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बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार ने किए कई इंतजाम: अश्विनी वैष्णव

केंद्र सरकार ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई डिजिटल तकनीकों से होने वाले संभावित खतरों से निपटने के लिए कई कानूनी और नियामकीय सुरक्षा उपाय लागू किए हैं

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 2 hours ago

केंद्र सरकार ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई डिजिटल तकनीकों से होने वाले संभावित खतरों से निपटने के लिए कई कानूनी और नियामकीय सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, खासकर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए। यह जानकारी हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स व आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में दी।

संसद में एक सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि भारत की AI रणनीति पीएम नरेंद्र मोदी के उस विजन पर आधारित है, जिसमें तकनीक को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना, भारत की समस्याओं का समाधान करना और आम लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना शामिल है। साथ ही सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि नई डिजिटल तकनीकों से किसी तरह का नुकसान न हो, इसलिए जरूरी सुरक्षा उपाय किए गए हैं।

बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान

मंत्री ने बताया कि Information Technology Act, 2000 और इससे जुड़े नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंटरमीडियरी को यह सुनिश्चित करना होता है कि बच्चों से जुड़ा कोई भी हानिकारक कंटेंट, जैसे अश्लील सामग्री या हिंसा को बढ़ावा देने वाला कंटेंट, उनके प्लेटफॉर्म पर न रहे।

इन नियमों के अनुसार, अगर सरकार या अदालत की ओर से सूचना दी जाती है तो ऐसे गैरकानूनी कंटेंट को प्लेटफॉर्म को तीन घंटे के भीतर हटाना जरूरी होता है। वहीं बिना सहमति के साझा की गई निजी या यौन प्रकृति की सामग्री को दो घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य है।

इसके अलावा प्लेटफॉर्म को ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित कानूनों के तहत अधिकारियों को देनी होती है, जैसे Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023।

डेटा सुरक्षा कानून के तहत भी सुरक्षा

मंत्री ने यह भी बताया कि Digital Personal Data Protection Act, 2023 के तहत भी बच्चों के डेटा की सुरक्षा के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। यह कानून AI आधारित डिवाइस और खिलौनों के जरिए जुटाए जाने वाले व्यक्तिगत डेटा पर भी लागू होता है।

इस कानून के तहत बच्चों का डेटा प्रोसेस करने से पहले माता-पिता की सत्यापित सहमति लेना जरूरी है। साथ ही बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना, उन्हें ट्रैक करना या उनके लिए लक्षित विज्ञापन दिखाना भी प्रतिबंधित है।

इसके पालन के लिए पहचान और उम्र की पुष्टि जैसे उपाय और वर्चुअल टोकन जैसी व्यवस्थाएं भी तय की गई हैं।

इसके अलावा Information Technology (Reasonable Security Practices and Procedures and Sensitive Personal Data or Information) Rules, 2011 के तहत संगठनों को यह सुनिश्चित करना होता है कि वे केवल तय उद्देश्य के लिए ही व्यक्तिगत डेटा एकत्र करें और साझा करने से पहले अनुमति लें।

जिम्मेदार AI विकास पर जोर

सरकार ने India AI Governance Guidelines भी जारी की हैं, जिनमें AI के विकास में मानव-केंद्रित और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है। इन दिशानिर्देशों में बच्चों को संवेदनशील समूह माना गया है और AI सिस्टम से होने वाले संभावित नुकसान की निगरानी के लिए जोखिम मूल्यांकन का सुझाव दिया गया है।

साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान

मंत्री ने बताया कि Indian Computer Emergency Response Team (CERT-In) समय-समय पर ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े टिप्स, पोस्टर, इन्फोग्राफिक्स और वीडियो जारी करता है, ताकि इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जा सके।

Information Security Education and Awareness (ISEA) programme के तहत देशभर में अब तक 4,300 से ज्यादा वर्कशॉप आयोजित की जा चुकी हैं। इनमें 9.63 लाख से अधिक लोग, जिनमें छात्र, शिक्षक, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मचारी और सरकारी अधिकारी शामिल हैं, भाग ले चुके हैं।

इसके अलावा 1.13 लाख से ज्यादा शिक्षक, पुलिसकर्मी और स्वयंसेवकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। वहीं अप्रत्यक्ष रूप से चलाए गए कार्यक्रमों के जरिए करीब 15 करोड़ लोगों तक पहुंच बनाई गई है।

साइबर अपराध से निपटने के लिए कदम

साइबर अपराध से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने गृह मंत्रालय के तहत National Cyber Crime Reporting Portal शुरू किया है, जहां नागरिक ऑनलाइन अपराधों की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसमें खास तौर पर बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर ध्यान दिया जाता है।

इसके अलावा सरकार ने Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) भी स्थापित किया है, ताकि साइबर अपराधों, खासकर ऑनलाइन बाल शोषण से जुड़े मामलों में समन्वित कार्रवाई की जा सके।

अधिकारियों को Interpol से मिलने वाली जानकारी के आधार पर बच्चों से जुड़े यौन शोषण वाली सामग्री वाली वेबसाइटों को नियमित रूप से ब्लॉक किया जाता है। यह जानकारी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन  के माध्यम से भेजी जाती है।

इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को भी ऐसे वेबसाइट ब्लॉक करने के निर्देश दिए गए हैं, जो बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट होस्ट करती हैं। इसके लिए वैश्विक डेटाबेस जैसे Internet Watch Foundation (यूके) और Project Arachnid (कनाडा) का इस्तेमाल किया जाता है।

इसके अलावा National Crime Records Bureau और अमेरिका के National Center for Missing and Exploited Children के बीच एक समझौता भी हुआ है, जिसके तहत ऑनलाइन बाल यौन शोषण से जुड़े टिपलाइन रिपोर्ट साझा किए जाते हैं ताकि अधिकारियों द्वारा तुरंत कार्रवाई की जा सके।

वहीं National Commission for Protection of Child Rights ने भी साइबर सुरक्षा को लेकर अध्ययन किए हैं और दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें बच्चों, माता-पिता और शिक्षकों के लिए “Being Safe Online” नाम से जागरूकता सामग्री भी तैयार की गई है।


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