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चाँदी की चाँदी क्यों हो रही है? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'
चाँदी का इस्तेमाल सौर ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विद्युत वाहनों में हो रहा है। सौर पैनल जब सूर्य की किरणों को बिजली में बदलता है तो उसमें चाँदी का इस्तेमाल होता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।
चाँदी को सोने के मुक़ाबले हल्के में ही लिया जाता था लेकिन साल भर में चाँदी का भाव सोने की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रहा है। पिछले साल जनवरी में एक किलो चाँदी क़रीब एक लाख रुपए में मिल रही थी। एक महीने पहले यह भाव दो लाख रुपए किलो पहुँच गया और महीने भर यानी इस हफ़्ते तीन लाख रुपए पार कर गया। हिसाब किताब में समझेंगे कि चाँदी का भाव क्यों बढ़ रहा है?
सोने चाँदी का इस्तेमाल हमारी समझ में गहनों तक ही सीमित था। जाने माने निवेशक वॉरेन बफेट कहते हैं कि दुनिया में जितना सोना है वो एक कमरे में समा सकता है। उस सोने का कोई उपयोग नहीं है। ज़मीन लोगे तो खेती कर सकते हो। शेयर ख़रीदोगे तो कंपनी कोई काम करेगी मतलब यह उत्पादक निवेश है जबकि सोना गैर-उत्पादक। चाँदी ने इस सिद्धांत को पलट दिया है क्योंकि आज आधुनिक प्रौद्योगिकी में चाँदी के बिना कोई काम नहीं हो सकता है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि चाँदी अब दुर्लभ पृथ्वी खनिज की श्रेणी में आ गई है।
चाँदी का इस्तेमाल सौर ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और विद्युत वाहनों में हो रहा है। सौर पैनल जब सूर्य की किरणों को बिजली में बदलता है तो उसमें चाँदी का इस्तेमाल होता है। सौर ऊर्जा का उत्पादन हर साल 10% बढ़ रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अर्धचालक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यही मॉडल को प्रशिक्षण देते हैं और फिर जब हमारे सवालों के जवाब के दौरान गणना करने के लिए। अर्धचालक की माँग भी लगातार बढ़ रही है उसमें चाँदी लगती है।
विद्युत वाहनों में भी चाँदी की भूमिका है। दुनिया धीरे-धीरे पेट्रोल डीज़ल की जगह विद्युत वाहनों की तरफ़ बढ़ रही है। विद्युत वाहनों के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में चाँदी का इस्तेमाल होता है। चाँदी की बढ़ती माँग कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण है। दूसरी तरफ़ आपूर्ति भी कम है। पिछले साल क़रीब 7 हज़ार टन की कमी थी। चाँदी का या तो उत्पादन होता है या फिर पुनर्चक्रण। उत्पादन रातोंरात बढ़ाया नहीं जा सकता है, उसका खनन सोना, तांबा और जस्ता के साथ साथ होता है। पुरानी खदानों में चाँदी निकलना कम हुआ है जबकि नई खदानों के उत्पादन में सालों लग जाते हैं।
माँग आपूर्ति के अंतर में चीन ने निर्यात में नियंत्रण लगाकर चाँदी का भाव और बढ़ा दिया गया। चाँदी का सबसे बड़ा भंडार मैक्सिको, पेरू जैसे देशों में है। चीन में भंडार कम है लेकिन दुनिया का 60-70% शोधन वहीं है। यही चाँदी उद्योग इस्तेमाल करती है। चीन ने एक जनवरी से चाँदी निर्यात के नियम सख़्त कर दिए हैं, यह महीने भर में भाव दो से तीन लाख रुपये पहुँचने का बड़ा कारण है। इस तेज़ी में आग लगाने का काम निवेशक और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड कर रहे हैं जो चाँदी में पैसा लगाए जा रहे हैं। यह कहना मुश्किल है कि तेज़ी तब तक बनी रहेगी। इतना तय है कि उद्योग में बढ़ता इस्तेमाल चाँदी को सोने से ज़्यादा उपयोगी बना रहा है।
( यह लेखक के निजी विचार हैं )
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