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कुछ लोगों को हिन्दू एकता रास नहीं आती: अमिताभ अग्निहोत्री
जनहित याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के Equity Rule का सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। 1 month ago
यूजीसी ने 13 जनवरी को एक नया नियम लागू किया है। इसका नाम है 'Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations 2026', इसको लेकर बवाल मचा हुआ है। सामान्य वर्ग यानी सवर्ण समाज इससे खासे खफा हैं। यूजीसी के इस नियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।
इस बीच वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स से एक पोस्ट कर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने लिखा, UGC के नए कानून से वे सबसे ज्यादा खुश हैं जिन्हें भारत में आकार लेती वृहद हिन्दू एकता रास नहीं आ रही थी। ऐसे तत्व देश के भीतर भी बहुत हैं और देश के पड़ोस में भी इसलिए खतरा बड़ा है ,इसे समझिये। पूज्य शंकराचार्यों ,महामंडलेश्वरों , धर्माचार्यों , संतों और कथावाचकों को भी इस संकट को समझना चाहिए और इससे मुक्ति के लिए आगे आना चाहिए।
ये विषय पहले है ,संगम स्नान बाद में प्रभु। आपको बता दें, जनहित याचिका में कहा गया है कि यूजीसी के Equity Rule का सेक्शन 3(C) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और व्यक्तिगत आजादी जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। यह नियम यूजीसी अधिनियम 1956 के विरुद्ध है और उच्च शिक्षा में समान अवसर देने के अवसर को खत्म करता है।
UGC के नए कानून से वे सबसे ज्यादा खुश हैं जिन्हें भारत में आकार लेती वृहद हिन्दू एकता रास नहीं आ रही थी ---- ऐसे तत्व देश के भीतर भी बहुत हैं और देश के पड़ोस में भी ------इसलिए खतरा बड़ा है ,इसे समझिये ---- पूज्य शंकराचार्यों ,महामंडलेश्वरों , धर्माचार्यों , संतों और कथावाचकों को…
— Amitabh Agnihotri (@Aamitabh2) January 26, 2026
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