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LPG का संकट क्यों हो गया? पढ़िए इस सप्ताह का 'हिसाब किताब'

ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच Hormuz Strait संकट से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल है। भारत में LPG का स्टॉक सिर्फ एक महीने का बचा है जबकि मांग 17-18 करोड़ सिलेंडर प्रतिमाह है।

समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 5 hours ago

मिलिंद खांडेकर, वरिष्ठ पत्रकार।

युद्ध के दौरान कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं। पेट्रोल-डीज़ल की किल्लत का डर सताने लगता है, लेकिन इस बार एलपीजी यानी गैस सिलेंडर के लिए लाइन लगी हुई है। इसका कारण यह है कि एलपीजी का स्टॉक देश में करीब एक महीने का है, जबकि कच्चे तेल का भंडार लगभग ढाई महीने का है। हिसाब-किताब से समझें तो पता चलता है कि संकट कितना गहरा हो सकता है।

अमेरिका और इज़राइल ने दो हफ्ते पहले ईरान पर हमला किया तो कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चले गए। युद्ध से पहले यह कीमत लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। दाम बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ईरान के पास स्थित हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) का बंद होना है। इस जलमार्ग से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल हर रोज गुजरता है। सप्लाई कम होने के कारण कीमतें तेजी से बढ़ गईं।

कच्चे तेल के मामले में भारत अब केवल खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं रहा है। रूस जैसे देशों से भी तेल की सप्लाई बढ़ा दी गई है, जो दूसरे समुद्री रास्तों से भारत तक तेल पहुंचा सकता है। लेकिन एलपीजी के मामले में समस्या थोड़ी जटिल हो गई है। एलपीजी यानी लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (Liquified Petroleum Gas) मुख्यतः दो तरीकों से बनती है। पहला तरीका यह है कि कच्चे तेल को रिफाइनरी में प्रोसेस कर पेट्रोल और डीज़ल बनाया जाता है, जिसमें एलपीजी एक उप-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) के रूप में मिलती है। दूसरा तरीका यह है कि प्राकृतिक गैस (नेचुरल गैस) को प्रोसेस करके एलपीजी तैयार की जाती है।

भारत में एलपीजी की जरूरत को गैस सिलेंडरों की संख्या के आधार पर समझना आसान है। यदि हर सिलेंडर का वजन औसतन 14.2 किलोग्राम माना जाए और इसमें घरेलू तथा कमर्शियल दोनों तरह के सिलेंडरों की खपत शामिल की जाए, तो देश में हर महीने लगभग 17 से 18 करोड़ गैस सिलेंडरों के बराबर एलपीजी की जरूरत होती है। इसके मुकाबले देश में उत्पादन केवल 7 से 8 करोड़ सिलेंडरों के बराबर ही हो पाता है। यानी बाकी 10 से 11 करोड़ सिलेंडर के बराबर एलपीजी भारत को हर महीने आयात करनी पड़ती है।

भारत की एलपीजी आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और वह भी अधिकतर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के रास्ते से। इस मार्ग से गैस के जहाज आमतौर पर 5 से 6 दिन में भारत पहुंच जाते हैं। लेकिन जब यह रास्ता बंद हो जाता है तो स्थिति मुश्किल हो जाती है। अब भारत को अमेरिका जैसे दूर के देशों से एलपीजी मंगानी पड़ रही है।

वहां से गैस के जहाजों को भारत पहुंचने में 25 से 30 दिन तक का समय लग सकता है। इसी कारण स्थिति संवेदनशील बन गई है। देश में एलपीजी का भंडार केवल लगभग एक महीने के उपयोग के बराबर है। यही वजह है कि कई जगह गैस सिलेंडर के लिए लाइनें लग रही हैं। सरकार फिलहाल कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई में कटौती कर रही है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की उपलब्धता बनी रहे।

( यह लेखक के निजी विचार हैं )


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