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'UGC' के नए नियमों से सिर्फ दूरियाँ बढ़ेंगी: ऋचा अनिरुद्ध
दरअसल, UGC ने हाल ही में एक नए नियम जारी किए हैं, ताकि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में होने वाले जातिगत भेदभाव को रोका जा सके। इन नियमों को 13 जनवरी से लागू कर दिया गया है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के नए नियमों को लेकर बवाल खड़ा हो गया है। ये नियम जातिगत भेदभाव को रोकने के मकसद से लाए गए हैं। अब सवर्ण जाति के लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ पत्रकार ऋचा अनिरुद्ध का कहना है कि इस कानून का दुरूपयोग होने की संभावना अधिक है।
उन्होंने एक्स हैंडल से एक पोस्ट कर लिखा, क्या इस देश में किसी भी कानून का दुरुपयोग नहीं होता? क्या गारंटी है कि इसका नहीं होगा? जातिगत भेदभाव/शोषण कतई नहीं होना चाहिए। किसी का भी नहीं होना चाहिए। हर किसी को समान अधिकार,सम्मान मिले। कानून की नज़र में हर कोई बराबर हो लेकिन ये बराबरी झूठी शिकायतों को बढ़ावा देने से कैसे आएगी?
इससे तो सिर्फ दूरियाँ बढ़ेंगी और झूठी शिकायत करने वाले को सज़ा तक नहीं? इससे न्याय होगा? कतई नहीं। आपको बता दें, किसी संस्थान में किसी के साथ जातिगत भेदभाव होता है, तो वो अपनी शिकायत इक्विटी कमेटी को करेगा। कमेटी उसकी शिकायत पर 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करेगी और 15 दिन के भीतर संस्थान के प्रमुख को रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट के आधार पर संस्थान के प्रमुख 7 दिन में कार्रवाई करेंगे।
क्या इस देश में किसी भी कानून का दुरुपयोग नहीं होता? क्या गारंटी है कि इसका नहीं होगा? जातिगत भेदभाव/शोषण कतई नहीं होना चाहिए.. किसी का भी नहीं होना चाहिए..हर किसी को समान अधिकार,सम्मान मिले..कानून की नज़र में हर कोई बराबर हो.. लेकिन ये बराबरी झूठी शिकायतों को बढ़ावा देने से…
— richa anirudh (@richaanirudh) January 26, 2026
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