FAST यानी विज्ञापन-आधारित मुफ्त स्ट्रीमिंग टीवी, यानी एक ऐसी व्यवस्था जहां दर्शक बिना कोई शुल्क दिए कंटेंट देखते हैं और बदले में विज्ञापनदाता उन तक पहुंचने के लिए पैसे देते हैं।
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Vikas Saxena
कल्पना करें कि आप बिना किसी सदस्यता शुल्क के, बिना एक रुपया खर्च किए, अपने स्मार्ट टीवी पर NDTV, Zee News, B4U, Shemaroo या Times Now देख रहे हैं और यह सब बिल्कुल मुफ्त है। बस बीच-बीच में कुछ विज्ञापन आते हैं। यह कोई भविष्य की बात नहीं है यह आज की हकीकत है और इसे ही FAST कहते हैं।
FAST यानी विज्ञापन-आधारित मुफ्त स्ट्रीमिंग टीवी, यानी एक ऐसी व्यवस्था जहां दर्शक बिना कोई शुल्क दिए कंटेंट देखते हैं और बदले में विज्ञापनदाता उन तक पहुंचने के लिए पैसे देते हैं। जो काम केबल टीवी ने दशकों पहले किया था, वही काम FAST अब इंटरनेट पर डिजिटल तरीके से कर रहा है और भारत में यह क्षेत्र अब किसी प्रयोग की अवस्था से निकलकर एक बड़े अवसर के रूप में उभर रहा है।
FAST का वैश्विक बाजार: 12.23 अरब डॉलर का साम्राज्य
FAST Channels TV की 2026 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक FAST बाजार 2025 के करीब 10.6 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में 12.23 अरब डॉलर हो गया है। और 2035 तक यह 41 अरब डॉलर को पार कर जाएगा- यानी अगले एक दशक में तीन गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी। एशिया-प्रशांत क्षेत्र इस पूरी कहानी का सबसे रोमांचक अध्याय है। यहां का FAST बाजार 15.2 से 16.5% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ रहा है और 2033 तक 38.77 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। और इस पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे तेज दौड़ने वाला देश है- भारत।
भारत: 12.92 करोड़ इंटरनेट टीवी दर्शक और एक बड़ी छलांग
भारत में इंटरनेट से जुड़े टीवी का विस्तार किसी धमाके से कम नहीं रहा है। apprupt.com की ताजा 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अभी 12.92 करोड़ सक्रिय इंटरनेट टीवी दर्शक हैं और यह संख्या पिछले साल की तुलना में 85% की बढ़ोतरी दर्ज करती है। इसे और आसान भाषा में समझें- 6 से 7 करोड़ घरों में इंटरनेट टीवी पहुंच चुका है, जिनमें 2025 में अकेले 3.5 करोड़ से ज्यादा नए दर्शक जुड़े।
एक और अहम बात- भारत के 55% से ज्यादा इंटरनेट टीवी दर्शक अब छोटे शहरों और कस्बों (10 लाख से कम आबादी वाले) से हैं। यानी FAST सिर्फ महानगरों का खेल नहीं है- यह छोटे और मझोले शहरी भारत में तेजी से पैर पसार रहा है। WPP मीडिया की वार्षिक विज्ञापन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंटरनेट टीवी विज्ञापन आय 2026 में ₹8,000 करोड़ (1 अरब डॉलर) तक पहुंचने का अनुमान है, जो 2025 की तुलना में 22% की वृद्धि है। यह कुल टीवी और डिजिटल वीडियो विज्ञापन खर्च का 17% हिस्सा होगा।
Amagi: भारत की FAST ताकत जो दुनिया को चला रही है
FAST की इस पूरी कहानी में एक भारतीय नाम केंद्र में है- Amagi Media Labs। बेंगलुरु में स्थापित यह कंपनी आज विश्व स्तर पर FAST चैनल डिस्ट्रीब्यूशन की रीढ़ बन चुकी है। Amagi के मार्च 2026 की Airtime रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर 2025 की तिमाही में वैश्विक FAST देखने के घंटे साल-दर-साल 21% बढ़े, जबकि विज्ञापन प्रदर्शनों में 27% की वृद्धि हुई। यह विश्लेषण Amagi के THUNDERSTORM मंच पर लगभग 4,200 FAST चैनल डिस्ट्रीब्यूशंस के आधार पर किया गया है।
Amagi की वित्तीय स्थिति देखें तो तस्वीर और भी साफ हो जाती है। 21 जनवरी 2026 को Amagi BSE और NSE पर सूचीबद्ध हुई- यह किसी क्लाउड-आधारित सॉफ्टवेयर सेवा कंपनी का पहला ऐसा शेयर बाजार में प्रवेश था जो शुरू से अंत तक प्रसारण और स्ट्रीमिंग समाधान देती हो। इस सार्वजनिक शेयर निर्गम से ₹1,789 करोड़ जुटाए गए। वित्त वर्ष 2024-25 में Amagi का परिचालन राजस्व ₹1,162 करोड़ (~13.7 करोड़ डॉलर) रहा- जिसमें स्ट्रीमिंग एकीकरण विभाग का हिस्सा 57% था। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 30% राजस्व वृद्धि के साथ आय ₹1,109 करोड़ तक पहुंची और समायोजित परिचालन लाभ 10 गुना से ज्यादा बढ़ा। Amagi अभी 5,000 से अधिक FAST चैनलों को 50 से ज्यादा FAST मंचों तक पहुंचा रही है। भारत में इसके कंटेंट सहयोगियों में Shemaroo, B4U, ZEE5, Atrangii और Swastik Stories जैसे नाम शामिल हैं
TRAI का कदम: नियमन की नई शुरुआत
FAST चैनलों की इस तेज रफ्तार पर अब सरकार की नजर भी पड़ी है। 6 अप्रैल 2026 को, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक परामर्श पत्र जारी किया- ऐप-आधारित रैखिक टेलीविजन डिस्ट्रीब्यूशन सेवाओं के लिए नियामक ढांचा बनाने हेतु। इसमें FAST चैनल एक प्रमुख हिस्सा हैं।
यह कदम सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की दिसंबर 2025 की अनुरोध के बाद आया, जिसमें TRAI को FAST सेवाओं की जांच करने और एक नियामक ढांचे की सिफारिश करने को कहा गया था। TRAI ने सभी पक्षों को अपनी राय देने के लिए 4 मई 2026 तक और प्रति-टिप्पणियों के लिए 18 मई 2026 तक का समय दिया है।
TRAI ने परामर्श पत्र में जो मुख्य मुद्दे उठाए हैं, वे महत्वपूर्ण हैं। पहला- नियामक असंतुलन: FAST मंच वैसी ही सेवाएं दे रहे हैं जैसी केबल, DTH और IPTV देते हैं, लेकिन बिना किसी लाइसेंस, कंटेंट संहिता या शुल्क नियमों के। दूसरा- मूल्य समानता: कुछ सशुल्क टीवी चैनल FAST मंचों पर मुफ्त उपलब्ध हो रहे हैं, जो बाजार संतुलन को प्रभावित करता है। तीसरा- कंटेंट जवाबदेही: कार्यक्रम और विज्ञापन संहिता का पालन सुनिश्चित करना। चौथा- दर्शक मापन: FAST दर्शक संख्या को टीवी रेटिंग प्रणाली में शामिल करना।
TRAI ने साफ तौर पर कहा है कि ये सेवाएं परंपरागत प्रसारण और इंटरनेट-आधारित सेवाओं के बीच की स्थिति में हैं- और इन्हें एक स्पष्ट नियामक ढांचे की जरूरत है।
आय का तरीका: FAST कैसे कमाता है?
FAST का व्यापार मॉडल बेहद सरल है- विज्ञापन-आधारित मुफ्त कंटेंट। दर्शक को कुछ नहीं देना, बस विज्ञापन देखने होते हैं। विज्ञापनदाता इन लक्षित विज्ञापनों के लिए भुगतान करते हैं। Samsung Ads India और Verve की रिपोर्ट बताती है कि 81% भारतीय मुफ्त कंटेंट के बदले विज्ञापन देखने को तैयार हैं। और इंटरनेट टीवी पर विज्ञापनों की गुणवत्ता भी बेहतर है- 80% दर्शक प्रासंगिक विज्ञापन देखना पसंद करते हैं क्योंकि ये छोटे, अधिक आकर्षक और कम बाधाकारी होते हैं।
Amagi के भारत-विशिष्ट आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में FAST चैनलों पर देखने के घंटों में 63.3% और विज्ञापन प्रदर्शनों में 77% की लगातार वृद्धि रही है। FAST का आय मॉडल पारंपरिक प्रसारण से बेहतर क्यों है? पहली वजह- लक्षित विज्ञापन: डिजिटल माध्यम से विज्ञापनदाता विशेष दर्शक वर्गों को निशाना बना सकते हैं, जो केबल टीवी में संभव नहीं था। दूसरी वजह- कम प्रवेश बाधा: एक छोटा ब्रैंड भी इंटरनेट टीवी पर लक्षित अभियान चला सकता है, जो पारंपरिक टीवी पर बेहद महंगा था। तीसरी वजह- मापनीय प्रतिफल: हर विज्ञापन प्रदर्शन, क्लिक और दर्शक जुड़ाव मापा जा सकता है।
ब्रैंड क्यों FAST की तरफ आ रहे हैं?
भारत में पारंपरिक लीनियर (केबल और सैटेलाइट) धीरे-धीरे अपनी पकड़ खो रहा है। TAM AdEx की 2025 टीवी समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, लीनियर विज्ञापन मात्रा में साल-दर-साल करीब 10% की गिरावट आई है। रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनियां जैसे बड़े विज्ञापनदाता भी अब अपना बजट बदल रहे हैं।
इंटरनेट टीवी और FAST की तरफ रुख़ करने के पीछे तीन बड़े कारण हैं। पहला- केबल से मुक्ति की प्रवृत्ति: Ormax की 2025 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 23% इंटरनेट यूजर्स अब केवल स्ट्रीमिंग देखते हैं और लीनियर नहीं देखते- यह केबल छोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति का सबसे ताजा संकेत है। दूसरा- उच्च-गुणवत्ता दर्शक वर्ग: इंटरनेट टीवी दर्शक आमतौर पर अधिक आय वाले और अधिक जुड़ाव वाले होते हैं। तीसरा- डिजिटल जवाबदेही: इंटरनेट टीवी विज्ञापन "बड़े पर्दे का अनुभव" देने के साथ-साथ "डिजिटल की मापनीयता" भी देता है।
Samsung TV Plus के भारत में मासिक सक्रिय यूजर्सओं में 71% सालाना वृद्धि हुई है, और औसत देखने के समय में 240% की बढ़ोतरी देखी गई है- यह दर्शाता है कि एक बार जो दर्शक FAST से जुड़ता है, वह लंबे समय तक बना रहता है।
भारत में FAST का परिदृश्य: कौन-कौन खेल रहा है?
भारत के FAST क्षेत्र में अभी कई खिलाड़ी सक्रिय हैं। Samsung TV Plus भारत में 134 से अधिक चैनल उपलब्ध कराता है- जिनमें Zee News, Zee Business, ABP News, Times Now Navbharat जैसे बड़े नाम शामिल हैं। LG Channels पर करीब 100 चैनल हैं। ZEE5 ने अगस्त 2025 में LG Channels पर 5 FAST चैनल शुरू किए। Atrangii ने LG और Xiaomi के स्मार्ट टीवी पर जुलाई 2025 में FAST चैनल उतारे- यह पहला भारतीय OTT ब्रैंड था जिसने LG के FAST परिदृश्य पर हिंदी मनोरंजन चैनल शुरू किया। कंटेंट के लिहाज से देखें तो NDTV, Republic, Zee News, Times Now, ABP News, ETV Network, B4U और Shemaroo जैसे बड़े मीडिया घराने पहले से FAST मंचों पर मौजूद हैं।
चुनौतियां:
FAST का उभार जितना उत्साहजनक है, उतनी ही कुछ चुनौतियां भी हैं। बाजार का बिखराव एक बड़ी समस्या है- इतने सारे मंचों और चैनलों के बीच कोई एकीकृत दर्शक मापन प्रणाली नहीं है। विज्ञापनदाताओं को अभी भी निवेश पर प्रतिफल मापने में दिक्कत होती है। कंटेंट की गुणवत्ता का सवाल भी उठता है- मुफ्त कंटेंट की बाढ़ में स्तर बनाए रखना मुश्किल है। विज्ञापन भार की चुनौती भी है- बहुत ज्यादा विज्ञापन दर्शक का अनुभव खराब कर सकते हैं। TRAI का यह नया परामर्श पत्र इन्हीं कुछ चुनौतियों को सुलझाने की कोशिश है।
भारत के लिए FAST का अवसर
FAST चैनलों की कहानी भारत के लिए एक बड़े अवसर की कहानी है- उन 55 करोड़ से ज्यादा डिजिटल वीडियो दर्शकों के लिए जो सही कंटेंट, सही भाषा में और बिना सदस्यता शुल्क के चाहते हैं। 12.23 अरब डॉलर का वैश्विक FAST बाजार, भारत में ₹8,000 करोड़ का इंटरनेट टीवी विज्ञापन खर्च, Amagi जैसी भारतीय कंपनी का वैश्विक नेतृत्व और TRAI का नया नियामक ढांचा- ये सब मिलकर एक संकेत दे रहे हैं कि FAST अब भारत में मुख्यधारा बन रहा है। जैसे-जैसे स्मार्ट टीवी सस्ते होंगे, इंटरनेट और गहरे जाएगा, और क्षेत्रीय कंटेंट की मांग बढ़ेगी- FAST चैनलों का विस्तार अपरिहार्य है। सवाल सिर्फ यह है कि इस नए मैदान में कौन पहले मजबूत जगह बना लेता है।
‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) ने भारत A, श्रीलंका A और अफगानिस्तान A के बीच होने वाली त्रिकोणीय सीरीज के टीवी और डिजिटल प्रसारण अधिकार हासिल कर लिए हैं।
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Samachar4media Bureau
‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) ने भारत A, श्रीलंका A और अफगानिस्तान A के बीच होने वाली त्रिकोणीय क्रिकेट सीरीज के टेलीविज़न और डिजिटल प्रसारण अधिकार हासिल कर लिए हैं।
यह टूर्नामेंट 9 जून से 21 जून तक श्रीलंका में खेला जाएगा। भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, मालदीव और श्रीलंका में दर्शक मुकाबलों का सीधा प्रसारण ‘सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क’ (Sony Sports Network) और ‘सोनी LIV’ (Sony LIV) पर देख सकेंगे। सभी मैच भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगु और कन्नड़ कमेंट्री के साथ प्रसारित किए जाएंगे।
इस प्रतियोगिता में कई उभरते क्रिकेटरों पर नजर रहेगी। इनमें वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) सबसे चर्चित नाम हैं, जिन्हें पहली बार भारत A की एकदिवसीय टीम में जगह मिली है। इसके अलावा प्रियांश आर्य (Priyansh Arya), आयुष बडोनी (Ayush Badoni) और सूर्यांश शेडगे (Suryansh Shedge) भी टीम का हिस्सा हैं।
भारत A टीम की कप्तानी तिलक वर्मा (Tilak Varma) करेंगे, जबकि रुतुराज गायकवाड़ (Ruturaj Gaikwad) उपकप्तान की भूमिका निभाएंगे। टीम में निशांत सिंधु, प्रभसिमरन सिंह, कुमार कुशाग्र, विप्रज निगम, यश ठाकुर, युधवीर सिंह, अंशुल कंबोज, अरशद खान और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं।
‘सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया’ (Sony Pictures Networks India) के स्पोर्ट्स बिजनेस प्रमुख और वितरण व अंतरराष्ट्रीय कारोबार के मुख्य राजस्व अधिकारी राजेश कौल (Rajesh Kaul) ने कहा कि यह सीरीज क्षेत्र के उभरते क्रिकेटरों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित होगी। उन्होंने वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का नया आकर्षण बताया।
‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर व न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे।
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Samachar4media Bureau
देश के प्रमुख न्यूज नेटवर्क्स में शामिल ‘टाइम्स नेटवर्क’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ नवभारत’ में कंसल्टिंग एडिटर और लोकप्रिय न्यूज एंकर की भूमिका निभा रहे सुशांत सिन्हा अब 'न्यूज18 इंडिया' पर नजर आएंगे। उन्होंने 'नेटवर्क18' समूह जॉइन कर लिया है।
दरअसल, 'समाचार4मीडिया' ने ही विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से सबसे पहले खबर दी थी कि ‘टाइम्स नेटवर्क’ से विदाई तय मानी जा रही है, क्योंकि सुशांत सिन्हा का इस चैनल के साथ कॉन्ट्रैक्ट 31 मई 2026 को समाप्त हो रहा है और नेटवर्क रिन्यू करने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों ने तो यहां तक कह दिया था कि वह जल्द ही ‘नेटवर्क18’ के साथ नई पारी शुरू करने जा रहे हैं और अब इस पर आधिकारिक मुहर लग गई है। सुशांत सिन्हा ने एक प्रोमो जारी किया है।
"आ रहा हूं BOSS.... तैयार रहिएगा"
— News18 India (@News18India) June 5, 2026
सुशांत सिन्हा News18 India पर#News18India | @SushantBSinha pic.twitter.com/pAPlhjO9M2
इस खबर से 'समाचार4मीडिया' ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पाठकों का भरोसा उस पर क्यों है। दरअसल, यहां ये बताना जरूरी हो जाता है कि 'समाचार4मीडिया' की ही खबरों को कई वेबसाइट अपने प्लेटफॉर्म पर पब्लिश करती हैं।
यहां पढ़ें पुरानी खबर- टाइम्स नेटवर्क से सुशांत सिन्हा की विदाई तय, Network18 जाने की तैयारी!
गौरतलब है कि सुशांत सिन्हा हिंदी न्यूज इंडस्ट्री का एक जाना-माना चेहरा हैं। टाइम्स नाउ नवभारत पर ‘पाठशाला’ और ‘राष्ट्रगर्व’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए उन्होंने खास पहचान बनाई। करीब दो दशक के करियर में वह इंडिया टीवी, एनडीटीवी इंडिया, न्यूज24 और इंडिया न्यूज जैसे संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।
गौरव मीडिया, ब्रैंडेड कंटेंट, सेल्स, ग्रोथ स्ट्रैटेजी और कस्टम मार्केटिंग के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।
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'एनडीटीवी' (NDTV) ने गौरव मेहरा को एनडीटीवी हिंदी व रीजनल चैनल्स के ब्रैंड स्टूडियो का रेवेन्यू हेड नियुक्त किया है। गौरव मीडिया, ब्रैंडेड कंटेंट, सेल्स, ग्रोथ स्ट्रैटेजी और कस्टम मार्केटिंग के क्षेत्र में दो दशक से अधिक का अनुभव रखते हैं।
गौरव मेहरा NDTV में TV9 नेटवर्क से जुड़े हैं, जहां वे नेशनल हेड व वाइस प्रेजिडेंट के पद पर कार्यरत थे। इस भूमिका में उन्होंने ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट आधारित ग्रोथ को नेतृत्व दिया। इससे पहले वे नेटवर्क18 ग्रुप, जी एंटरटेनमेंट, रिलायंस ब्रॉडकास्ट नेटवर्क, CNBC-TV18, Idea Cellular और Vodafone India जैसी प्रमुख कंपनियों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं।
अमृतसर के DAV कॉलेज और Faculty of Management Studies (FMS) के पूर्व छात्र गौरव मेहरा ने अपने करियर के दौरान कई सफल ब्रैंडेड कंटेंट बिजनेस तैयार किए और उन्हें बड़े स्तर तक पहुंचाया। उन्होंने इंटीग्रेटेड कैंपेन, उद्देश्यपूर्ण स्टोरीटेलिंग, एडिटोरियल इंटीग्रेशन, डिजिटल, इन्फ्लुएंसर और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशंस के जरिए मजबूत रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की है।
उनके प्रमुख कैंपेंस में Castrol Super Mechanic Contest, Mahindra Unlimit Bharat, Sensodyne Oral Health Awareness, Samsung Campaigns, Castrol Pragati Ki Paathshaala और Ultratech Baat Ghar Ki जैसे चर्चित प्रोजेक्ट शामिल हैं।
इस नियुक्ति पर NDTV के CEO और Editor-in-Chief Rahul Kanwal ने कहा, “गौरव के पास ब्रैंड्स, बाजार और कंटेंट आधारित रेवेन्यू मॉडल की गहरी समझ है। NDTV अपने हिंदी और क्षेत्रीय नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और ऐसे समय में स्केलेबल ब्रैंड सॉल्यूशंस और मजबूत साझेदारियां बनाने का उनका अनुभव हमारी ग्रोथ जर्नी को नई ताकत देगा।”
NDTV के Chief Experiences Officer Rahul Shaw ने कहा, “गौरव की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि हम ऐसे रेवेन्यू लीडर्स को टीम में शामिल कर रहे हैं जो बाजार की समझ के साथ सहयोग, रचनात्मकता और बेहतरीन निष्पादन की क्षमता रखते हैं। हम उनका स्वागत करते हैं और Brand Studio बिजनेस में उनके योगदान को लेकर उत्साहित हैं।”
अपनी नई जिम्मेदारी पर Gaurav Mehrraa ने कहा, “NDTV भारत के सबसे सम्मानित और विश्वसनीय मीडिया ब्रैंड्स में से एक है, जिसकी मजबूत मौजूदगी कई भाषाओं और प्लेटफॉर्म्स पर है। मैं टीम से जुड़कर बेहद उत्साहित हूं और ऐसे ब्रैंड सॉल्यूशंस विकसित करना चाहता हूं जो भरोसे, प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग और मापने योग्य परिणामों का बेहतरीन संयोजन पेश करें।”
राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Ltd) के शेयरों में हाल में आई तेज कीमतों की हलचल को लेकर स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था।
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Vikas Saxena
राज टेलीविजन नेटवर्क (Raj Television Network Ltd) के शेयरों में हाल में आई तेज कीमतों की हलचल को लेकर स्टॉक एक्सचेंज ने कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाजार को ताजा व प्रासंगिक जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक्सचेंज ने 3 जून 2026 को कंपनी को यह नोटिस भेजा था।
इस संबंध में कंपनी ने 4 जून 2026 को BSE और NSE को अपना जवाब भेज दिया है।
कंपनी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उसके शेयरों में जो भी कीमतों का उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, वह पूरी तरह से बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की गतिविधियों पर आधारित है। कंपनी प्रबंधन का इस मूल्य परिवर्तन पर कोई नियंत्रण नहीं है और न ही उसे शेयर कीमतों में आई इस महत्वपूर्ण तेजी या गिरावट के पीछे किसी विशेष कारण की जानकारी है।
Raj Television Network ने यह भी स्पष्ट किया कि वह SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशन एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशंस, 2015 के रेगुलेशन 30 और स्टॉक एक्सचेंजों के साथ हुए समझौतों के तहत सभी जरूरी जानकारियों का समय-समय पर खुलासा करती रही है और आगे भी करती रहेगी।
नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले डाटा रिलीज से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।
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‘सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय’ (MIB) ने न्यूज चैनलों की टेलीविज़न ऑडियंस रेटिंग्स पर लगी रोक को चार हफ्तों के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले से ब्रॉडकास्टर्स, एडवर्टाइजर्स और मीडिया प्लानर्स के बीच अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि पूरा सेक्टर वीकली व्यूअरशिप डेटा पर काफी हद तक निर्भर करता है।
‘ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल इंडिया’ (BARC India) ने सोमवार को अपने सब्सक्राइबर्स को भेजे गए कम्युनिकेशन में इस फैसले की जानकारी दी।
BARC India के मुताबिक उसे मंत्रालय की ओर से नया निर्देश मिला है, जिसमें कहा गया है कि TV न्यूज चैनलों की रेटिंग्स रिपोर्टिंग को अगले चार हफ्तों तक या अगले आदेश तक रोके रखा जाए। नई रोक 4 जून 2026 को जारी होने वाले data release से लागू होगी। यह टेलीविज़न मेज़रमेंट कैलेंडर के Week 21 से जुड़ा डेटा था, जो 23 मई से 29 मई 2026 की अवधि को कवर करता है।
इससे पहले मई में भी मंत्रालय ने रेटिंग्स रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का आदेश दिया था। अब नई अवधि बढ़ने के बाद न्यूज ब्रॉडकास्टिंग सेक्टर में ratings दोबारा शुरू होने को लेकर इंतजार और लंबा हो गया है।
TV न्यूज रेटिंग्स एडवर्टाइजर्स और मीडिया एजेंसीज़ के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर एडवर्टाइजिंग स्पेंड्स और कैंपेन प्लानिंग तय की जाती है।
प्रसार भारती ने अपनी फ्री-टू-एयर डीटीएच सेवा 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) पर खाली पड़े MPEG-4 कैरिज स्लॉट्स के लिए आयोजित 99वीं ई-नीलामी (e-auction) के नतीजों की घोषणा कर दी है।
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Samachar4media Bureau
प्रसार भारती ने अपनी फ्री-टू-एयर डीटीएच सेवा 'डीडी फ्री डिश' (DD Free Dish) पर खाली पड़े MPEG-4 कैरिज स्लॉट्स के लिए आयोजित 99वीं ई-नीलामी (e-auction) के नतीजों की घोषणा कर दी है। इस नीलामी में 10 टीवी चैनलों को स्लॉट आवंटित किए गए हैं।
सफल बोली लगाने वाले चैनलों में Republic TV, Bharat Express, Vistaar News, Nation 27, News India 24X7, R. Bangla, Living India News, Prag News, Rengoni और NE News शामिल हैं।
प्रसार भारती के अनुसार, इन नए स्लॉट्स का संचालन 5 जून 2026 से शुरू होगा और ये 31 मार्च 2027 तक वैध रहेंगे।
यह मध्य-वर्षीय (Mid-Year) ई-नीलामी, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले आयोजित 97वीं ई-नीलामी के बाद की गई है। उस नीलामी में पूरे साल के लिए 39 स्लॉट्स आवंटित किए गए थे। अप्रैल के बाद कुछ स्लॉट खाली हो जाने के कारण इन रिक्तियों को भरने के लिए 99वीं ई-नीलामी आयोजित की गई।
प्रसार भारती ने इस नीलामी के लिए 19 मई से 26 मई 2026 तक आवेदन आमंत्रित किए थे।
ई-नीलामी में उपलब्ध स्लॉट्स को विभिन्न कंटेंट श्रेणियों और क्षेत्रीय भाषा वर्गों में बांटा गया था, ताकि 'डीडी फ्री डिश' पर अलग-अलग भाषाओं और कंटेंट का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
इसके तहत G1 बकेट को न्यूज व करंट अफेयर्स (News & Current Affairs) वाले चैनलों के लिए रखा गया था, जिसकी आरक्षित कीमत 61.65 लाख रुपये तय की गई थी। वहीं G2 बकेट नॉन-न्यूज (Non-News) चैनलों के लिए था, जिसकी आरक्षित कीमत 60 लाख रुपये रखी गई थी।
क्षेत्रीय भाषा चैनलों के लिए भी अलग-अलग कैटेगरीज बनाई गई थीं। R1, R2 और R3 नाम के इन बकेट्स में दक्षिण भारतीय, पश्चिमी, पूर्वी और संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों को शामिल किया गया था।
इन क्षेत्रीय स्लॉट्स की आरक्षित कीमत 4.94 लाख रुपये से लेकर 34.83 लाख रुपये तक तय की गई थी।
प्रसार भारती का कहना है कि अलग-अलग स्तर की यह मूल्य निर्धारण व्यवस्था दर्शकों की मांग और विभिन्न क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय चैनलों की कमाई की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 'डीडी फ्री डिश' देश का सबसे बड़ा फ्री-टू-एयर टेलीविजन वितरण प्लेटफॉर्म माना जाता है और यहां स्लॉट हासिल करना प्रसारकों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से बड़ी राहत मिली है।
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Vikas Saxena
न्यू दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (NDTV) को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से बड़ी राहत मिली है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि SEBI ने 2009 में किए गए कुछ समझौतों और उनके खुलासों (Disclosure) से जुड़े मामले में चल रही जांच प्रक्रिया को बंद कर दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि कंपनी ने SEBI के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया और उस पर कोई आर्थिक जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।
NDTV ने 2 जून 2026 को बीएसई और एनएसई को भेजे गए अपने पत्र में बताया कि वह 27 जनवरी 2020 को किए गए अपने पुराने खुलासे का संदर्भ दे रही है। उस समय कंपनी ने जानकारी दी थी कि SEBI ने उसे एक शो-कॉज नोटिस जारी किया था। इस नोटिस में आरोप लगाया गया था कि कंपनी ने SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के Regulation 30 का पालन नहीं किया और 2009 में किए गए कुछ समझौतों से जुड़ी जानकारियों का उचित खुलासा नहीं किया।
कंपनी ने अब बताया है कि SEBI के एजुडिकेटिंग ऑफिसर (Adjudicating Officer) ने 29 मई 2026 को जारी अपने आदेश में इस मामले का निपटारा कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने शो-कॉज नोटिस में लगाए गए आरोपों के अनुसार SEBI के लिस्टिंग नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया है। इसलिए कंपनी के खिलाफ चल रही कार्रवाई को समाप्त कर दिया गया है और कोई आर्थिक दंड नहीं लगाया गया।
NDTV के अनुसार, यह आदेश Adjudication Order No. Order/JS/DP/2026-27/32428 के तहत 29 मई 2026 को पारित किया गया। कंपनी को यह आदेश 1 जून 2026 को प्राप्त हुआ।
क्या था मामला?
SEBI ने NDTV के खिलाफ यह कार्रवाई 2009 में हुए कुछ समझौतों के खुलासे को लेकर शुरू की थी। यह मामला VCPL (विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड), RRPR होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के तत्कालीन प्रमोटरों के बीच हुए कुछ समझौतों से जुड़ा था।
SEBI का आरोप था कि इन समझौतों से संबंधित जानकारी के खुलासे में Regulation 30 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया था और जांच प्रक्रिया शुरू की गई थी।
हालांकि, अब SEBI के एडजुडिकेटिंग ऑफिसर ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए वह खुलासा करने की बाध्यता (Disclosure Obligation) पैदा ही नहीं होती थी, जिसका उल्लेख शो-कॉज नोटिस में किया गया था। इसलिए कंपनी के खिलाफ चल रही एडजुडिकेशन प्रक्रिया को बिना किसी जुर्माने के समाप्त कर दिया गया।
कंपनी पर क्या होगा असर?
NDTV ने अपने खुलासे में साफ कहा है कि SEBI के इस आदेश का कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार, संचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। कंपनी पर किसी तरह का आर्थिक दंड नहीं लगाया गया है और न ही इस आदेश से उसके संचालन पर कोई असर पड़ेगा।
देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया
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Samachar4media Bureau
देश के टीवी इंडस्ट्री के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को TRAI यानी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उस नियम को सही ठहराया, जिसमें टीवी चैनलों पर हर घंटे सिर्फ 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई।
दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन शामिल थे, ने ब्रॉडकास्टर्स और इंडस्ट्री संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दीं। TRAI ने यह नियम साल 2013 में लागू किया था। इसके तहत किसी भी चैनल को एक घंटे में 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट अपने प्रमोशनल कंटेंट दिखाने की इजाजत है।
यह फैसला टीवी इंडस्ट्री, खासकर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर चैनलों पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है। पिछले कई सालों से कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव कवरेज के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं।
दरअसल, दिसंबर 2013 में हाई कोर्ट ने चैनलों को अस्थायी राहत देते हुए TRAI को सख्त कार्रवाई से रोक दिया था। तभी से यह मामला अदालत में लंबित था। अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि TRAI का नियम वैध है।
TRAI का कहना था कि जरूरत से ज्यादा विज्ञापन दर्शकों के देखने के अनुभव को खराब करते हैं और कार्यक्रमों की निरंतरता टूटती है। वहीं ब्रॉडकास्टर्स का तर्क था कि TRAI के पास विज्ञापनों की अवधि तय करने का अधिकार नहीं है। उनका यह भी कहना था कि अगर विज्ञापन समय घटा दिया गया, तो कई चैनलों के बिजनेस मॉडल पर असर पड़ेगा।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस फैसले के बाद चैनलों को अपनी प्रोग्रामिंग और कमाई की रणनीति बदलनी पड़ सकती है। विज्ञापन स्लॉट कम होने से चैनल प्रीमियम रेट बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि इससे विज्ञापनदाता डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की तरफ और तेजी से जा सकते हैं, जहां टारगेटेड और सस्ते विज्ञापन विकल्प मौजूद हैं।
मनोरंजन चैनल, मूवी चैनल और लाइव स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्ट करने वाले नेटवर्क्स को भी अब अपने एड शेड्यूल और इन्वेंट्री प्लानिंग में बदलाव करना पड़ सकता है। इंडस्ट्री अब कोर्ट के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रही है, जिससे यह साफ होगा कि नियम लागू करने का तरीका क्या होगा और लाइव इवेंट्स या स्पोर्ट्स प्रसारण को कोई छूट मिलेगी या नहीं।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब टीवी इंडस्ट्री पहले ही डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, सोशल मीडिया वीडियो और OTT से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में टीवी नेटवर्क्स सब्सक्रिप्शन, ब्रांडेड कंटेंट, स्पॉन्सरशिप और डिजिटल कारोबार पर ज्यादा फोकस कर सकते हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है।
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Samachar4media Bureau
दिल्ली हाई कोर्ट ने टीवी चैनलों पर विज्ञापनों की सीमा तय करने वाले TRAI के नियम को सही ठहराया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब टीवी चैनल एक घंटे में सिर्फ 12 मिनट ही विज्ञापन दिखा सकेंगे। इसमें 10 मिनट कमर्शियल विज्ञापन और 2 मिनट चैनल के खुद के प्रमोशनल कंटेंट के लिए होंगे।
इस फैसले के साथ ब्रॉडकास्टर्स और TRAI के बीच पिछले 13 साल से चल रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई है। हालांकि मीडिया इंडस्ट्री के कई खिलाड़ी अब इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।मीडिया इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर न्यूज चैनलों और फ्री-टू-एयर (FTA) चैनलों पर पड़ सकता है। वजह यह है कि इन चैनलों की कमाई का बड़ा हिस्सा विज्ञापनों से आता है।
दरअसल, कई न्यूज चैनल प्राइम टाइम डिबेट, चुनाव कवरेज, ब्रेकिंग न्यूज और लाइव इवेंट्स के दौरान तय सीमा से ज्यादा विज्ञापन दिखाते रहे हैं। अब 12 मिनट की सीमा लागू होने के बाद उनके पास बेचने के लिए कम विज्ञापन स्लॉट बचेंगे। इससे उनकी कमाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब चैनलों के सामने दो रास्ते होंगे। पहला, कम विज्ञापन स्लॉट होने की वजह से विज्ञापन दरें बढ़ाई जाएं। दूसरा, अपने बिजनेस मॉडल और प्रोग्रामिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव किया जाए। खासतौर पर हिंदी न्यूज चैनलों और रीजनल चैनलों पर ज्यादा दबाव बन सकता है, क्योंकि इन बाजारों में प्रतिस्पर्धा पहले से काफी ज्यादा है और सब्सक्रिप्शन से होने वाली कमाई सीमित है।
मीडिया एजेंसियों का मानना है कि इस फैसले के बाद टीवी विज्ञापनों की उपलब्धता कम हो जाएगी। ऐसे में प्राइम टाइम शो, बड़े एंटरटेनमेंट प्रोग्राम और लाइव स्पोर्ट्स के दौरान विज्ञापन स्लॉट की कीमतें बढ़ सकती हैं।
हालांकि विज्ञापनदाता ज्यादा महंगे टीवी विज्ञापन स्वीकार करेंगे या नहीं, यह बड़ा सवाल है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले ही ऐडवर्टाइजर्स को बेहतर टार्गेटिंग, पर्फॉमेंस ट्रैकिंग और फ्लैक्सिबल प्राइजिंग जैसे विकल्प दे रहे हैं। ऐसे में अगर टीवी चैनल विज्ञापन दरें बहुत ज्यादा बढ़ाते हैं, तो कई ब्रांड डिजिटल प्लेटफॉर्म की तरफ तेजी से शिफ्ट हो सकते हैं।
इंडस्ट्री के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला भारतीय टीवी ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री के बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव ला सकता है। आने वाले समय में चैनलों को कम विज्ञापनों में ज्यादा कमाई का नया रास्ता तलाशना पड़ सकता है।
मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है।
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Samachar4media Bureau
मुंबई में आयोजित Goafest ABBY Awards 2026 में Zee Entertainment Enterprises Ltd. ने एक बार फिर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कंपनी के मुताबिक, उसने लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ का खिताब अपने नाम किया।
इस साल Zee ने कुल 15 अवॉर्ड जीते, जिनमें 3 गोल्ड, 6 सिल्वर, 5 ब्रॉन्ज और 1 मेरिट अवॉर्ड शामिल हैं। कंपनी की इस उपलब्धि को टीवी और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उसकी मजबूत पकड़ और दर्शकों के बीच बढ़ती लोकप्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
Zee Kannada, Zee Bangla, Zee Marathi और Zee Cinema जैसे चैनलों ने अलग-अलग कैटेगरी में शानदार प्रदर्शन किया। Zee Kannada के शो ‘श्री राघवेंद्र महात्मे’ को ‘Best Launch of a TV Program Using Multi-Media’ कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड मिला। वहीं Zee Cinema पर ‘Pushpa 2: The Rule’ के वर्ल्ड टीवी प्रीमियर को भी दो अलग-अलग कैटेगरी में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।
कंपनी का कहना है कि बदलते मीडिया माहौल में भी उसका लीनियर टीवी नेटवर्क लगातार मजबूत बना हुआ है और दर्शकों के बीच उसकी पकड़ कायम है।
इस उपलब्धि पर Zee Entertainment Enterprises Ltd. के प्रवक्ता ने कहा कि लगातार चौथी बार ‘Broadcaster of the Year’ जीतना इस बात का सबूत है कि कंपनी लगातार ऐसा कंटेंट देने पर फोकस कर रही है, जो बड़े स्तर पर दर्शकों से जुड़ता है। उन्होंने कहा कि यह सफलता टीम और पार्टनर्स की मेहनत का नतीजा है, जो लगातार नई कहानियों और दमदार किरदारों के जरिए स्टोरीटेलिंग को नई पहचान दे रहे हैं।
कंपनी ने हाल के वर्षों में अपनी कंटेंट रणनीति को और मजबूत किया है। मजबूत किरदारों और भारतीय संस्कृति से जुड़े नए शो लॉन्च करने की वजह से Zee ने एंटरटेनमेंट नेटवर्क में अपनी पकड़ और मजबूत की है। कंपनी फिलहाल 17.4% मार्केट शेयर के साथ भारत का नंबर-2 एंटरटेनमेंट नेटवर्क बनी हुई है।
हिंदी, बांग्ला, ओड़िया और कन्नड़ बाजारों में Zee की मजबूत स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही Zee Cinema ने नए शो और बड़ी फिल्म प्रीमियर के दम पर दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई है।
ABBY Awards को देश के सबसे प्रतिष्ठित क्रिएटिव और मीडिया अवॉर्ड्स में गिना जाता है। इसमें देशभर की बड़ी एजेंसियां, मार्केटर्स और क्रिएटिव लीडर्स हिस्सा लेते हैं। ऐसे में लगातार चौथी बार यह सम्मान जीतना Zee के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।