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‘राज्यसभा टीवी’ अब पहला टेलीविजन चैनल हो गया है जो ‘यूट्यूब’ पर अपने एक समर्पित चैनल के माध्यम से लाइव उपलब्ध होगा। ‘राज्यसभा टीवी’ के कार्यक्रम भारत और विदेशों में मौजूद अपने दर्शकों की मांग पर आज 25 जनवरी, 2012 से ‘यूट्यूब’ पर लाइव उपलब्ध हो जाएगा। इसके कार्यक्रम आईपैड और ब्लैकबेरी पर भी दर्शकों के लिए मुफ्त में उपलब्ध होंगे।इस अवसर पर, ‘राज्यसभा टीवी’ के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, गुरदीप सिंह सैप्पल ने कहा, “राज्यसभा टीवी का यह पहला कदम है जो एक तरह से इंटरनेट के साथ टीवी की शादी जैसा है
मंदी के दौर को पीछे छोड़ते हुए अब प्रिंट मीडिया प्लेयर्स अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं। इसी माह की शुरुआत में, केरल के प्रमुख समाचारपत्र, ‘मातृभूमि’ ने ‘मैक्सस’ को‘एओआर मीडिया मैनेजमेंट’ की जिम्मेदारी सौंपी है। इसी क्रम में, ‘द हिन्दू’ ने पहली बार मीडिया और डिजिटल पार्टनर नियुक्त किया है। एक्सचेंज4मीडिया समूह ने इंडस्ट्री सूत्रों के साथ-साथ ‘द हिन्दू’ के अधिकारियों से इस बात की पुष्टि की है
पॉलिटिकल एक्सप्रेस समूह प्रबंधन ने पाठकों की रूचि को देखते हुये अखबार का ई- पेपर एडिशन भी लॉन्च किया है। फिलहाल अखबार दिल्ली, एनसीआर और पूर्वी उत्तर प्रदेश से प्रकाशित हो रहा है। समूह इस समय हिन्दी और अंग्रेजी में मंथली मैगजीन भी इसी नाम से प्रकाशित कर रहा है।समाचार4मीडिया से बात करते हुये पॉलिटिकल एक्सप्रेस के संपादक आतिर हुसैन ने बताया कि अधिक से अधिक लोगों को दैनिक अखबार पॉलिटिकल एक्सप्रेस से जोड़ने के लिए हमने ई-पेपर लॉन्च किया है
सप्ताह का इंटरव्यू
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यशवंत व्यास, समूह सलाहकार संपादक, अमर उजाला
हमने तीसरी तिमाही में कोई विस्तार नहीं किया। आप जब नए एडिशन शुरू करेंगे, रीलॉन्च करेंगे तो पाठक तो बढ़ते ही हैं। मेरा मानना है कि मार्केट की लड़ाई को मार्केट की तरह लड़ना चाहिए। उतार-चढ़ाव तो आते ही रहते हैं।
आमने-सामने
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प्रमोद जोशी, वरिष्ठ पत्रकार
इस बार पेड न्यूज़ पर भी आयोग की नज़र है। पर आयोग इसे प्रत्याशी के खर्च का मामला मानता है। उसके आगे उसकी दिलचस्पी नहीं। एक पत्रकार और पाठक के लिए यह साख को बेचने का मामला है। इसलिए पेड न्यूज की तमाम उन शक्लों पर भी विचार करने की ज़रूरत है जो चुनाव की परिधि से बाहर हैं। -
अरविन्द विद्रोही, वरिष्ठ पत्रकारवर्ष २०११ के विदाई और वर्ष २०१२ के आगमन की बेला में सप्ताह भर चले रात के उत्सवो ने जहां लाखो नागरिको को आनंदित कर के ऐश्वर्य के रसा स्वादन का अवसर दिया वही दूसरी तरफ करोडो-करोड़ आम जन ,मेहनत कश तबका पूंजी वाद के, ऐश्वर्य व भोग विलास के इस अदभुत नज़ारे को देख कर ,सुनकर हतप्रभ से है |
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जनमत
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वर्तिका नन्दा, वरिष्ठ मीडिया विश्लेषक
तीन दिनों तक प्रियंका ही खबरों में रहीं। उनकी मुस्कुराहट, उनके कपड़ों का रंग, हंसने की अदा, फुर्ती, हाजिरजवाबी, मन को मोहने वाली बातें, अपनी
दादी से मिलता चेहरा, मिलनसारिता, उनके व्यक्तित्व का करिश्मा और भी न जाने क्या-क्या। हालांकि इनमें से किसी भी बात से इंकार नहीं किया जा सकता पर मीडिया की मुग्ध होती रिपोर्टिंग और रसीली एंकरिंग के कुछ पहलुओं पर इंकार जतलाना जरूरी लगता है।
नेटवर्क 18 और ईटीवी समझौते के बाद
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एस निहाल सिंह, ‘द स्टेट्समैन’ के पूर्व संपादकनेटवर्क18’और ‘ईटीवी’ समूह के बीच हुए समझौते पर मेरी पहली प्रतिक्रिया थी कि भारत के लिए यह सही समय है कि मीडिया में एकाधिकार के विरूद्ध एक कड़ा कानून लाया जाए। सभी प्रजातांत्रिक देशों, यहां तक कि सबसे अधिक विकसित देशों में भी इस तरह के कानून/प्रथा/आदर्श हैं।23/01/2012 -
दिलीप चेरियन, मीडिया विश्लेषकवैश्विक स्तर पर हमने देखा है कि जब बड़ी पूंजी मीडिया में प्रवेश करती है तो उसका किस तरह से असर होता है, वास्तव में हम क्या कर रहे हैं, हम खुद को दोहरा रहे हैं।आज, विश्व भर में मीडिया में अल्पाधिकार की प्रवृति दिखाई दे रही है, चाहे वह सिल्वियो बर्लुस्कोनी हो या रूपर्ट मर्डोक। सच्चाई यह है कि वे ना सिर्फ बड़े पैमाने पर मीडिया को प्रभावित करते हैं बल्कि राजनीति को भी प्रभावित करते हैं।
23/01/2012 -
महेंद्र त्रेहान, संस्थापक, संपादक इंडिया टुडेअगर सरकार और कॉरपोरेट अधिक सर्तक रहेंगे तो ऐसा नहीं होगा। एक व्यक्ति कई संपत्तियों का मालिक है। “2जी टेप (नीरा राडिया प्रकरण) से सभी को पहले से ही मालूम है कि कॉरपोरेट के द्वारा सभी कुछ निर्धारित किया जा रहा है। यह काफी खतरनाक है कि मुकेश अंबानी आपके सारे फैसले लेंगे, कहने का अर्थ की नीतियों का निर्धारण करेंगे क्योंकि जैसा कि आप सभी को मालूम है कि पहले (अतीत में) क्या हुआ है। चाहे वह किसी से बात करना या किसी की आलोचना करना या उसे बेनकाब करना हो.।”
23/01/2012


