा दिया गया था।
इतना ही नहीं, भारत में Animation, VFX और अन्य क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स लाने के लिए सरकार विदेशी प्रोडक्शन कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है। इसके तहत योग्य खर्च पर 40 प्रतिशत तक कैश रिइम्बर्समेंट (राशि वापस) की सुविधा दी जाती है। एक प्रोजेक्ट पर यह सहायता अधिकतम 3.6 मिलियन डॉलर, यानी करीब 30 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
AI: खतरा या अवसर?
अपना 'Anime' कब बनाएगा भारत?
जापान ने Anime से और दक्षिण कोरिया ने अपने Gaming IPs से वैश्विक पहचान बनाई। भारत अभी मुख्यतः Outsourcing Model पर निर्भर है। लेकिन स्थिति बदल रही है। महाराष्ट्र की नई नीति में Homegrown AAA Gaming IPs की बात है जो भारतीय संस्कृति पर आधारित हों। 4,000 से अधिक स्टूडियो का ecosystem IP निर्माण के लिए तैयार खड़ा है, जरूरत है सिर्फ एक बड़े Original IP की जो दुनिया को पसंद आए।
छोटे शहरों का नया मौका
Animation अब सिर्फ मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु तक सीमित नहीं है। Online Training Platforms और Remote Work Culture ने Tier-2 और Tier-3 शहरों के युवाओं के लिए रास्ते खोले हैं। बजट 2026 के Creator Labs मुरादाबाद से मदुरई तक के स्कूलों में पहुंचेंगे। 15,000 स्कूलों में लैब का मतलब है कि अगली पीढ़ी के Animators शायद किसी महानगर में नहीं, बल्कि किसी छोटे जिला मुख्यालय में बैठकर दुनिया के लिए कंटेंट बना रहे होंगे।
अगला IT पल आ रहा है
आंकड़े साफ हैं: $3 अरब से $26 अरब का सफर, 2.6 लाख से 23 लाख नौकरियों की संभावना, 10 से अधिक राज्यों की नीतियां, और बजट 2026 में ₹250 करोड़ का सीधा निवेश। भारत के पास talent है, लागत का फायदा है, सरकार का समर्थन है और एक विशाल घरेलू मार्केट भी। जो कमी थी, वह नीति, निवेश और Infrastructure की थी, वह अब धीरे-धीरे भर रही है।
1990 के दशक में भारत ने IT में जो किया, वह आकस्मिक नहीं था, वह नीति, प्रतिभा और समय का संगम था। AVGC-XR में वही तीनों चीजें फिर मिल रही हैं। सवाल सिर्फ यह है कि भारत इस मौके को पकड़ पाता है या नहीं।
‘एचटी मीडिया’ (HT Media) ने अपने OTT एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म OTTplay को बंद करने का फैसला लिया है। कंपनी का कहना है कि कई प्रयासों के बावजूद यह कारोबार टिकाऊ और लाभदायक मॉडल नहीं बन सका।
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Samachar4media Bureau
‘एचटी मीडिया’ (HT Media) ने अपने OTT एग्रीगेशन प्लेटफॉर्म OTTplay को बंद करने का फैसला लिया है। कंपनी ने कहा कि कारोबार को टिकाऊ और लाभदायक बनाने के लिए कई रणनीतियों पर काम किया गया, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।
कंपनी ने अपने Q4 FY26 अर्निंग्स कॉल (Earnings Call) के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। प्रबंधन ने इसे एक "सोच-समझकर लिया गया और मूल्य बढ़ाने वाला रीसेट" बताया, जो कंपनी की लाभदायक विकास रणनीति के अनुरूप है।
कंपनी के मुताबिक पिछले कई तिमाहियों के दौरान OTTplay के लिए कंटेंट (Content), कस्टमर एक्विजिशन (Customer Acquisition) और सब्सक्राइबर रिटेंशन (Subscriber Retention) से जुड़ी विभिन्न रणनीतियों का परीक्षण किया गया। हालांकि इनमें से कोई भी मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ साबित नहीं हो सका।
‘एचटी मीडिया’ (HT Media) के ग्रुप CEO पियूष गुप्ता (Piyush Gupta) ने कहा कि कंपनी ने प्लेटफॉर्म के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया था, लेकिन अंततः संचालन बंद करने का फैसला लिया गया।
कंपनी ने OTT एग्रीगेशन बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी इस फैसले की एक बड़ी वजह बताया। खासतौर पर टेलीकॉम ऑपरेटर्स (Telecom Operators) द्वारा बंडल्ड सब्सक्रिप्शंस (Bundled Subscriptions) और व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क्स (Distribution Networks) के जरिए अपनी एंटरटेनमेंट पेशकश बढ़ाने से प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई थी।
OTTplay ने टियर-II और टियर-III बाजारों पर फोकस करके खुद को अलग पहचान देने की कोशिश की थी, लेकिन कंपनी ने स्वीकार किया कि यह रणनीति टिकाऊ कारोबार में नहीं बदल सकी। कंपनी के अनुसार 31 मार्च 2026 के बाद OTTplay पर नए सब्सक्रिप्शंस (Subscriptions) बंद कर दिए गए हैं। हालांकि मौजूदा सब्सक्राइबर्स (Subscribers) अपने मौजूदा प्लान्स (Plans) की अवधि पूरी होने तक सेवाओं का लाभ लेते रहेंगे।
डीपीआईआईसी में एआई और मशीन लर्निंग की मदद से विशाल भू-विज्ञान संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रेडिक्टिव मॉडल और संभावनात्मक मानचित्र (प्रॉस्पेक्टिविटी मैप्स) तैयार किए जाएंगे।
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भारत खनिज खोज के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) बेंगलुरु में 100 करोड़ रुपये की लागत से डेटा प्रोसेसिंग, इंटरप्रिटेशन एंड इंटीग्रेशन सेंटर (DPIIC) स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। इस केंद्र का उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज संसाधनों की खोज को अधिक प्रभावी बनाना है, जिनकी आवश्यकता स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर निर्माण और रक्षा जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही है।
प्रस्तावित केंद्र अगले पांच वर्षों में लगभग 8.5 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खनिज संभावनाओं का विश्लेषण करेगा। इसके लिए कई दशकों से एकत्रित भूवैज्ञानिक, भूभौतिकीय, भू-रासायनिक और उपग्रह आंकड़ों को एकीकृत किया जाएगा। इससे खनिज लक्ष्यों की पहचान और मूल्यांकन की प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी।
यह पहल पारंपरिक खनिज खोज पद्धतियों से आगे बढ़ने का संकेत है, जो अब तक मुख्य रूप से फील्ड सर्वेक्षण, भूवैज्ञानिक मानचित्रण और ड्रिलिंग पर आधारित रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गहराई में छिपे खनिज भंडारों की खोज में एआई और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें सफलता की संभावना बढ़ा सकती हैं और शुरुआती चरण की अनिश्चितताओं को कम कर सकती हैं।
डीपीआईआईसी में एआई और मशीन लर्निंग की मदद से विशाल भू-विज्ञान संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रेडिक्टिव मॉडल और संभावनात्मक मानचित्र (प्रॉस्पेक्टिविटी मैप्स) तैयार किए जाएंगे। इससे महंगे फील्ड सर्वे और ड्रिलिंग शुरू करने से पहले उच्च संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी।
इसके अलावा, केंद्र में हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्लाउड-आधारित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और 3-डी सब-सर्फेस मॉडलिंग जैसी उन्नत सुविधाएं भी होंगी। सरकार का मानना है कि यह परियोजना खनिज खोज की दक्षता बढ़ाने, जोखिम कम करने और भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डिलिजेंट मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Diligent Media Corporation Limited) की नॉन-एग्जिक्यूटिव स्वतंत्र महिला निदेशक (Independent Woman Director) गरिमा भारद्वाज ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
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डिलिजेंट मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Diligent Media Corporation Limited) की नॉन-एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट (वुमेन) डायरेक्टर गरिमा भारद्वाज ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने इस संबंध में 5 जून 2026 को शेयर बाजारों को जानकारी दी।
कंपनी द्वारा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) को भेजी गई सूचना के अनुसार, गरिमा भारद्वाज (DIN: 10632970) ने नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट (महिला) डायरेक्टर के पद से इस्तीफा सौंप दिया है। उनका इस्तीफा 5 जून 2026 को कारोबार समाप्त होने के बाद से प्रभावी माना जाएगा।
कंपनी ने बताया कि गरिमा भारद्वाज ने निजी कारणों और अन्य पेशेवर जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए पद छोड़ने का फैसला किया है। इसी वजह से वे कंपनी के निदेशक मंडल (Board of Directors) के तहत गठित विभिन्न समितियों से भी अलग हो जाएंगी।
डिलिजेंट मीडिया ने अपनी फाइलिंग में कहा है कि सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत आवश्यक सभी जानकारियां और गरिमा भारद्वाज का इस्तीफा पत्र कंपनी ने एक्सचेंजों को उपलब्ध करा दिया है।
फाइलिंग के अनुसार, गरिमा भारद्वाज किसी अन्य सूचीबद्ध कंपनी में निदेशक के रूप में कार्यरत नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके इस्तीफे के पीछे पत्र में बताए गए कारणों के अलावा कोई अन्य महत्वपूर्ण या छिपा हुआ कारण नहीं है।
अपने इस्तीफा पत्र में गरिमा भारद्वाज ने कहा कि वह 5 जून 2026 से नॉन-एग्जीक्यूटिव स्वतंत्र महिला निदेशक के पद से इस्तीफा दे रही हैं। उन्होंने लिखा कि निजी कारणों और अन्य पेशेवर प्रतिबद्धताओं के चलते वह कंपनी में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं, इसलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस्तीफे के बाद वे कंपनी के निदेशक मंडल की विभिन्न समितियों में सदस्य या अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिकाओं से भी मुक्त हो जाएंगी।
गरिमा भारद्वाज ने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग और समर्थन के लिए कंपनी के बोर्ड और प्रबंधन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कंपनी के साथ काम करने का अवसर और उन पर जताए गए विश्वास के लिए वह धन्यवाद देती हैं।
उन्होंने बोर्ड से अनुरोध किया कि उनके इस्तीफे को स्वीकार करते हुए संबंधित वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएं। साथ ही उन्होंने डिलिजेंट मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड के उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की कामना भी की।
गरिमा भारद्वाज एक अनुभवी विधि विशेषज्ञ (लीगल प्रोफेशनल) हैं, जिन्हें कानून के विभिन्न क्षेत्रों में दो दशक से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्हें सिविल लॉ, क्रिमिनल लॉ, आर्बिट्रेशन, रेंट कंट्रोल, लेबर एवं इंडस्ट्रियल लॉ, सर्विस लॉ, कॉर्पोरेट एवं कमर्शियल लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) और मैट्रिमोनियल लॉ जैसे विषयों में गहरी विशेषज्ञता प्राप्त है।
वह नियमित रूप से दिल्ली की जिला अदालतों, दिल्ली हाई कोर्ट की ओरिजिनल और अपीलीय पीठ, भारत के सर्वोच्च न्यायालय, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में पेश होती रही हैं।
शैक्षणिक रूप से भी उनका रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी (ऑनर्स) बॉटनी और एलएलबी की डिग्री हासिल की है। इसके अलावा उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली से जजिंग एंड कोर्ट मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय एनर्जी एंड एनवायरनमेंट ग्रुप द्वारा आयोजित तथा दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग द्वारा प्रायोजित ‘एनर्जी एंड एनवायरनमेंट अवेयरनेस’ सर्टिफिकेट कोर्स भी पूरा किया है।
जुलाई 2004 से स्वतंत्र रूप से वकालत कर रहीं गरिमा भारद्वाज अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता और कानूनी दक्षता के लिए जानी जाती हैं। अपने व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता के कारण उन्होंने कानूनी जगत में एक सम्मानित पहचान बनाई है।
उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी (ऑनर्स) बॉटनी के दौरान सर्वश्रेष्ठ ऑल-राउंड छात्रा के रूप में ‘स्मृति लीलावती नंदा मेमोरियल सिल्वर मेडल’ से भी सम्मानित किया गया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘स्टोरी TV’ (Story TV) के कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में राहत देते हुए कई वेबसाइट्स और टेलीग्राम चैनलों पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म ‘स्टोरी TV’ (Story TV) को कॉपीराइट और ट्रेडमार्क उल्लंघन मामले में बड़ी राहत दी है। अदालत ने कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स और टेलीग्राम चैनलों को कंपनी का कंटेंट बिना अनुमति प्रसारित करने से रोक दिया है। जस्टिस ज्योति सिंह (Jyoti Singh) ने 29 मई 2026 को इस मामले में अंतरिम राहत देते हुए आदेश जारी किया।
अदालत ने कहा कि संबंधित प्लेटफॉर्म्स और उनके संचालक ‘स्टोरी TV’ (Story TV) के कॉपीराइट कंटेंट को होस्ट, स्ट्रीम, डाउनलोड, शेयर या किसी भी अन्य माध्यम से उपलब्ध नहीं करा सकते। कंपनी के अनुसार मई 2026 के तीसरे सप्ताह में उसे पता चला कि microtv.my.id, microtv.one और reeltv.buzz जैसी वेबसाइट्स कथित रूप से उसके कंटेंट को बिना अनुमति स्टोर और वितरित कर रही थीं।
इससे यूजर्स कंपनी के आधिकारिक प्लेटफॉर्म के बाहर भी कंटेंट देख और डाउनलोड कर पा रहे थे। अदालत ने माना कि मामला केवल कंटेंट होस्टिंग तक सीमित नहीं है। कुछ प्लेटफॉर्म्स कथित तौर पर इंडेक्सिंग और रीडायरेक्शन सेवाएं भी दे रहे थे, जबकि कुछ टेलीग्राम चैनलों के जरिए पायरेटेड कंटेंट के लिंक साझा किए जा रहे थे।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि चिन्हित URL को आदेश मिलने के 36 घंटे के भीतर हटाया जाए। डोमेन रजिस्ट्रार्स को संबंधित डोमेन नाम ब्लॉक या सस्पेंड करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
दैनिक भास्कर समूह के अंग्रेजी न्यूज प्लेटफॉर्म Bhaskar English में पत्रकार सुमित सिंह ने चीफ सब-एडिटर के पद पर जिम्मेदारी संभाल ली है। उनकी नियुक्ति भोपाल में की गई है।
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Samachar4media Bureau
दैनिक भास्कर समूह के अंग्रेजी न्यूज प्लेटफॉर्म Bhaskar English में पत्रकार सुमित सिंह ने चीफ सब-एडिटर के पद पर जिम्मेदारी संभाल ली है। उनकी नियुक्ति भोपाल में की गई है।
Bhaskar English की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी। यह प्लेटफॉर्म दैनिक भास्कर के रिपोर्टर नेटवर्क के जरिए देश-दुनिया की खबरें अंग्रेजी पाठकों तक पहुंचाता है।
Bhaskar English से जुड़ने से पहले सुमित सिंह दिल्ली में फ्रीलांस पत्रकार के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने Earth Journalism Network, Brussels Report, The Wire, Article 14, The Quint, Outlook India, The Week, Frontline, The New Indian Express, Newslaundry, Ground Report, Maktoob, NewsClick, The MookNayak, SheThePeopleTV, TwoCircles.net और The Probe सहित 25 से अधिक प्रकाशनों के लिए काम किया है।
दिसंबर 2024 में उन्होंने डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म The New Bengal Gazette की सह-स्थापना की थी। अपने करियर के दौरान उन्होंने फिलिस्तीन के विदेश मंत्री, नेपाल के जेन-ज़ी आंदोलन के एक नेता, इरोम शर्मिला और अन्य सार्वजनिक हस्तियों के इंटरव्यू भी किए हैं।
सुमित सिंह इससे पहले Firstpost (Network18) में असिस्टेंट प्रोड्यूसर रह चुके हैं, जहां उन्होंने Firstpost Africa और Vantage with Palki Sharma जैसे कार्यक्रमों पर काम किया। इसके अलावा वह Mojo Story में भी विभिन्न भूमिकाओं में रहे और बरखा दत्त के कार्यक्रम Bottomline with Barkha से जुड़े रहे। वह Inside Out with Barkha Dutt पॉडकास्ट की लॉन्च टीम का भी हिस्सा थे।
उन्होंने DeKoder की चुनाव कवरेज टीम में भी काम किया है। सुमित सिंह को Earth Journalism Network की ओर से ग्रांट मिल चुकी है और वह 101Reporters, Asian-American Journalists Association, Millennium Fellowship तथा British Council के विभिन्न फेलोशिप कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे हैं।
उन्होंने AJK मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर, जामिया मिल्लिया इस्लामिया से कन्वर्जेंट जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उनकी स्नातक शिक्षा हिंदू कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई है। वह मूल रूप से बिहार के गोपालगंज के रहने वाले हैं।
डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अपनी प्रमुख सहयोगी कंपनी ListenFirst Media Quintype Technologies Inc. में बड़े नेतृत्व बदलाव की घोषणा की है।
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Vikas Saxena
डिजिटल मीडिया कंपनी Quint Digital Limited ने अपनी प्रमुख सहयोगी कंपनी ListenFirst Media Quintype Technologies Inc. में बड़े नेतृत्व बदलाव की घोषणा की है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि मौजूदा CEO मिरांडा मैकवीनी (Miranda McWeeney) अपने पद से हट रही हैं। हालांकि, वह कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं होंगी और अब एडवाइजरी बोर्ड में शामिल होकर कंपनी को रणनीतिक सलाह और मार्गदर्शन देती रहेंगी।
कंपनी ने उनकी जगह रुचा पंडित को नया चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (CEO) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 1 जून 2026 से प्रभावी हो गई है।
रुचा पंडित फिलहाल कंपनी में टेक इनेबल सर्विसेज व पार्टनरशिप्स के वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थीं। कंपनी के अनुसार, उनके पास इंडस्ट्री का व्यापक अनुभव है और उन्होंने नेतृत्व की भूमिका में मजबूत प्रदर्शन किया है। इसी अनुभव को देखते हुए उन्हें CEO की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
Quint Digital ने मिरांडा मैकवीनी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि कंपनी उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए आभार व्यक्त करती है। साथ ही कंपनी को विश्वास है कि नए नेतृत्व में उसका विकास और सफलता का सफर आगे भी जारी रहेगा।
मीडिया कंपनी HT Media Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की परिचालन आय (Revenue from Operations) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है
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Vikas Saxena
मीडिया कंपनी HT Media Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी की परिचालन आय (Revenue from Operations) में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन कुछ एकमुश्त खर्चों और कारोबार में आई चुनौतियों के कारण कंपनी को पूरे साल घाटा हुआ है। साथ ही कंपनी के बोर्ड ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Mosaic Media Ventures Pvt. Ltd. में 5 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दी है।
कंपनी की कुल परिचालन आय वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1,803.31 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 1,745.84 करोड़ रुपये थी। वहीं कंपनी का EBITDA भी बढ़कर 298.42 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले 275.49 करोड़ रुपये था।
हालांकि, पूरे वित्त वर्ष में कंपनी को 54.27 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने 1.95 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। मार्च 2026 तिमाही में भी कंपनी को 13.56 करोड़ रुपये का घाटा हुआ।
कंपनी ने बताया कि नए लेबर कोड्स के प्रभाव, रेडियो कारोबार की परिसंपत्तियों में मूल्यह्रास (Impairment) और कुछ अन्य विशेष मदों (Exceptional Items) के कारण वित्तीय प्रदर्शन प्रभावित हुआ। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने कुल 114.23 करोड़ रुपये के एक्सेप्शनल लॉस दर्ज किए।
सेगमेंट के आधार पर देखें तो अखबार और प्रकाशन कारोबार कंपनी की सबसे मजबूत इकाई बना रहा। इस कारोबार से कंपनी को वित्त वर्ष 2025-26 में 1,500.43 करोड़ रुपये की आय हुई, जो पिछले साल के 1,385.95 करोड़ रुपये से अधिक है। वहीं रेडियो और डिजिटल कारोबार अभी भी दबाव में रहे।
बोर्ड ने कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Mosaic Media Ventures Private Limited के इक्विटी शेयरों में 5 करोड़ रुपये तक निवेश करने को भी मंजूरी दी है। यह निवेश कंपनी के डिजिटल और मीडिया कारोबार को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
कंपनी के वैधानिक ऑडिटर S.R. Batliboi & Co. LLP ने वित्त वर्ष 2025-26 के नतीजों पर ‘अनमॉडिफाइड ओपिनियन’ दी है, यानी ऑडिट रिपोर्ट में किसी तरह की बड़ी आपत्ति नहीं जताई गई है।
HT Media के चेयरपर्सन एवं एडिटोरियल डायरेक्टर शोभना भार्तिया की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में इन नतीजों को मंजूरी दी गई।
एक दौर था जब किसी विज्ञापन को तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे, मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीमें काम करती थीं और फिर प्रोडक्शन की लंबी प्रक्रिया चलती थी। 2026 तक आते-आते यह पूरी दुनिया बदल चुकी है।
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Vikas Saxena
एक समय था जब किसी कंपनी का विज्ञापन तैयार करने में हफ्तों लग जाते थे। बड़ी-बड़ी मीटिंग्स होती थीं, क्रिएटिव टीम रणनीति बनाती थी, कॉपीराइटर और डिजाइनर कंटेंट तैयार करते थे, फिर प्रोडक्शन हाउस उसे अंतिम रूप देता था। लेकिन 2026 तक आते-आते यह पूरी तस्वीर बदल चुकी है। अब AI आधारित टूल कुछ ही मिनटों में सैकड़ों विज्ञापन तैयार कर सकते हैं, उन्हें सही ऑडियंस तक पहुंचा सकते हैं और उनके नतीजों का विश्लेषण भी कर सकते हैं- वह भी बेहद कम इंसानी दखल के साथ।
यह सिर्फ नई तकनीक का असर नहीं है, बल्कि मार्केटिंग और मीडिया इंडस्ट्री के काम करने के तरीके में आया एक बड़ा बदलाव है। ऐसा बदलाव, जो विज्ञापन, कंटेंट और ऑडियंस कनेक्शन की पूरी दुनिया को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है।
एक ट्रिलियन डॉलर का मील का पत्थर
2026 में दुनिया भर का ऐडवर्टाइजिंग खर्च पहली बार 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के पार जाने वाला है। 'डेंट्सू' (Dentsu) की Global Ad Spend Forecast (दिसंबर 2025) के मुताबिक, वैश्विक ऐडवर्टाइजिंग खर्च 2026 में $1.04 ट्रिलियन तक पहुंचेगा, जो 2025 की तुलना में 5.1% की बढ़ोतरी है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की 3.1% वृद्धि दर से कहीं ज्यादा है। यह अपने आप में बताता है कि ब्रैंड्स के लिए ऐडवर्टाइजिंग अब सिर्फ खर्च नहीं, बल्कि व्यापार बढ़ाने का सबसे अहम औजार बन चुका है।
इस पूरे मार्केट में AI की भूमिका केंद्रीय है। Dentsu का अनुमान है कि 2026 तक 71.6% ऐडवर्टाइजिंग खर्च एल्गोरिदम संचालित होगा- यानी इंसान नहीं, बल्कि AI तय करेगा कि कौन सा ऐड, किसे, कब और किस कीमत पर दिखाया जाए और 2028 तक यह आंकड़ा 76% तक पहुंचने का अनुमान है।
ऐडवर्टाइजिंग में AI का मार्केट खुद 2025 के $11.17 बिलियन से बढ़कर 2026 में $14.12 बिलियन हो चुका है, और 2030 तक यह $36.34 बिलियन तक पहुंचेगा- यह आंकड़े The Business Research Company की "AI in Advertising Global Market Report 2026" (फरवरी 2026) से लिए गए हैं।
Meta ने Google को पछाड़ा- AI ने बदला खेल
2026 का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग की सत्ता पलट है। EMARKETER की 13 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में Meta पहली बार Google को पीछे छोड़ देगा- वैश्विक डिजिटल विज्ञापन राजस्व में। यह 14 साल में पहली बार होगा।
Meta की इस ऐतिहासिक बढ़त के पीछे मुख्य वजह है- AI कंपनी का Advantage+ टूल और AI-generated ad creatives ने विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम दिए हैं। Meta की विकास दर 2025 के 22.1% से बढ़कर 2026 में 24.1% हो गई है, जबकि Google की विकास दर 11.9% पर स्थिर है।
EMARKETER के सीनियर एक्सपर्ट Zach Goldner के अनुसार, Meta की यह बढ़त किसी एक सोर्स से नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम से आ रही है- Facebook, Instagram, Reels और Threads सभी पर AI की ताकत काम कर रही है।
Google के लिए चुनौती यह भी है कि AI संचालित सर्च टूल और chatbots पारंपरिक सर्च आधारित ऐडवर्टाइजिंग को प्रभावित कर रहे हैं। Gartner का अनुमान है कि 2026 तक पारंपरिक सर्च वॉल्यूम में 25% की गिरावट आ सकती है।
Amazon भी कम नहीं है- 2025 के $68.64 बिलियन से बढ़कर 2026 में $82.07 बिलियन तक पहुंच रहा है।
प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग: AI का सबसे बड़ा मैदान
अगर AI और ऐडवर्टाइजिंग के मेल का सबसे साफ उदाहरण देखना हो, तो वह है प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग (programmatic Advertising)। यह वह तकनीक है जहां AI सेकंड के हजारवें हिस्से में तय करता है कि किसे कौन सा ऐड दिखाना है।
Basis Technologies की जनवरी 2026 रिपोर्ट (EMARKETER data के आधार पर) के अनुसार, अमेरिका में 2026 में प्रोग्रामेटिक डिस्प्ले ऐडवर्टाइजिंग खर्च 203 बिलियन डॉलर के पार पहुंच जाएगा, जो 2025 के 180.4 बिलियन डॉलर की तुलना में 12.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।
Dentsu के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रोग्रामैटिक ट्रेंडिंग 81.4% डिजिटल ऐड स्पेंड को कंट्रोल करेगी- यानी हर $5 में से $4 से ज्यादा का ऐडवर्टाइजिंग खर्च अब AI संचालित ग्रामैटिक सिस्टम से होकर गुजर रहा है।
शॉर्ट-फॉर्म वीडियो इस पूरे इकोसिस्टम का नया केंद्र बन गया है। रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ने वाला डिजिटल चैनल है, जिसमें 14.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा रही है। वहीं ऑनलाइन वीडियो 11.5 प्रतिशत और सोशल मीडिया 11.4 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं।
AI मार्केटिंग का मार्केट: एक बड़ी इंडस्ट्री
सिर्फ ऐडवर्टाइजिंग ही नहीं, बल्कि पूरी मार्केटिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पकड़ तेजी से मजबूत हो रही है। McKinsey की 2025 में प्रकाशित “स्टेट ऑफ AI इन 2025” रिपोर्ट के मुताबिक, अब 88 प्रतिशत ऑर्गनाइजेशंस अपने कम से कम एक कामकाजी क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो पिछले साल के 78 प्रतिशत से काफी ज्यादा है। वहीं “स्टेट ऑफ ऑर्गेनाइजेशंस 2026” रिपोर्ट, जो 10,000 से अधिक सीनियर लीडर्स के सर्वे पर आधारित है, जो यह भी बताती है कि 88 प्रतिशत लीडर्स की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लागू कर चुकी हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मार्केटिंग पर खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। अब यह कंपनियों के कुल मार्केटिंग बजट का 9 प्रतिशत हो गया है, जो 2024 में 7 प्रतिशत था। इसके साथ ही, जो मार्केटिंग टीमें AI का इस्तेमाल कर रही हैं, वे हर हफ्ते औसतन 11 घंटे का समय बचा रही हैं और उनकी उत्पादकता में 44 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है।
कुछ और अहम आंकड़े जो 2026 की तस्वीर बताते हैं:
आज के समय में ज्यादातर मार्केटर्स अपनी रणनीतियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। McKinsey के 2026 State of AI सर्वे के मुताबिक, करीब 75 प्रतिशत मार्केटर्स अब AI का सहारा लेकर अपने कैंपेन प्लान और एग्जिक्यूट कर रहे हैं। AI से चलने वाले कैंपेन पारंपरिक तरीकों की तुलना में ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं। ऐसे कैंपेन लगभग 22 प्रतिशत बेहतर रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट देते हैं, जिससे कंपनियों को ज्यादा फायदा मिल रहा है।
पर्सनलाइजेशन में भी AI बड़ा बदलाव ला रहा है। AI के जरिए बनाए गए पर्सनलाइज्ड अनुभव से कन्वर्जन रेट में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके अलावा, AI से तैयार किए गए हेडलाइंस भी ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं, जिनसे क्लिक-थ्रू रेट में लगभग 25 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है।
ई-मेल मार्केटिंग में भी AI का असर साफ दिखाई दे रहा है। AI से चलने वाले ईमेल कैंपेन में 41 प्रतिशत तक ज्यादा रेवेन्यू आने की संभावना होती है।
एजेंसियां: बदलाव का नया दौर
जे.पी. मॉर्गन के विश्लेषण और डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, अमेरिका में 2026 में ऐडवर्टाइजिंग खर्च 415 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 2025 के मुकाबले करीब 5 प्रतिशत ज्यादा है। हालांकि यह बढ़त एजेंसियों के लिए उतनी अच्छी खबर नहीं है, जितनी दिखती है। डिजिटल विज्ञापन अब ग्लोबल ऐडवर्टाइजिंग खर्च का 68.7 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है और गूगल, मेटा और एमेजॉन जैसे प्लेटफॉर्म्स ने टार्गेटिंग, क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन और रिपोर्टिंग को काफी हद तक ऑटोमेट कर दिया है।
Forrester Research की 2023 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2030 तक एजेंसियां अपनी 7.5 प्रतिशत नौकरियों को ऑटोमेशन से बदल देंगी, जो अमेरिका में करीब 33,000 नौकरियों के बराबर है। लेकिन नवंबर 2025 में इस अनुमान को अपडेट करते हुए फॉरेस्टर ने कहा कि केवल 2026 में ही एजेंसी नौकरियों में 15 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है, क्योंकि 2025 में भी औसतन 8 प्रतिशत कर्मचारियों की संख्या में कटौती देखी गई थी।
Forrester के अनुसार, जितनी ज्यादा मौलिकता होगी, उतना ही ऑटोमेशन का खतरा कम होगा। क्लेरिकल, प्रशासनिक और सेल्स से जुड़े कामों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा, जबकि क्रिएटिव और डेटा स्ट्रेटेजी से जुड़े रोल्स की मांग बढ़ेगी।
Meta का Advantage+ और Google का AI- असली बदलाव यहां है
Meta का Advantage+ कैंपेन सिस्टम ऐडवर्टाइजर्स को बस एक प्रोडक्ट URL, बजट और लक्ष्य देने की सुविधा देता है- बाकी सब AI खुद करता है। AI-generated creatives, audience modeling, bid optimization और performance learning- सब कुछ ऑटोमेटेड है।
Google अपने Performance Max campaigns में AI का इस्तेमाल करता है, जो automatically सभी Google properties- Search, YouTube, Display, Maps- पर best performing ads चलाता है।
Amazon के पास retail data की ताकत है। Acxiom- जिसे IPG ने 2018 में acquire किया था और जो अब Omnicom के पास है- 90% global credit card issuers और 75% U.S. retail banks के साथ काम करता है। यह ultra-precise targeting को possible बनाता है।
बाकी सभी काम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस खुद ही करता है। AI से तैयार किए गए क्रिएटिव्स, ऑडियंस मॉडलिंग, bid optimization और performance learning- ये सब पूरी तरह ऑटोमेटेड हो चुका है।
गूगल अपने परफॉर्मेंस मैक्स कैंपेन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करता है, जो अपने आप गूगल के सभी प्लेटफॉर्म- सर्च, यूट्यूब, डिस्प्ले और मैप्स पर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले ऐड चलाता है। एमेजॉन के पास रिटेल डेटा की जबरदस्त ताकत है। Acxiom, जिसे 2018 में IPG ने खरीदा था और जो अब ओमनीकॉम के पास है, दुनिया के 90 प्रतिशत क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों और अमेरिका के 75 प्रतिशत रिटेल बैंकों के साथ काम करता है। इससे बेहद सटीक टार्गेटिंग संभव हो पाती है।
क्रिएटिव क्रांति: AI संचालित ऐड्स का उदय
ऐड बनाने का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। AI टूल्स अब एक ही स्क्रिप्ट को 8 अलग AI personas से, अलग-अलग सेटि्ंग्स में प्रदान कर सकते हैं और इतनी बड़ी मात्रा पारंपरिक प्रोडक्शन तरीकों से कभी हासिल नहीं की जा सकती थी।
डेटा प्राइवेसी और AI का टकराव
AI का यह सफर बिना चुनौतियों के नहीं है। थर्ड-पार्टी कुकीज का अंत हो चुका है और ऐडवर्टाइजर्स को अब फर्स्ट-पार्टी डेटा पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे डेटा क्लीन रूम का चलन बढ़ा है- ये ऐसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म होते हैं, जहां ब्रैंड्स और पब्लिशर्स बिना किसी का निजी डेटा उजागर किए अपना डेटा आपस में मिलाते हैं। इसी वजह से रिटेल मीडिया सबसे तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इसके पास फर्स्ट-पार्टी शॉपर डेटा होता है, जो कुकीज के बाद का सबसे मूल्यवान संसाधन बन चुका है।
भारत और एशिया-प्रशांत में AI ऐडवर्टाइजिंग का उभार
भारत के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। डेंट्सु के अनुमान के अनुसार, भारत का ऐडवर्टाइजिंग मार्केट 2026 में 8.6 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा, जो 2025 के 7.8 प्रतिशत से ज्यादा है। इस बढ़त के पीछे ICC मेन्स टी20 क्रिकेट वर्ल्डकप, IPL 2026 और तेजी से बढ़ता डिजिटल विस्तार मुख्य कारण हैं।
भारत में डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग खर्च 19.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेगा, जिसमें रिटेल मीडिया और शॉर्ट-फॉर्म वीडियो की बड़ी भूमिका होगी। वहीं एशिया-प्रशांत क्षेत्र कुल मिलाकर 5.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 376.4 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा, और भारत इस क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बनकर उभर रहा है।
Omnicom-IPG का महाविलय: एजेंसी का भविष्य
2026 में ऐडवर्टाइजिंग इंडस्ट्री में एक और बड़ा बदलाव आया- Omnicom और IPG का विलय, जो 26 नवंबर 2025 को पूरा हुआ। इस संयुक्त कंपनी की सालाना आय 25 बिलियन डॉलर से अधिक है और इसमें करीब 1 लाख से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। हालांकि, विलय के बाद लगभग 4,000 नौकरियों में कटौती की घोषणा भी की गई है।
यह विलय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में बड़े पैमाने पर विस्तार और बेहतर तकनीकी क्षमताएं हासिल करने की रणनीति का हिस्सा है। ओमनीकॉम ने सालाना 750 मिलियन डॉलर की बचत का लक्ष्य रखा है। इसके तहत FCB, MullenLowe और DDB जैसे प्रसिद्ध एजेंसी ब्रैंड्स को बंद किया जा रहा है, जबकि McCann, BBDO और TBWA को तीन वैश्विक क्रिएटिव नेटवर्क के रूप में रखा जाएगा।
मार्केटिंग का नया युग
2026 तक आते-आते यह बात बिल्कुल साफ हो गई है कि ऐडवर्टाइजिंग में AI अब कोई फ्यूचर ट्रेंड नहीं, बल्कि आज की जमीनी हकीकत है। $1.04 ट्रिलियन का वैश्विक विज्ञापन मार्केट, Meta का Google पर ऐतिहासिक बढ़त, प्रोग्रामैटिक ऐडवर्टाइजिंग का $200 बिलियन का पड़ाव, और AI संचालित कैंपेन का बेहतर ROI- ये सब मिलकर एक नई दुनिया का निर्माण कर रहे हैं।
लेकिन इस बदलाव में सिर्फ दक्षता ही नहीं है, बल्कि एक बड़ा सवाल भी है। जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ही क्रिएटिव तैयार करेगा, टार्गेटिंग करेगा और उसे बेहतर बनाएगा, तो इंसान की भूमिका क्या रह जाएगी? इसका जवाब शायद यही है- रणनीति, संवेदनशीलता और वह मानवीय स्पर्श, जो किसी एल्गोरिदम के पास नहीं होता।
जो ब्रैंड्स और एजेंसियां यह समझ जाएंगी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक सहयोगी है, प्रतिस्पर्धी नहीं, वही इस नए एल्गोरिदम आधारित दौर में आगे निकलेंगी।
OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने कहा है कि AI नौकरियों के लिए ‘महाविनाश’ नहीं ला रहा। उन्होंने माना कि वाइट-कॉलर नौकरियों पर असर को लेकर उनकी पुरानी आशंकाएं जरूरत से ज्यादा थीं।
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Samachar4media Bureau
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में नौकरियों पर खतरे की चर्चा के बीच OpenAI के सीईओ सैम ऑल्टमैन (Sam Altman) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि AI नौकरियों के लिए किसी “महाविनाश” जैसी स्थिति नहीं ला रहा है और वाइट-कॉलर नौकरियों के खत्म होने को लेकर उनकी पुरानी चिंताएं जरूरत से ज्यादा थीं।
सैम ऑल्टमैन मंगलवार को सिडनी में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। यह कार्यक्रम कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (Commonwealth Bank of Australia - CBA) की ओर से आयोजित किया गया था, जहां उन्होंने बैंक के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉमिन (Matt Comyn) के साथ बातचीत की।
ऑल्टमैन ने कहा कि साल 2022 में ChatGPT लॉन्च होने के बाद उन्हें डर था कि एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर नौकरियों पर बड़ा असर पड़ेगा। हालांकि अब तक रोजगार पर असर उनकी उम्मीद से काफी कम रहा है।
उन्होंने माना कि तकनीक के विकास को लेकर उनका अनुमान सही था, लेकिन समाज और अर्थव्यवस्था पर इसके असर का आकलन पूरी तरह सही नहीं निकला। सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उस समय खतरा वास्तविक लग रहा था, इसलिए उस पर चर्चा जरूरी थी। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में AI का असर और बढ़ सकता है।
आज HSBC, अमेजन (Amazon), स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered) और CBA जैसी कंपनियां AI का इस्तेमाल कर रही हैं। इसके बावजूद ऑल्टमैन का मानना है कि इंसानी बातचीत और समझ की जगह मशीनें आसानी से नहीं ले सकतीं।
RBI ने मोबाइल वॉलेट्स के लिए नए और सख्त नियम लागू किए हैं। अब वॉलेट बैलेंस, P2P ट्रांसफर और कैश लोडिंग की लिमिट तय कर दी गई है, जिससे फिनटेक कंपनियों में चिंता बढ़ गई है।
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Samachar4media Bureau
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) यानी मोबाइल वॉलेट्स के लिए नियम सख्त कर दिए हैं। इस फैसले के बाद मोबिक्विक (Mobikwik), फोनपे (PhonePe), अमेजन पे (Amazon Pay), पाइन लैब्स (Pine Labs) और एयरटेल पेमेंट्स बैंक (Airtel Payments Bank) जैसी कंपनियों को नए नियमों के तहत काम करना होगा।
नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब किसी भी मोबाइल वॉलेट में अधिकतम मासिक बैलेंस 2 लाख रुपये तक ही रखा जा सकेगा। वहीं व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) फंड ट्रांसफर की सीमा घटाकर 25 हजार रुपये कर दी गई है। इसके अलावा हर महीने वॉलेट में अधिकतम 10 हजार रुपये तक ही नकद जमा किए जा सकेंगे।
इन नियमों के बाद फिनटेक इंडस्ट्री में चिंता बढ़ गई है। पॉलिसी कंसेंसस सेंटर (Policy Consensus Centre - PCC) द्वारा आयोजित एक बैठक में कई विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि इन प्रतिबंधों से मोबाइल वॉलेट्स कमजोर हो सकते हैं और बैंकिंग सिस्टम व UPI को ज्यादा बढ़ावा मिल सकता है।
दरअसल RBI की सख्ती के पीछे डिजिटल वॉलेट्स के बढ़ते दुरुपयोग को मुख्य वजह माना जा रहा है। वित्त मंत्रालय की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) ने हाल में कई संदिग्ध लेन-देन पकड़े थे। इनमें सट्टेबाजी, गैंबलिंग और रियल-मनी गेमिंग से जुड़े ट्रांजैक्शन शामिल बताए गए हैं।