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अमर उजाला के दिल्ली ब्यूरो डेस्क से नीरज वशिष्ठ ने इस्तीफा दे दिया है, वे अपनी नई पारी अहमदाबाद स्थित योग संस्थान से करने जा रहे हैं। वे अमर उजाला से पहले दैनिक जागरण के साथ भी जुड़े रहे हैं। नीरज ने पत्रकारिता की शुरूआत एक लाइफ स्टाइल मैगजींन के साथ की थी। वे अभी नोटिस पर चल रहे हैं। एक माह के बाद वे अपनी नई पारी की शुरूआत अहमदाबाद के वशिष्ठ योग फाउडेंशन के साथ जुड़ रहे हैं
वायकॉम18 ने अपने साथ विवेक बहल को बतौर नेटवर्क एडवाईजर कंटेंट जोड़ा है। उन्हें रीजनल चैलनों की जिम्मेदारीं सौपी गई है और साथ ही वो ग्रुप के लिए कंटेंट प्लानिंग और डवलपमेंट का काम देखेंगे। यहां पर वे कलर्स के सीईओ राजनायक को रिपोर्ट करेंगे। बहल इससे पहले बतौर चीफ कंटेंट ऑफिसर टर्नर इंडिया के साथ जुड़े हुए थे। जहां पर वो इमेजिन टीवी, कार्टून नेटवर्क, पोगो और अन्य चैनलों के लिए काम करते थे
रीयल एस्टेट कंपनी श्री इंफ्राटेक के मीडिया वेंचर ‘श्री मीडिया वेंचर प्राइवेट लिमिटेड’ के बैनर तले प्रसारित हो रहे है न्यूज चैनल श्रीएस7 न्यूज चैनल को कल री-लॉन्च किया जा रहा है। री-लॉन्चिंग लखनऊ में की जायेगी। इसी के साथ चैनल में कई तरह के बदलाव किये जायेंगे। इसमें मुख्य बदलाव चैनल का नाम श्रीएस7 से बदलकर श्री न्यूज किया जायेगा। इसके साथ ही चैनल के डिस्ट्रीब्यूशन को बढ़ाया जायेगा।
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17/05/2012
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17/05/2012
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17/05/2012
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17/05/2012
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16/05/2012
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16/05/2012
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16/05/2012
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16/05/2012
सप्ताह का इंटरव्यू
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राणा यशवंत, ग्रुप एडिटर, महुआ न्यूज
जो दर्शक न्यूज़ चैनल देखता है, वही एंटरटेनमेंट भी देखता है। आपको बस दर्शक के दिमाग का ब्लूप्रिंट समझना है। न्यूज़ और एंटरटेनमेंट में ज्यादा फर्क नहीं है। दोंनों में दर्शकों के माइंडसेट को पढ़ने की जरूरत होती है
आमने-सामने
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पीयूष पांडे, वरिष्ठ वेब पत्रकार
फिल्म अभिनेता आमिर खान ने अपने टेलीविजन कार्यक्रम ‘सत्यमेव जयते’ के प्रचार के लिए सोशल मीडिया के तमाम मंचों को भी रणनीतिक तरीके से चुना। नतीजा छह मई को कार्यक्रम की पहली कड़ी के प्रसारण के साथ ही दिख गया। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर उस दिन शुरुआती चार घंटों तक हर दो सेकेंड में एक ट्वीट सत्यमेव जयते से संबंधित लिखा गया। स्टारकॉम मीडियावेस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक 9 मई तक सत्यमेव जयते के फेसबुक पेज को करीब 6.5 लाख लोगों ने पसंद किया और ट्विटर पर यह कार्यक्रम लगातार टॉप-5 विषयों यानी ट्रेंडिंग टॉपिक में रहा
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रवि शंकर, स्वतंत्र पत्रकार
हाल ही में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कडेय काटजू ने मीडिया को फिर निशाने पर लेते हुए कहा कि वह अंधविश्वास और रूढि़वादिता को बढ़ावा देकर सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से लोगों का ध्यान हटा रहा है। गौरतलब है कि जस्टिस काटजू ने मीडिया पर आरोप लगाया है कि मीडिया सनसनी फैलाने की कोशिश में तथ्यों को तोड़ – मरोड़ कर पेश करती है। ताकि मीडिया घराने दर्शकों की संख्या में इजाफे करने के साथ- साथ ज्यादा कमाई कर सकें
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जनमत
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वर्तिका नंदा, मीडिया विश्लेषक.
तस्वीरें काफी तेजी से बदलती हैं। जुलाई 2007 में को मीडिया की सुर्खियां प्रतिभा सिंह पाटिल थीं - देश की पहली महिला राष्ट्रपति, सौम्य, सजग, संवेदनशील वगैरह। उनके लिए वे तमाम विश्लेषण इस्तेमाल किए गए जो किसी की गरिमा को चार चांद लगा सकें।
न्यूज़ चैनलों पर निर्मल बाबा..! ये कैसी पत्रकारिता ?
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एनके सिंह, महासचिव, बीईए
न्यूज़ चैनलों में आए दिन सुधार हो रहा है। हम कंटेंट को लेकर काफी काम कर रहे हैं। ये जो न्यूज़ के अलावा अन्य सामग्री दिखाए जाने का मामला है इसमें थोड़ा समय लगेगा लेकिन मैं समझता हूं कि आने वाले एक साल में हम सुधार कर पायेंगे। आप देखिए कि न्यूज़ चैनलों के केंटेंट में पिछले समय में काफी सुधार हुआ है, यह सब छोटे से समय में संभव नहीं है। इसमें थोड़ा टाइम लगेगा
05/04/2012 -
राहुल देव, वरिष्ठ पत्रकार
जो भी चैनल निर्मल बाबा को दिखा रहे हैं वो सभी पैसे की वजह से दिखा रहे हैं। और साथ ही जो ये सब नहीं दिखा रहे हैं। मैं पहले तो उन्हें बधाई देना चाहूंगा। जो चैनल इसे दिखा रहे हैं उनसे निश्चित रूप से जवाब मांगा जाना चाहिए कि वो ये सब क्यों दिखा रहे हैं। यह एक तरह की धार्मिक और आध्यात्मिक अश्लिलता है। चैनल इसलिए दिखा रहे हैं कि उन्हें पैसा मिल रहा है। अगर वो पैसे के लिए यह दिखा रहे हैं तो फिर न्यूज़ चैनल और अन्य चैनल में फर्क क्या रह गया है
05/04/2012 -
मुकेश कुमार, चैनल हेड, न्यूज़ एक्सप्रेस
अगर निर्मल बाबा से मिलने वाली टीआरपी को असल टीआरपी से घटा कर देखा जाए तो चैनल की वास्तविक टीआरपी सामने आ जाएगी। पत्रकारिता के मानदंड हैं उनकी अनदेखी करके टीआरपी और लोकप्रियता हासिल करने की कोशिशें इस प्रोफेशन को और नीचे ले जाएगी, इसकी विश्वनीयता घटायेगी। और ओवर ऑल मीडिया की छवि जो पिछले दिनों बनी है, जिसके अनुसार यह माना जाता है कि मीडिया गैर-जिम्मेदार है और अवैज्ञानिक चीजें परोसती है, वाली छवि और भी पुख्ता होगी
05/04/2012 -
सतीश के सिंह, संपादक, ज़ी न्यूज़
मैं समझता हूं कि निर्मल बाबा पत्रकारिता के एथिक्स के बिल्कुल खिलाफ है। इसे जो चला रहे हैं। पता नहीं क्या सोच के चला रहे हैं। इसे कौन लोग देख रहे हैं। यह भी समझ से परे है। पिछले समय न्यूज़ चैनल में जो सुधार देखने को मिला था अब वह भी खो चुका है। ज़ी न्यूज़ ने इस तरह की चीजों को कभी तवज्जो नहीं दिया है ज़ी न्यूज़ कभी अस्ट्रोलोजी (ज्योतिषी) वाले प्रोग्राम भी नहीं चलाता
05/04/2012







