होम / विचार मंच / ऊर्जा संकट पर राहुल की बॉक्सिंग और मोदी का सूर्य नमस्कार: आलोक मेहता

ऊर्जा संकट पर राहुल की बॉक्सिंग और मोदी का सूर्य नमस्कार: आलोक मेहता

राहुल गांधी करीब 22 वर्षों से सांसद हैं जिनमें 10 वर्ष उनकी यानी कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार थी। उन्होंने तबसे अब तक कितनी बार ऊर्जा की नीतियों, कार्यक्रमों पर संसद के अंदर या बाहर बोला?

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 7 hours ago

आलोक मेहता, वरिष्ठ पत्रकार, पद्मश्री, लेखक।

राहुल गांधी को बचपन से बॉक्सिंग का शौक है और राजनीति में भी उनकी शैली वही है। बॉक्सिंग मुकाबले में कम समय में हार-जीत का फैसला हो जाता है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रारंभिक काल से सूर्य नमस्कार के साथ अधिक समय और संयम से शांत भाव से शक्ति अर्जन तथा उसके दूरगामी लाभ पर ध्यान देते रहे हैं।

वर्तमान में पश्चिम एशिया के युद्ध के कारण ऊर्जा के वैश्विक संकट—खासकर पेट्रोलियम और गैस की आवश्यकताओं—पर राहुल गांधी तथा उनकी कांग्रेस पार्टी संसद के अंदर-बाहर बहुत हंगामा कर रही है। लोकसभा में तो राहुल गांधी पेट्रोल-गैस पर चार लाइन बोलकर अमेरिकी विवाद में भारत, मंत्री परिवार और अमेरिकी दबाव में झुकने जैसे अनर्गल मुद्दे उठाने लगे। आगे इस प्रलाप पर अध्यक्ष की अनुमति न मिलने पर हंगामा किया। संसद के गेट पर चाय का मजा लेते हुए धरना-प्रदर्शन कर दिया। यही नहीं, टीवी के लिए दो-चार वाक्य बोलकर आरोप लगाया कि पीएम मोदी की सरकार ने ऊर्जा के लिए पहले से कोई नीति और व्यवस्था नहीं की।

जबकि मोदी सरकार की ओर से पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने विस्तृत वक्तव्य देकर विश्वास दिलाया कि पेट्रोल-गैस की कमी नहीं है और ऊर्जा संकट से निपटने तथा 40 देशों से कच्चे तेल के आयात के अनुबंधों से भविष्य में आपूर्ति के इंतजाम हैं। राहुल गांधी करीब 22 वर्षों से सांसद हैं, जिनमें 10 वर्ष उनकी यानी कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार थी। उन्होंने तब से अब तक कितनी बार ऊर्जा की नीतियों और कार्यक्रमों पर संसद के अंदर या बाहर बोला? विशेष रूप से सबसे कम खर्च और लगभग मुफ्त मिल सकने वाली सौर ऊर्जा को प्राथमिकता पर अपनी या पराई सरकार का ध्यान आकर्षित किया?

हम जैसे पत्रकारों को उनकी सरकार और पार्टी के नेता या राजदूत बताते थे कि कच्चे तेल के कुएँ अफ्रीकी देशों में खरीदने के प्रस्ताव टाल दिए गए। तेल आयात में कमीशन पाने में बड़े नेताओं की रुचि रहती थी। कोयला घोटाला किस राज में हुआ? हाँ, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के कुछ सहयोगियों, सलाहकारों और राज्य सरकारों के प्रयासों से सौर ऊर्जा के लिए स्वीकृतियाँ जरूर मिलीं।

दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद (2014–2025) सौर ऊर्जा की योजनाओं का विस्तार और क्रियान्वयन सूर्य की रोशनी की तरह तेजी से हुआ है। इस अवधि में सौर ऊर्जा की क्षमता कई गुना बढ़ी, बड़े सोलर पार्क बने, घरेलू निर्माण उद्योग विकसित हुआ और भारत वैश्विक सौर ऊर्जा नेतृत्व की ओर बढ़ा। आज सौर ऊर्जा भारत की ऊर्जा नीति का केंद्रीय स्तंभ बन चुकी है। यदि वर्तमान गति बनी रहती है तो आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है।

सौर ऊर्जा तथा अन्य तरीकों से बिजली और गैस आदि के उत्पादन में बढ़ोतरी से कच्चे तेल के आयात में निरंतर कमी हुई है। इसका लाभ वर्तमान वैश्विक पेट्रोल-गैस की गड़बड़ाई अर्थव्यवस्था में भारत को काफी सुरक्षित रखने में मिल रहा है। एक और तथ्य राहुल गांधी एंड कंपनी भूल जाती है कि जिन अडानी-अंबानी को वे दस साल से कोसते रहते हैं, उन समूहों और अन्य बड़े औद्योगिक समूहों ने ऊर्जा क्षेत्र, खासकर सौर ऊर्जा परियोजनाओं में लाखों-करोड़ों रुपये का पूंजी निवेश हाल के वर्षों में किया है।

इसमें कोई शक नहीं कि आज भी सौर ऊर्जा क्षेत्र में चीन दुनिया में सबसे आगे है। दूसरे स्थान पर अमेरिका है और भारत तीसरे स्थान पर पहुँच गया है। चीन के आगे होने के कई कारण हैं, जैसे विशाल घरेलू सोलर उद्योग, सोलर पैनल निर्माण में विश्व नेतृत्व, बड़े सरकारी निवेश और विशाल रेगिस्तानी क्षेत्र। आज दुनिया के अधिकांश सोलर पैनल चीन में बनते हैं।

इस पर ध्यान आया—कांग्रेस राज में केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मुझे अनौपचारिक बातचीत में अपना दर्द बताया था कि जाने क्यों सरकार चीन की कंपनियों के सोलर पैनल खरीदने पर दबाव बनाती है, जबकि भोपाल के हेवी इलेक्ट्रिकल्स में बने सोलर पैनल उससे बेहतर होते हैं। मतलब चीनी कंपनियों से किसी को कुछ मोटा कमीशन मिल रहा होगा।

बहरहाल, मोदी सरकार की नीतियों और निजी निवेश के संयोजन से भारत आज दुनिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा बाजारों में शामिल हो गया है। यदि वर्तमान गति बनी रहती है तो आने वाले दशक में भारत विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा देशों में शामिल हो सकता है। बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए 15 “सोलर पार्क मॉडल” विकसित किए गए हैं। इस मॉडल में सरकार भूमि, ट्रांसमिशन और बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराती है और निजी कंपनियाँ बिजली उत्पादन करती हैं।

राजस्थान और गुजरात भविष्य में भी भारत के सोलर केंद्र रहेंगे। कच्छ और थार रेगिस्तान में विशाल सोलर पार्क बन रहे हैं। अडानी और अंबानी समूह ने विशाल ग्रीन एनर्जी परियोजनाएँ शुरू की हैं, जबकि टाटा और बिड़ला समूह सौर ऊर्जा उत्पादन और तकनीक में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अडानी समूह भारत का सबसे बड़ा निजी नवीकरणीय ऊर्जा निवेशक बन चुका है। अडानी समूह ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 2,30,000 करोड़ रुपये निवेश की योजना बनाई है, जिसमें प्रमुख हिस्सा सौर ऊर्जा परियोजनाओं का है।

मुकेश अंबानी की रिलायंस ने लगभग 75 अरब डॉलर (लगभग ₹6 लाख करोड़) का निवेश ग्रीन एनर्जी में करने की घोषणा की है। इसमें सोलर पैनल निर्माण, बैटरी निर्माण और ग्रीन हाइड्रोजन शामिल हैं। जामनगर में धीरूभाई ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स दुनिया के सबसे बड़े ग्रीन एनर्जी कॉम्प्लेक्स में से एक बनने की योजना है। टाटा समूह की टाटा पावर ने ₹1.25 लाख करोड़ निवेश योजना घोषित की है, जो 2030 तक पूरी हो जाएगी। टाटा पावर भारत की सबसे बड़ी रूफटॉप सोलर कंपनियों में से है। आदित्य बिड़ला समूह पवन ऊर्जा में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है।

इस तरह केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर जमीन तथा अन्य सुविधाओं के माध्यम से अपनी बिजली उत्पादन क्षमता निरंतर बढ़ा सकती हैं। राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और कुछ दक्षिणी राज्यों को बहुत सफलता मिल रही है। आश्चर्य यह है कि अपार संभावनाओं के बावजूद बिहार और उत्तर प्रदेश सबसे पीछे हैं।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


टैग्स
सम्बंधित खबरें

सामाजिक सरोकारों को छोड़कर पत्रकारिता संभव नहीं: प्रो.संजय द्विवेदी

चिंता तब होती है जब पत्रकार स्वयं पार्टी के प्रवक्ता की तरह व्यवहार करने लगते हैं। पत्रकार की अपनी राजनीतिक समझ होना गलत नहीं है, लेकिन पार्टी लाइन पर चलना पत्रकारिता के लिए खतरनाक है।

6 hours ago

LPG का संकट क्यों हो गया? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच Hormuz Strait संकट से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल है। भारत में LPG का स्टॉक सिर्फ एक महीने का बचा है जबकि मांग 17-18 करोड़ सिलेंडर प्रतिमाह है।

6 hours ago

ओम बिरला की निष्पक्षता पर सवाल: पंकज शर्मा

बिरला से पहले रहे 16 लोकसभा अध्यक्षों में से किसी एक के बारे में भी ऐसी रंग बदलती भूमिका की चर्चा कम ही सुनने को मिली। बिरला आठवें गैर-कांग्रेसी स्पीकर हैं।

6 hours ago

स्वाधीनता काल में हिंदी के विरुद्ध राजनीति: अनंत विजय

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने कालखंड में हिंदी के विरुद्ध मुस्लिम नेताओं के बयानों को जिहाद बताया था। स्वाधीनता पूर्व हिंदी को दुर्बल करने के लिए मुसलमानों ने राजनीति की।

7 hours ago

ममता की महिला शक्ति के आगे बेबस भाजपा: समीर चौगांवकर

बीजेपी का हिंदू एकता का प्रयोग तमाम राज्यों में भले ही चुनावी राजनीति में सफल रहा हो, लेकिन बंगाल में भाजपा का यह समीकरण अभी तक काम नहीं कर सका है।

4 days ago


बड़ी खबरें

डिलिजेंट मीडिया कॉर्पोरेशन के CEO चित्रेश सहगल ने संस्थान से ली विदाई

डिलिजेंट मीडिया कॉरपोरेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चित्रेश सहगल ने हाल ही में कंपनी को अलिवदा कह दिया है।

3 hours ago

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार ने किए कई इंतजाम: अश्विनी वैष्णव

केंद्र सरकार ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई डिजिटल तकनीकों से होने वाले संभावित खतरों से निपटने के लिए कई कानूनी और नियामकीय सुरक्षा उपाय लागू किए हैं

2 hours ago

मीडिया कवरेज से नाराज ट्रंप, FCC चेयरमैन ने दी टीवी चैनलों के लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी

फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन के चेयरमैन ब्रेंडन कार ने चेतावनी दी है कि यदि टीवी और रेडियो ब्रॉडकास्टर्स जनता के हित में काम नहीं करेंगे, तो उनके लाइसेंस रद्द किए जा सकते हैं।

2 hours ago

रोहित सावल लाए नया डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘Zingabad’, हनी सिंह के साथ लॉन्च किया एंथम

समाचार4मीडिया से बातचीत में रोहित सावल ने बताया कि Zingabad का मकसद युवाओं और इंटरनेट दर्शकों के लिए समसामयिक विषयों, राजनीति, समाज और संस्कृति से जुड़ा कंटेंट पेश करना है।

4 hours ago

दिल्ली में ‘My Story Tour’ की धूम: हनी सिंह ने म्यूजिक के जरिये सुनाई अपनी जिंदगी की कहानी

पूरे कार्यक्रम को चार हिस्सों में पेश किया गया—The Rise, The Fame, The Darkness और The Comeback। हर सेगमेंट में हनी सिंह के जीवन और करियर के अलग दौर को दिखाया गया।

21 hours ago