साल 2026 में भारतीय FM रेडियो इंडस्ट्री एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है, जहां एक तरफ पुरानी पहचान यानी विज्ञापन आधारित कमाई तेजी से सिकुड़ रही है और दूसरी तरफ नए रास्ते धीरे-धीरे खुल रहे हैं। जो मीडियम कभी सुबह की चाय के साथ घरों में गूंजता था, वो आज Spotify, JioSaavn और YouTube जैसे दिग्गजों से मुकाबला कर रहा है। सवाल सिर्फ यह नहीं कि रेडियो जिंदा रहेगा या नहीं सवाल यह है कि यह किस रूप में जिंदा रहेगा?
विज्ञापन खर्च (AdEx) का संकट:
रेडियो के विज्ञापन खर्च (AdEx) पर अलग-अलग रिपोर्ट्स के आंकड़े अलग हैं यह अंतर पद्धति (methodology) के कारण है, इसलिए दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
Dentsu-e4m Digital Advertising Report 2026 के मुताबिक, साल 2025 में रेडियो का कुल विज्ञापन खर्च ₹1,501 करोड़ रहा, जो 2024 के ₹1,679 करोड़ से करीब 10.6% नीचे आ गया। इस रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल विज्ञापन बाजार में रेडियो की हिस्सेदारी 2024 के 2% से घटकर 2025 में महज 1% रह गई।
वहीं Pitch Madison Advertising Report (PMAR) 2026 रेडियो पर विज्ञापन खर्च को 2025 में अपने Legacy Framework में ₹2,515 करोड़ के आसपास बताती है। इस रिपोर्ट के अनुसार 2026 में रेडियो सहित अन्य पारंपरिक मीडिया -5% से +5% की रेंज में रहेंगे।
दोनों रिपोर्ट्स इस बात पर सहमत हैं कि डिजिटल तेजी से आगे बढ़ रहा है और रेडियो का सापेक्षिक हिस्सा सिकुड़ रहा है। Dentsu के अनुसार 2025 में भारत का कुल विज्ञापन खर्च 8.3% बढ़कर ₹1,21,339 करोड़ तक पहुंचा, जिसमें Digital विज्ञापन खर्च 19% बढ़कर ₹71,621 करोड़ हो गया और कुल विज्ञापन खर्च में उसकी हिस्सेदारी 59% पहुंच गई।
TAM विज्ञापन खर्च के आंकड़े एक सकारात्मक पहलू दिखाते हैं 2025 में रेडियो विज्ञापन वॉल्यूम (ऐड वॉल्यूम) में साल-दर-साल 2% की वृद्धि हुई। 2021 की तुलना में 2025 में प्रति रेडियो स्टेशन औसत विज्ञापन वॉल्यूम 40% बढ़ा है। सर्विस सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा, जिसकी कुल रेडियो विज्ञापन वॉल्यूम में 30% हिस्सेदारी रही। प्रॉपर्टीज व रियल एस्टेट कैटेगरी 15% शेयर के साथ शीर्ष पर रही।
एक्सचेंज4मीडिया के अनुसार रियल एस्टेट 2025 में रेडियो का सबसे बड़ा ऐडवर्टाइजर सेक्टर रहा ₹393 करोड़ खर्च के साथ जबकि ऑटो सेक्टर ने 13% की बढ़त के साथ ₹299 करोड़ का योगदान दिया।
Red FM की COO निशा नारायणन के अनुसार 2025 के फेस्टिव सीजन में रेडियो का रेवेन्यू 12–15% बढ़ा और यह सालाना आय का करीब 20–25% लेकर आया। लेकिन बाकी महीनों में रेडियो की कमाई पर दबाव बना रहता है। कुछ विज्ञापनदाता (advertisers) अपना बजट घटाकर Audio OTT प्लेटफॉर्म्स की तरफ शिफ्ट कर रहे हैं
ENIL (रेडियो मिर्ची) का डिजिटल की ओर बड़ा दांव
ENIL यानी Entertainment Network (India) Ltd, जो रेडियो मिर्ची, मिर्ची लव और कूल एफएम+ जैसे ब्रैंड्स ऑपरेट करता है, इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में रहा।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर–दिसंबर 2025) में कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹162.93 करोड़ रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान तिमाही (₹157.13 करोड़) के मुकाबले 3.7% की बढ़त है। हालांकि, कंपनी को ₹6.42 करोड़ का नेट लॉस हुआ, जबकि Q3 FY25 में ₹9.14 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया गया था, यानी मुनाफे से घाटे में बदलाव दिखा। इस दौरान Domestic EBITDA ₹13.7 करोड़ रहा।
सबसे अहम बात यह रही कि डिजिटल और IP रेवेन्यू का हिस्सा Q3 FY25 के 26.9% से बढ़कर Q3 FY26 में 49.5% हो गया, यानी लगभग दोगुना। डिजिटल रेवेन्यू में 99.9% की सालाना (YoY) ग्रोथ दर्ज की गई। Impact Properties का रेवेन्यू 10.5% बढ़ा, जबकि इंटरनेशनल बिजनेस से ₹5.38 करोड़ का रेवेन्यू आया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर 2025) में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹141 करोड़ रहा, जिसमें 24.3% की साल-दर-साल (YoY) ग्रोथ दर्ज की गई। इस दौरान डिजिटल रेवेन्यू, Core Radio Ad Revenue का 52.5% तक पहुंच गया। वहीं, BSE की standalone फाइलिंग में रेवेन्यू ₹137.75 करोड़ बताया गया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल–जून 2025) में कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू ₹117 करोड़ रहा, जो 3% YoY ग्रोथ दर्शाता है। Domestic रेवेन्यू ₹113 करोड़ (3.2% YoY) रहा और EBITDA ₹6.2 करोड़ (3.6% YoY ग्रोथ) दर्ज किया गया। डिजिटल रेवेन्यू ₹21.7 करोड़ रहा, जिसमें 41.2% की YoY बढ़त हुई और यह Core Radio Ad Revenue का 40.7% हिस्सा बन गया (Q1 FY25 में यह 24.8% था)। Events और Solutions बिजनेस में 33% की ग्रोथ दर्ज हुई। 30 जून 2025 तक कंपनी के पास ₹349 करोड़ का कैश रिजर्व था।
ENIL अब खुद को “देश की मल्टी-प्लेटफॉर्म एंटरटेनमेंट कंपनी” के तौर पर पेश कर रहा है। Q3 FY26 के Investor Presentation के अनुसार, कंपनी की पहुंच 63 शहरों में करीब 6 करोड़ श्रोताओं तक है। हर साल 400 से ज्यादा इवेंट्स आयोजित किए जाते हैं, जिनमें 30 लाख से अधिक लोग भाग लेते हैं। कंपनी की सोशल मीडिया रीच 100 मिलियन से ज्यादा है और यह 13 भाषाओं व 25 से अधिक बोलियों में कंटेंट तैयार करती है। साथ ही, कंपनी Gaana ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का भी संचालन करती है।
रेडियो सिटी (Music Broadcast Ltd) चुनौती के बीच डायवर्सिफिकेशन
Q1 FY26 (अप्रैल–जून 2025): इस तिमाही में रेवेन्यू ₹49.32 करोड़ रहा, जो साल-दर-साल (YoY) 17.25% गिरावट दिखाता है। Operating EBITDA ₹8 करोड़ रहा, जिसमें 16.1% मार्जिन दर्ज किया गया। कंपनी को ₹2.17 करोड़ का नेट लॉस हुआ। 30 जून 2025 तक कैश रिजर्व ₹354 करोड़ था। Alternative Revenue Streams (Branded Properties, Digital Ventures, Sponsorships) ने कुल आय में 35% योगदान दिया, जबकि कुल क्लाइंट बेस में इनकी हिस्सेदारी 41% रही।
Q2 FY26 (जुलाई–सितंबर 2025): इस तिमाही में रेवेन्यू ₹37.84 करोड़ रहा, जो YoY 30.9% की गिरावट है। नेट लॉस ₹6.87 करोड़ रहा। H1 FY26 (पहली छमाही) में कुल रेवेन्यू ₹87.17 करोड़ रहा, जो YoY 23.8% कम है, जबकि नेट लॉस ₹9.05 करोड़ दर्ज किया गया। Alternate Revenue Streams का हिस्सा 34% रहा। 30 सितंबर 2025 तक कैश रिजर्व ₹362 करोड़ हो गया।
Q3 FY26 (अक्टूबर–दिसंबर 2025): इस तिमाही में रेवेन्यू ₹46.4 करोड़ रहा। कंपनी ने ₹4.1 करोड़ का मुनाफा (PAT) दर्ज किया और तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर रेवेन्यू में 23% की ग्रोथ हुई। 31 दिसंबर 2025 तक नेट कैश ₹373 करोड़ रहा, जबकि मार्केट शेयर 18% दर्ज किया गया।
उल्लेखनीय है कि रेडियो सिटी का कैश रिजर्व (₹373 करोड़) उसके कुल मार्केट कैप से भी ज्यादा है, जो कंपनी की मजबूत बैलेंस शीट को दिखाता है।
नए रेवेन्यू सोर्स: सिर्फ बात नहीं, काम भी हो रहा है
इवेंट्स और ब्रैंड एक्टिवेशन- Entertainment Network (India) Ltd (ENIL) आज भारत की बड़ी इवेंट कंपनियों में शामिल हो चुका है। कंपनी हर साल 400 से ज्यादा इवेंट्स- जैसे कॉन्सर्ट, अवॉर्ड शो, ब्रैंड एक्टिवेशन और ऑन-ग्राउंड प्रमोशन—करती है। FY26 की पहली तिमाही में इवेंट्स और सॉल्यूशंस बिजनेस में 33% की बढ़त दर्ज हुई, जबकि दूसरी तिमाही में इवेंट्स और आईपी बिजनेस ने 101.1% की सालाना उछाल दिखाई।
Music Broadcast Ltd (रेडियो सिटी) ने एसमिन्को डॉट इन नाम से एक AI-आधारित इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म पर अब तक 60,000 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर्स जुड़ चुके हैं और कंपनी ने भारत के टॉप 10,000 विज्ञापनदाताओं के साथ साझेदारी की है।
डिजिटल स्ट्रीमिंग और हाइब्रिड मॉडल- ENIL ने Gaana (गाना) ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म को दिसंबर 2023 में टाइम्स इंटरनेट से करीब ₹25 लाख में खरीदा था। इसे इंडस्ट्री में एक तरह की ‘डिस्ट्रेस सेल’ के तौर पर देखा गया, क्योंकि गाना का पीक वैल्यूएशन 580 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका था और उसने 200 मिलियन डॉलर से ज्यादा फंड जुटाया था। ENIL ने इसे पूरी तरह सब्सक्रिप्शन मॉडल पर शिफ्ट कर दिया। FY26 की तीसरी तिमाही में कंपनी के डिजिटल रेवेन्यू में 99.9% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई।
Radio Mirchi, Red FM और BIG FM जैसे रेडियो नेटवर्क अब अपने ऑन-एयर प्रोग्राम को मोबाइल ऐप, OTT प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर एक साथ स्ट्रीम कर रहे हैं। रेडियो सिटी का प्लैनेट रेडियो सिटी डॉट कॉम, 17 वेब-आधारित स्टेशन और RC स्टूडियो (जियो टीवी पर 24/7 वीडियो चैनल) इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
पॉडकास्ट इंटीग्रेशन- Deloitte की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पॉडकास्ट इंडस्ट्री अगले 3–5 साल में तेजी से बढ़ने वाली है। 2025 में पॉडकास्ट सुनने वालों की संख्या करीब 20 करोड़ तक पहुंच गई, जो 2024 के 10 करोड़ से दोगुनी है। भारत का पॉडकास्ट बाजार 2024 में करीब 560 मिलियन डॉलर (₹4,700 करोड़) का था और 2033 तक इसके 4,248 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें लगभग 25.5% की सालाना ग्रोथ रहेगी।
एफएम रेडियो स्टेशन अब अपने आरजे शो को ऑन-डिमांड पॉडकास्ट के रूप में Spotify, JioSaavn और Apple Podcasts पर उपलब्ध करा रहे हैं। ब्रैंडेड पॉडकास्ट, स्पॉन्सर्ड एपिसोड और पॉडकास्ट विज्ञापन—ये तीनों नए कमाई के स्रोत बन रहे हैं। रेडियो सिटी ने स्पॉटिफाई के साथ 4 राज्यों में एक्सक्लूसिव पार्टनरशिप भी की है।
लाइसेंसिंग और सिंडिकेशन रेवेन्यू- रेडियो मिर्ची जैसे ब्रैंड अब अपने कंटेंट—जैसे जिंगल, आरजे पर्सनालिटी और प्रोग्राम फॉर्मेट—को लाइसेंस पर देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ENIL 13 भाषाओं में कंटेंट तैयार करता है और इंटरनेशनल सिंडिकेशन की ओर भी कदम बढ़ा रहा है। FY26 की तीसरी तिमाही में कंपनी का इंटरनेशनल बिजनेस रेवेन्यू ₹5.38 करोड़ रहा।
डिजिटल रेडियो: बड़ा सपना, धीमी शुरुआत- ट्राई ने 4 ‘ए+’ और 9 ‘ए’ श्रेणी के शहरों में डिजिटल रेडियो के लिए नीलामी की सिफारिश की है, लेकिन इंडस्ट्री अभी भी इसे लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है।
BIG FM के सीओओ सुनील कुमारन के मुताबिक, डिजिटल रेडियो के सामने हाई कॉस्ट, सीमित डिवाइस (रिसीवर), नियमों की अनिश्चितता और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से कड़ी प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां हैं। वहीं विनीत सिंह हुक्मरानी का कहना था कि उपभोक्ताओं को अलग से डिजिटल रेडियो खरीदने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मोबाइल और ब्लूटूथ ही इस पूरे सेगमेंट को नियंत्रित कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, 2026 को इस दिशा में अहम साल माना जा रहा है, लेकिन बिना सरकारी समर्थन, पर्याप्त डिवाइस उपलब्धता और सही कीमत के, डिजिटल रेडियो का रास्ता अभी लंबा नजर आता है।
छंटनी और लागत कटौती दर्दनाक लेकिन जरूरी?
एक्सचेंज4मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2025 में रेडियो इंडस्ट्री में विभिन्न नेटवर्क्स में लगभग 300 एम्प्लॉयी की छंटनी हुई। रेडियो सिटी ने अकेले 100–150 पद समाप्त किए। Big FM ने करीब 50–70 लोगों की छुट्टी की।
Music Broadcast Ltd ने Q2 FY26 Earnings Call में बताया कि उन्होंने Operating Costs में ₹6–7 करोड़ प्रति तिमाही की बचत हासिल की है बिना Operations को नुकसान पहुंचाए। Q3 FY26 में इसका असर दिखा Revenue QoQ 23% बढ़ा और PAT ₹4.1 करोड़ सकारात्मक रहा।
Tier 2 और Tier 3 शहर उम्मीद की किरण
जहां टियर-1 शहरों में डिजिटल का दबाव रेडियो को पीछे धकेल रहा है, वहीं टियर-2 और टियर-3 शहरों में रेडियो अब भी एक प्रभावशाली माध्यम बना हुआ है। Music Broadcast Ltd (रेडियो सिटी) ने भी माना है कि उसकी ग्रोथ अब टियर-2 और टियर-3 बाजारों की ओर शिफ्ट हो रही है। Pitch Madison Report 2025 के अनुसार, इन शहरों में रेडियो अब भी सबसे किफायती (Cost-Effective) विज्ञापन माध्यम बना हुआ है।
TAM के विज्ञापन आंकड़ों के मुताबिक, ऑटो सेक्टर ने 2025 में रेडियो पर 13% ज्यादा खर्च किया, और यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से इन्हीं बाजारों से आई।
भारतीय रेडियो इंडस्ट्री का भविष्य: 2026 और आगे
EY/Statista (2024) के अनुमान के मुताबिक, भारत की रेडियो इंडस्ट्री 2026 तक करीब ₹2,700 करोड़ तक पहुंच सकती है, जिसमें 7–9% की सालाना (CAGR) ग्रोथ का अनुमान है।
Dentsu Digital Advertising Report 2026 के अनुसार, भारत का कुल विज्ञापन खर्च 2026 में ₹1,30,416 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जिसमें 7.2% की ग्रोथ होगी। 2027 तक डिजिटल का हिस्सा कुल विज्ञापन खर्च का 70% तक पहुंच सकता है। वहीं, रेडियो और सिनेमा के लिए -5% से +5% के बीच सीमित ग्रोथ का अनुमान जताया गया है।
वैश्विक स्तर पर रेडियो बाजार 2026 में करीब $56.67 अरब का है और 2035 तक $77.9 अरब तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसमें 3.6% CAGR की ग्रोथ होगी। भारत की हिस्सेदारी वैश्विक रेडियो ब्रॉडकास्टिंग बाजार में करीब 3.45% है और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इसे सबसे ज्यादा ग्रोथ संभावनाओं वाले बाजारों में गिना जा रहा है।
आखिरी बात: विज्ञापन खत्म नहीं हुआ, लेकिन अब अकेला काफी नहीं
एफएम रेडियो की विज्ञापन-आधारित कमाई खत्म नहीं हुई है, यह अब भी इंडस्ट्री की रीढ़ बनी हुई है। Dentsu के अनुसार 2025 में यह आंकड़ा ₹1,501 करोड़ रहा, जबकि Pitch Madison के अनुसार ₹2,515 करोड़। दोनों आंकड़े अलग-अलग मेथडोलॉजी पर आधारित हैं, लेकिन संकेत एक ही है, रेडियो का सापेक्षिक बाजार हिस्सा धीरे-धीरे घट रहा है।
इस दौर में वही कंपनियां आगे टिकेंगी, जो इवेंट्स, डिजिटल, पॉडकास्ट और लाइसेंसिंग जैसे नए रेवेन्यू सोर्स तेजी से विकसित कर रही हैं:
- Entertainment Network (India) Ltd (ईएनआईएल) का डिजिटल रेवेन्यू एक साल में 26.9% से बढ़कर 49.5% हो गया, जबकि इवेंट्स और आईपी बिजनेस 101% YoY बढ़ा।
- Music Broadcast Ltd (रेडियो सिटी) की वैकल्पिक आय (Alternative Revenue) 35% तक पहुंच गई है और इसके SMINCO प्लेटफॉर्म पर 60,000 से ज्यादा इन्फ्लुएंसर्स जुड़ चुके हैं।
- Red FM जैसे खिलाड़ी अपने सेक्टर से 4–5% बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, एफएम रेडियो का भविष्य अब सिर्फ ट्रांसमीटर तक सीमित नहीं है, बल्कि स्क्रीन, स्पीकर और स्मार्टफोन से भी जुड़ चुका है। जो ब्रॉडकास्टर्स इस बदलाव को समझ गए हैं, उनके लिए 2026 नई शुरुआत का साल है, जबकि जो अब भी सिर्फ स्पॉट विज्ञापन पर निर्भर हैं, उनके लिए कहा जा सकता है कि यह अलर्ट होने का समय है।