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फिल्म सर्टिफिकेशन की ‘प्रायोरिटी स्कीम’ बंद करने की तैयारी, सरकार ने मांगे सुझाव
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी ‘प्रायोरिटी स्कीम’ को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 hour ago
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म सर्टिफिकेशन से जुड़ी ‘प्रायोरिटी स्कीम’ को खत्म करने का प्रस्ताव रखा है। हाल ही में जारी पब्लिक नोटिस में मंत्रालय ने कहा कि वह Cinematograph (Certification) Rules, 2024 में बदलाव पर विचार कर रहा है। इस बदलाव के तहत वह प्रावधान हटाया जा सकता है, जिसके जरिए अतिरिक्त फीस देकर फिल्मों को जल्दी सर्टिफिकेट मिल जाता है।
सरकार का कहना है कि यह प्रायोरिटी स्कीम शुरुआत में सिर्फ इमरजेंसी या बेहद जरूरी मामलों के लिए लाई गई थी। लेकिन अब इसका इस्तेमाल आम तौर पर होने लगा है। इससे सर्टिफिकेशन की सामान्य प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और देरी भी बढ़ रही है। मंत्रालय का मानना है कि इससे सिस्टम में असंतुलन पैदा हो गया है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि ज्यादा फीस देकर जल्दी सर्टिफिकेट लेने की सुविधा से दो तरह का सिस्टम बन रहा है। जिन निर्माताओं के पास ज्यादा पैसा है, वे जल्दी मंजूरी हासिल कर लेते हैं, जबकि छोटे और स्वतंत्र फिल्मकारों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में बराबरी और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस स्कीम को बंद करना जरूरी माना जा रहा है।
प्रस्तावित बदलावों के तहत नियम 33(2) को हटाया जाएगा, जिसमें तीन गुना परीक्षा शुल्क देकर प्रायोरिटी स्क्रीनिंग की अनुमति थी। साथ ही नियम 37(3) में वह प्रावधान भी खत्म किया जाएगा, जिसके तहत क्षेत्रीय अधिकारी प्रायोरिटी आवेदन के आधार पर फिल्मों की जांच का क्रम बदल सकते थे।
मंत्रालय ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों और आम जनता से 17 मार्च 2026 तक ईमेल के जरिए सुझाव मांगे हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम से फिल्म सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया ज्यादा निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित हो सकेगी, ताकि सभी फिल्मकारों को बराबर मौका मिले।
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