होम / विचार मंच / वरिष्‍ठ पत्रकार चंदन प्रताप ने बताया क्यों शराबी बन गए थे ओमपुरी...

वरिष्‍ठ पत्रकार चंदन प्रताप ने बताया क्यों शराबी बन गए थे ओमपुरी...

चंदन प्रताप सिंह, प्रधान संपादक, सीएनएन हिंदी डॉट कॉम तन्हाई ने ओम को बनाया शराबी

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

चंदन प्रताप सिंह, प्रधान संपादक, सीएनएन हिंदी डॉट कॉम

तन्हाई ने ओम को बनाया शराबी

ओम पुरी एक ज़िंदादिल इंसान थे। उनके अंदर वाकई में एक दिल धड़कता था, जो ग़रीबों, मज़लूमों और अकलियतों के लिए धड़कता था। वो बेशक़ एक्र थे। लेकिन बाक़ी सभी एक्टरों से जुदा थे। इसलिए वो मेरी नज़र में वो सबसे बड़े एक्टर थे। वो नेताओं के पिछलग्गू नहीं थे। उनके अंदर पैसे का लालच नहीं था। इसलिए शायद वो किसी भी सरकार या पार्टी को रास नहीं आए और ब्रैंड एंबेसेडर नहीं बन पाए। ओम बेलाग थ। ओम बेलौस थे। ओम मुंहफट थे। शायद इसलिए भी वो कि दिल के बेहद साफ थे। नेकदिल इंसान थे।

ओम के साथ मेरे ज़ाति नाता क़रीब तीन दशक पुराना है। मेरे पारिवारिक मित्र सिद्धार्थ उपाध्याय के स्वर्गीय पिता अक्षय उपाध्याय रियल लाइफ एक हिंदी फिल्म देबशिशु की पटकथा और संवाद लिख रहे थे। उस फिल्म में स्मिता पाटिल और साधु मेहर जैसे मंजे हुए कलाकार भी थे। कोलकाता में पूरी फिल्म की शूटिंग हुई थी। वो उनसे मेरी पहली मुलाक़ात थी। वो भी सरसरी और औपचारिक तौर पर। मीडिया में आने के बाद उनसे संबंध प्रगाढ़ हुए। पत्रकार स्वर्गीय ओलाक तोमर के साथ भी उनका घनिष्ठ रिश्ता रहा और ओलाक जी के साथ मेरा भी बेहद निजी रिश्ता रहा है। इस लिहाज़ से हमारी मुलाक़ातों का सिलसिला बढ़ता गया। कभी दिल्ली तो कभी मुंबई में मेल मुलाक़ातें होती रहीं। इन मुलाक़ातो में वो मुझे वो खील किताब की तरह लगने लगे। कोई दुराव नहीं। कोई छिपाव नहीं। जो था, पूरी दुनिया के सामने था। उन्होंने बाक़ी लोगों की तरह कभी झूठ नहीं बोला कि वो शराब नहीं पीते। बल्कि गंगा जल का आचमन करते हैं।

मेरी निजी राय है कि जब प्रतिद्वंद्वी आपसे योग्यता में हारने लगता है तो वो आपके बेहद निजी और नितांत क्षणों और आदतों पर वार करने लगता है। उन बातों को घसीट कर पेशेवर ज़िंदगी में लाता है ताकि उससे बीस पड़नेवाला प्रतिद्विंदी 19 पड़ जाए। ओम पुरी के बारे में ये अफवाह फैला दी गई कि वो शराबी हैं। लेकिन जहां तक मैं जानता कि वो शराबी नहीं थे। वो शराब के शौक़ीन थे। इसकी एक वजह ये बी थे कि वो उस इलाक़े में जन्मे थे, जहां पर मांस-मदिरा आम जीवन शैली का हिस्सा है। कोनिएक और सिंगल मॉल्ट विस्की के अलाव वो रम के भी बेद शौक़ीन थे। उन्ही से पहली बार पता चला था कि स्कॉच में आइसक्रीम मिला कर पीने से ज़ायका कैसा हो जाता है।  

ओम पुरी का जन्म अंबाला के एक पंजाबी परिवार में हुआ था। ओम पुरी के घर की माली बेहद ख़स्ता था। गुज़र-बसर करना मुश्क़िल था। मजबूरी में उन्होंने कोयला चुनने का काम शुरु किया। उससे गाडी घिसटने लगी। लेकिन मामला जमा नहीं। लाचार होकर एक ढाबे पर मशालची यानी बर्तन धोने का काम किया। तब उनकी उम्र बेहद कम थी। ओम के शब्दों को उधार लेकर उनका एक संवाद पेश कर रहा हूं कि ज़िंदगी में बेईमानी के बहुतेरे सबूत मिल जाएंगे। लेकिन ईमानदारी का ना तो कोई सबूत मिलता है और ना ही गवाह। ये विशुद्ध तौर पर गंधर्व सिद्धांत है। ओम के साथ भी बचपन में ऐसा ही हुआ। ढाबे के मालिक ने चोरी का झूठा इल्ज़ाम लगाकर नौकरी से बाहर कर दिया। उनके पास ईमानदारी का सबूत पेश करने के लिए ना तो कोई सबूत था और ना ही कोई गवाह।

उनके ननिहाल ने उनका हाथ थाम। ज़िंदगी पटरी पर आने लगी। शुरुआती पढ़ाई नाना-नानी के यहां रह कर की। उस समय उनको समाज वैसे मिला तो फिल्में देखने का शौक़ हुआ। फिल्मों की तरफ रुझान भी हुआ। जानते थ कि मायनगरी उनके लिए बांहे फैला नहीं खड़ी है। इसलिए उन्होंने शायद नाटक को अपना पहला पायदान बनाया। वो नाटकों में हिस्सा लेने लगे। तब तक वो कॉलेज की दहलीज पर पहुंच चुके थे। उन्हें अपने घर की ज़रुरतें भी पता थीं। इसलिए पढ़ाई के साथ साथ मुंशी का भी काम करने लगे और वो भी एक वकील के यहां।

थोड़े बहुत जब पैसे जमा हुए तो शौक़ के पर निलक आए। पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट दाख़िला लिया। हालांकि इसके लिए भी ओम को बहुत पापड़ बेलने पड़े। लेकिन ये सच है कि इसी जगह ने उन्हें वो मुक़ाम और पहचान दिलाई, जिसके वो असली हक़दार थे।

ओम पुरी ऐसे एक्टरों में से थे, जिन्होंने पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। विक्टर बैनर्जी की तरह ओम भी हॉलीवुड के एक हिस्सा बन चुके थे। ईस्ट इज ईस्ट, सिटी ऑफ ज्वॉय, वुल्फ, द घोस्ट एंड डार्कनेस जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी उन्होंने अपने उम्दा अभिनय की छाप छोड़ी। साल 1980 में प्रदर्शित फिल्म 'आक्रोश' ओम पुरी के सिने करियर की पहली हिट फिल्म थी। गोविन्द निहलानी की इस फिल्म में ओम पुरी ने एक ऐसे शख्स का किरदार निभाया था, जिस पर पत्नी की हत्या का आरोप है। फिल्म में अपने दमदार अभिनय के लिए ओमपुरी को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

ओमपुरी का निजी जीवन कई बार विवादों में आया। उन्होंने दो शादियां की थीं। पहली पत्नी का नाम सीमा है। सीमा से उनकी बनी नहीं। शायद कारण विचारधारा और पारिवारिक पृष्ठभूमि थी। ये बातें उन्होंने कई बार होश में रहते हुए बताई थीं। सीमा से तलाक के बाद उन्होंने नंदिता पुरी से दूसरी शादी की। नंदिता से एक बेटा भी हुआ। उन्होंने उसका नाम बड़े प्यार और अरमान से ईशान रखा। जब मैंने एक बार उनस नाम के यथार्थ के बारे में पूछा था तो उन्होंने बेहद साफगोई से कहा था कि मैं जिस मज़हब में पैदा हुआ हूं, उसमें सबसे पवित्र दिशा और कोण ईशान को ही माना जाता है। मेरा बेटा इसी पवित्रता की निशानी है। लेकिन नंदिता के साथ भी उनकी नहीं बनी। तलाक़ के लिए कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाते रहे। आख़िरकार दोनों अलग भी हो गए। अन्ना हज़ारे के आंदोलन के समय वो मंच पर आकर सरकार को ललकारने से गुरेज़ भी नहीं किया। हालांकि इसके लिए उन्हें बहुत आलोचना भी झेलनी पड़ा। लेकिन एक बात मैंने जो महसूस की। वो ये थे कि तलाक़ के बाद वो बेहद तन्हा गए थे। बोलना बी कम कर दिया था। उम्र के इस पड़ाव पर जब उन्हें सही साथी की तलाश थी। लेकिन वो पवित्र कोना खाली था। शायद इसलिए वो ज़्यादा शराब पीने लगे थे।

समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।

 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

बिहार में नीतीश युग का अंत हुआ : रजत शर्मा

ऐसी असमानता राजनीति में कम देखने को मिलती है। इसीलिए नीतीश कुमार का पटना से दिल्ली जाना बिहार में एक बड़ी शून्यता पैदा करेगा। उनकी जगह लेना किसी के लिए भी बड़ी चुनौती होगी।

30 minutes ago

क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान को हरा पाएगा: रजत शर्मा

तालिबान ने कहा कि उसके हमले में 55 से ज्यादा पाकिस्तानी सैनिक मारे गए, इनमें से 23 सैनिकों की लाशें भी अफगान लड़ाके अपने साथ अफगानिस्तान ले गए।

3 days ago

2028 तक AI से बाज़ार में बर्बादी? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

अमेरिका में 100 में से 10 लोग जो white collar jobs करते हैं वो कुल खपत का 50% खर्च करते हैं। उदाहरण दिया गया है कि डेटा सेंटर में काम कर रहे एजेंट काम तो करेंगे लेकिन वो खर्च नहीं करेंगे।

4 days ago

वंदे मातरम् के खंडित स्वरूप पर सवाल : अनंत विजय

किसी कविता या गीत को खंडित करने का अधिकार रचनाकार के अलावा किसी अन्य को है? रचनात्मक संवेदना का सर्जनात्मक स्वतंत्रता की बात करनेवालों ने एक कृति को खंडित कर दिया।

4 days ago

शिक्षा के क्षेत्र में अराजकता की जिम्मेदारी किसकी: आलोक मेहता

मुख्य प्रश्न यही है, क्या इन गड़बड़ियों के लिए सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, या फिर मंत्रालय और उसके नेतृत्व को अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए?

4 days ago


बड़ी खबरें

'जी न्यूज' छोड़ 'न्यूज24' से जुड़े अखिलेश आनंद, संभालेंगे प्राइम टाइम बुलेटिन

'समाचार4मीडिया' के विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, टीवी न्यूज की दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा अखिलेश आनंद अब एक बार फिर 'न्यूज24' के साथ जुड़ गए हैं।

19 hours ago

इस बड़ी वजह से MIB ने न्यूज चैनलों की TRP पर चार हफ्तों के लिए लगाई रोक

फिलहाल यह व्यवस्था एक महीने के लिए लागू की जाएगी। इस दौरान न्यूज चैनल सामान्य रूप से प्रसारण करते रहेंगे, लेकिन उनकी दर्शक संख्या से जुड़े आंकड़े न तो मापे जाएंगे और न ही जारी किए जाएंगे।

12 hours ago

Hoopr में इस बड़े पद से अलग हुईं वितस्ता कौल, नई दिशा में बढ़ाएंगी कदम

यहां अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने Hoopr की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी को आकार देने और क्रिएटर व ब्रैंड इकोसिस्टम में इसकी मजबूत पहचान बनाने में अहम भूमिका निभाई।

12 hours ago

टीवी टुडे नेटवर्क में स्वतंत्र निदेशक राजीव गुप्ता का कार्यकाल पूरा, बोर्ड से हुए अलग

टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network Limited) के नॉन-एग्जिक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर राजीव गुप्ता का कार्यकाल पूरा हो गया है

21 hours ago

NDTV से इस्तीफे के बाद अब टाइम्स ग्रुप में बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकते हैं गौरव देवानी

गौरव देवानी ने दिसंबर 2023 में कंटेंट बिजनेस हेड के रूप में एनडीटीवी जॉइन किया था। एनडीटीवी से पहले वह टाइम्स नेटवर्क में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और नेशनल हेड (ब्रैंडेड कंटेंट) के पद पर थे।

12 hours ago