जब 1990 के दशक में भारत का IT सेक्टर उभर रहा था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन Infosys और TCS जैसी कंपनियां वैश्विक टेक इंडस्ट्री की रीढ़ बन जाएंगी।
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Vikas Saxena
जब 1990 के दशक में भारत का IT सेक्टर उभर रहा था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन Infosys और TCS जैसी कंपनियां वैश्विक टेक इंडस्ट्री की रीढ़ बन जाएंगी। आज, ठीक उसी मोड़ पर Animation, Visual Effects, Gaming, Comics और Extended Reality यानी AVGC-XR सेक्टर खड़ा है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सरकार, इंडस्ट्री और युवा, तीनों एक साथ तैयार हैं।
मार्केट का आकार: आंकड़े क्या कहते हैं?
वैश्विक Animation, VFX और Gaming का संयुक्त मार्केट 2024 में 260 से 460 अरब डॉलर के बीच आंका गया है, अलग-अलग शोध एजेंसियां अलग-अलग दायरे में मापती हैं। इसमें भारत की हिस्सेदारी फिलहाल 2.5 से 3 अरब डॉलर के करीब है, जो वैश्विक मार्केट का एक बेहद छोटा हिस्सा है। लेकिन यही वह खाई है जो एक बड़े अवसर की तरह दिखती है।
Animation और VFX अकेले 2023 में 1.3 अरब डॉलर के थे और CII-GT की रिपोर्ट के अनुसार 2026 तक यह 2.2 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ऑनलाइन गेमिंग 2026 तक 4.6 अरब डॉलर तक जाने की उम्मीद है। समग्र AVGC-XR सेक्टर 2026 में 3 अरब डॉलर पार कर जाएगा और 2030 तक 26 अरब डॉलर का इंडस्ट्री बन सकता है, यानी आज की तुलना में करीब 9 गुना वृद्धि।
हालांकि तस्वीर पूरी तरह गुलाबी नहीं है। FICCI-EY की मार्च 2025 की रिपोर्ट बताती है कि 2024 में समग्र Animation और VFX सेगमेंट में 9% की गिरावट आई, जिसमें Animation उपखंड में अकेले 19% और VFX उपखंड में 14% की गिरावट रही, मुख्यतः हॉलीवुड हड़ताल के बाद वैश्विक आउटसोर्सिंग में कमी के कारण। फिर भी AI-आधारित Animation का खंड तेज़ी से बढ़ रहा है, 2023 में $61.6 मिलियन से 47.9% CAGR से बढ़कर 2033 तक $931.5 मिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
IT की तरह क्या Animation भी बदल देगा भारत की अर्थव्यवस्था?
IT सेक्टर ने 1990 और 2000 के दशक में जो किया, AVGC-XR वही दोहरा सकता है। भारत के पास वैश्विक Animation और VFX सेवाओं में 40 से 60 प्रतिशत लागत लाभ है। AVGC-XR सेक्टर का निर्यात 2025 में 1.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है और 2030 तक यह दोगुना हो सकता है।
भारतीय स्टूडियो पहले ही Disney, Warner Bros., DreamWorks, Sony, Netflix और Amazon जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ काम कर रहे हैं। BOT VFX जैसे स्टूडियो, जिनकी स्थापना 2008 में हुई, आज लगभग 800 कलाकारों की टीम के साथ Deadpool & Wolverine, Wicked और Twisters जैसे प्रोजेक्ट में योगदान दे रहे हैं। यह सफर IT की कहानी से बहुत अलग नहीं है।
रोजगार का महासंग्राम: 2 लाख से 23 लाख तक का सफर
फिलहाल AVGC-XR सेक्टर में लगभग 2.6 लाख पेशेवर काम कर रहे हैं। लेकिन अनुमान बताते हैं कि 2032 तक यह संख्या 23 लाख तक पहुंच सकती है। AVGC Promotion Task Force का लक्ष्य अगले दस वर्षों में 20 लाख AVGC-XR पेशेवर (प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष) तैयार करना है।
सरकार इस लक्ष्य को गंभीरता से ले रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट 2026 में ₹250 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है, जिससे देशभर के 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित किए जाएंगे। इन लैब्स की जिम्मेदारी मुंबई स्थित Indian Institute of Creative Technologies (IICT) को दी गई है, जिसकी स्थापना पर सरकार ने ₹391.15 करोड़ का एकमुश्त बजटीय समर्थन दिया है।
राज्यों की दौड़: Animation Capital कौन बनेगा?
Animation Hub बनने की होड़ में भारत के राज्य एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में जुटे हैं।
महाराष्ट्र ने सितंबर 2025 में ₹3,268 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ अपनी AVGC-XR Policy 2025 को कैबिनेट से मंजूरी दिलाई। नीति का लक्ष्य 2050 तक ₹50,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना और अगले 25 वर्षों में 2 लाख हाई-टेक रोजगार पैदा करना है। AVGC-XR को इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया गया है, जिससे स्टांप ड्यूटी में छूट और 24x7 संचालन की सुविधा मिलेगी। मुंबई और पुणे से आगे नाशिक, नागपुर, कोल्हापुर जैसे टियर-2 शहरों में भी AVGC-XR पार्क बनाए जाएंगे।
तमिलनाडु ने मार्च 2026 में AVGC-XR Policy 2026 अधिसूचित की, जिसका लक्ष्य 2030 तक 200 से अधिक स्टार्टअप, 2 लाख रोजगार और भारत के कुल AVGC-XR मार्केट का 20 प्रतिशत हासिल करना है। चेन्नई में ₹50 करोड़ का Center of Excellence बनेगा और R&D के लिए ₹250 करोड़ का फंड दिया जाएगा।
कर्नाटक देश का पहला राज्य है जिसने 2012 में AVGC नीति बनाई और अब कर्नाटक AVGC-XR Policy 2024-2029 के तहत बेंगलुरु को एशिया का प्रमुख Animation Hub बनाने की कोशिश चल रही है।
केरल का लक्ष्य 2029 तक 50,000 रोजगार और 250 प्रतिष्ठान तैयार करना है।
तेलंगाना पहले से IMAGE City के जरिए हैदराबाद को VFX हब के रूप में स्थापित कर चुका है।
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राज्य |
प्रमुख लक्ष्य |
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महाराष्ट्र |
₹50,000 करोड़ निवेश, 2 लाख रोजगार (25 वर्षों में, 2050 तक) |
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तमिलनाडु |
2 लाख रोजगार, 20% मार्केट हिस्सेदारी (2030 तक) |
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कर्नाटक |
Policy 2024-2029, Operational CoE |
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केरल |
50,000 रोजगार, 250 प्रतिष्ठान (2029 तक) |
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तेलंगाना |
IMAGE City, Hyderabad VFX Hub |
सरकार का बड़ा दांव: "Create in India"
साल 2022 में AVGC-XR Task Force के गठन के बाद से केंद्र सरकार Animation, VFX, Gaming और XR सेक्टर को लगातार बढ़ावा दे रही है। WAVES Summit का आयोजन, IICT (Indian Institute of Creative Technologies) की स्थापना और बजट 2026 में Creator Labs की घोषणा इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस क्षेत्र को "Create in India" अभियान का अहम हिस्सा बनाना चाहती है, ठीक वैसे ही जैसे कभी IT सेक्टर को बढ़ावा दिया गया था।
इतना ही नहीं, भारत में Animation, VFX और अन्य क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स लाने के लिए सरकार विदेशी प्रोडक्शन कंपनियों को भी प्रोत्साहन दे रही है। इसके तहत योग्य खर्च पर 40 प्रतिशत तक कैश रिइम्बर्समेंट (राशि वापस) की सुविधा दी जाती है। एक प्रोजेक्ट पर यह सहायता अधिकतम 3.6 मिलियन डॉलर, यानी करीब 30 करोड़ रुपये तक हो सकती है।
AI: खतरा या अवसर?
अपना 'Anime' कब बनाएगा भारत?
जापान ने Anime से और दक्षिण कोरिया ने अपने Gaming IPs से वैश्विक पहचान बनाई। भारत अभी मुख्यतः Outsourcing Model पर निर्भर है। लेकिन स्थिति बदल रही है। महाराष्ट्र की नई नीति में Homegrown AAA Gaming IPs की बात है जो भारतीय संस्कृति पर आधारित हों। 4,000 से अधिक स्टूडियो का ecosystem IP निर्माण के लिए तैयार खड़ा है, जरूरत है सिर्फ एक बड़े Original IP की जो दुनिया को पसंद आए।
छोटे शहरों का नया मौका
Animation अब सिर्फ मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु तक सीमित नहीं है। Online Training Platforms और Remote Work Culture ने Tier-2 और Tier-3 शहरों के युवाओं के लिए रास्ते खोले हैं। बजट 2026 के Creator Labs मुरादाबाद से मदुरई तक के स्कूलों में पहुंचेंगे। 15,000 स्कूलों में लैब का मतलब है कि अगली पीढ़ी के Animators शायद किसी महानगर में नहीं, बल्कि किसी छोटे जिला मुख्यालय में बैठकर दुनिया के लिए कंटेंट बना रहे होंगे।
अगला IT पल आ रहा है
आंकड़े साफ हैं: $3 अरब से $26 अरब का सफर, 2.6 लाख से 23 लाख नौकरियों की संभावना, 10 से अधिक राज्यों की नीतियां, और बजट 2026 में ₹250 करोड़ का सीधा निवेश। भारत के पास talent है, लागत का फायदा है, सरकार का समर्थन है और एक विशाल घरेलू मार्केट भी। जो कमी थी, वह नीति, निवेश और Infrastructure की थी, वह अब धीरे-धीरे भर रही है।
1990 के दशक में भारत ने IT में जो किया, वह आकस्मिक नहीं था, वह नीति, प्रतिभा और समय का संगम था। AVGC-XR में वही तीनों चीजें फिर मिल रही हैं। सवाल सिर्फ यह है कि भारत इस मौके को पकड़ पाता है या नहीं।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए BSE से मंजूरी मिल गई है।
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Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने बताया है कि उसे अपने नए शेयर और वारंट्स को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने और उनमें कारोबार शुरू करने के लिए बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से मंजूरी मिल गई है। कंपनी को यह मंजूरी 16 सितंबर 2026 को मिली है।
कंपनी के मुताबिक, इसके तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता (Partly Paid-Up) 10 प्रतिशत गैर-संचयी, गैर-भागीदारी और अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय प्राथमिकता शेयर (Non-Cumulative Non-Participating Compulsorily Convertible Preference Shares) जारी किए गए हैं।
इन शेयरों का अंकित मूल्य 100 रुपये है। इसके साथ ही 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता अलग किए जा सकने वाले वारंट्स (Partly Paid-Up Detachable Warrants) भी जारी किए गए हैं, जिनका अंकित मूल्य 10 रुपये है। इन दोनों में कारोबार शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 से शुरू होगा।
कंपनी ने बताया कि यह मंजूरी इस मामले में पहले दी गई जानकारियों के आगे की कड़ी है। इससे पहले कंपनी ने 22 मई, 19 अगस्त, 21 अगस्त, 28 अगस्त, 11 सितंबर और 16 सितंबर 2026 को इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी दी थी।
BSE की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, Quint Digital के 82,61,401 प्राथमिकता शेयर अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। इनका अंकित मूल्य 100 रुपये प्रति शेयर है, जबकि अभी प्रत्येक शेयर पर 50 रुपये चुकाए गए हैं। इन शेयरों का कोड 710058 है और इन्हें QDLCCPS पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन 11 सितंबर 2026 को किया गया था।
इसके अलावा 82,61,401 वारंट भी अधिकार के आधार पर जारी किए गए हैं। प्रत्येक वारंट का अंकित मूल्य 10 रुपये है, जिसमें से अभी 5 रुपये चुकाए गए हैं। इन वारंट का कोड 961921 है और इन्हें QDLDW पहचान के साथ कारोबार के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इनका आवंटन भी 11 सितंबर 2026 को किया गया था।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत में चिप डिजाइन से जुड़ी कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को जोड़ने का लक्ष्य बताया है।
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Samachar4media Bureau
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री (Electronics and IT Minister) अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने कहा है कि सरकार सेमीकॉन 2.0 (Semicon 2.0) के तहत भारत में सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन (Semiconductor Chip Design) से जुड़ी कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है। यह सेमीकॉन 1.0 (Semicon 1.0) में शामिल 105 से ज्यादा स्टार्टअप के आधार पर अगला कदम है।
सेमीकॉन इंडिया समिट 2026 (Semicon India Summit 2026) में वैष्णव ने बताया कि सेमीकॉन 1.0 में शामिल करीब 20 स्टार्टअप को लगभग 800 करोड़ रुपये की वेंचर कैपिटल फंडिंग (Venture Capital Funding) मिली थी। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार का लक्ष्य पहले से काफी बड़ा है और भारत में चिप डिजाइन करने वाली कम से कम 200 स्टार्टअप और कंपनियों को इससे जोड़ने की योजना है।
सेमीकॉन 2.0 के छह पिलर (Pillars) में चिप डिजाइन पहला होगा। इसके अलावा मशीन और मटेरियल, सेमीकंडक्टर फैब, एडवांस्ड पैकेजिंग (Advanced Packaging), रिसर्च एंड डेवलपमेंट (Research and Development) और टैलेंट डेवलपमेंट (Talent Development) पर भी फोकस किया जाएगा।
मशीन और मटेरियल से जुड़े पिलर में कैपिटल इक्विपमेंट (Capital Equipment), मेंटेनेंस फैसिलिटी, केमिकल और गैस समेत पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम (Semiconductor Ecosystem) को शामिल किया जाएगा। वैष्णव ने बताया कि सम्मेलन में 28 से ज्यादा देशों की भागीदारी है।
तीसरे पिलर के तहत डिस्प्ले, मेमोरी, सिलिकॉन, कंपाउंड और लॉजिक फैब (Logic Fab) का विस्तार किया जाएगा। चौथे पिलर में एडवांस्ड पैकेजिंग पर जोर रहेगा। वैष्णव ने कहा कि ओडिशा में 3डी पैकेजिंग यूनिट (3D Packaging Unit) भी स्थापित हो रही है।
पांचवें पिलर के तहत इंडस्ट्री-लेड आरएंडडी (Industry-led R&D) पर फोकस होगा। सरकार अकादमिक संस्थानों और इंडस्ट्री को साथ लाकर एप्लाइड रिसर्च प्रोजेक्ट्स (Applied Research Projects) को बढ़ावा देगी।
टैलेंट डेवलपमेंट के तहत सेमीकॉन 1.0 में 10 साल में 85 हजार डिजाइन इंजीनियरों को ट्रेनिंग देने का लक्ष्य रखा गया था। वैष्णव के मुताबिक, चार साल में ही 70 हजार डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि देश की 400 से ज्यादा यूनिवर्सिटीज में कैडेंस (Cadence), सीमेंस (Siemens) और सिनॉप्सिस (Synopsys) के ईडीए टूल्स (EDA Tools) उपलब्ध हैं। इससे छात्र चिप डिजाइन करने और मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लेबोरेटरी (Semiconductor Laboratory) के जरिए उसे टेप-आउट (Tape-out) प्रक्रिया तक ले जाने में सक्षम हो रहे हैं।
रिलायंस जियो (Jio) और Canva ने साझेदारी का ऐलान किया है। इसके तहत पात्र Jio यूजर्स को Canva के पेड प्लान का 12 महीने तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा।
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Samachar4media Bureau
रिलायंस जियो (Jio) और Canva ने साझेदारी का ऐलान किया है। इसके तहत पात्र Jio यूजर्स को Canva के पेड प्लान का 12 महीने तक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इस्तेमाल करने का मौका मिलेगा। यह ऑफर 16 सितंबर 2026 से शुरू हो गया है।
इस ऑफर का फायदा उन यूजर्स को मिलेगा, जो अलग-अलग चैनल के जरिए पात्र Jio रिचार्ज प्लान लेते हैं। यूजर को मिलने वाला Canva सब्सक्रिप्शन उसके रिचार्ज प्लान पर निर्भर करेगा। इसके तहत कुछ यूजर्स को Canva Pro Lite, जबकि पात्र प्लान वाले यूजर्स को Canva Pro मिलेगा।
इस साझेदारी के जरिए Jio अपने बड़े यूजर बेस को Canva के डिजाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ रहा है। यूजर्स को प्रीमियम टेम्पलेट्स, फोटो, वीडियो, फॉन्ट और एडिटिंग टूल्स जैसे कई फीचर्स मिलेंगे। Canva हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं को भी सपोर्ट करता है।
Canva Pro Lite में क्या मिलेगा?
Canva Pro Lite में फोटो और वीडियो के लिए Background Remover, Magic Resize, Magic Eraser, प्रिंट के लिए तैयार फाइल एक्सपोर्ट और तीन तक Brand Kits जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसके साथ यूजर्स को 50GB Cloud Storage भी मिलेगा।
Canva Pro में मिलेंगे ज्यादा फीचर्स
Canva Pro में Pro Lite के अलावा Content Planner जैसे फीचर्स मिलते हैं, जिसकी मदद से सोशल मीडिया पोस्ट को शेड्यूल किया जा सकता है। इसमें Canva AI का conversation-based chat-to-design फीचर, पांच तक Brand Kits, ज्यादा AI usage limits और 100GB Cloud Storage भी शामिल है।
इस साझेदारी पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रेसिडेंट किरण थॉमस ने कहा कि Canva के जरिए AI आधारित डिजाइन टूल्स लाखों भारतीयों तक पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि इससे छात्र, क्रिएटर, उद्यमी और छोटे कारोबारी अपनी पसंद की भाषा में डिजिटल तरीके से काम कर सकेंगे।
Canva के को-फाउंडर और COO क्लिफ ओब्रेक्ट ने कहा कि भारत Canva के तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। उनके मुताबिक, Jio के साथ साझेदारी से देश में Canva का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या और बढ़ाने में मदद मिलेगी।
हालांकि, 12 महीने का यह ऑफर यूजर के Jio रिचार्ज प्लान की पात्रता पर निर्भर करेगा। कंपनी के मुताबिक, सामान्य प्रोडक्ट अपडेट के कारण ऑफर में बदलाव भी हो सकता है।
सरकार ने छोटे डिजिटल पेमेंट को लेकर नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके तहत 2000 रुपये तक के UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।
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यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface) यानी यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन को लेकर सरकार ने नया नियम जारी किया है। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) के डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज (Department of Financial Services) ने 14 सितंबर को गैजेट नोटिफिकेशन (Gazette Notification) जारी कर छोटे डिजिटल पेमेंट्स (Digital Payments) के लिए शुल्क से जुड़े नियम स्पष्ट किए हैं।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, 2,000 रुपये तक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर (Payment System Provider) किसी भी तरह का चार्ज नहीं लगा सकते। यह रोक सीधे लगाए जाने वाले शुल्क के साथ-साथ अप्रत्यक्ष तरीके से लगाए जाने वाले चार्ज पर भी लागू होगी।
यह नियम पेमेंट करने वाले और पेमेंट पाने वाले, दोनों पर लागू है। यानी 2,000 रुपये तक के यूपीआई पेमेंट के लिए न ग्राहक से और न ही दुकानदार या व्यापारी से कोई ट्रांजैक्शन फीस (Transaction Fee) ली जा सकती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई ग्राहक किराने की दुकान पर यूपीआई के जरिए 500 रुपये का भुगतान करता है, तो इस पेमेंट के लिए ग्राहक या दुकानदार से अलग से कोई फीस नहीं ली जा सकती। यही नियम 2,000 रुपये तक के पेमेंट के लिए रुपे डेबिट कार्ड (RuPay Debit Card) से किए गए भुगतान पर भी लागू होगा।
यह नियम खास तौर पर कम वैल्यू वाले डिजिटल पेमेंट के लिए अहम है। किराना दुकानों, रेहड़ी-पटरी वालों, छोटी दुकानों और दूसरे छोटे कारोबारों में यूपीआई और डेबिट कार्ड से बड़े पैमाने पर भुगतान लिया जाता है। ऐसे में 2,000 रुपये या उससे कम के पेमेंट पर ग्राहक और व्यापारी से अलग चार्ज नहीं लिया जा सकेगा।
हालांकि, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन को लेकर नोटिफिकेशन में कोई नया फीस स्ट्रक्चर (Fee Structure) नहीं बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं है कि 2,000 रुपये से अधिक के हर यूपीआई पेमेंट पर अब निश्चित रूप से शुल्क लगेगा। ऐसे ट्रांजैक्शन पर लागू नियम और फीस संबंधित प्रावधानों और मौजूदा चार्ज स्ट्रक्चर पर निर्भर करेंगे।
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) ने डिजिटल ऑडियंस की माप के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सामने एक प्रस्ताव रखा है।
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कंचन श्रीवास्तव, सीनियर एडिटर, एक्सचेंज4मीडिया ।।
ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशंस (ABC) ने डिजिटल ऑडियंस की माप के लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) के सामने एक प्रस्ताव रखा है। ABC के नवनिर्वाचित चेयरमैन मोहित जैन ने एक्सचेंज4मीडिया को यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल सर्कुलेशन और ऑडियंस की अहमियत लगातार बढ़ रही है और ऐसे में ABC अपने मौजूदा मापन ढांचे में डिजिटल को भी शामिल करने की योजना बना रहा है।
मोहित जैन के मुताबिक, ABC ने केंद्र सरकार को ‘डिजिटल न्यूज मेजरमेंट’ को व्यापक स्तर पर लागू करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इसे लागू करने में समय लग सकता है, क्योंकि इसमें सरकार की मंजूरी के साथ-साथ एक नई मापन व्यवस्था तैयार करने की जटिलता भी शामिल है।
मोहित जैन ने कहा, “हमने डिजिटल न्यूज मेजरमेंट को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव दिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ABC के प्रमुख ग्राहकों में से एक है और सरकार भी इस मुद्दे पर बात कर रही है। उनके मुताबिक, ऑडिट में डिजिटल ऑडियंस को भी शामिल किया जाना चाहिए।
प्रिंट और डिजिटल के बीच अंतर कम करने की कोशिश
ABC का यह कदम ऐसे समय में आया है जब भारत का प्रिंट मीडिया मापन सिस्टम भी प्रिंट और डिजिटल के बीच की दूरी कम करने की कोशिश कर रहा है।
मीडिया रिसर्च यूजर्स काउंसिल इंडिया (MRUCI) भारतीय पाठक सर्वेक्षण (IRS) को फिर से शुरू करने की दिशा में काम कर रही है। IRS आखिरी बार 2019 में जारी हुआ था। प्रस्तावित नए पायलट में प्रिंट के साथ-साथ डिजिटल रीडरशिप को भी मापने की योजना है। इससे विज्ञापनदाताओं को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर न्यूज कंटेंट की खपत की ज्यादा मौजूदा तस्वीर मिल सकती है।
ABC और IRS की भूमिका हालांकि अलग-अलग रही है। ABC मुख्य रूप से ऑडिटेड सर्कुलेशन का आंकड़ा देता है, यानी किसी प्रकाशन की कितनी प्रतियां सर्कुलेट हो रही हैं। वहीं IRS यह पता लगाने की कोशिश करता है कि किसी प्रकाशन को कितने लोग पढ़ते या इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अब जब ऑडियंस तेजी से प्रिंट से डिजिटल की ओर जा रही है, दोनों संस्थाओं के सामने एक बड़ा सवाल है कि मल्टी-प्लेटफॉर्म दौर में किसी पब्लिशर की कुल ऑडियंस को किस तरह मापा जाए।
ABC पहले भी कर चुका है डिजिटल मापन की कोशिश
ABC इससे पहले भी डिजिटल मापन के क्षेत्र में कदम रख चुका है। ब्यूरो ने 2016 में ABC Digital लॉन्च किया था। इसके लिए Nielsen ने PC और मोबाइल पर डिजिटल मापन का समाधान उपलब्ध कराया था। उस समय भी इसका उद्देश्य प्रिंट मापन के साथ डिजिटल ऑडियंस को समझना था, क्योंकि पाठकों का डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर रुझान बढ़ रहा था।
अब डिजिटल विज्ञापन भारतीय विज्ञापन बाजार का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। ऐसे में पब्लिशर्स के लिए वेबसाइट, ऐप और प्रिंट पर कंटेंट देखने वाली ऑडियंस की वैल्यू बताने के लिए भरोसेमंद थर्ड-पार्टी डेटा की जरूरत बढ़ गई है। इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि भारत में डिजिटल ऑडियंस के लिए अलग-अलग उद्देश्यों वाली कई मापन व्यवस्थाएं होंगी या फिर ABC और IRS भविष्य में एक-दूसरे के पूरक बनकर काम करेंगे।
विज्ञापनदाताओं के लिए भी जरूरी है एक साझा मापन सिस्टम
विज्ञापन इंडस्ट्री भी अलग-अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑडियंस को मापने के लिए एक साझा व्यवस्था की जरूरत पर जोर देती रही है। फिलहाल विज्ञापनदाता अलग-अलग डेटासेट और प्लेटफॉर्म की ओर से दिए गए आंकड़ों का इस्तेमाल करते हैं। इससे अलग-अलग स्क्रीन पर ऑडियंस को एक साथ समझना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, ABC के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती सरकार की मंजूरी है। मोहित जैन ने कहा कि सरकार ABC के प्रमुख हितधारकों में से एक है और पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है।
ABC की वेबसाइट के मुताबिक, ब्यूरो के 750 से ज्यादा पब्लिशर सदस्य हैं। इनमें 562 डेली, 107 वीकली और 50 मैगजीन शामिल हैं। यदि MIB इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो भारत में डिजिटल ऑडियंस के लिए दो पुराने और प्रमुख संस्थानों की ओर से मापन व्यवस्था तैयार करने की कोशिश सामने आ सकती है। एक तरफ MIB के समर्थन से ABC का डिजिटल मापन ढांचा होगा, वहीं दूसरी तरफ MRUC के जरिए IRS को फिर से शुरू करने की कोशिश चल रही है। ऐसे में सवाल यह है कि इंडस्ट्री को दो अलग-अलग सिस्टम की जरूरत है या दोनों व्यवस्थाओं को एक-दूसरे के पूरक के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए।
सात साल से IRS का इंतजार
IRS आखिरी बार 2019 में जारी हुआ था। इसके बाद से फंडिंग, मेथडोलॉजी, रिसर्च पार्टनर और सर्वे के दायरे जैसे मुद्दों पर असहमति के चलते इसकी वापसी लगातार टलती रही है।
इंडस्ट्री के कुछ अधिकारियों का मानना है कि अब सवाल सिर्फ सर्वे को दोबारा शुरू करने का नहीं है, बल्कि यह भी तय करना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदले मीडिया इकोसिस्टम में एक रीडरशिप करेंसी को आखिर मापना क्या चाहिए।
पब्लिशर्स की ओर से फंड किए जाने वाले IRS को MRUC और Readership Studies Council of India (RSCI) मिलकर प्रकाशित करते हैं। इसे दुनिया का सबसे बड़ा लगातार चलने वाला रीडरशिप स्टडी बताया जाता है। इसका सालाना सैंपल साइज 2.56 लाख से ज्यादा उत्तरदाताओं का है। IRS भारत में प्रिंट और दूसरे मीडिया के इस्तेमाल, लोगों की प्रोफाइल, प्रोडक्ट ओनरशिप और उनके इस्तेमाल की तस्वीर पेश करता है। इसके सर्वे में 100 से ज्यादा प्रोडक्ट कैटेगरी भी शामिल हैं।
इस सर्वे पर करीब 40-50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसे पब्लिशर्स के योगदान से पूरा किया जाता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, प्रिंट सर्कुलेशन में कमी और न्यूज कंजम्पशन की बदलती आदतों के बीच कुछ पब्लिशर्स इसकी उपयोगिता और निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को लेकर आश्वस्त नहीं हैं।
एक रीजनल पब्लिशर के मुताबिक, कई पब्लिशर्स ऐसे सर्वे में पैसा लगाने से हिचक रहे हैं, जिसके नतीजे उनकी मार्केट पोजिशन को कमजोर कर सकते हैं और इससे विज्ञापन से होने वाली कमाई पर भी असर पड़ सकता है।
यह चुनौती इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि मीडिया प्लानिंग का तरीका बदल चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म अब कैंपेन की लगभग रियल-टाइम माप उपलब्ध कराते हैं, जबकि रिटेल मीडिया में सीधे नतीजे मापने की सुविधा है। विज्ञापनदाता भी अब सिर्फ समय-समय पर मिलने वाली रिपोर्ट के बजाय लगातार कैंपेन को बेहतर बनाने की उम्मीद करते हैं।
इसके बावजूद प्रिंट इंडस्ट्री के लिए IRS की गैरमौजूदगी एक बड़ा मापन गैप पैदा करती है। प्रिंट सेक्टर से करीब 20,000 करोड़ रुपये का विज्ञापन कारोबार होने का अनुमान है। ऐसे में पब्लिशर्स का मानना है कि मीडिया प्लानिंग, विज्ञदाताओं का भरोसा और बाजार की तुलना के लिए एक स्वतंत्र इंडस्ट्री करेंसी जरूरी है।
फिलहाल विज्ञापनदाता ABC के सर्कुलेशन डेटा के अलावा पब्लिशर्स की अपनी रिसर्च और अलग-अलग ऑडियंस स्टडीज पर भी निर्भर हैं। अब ABC के डिजिटल ऑडियंस मापन प्रस्ताव और IRS को फिर से शुरू करने की कोशिश के बीच यह देखना अहम होगा कि भारत में डिजिटल न्यूज ऑडियंस के लिए भविष्य का मापन सिस्टम किस दिशा में जाता है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों, पेंशनर्स और नियोक्ताओं के लिए एक नया आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है।
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Samachar4media Bureau
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने सदस्यों, पेंशनर्स और नियोक्ताओं के लिए एक नया आधिकारिक WhatsApp चैनल शुरू किया है। इसके जरिए लोग वेबसाइट या UMANG ऐप पर लॉगिन किए बिना PF से जुड़ी जरूरी जानकारी WhatsApp के जरिए हासिल कर सकेंगे।
EPFO ने 13 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस नए WhatsApp चैनल की जानकारी दी। संगठन के मुताबिक, इस चैनल के जरिए सदस्यों तक जरूरी अपडेट और उपयोगी जानकारी सीधे WhatsApp पर पहुंचाई जाएगी।
कैसे काम करेगा WhatsApp चैनल?
सदस्य EPFO की ओर से साझा किए गए लिंक या QR कोड के जरिए आधिकारिक WhatsApp चैनल से जुड़ सकते हैं। इसके बाद बातचीत शुरू करने के लिए उन्हें “Hello” मैसेज भेजना होगा।
बताया गया है कि सेवा का इस्तेमाल उसी मोबाइल नंबर से किया जाना होगा, जो सदस्य के UAN (Universal Account Number) के साथ रजिस्टर्ड है। सिस्टम पहले यह जांच करेगा कि जानकारी मांगने वाला व्यक्ति उसी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर रहा है या नहीं।
नंबर का सत्यापन होने के बाद यूजर को कुछ विकल्प दिए जाएंगे। इनके जरिए वह अपनी जरूरत के मुताबिक जानकारी हासिल कर सकेगा। सिस्टम इन अनुरोधों को AI आधारित चैटबॉट के जरिए प्रोसेस कर सकता है या EPFO के रिकॉर्ड से सीधे जानकारी निकाल सकता है।
PF बैलेंस और क्लेम स्टेटस की मिल सकती है जानकारी
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, WhatsApp के जरिए सदस्य अपने PF खाते का बैलेंस, क्लेम का स्टेटस और हाल की कुछ ट्रांजैक्शन की जानकारी देख सकते हैं। यानी PF से जुड़ी पासबुक जैसी कुछ सुविधाएं WhatsApp पर मिल सकती हैं।
हालांकि, EPFO ने अभी इस चैनल पर उपलब्ध सभी सेवाओं की पूरी आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। साथ ही, जवाब मिलने में कितना समय लगेगा, कितनी बार जानकारी मांगी जा सकती है या मोबाइल नंबर का सत्यापन नहीं होने पर क्या प्रक्रिया होगी, इस बारे में भी अभी विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।
ऐसे में सदस्यों को WhatsApp चैनल से जुड़ने के बाद स्क्रीन पर दिए गए विकल्पों के अनुसार ही आगे बढ़ने और सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए EPFO के आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करने की सलाह दी गई है।
WhatsApp के अलावा ये विकल्प भी मौजूद
जब तक WhatsApp चैनल की सभी सुविधाओं को लेकर EPFO की ओर से पूरी जानकारी सामने नहीं आती, तब तक PF बैलेंस चेक करने के मौजूदा तरीके भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
सदस्य अपने UAN से रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से 7738299899 पर SMS भेजकर PF की जानकारी हासिल कर सकते हैं। इसके लिए मैसेज में “EPFOHO UAN ENG” लिखना होगा। यहां ENG की जगह अपनी पसंदीदा भाषा के पहले तीन अक्षर लिखे जा सकते हैं।
इसके अलावा, UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से 9966044425 पर मिस्ड कॉल देकर भी PF से जुड़ी जानकारी SMS के जरिए प्राप्त की जा सकती है। वहीं, UMANG ऐप और EPFO के Member e-Sewa Portal के जरिए UAN और OTP से लॉगिन करके PF की पासबुक सहित अन्य सेवाओं का इस्तेमाल पहले की तरह किया जा सकता है।
क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने राइट्स इश्यू के तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर ाऔर इतने ही डिटैचेबल वारंट आवंटित किए हैं।
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Vikas Saxena
क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने राइट्स इश्यू के तहत 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता (Partly Paid-Up) अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयर (Compulsorily Convertible Preference Shares-CCPS) और इतने ही डिटैचेबल वारंट (Detachable Warrants) आवंटित किए हैं। कंपनी के निदेशक मंडल ने 11 सितंबर 2026 को हुई बैठक में इस आवंटन को मंजूरी दी।
कंपनी ने बताया कि 100 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक CCPS को 100 रुपये के इश्यू मूल्य पर आवंटित किया गया है। ये 10% Non-Cumulative Non-Participating Compulsorily Convertible Preference Shares हैं। प्रत्येक CCPS पर आवेदन के समय 50 रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि बाकी राशि कंपनी की ओर से मांग किए जाने पर चुकानी होगी।
इस तरह 82,61,401 CCPS का कुल इश्यू मूल्य 82.61 करोड़ रुपये है। ये CCPS राइट्स इश्यू के तहत पात्र इक्विटी शेयरधारकों या आवेदकों, जिनमें रिनाउंसी (Renounce) भी शामिल हैं, को आवंटित किए गए हैं।
इसके साथ ही कंपनी ने 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता डिटैचेबल वारंट भी आवंटित किए हैं। प्रत्येक वारंट का इश्यू मूल्य 10 रुपये है। आवेदन के समय प्रत्येक वारंट के लिए 5 रुपये का भुगतान किया गया है और बाकी राशि कंपनी की ओर से मांग किए जाने पर चुकानी होगी। इन वारंट का कुल इश्यू मूल्य 8.26 करोड़ रुपये है।
कंपनी के मुताबिक, इस आवंटन के बाद उसका मौजूदा पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर पूंजी में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कंपनी के पास पहले की तरह 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 4,72,08,008 पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर हैं, जिनकी कुल राशि 47.20 करोड़ रुपये है।
आवंटन के बाद कंपनी के पूंजी ढांचे में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता CCPS शामिल हो गए हैं, जिनकी कुल राशि 41.30 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता डिटैचेबल वारंट भी शामिल हैं, जिनकी राशि 4.13 करोड़ रुपये है।
कंपनी ने बताया कि यह आवंटन राइट्स इश्यू के लिए तय किए गए Basis of Allotment को अंतिम रूप दिए जाने के बाद किया गया है। इसके लिए कंपनी ने इश्यू के रजिस्ट्रार और BSE Limited, जो इस इश्यू का Designated Stock Exchange है, के साथ प्रक्रिया पूरी की।
कंपनी ने इस संबंध में SEBI के 30 जनवरी 2026 के सर्कुलर के तहत जरूरी जानकारी भी स्टॉक एक्सचेंज को उपलब्ध कराई है।
महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है।
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Samachar4media Bureau
महात्मा गांधी के जीवन से जुड़ी ऐसी छोटी और अनकही कहानियों को सामने लाने के लिए नई सीरीज ‘Gandhi Gatha’ शुरू की जा रही है, जिनका जिक्र इतिहास की बड़ी और चर्चित घटनाओं के बीच अक्सर पीछे छूट जाता है। यह सीरीज यूट्यूब चैनल Avadh Panch पर प्रस्तुत की जाएगी और इसे वरिष्ठ पत्रकार मधुकर उपाध्याय पेश करेंगे।
‘Gandhi Gatha’ का मकसद गांधी जी के जीवन को केवल बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, तारीखों और समय के हिसाब से बताना नहीं है। सीरीज में उनके जीवन से जुड़े उन छोटे प्रसंगों और मानवीय कहानियों पर फोकस किया जाएगा, जो उपलब्ध तो हैं, लेकिन हजारों पन्नों में दबे होने की वजह से आम लोगों तक कम पहुंच पाती हैं।
सीरीज की शुरुआत करते हुए मधुकर उपाध्याय बताते हैं कि इतिहास लिखते समय इतिहासकारों का ध्यान अक्सर बड़ी घटनाओं पर ज्यादा रहता है। इसकी एक वजह यह भी है कि बड़ी घटनाओं की तारीख, समय और उनसे जुड़े लोग आसानी से दर्ज और प्रमाणित किए जा सकते हैं। वहीं छोटी घटनाएं कई बार फुटनोट या हाशिए में दर्ज होकर रह जाती हैं।
तारीखों के बजाय कहानियों पर फोकस
‘Gandhi Gatha’ की खास बात यह होगी कि इसमें गांधी जी के जीवन की घटनाओं को किसी तय क्रम में नहीं दिखाया जाएगा। यानी कहानियां उनके जीवन की तारीख या साल के हिसाब से क्रमवार नहीं होंगी।
सीरीज की सोच यह है कि अगर गांधी जी के जीवन से साल, तारीख, दिन और समय जैसी चीजें हटा दी जाएं, तो उनके जीवन से जुड़ी ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जिन्हें आमतौर पर पढ़ने या सुनने का मौका कम मिलता है।
मधुकर उपाध्याय के मुताबिक, गांधी जी के बारे में काफी सामग्री उपलब्ध है और उनकी बड़ी घटनाओं की जानकारी को अलग-अलग स्रोतों से जांचा जा सकता है। लेकिन छोटी कहानियों को हजारों पन्नों के बीच तलाशना आसान नहीं है। ‘Gandhi Gatha’ में इन्हीं कहानियों को खोजकर एक साथ सामने लाने की कोशिश की गई है।
‘अनलिखी नहीं, अनकही हैं ये कहानियां’
सीरीज में गांधी जी से जुड़ी कहानियों को ‘अनलिखी’ नहीं, बल्कि ‘अनकही’ बताया गया है। यानी ये घटनाएं कहीं न कहीं दर्ज हैं, लेकिन आम चर्चा और इतिहास की मुख्यधारा में इनका जिक्र कम हुआ है। इसी वजह से सीरीज में घटनाओं के समय के पारंपरिक क्रम को भी तोड़ा गया है। किसी अंक में 1930 या 1946 के बाद की घटना पहले आ सकती है, तो किसी दूसरे अंक में 1915 या गांधी जी के जीवन के किसी और दौर की कहानी सामने आ सकती है।
नोआखली की घटना में कुत्ते की कहानी भी
‘Gandhi Gatha’ में किस तरह की कहानियां दिखाई जाएंगी, इसका एक उदाहरण नोआखली से जुड़ी घटना के जरिए दिया गया है। मधुकर उपाध्याय के अनुसार, नोआखली में दंगे रोकने के लिए गांधी जी पैदल घूमे थे। इस पूरी घटना के बीच एक कुत्ते से जुड़ा प्रसंग भी है, जिसका आमतौर पर ज्यादा जिक्र नहीं मिलता।
बताया गया है कि गांधी जी को एक कुत्ता मिला और वह उन्हें अपने मालिक के घर तक ले गया। जब गांधी जी उस घर तक पहुंचे तो वहां कोई जीवित व्यक्ति नहीं था, बल्कि वहां शव पड़े थे। सीरीज में इसी तरह के छोटे, मानवीय और कम चर्चित प्रसंगों को सामने लाने की कोशिश की जाएगी।
हर दिन आएगा नया एपिसोड
‘Gandhi Gatha’ का पहला एपिसोड 20 सितंबर को आएगा। इसके बाद सीरीज में हर दिन एक नया एपिसोड पेश करने की योजना है। यानी दर्शक रोज गांधी जी के जीवन से जुड़ी एक नई कहानी सुन सकेंगे। सीरीज की शुरुआत गांधी जी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’ से होगी। यह भजन नरसी मेहता ने लिखा था। कार्यक्रम के लिए प्रसिद्ध गायिका शुभा मुद्गल ने इस भजन को गाया है। सीरीज की प्रस्तुति में इस भजन का इस्तेमाल किया जाएगा और हर एपिसोड की शुरुआत में शुभा मुद्गल की आवाज में इसे सुनाया जाएगा।
‘Gandhi Gatha’ के जरिए गांधी जी के जीवन को एक अलग नजरिए से देखने की कोशिश की गई है, जिसमें बड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के बजाय उन छोटी कहानियों पर ध्यान दिया जाएगा, जो उनके जीवन और व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।
भारत, अमेरिका के बाद पहला ऐसी मार्केट है जहां Amazon ने Creator Connections की शुरुआत की है। शुरुआत में इसे 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 सक्रिय क्रिएटर्स के लिए शुरू किया गया है।
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Samachar4media Bureau
ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने भारत में Creator Connections कार्यक्रम लॉन्च किया है। इसके जरिए Amazon ब्रैंड्स और क्रिएटर्स को एक ऐसे प्लेटफॉर्म पर ला रहा है, जहां क्रिएटर्स को सिर्फ लोगों तक पहुंच बनाने के लिए नहीं, बल्कि उनके कंटेंट से होने वाली योग्य सेल्स के आधार पर अतिरिक्त कमाई का मौका मिलेगा।
भारत, अमेरिका के बाद पहला ऐसी मार्केट है जहां Amazon ने Creator Connections की शुरुआत की है। शुरुआत में इसे 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 सक्रिय क्रिएटर्स के लिए शुरू किया गया है।
कैसे काम करेगा Creator Connections?
Creator Connections में ब्रैंड्स अपने प्रोडक्ट और कैंपेन बजट लेकर आएंगे, जबकि क्रिएटर्स अपनी ऑडियंस के हिसाब से उन कैंपेन को चुन सकेंगे, जो उनके लिए सही हैं। अगर किसी क्रिएटर के कंटेंट के जरिए Amazon पर योग्य खरीदारी होती है, तो उसे अतिरिक्त कमीशन मिलेगा।
इस मॉडल में क्लिक और सेल्स, दोनों को ट्रैक किया जाएगा। यानी किसी क्रिएटर की सफलता सिर्फ उसके फॉलोअर्स या कंटेंट की पहुंच से तय नहीं होगी, बल्कि यह देखा जाएगा कि उसके कंटेंट से कितने लोग वास्तव में खरीदारी तक पहुंचे।
1.65 लाख क्रिएटर्स का नेटवर्क
Amazon में Social कॉमर्स Emerging Countries की हेड निधि ठक्कर के मुताबिक, कंपनी का Creator Ecosystem अब करीब 1.65 लाख क्रिएटर्स तक पहुंच चुका है। पारंपरिक इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग में ब्रैंड्स अक्सर पहुंच, कंटेंट या किसी तय डिलिवरेबल के लिए भुगतान करते हैं। इसके मुकाबले Creator Connections में सेल्स और Conversion पर ज्यादा जोर दिया गया है।
Thakkar के मुताबिक, Amazon क्रिएटर्स को केवल Reach के लिए भुगतान नहीं कर रहा है। यहां यह देखा जाएगा कि उनकी ऑडियंस कितनी प्रभावी तरीके से खरीदारी में बदलती है।
छोटे क्रिएटर्स को भी मिल सकता है फायदा
Amazon का यह मॉडल छोटे और Niche Creators के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। किसी क्रिएटर के फॉलोअर्स भले ही कम हों, लेकिन अगर उसकी ऑडियंस ज्यादा जुड़ी हुई है और उसके सुझाव पर खरीदारी करने की संभावना ज्यादा है, तो वह बड़े क्रिएटर की तुलना में ब्रैंड के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है।
Creator Connections के जरिए क्रिएटर का कंटेंट Amazon के बाहर भी दिखाई दे सकता है, लेकिन खरीदारी आखिरकार Amazon पर होगी। इससे कंपनी को क्रिएटर की सिफारिश से लेकर प्रोडक्ट की खरीदारी तक की पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी।
क्रिएटर्स को मिलेगा अतिरिक्त कमीशन
योग्य सेल्स होने पर क्रिएटर्स को अतिरिक्त कमीशन मिलेगा। यह कमाई, जहां लागू हो, उनकी मौजूदा Amazon Associates या इन्फ्लुएंसर कमाई के अतिरिक्त होगी।
वहीं, ब्रैंड्स अपने कैंपेन को प्रोडक्ट, कमीशन रेट, बजट और कैंपेन की अवधि के हिसाब से तय कर सकेंगे।
फिलहाल कैंपेन के लिए कम से कम 10 फीसदी कमीशन रेट, 5,000 डॉलर का न्यूनतम बजट और 30 से 365 दिन तक की अवधि रखी गई है। एक कैंपेन में अधिकतम 1,200 ASINs शामिल किए जा सकते हैं।
24 घंटे की विंडो में होगी सेल्स की ट्रैकिंग
इस पूरे मॉडल में Attribution यानी यह पता लगाना अहम है कि सेल्स किस क्रिएटर के कंटेंट से हुई। Amazon के मुताबिक, क्रिएटर के लिंक पर क्लिक करने के बाद 24 घंटे की विंडो में होने वाली योग्य खरीदारी को इसके लिए देखा जाएगा। हालांकि, हर क्लिक को समान महत्व नहीं दिया जाएगा। कंपनी Conversion को भी ध्यान में रखेगी। Amazon ने यह भी कहा है कि उसके पास कम गुणवत्ता वाले ट्रैफिक और योग्य गतिविधि के बीच अंतर करने के लिए सिस्टम मौजूद हैं।
कंपनी ने Bot Traffic की पहचान के लिए इस्तेमाल होने वाली अपनी खास प्रक्रिया के बारे में जानकारी साझा नहीं की है।
त्योहारी सीजन से पहले लॉन्च हुआ कार्यक्रम
Creator Connections की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब भारत में त्योहारी खरीदारी का सीजन शुरू होने वाला है। इस दौरान ब्रैंड्स आमतौर पर मार्केटिंग और कॉमर्स पर ज्यादा खर्च करते हैं।
Amazon के मुताबिक, त्योहारी सीजन में क्रिएटर्स की कमाई सामान्य दिनों के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से करीब पांच गुना तक बढ़ी है। हालांकि, कंपनी ने यह नहीं बताया है कि Creator Connections से इस त्योहारी सीजन में कितनी अतिरिक्त सेल्स या कमाई होने की उम्मीद है।
निधि ठक्कर ने कहा कि Amazon के पास इस संबंध में आंतरिक अनुमान हैं, लेकिन उन्होंने कोई निश्चित आंकड़ा साझा नहीं किया।
क्रिएटर्स को सही कैंपेन चुनने में मिलेगी मदद
Amazon क्रिएटर्स को अपनी ऑडियंस के हिसाब से सही कैंपेन चुनने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। कंपनी का मानना है कि क्रिएटर और प्रोडक्ट के बीच सही तालमेल होने से लंबे समय तक बेहतर Conversion हासिल किया जा सकता है।
इसके लिए क्रिएटर्स को उनकी ऑडियंस और कंटेंट के हिसाब से Personalised Campaign Recommendations देने की भी योजना है।
फिलहाल सीमित स्तर पर शुरुआत
Amazon ने Creator Connections को फिलहाल चरणबद्ध तरीके से शुरू किया है। शुरुआती दौर में 50,000 ऐडवर्टाइजर्स और करीब 5,000 ज्यादा सक्रिय क्रिएटर्स को शामिल किया गया है। कंपनी इस शुरुआती समूह के प्रदर्शन से यह समझना चाहती है कि क्रिएटर्स को इससे कितनी कमाई होती है और ब्रैंड्स को अपने विज्ञापन खर्च पर कितना Return मिलता है।
Amazon क्रिएटर्स की भर्ती, उन्हें ट्रेनिंग देने और अकाउंट मैनेजमेंट जैसे कामों में एजेंसियों के साथ भी काम कर रहा है। इसके साथ ही कंपनी Creator University और Creator Central जैसी पहलों के जरिए सेल्फ-सर्विस सिस्टम भी तैयार कर रही है।
फॉलोअर्स से आगे अब सेल्स पर फोकस
Creator Connections के जरिए Amazon इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को सिर्फ फॉलोअर्स और इम्प्रेशंस तक सीमित रखने के बजाय सीधे कॉमर्स और Conversion से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
कंपनी के पास पहले से 1.65 लाख क्रिएटर्स का नेटवर्क है और भारत अमेरिका के बाद इस कार्यक्रम का पहला अंतरराष्ट्रीय बाजार बना है। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि क्रिएटर्स की पहुंच को वास्तविक खरीदारी और सेल्स में बदलने का यह मॉडल कितना सफल होता है।
क्रिएटर्स के लिए यह अपनी ऑडियंस के भरोसे से कमाई बढ़ाने का नया रास्ता हो सकता है, जबकि ब्रैंड्स को कंटेंट से सीधे सेल्स तक पहुंचने का मौका मिलेगा। वहीं Amazon के लिए यह इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग को सीधे अपने Shopping Ecosystem से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने अपने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (EMEA) बिजनेस के प्रेसिडेंट रोनन हैरिस को कंपनी का नया चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया है।
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Samachar4media Bureau
सोशल मीडिया कंपनी Snap Inc. ने अपने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका (EMEA) बिजनेस के प्रेसिडेंट रोनन हैरिस को कंपनी का नया चीफ कमर्शियल ऑफिसर (CCO) नियुक्त किया है। अब हैरिस Snap के ग्लोबल विज्ञापन बिक्री (Advertising Sales) और Go-to-Market ऑपरेशंस की जिम्मेदारी संभालेंगे।
रोनन हैरिस ऐसे समय में यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब Snap अपने विज्ञापन कारोबार को मजबूत करने और परफॉर्मेंस विज्ञापन पर ज्यादा फोकस करने की कोशिश कर रही है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब कंपनी के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन करीब चार साल बाद अपने पद से हटने की तैयारी कर रहे हैं।
विज्ञापन कारोबार का लंबा अनुभव
रोनन हैरिस को विज्ञापन और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। Snap के CEO Evan Spiegel ने उनकी नियुक्ति की घोषणा करते हुए कहा कि हैरिस के पास विज्ञापन क्षेत्र की गहरी समझ, पार्टनर्स के साथ मजबूत रिश्ते और Snap में लगातार बिजनेस ग्रोथ का रिकॉर्ड है।
Spiegel के मुताबिक, उन्हें उम्मीद है कि हैरिस की अगुवाई में ज्यादा से ज्यादा विज्ञापनदाता Snapchat पर सफल होंगे और कंपनी का विज्ञापन कारोबार आगे बढ़ेगा।
2022 में Snap से जुड़े थे हैरिस
रोनन हैरिस ने अक्टूबर 2022 में Snap जॉइन किया था। तब उन्हें EMEA प्रेजिडेंट बनाया गया था। पिछले करीब चार वर्षों में उन्होंने यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में Snap के बिजनेस का नेतृत्व किया है। उनके कार्यकाल के दौरान इस क्षेत्र में कंपनी के कारोबार में लगातार ग्रोथ देखने को मिली। अब उन्हें कंपनी की ग्लोबल कमर्शियल जिम्मेदारी दी गई है।
गूगल में 17 साल का अनुभव
Snap से पहले हैरिस ने करीब 17 साल गूगल में काम किया। उन्होंने 2005 में Dublin स्थित गूगल के EMEA मुख्यालय से अपना सफर शुरू किया था। गूगल में उन्होंने कई अहम नेतृत्व पदों पर काम किया और EMEA क्षेत्र के साथ-साथ मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका में कंपनी के ऑपरेशंस और बिजनेस को संभाला। बाद में वह गूगल में UK और Ireland के वाइस प्रेजिडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर भी रहे।
गूगल में काम करने के दौरान हैरिस का बड़ा फोकस ऑनलाइन विज्ञापन कारोबार पर रहा। EMEA क्षेत्र में गूगल के विज्ञापन बिक्री बिजनेस के साथ उनके लंबे अनुभव को Snap की नई जिम्मेदारी के लिए काफी अहम माना जा रहा है।
टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग का भी अनुभव
रोनन हैरिस ने University College Dublin से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। करियर की शुरुआत उन्होंने जापान में Mitsubishi Chemical Corporation की Information Storage Products Division से की थी। इसके बाद उन्होंने करीब नौ साल जापान में कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में काम किया। साल 2001 में वह आयरलैंड लौटे और प्राइवेट इक्विटी के क्षेत्र में काम किया।
अजीत मोहन के बाद संभालेंगे कमर्शियल कमान
हैरिस को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब Snap के चीफ बिजनेस ऑफिसर अजीत मोहन कंपनी से विदाई की तैयारी कर रहे हैं। Snap में करीब चार साल के दौरान अजीत मोहन ने कंपनी के विज्ञापन कारोबार को नए सिरे से मजबूत करने पर काम किया। उनका फोकस एड प्लेटफॉर्म को परफॉर्मेंस के लिए बेहतर बनाने और Direct Response Advertising को बिजनेस का अहम हिस्सा बनाने पर रहा। अब हैरिस को यही काम ग्लोबल स्तर पर आगे बढ़ाना होगा।
Snap के विज्ञापन कारोबार के लिए अहम समय
Snap इस समय अपने विज्ञापन कारोबार में बदलाव कर रही है। कंपनी का लक्ष्य सिर्फ Snapchat के यूजर्स की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि अपने बड़े यूजर बेस को विज्ञापनदाताओं के लिए ज्यादा प्रभावी और मापने योग्य नतीजों में बदलना भी है।
कंपनी का कुल रेवेन्यू Q2 2026 में सालाना आधार पर 19 फीसदी बढ़ा है। वहीं, Snapchat दुनियाभर में करीब एक अरब यूजर्स के आंकड़े के करीब पहुंच रहा है।
कंपनी संगठन के कुछ हिस्सों में भी बदलाव कर रही है और इंजीनियरिंग तथा विज्ञापन उत्पादों पर ज्यादा जोर दे रही है। ऐसे में रोनन हैरिस की नियुक्ति Snap के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती Snapchat की बड़ी पहुंच को विज्ञापनदाताओं के लिए ज्यादा मजबूत, प्रभावी और मापने योग्य बिजनेस रिजल्ट में बदलने की होगी।