Free OTT vs Paid OTT: आखिर कौन सा मॉडल बन रहा दर्शकों की पहली पसंद?

सवाल यह है कि भारत का आम दर्शक आखिर किस मॉडल को अपना रहा है और विज्ञापन की दुनिया में इसका क्या मतलब है?

Vikas Saxena by
Published - Friday, 08 May, 2026
Last Modified:
Friday, 08 May, 2026
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भारत में डिजिटल मनोरंजन की दुनिया एक नए मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ Netflix और Amazon Prime Video जैसे पेड प्लेटफॉर्म्स हैं जो प्रीमियम कंटेंट का वादा करते हैं, तो दूसरी तरफ YouTube, Amazon MX Player और JioCinema जैसे फ्री प्लेटफॉर्म्स हैं जो बिना एक रुपया खर्च किए घंटों का मनोरंजन परोस रहे हैं। सवाल यह है कि भारत का आम दर्शक आखिर किस मॉडल को अपना रहा है और विज्ञापन की दुनिया में इसका क्या मतलब है?

भारत का OTT मार्केट: एक झलक

Ormax Media की 'The Ormax OTT Audience Report: 2025' के अनुसार, 2025 में भारत के OTT दर्शकों की संख्या 60.12 करोड़ (601.2 मिलियन) तक पहुंच गई। यह देश की कुल आबादी का 41.1 प्रतिशत है। 2024 में यह आंकड़ा 54.73 करोड़ था, यानी एक साल में करीब 10% की बढ़त। यह रिपोर्ट जून-जुलाई 2025 के दौरान 15,600 प्रतिभागियों पर किए गए प्राइमरी रिसर्च पर आधारित है।

मार्केट के मूल्य की बात करें तो Statista के अनुसार 2025 में भारत का OTT वीडियो मार्केट $4.44 अरब (लगभग ₹37,000 करोड़) तक पहुंचा। Media Partners Asia (MPA) की AVB 2026 रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत का कुल ऑनलाइन वीडियो रेवेन्यू $4.31 अरब था और 2030 तक यह $9.17 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। लेकिन इस पूरे मार्केट की असली कहानी है- 'फ्री कंटेंट' बनाम 'पेड कंटेंट' की जंग।

YouTube vs Netflix: दो प्लेटफॉर्म, दो अलग इकोसिस्टम

YouTube - मुफ्त का महाराजा

भारत में YouTube की बादशाहत बेमिसाल है। Ormax Media की रिपोर्ट के मुताबिक, YouTube के 50 करोड़ (500 मिलियन) से ज्यादा इंस्टाल्स हैं और इसके 45 करोड़ (450 मिलियन) से अधिक मंथली एक्टिव यूजर्स (MAU) हैं। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि इनमें से करीब 98% यूजर्स बिल्कुल मुफ्त में कंटेंट देखते हैं- YouTube प्रीमियम के सब्सक्राइबर्स भारत में केवल 70-80 लाख के आसपास हैं, यानी कुल यूजर बेस का 2% से भी कम।

विज्ञापन राजस्व के मामले में YouTube भारत में एक विशाल मशीन है। MPA की AVB 2026 रिपोर्ट के अनुसार, भारत में YouTube का ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू 2024 में $1.84 अरब था, जो 2030 तक बढ़कर $3.05 अरब से अधिक होने का अनुमान है। यानी YouTube भारत की OTT ऐडवर्टाइजिंग इकनॉमी की रीढ़ है।

Netflix- प्रीमियम का किला, पर सीमित दायरा

Netflix ने भारत में जनवरी 2016 में कदम रखा था। दस साल बाद, बिजनेस स्टैंडर्ड की मार्च 2026 की रिपोर्ट (Media Partners Asia के हवाले से) के अनुसार, Netflix India के पास 1.6 करोड़ से अधिक (16 मिलियन+) सब्सक्राइबर्स और लगभग 5 करोड़ व्युअर्स हैं, जबकि इसकी भारत से रेवेन्यू करीब ₹4,000 करोड़ के आसपास है।

Netflix India के सब्सक्राइबर्स की संख्या अलग-अलग sources में भिन्न है- बिजनेस स्टैंडर्ड/MPA (मार्च 2026) 1.6 करोड़ बताते हैं, DemandSage/Zee News 1.24 करोड़ (12.37 मिलियन) और HSBC (जनवरी 2026) लगभग 2 करोड़ का अनुमान देते हैं। यह अंतर अलग-अलग measurement methodologies की वजह से है।

Netflix India की मुख्य खासियत यह है कि इसकी ARPU (एवरेज रेवेन्यू प्रति यूजर) इंडस्ट्री एवरेज से तीन गुना ज्यादा है- यानी यह एक छोटे लेकिन बेहद मूल्यवान दर्शक वर्ग को serve करता है। 

Netflix globally देखें तो कंपनी ने Q4 2025 में 325 मिलियन (32.5 करोड़) पेड memberships का आंकड़ा पार किया- यह Netflix की official SEC Filing (Form 8-K) से confirmed है। 2025 में Netflix का वैश्विक रेवेन्यू $45.18 अरब रहा, जो 2024 की तुलना में 15.84% अधिक है।

Free OTT का उभरता साम्राज्य: MiniTV, MX Player और JioCinema

Amazon MX Player- 25 करोड़ की ताकत

Amazon ने 2024 में MX Player के एसेट्स खरीदे और अपनी फ्री सर्विस Amazon miniTV के साथ मिलाकर Amazon MX Player बनाया। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह free (AVOD model) है- बिना किसी पेड सब्सक्रिप्शन के। Amazon India की ऑफिशियल प्रेस रिलीज के अनुसार, इस merged प्लेटफॉर्म के 25 करोड़ (250 मिलियन) से ज्यादा यूनिक मंथली यूजर्स हैं, जो इसे भारत की सबसे बड़ी फ्री स्ट्रीमिंग सर्विसेज में से एक बनाता है।

मई 2026 में एक और बड़ा कदम उठाते हुए Amazon ने Amazon MX Player को Prime Video के साथ इंटीग्रेट कर दिया, जिससे अब एक ही जगह SVOD (पेड), AVOD (free), और TVOD तीनों मॉडल उपलब्ध हैं। Aashram, Dharavi Bank, Campus Diaries, Yeh Meri Family जैसे popular shows अब बिल्कुल मुफ्त देखे जा सकते हैं।

JioCinema और JioHotstar- खेल बदलने वाला कदम

JioCinema ने भारतीय OTT इतिहास में एक क्रांतिकारी मोड़ तब लाया जब IPL 2023 को उसने पूरी तरह मुफ्त stream किया। बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, पूरे IPL 2023 सीजन में JioCinema के कुल 44.9 करोड़ (449 मिलियन) व्युअर्स रहे। IPL 2023 के फाइनल मैच में एकसाथ 3.2 करोड़ concurrent व्युअर्स ने लाइव स्ट्रीमिंग देखी- जो उस समय का वर्ल्ड रिकॉर्ड था।  

2025 में Reliance और Disney के बीच मर्जर के बाद JioCinema और Disney+ Hotstar मिलकर JioHotstar बन गए। JioHotstar का आधिकारिक लॉन्च 14 फरवरी 2025 को 5 करोड़ सब्सक्राइबर्स के साथ हुआ। फिर IPL 2025 ने इसे रॉकेट की गति दी:

  • अप्रैल 2025: Bloomberg के अनुसार 20 करोड़ सब्सक्राइबर्स
  • मई 2025: बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार 28 करोड़ सब्सक्राइबर्स
  • जून 2025: OTTverse / JioStar के अनुसार 30 करोड़ सब्सक्राइबर्स

यानी महज चार महीनों में 5 करोड़ से 30 करोड़ सब्सक्राइबर्स तक का सफर। IPL 2025 में JioHotstar का डिजिटल ऑडियंस 65.2 करोड़ रहा- जो TV audience (53.7 करोड़) से भी आगे निकल गया।  

बिजनेस स्टैंडर्ड की मई 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, JioHotstar के CEO Kevin Vaz ने अर्निंग कॉल्स में बताया कि प्लेटफॉर्म की कंटेंट लाइब्रेली 3,20,000 घंटे (320,000 hours) की है- जो Netflix या Amazon Prime Video के Indian catalogue से छह गुना बड़ी है। JioHotstar के मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या 50 करोड़ (503 मिलियन) से अधिक है।

फ्री vs पेड: दर्शक कहां खड़े हैं?

फ्री यूजर्स की बहुसंख्यक दुनिया

भारत में OTT का सबसे बड़ा सच यह है कि अधिकांश दर्शक अभी भी मुफ्त कंटेंट को पंसद करते हैं। Ormax Media के अनुसार 2025 के मध्य तक भारत में एक्टिव पेड OTT सब्सक्रिप्शंस की संख्या 14.82 करोड़ (148.2 मिलियन) थी- और इसमें telecom bundles और aggregators के जरिए ली गई सब्सक्रिप्शंस भी शामिल हैं। इसे 60 करोड़ OTT users के साथ compare करें, तो साफ है कि करीब 75% से ज्यादा दर्शक किसी पेड प्लेटफॉर्म से नहीं जुड़े हैं।

FICCI-EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2024 में subscribing households की संख्या 4.7 करोड़ (47 मिलियन) थी और 2027 तक यह 6.5 करोड़ (65 मिलियन) होने का अनुमान है। यह वृद्धि प्रभावशाली है, लेकिन भारत की 140 करोड़ आबादी को देखते हुए पेड OTT अभी भी एक छोटे हिस्से का खेल है।

Regional OTT में पेड का अपवाद

दिलचस्प बात यह है कि niche और रीजनल OTT प्लेटफॉर्म्स पर पेड सब्सक्राइबर्स का अनुपात काफी ज्यादा है। The Media Ant की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, मलयालम प्लेटफॉर्म ManoramaMAX के करीब 85% यूजर्स पेड हैं, जबकि बंगाली प्लेटफॉर्म Hoichoi के लगभग 70% यूजर्स सब्सक्रिप्शन लेकर कंटेंट देखते हैं। इससे साफ होता है कि जहां हाइपरलोकल और एक्सक्लूसिव कंटेंट मिलता है, वहां दर्शक पैसे खर्च करने के लिए तैयार रहते हैं।

Viewing Hours: कौन देख रहा है कितना?

The Media Ant के CTV रिसर्च के अनुसार, एक औसतन एक भारतीय दर्शक अब रोजाना 3.5 घंटे TV पर बिताता है, जिसमें से 80% समय मोबाइल डिवाइस के साथ cross-screen का इस्तेमाल करता है। यानी टीवी देखते समय मोबाइल चलाना, OTT कंटेंट टीवी पर देखना और उससे जुड़ी जानकारी मोबाइल पर सर्च करना या फिर  लैपटॉप, मोबाइल और स्मार्ट टीवी के बीच कंटेंट स्विच करना। Netflix के ग्लोबल डेटा के अनुसार, पेड यूजर्स प्रतिदिन करीब 2 घंटे प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं।

Connected TV (CTV) एक गेम चेंजर बन रहा है। Ormax Media के अनुसार, 2025 में CTV users की संख्या 87% की छलांग के साथ 12.92 करोड़ (129.2 मिलियन) हो गई- 2024 में यह 6.97 करोड़ थी। यह 35-40 मिलियन CTV homes में तब्दील होता है। अब 21% OTT दर्शक CTV पर कंटेंट देखते हैं, जो 2024 में 13% था। इनमें 55% से ज्यादा CTV व्युअर्स 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों और कस्बों से आते हैं।  

Ad-Supported Consumption: विज्ञापन की असली कहानी

AVOD का दबदबा

भारत में OTT मोनेटाइजेशन का सबसे बड़ा इंजन अभी भी ऐडवर्टाइजिंग है। MPA की AVB 2026 रिपोर्ट के अनुसार:

  • AVOD रेवेन्यू 2020: $1.03 अरब
  • AVOD रेवेन्यू 2024: $3.25 अरब
  • AVOD रेवेन्यू 2030 (forecast): $6.48 अरब

कुल OTT रेवेन्यू ग्रोथ का 70% से अधिक हिस्सा AVOD से ही आएगा। SVOD (Subscription-based) रेवेन्यू 2024 में पहली बार $1 अरब का मील का पत्थर पार कर गया और 2030 तक $2.68 अरब होने का अनुमान है।  

India का Digital Advertising मार्केट

dentsu-e4m Digital Advertising Report 2026 (जिसे भारत की सबसे भरोसेमंद ऐडवर्टाइजिंग रिपोर्ट माना जाता है) के अनुसार, 2025 में भारत का डिजिटल ऐडवर्टाइजिंग मार्केट ₹71,621 करोड़ तक पहुंचा और यह देश के कुल ऐडवर्टाइजिंग स्पेंड का 59% हिस्सा है। 2026 में यह बढ़कर ₹84,770 करोड़ होने का अनुमान है। Online video (OTT + short-form) digital ad spend का 28% हिस्सा है यानी ₹20,004 करोड़। 

CPM और CPC Trends: भारत सस्ता, पर तेजी से महंगा होता मार्केट

The Current की रिपोर्ट एक अहम विरोधाभास उजागर करती है: भारत में लोग अपना 52% digital time OTT, CTV, music streaming और apps पर बिताते हैं, लेकिन ऐडवर्टाइजर्स इन प्लेटफॉर्मs पर अपना केवल 15% budget खर्च करते हैं। यह असंतुलन एक बड़ा untapped अवसर है।

CPM/CPC के मामले में भारत अभी भी global markets से काफी सस्ता है। OwlClaw Technologies के 2025-26 benchmark data के अनुसार, भारत में CPCs अमेरिका के मुकाबले 70-85% कम हैं।

CTV advertising में तेज वृद्धि देखी जा रही है। The Media Ant के विश्लेषण (Pitch Madison और dentsu e4m के हवाले से) के मुताबिक, 2026 में CTV ad spend ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है- यह कुल digital video ad spend का 18% हिस्सा है, जो पहले 12% था। 2027 तक यह बढ़कर ₹3,500 करोड़ से ऊपर जाने की उम्मीद है। 2026 में CTV का total TV ऐडवर्टाइजिंग रेवेन्यू में हिस्सा 16% से ज्यादा होने का अनुमान है।

Hybrid Model: भविष्य की दिशा

यह साफ हो रहा है कि भारत में कोई एक मॉडल "विजेता" नहीं होगा। बड़े प्लेटफॉर्मs hybrid approach अपना रहे हैं:

  • JioHotstar- free (AVOD) और पेड (SVOD) दोनों tiers offer करता है।
  • Amazon- MX Player (free) और Prime Video (पेड) को मई 2026 में एक छत के नीचे ला दिया।
  • Amazon Prime Video- जून 2025 में India में entry-level offering को AVOD service में convert किया।
  • Netflix- India में ad-supported tier अभी नहीं आया है, लेकिन इसकी तैयारी चल रही है।

MPA की रिपोर्ट बताती है कि एक average Indian household अब औसतन 3 OTT services subscribe करता है और प्रति माह ₹1,360 से अधिक खर्च करता है- लेकिन ऐसे households अभी भी कुल दर्शकों का एक छोटा हिस्सा ही हैं।

भारत free का दीवाना, पेड का राज सीमित

2026 के आंकड़े बिल्कुल साफ तस्वीर पेश करते हैं। भारत में OTT का असली राज 'फ्री कंटेंट' का है। YouTube के 45 करोड़ मंथली यूजर्स, Amazon MX Player के 25 करोड़ यूजर्स और JioHotstar का 3,20,000 घंटे का विशाल कंटेंट लाइब्रेरी- यह सब मिलकर एक ऐसी दुनिया बना रहे हैं जहां मनोरंजन के लिए पैसे देने की मजबूरी नहीं।

लेकिन पेड OTT भी कमजोर नहीं है। Netflix की प्रीमियम positioning, regional प्लेटफॉर्म्स का loyal paid user base और JioHotstar का IPL-driven subscription surge यह दिखाता है कि अच्छा और exclusive कंटेंट मिलने पर भारतीय दर्शक पैसे खर्च करने के लिए तैयार हैं।

असल तस्वीर यह है कि भारत का OTT मार्केट दो हिस्सों में बंटा हुआ है- एक तरफ बड़ी और price-sensitive free audience है, जबकि दूसरी तरफ छोटा लेकिन high-value paid segment मौजूद है।

विज्ञापनदाताओं के लिए यह एक बड़ा अवसर बन चुका है, क्योंकि ₹71,621 करोड़ का digital advertising market लगातार बढ़ रहा है। साथ ही CPM अभी भी अपेक्षाकृत सस्ते हैं और 60 करोड़ से ज्यादा OTT दर्शकों तक पहुंचने का सबसे बड़ा रास्ता अब भी फ्री कंटेंट के जरिए ही जाता है।

भारत का दर्शक फ्री OTT पसंद करता है और ऐडवर्टाइजर उसे ढूंढने के लिए पैसे देने को तैयार है।

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e4m Play Streaming Media Awards: बेहतरीन कंटेंट और क्रिएटिविटी को मिला सम्मान

मुंबई में 11 जून को आयोजित e4m Play Streaming Media Awards के सातवें संस्करण में स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बेहतरीन काम को सम्मानित किया गया।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 12 June, 2026
Last Modified:
Friday, 12 June, 2026
e4m Play Streaming Media Awards

मुंबई में 11 जून को आयोजित e4m Play Streaming Media Awards के सातवें संस्करण में स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के बेहतरीन काम को सम्मानित किया गया। इस भव्य समारोह में कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रैंड्स, प्लेटफॉर्म्स और इंडस्ट्री प्रोफेशनल्स को उनके नवाचार, रचनात्मकता और प्रभावशाली स्टोरीटेलिंग के लिए अवॉर्ड्स दिए गए।

इस साल के अवॉर्ड्स में JioHotstar, Sony LIV, Netflix, Arha Media Broadcasting Pvt Ltd, Jio Studios और Prime Video ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई बड़े अवॉर्ड्स अपने नाम किए। JioHotstar ने कंटेंट कैटेगरी में 5, टैलेंट कैटेगरी में 8 और ब्रैंड इंटीग्रेशन एवं मार्केटिंग कैटेगरी में 6 अवॉर्ड्स जीतकर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

वहीं JioHotstar के माइक्रो ड्रामा प्लेटफॉर्म Tadka ने भी शानदार प्रदर्शन किया। Tadka को कंटेंट कैटेगरी में 1 और टैलेंट कैटेगरी में 14 अवॉर्ड्स मिले। Sony LIV ने कंटेंट कैटेगरी में 6 और टैलेंट कैटेगरी में 16 अवॉर्ड्स जीतकर अपनी मजबूत स्थिति साबित की।

Netflix को कंटेंट कैटेगरी में 6 और टैलेंट कैटेगरी में 11 अवॉर्ड्स मिले। वहीं Arha Media Broadcasting Pvt Ltd ने कंटेंट कैटेगरी में 5, टैलेंट कैटेगरी में 3 और ब्रैंड इंटीग्रेशन एवं मार्केटिंग कैटेगरी में 3 अवॉर्ड्स अपने नाम किए। Prime Video ने कंटेंट कैटेगरी में 8 बड़े अवॉर्ड्स जीते, जबकि Jio Studios को कंटेंट कैटेगरी में 1 और टैलेंट कैटेगरी में 7 अवॉर्ड्स मिले। 

अवॉर्ड्स नाइट में कई ब्रैंड्स और एजेंसियों को उनके प्रभावशाली मार्केटिंग कैंपेन के लिए सम्मानित किया गया। इनमें Ching's Secret (Tata Consumer Products), Purnima Advertising Agency Pvt. Ltd., Omnicom Media, White Turtle Studios – A Trailer Park Group Company, Piramal Consumer Healthcare, Jaquar & Company Pvt. Ltd., Crescent Communications Pvt. Ltd. और Zone Media प्रमुख रहे।

e4m Play Streaming Media Awards 2026 में Association of Mutual Funds in India (AMFI) के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर वेंकट नागेश्वर चालासानी (Venkat Nageswar Chalasani) ने मार्केटिंग जूरी चेयर की भूमिका निभाई।

वहीं प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और संपादक Rahul Rawail कंटेंट और टैलेंट कैटेगरी के जूरी चेयर रहे। इसके अलावा विज्ञापन, मीडिया और मार्केटिंग जगत के कई वरिष्ठ विशेषज्ञ और इंडस्ट्री के लीडर जूरी का हिस्सा बने।

ग्राउंडब्रेकिंग शोज़, प्रभावशाली कैंपेन और दमदार स्टोरीटेलिंग के जरिए विजेताओं ने रचनात्मकता की नई सीमाएं तय कीं। इसी वजह से e4m Play Streaming Media Awards आज स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में बेहतरीन काम को सम्मानित करने वाले प्रमुख मंचों में से एक बन चुका है।

यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स प्रतिभाओं, कंटेंट, ब्रैंड्स और प्लेटफॉर्म्स को उनकी उत्कृष्टता, रचनात्मकता और नवाचार के लिए सम्मानित करते हैं। साथ ही यह उन लोगों को पहचान दिलाते हैं जो इंडस्ट्री में नए मानक स्थापित कर रहे हैं और स्ट्रीमिंग मीडिया के भविष्य को आकार देने वाले विचारों और उपलब्धियों को सामने ला रहे हैं।

यहां देखें विजेताओं की पूरी सूची-

 

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क्या AI बदल देगा OTT प्लेटफॉर्म्स का भविष्य?

यह बदलाव सिर्फ कंटेंट सुझाने तक सीमित नहीं है, AI अब डबिंग, विज्ञापन, कंटेंट निर्माण और यहां तक कि किसी शो की सफलता का अनुमान लगाने तक पहुंच चुका है।

Vikas Saxena by
Published - Thursday, 11 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 11 June, 2026
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जब Netflix पर लाखों घंटे का कंटेंट मौजूद हो, Amazon Prime पर हजारों फिल्में और सीरीज उपलब्ध हों और JioHotstar पर क्रिकेट से लेकर वेब सीरीज तक का अंबार लगा हो, तो सवाल उठता है: आखिर दर्शक क्या देखेगा, यह फैसला कौन करता है? 2026 में इस सवाल का जवाब तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बनता जा रहा है और यह बदलाव सिर्फ कंटेंट सुझाने तक सीमित नहीं है, AI अब डबिंग, विज्ञापन, कंटेंट निर्माण और यहां तक कि किसी शो की सफलता का अनुमान लगाने तक पहुंच चुका है।

OTT का बढ़ता साम्राज्य

पहले यह समझना जरूरी है कि OTT इंडस्ट्री किस रफ़्तार से बढ़ रहा है। Research and Markets की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक OTT स्ट्रीमिंग बाजार 2025 में $221 अरब से बढ़कर 2026 में $264.85 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, यानी एक साल में करीब 19.8% की वृद्धि। 2030 तक यह बाजार $551 अरब से भी अधिक हो जाएगा। इस विशाल और तेजी से बदलते बाजार में AI एक निर्णायक हथियार बनता जा रहा है।

AI रिकमेंडेशन: अब AI तय करता है आपकी पसंद

OTT प्लेटफॉर्म्स पर AI का सबसे व्यापक और प्रभावशाली उपयोग कंटेंट रिकमेंडेशन में हो रहा है। Netflix, Amazon Prime Video, YouTube और JioHotstar जैसे प्लेटफॉर्म AI की मदद से दर्शक की देखने की आदतें, पसंदीदा जॉनर, देखने का समय और यहां तक कि कहां वीडियो रोका गया, इन सभी डेटा बिंदुओं का विश्लेषण करते हैं।

परिणाम चौंकाने वाले हैं। DigitalDefynd की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, Netflix पर देखे जाने वाले कुल कंटेंट का लगभग 80% हिस्सा AI-संचालित रिकमेंडेशन इंजन के जरिए आता है और यह इंजन कंपनी को हर साल 1 अरब डॉलर से अधिक की बचत करता है, क्योंकि जब दर्शक को मनपसंद कंटेंट मिलता है, तो वह सब्सक्रिप्शन नहीं छोड़ता।

2026 में AI रिकमेंडेशन इंजन और भी परिष्कृत हो गए हैं। अब ये सिस्टम सिर्फ देखने का इतिहास नहीं, बल्कि दर्शक के मूड, दिन का समय, और यहां तक कि जेन-अल्फा जैसी नई पीढ़ी की बदलती प्राथमिकताओं का भी विश्लेषण करते हैं।

AI डबिंग: भाषा की दीवारें टूट रही हैं

OTT की सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से भाषा रही है। एक कोरियन थ्रिलर या स्पैनिश ड्रामा को हिंदी या तेलुगु दर्शकों तक पहुंचाने में पहले हफ्तों का समय और लाखों रुपये खर्च होते थे। AI ने यह समीकरण बदल दिया है।

Research and Markets की रिपोर्ट के अनुसार AI डबिंग टूल्स बाजार 2025 में $1.15 अरब था, जो 2026 में 17.7% की दर से बढ़कर $1.35 अरब तक पहुंच गया है। 2030 तक इसके $2.56 अरब तक पहुंचने का अनुमान है। आज के प्रमुख AI डबिंग सिस्टम 140 से अधिक भाषाओं में काम करते हैं और 93% मामलों में lip-sync सटीकता हासिल कर लेते हैं।

Amazon ने मार्च 2025 में Prime Video पर AI तकनीक से डबिंग का पायलट प्रोग्राम लॉन्च किया, जिसमें 12 लाइसेंस्ड फिल्मों और सीरीज को अंग्रेजी और लैटिन अमेरिकी स्पेनिश में डब किया गया। AWS का पार्टनर CAMB.AI 140 से अधिक भाषाओं में भावनाओं को समझने वाली बहुभाषी डबिंग की सुविधा प्रदान करता है। Netflix भी AI की मदद से संचालित कार्यप्रणालियों के जरिए स्थानीय भाषाओं के अनुसार सबटाइटल तैयार करना और प्रचार-प्रसार से जुड़ी सामग्री को कई भाषाओं में तैयार करने के लिए AI का उपयोग बढ़ा रहा है।

भारत के संदर्भ में यह बेहद महत्वपूर्ण है, जहां 22 संविधान-मान्य भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ हैं, AI-डबिंग क्षेत्रीय कंटेंट को राष्ट्रीय और वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का सबसे किफायती जरिया बन रही है।

सबटाइटल और एक्सेसिबिलिटी: मिनटों में काम

पहले किसी फिल्म की सबटाइटल फाइल तैयार करने में कई दिन लग जाते थे। अब AI की मदद से आवाज को टेक्स्ट में बदलने की तकनीक और स्वचालित कैप्शन निर्माण टूल्स यह काम कुछ मिनटों में कर देते हैं। YouTube पर हर मिनट 500 घंटे से अधिक कंटेंट अपलोड होता है, और AI auto-captioning इस विशाल कंटेंट को सुलभ बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

यह बदलाव सिर्फ सुविधा के लिए नहीं है, यह करोड़ों श्रवण-बाधित दर्शकों के लिए भी जरूरी है। AI सबटाइटलिंग से कंटेंट वितरण की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है, और AI आधारित डबिंग उपकरण के इस्तेमाल से मीडिया टीमें बिना अतिरिक्त स्टाफ के बड़े कार्यभार संभाल पा रही हैं।

AI और कंटेंट निर्माण: रचनात्मकता का नया आयाम

सबसे बड़ा और सबसे विवादास्पद सवाल यह है: क्या AI कंटेंट भी बनाएगा? आज AI स्क्रिप्ट के आइडिया, सिनॉप्सिस, ट्रेलर, थंबनेल और पोस्टर डिजाइन में पहले से उपयोग हो रहा है। कई प्लेटफॉर्म AI की मदद से कंटेंट की जानकारी तैयार करने, उसे टैग करने और एडिटिंग प्रक्रियाओं को स्वचालित बनाने का काम कर रहे हैं।

लेकिन इसके साथ ही लेखकों, एडिटर्स और क्रिएटिव प्रोफेशनल्स की चिंताएँ भी बढ़ रही हैं। क्या एल्गोरिद्म-जनरेटेड कंटेंट मानवीय भावनाओं को उतनी ही गहराई से छू सकता है? क्या AI रचनात्मकता को एक फॉर्मूले में बदल देगा? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं, लेकिन इंडस्ट्री जगत में बहस तेज है।

विज्ञापन का नया चेहरा: AI-powered Ad Targeting

OTT प्लेटफॉर्म्स का एक बड़ा राजस्व स्रोत विज्ञापन बनता जा रहा है, और यहां AI ने पूरी तरह क्रांति ला दी है। 2026 में अमेरिका में अकेला प्रोग्रामेटिक डिस्प्ले विज्ञापन खर्च $203 अरब से अधिक पहुंचने का अनुमान है (Basis/eMarketer), और वैश्विक स्तर पर प्रोग्रामेटिक अब कुल डिजिटल डिस्प्ले विज्ञापन का लगभग 90% हिस्सा है।

CTV/OTT विज्ञापन के क्षेत्र में 2026 में 50% खरीद programmatic ढंग से होने की उम्मीद है। Advertiser Perceptions और Premion के एक survey के अनुसार 70% CTV विज्ञापनदाता 2026 में अपना खर्च औसतन 17% बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। AI की मदद से dynamic ad insertion संभव हो गई है, यानी एक ही मैच देख रहे दो दर्शकों को उनकी रुचि और व्यवहार के आधार पर पूरी तरह अलग-अलग विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं।

छोटे क्रिएटर्स को फायदा या नुकसान?

AI और एल्गोरिद्म का एक बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे बड़े स्टूडियो और बड़े बजट का कंटेंट और ज्यादा प्रमोट होगा, जबकि स्वतंत्र और छोटे निर्माताओं का कंटेंट दब जाएगा? यह चिंता वाजिब है। लेकिन दूसरी तरफ, AI टूल्स ने छोटे क्रिएटर्स को भी professional-grade डबिंग, सबटाइटल और marketing automation की सुविधा दी है, जो पहले उनकी पहुंच से बाहर थी। संतुलन कैसे बनाया जाए, यह 2026 का सबसे अहम नीतिगत सवाल है।

AI के खतरे: जब तकनीक दोधारी तलवार बने

हर तकनीक की तरह AI भी जोखिम से खाली नहीं है। OTT और मीडिया के संदर्भ में कुछ प्रमुख चुनौतियाँ हैं:

Deepfake और भ्रामक कंटेंट: International AI Safety Report 2026 के अनुसार AI-जनरेटेड डीपफेक्स वीडियो तेजी से यथार्थवादी होते जा रहे हैं और इन्हें पहचानना कठिन होता जा रहा है, एक अध्ययन में पाया गया कि लोग AI-जनरेटेड आवाजें 80% मामलों में असली समझ लेते हैं।

Filter Bubble: जब AI दर्शक को वही दिखाता रहे जो वह पहले से पसंद करता है, तो वह एक सूचना के बुलबुले में बंद हो जाता है। नई सोच, नए विचार और अलग दृष्टिकोण उस तक नहीं पहुंच पाते।

Algorithm Bias: अगर AI का प्रशिक्षण डेटा पक्षपातपूर्ण है, तो रिकमेंडेशन भी पक्षपातपूर्ण होंगी। यह सांस्कृतिक विविधता के लिए बड़ा खतरा है।

Copyright और Data Privacy: AI-generated content में copyright का मुद्दा अभी पूरी तरह अनसुलझा है। साथ ही, दर्शकों के व्यक्तिगत डेटा का उपयोग किस हद तक उचित है, यह बहस जारी है।

भविष्य की झलक: AI-संचालित OTT कैसा दिखेगा?

2026 OTT और AI के गठजोड़ का सिर्फ शुरुआती अध्याय है। आने वाले वर्षों में अत्यधिक व्यक्तिगत (हाइपर-पर्सनलाइज्ड) होमपेज, रियल-टाइम बहुभाषी स्ट्रीमिंग, आवाज़ के जरिए कंटेंट खोजने की सुविधा और AI-संचालित इंटरैक्टिव कंटेंट आम हो जाएंगे। AI द्वारा तैयार किए गए ट्रेलर्स का इस्तेमाल पहले से ही शुरू हो चुका है। साथ ही, व्यक्तिगत पसंद के अनुरूप विज्ञापन दिखाने वाला विज्ञापन इकोसिस्टम भी और अधिक उन्नत एवं प्रभावी होगा।

लेकिन इस बदलाव के साथ जिम्मेदारी भी है। जो प्लेटफॉर्म्स AI को सिर्फ मुनाफे का औजार बनाएंगे, वे दर्शकों का भरोसा खोएंगे। जो इसे दर्शकों के अनुभव को बेहतर बनाने, विविधता को बढ़ाने और रचनात्मकता को सशक्त करने के लिए इस्तेमाल करेंगे, वे मनोरंजन की दुनिया पर राज करेंगे।

OTT का भविष्य AI से होकर गुजरता है, यह तय है। सवाल सिर्फ यह है कि इस रास्ते पर हम किस दिशा में चलते हैं। 

 

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e4m Play Streaming Media Awards 2026: कंटेंट, क्रिएटिविटी व इनोवेशन को मिलेगा बड़ा मंच

कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रैंड्स, प्लेटफॉर्म्स और प्रोफेशनल्स को सम्मानित करने के लिए e4m Play Streaming Media Awards 2026 का आयोजन 11 जून को किया जाएगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 10 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 10 June, 2026
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स्ट्रीमिंग और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में उत्कृष्ट काम करने वाले कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रैंड्स, प्लेटफॉर्म्स और प्रोफेशनल्स को सम्मानित करने के लिए e4m Play Streaming Media Awards 2026 का आयोजन 11 जून को किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित अवॉर्ड्स उन लोगों और संस्थाओं की उपलब्धियों को पहचान देने के लिए आयोजित किए जाते हैं, जिन्होंने अपने नवाचार, रचनात्मकता और दमदार स्टोरीटेलिंग के जरिए इंडस्ट्री पर खास प्रभाव छोड़ा है।

वर्षों से e4m Play Streaming Media Awards स्ट्रीमिंग इकोसिस्टम में बेहतरीन काम को सम्मानित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। ओरिजिनल कंटेंट, प्रभावशाली कैंपेन, नई प्लेटफॉर्म रणनीतियों और ऑडियंस एंगेजमेंट से जुड़ी पहल तक, ये अवॉर्ड्स उन प्रयासों को सामने लाते हैं जो तेजी से बदलती डिजिटल एंटरटेनमेंट दुनिया को नई दिशा दे रहे हैं।

यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रतिभाओं, कंटेंट, ब्रैंड्स और प्लेटफॉर्म्स की उत्कृष्टता, रचनात्मकता और नवाचार का जश्न मनाता है। मीडिया, एंटरटेनमेंट, विज्ञापन और स्ट्रीमिंग सेक्टर के प्रमुख खिलाड़ियों को एक साथ लाते हुए e4m Play Streaming Media Awards 2026 उन लोगों और संगठनों को सम्मानित करेगा जो इंडस्ट्री में नए मानक स्थापित कर रहे हैं।

OTT प्लेटफॉर्म्स और कंटेंट क्रिएटर्स से लेकर मार्केटिंग एजेंसियों और इनोवेटर्स तक, e4m Play Streaming Media Awards की विभिन्न श्रेणियां इस इंडस्ट्री की विविधता और गतिशीलता को दर्शाती हैं। इस वर्ष, AMFI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) Venkat Nageswar Chalasani मार्केटिंग ज्यूरी चेयर रहे, जबकि फिल्म निर्देशक और एडिटर Rahul Rawail टैलेंट और कंटेंट श्रेणियों के ज्यूरी चेयर रहे। इसके अलावा विज्ञापन, मीडिया और मार्केटिंग जगत के कई प्रतिष्ठित नेता और विशेषज्ञ भी ज्यूरी का हिस्सा रहे।

कल आयोजित होने वाली यह भव्य अवॉर्ड्स नाइट टैलेंट और इनोवेशन का जश्न मनाएगी। साथ ही उन विचारों और उपलब्धियों को भी सामने लाएगी जो स्ट्रीमिंग मीडिया के भविष्य को आकार दे रहे हैं।

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नेटफ्लिक्स के बोर्ड में बड़ा बदलाव, जय होग बने चेयरमैन

दुनिया की प्रमुख स्ट्रीमिंग कंपनी नेटफ्लिक्स ने अपने बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर जय होग को बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया है।

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Published - Saturday, 06 June, 2026
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Saturday, 06 June, 2026
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दुनिया की प्रमुख स्ट्रीमिंग कंपनी नेटफ्लिक्स ने अपने बोर्ड में बड़ा बदलाव करते हुए लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर जय होग को बोर्ड का नया चेयरमैन नियुक्त किया है। जय होग, नेटफ्लिक्स के को-फाउंडर व पूर्व चेयरमैन रीड हेस्टिंग्स की जगह लेंगे।

रीड हेस्टिंग्स ने अप्रैल में घोषणा की थी कि वह नेटफ्लिक्स के बोर्ड से इस्तीफा दे रहे हैं। जय होग ग्रोथ इक्विटी फर्म TCV (Technology Crossover Ventures) के को-फाउंडर हैं। उनकी कंपनी लंबे समय से नेटफ्लिक्स में निवेशक रही है और कंपनी के विकास के सफर में अहम भूमिका निभाती रही है।

 जय होग का नेटफ्लिक्स से जुड़ाव भी काफी पुराना है। वह वर्ष 1999 से नेटफ्लिक्स के बोर्ड का हिस्सा हैं और पिछले एक दशक से अधिक समय से लीड इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

नेटफ्लिक्स के अलावा जय होग अन्य प्रमुख कंपनियों के बोर्ड में भी शामिल हैं। वह Zillow Group और Peloton Interactive के बोर्ड सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

कंपनी का मानना है कि नेटफ्लिक्स के साथ उनके लंबे अनुभव और नेतृत्व क्षमता से बोर्ड को नई दिशा मिलेगी और कंपनी की भविष्य की रणनीतियों को मजबूती मिलेगी।

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क्या सिनेमाघरों का स्वर्ण युग लौट आया है या OTT अब भी आगे है?

मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 05 June, 2026
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Friday, 05 June, 2026
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मार्च 2020 में जब देशभर के सिनेमाघर बंद हुए, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह महज एक अस्थायी ठहराव नहीं, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ढांचे को हमेशा के लिए बदलने वाला मोड़ है। लोग घरों में बंद हुए और OTT प्लेटफॉर्म्स ने अपनी सबसे बड़ी छलांग लगाई। Netflix, Amazon Prime, Disney+ Hotstar, सब एकसाथ भारतीय दर्शकों के ड्रॉइंग रूम में घुस आए। जब थिएटर खुले, तो सवाल यह था कि क्या दर्शक वापस आएंगे? आंकड़े कहते हैं, हां, लेकिन पुरानी शर्तों पर नहीं।

थिएटर की वापसी: रिकॉर्ड तोड़ा, पर खाली कुर्सियां अभी भी बोल रही हैं

Ormax Media की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 भारतीय बॉक्स ऑफिस का अब तक का सबसे बड़ा साल रहा। कुल ग्रॉस बॉक्स ऑफिस ₹13,395 करोड़ रहा, यह इतिहास में पहली बार था जब भारतीय बॉक्स ऑफिस ₹13,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर गया और 2023 के ₹12,226 करोड़ के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। 37 फिल्में ₹100 करोड़ का क्लब पार कर गईं, जो 2024 की 22 फिल्मों से काफी ज्यादा थीं। 2026 में यह गति जारी है, जनवरी-मार्च 2026 में ₹3,440 करोड़ का बॉक्स ऑफिस दर्ज हुआ, जो 2025 की समान अवधि से 17% अधिक है।

तुलना के लिए देखें: 2024 में कुल बॉक्स ऑफिस ₹11,833 करोड़ था, जो 2023 (₹12,226 करोड़) के बाद दूसरा सबसे बड़ा साल था। 2019 (कोविड-पूर्व) में यह आंकड़ा ₹10,948 करोड़ था।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है। संख्याएं बड़ी दिखती हैं क्योंकि टिकट की कीमतें बढ़ी हैं। 2019 में औसत टिकट मूल्य (ATP) ₹106 था, 2024 में ₹134 और 2025 में यह ₹161 हो गया, यानी 2019 के मुकाबले 52% की बढ़ोतरी। लेकिन दर्शकों की संख्या (फुटफॉल) उलटी दिशा में गई। 2019 में 103 करोड़ दर्शक थिएटर पहुंचे थे, जो 2024 में 88.3 करोड़ और 2025 में घटकर 83.2 करोड़ रह गए, 2019 की तुलना में 19% की गिरावट।

भारत में कुल 10,033 स्क्रीन हैं (2025)। PVR INOX, देश की सबसे बड़ी मल्टीप्लेक्स चेन, 111 शहरों में 1,749 स्क्रीन संचालित करती है। सिंगल स्क्रीन थिएटर की हालत ज्यादा चिंताजनक है, हर साल करीब 150 सिंगल स्क्रीन बंद होते हैं, जबकि नए मल्टीप्लेक्स स्क्रीन जुड़ते रहते हैं।

OTT: उछाल के बाद परिपक्वता का दौर

कोविड के दौरान जो OTT क्रांति आई, वह 2025-26 में एक नए चरण में है, तेज ग्रोथ की जगह अब रणनीतिक विस्तार ने ली है।

JioHotstar, फरवरी 2025 में JioCinema और Disney+ Hotstar के विलय से बना यह प्लेटफॉर्म, IPL 2025 तक 30 करोड़ सब्सक्राइबर तक पहुंचा और मार्च 2026 तक MAU 55 करोड़ (550 मिलियन) हो गए। IPL 2026 ने नए रिकॉर्ड बनाए, ओपनिंग वीकेंड में ही 51.5 करोड़ दर्शकों तक रीच (reach) बनी, वॉच-टाइम 2025 के मुकाबले 26% बढ़ा, और लीग स्टेज के दौरान cumulative रीच 1.1 अरब पार कर गई (IPL 2025 की फाइनल रीच 1.19 अरब थी)। डिजिटल रीच 15%, CTV रीच 25% और रीजनल लैंग्वेज वॉच-टाइम 42% बढ़ा। JioHotstar का FY26 में परिचालन राजस्व ₹31,048 करोड़ और PBT ₹3,228 करोड़ रहा।

Amazon Prime Video के भारत में करीब 2.5-3 करोड़ पेड सब्सक्राइबर हैं। Netflix के भारत में 2 करोड़ (20 मिलियन) पेड सब्सक्राइबर हो गए हैं, जो 2021 के महज 55 लाख से काफी वृद्धि है। Netflix का भारत में राजस्व 2025 में $905 मिलियन (लगभग ₹7,600 करोड़) तक पहुंचने का HSBC का अनुमान था।

OTT का मुद्रीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है। Ormax OTT Audience Report 2025 के अनुसार कुल OTT यूजर्स 60.1 करोड़ के पार हैं, लेकिन active paid subscriptions केवल 14.82 करोड़ हैं, बाकी बड़ी संख्या मुफ्त या विज्ञापन-सहित कंटेंट पर निर्भर है।

AVOD बनाम SVOD का संघर्ष अब और स्पष्ट है। Amazon Prime Video ने 2025 में भारत में विज्ञापन-सहित बेस प्लान शुरू किया। Statista के अनुसार भारत का OTT वीडियो बाजार 2026 में $4.96 अरब तक पहुंचने का अनुमान है, और 2030 तक $6.76 अरब होने की संभावना है।

बड़ी फिल्में: थिएटर की असली लाइफलाइन

थिएटर बिजनेस का एक कड़वा सच यह है कि वह अब कुछ बड़ी इवेंट फिल्मों पर टिका है।

2024 की टॉप फिल्में: 'पुष्पा 2: द रूल' ₹1,403 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) के साथ सबसे बड़ी हिट रही। 'कल्कि 2898 AD' लगभग ₹758 करोड़ और 'स्त्री 2' ₹740 करोड़ डोमेस्टिक ग्रॉस पर रहीं।

2025 की टॉप फिल्में: 'धुरंधर' (₹950 करोड़) ने अब तक की सबसे बड़ी हिंदी फिल्म का रिकॉर्ड बनाया, 'स्त्री 2' के ₹698 करोड़ के आंकड़े को पार करते हुए। 'कांतारा: ए लेजेंड चैप्टर 1' और 'छावा' भी ₹500 करोड़+ क्लब में रहीं। 'सैयारा', 'कूली' और एनिमेटेड फिल्म 'महावतार नरसिम्हा' ₹300 करोड़+ पर रहीं।

2026 की शुरुआत: 'धुरंधर: द रिवेंज' (मार्च 2026) ने ₹1,375 करोड़ (डोमेस्टिक ग्रॉस) कमाकर हिंदी फिल्मों का नया सर्वकालिक रिकॉर्ड बनाया, वर्ल्डवाइड यह ₹1,813 करोड़ ($200 मिलियन+) तक पहुंची।

हिंदी सिनेमा के लिए उल्लेखनीय बात: 2025 में 93% हिंदी बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मूल हिंदी फिल्मों से आया, डब दक्षिण भारतीय फिल्मों पर निर्भरता 31% (2024) से घटकर मात्र 7% रह गई।

मिड-बजट सिनेमा: OTT ने छीना, OTT ने दिया

20-80 करोड़ बजट वाली फिल्मों की कहानी सबसे दिलचस्प है। कोविड के बाद के कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स ने इन फिल्मों के लिए "गारंटीड डील" दी, रिलीज से पहले ही पैसे मिल जाते थे। इससे निर्माता थिएटर रिलीज का जोखिम उठाने से बचने लगे।

लेकिन 2025 में पासा पलटा। OTT प्लेटफॉर्म्स अब ज्यादा सतर्क और चयनात्मक हो गए हैं। उन्होंने थिएटर-अप्रूव्ड फिल्मों को तरजीह देनी शुरू की है, जिसका मतलब है कि अच्छा थिएटरी प्रदर्शन OTT डील की कीमत बढ़ाता है। 'धुरंधर: द रिवेंज' जैसी फिल्म के डिजिटल अधिकार JioHotstar ने ₹150 करोड़ में खरीदे, जो पहली फिल्म से लगभग दोगुना था। यह बदलाव मिड-बजट फिल्मों को एक बार फिर थिएटर रिलीज की ओर धकेल रहा है।

थिएटरी विंडो: अदृश्य युद्ध जारी है

पहले फिल्में थिएटर में 8-12 हफ्ते रहती थीं। कोविड के बाद यह खिड़की सिकुड़ी। आज स्थिति यह है:

हिंदी फिल्में आम तौर पर 6-8 हफ्ते बाद OTT पर आती हैं, लेकिन कमजोर फिल्में कभी-कभी 4 हफ्ते में ही चली जाती हैं। तेलुगु और तमिल इंडस्ट्री में 3-4 हफ्ते की विंडो सामान्य हो चुकी है।

मल्टीप्लेक्स चेन्स इसका विरोध कर रही हैं। कई बड़े मल्टीप्लेक्स ने 8 हफ्ते से कम विंडो वाली फिल्मों को स्क्रीन देने से मना कर दिया। 'धुरंधर: द रिवेंज' IPL 2026 की समाप्ति के बाद (मई-जून 2026) JioHotstar पर आने का अनुमान है, यानी करीब 10 हफ्ते की थिएटरी विंडो।

थिएटर अब 'अनुभव' बेच रहे हैं

जब कंटेंट OTT पर मिलने लगा, तो थिएटर ने रणनीति बदली, वे अब सिर्फ फिल्म नहीं, बल्कि अनुभव बेचते हैं। IMAX ने भारत में फरवरी 2025 तक 31 स्क्रीन स्थापित किए हैं और 14 और आने वाले हैं। 4DX, रिक्लाइनर स्क्रीन, Premium Large Format (PLF), ये सब प्रीमियम टिकट के साथ F&B राजस्व बढ़ाने का तरीका हैं। PVR INOX अब फिल्म रिलीज से ज्यादा F&B और प्रीमियम फॉर्मेट से कमाई करने की ओर बढ़ रही है।

रीजनल सिनेमा: असली विजेता

अगर कोई सबसे ज्यादा फायदे में रहा, तो वह है रीजनल सिनेमा। 2024 में मलयालम सिनेमा ने पहली बार ₹1,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया और बाजार हिस्सेदारी 5% से दोगुनी होकर 10% हो गई; 2025 में यह गति बनी रही। कन्नड़ सिनेमा 2025 की एकमात्र दक्षिण भारतीय भाषा रही जिसने फुटफॉल में वृद्धि दर्ज की। गुजराती सिनेमा ने 2025 में 189% की वृद्धि के साथ ₹242 करोड़ का आंकड़ा छुआ।

OTT पर भी रीजनल कंटेंट की मांग बढ़ी है। JioHotstar और Netflix दोनों ही क्षेत्रीय भाषाओं में ओरिजिनल कंटेंट पर जोर दे रहे हैं। 'मंजुम्मेल बॉयज' (मलयालम), 'कांतारा', 'RRR' जैसी फिल्मों ने दिखाया कि भाषा अब बाधा नहीं है।

विज्ञापन बाजार: डिजिटल का बोलबाला

Ipsos के अनुसार, FY2025 में भारत का कुल विज्ञापन बाजार ₹1,11,000 करोड़ पार कर गया, जिसमें डिजिटल का हिस्सा ₹49,000 करोड़ (44% share) रहा, 20% की वार्षिक वृद्धि के साथ। FY2026 में यह 15% बढ़कर ₹56,400 करोड़ (कुल खर्च का 46%) तक पहुंचने का अनुमान है। CTV विज्ञापन खर्च 2022 के ₹450 करोड़ से तीन गुना बढ़कर 2024 में ₹1,500 करोड़ हो गया, और 2025 में ₹2,300-2,500 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान था, 2027 तक ₹3,500 करोड़ का लक्ष्य है।

थिएटर विज्ञापन भी धीरे-धीरे लौट रहे हैं, लेकिन डिजिटल की तुलना में उनका हिस्सा अभी बहुत कम है।

अब केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, साथ काम करने का दौर

2025-26 के आंकड़े एक स्पष्ट तस्वीर देते हैं, OTT और थिएटर अब एक-दूसरे के दुश्मन नहीं, बल्कि एक ही इकोसिस्टम के दो हिस्से हैं। बड़ी स्पेक्टेकल फिल्में थिएटर के लिए हैं, वहां बड़ा पर्दा, IMAX, 4DX, और सामूहिक अनुभव का कोई विकल्प नहीं। मिड-बजट और सीरीज कंटेंट OTT का प्राकृतिक घर बन रहा है।

लेकिन चुनौतियां असली हैं। फुटफॉल 2019 से 19% नीचे है और गिरावट जारी है। टिकटों की बढ़ती कीमतों के दम पर ग्रोथ हासिल करने की भी एक सीमा है। OTT प्लेटफॉर्म्स के पास 60 करोड़ से ज्यादा यूजर्स हैं, लेकिन इनमें से सिर्फ 14.82 करोड़ लोग ही पैसे देकर सब्सक्रिप्शन लेते हैं। वहीं, दूसरी तरफ सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की संख्या लगातार घट रही है और कई थिएटर बंद हो रहे हैं।

अगले पांच साल में जो इंडस्ट्री उभरेगा, वह न पुराना थिएटर-प्रधान होगा, न पूरी तरह OTT-केंद्रित। यह होगा एक हाइब्रिड एंटरटेनमेंट अर्थव्यवस्था, जिसमें सिनेमाघर प्रीमियम अनुभव केंद्र होंगे, और OTT रोज़ की कहानियों का घर। 

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WAVES OTT ने बनाया बड़ा रिकॉर्ड, दो साल से भी कम समय में हासिल की ये बड़ी उपलब्धि

प्रसार भारती के डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म WAVES OTT ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
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प्रसार भारती के डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म WAVES OTT ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। नवंबर 2024 में शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म ने अब 1 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने कहा कि यह उपलब्धि देश के सार्वजनिक डिजिटल मीडिया इकोसिस्टम के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्रालय के अनुसार, यह सफलता इस बात का संकेत है कि भारत और दुनिया भर के दर्शक भरोसेमंद, समावेशी और विविधतापूर्ण कंटेंट उपलब्ध कराने वाले स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म को तेजी से अपना रहे हैं।

मंत्रालय ने बताया कि WAVES OTT के पास अब 1 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जबकि इसके डाउनलोड्स की संख्या 1 करोड़ 40 लाख से ज्यादा हो चुकी है। अब प्लेटफॉर्म अपने विकास के अगले चरण पर फोकस कर रहा है।

इस अगले चरण में कंटेंट साझेदारियों का विस्तार, विभिन्न डिवाइस और प्लेटफॉर्म पर पहुंच बढ़ाना, क्षेत्रीय और शैक्षणिक कंटेंट को और मजबूत करना शामिल है। साथ ही मार्च 2027 तक 2 करोड़ रजिस्टर्ड यूजर्स का लक्ष्य भी रखा गया है।

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रसार भारती ने कहा कि यह सफलता डिजिटल युग में सार्वजनिक सेवा मीडिया की बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाती है। साथ ही यह उस सोच को भी सही साबित करती है, जिसके तहत टेलीविजन, रेडियो, ऑन-डिमांड कंटेंट, शिक्षा, संस्कृति और विरासत से जुड़ी सामग्री को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था।

WAVES OTT पर फिलहाल 24 हजार से अधिक कंटेंट टाइटल और 15 हजार घंटे से ज्यादा कंटेंट उपलब्ध है। इसमें मनोरंजन, समाचार, शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म और जनसेवा से जुड़ी सामग्री शामिल है।

यह प्लेटफॉर्म 140 से अधिक लाइव टीवी चैनल, 200 से ज्यादा रेडियो सेवाएं, लाइव इवेंट स्ट्रीमिंग, PM eVidya चैनलों के जरिए शैक्षणिक कंटेंट और प्रसार भारती के हजारों घंटे के आर्काइव कंटेंट की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।

प्रसार भारती का मानना है कि WAVES OTT की यह उपलब्धि भारत में डिजिटल सार्वजनिक मीडिया की बढ़ती ताकत और स्वदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रति बढ़ते भरोसे का प्रमाण है।

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IPTV पाइरेसी नेटवर्क का भंडाफोड़, JioStar ने छत्तीसगढ़ में दर्ज कराई FIR

'जियोस्टार इंडिया' (JioStar India) ने छत्तीसगढ़ में कथित IPTV पाइरेसी नेटवर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 01 June, 2026
Last Modified:
Monday, 01 June, 2026
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इमरान फ़ज़ल, असिसटेंट एडिटर, एक्सचेज4मीडिया ।।

'जियोस्टार इंडिया' (JioStar India) ने छत्तीसगढ़ में कथित IPTV पाइरेसी नेटवर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। कंपनी का आरोप है कि उसके टीवी चैनलों और OTT प्लेटफॉर्म 'जियोहॉटार' (JioHotstar) के कंटेंट को बिना अनुमति इंटरनेट आधारित सिस्टम के जरिए अवैध रूप से प्रसारित किया जा रहा था।

एक्सचेंज4मीडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, कोरिया जिले के बैकुंठपुर पुलिस स्टेशन में राजीव पंजियारा और Citynet Infra Pvt Ltd के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS), कॉपीराइट एक्ट और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

JioStar की ओर से दर्ज शिकायत में कहा गया है कि कंपनी के कॉपीराइट वाले टीवी चैनलों और JioHotstar पर उपलब्ध कंटेंट को IPTV इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए बिना किसी अधिकृत अनुमति के दोबारा प्रसारित किया जा रहा था।

30 मई 2026 को दर्ज एफआईआर के अनुसार, मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 303 और 314, कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 63 और 65 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 की धारा 66 के तहत आरोप लगाए गए हैं।

जांच में सामने आया कथित अवैध IPTV नेटवर्क

शिकायत में कहा गया है कि JioStar अपने कई टीवी चैनलों और JioHotstar स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म का संचालन करती है और उसके पास इन कंटेंट्स के विशेष कॉपीराइट और ब्रॉडकास्टिंग अधिकार हैं। कंपनी का आरोप है कि IPTV के जरिए उसके चैनलों और OTT कंटेंट का अवैध री-ट्रांसमिशन और सार्वजनिक प्रसारण किया जा रहा था, जिससे उसके अधिकारों का उल्लंघन हो रहा था।

24 मई 2026 को की गई जांच के दौरान कंपनी के प्रतिनिधियों ने बैकुंठपुर के वार्ड नंबर 7, स्कूल पारा स्थित Citynet Infra Pvt Ltd से जुड़े एक नेटवर्क की पहचान की। एफआईआर में दावा किया गया है कि कंपनी के पास पारंपरिक केबल टीवी (CATV) नेटवर्क के जरिए कंटेंट वितरित करने की अनुमति हो सकती है, लेकिन IPTV सिस्टम, OTT री-ब्रॉडकास्टिंग, इंटरनेट प्रोटोकॉल आधारित स्ट्रीमिंग या अन्य डिजिटल माध्यमों से कंटेंट वितरित करने का कोई लाइसेंस या अधिकार नहीं था।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक सबूतों से पता चला कि JioStar के कॉपीराइट वाले कंटेंट को IPTV चैनलों के माध्यम से अवैध रूप से प्रसारित किया जा रहा था।

Amazon Fire TV डिवाइस को बनाया गया सबूत

एफआईआर के मुताबिक जांचकर्ताओं ने कथित स्ट्रीमिंग गतिविधियों को "City Digital" Fire Stick नामक डिवाइस के जरिए रिकॉर्ड किया। यह डिवाइस Amazon Fire TV इंटरफेस से जुड़ा हुआ था और इसके जरिए विभिन्न IPTV चैनल कैटेगरी तक पहुंच बनाई जा रही थी, जहां कॉपीराइटेड कंटेंट उपलब्ध कराया जा रहा था।

जांच में मनोरंजन, फिल्म, खेल और बच्चों के कार्यक्रमों से जुड़े कई चैनलों का कथित तौर पर अवैध री-ट्रांसमिशन पाया गया।

मनोरंजन चैनलों में Star Plus, Star Bharat, Star Utsav, Colors और Colors Rishtey शामिल बताए गए हैं। फिल्म चैनलों में Star Gold, Star Gold 2, Star Gold Thrills और Star Gold Select का नाम सामने आया। वहीं खेल चैनलों में Star Sports 1, Star Sports 2, Star Sports 1 Hindi और Star Sports Select 2 शामिल थे। बच्चों के चैनलों में Disney Channel, Super Hungama, Hungama TV और Disney Junior को भी कथित तौर पर IPTV प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध पाया गया।

जांचकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि इसी IPTV नेटवर्क पर CCN Aradhya 13 और CCN Aradhya नाम के स्थानीय चैनल भी प्रसारित किए जा रहे थे।

JioStar ने लगाया बड़े पैमाने पर कॉपीराइट उल्लंघन का आरोप

कंपनी का कहना है कि JioHotstar का कॉपीराइटेड कंटेंट बिना किसी वैध अनुमति के 24 घंटे लगातार स्ट्रीम किया जा रहा था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित ऑपरेटर के पास JioStar के चैनलों या JioHotstar के कंटेंट को प्राप्त करने, दोबारा प्रसारित करने, स्ट्रीम करने, सार्वजनिक रूप से दिखाने या व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल करने की कोई अनुमति नहीं थी।

JioStar का दावा है कि यह गतिविधियां कॉपीराइटेड सामग्री के व्यावसायिक शोषण और बौद्धिक संपदा अधिकारों के अनधिकृत इस्तेमाल के दायरे में आती हैं।

कंपनी ने यह भी कहा कि डिजिटल नेटवर्क के जरिए कॉपीराइटेड कंटेंट को डाउनलोड करना, स्टोर करना, वितरित करना, दोबारा प्रसारित करना और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना कॉपीराइट कानून और आईटी कानून दोनों के तहत अपराध है।

IPTV पाइरेसी के खिलाफ बड़े अभियान का हिस्सा

यह एफआईआर IPTV आधारित पाइरेसी के खिलाफ ब्रॉडकास्टर्स और OTT प्लेटफॉर्म्स द्वारा चलाए जा रहे व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। IPTV पाइरेसी नेटवर्क भारत में कंटेंट चोरी के सबसे तेजी से बढ़ते तरीकों में से एक बन गए हैं।

आमतौर पर ऐसे नेटवर्क प्रीमियम टीवी चैनलों और OTT कंटेंट को इकट्ठा करके इंटरनेट आधारित ऐप्स और सेट-टॉप डिवाइस के जरिए बेहद कम कीमत पर उपलब्ध कराते हैं।

शिकायत में कहा गया है कि ऐसी गतिविधियों से कंटेंट मालिकों और ब्रॉडकास्टर्स को आर्थिक और प्रतिष्ठा दोनों स्तरों पर नुकसान होता है, क्योंकि इससे वैध सब्सक्रिप्शन और लाइसेंस प्राप्त वितरण नेटवर्क प्रभावित होते हैं।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एफआईआर में कहा गया है कि आरोपों के समर्थन में इलेक्ट्रॉनिक सबूत, वीडियो रिकॉर्डिंग, टाइमस्टैम्प, फॉरेंसिक फिंगरप्रिंट और अन्य तकनीकी सामग्री एकत्र कर जमा कराई गई है।

JioStar ने शिकायत के साथ कई कॉर्पोरेट दस्तावेज भी जमा किए हैं, जिनमें Star India Pvt Ltd से JioStar India Pvt Ltd में हुए बदलाव से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।

अब जांच एजेंसियां उपलब्ध सबूतों की समीक्षा करेंगी और तय करेंगी कि आरोपित पक्षों के खिलाफ कॉपीराइट, तकनीकी और संपत्ति संबंधी कानूनों के तहत आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाई जा सकती है या नहीं।

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करण दयानिधि मारन ने लॉन्च किया तमिलनाडु का पहला माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म ‘KadhaiShorts’

इसके साथ ही ‘कधईक्लब’ (KadhaiClub) नाम से एक विशेष इकोसिस्टम भी शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्टिकल फिल्ममेकिंग और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के लिए नई प्रतिभाओं को तैयार करना है।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 29 May, 2026
Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
karan Maran

मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में मोबाइल-फर्स्ट कंटेंट की बढ़ती लोकप्रियता के बीच मारन ग्रुप ने नई पहल करते हुए तमिलनाडु का पहला माइक्रो-ड्रामा प्लेटफॉर्म ‘कधईशॉर्ट्स’ (KadhaiShorts) लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म की घोषणा करण दयानिधि मारन ने की। इसके साथ ही ‘कधईक्लब’ (KadhaiClub) नाम से एक विशेष इकोसिस्टम भी शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य वर्टिकल फिल्ममेकिंग और माइक्रो-ड्रामा कंटेंट के लिए नई प्रतिभाओं को तैयार करना है।

‘कधईशॉर्ट्स’ को खास तौर पर मोबाइल दर्शकों के लिए डिजाइन किया गया है। प्लेटफॉर्म पर दो-दो मिनट के एपिसोड के रूप में ‘कुट्टी सीरीज’ पेश की जाएंगी, जिनमें तमिल संस्कृति, स्थानीय भावनाओं और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कहानियों को दिखाया जाएगा। लॉन्च के समय प्लेटफॉर्म पर छह अलग-अलग जॉनर की तमिल ओरिजिनल माइक्रो-ड्रामा सीरीज उपलब्ध कराई गई हैं।

कंपनी के मुताबिक, इस समय 100 से ज्यादा ओरिजिनल कंटेंट प्रोडक्शन में हैं। फिलहाल इसकी शुरुआत तमिल कंटेंट से की गई है, लेकिन चालू वित्त वर्ष के अंत तक तेलुगु, कन्नड़, हिंदी, मलयालम और बंगाली भाषाओं में भी हाइपरलोकल माइक्रो-ड्रामा लॉन्च किए जाएंगे।

दर्शकों तक प्रीमियम कंटेंट को किफायती तरीके से पहुंचाने के लिए प्लेटफॉर्म ने ‘पे-पर-सीरीज’ मॉडल अपनाया है। इसकी शुरुआती कीमत सिर्फ 20 रुपये रखी गई है। कंपनी का मानना है कि इससे हर वर्ग के दर्शकों तक डिजिटल मनोरंजन आसानी से पहुंच सकेगा।

मारन ग्रुप के वाइस चेयरमैन और ‘कधईशॉर्ट्स’ के फाउंडर करण दयानिधि मारन ने कहा, ‘दर्शकों की देखने की आदतें तेजी से बदल रही हैं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री अब उस बदलाव के साथ खुद को ढाल रही है। माइक्रो-ड्रामा सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि मोबाइल-फर्स्ट एंटरटेनमेंट का भविष्य है। हम इस क्षेत्र में सिर्फ मौजूद रहने नहीं, बल्कि नेतृत्व करने आए हैं।’

वहीं, ‘कधईशॉर्ट्स’ के सीईओ सबरीश वेंकट ने कहा कि भारत में स्मार्टफोन यूजर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है और लोग अब हाई-फ्रीक्वेंसी मोबाइल एंटरटेनमेंट की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दर्शक भावनात्मक कहानियों से दूर नहीं जा रहे, बल्कि ऐसे फॉर्मेट की तरफ बढ़ रहे हैं जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से फिट हो सके।

कंपनी हर महीने 10 नई वर्टिकल माइक्रो-ड्रामा सीरीज लॉन्च करेगी। इन सीरीज को सिनेमाई अंदाज में तैयार किया जाएगा ताकि कम समय में भी दर्शकों को मजबूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस हो सके। इसके साथ लॉन्च किए गए ‘कधईक्लब’ का उद्देश्य नए लेखकों, कलाकारों, एडिटर्स, सिनेमैटोग्राफर्स और डायरेक्टर्स को इस नए फॉर्मेट से जोड़ना है। कंपनी के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म से अब तक 12 हजार से ज्यादा सदस्य जुड़ चुके हैं।

कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि मार्च 2027 तक 200 से ज्यादा प्रोफेशनल्स को प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा और 4,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे। इसके अलावा मनोरंजन और सर्विस सेक्टर में 10 हजार से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की भी संभावना जताई गई है। कधईशॉर्ट्स भविष्य में ब्रैंड इंटीग्रेशन के नए मॉडल पर भी काम करेगा, जिसमें ब्रैंड्स को पारंपरिक विज्ञापन की बजाय कहानी का हिस्सा बनाया जाएगा।

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OTTplay बंद करने के बाद HMVL का नया दांव, ब्रिटेन की कंपनी में करेगी निवेश

‘हिन्दुस्तान’ अखबार प्रकाशित करने वाली कंपनी हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने OTTplay कारोबार बंद करने के बाद अब नए डिजिटल बिजनेस पर बड़ा दांव लगाया है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 29 May, 2026
Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
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‘हिन्दुस्तान’ अखबार प्रकाशित करने वाली कंपनी हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स लिमिटेड (HMVL) ने OTTplay कारोबार बंद करने के बाद अब नए डिजिटल बिजनेस पर बड़ा दांव लगाया है। कंपनी ने ब्रिटेन की लीगल टेक कंपनी Assetvault Limited (AasaanWill) में करीब 21.66 करोड़ रुपये तक निवेश करने का फैसला किया है।

कंपनी के बोर्ड ने 28 मई 2026 को हुई बैठक में इस निवेश को मंजूरी दी। HMVL यह निवेश AasaanWill के इक्विटी शेयर खरीदकर करेगी। कंपनी का कहना है कि यह निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न हासिल करने और अपने मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल कर नए कारोबार को बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है।

AasaanWill ऑनलाइन Will Writing और succession planning सेवाएं देने वाली कंपनी है। यह प्लेटफॉर्म भारत और विदेशों में रहने वाले भारतीयों, खासकर NRI परिवारों को डिजिटल तरीके से कानूनी वसीयत बनाने की सुविधा देता है। कंपनी की स्थापना 2016 में हुई थी और इसका मुख्य फोकस ऑनलाइन लीगल सेवाओं पर है।

HMVL यह निवेश दो चरणों में करेगी। पहले चरण में कंपनी करीब 11.16 करोड़ रुपये का निवेश कर लगभग 7 फीसदी हिस्सेदारी ले सकती है। दूसरे चरण का निवेश भविष्य की वैल्यूएशन के आधार पर तय होगा। इस पूरी डील के अगस्त 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। कंपनी ने कहा है कि निवेश से जुड़े जरूरी रेगुलेटरी अप्रूवल RBI और FEMA नियमों के तहत लिए जाएंगे।

इसके साथ ही HMVL ने वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड नतीजों को भी मंजूरी दी। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू बढ़कर 739.64 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष में 673.10 करोड़ रुपये था। वहीं कंपनी के मुख्य कारोबार से टैक्स चुकाने के बाद 141.08 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ।

हालांकि OTTplay कारोबार बंद करने का असर कंपनी के नतीजों पर साफ दिखाई दिया। HMVL ने मार्च 2026 से OTTplay के नए सब्सक्रिप्शन बंद करने का फैसला लिया था। इस बंद हो रहे कारोबार की वजह से कंपनी को पूरे साल में करीब 92.39 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा कंपनी को कुछ पुराने समझौतों और जिम्मेदारियों के लिए अतिरिक्त पैसा भी अलग रखना पड़ा।

कंपनी ने यह भी बताया कि नए श्रम कानून लागू होने के कारण ग्रेच्युटी और एम्प्लॉयी लाभ से जुड़े खर्च बढ़े हैं। कंपनी ने इस अतिरिक्त खर्च को एक विशेष खर्च (Exceptional Item) के रूप में दिखाया है।

HMVL ने इस साल अपने शेयरधारकों को डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है। वहीं कंपनी के ऑडिटर्स ने भी कंपनी के वित्तीय नतीजों को सही माना है और किसी बड़ी गड़बड़ी या आपत्ति की बात नहीं कही है।

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तमिल सिनेमा के समर्थन में कमल हासन की बड़ी पहल, सरकारी OTT प्लेटफॉर्म की उठाई मांग

अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम प्रमुख कमल हासन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात कर तमिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े छह बड़े मुद्दों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 18 May, 2026
Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
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अभिनेता और मक्कल निधि मय्यम प्रमुख कमल हासन ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से मुलाकात कर तमिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े छह बड़े मुद्दों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा। इनमें सबसे प्रमुख मांग राज्य सरकार की अपनी ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरू करने की रही।

कमल हासन ने अपने एक्स अकाउंट पर जारी बयान में कहा कि तमिल दर्शकों को सस्ती दरों पर तमिल फिल्में, स्वतंत्र सिनेमा और डॉक्यूमेंट्री उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार को अपना ओटीटी प्लेटफॉर्म शुरू करना चाहिए।

उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री पर बढ़ते खर्च का भी मुद्दा उठाया। हासन ने सरकार से स्थानीय निकायों द्वारा लगाए जाने वाले 4 फीसदी एंटरटेनमेंट टैक्स को खत्म करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे तमिल फिल्म इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिलेगी।

कमल हासन ने पायरेसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु पुलिस के साइबर क्राइम विभाग में एक विशेष एंटी-पायरेसी टीम बनाई जानी चाहिए, जो ऑनलाइन लीक होने वाले कंटेंट को तुरंत हटाने की ताकत रखे।

उन्होंने राज्य के सिनेमाघरों में सभी फिल्मों के लिए रोज पांच शो चलाने की अनुमति देने की भी मांग की। हासन के मुताबिक इससे थिएटर मालिकों की कमाई बढ़ेगी और फिल्म प्रदर्शन कारोबार को सहारा मिलेगा।

इसके अलावा उन्होंने फिल्मों के ओटीटी रिलीज के लिए आठ हफ्ते की अनिवार्य विंडो तय करने की मांग की, ताकि थिएटर मालिकों और डिस्ट्रीब्यूटर्स को नुकसान न हो।

कमल हासन ने फिल्म प्रोडक्शन इंसेंटिव स्कीम शुरू करने की भी अपील की। उनका कहना है कि इससे तमिलनाडु फिर से देश का बड़ा फिल्म प्रोडक्शन हब बन सकता है, रोजगार बढ़ेगा और पर्यटन को भी फायदा मिलेगा।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि सिनेमा तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है और लाखों परिवारों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी है।

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