सिलिकॉन वैली छोड़ भारत लौटे श्यामल अनदकट: AI इकोसिस्टम पर जताया भरोसा

'ओपनएआई' की टीम का नेतृत्व कर चुके श्यामल अनदकट भारत लौट आए हैं। उनका मानना है कि अब वैश्विक स्तर की एआई कंपनियां दुनिया के किसी भी हिस्से से बनाई जा सकती हैं।

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
Shyaml Anadkat


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की अग्रणी कंपनी 'ओपनएआई' (OpenAI) में करीब चार वर्षों तक काम कर चुके श्यामल अनदकट (Shyaml Anadkat) भारत लौट आए हैं। सैन फ्रांसिस्को के बे एरिया (Bay Area) में स्थित 'ओपनएआई' (OpenAI) कार्यालय से एप्लाइड इवैल्स (Applied Evals) टीम का नेतृत्व करने वाले अनदकट अब भारत में रहकर एआई के भविष्य को आकार देने की तैयारी कर रहे हैं।

श्यामल अनदकट (Shyaml Anadkat) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी वापसी की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि 'ओपनएआई' (OpenAI) में लगभग चार साल बिताने के बाद वह इस वर्ष की शुरुआत में भारत लौट आए। उन्होंने लिखा कि उनका अब भी यह दृढ़ विश्वास है कि सुपरइंटेलिजेंस (Superintelligence) विज्ञान और तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाएगी और इसका लाभ पूरी मानवता को मिलेगा।

उन्होंने बताया कि भारत लौटने का एक प्रमुख कारण यहां के इकोसिस्टम से उनका गहरा जुड़ाव है। भारत में पले-बढ़े होने के कारण वह हमेशा यहां की प्रतिभा और संभावनाओं से जुड़े रहे हैं। वापसी के बाद उन्होंने भारत और एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र के कई शोधकर्ताओं और इंजीनियरों से बातचीत की, जिससे उन्हें महसूस हुआ कि यहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद हैं जो यहीं रहकर वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली तकनीक विकसित करना चाहते हैं।

अनदकट का मानना है कि भारत में प्रतिभा और अवसरों की कोई कमी नहीं है। उनके अनुसार सबसे बड़ी जरूरत इस विश्वास की है कि दुनिया बदलने वाली कंपनियां केवल सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) में ही नहीं, बल्कि दुनिया के किसी भी हिस्से से बनाई जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का यह एक दुर्लभ अवसर है, जो कई पीढ़ियों में एक बार मिलता है।

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Telegram क्यों बना भारत में बहस का केंद्र? पेपर लीक, प्राइवेसी व पायरेसी के बीच फंसा ऐप

भारत में Telegram इन दिनों सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि एक बड़े सार्वजनिक और नीतिगत विमर्श का विषय बन गया है।

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Tuesday, 23 June, 2026
Telegram7845

भारत में Telegram इन दिनों सिर्फ एक मैसेजिंग ऐप नहीं, बल्कि एक बड़े सार्वजनिक और नीतिगत विमर्श का विषय बन गया है। कभी प्राइवेसी, बड़े ग्रुप्स और तेज सूचना प्रसार के लिए लोकप्रिय रहा यह प्लेटफॉर्म अब परीक्षा सुरक्षा, कंटेंट मॉडरेशन, पायरेसी, फर्जी सूचनाओं और डिजिटल रेगुलेशन से जुड़े सवालों के केंद्र में है।

हालिया विवाद तब और गहरा गया जब NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं और लीक सामग्री के प्रसार को लेकर भारत सरकार ने Telegram पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया। इस कदम ने एक बार फिर उस बहस को तेज कर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्राइवेसी और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

भारत में Telegram की बढ़ती ताकत

Telegram की लोकप्रियता पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। कंपनी के संस्थापक पावेल ड्यूरोव के अनुसार भारत Telegram का सबसे बड़ा बाजार है और यहां 15 करोड़ से अधिक यूजर्स हैं। भारत सरकार द्वारा लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध की आलोचना करते हुए ड्यूरोव ने कहा कि इस फैसले का असर 150 मिलियन से ज्यादा भारतीय यूजर्स पर पड़ा।

वैश्विक स्तर पर Telegram ने 1 अरब से अधिक मंथली एक्टिव यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया है। भारत में इसकी लोकप्रियता की प्रमुख वजहें बड़े चैनल, 2 लाख तक सदस्यों वाले ग्रुप, क्लाउड स्टोरेज, बड़ी फाइल शेयरिंग क्षमता और अपेक्षाकृत मजबूत प्राइवेसी फीचर्स हैं।

आज Telegram का उपयोग केवल निजी बातचीत तक सीमित नहीं है। मीडिया संस्थान, कोचिंग संस्थान, निवेशक समुदाय, कंटेंट क्रिएटर्स, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक समूह भी बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

NEET विवाद और Telegram

Telegram को लेकर हालिया विवाद का सबसे बड़ा कारण NEET-UG 2026 परीक्षा रहा। भारत सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) का कहना है कि कुछ संगठित गिरोह Telegram का इस्तेमाल कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी भ्रामक या लीक सामग्री बेचने और प्रसारित करने के लिए कर रहे थे। इसी चिंता के चलते सरकार ने परीक्षा के पुनः आयोजन से पहले Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया।

सरकार का आरोप था कि Telegram के कुछ फीचर्स, विशेष रूप से संदेश संपादन (Message Editing), का दुरुपयोग कर ऐसे संदेश तैयार किए गए जिनसे यह आभास हो कि प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले उपलब्ध था। इस वजह से जांच एजेंसियों ने प्लेटफॉर्म की भूमिका की जांच शुरू की।

हालांकि Telegram का कहना है कि किसी भी प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कुछ लोग कर सकते हैं और इसके लिए पूरे प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कंपनी का तर्क है कि समस्या पेपर लीक करने वालों की है, न कि उस माध्यम की जहां जानकारी साझा की गई।

अदालत तक पहुंचा मामला

Telegram ने भारत सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा सूचना तक पहुंच के अधिकार पर असर डालने वाला कदम बताया। लेकिन बाद में अदालत ने सरकार के अस्थायी प्रतिबंध को बरकरार रखा। Reuters के अनुसार अदालत ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता और सार्वजनिक हित को देखते हुए सरकार के कदम को तत्काल परिस्थितियों में उचित माना जा सकता है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सरकारी हस्तक्षेप की सीमा को लेकर नई कानूनी बहसें जन्म ले सकती हैं।

प्राइवेसी: Telegram की ताकत या चुनौती?

Telegram की पहचान लंबे समय से एक प्राइवेसी-केंद्रित प्लेटफॉर्म के रूप में रही है। कंपनी खुद को उन प्लेटफॉर्म्स से अलग बताती है जो यूजर्स का व्यापक डेटा एकत्र करते हैं।

यही वजह है कि पत्रकार, एक्टिविस्ट, कारोबारी और संवेदनशील विषयों पर चर्चा करने वाले समुदाय Telegram को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यही विशेषताएं कई बार जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बन जाती हैं।

सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का तर्क है कि जब बड़े निजी समूह और चैनल पर्याप्त निगरानी के दायरे से बाहर रहते हैं, तो उनका इस्तेमाल गलत सूचना, धोखाधड़ी या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।

कंटेंट मॉडरेशन पर बढ़ते सवाल

Telegram पर सबसे बड़ा सवाल कंटेंट मॉडरेशन को लेकर उठता है।

Meta, YouTube और अन्य बड़े प्लेटफॉर्म्स की तुलना में Telegram का मॉडल अलग है। कंपनी अपेक्षाकृत कम हस्तक्षेप वाले दृष्टिकोण का समर्थन करती रही है। लेकिन जैसे-जैसे प्लेटफॉर्म का आकार बढ़ा है, वैसे-वैसे उस पर जिम्मेदारी बढ़ाने की मांग भी तेज हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को केवल तकनीकी मंच नहीं माना जा सकता। जब करोड़ों लोग उनका उपयोग करते हैं, तो उन पर गलत सूचना, फर्जी निवेश योजनाओं, घोटालों और अवैध कंटेंट को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।

पायरेसी का बड़ा अड्डा बनने के आरोप

Telegram पर सबसे गंभीर आरोपों में से एक पायरेसी से जुड़ा है।

हाल में प्रकाशित एक शोध अध्ययन के अनुसार Telegram पर संचालित 1,057 से अधिक पब्लिक चैनलों के विश्लेषण में 19,000 से ज्यादा कॉपीराइटेड वीडियो टाइटल्स के अवैध वितरण के प्रमाण मिले। शोधकर्ताओं के अनुसार इन चैनलों ने अरबों व्यूज हासिल किए और इससे कंटेंट मालिकों को अरबों डॉलर का संभावित नुकसान हुआ।

फिल्म, वेब सीरीज, लाइव स्पोर्ट्स और प्रीमियम वीडियो कंटेंट की अवैध शेयरिंग को लेकर मनोरंजन उद्योग लंबे समय से Telegram पर सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है।

हालांकि Telegram का कहना है कि वह रिपोर्ट मिलने पर कॉपीराइट उल्लंघन से जुड़े कंटेंट को हटाता है और लगातार अपनी मॉडरेशन प्रक्रियाओं में सुधार कर रहा है।

फेक न्यूज और गलत सूचना की चुनौती

Telegram केवल पायरेसी ही नहीं, बल्कि गलत सूचना के प्रसार को लेकर भी चर्चा में रहा है।

विभिन्न देशों में हुए शोध बताते हैं कि सार्वजनिक चैनलों और बड़े समुदायों के जरिए राजनीतिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक जानकारी तेजी से फैल सकती है। ब्राजील सहित कई देशों में Telegram चैनलों पर वैक्सीन से जुड़ी गलत सूचनाओं के प्रसार का अध्ययन किया गया है।

हालांकि यह समस्या केवल Telegram तक सीमित नहीं है। WhatsApp, Facebook, X और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी इसी चुनौती से जूझ रहे हैं।

सरकारों की बढ़ती चिंता

भारत ही नहीं, दुनिया के कई देशों में Telegram को लेकर नियामकीय चिंताएं बढ़ी हैं।

सरकारों की मुख्य चिंताएं हैं:

  • एन्क्रिप्टेड संचार
  • बड़े निजी समूह और चैनल
  • फर्जी सूचनाओं का प्रसार
  • पायरेसी
  • साइबर अपराध नेटवर्क्स
  • चुनावी और राजनीतिक प्रभाव

फ्रांस सहित कई देशों में Telegram और उसके संस्थापक पावेल ड्यूरोव को लेकर कानूनी जांच और नियामकीय कार्रवाई चर्चा का विषय रही है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया भर में सरकारें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अधिक जवाबदेही की अपेक्षा कर रही हैं।

क्या प्रतिबंध ही समाधान है?

यहीं से सबसे महत्वपूर्ण बहस शुरू होती है।

सरकारों का कहना है कि जब राष्ट्रीय परीक्षाओं, सुरक्षा या कानून व्यवस्था का प्रश्न हो, तब अस्थायी प्रतिबंध आवश्यक कदम हो सकता है।

दूसरी ओर डिजिटल अधिकार समूहों का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना अक्सर अनुपातहीन प्रतिक्रिया साबित हो सकता है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार Telegram के प्रतिबंध के बाद VPN डाउनलोड्स में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई, जिससे यह संकेत मिला कि कई यूजर्स ने वैकल्पिक रास्ते खोज लिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान बेहतर जांच, डिजिटल साक्षरता, मजबूत कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म्स के साथ सहयोग में छिपा है, न कि केवल प्रतिबंधों में।

आगे की राह

Telegram को लेकर मौजूदा विवाद केवल एक ऐप की कहानी नहीं है। यह उस व्यापक चुनौती का प्रतीक है जिसका सामना दुनिया भर की सरकारें और टेक कंपनियां कर रही हैं।

एक तरफ यूजर्स की प्राइवेसी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सुरक्षित संवाद का अधिकार है। दूसरी तरफ परीक्षा सुरक्षा, साइबर अपराध, फर्जी सूचनाएं और कॉपीराइट उल्लंघन जैसी वास्तविक चुनौतियां हैं।

भारत में Telegram पर चल रही बहस संभवतः आने वाले वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म रेगुलेशन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सवाल केवल यह नहीं है कि Telegram क्या कर रहा है, बल्कि यह भी है कि तेजी से डिजिटल होती दुनिया में सरकारें, टेक कंपनियां और नागरिक मिलकर किस तरह एक संतुलित और जवाबदेह डिजिटल इकोसिस्टम बना सकते हैं।

 

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2031 तक भारत में 110 करोड़ से ज्यादा होंगे 5G यूजर्स

एरिक्सन (Ericsson) की नई मोबिलिटी रिपोर्ट के मुताबिक 2031 तक भारत में 5G सब्सक्रिप्शन 1.1 अरब के पार पहुंच जाएगा। साथ ही प्रति स्मार्टफोन मासिक डेटा खपत 37GB से बढ़कर 70GB होने का अनुमान है।

Last Modified:
Monday, 22 June, 2026
5G users

भारत में 5G तकनीक का विस्तार तेजी से हो रहा है और आने वाले वर्षों में यह देश के डिजिटल परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकता है। एरिक्सन (Ericsson) की नवीनतम मोबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2031 तक भारत में 5G सब्सक्रिप्शन 1.1 अरब यानी 110 करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगा। उस समय देश में कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा 5G नेटवर्क पर होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक 2025 के अंत तक भारत, नेपाल और भूटान क्षेत्र में 43 करोड़ 5G सब्सक्रिप्शन दर्ज किए गए थे, जो कुल मोबाइल सब्सक्रिप्शन का 35 प्रतिशत हिस्सा थे। हालांकि 2025 में 4G की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक रही, लेकिन 2031 तक 4G यूजर्स की संख्या 57 करोड़ से घटकर करीब 16 करोड़ रह जाने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 5G स्मार्टफोन की बढ़ती उपलब्धता, सस्ती कीमतें और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) सेवाओं के विस्तार से यह बदलाव और तेज होगा। भारत पहले ही दुनिया में प्रति स्मार्टफोन सबसे अधिक मोबाइल डेटा खपत करने वाला देश बन चुका है। वर्तमान में भारतीय यूजर्स औसतन 37GB डेटा प्रति माह इस्तेमाल कर रहे हैं। एरिक्सन का अनुमान है कि 2031 तक यह आंकड़ा बढ़कर 70GB प्रति माह तक पहुंच जाएगा।

वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन गेमिंग, सोशल मीडिया, क्लाउड सेवाओं और AI आधारित एप्लिकेशंस की बढ़ती लोकप्रियता डेटा खपत को लगातार बढ़ा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 5G भविष्य में केवल तेज इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, कनेक्टेड डिवाइसेज और एंटरप्राइज सेवाओं की नींव बनेगा।

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सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर को चित्रा त्रिपाठी ने बताया फर्जी

'एबीपी न्यूज़' की सीनियर एंकर और पत्रकार चित्रा त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर को फर्जी और AI जनरेटेड बताया है। उन्होंने लिखा, वायरल तस्वीर फर्जी है।

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
chitratripathi

'एबीपी न्यूज़' (ABP News) की सीनियर एंकर और पत्रकार चित्रा त्रिपाठी ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक तस्वीर को लेकर सफाई दी है। उन्होंने अपने आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट कर दावा किया कि वायरल तस्वीर फर्जी है और इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किया गया है।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में दावा किया गया था कि बुलेट मोटरसाइकिल पर एक व्यक्ति के साथ नजर आ रही महिला चित्रा त्रिपाठी हैं। पोस्ट में दोनों के बीच कथित व्यक्तिगत संबंधों को लेकर भी कई दावे किए गए थे। हालांकि चित्रा त्रिपाठी ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया।

अपने X पोस्ट में चित्रा त्रिपाठी ने लिखा, "ये फेक फोटो है। बुलेट की ये तस्वीर बिहार की है। AI की मदद से फोटो तैयार की गई है। मैं इस व्यक्ति को जानती भी नहीं हूँ।" उन्होंने आगे कहा कि कुछ लोग फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर उनके फोटो का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने लिखा, "लड़कियों का नाम रखकर फेक ID से मेरे फोटो का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। इतनी मेहनत अपने करियर को बनाने में करते तो आज ये लोग जीवन में कुछ अच्छा कर रहे होते।" चित्रा त्रिपाठी की इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर AI जनरेटेड कंटेंट और डीपफेक तस्वीरों को लेकर बहस तेज हो गई है।

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IPL2027 के लिए नई तारीखों पर विचार, बदलेगा टूर्नामेंट का शेड्यूल

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) IPL 2027 के लिए टूर्नामेंट विंडो में बदलाव पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार लीग 10 मार्च से शुरू होकर 15 मई तक समाप्त हो सकती है।

Last Modified:
Saturday, 20 June, 2026
ipl2027

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2027 के शेड्यूल में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। बोर्ड टूर्नामेंट को मौजूदा समय से पहले शुरू करने पर विचार कर रहा है, ताकि प्लेऑफ और फाइनल मुकाबलों पर अत्यधिक गर्मी और प्री-मानसून बारिश का असर न पड़े।

BCCI सचिव देवजीत सैकिया (Devajit Saikia) ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि बोर्ड IPL 2027 को 10 मार्च के आसपास शुरू करने और 15 मई तक समाप्त करने की संभावना पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य टूर्नामेंट के अंतिम चरण को प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से बचाना है।

आमतौर पर IPL मार्च के आखिरी सप्ताह में शुरू होकर मई के अंत या जून की शुरुआत तक चलता है। IPL 2026 का आयोजन 28 मार्च से 31 मई तक हुआ था। हालांकि हाल के वर्षों में टूर्नामेंट के अंतिम मुकाबले भीषण गर्मी और कई स्थानों पर प्री-मानसून बारिश की आशंका के बीच खेले गए हैं।

सैकिया ने कहा कि 15 मई के बाद कई राज्यों में बारिश की शुरुआत होने लगती है, जबकि तेज गर्मी खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए चुनौती बन जाती है। इसी कारण बोर्ड नए शेड्यूल पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

प्रस्तावित विंडो से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर के साथ तालमेल बैठाने में भी मदद मिल सकती है। यह भारत-ऑस्ट्रेलिया बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (Border-Gavaskar Trophy) के बाद का समय होगा, जिससे विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता भी बेहतर हो सकती है।

हालांकि BCCI ने फिलहाल IPL को 74 मैचों से बढ़ाकर 94 मैच करने की अटकलों को खारिज कर दिया है। बोर्ड का कहना है कि व्यस्त अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम को देखते हुए मौजूदा फॉर्मेट ही जारी रहेगा। अंतिम फैसला प्रसारकों, फ्रेंचाइजियों और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद लिया जाएगा।

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भारत में डिजिटल धोखाधड़ी का खतरा बढ़ा: वैश्विक औसत से दोगुना निकला फ्रॉड रेट

'ट्रांसयूनियन' की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी का स्तर वैश्विक औसत से लगभग दोगुना है। वहीं टेलीकॉम सेक्टर में बढ़ते साइबर जोखिमों पर चिंता जताई गई है।

Last Modified:
Wednesday, 17 June, 2026
cyberattack

भारत में डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। 'ट्रांसयूनियन' (TransUnion) की 16 जून को जारी H1 2026 Top Fraud Trends Report के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत के 7.1 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन संदिग्ध धोखाधड़ी की श्रेणी में पाए गए। यह आंकड़ा वैश्विक औसत 3.8 प्रतिशत की तुलना में लगभग दोगुना है, जो देश में बढ़ते साइबर खतरों की ओर संकेत करता है।

रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराधी अब केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहचान आधारित हमलों (Identity-Based Attacks) पर भी तेजी से ध्यान दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर जहां अकाउंट क्रिएशन (Account Creation) सबसे जोखिम भरा चरण माना जाता है, वहीं भारत में सबसे ज्यादा खतरा अकाउंट लॉगिन (Account Login) प्रक्रिया के दौरान देखा गया है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में 3.9 प्रतिशत अकाउंट लॉगिन प्रयास संदिग्ध पाए गए। वहीं अकाउंट क्रिएशन के दौरान यह दर 3.1 प्रतिशत और वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions) में 1.2 प्रतिशत रही। इससे संकेत मिलता है कि साइबर अपराधी चोरी किए गए या समझौता किए गए लॉगिन क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर मौजूदा खातों को निशाना बना रहे हैं।

उद्योगवार विश्लेषण में लॉजिस्टिक्स (Logistics) क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां संदिग्ध डिजिटल धोखाधड़ी की दर 16.3 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके बाद टेलीकॉम (Telecom) क्षेत्र 14.7 प्रतिशत और बीमा (Insurance) क्षेत्र 11.5 प्रतिशत के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2024 से 2025 के बीच टेलीकॉम सेक्टर में धोखाधड़ी के मामलों में 308 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई। वहीं बीमा क्षेत्र में 145 प्रतिशत और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

'ट्रांसयूनियन इंडिया डेटा एनालिटिक्स सॉल्यूशंस' (TransUnion India Data Analytics Solutions-INDAS) के अधिकारियों का कहना है कि बढ़ते साइबर खतरों से निपटने के लिए कंपनियों को उन्नत पहचान सत्यापन, मल्टी-लेयर फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम और AI आधारित सुरक्षा उपायों को अपनाना होगा।

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टेक कंपनियों के दबाव के बावजूद बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करेगा ब्रिटेन

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान किया है। बच्चों को डिजिटल लत से बचाने के लिए ये कदम उठाया गया है।

Last Modified:
Tuesday, 16 June, 2026
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Keir Starmer) ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान किया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते नकारात्मक प्रभाव को कम करना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल माहौल उपलब्ध कराना है।

कीर स्टारमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक पोस्ट के जरिए इस प्रस्तावित फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कई अभिभावकों ने उन्हें बताया है कि उनके बच्चे स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल के आदी हो चुके हैं। प्रधानमंत्री के अनुसार, आज के समय में तकनीक बच्चों के जीवन के लगभग हर पहलू को प्रभावित कर रही है और अब इस स्थिति को बदलने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने का फैसला आसान नहीं है, क्योंकि कई बड़ी टेक कंपनियां इस कदम का विरोध कर रही हैं। इसके बावजूद सरकार बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।

ब्रिटेन सरकार हाल के महीनों में टेक कंपनियों पर लगातार दबाव बना रही है। सरकार ने कंपनियों से उम्र सत्यापन (Age Verification) प्रणाली लागू करने, एल्गोरिद्म (Algorithm) में बदलाव करने और बच्चों को अश्लील एवं हानिकारक कंटेंट से दूर रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है।

इसके अलावा सरकार ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming) और वीडियो स्ट्रीमिंग (Video Streaming) प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली लाइव स्ट्रीमिंग (Live Streaming) गतिविधियों को भी बच्चों के लिए सीमित या प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही है।

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'मैडिसन ग्रुप' की 'HiveMinds' को मिला 'डॉ. रेड्डीज़' का डिजिटल मंडेट

'मैडिसन ग्रुप' (Madison Group) की डिजिटल एजेंसी 'हाइवमाइंड्स' (HiveMinds) को 'डॉ. रेड्डीज़ लेबोरेटरीज' (Dr. Reddy’s Laboratories) का इंटीग्रेटेड डिजिटल मार्केटिंग मंडेट मिला है।

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
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मैडिसन ग्रुप' (Madison Group) का हिस्सा 'हाइवमाइंड्स' (HiveMinds) ने 'डॉ. रेड्डीज़ लेबोरेटरीज' (Dr. Reddy’s Laboratories) का इंटीग्रेटेड डिजिटल मार्केटिंग मंडेट हासिल किया है। इस साझेदारी का उद्देश्य कंपनी के चुनिंदा ओवर-द-काउंटर (OTC) और न्यूट्रिशन ब्रांड्स की डिजिटल मौजूदगी को मजबूत करना, ई-कॉमर्स ग्रोथ को तेज करना और विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ता जुड़ाव बढ़ाना है।

इस मंडेट के तहत 'हाइवमाइंड्स' (HiveMinds) कंपनी को एकीकृत डिजिटल रणनीति उपलब्ध कराएगी। इसमें फुल-फनल ई-कॉमर्स मैनेजमेंट (Full-Funnel E-commerce Management), विभिन्न चैनलों पर प्रदर्शन आधारित रणनीतियां और प्रभावशाली क्रिएटिव सेवाएं शामिल होंगी। एजेंसी का लक्ष्य उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ ब्रांड्स की डिजिटल पहुंच को और मजबूत बनाना है।

इस खाते का संचालन 'हाइवमाइंड्स' (HiveMinds) की मुंबई टीम करेगी। टीम उपभोक्ता यात्रा (Consumer Journey) को बेहतर बनाने, प्रदर्शन संकेतकों (Performance Metrics) को मजबूत करने और डेटा-आधारित क्रिएटिव समाधानों के जरिए बेहतर परिणाम हासिल करने पर फोकस करेगी।

'हाइवमाइंड्स' (HiveMinds) की मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीप्ति भदौरिया ने कहा कि हेल्थ और वेलनेस क्षेत्र आज डिजिटल माध्यमों के लिए बेहद संभावनाओं से भरा हुआ है। उनके अनुसार, 'डॉ. रेड्डीज़' (Dr. Reddy’s) ने विभिन्न श्रेणियों में पहले से ही उपभोक्ताओं के बीच मजबूत पहचान बनाई है।

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दिबांग ने शुरू की नई डिजिटल पारी, लॉन्च किया 'Dibang Official'

वरिष्ठ पत्रकार दिबांग ने अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल 'Dibang Official' की शुरुआत की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर दर्शकों को अपना पहला वीडियो देखने के लिए आमंत्रित किया।

Last Modified:
Monday, 15 June, 2026
dibang

वरिष्ठ पत्रकार दिबांग (Dibang) ने डिजिटल मीडिया की दुनिया में नई शुरुआत करते हुए अपना आधिकारिक यूट्यूब चैनल 'Dibang Official' लॉन्च कर दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर एक पोस्ट के जरिए दी।

दिबांग ने अपने पोस्ट में लिखा, "एक नई शुरुआत कर रहा हूँ। कुछ पुरानी और कुछ बहुत पुरानी यादें हैं इस वीडियो में। देखें Dibang Official का पहला वीडियो।" उन्होंने अपने फॉलोअर्स से यह भी पूछा कि उन्होंने पहली बार टीवी पर खबर कब देखी थी। पोस्ट में उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल के पहले वीडियो का लिंक भी साझा किया।

दिबांग भारतीय टीवी पत्रकारिता का एक चर्चित नाम रहे हैं और लंबे समय तक विभिन्न समाचार चैनलों में अपनी बेबाक पत्रकारिता, विशेष कार्यक्रमों और साक्षात्कारों के लिए पहचाने जाते रहे हैं। उनकी इस नई डिजिटल पारी को मीडिया जगत में दिलचस्प कदम माना जा रहा है। यूट्यूब के जरिए अब वह सीधे दर्शकों तक अपनी बात और अनुभव पहुंचाते नजर आएंगे।

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सीएम सी. जोसेफ विजय के जन्मदिन पर लॉन्च हो सकता है 'वेट्री न्यूज़' चैनल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' से जुड़े 'वेट्री न्यूज़' चैनल के 22 जून को लॉन्च होने की चर्चा है। चैनल के लिए भर्ती प्रक्रिया भी शुरू होने की खबर है।

Last Modified:
Saturday, 13 June, 2026
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Joseph Vijay) की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (Tamilaga Vettri Kazhagam) से जुड़े प्रस्तावित न्यूज चैनल 'वेट्री न्यूज़' (Vettri News) के 22 जून को लॉन्च होने की चर्चा तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, चैनल का शुभारंभ विजय के जन्मदिन के अवसर पर किया जा सकता है।

इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक पोस्ट में दावा किया गया है कि 'वेट्री न्यूज़' (Vettri News) का लॉन्च 22 जून को होगा, जिसे विजय समर्थकों के लिए दोहरी खुशी का अवसर बताया गया है। बताया जा रहा है कि चैनल समाचार और समसामयिक विषयों (Current Affairs) पर केंद्रित रहेगा और तमिलनाडु समेत अन्य क्षेत्रों के दर्शकों तक पहुंचने का प्रयास करेगा।

इसी बीच सोशल मीडिया पर चैनल की भर्ती से जुड़ा एक क्रिएटिव भी सामने आया है। इसमें 'वेट्री न्यूज़' (Vettri News) के सैटेलाइट और डिजिटल तमिल टेलीविजन संचालन के लिए विभिन्न पदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

भर्ती सूचना के अनुसार, न्यूज एडिटर (News Editor), वीडियोग्राफर (Videographer), प्रोग्राम प्रोड्यूसर (Programme Producer), जिला संवाददाता (District Reporter) और विजुअल एडिटर (Visual Editor) जैसे पदों के लिए उम्मीदवारों से आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन भेजने के लिए hr@vettrinews.tv ईमेल आईडी जारी की गई है और 30 जून 2026 अंतिम तिथि बताई गई है।

पोस्ट में 'वेट्री न्यूज़' (Vettri News) को विजय के नेतृत्व वाले 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (Tamilaga Vettri Kazhagam) आंदोलन से जुड़ा आगामी न्यूज चैनल बताया गया है। दावा किया गया है कि चैनल राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और समसामयिक विषयों पर फोकस करेगा।

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जन्मदिन विशेष : दमदार एंकरिंग और बेबाक रिपोर्टिंग की पहचान हैं अंजना ओम कश्यप

अंजना ओम कश्यप वर्तमान में 'आजतक' (Aaj Tak) में सीनियर मैनेजिंग एडिटर के पद पर कार्यरत हैं।

Last Modified:
Friday, 12 June, 2026
anjanaomkashyap

हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में अंजना ओम कश्यप एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी तेजतर्रार एंकरिंग और जमीनी रिपोर्टिंग के दम पर अलग पहचान बनाई है। आज उनके जन्मदिन के अवसर पर मीडिया जगत और उनके प्रशंसक उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं।

अंजना ओम कश्यप वर्तमान में 'आजतक' (Aaj Tak) में सीनियर मैनेजिंग एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। समसामयिक मुद्दों पर उनकी पैनी नजर और सवाल पूछने का बेबाक अंदाज उन्हें देश के प्रमुख टीवी पत्रकारों में शामिल करता है।

पत्रकारिता में उनका सफर 'दूरदर्शन' (Doordarshan) के क्राइम शो ‘आंखों देखी’ से शुरू हुआ। इसके बाद उन्होंने 'जी न्यूज' (Zee News), 'न्यूज24' (News24), 'स्टार न्यूज' (Star News, अब ABP News) और फिर 'आजतक' (Aaj Tak) जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में काम किया।

अपने करियर के दौरान अंजना ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों सहित कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों की रिपोर्टिंग की है। उन्होंने देश के अनेक प्रमुख नेताओं के साक्षात्कार भी किए हैं। उनकी चर्चित रिपोर्टिंग में दिल्ली गैंगरेप मामले से जुड़ी कवरेज विशेष रूप से याद की जाती है, जिसने देशभर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था।

अंजना ओम कश्यप की पहचान केवल एक एंकर के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसी पत्रकार के रूप में भी है, जिन्होंने टीवी पत्रकारिता में मेहनत, अनुशासन और पेशेवर प्रतिबद्धता का उदाहरण पेश किया। जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में डिप्लोमा प्राप्त करने वाली अंजना आज भी युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

समाचार4मीडिया की ओर से अंजना ओम कश्यप को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

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