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खुद को नया रूप देकर आगे बढ़ेगा इंडियन न्यूज इकोसिस्टम, भविष्य रहेगा मजबूत: हर्ष भंडारी

भारतीय न्यूज इकोसिस्टम में इस हफ्ते चार हफ्तों के लिए TRP को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया वॉचर्स ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 46 minutes ago

हर्ष भंडारी, मीडिया एक्सपर्ट ।।

भारतीय न्यूज इकोसिस्टम में इस हफ्ते चार हफ्तों के लिए TRP को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया वॉचर्स ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ। साथ ही भारतीय न्यूज संगठनों के सामने समय-समय पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता रहा है। न्यूज ब्रॉडकास्टिंग के क्षेत्र में करीब तीन दशक से काम करने के अनुभव के आधार पर मैं कह सकता हूं कि भारतीय न्यूज मीडिया संगठन खुद को फिर से नए तरीके से खड़ा करेंगे और आगे भी प्रासंगिक बने रहेंगे। भारतीय न्यूज ब्रॉडकास्टिंग का यह क्षेत्र अक्सर इस सवाल का सामना करता है कि क्या भारतीय न्यूज इंडस्ट्री आगे भी चलेगी या फिर और ज्यादा मजबूत होकर आगे बढ़ेगी?

पिछले करीब 30 साल के अपने मीडिया करियर में, खासकर न्यूज क्षेत्र में काम करते हुए, मैंने देखा है कि खबरें हमेशा चर्चा में रहती हैं। विज्ञापनदाता, मार्केटर, क्लाइंट, मीडिया एक्सपर्ट, स्टेकहोल्डर और ट्रेड से जुड़े लोग अक्सर यह कहते नजर आते हैं कि न्यूज अब एंटरटेनमेंट बन गई है या यह बहुत ज्यादा नकारात्मक हो गई है।

मेरा पहला जवाब हमेशा न्यूज के प्रति मेरे जुनून से आता है। मुझे हमेशा लगता है कि हम यह क्यों नहीं देखते कि 24 घंटे चलने वाले लाइव न्यूज बिजनेस को चलाने में कितनी मेहनत लगती है। इसके पीछे कितनी मानव शक्ति, टेक्नोलॉजी और लगातार मेहनत काम करती है। अगर हम पर्दे के पीछे जाकर देखें तो समझ आएगा कि दर्शकों तक रियल टाइम में खबरें पहुंचाने के लिए कितनी तैयारी और मेहनत करनी पड़ती है। कई बार मकसद सिर्फ सबसे पहले खबर देने का ही नहीं होता, बल्कि सही तरीके से खबर पहुंचाने का भी होता है। जैसे किसी भी दूसरे उद्योग में होता है, वैसे ही यहां भी मौके होते हैं जिन्हें बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना होता है। उद्योग को यह भी समझना होगा कि न्यूज कंटेंट सबके लिए एक जैसा होता है और एंटरटेनमेंट की तरह इसमें अगला एपिसोड लिखना या देशों के बीच मैच बनाना संभव नहीं है।

आजकल एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ बहुत ज्यादा हो गई है। कई बार असली खबर देने के बजाय दर्शकों की भावना के हिसाब से कहानी को पैक किया जाता है। खबरें बार-बार दोहराई जाती हैं और कई बार किसी एक मुद्दे को पूरे दिन चलाया जाता है, जबकि वह विषय राष्ट्रीय मंच पर इतनी जगह पाने के लायक भी नहीं होता। इस वजह से यह क्षेत्र कई बार सिर्फ सर्वाइवल मोड में नजर आता है। विज्ञापन के दबाव और भीड़ का अनुसरण करने की मानसिकता के कारण इवेंट्स या लाइव शो की तरफ मुड़ना शायद आगे बढ़ने का सही रास्ता नहीं है।

ऐसा लगता है कि हम इस क्षेत्र को लेकर बनने वाली धारणा को आसानी से स्वीकार कर लेते हैं। लेकिन हम कंटेंट को नए तरीके से गढ़ने के लिए उतने तैयार नहीं दिखते, जो अगले 10 साल की दिशा तय कर सके। हमें बड़े उद्देश्य और स्पष्ट सोच के साथ ऐसा कंटेंट बनाना होगा जो इस क्षेत्र को नए दौर में नई पहचान दे सके, युवाओं को जोड़ सके, दर्शकों का दायरा बढ़ा सके और न्यूज कंटेंट को नए तरीके से सोचने का मौका दे।

पिछले तीन दशकों से इस क्षेत्र का हिस्सा रहने के कारण मुझे हमेशा लगा है कि आज भी विज्ञापनदाताओं के लिए न्यूज एक बेहद ताकतवर प्लेटफॉर्म है। मुझे लगता है कि इस क्षेत्र को उसकी विरासत, उसकी पहुंच और उसके योगदान के हिसाब से उतनी पहचान नहीं मिली, जितनी मिलनी चाहिए थी। इसी क्षेत्र ने रिटेल और SME विज्ञापनदाताओं के मजबूत ब्रैंड बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है। कोविड के दौरान कवरेज में इसने अहम जिम्मेदारी निभाई, चुनावों के समय पूरे देश को एक साथ जोड़ा और आज भी किसी भी जॉनर के मुकाबले सबसे ज्यादा विज्ञापनदाताओं का आधार इसी के पास है। ऐसे में क्या अपने आप को फिर से नए तरीके से खड़ा करना इतना मुश्किल होगा?

मैंने इस बड़े और प्रभावशाली क्षेत्र में बहुत छोटी-सी भूमिका निभाई है, लेकिन अपनी सीमित समझ के आधार पर वही बात रखी है जो शायद इस क्षेत्र से जुड़े कई साझेदार और स्टेकहोल्डर भी कहना चाहते हैं। न्यूज हमेशा रहेगा और आगे भी निवेश पर अच्छा रिटर्न देने वाला प्लेटफॉर्म बना रहेगा। लेकिन यह काम वह अकेले नहीं कर सकता। पूरे उद्योग को भी इस क्षेत्र के साथ मजबूती से खड़ा होना होगा। मेरा मानना है कि आज भी यह जॉनर सबसे प्रभावी है। यह बिना स्क्रिप्ट का, लाइव और वास्तविक है। हर दूसरे बिजनेस की तरह इसे भी राजस्व के लक्ष्य पूरे करने होते हैं और अच्छे टैलेंट को विकसित करना होता है। व्यक्तिगत रूप से, अपनी मौजूदा भूमिका में मैं इस क्षेत्र के लिए लगातार काम करता रहूंगा और बेहतर कंटेंट के जरिए इसे आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहूंगा।

(यहां व्यक्त किए गए विचार पूरी तरह लेखक के अपने निजी विचार हैं)


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