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Times Now के राहुल शिवशंकर ने उठाया ऐसा अहम मुद्दा, जिस पर जरूरी थी बात
ऐसे वक्त में जब तमाम वरिष्ठ पत्रकारों ने खुद को केवल जेएनयू हिंसा तक सीमित कर रखा है, ‘टाइम्स नाउ’ के एडिटर-इन-चीफ राहुल शिवशंकर ने एक ऐसा मुद्दा उठाया है, जिस पर गंभीरता से बात करना बेहद जरूरी है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो 6 years ago
ऐसे वक्त में जब तमाम वरिष्ठ पत्रकारों ने खुद को केवल जेएनयू हिंसा तक सीमित कर रखा है, ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) के एडिटर-इन-चीफ राहुल शिवशंकर ने एक ऐसा मुद्दा उठाया है, जिस पर गंभीरता से बात करना बेहद जरूरी है। अपने शो ‘इंडिया अप फ्रंट’ में राहुल ने 2016 के चर्चित हिट एंड रन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाये जबकि अधिकांश पत्रकार कोर्ट से जुड़े फैसलों पर सीधी प्रतिक्रिया से बचते हैं।
दरअसल, शीर्ष अदालत ने सिद्धार्थ शर्मा को अपनी मर्सडीज से कुचलने वाले को इस आधार पर जेल भेजने से इनकार कर दिया, क्योंकि हादसे के वक्त उसकी उम्र 18 से महज चार दिन कम थी। जायज है अदालत ने कानून के आधार पर सजा सुनाई, लेकिन पीड़ित परिवार को उम्मीद थी कि कोर्ट इसे गंभीर अपराध मानते हुए कोई उदाहरण पेश करेगा। पीड़ित परिवार के इस दर्द को राहुल शिवशंकर ने अपने शो में शामिल किया। उन्होंने बेहद तल्ख शब्दों में कहा कि ‘32 वर्षीय सिद्धार्थ शर्मा को कुचलने वाली मर्सडीज जब कैमरे में कैद हुई तो लगा कि आरोपित ड्राइवर को जेल जाना होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि वह 18 का होने से महज 4 से दिन छोटा था।’
राहुल ने सवाल उठाया कि जब आरोपित नाबालिग होते हुए मर्सडीज चला सकता है, यह जानते हुए कि परिणाम क्या होंगे कार तेज रफ्तार में भगा सकता है, अपनी लापरवाही के चलते किसी की जान ले सकता है, तो क्या उसे जेल नहीं भेजा जाना चाहिए? उन्होंने आगे कहा ‘हम क्या मानें कि 16-17 साल के युवाओं को अपने दोस्तों को प्रभावित करने के लिए कार चलाने की इजाजत दे देनी चाहिए। उन्हें लोगों को कुचलने देना चाहिए, यह बेहद शर्मनाक है।’
राहुल शिवशंकर के चहरे पर फैसले की टीस साफ नजर आ रही थी, जो कि स्वाभाविक है। लेकिन उन्होंने बेवजह का माहौल निर्मित करने के बजाय केवल वही सवाल उठाये, जो कि उठाये जाने चाहिए। राहुल की यही खूबी उन्हें दूसरों से अलग करती है। वह तिल का ताड़ बनाने या ऑन स्क्रीन भावुक होकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने में विश्वास नहीं रखते। वह केवल उतना ही कहते हैं जो एक शो को सार्थक बनाने के लिए जरूरी है।
राहुल ने ‘इंडिया अप फ्रंट’ में यह सवाल भी उठाया कि आरोपित पर पहले भी तीन बार ओवरस्पीडिंग के लिए जुर्माना लगाया जा चुका था। इसके बावजूद वह ड्राइव करता रहा, तो उसे बालिग क्यों न माना जाए? बता दें कि जुवेनाइल बोर्ड ने यह कहते हुए किशोर पर बालिग की तरह मुकदमा चलाने का निर्णय लिया था कि किशोर को अपने कृत्य से होने वाले खतरों के बारे में भलीभांति जानकारी थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
राहुल शिवशंकर ने जिस तरह से इस मुद्दे को अपनी आवाज दी है, वह तारीफ के काबिल है। वरना शायद जेएनयू हिंसा और राजनीतिक उठा-पठक की खबरों के बीच इसे अनसुना कर दिया गया होता। पत्रकार का काम केवल सुर्खियां बंटोर रहे मुद्दों को ही कवर करना नहीं होता, बल्कि ऐसे मुद्दों को भी सामने लाना होता है जो सुर्खियों में नहीं हैं और ‘टाइम्स नाउ’ के एडिटर-इन-चीफ इस काम को बखूबी कर रहे हैं।
‘टाइम्स नाउ’ ने 2017 में राहुल शिवशंकर को एडिटर-इन-चीफ की जिम्मेदारी सौंपी थी। करीब दो दशक पहले ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में बतौर बीट रिपोर्टर अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले शिवशंकर ‘न्यूजएक्स’ (NewsX) में एडिटर-इन-चीफ, ‘हेडलाइंस टुडे’ (टीवी टुडे नेटवर्क) में एग्जिक्यूटिव एडिटर और ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) में सीनियर एडिटर भी रह चुके हैं।
राहुल शिवशंकर का शो ‘इंडिया अप फ्रंट’ (India Upfront) आप यहां देख सकते हैं:
#JusticeForSiddhartha | TIMES NOW speaks to Siddhartha's sister Shilpa Mittal on Supreme Court's order on the hit & run case.
— TIMES NOW (@TimesNow) January 9, 2020
Listen in. | INDIA UPFRONT with Rahul Shivshankar. pic.twitter.com/jacprd4X2p
टैग्स राहुल शिवशंकर जेएनयू हिट एंड रन केस मर्सिडीज कांड