AI ने न्यूजरूम व क्रिएटिव वर्ल्ड को क्यों हिला दिया है? भरोसे और पारदर्शिता की नई लड़ाई

हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 12 October, 2026
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Monday, 12 October, 2026
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दुनिया भर में मीडिया और साहित्यिक संस्थान अब एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिर्फ एक सहायक तकनीक नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो भरोसे, संपादकीय जिम्मेदारी और पत्रकारिता की मूल पहचान तक को चुनौती दे रहा है। हाल के दो बड़े विवाद- जर्मनी की मीडिया घटना और साहित्यिक जगत में उठा AI विवाद, ने यह सवाल और तेज कर दिया है कि क्या AI न्यूज़रूम और क्रिएटिव लेखन का भविष्य है या उसकी सीमाएं तय करना जरूरी हो गया है।

जर्मनी के बर्लिन स्थित प्रतिष्ठित अखबार Tagesspiegel में हाल ही में एक बड़ा विवाद सामने आया, जब यह खुलासा हुआ कि अखबार के पूर्व प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ Stephan-Andreas Casdorff ने अपने कुछ ओपिनियन लेख AI की मदद से तैयार किए थे। इस घटना ने मीडिया जगत में हलचल मचा दी और अखबार को मजबूर होना पड़ा कि वह संबंधित लेखों को वेबसाइट से हटा दे और मामले की जांच शुरू करे। अखबार ने साफ किया कि AI का इस्तेमाल सिर्फ कुछ प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन पत्रकारिता के मूल हिस्से यानी सोच, विश्लेषण और लेखन का नियंत्रण पूरी तरह इंसानों के पास ही रहना चाहिए।

इस घटना के बाद जर्मन मीडिया में AI के इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज हो गई। इससे पहले भी एक और मामला सामने आया था, जब Frankfurter Allgemeine Zeitung में प्रकाशित एक गेस्ट ओपिनियन में AI के इस्तेमाल के संकेत मिले थे। यह मामला तब और गंभीर हो गया क्योंकि यह जानकारी प्रकाशन के बाद सामने आई, यानी संपादकीय जांच प्रक्रिया में इसे पकड़ा नहीं जा सका।

इस पूरे विवाद ने पत्रकारिता की बुनियादी भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मीडिया शोधकर्ता Vera Katzenberger के अनुसार, समस्या सिर्फ AI के इस्तेमाल की नहीं है, बल्कि तब होती है जब AI से तैयार कंटेंट को बिना बताए प्रकाशित किया जाता है। उनका कहना है कि पाठक अखबार इसलिए खरीदते हैं क्योंकि उन्हें लेखकों के विचार और विशेषज्ञता पर भरोसा होता है। यदि वही विचार मशीन द्वारा तैयार किए जाएं और उसका खुलासा न हो, तो यह सीधे तौर पर धोखा माना जा सकता है।

किए गए खुलासों के बाद Tagesspiegel ने अपनी एडिटोरियल पॉलिसी को दोहराया और कहा कि AI केवल सहायक भूमिका निभा सकता है, लेकिन किसी भी हालत में यह न्यूज़रूम के “core editorial work” की जगह नहीं ले सकता। इसका मतलब है कि खबरों का विश्लेषण, तथ्यों की जांच और अंतिम निर्णय हमेशा पत्रकारों के हाथ में रहेगा।

लेकिन यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि AI धीरे-धीरे पत्रकारों के काम करने के तरीके में गहराई से शामिल होता जा रहा है। पहले जहां AI को सिर्फ स्पेलिंग सुधारने या डेटा प्रोसेसिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता था, अब यह ड्राफ्ट तैयार करने, हेडलाइन सुझाने और कभी-कभी पूरे लेख लिखने तक में इस्तेमाल होने लगा है। यही वह जगह है जहां “सहायक टूल” और “लेखक” के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।

जर्मनी के मीडिया रेगुलेटरी ढांचे में German Press Council ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कंटेंट की जिम्मेदारी अंततः न्यूज़रूम की ही होगी, चाहे वह कैसे भी तैयार किया गया हो। लेकिन यह संस्था यह भी मानती है कि AI-जनरेटेड कंटेंट के लिए अलग से लेबलिंग जरूरी नहीं है, क्योंकि असली मुद्दा तकनीक नहीं बल्कि सत्यता और संपादकीय जिम्मेदारी है।

इसी बीच, मीडिया इंडस्ट्री के भीतर एक अलग दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है। कुछ बड़े मीडिया ग्रुप्स के CEO और एडिटर्स का मानना है कि AI को अपनाना ही भविष्य है। उनका तर्क है कि यदि AI को सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह रिपोर्टिंग की गति बढ़ा सकता है, लागत कम कर सकता है और डेटा विश्लेषण को बेहतर बना सकता है। लेकिन साथ ही यह भी माना जा रहा है कि बिना नियंत्रण के AI का इस्तेमाल पत्रकारिता की विश्वसनीयता को कमजोर कर सकता है।

इसी तरह का तनाव साहित्यिक जगत में भी देखा गया, जब प्रतिष्ठित पत्रिका Granta ने कॉमनवेल्थ शॉर्ट स्टोरी प्राइज की विजेता कहानियों को प्रकाशित करना बंद कर दिया। यह फैसला तब आया जब एक विजेता कहानी पर AI के इस्तेमाल का आरोप लगा। हालांकि लेखक ने इन आरोपों को खारिज किया और बताया कि उन्होंने कहानी अपने मोबाइल पर स्पीच-टू-टेक्स्ट तकनीक की मदद से लिखी थी, क्योंकि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।

इसके बावजूद, इस विवाद ने साहित्यिक दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या रचनात्मक लेखन में तकनीक का इस्तेमाल स्वीकार्य है, और यदि हां, तो इसकी सीमा क्या होनी चाहिए? प्रकाशकों का कहना है कि जहां उनके पास संपादकीय नियंत्रण नहीं होता, वहां वे अब साझेदारी से पीछे हट रहे हैं, ताकि कंटेंट की शुद्धता और पारदर्शिता बनी रहे।

AI को लेकर यह बहस सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि यह भरोसे और जिम्मेदारी का सवाल बन चुकी है। पत्रकारिता और साहित्य दोनों ही क्षेत्रों में यह चिंता बढ़ रही है कि यदि AI बिना पारदर्शिता के इस्तेमाल किया गया, तो पाठकों और लेखकों के बीच का भरोसा कमजोर हो सकता है। दूसरी ओर, यह भी सच है कि AI को पूरी तरह नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में न्यूज़रूम्स को एक संतुलन बनाना होगा- जहां AI को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया जाए, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा इंसान के पास ही रहे। इसके लिए साफ नियम, प्रशिक्षण और पारदर्शिता बेहद जरूरी होगी।

इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा संदेश यही है कि AI पत्रकारिता और रचनात्मक लेखन को बदल रहा है, लेकिन यह बदलाव तभी स्वीकार्य होगा जब यह स्पष्ट हो कि इंसान और मशीन की भूमिका कहां खत्म होती है और कहां शुरू होती है।

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त्योहारी सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने बेचा 24,000 करोड़ का सामान

त्योहारी सीजन की सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 24,200 करोड़ रुपये का GMV दर्ज किया। इस दौरान मोबाइल फोन की बिक्री सबसे ज्यादा रही।

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Published - Monday, 12 October, 2026
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Monday, 12 October, 2026
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त्योहारी सीजन की सेल के पहले दो दिनों में ई-कॉमर्स कंपनियों ने करीब 24,000 करोड़ रुपये का सामान बेचा। कंसल्टेंसी फर्म रेडसीयर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स (Redseer Strategy Consultants) के अनुसार, ऑर्डर्स की संख्या बढ़ने से बिक्री में तेजी आई। वैल्यू के लिहाज से मोबाइल फोन सबसे आगे रहे।

रेडसीयर के अनुमान के मुताबिक, अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart), मीशो (Meesho) और अजियो (Ajio) समेत अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर करीब 8-9 करोड़ ऑर्डर किए गए। पहले दो दिनों में 2.5 अरब डॉलर से अधिक यानी करीब 24,200 करोड़ रुपये का ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू (Gross Merchandise Value) दर्ज हुआ। इस दौरान करीब 6-6.5 करोड़ ग्राहक खरीदारी में शामिल हुए।

रेडसीयर के एसोसिएट पार्टनर निखिल दलाल (Nikhil Dalal) ने कहा कि शुरुआती दो दिनों के आंकड़े बताते हैं कि भारत में त्योहारी ई-कॉमर्स खरीदारी का दायरा बढ़ रहा है। ग्राहक मोबाइल के अलावा फैशन, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों पर भी खर्च कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वैल्यू फैशन (Value Fashion) की मांग खास तौर पर मजबूत रही। छोटे शहरों और टियर-2 शहरों के ग्राहकों ने किफायती कीमतों पर त्योहारी कपड़ों की खरीदारी की। कंपनी के अनुसार, ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू सामान्य दिनों की औसत दैनिक बिक्री की तुलना में करीब छह गुना रही। अमेजन और फ्लिपकार्ट की क्विक कॉमर्स सेवाओं (Quick Commerce Services) ने भी सामान्य दैनिक औसत के मुकाबले चार से पांच गुना अधिक जीएमवी दर्ज किया।

कुल बिक्री में मोबाइल फोन की हिस्सेदारी करीब 38-40 प्रतिशत रही, जिसकी कीमत लगभग 9,100-9,600 करोड़ रुपये आंकी गई। कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics) की हिस्सेदारी 25-27 प्रतिशत यानी करीब 6,000-6,500 करोड़ रुपये रही। वहीं, फैशन की हिस्सेदारी 15-18 प्रतिशत यानी लगभग 3,630-4,350 करोड़ रुपये रही।

कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री 2026 की पहली छमाही में ही 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी थी। इसका एक कारण कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद के चलते ग्राहकों का कुछ खरीदारी पहले ही कर लेना रहा। वहीं, त्योहारी सेल के पहले दो दिनों में फैशन कैटेगरी (Fashion Category) का जीएमवी सालाना आधार पर 22-25 प्रतिशत बढ़ा।

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क्विंट डिजिटल ने वॉरंट की आखिरी किस्त के लिए 6 नवंबर से शुरू की भुगतान प्रक्रिया

क्विंट डिजिटल लिमिटेड ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है।

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Published - Saturday, 10 October, 2026
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Saturday, 10 October, 2026
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मीडिया कंपनी क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने 82,61,401 आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट (Partly Paid-up Warrants) पर पहली और अंतिम किस्त (First and Final Call) के रूप में ₹5 प्रति वॉरंट का भुगतान मांगा है। कंपनी के निदेशक मंडल ने 9 अक्टूबर, 2026 को हुई बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस किस्त के तहत कंपनी कुल ₹4,13,07,005 यानी करीब ₹4.13 करोड़ जुटाएगी।

कंपनी ने यह जानकारी 9 अक्टूबर, 2026 को बीएसई लिमिटेड (BSE Limited) को दी। यह सूचना भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के लिस्टिंग से जुड़े नियमों, 2015 के नियम 30 और 42 के तहत जारी की गई है।

क्या है पूरा मामला?

क्विंट डिजिटल ने 19 अगस्त, 2026 के ऑफर लेटर के तहत राइट्स इश्यू (Rights Issue) के जरिए 82,61,401 अलग किए जा सकने वाले वॉरंट जारी किए थे। प्रत्येक वॉरंट का इश्यू प्राइस ₹10 रखा गया था। आवेदन के समय निवेशकों से प्रति वॉरंट ₹5 प्राप्त किए गए थे, जबकि बाकी ₹5 का भुगतान पहली और अंतिम किस्त के तौर पर किया जाना है। अब कंपनी ने इस बकाया राशि के भुगतान की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।

15 अक्टूबर होगी रिकॉर्ड डेट

कंपनी ने 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार को रिकॉर्ड डेट (Record Date) तय किया है। इस तारीख के आधार पर उन आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों की पहचान की जाएगी, जिन्हें पहली और अंतिम किस्त के भुगतान के लिए नोटिस भेजा जाएगा।

इन वॉरंट का आईएसआईएन (ISIN) नंबर INE641R13020 है। इनकी श्रेणी आंशिक रूप से भुगतान किए गए अलग किए जा सकने वाले वॉरंट की है।

6 से 20 नवंबर तक कर सकेंगे भुगतान

कंपनी के मुताबिक, पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की अवधि 6 नवंबर, 2026, शुक्रवार से 20 नवंबर, 2026, शुक्रवार तक रहेगी। दोनों तारीखें इस अवधि में शामिल हैं। हालांकि, राइट्स इश्यू कमेटी को अपने विवेक के अनुसार भुगतान की अवधि बढ़ाने का अधिकार दिया गया है।

कंपनी के निदेशक मंडल ने पहली और अंतिम किस्त से संबंधित नोटिस और अन्य जरूरी दस्तावेजों को भी मंजूरी दे दी है। इस किस्त से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी संबंधित नोटिस में दी जाएगी, जिसे कंपनी आने वाले समय में आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट धारकों को भेजेगी।

वॉरंट में कारोबार पर भी पड़ेगा असर

क्विंट डिजिटल ने स्पष्ट किया है कि उसके आंशिक रूप से भुगतान किए गए वॉरंट में शेयर बाजारों पर कारोबार 15 अक्टूबर, 2026, गुरुवार से निलंबित कर दिया जाएगा। पहली और अंतिम किस्त के भुगतान की प्रक्रिया के लिए आईसीआईसीआई बैंक लिमिटेड (ICICI Bank Limited) को बैंक के तौर पर नियुक्त किया गया है।

बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी

कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक दोपहर 1 बजे शुरू हुई और दोपहर 3 बजकर 43 मिनट पर समाप्त हुई। बैठक में वॉरंट पर पहली और अंतिम किस्त मांगने, रिकॉर्ड डेट तय करने, भुगतान की अवधि निर्धारित करने और संबंधित नोटिस व दस्तावेजों को मंजूरी देने के फैसले लिए गए। 

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'इंडिया टुडे' ने लॉन्च किया ‘Life Tak’, रामायण पर आधारित सीरीज 18 अक्टूबर से होगी स्ट्रीम

रामायण की कहानी को नए अंदाज में पेश करेगी ‘रघुपति राघव राजा राम’, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से टीजर लॉन्च किया

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Published - Friday, 09 October, 2026
Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
India Today Group

‘इंडिया टुडे’ (India Today) ग्रुप ने डिजिटल फिक्शन और इंफोटेनमेंट के क्षेत्र में कदम रखते हुए अपना नया मोबाइल-फर्स्ट माइक्रोड्रामा प्लेटफॉर्म ‘Life Tak’ लॉन्च किया है। इस प्लेटफॉर्म की शुरुआत के साथ ग्रुप ने अपनी पहली प्रमुख शॉर्ट-फॉर्म सीरीज ‘रघुपति राघव राजा राम’ (RRRR) का टीजर भी जारी किया। इसका अनावरण मुंबई में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 के मंच पर किया गया। सीरीज का आधिकारिक टीजर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने संयुक्त रूप से लॉन्च किया।

रामायण की कहानी नए अंदाज में होगी पेश: ‘रघुपति राघव राजा राम’ में रामायण की पारंपरिक कहानी को आधुनिक और तेज रफ्तार अंदाज में पेश किया जाएगा। यह सीरीज खास तौर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट देखने वाले दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें सांस्कृतिक और पारंपरिक कहानी को आधुनिक प्रोडक्शन तकनीक के साथ जोड़ा गया है। इसका वर्टिकल वीडियो फॉर्मेट आधुनिक दर्शकों की शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट देखने की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

AI तकनीक पर भी रहेगा जोर: इंडिया टुडे ग्रुप के मुताबिक, यह सीरीज उसके ऐसे क्रिएटिव और टेक्नोलॉजी आधारित इकोसिस्टम की पहली पेशकश है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित विजुअल इंजीनियरिंग, स्क्रिप्ट तैयार करने वाले टूल्स और क्रिएटिव वर्ल्ड-बिल्डिंग का मेल है। इस पहल के जरिए पारंपरिक और नई कहानियों को आज के दर्शकों के लिए नए रूप में पेश किया जाएगा। ‘Life Tak’ के माध्यम से इंडिया टुडे ग्रुप सिनेमाई गुणवत्ता वाले कंटेंट को वर्टिकल वीडियो के तेजी से बढ़ते डिजिटल दौर में दर्शकों तक पहुंचाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।

18 अक्टूबर से देख सकेंगे दर्शक: ‘रघुपति राघव राजा राम’ का प्रीमियर 18 अक्टूबर 2026 को होगा। दर्शक इसके एपिसोड ‘Life Tak’ के आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट (@lifetak), यूट्यूब और फेसबुक चैनलों के साथ-साथ आजतक ऐप पर भी देख सकेंगे।

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Meta में रवि गर्ग को मिली बड़ी जिम्मेदारी, APAC में एंटरप्राइज बिजनेस का संभालेंगे नेतृत्व

रवि गर्ग ने जुलाई 2021 से सितंबर 2026 तक वॉट्सऐप में बिजनेस मैसेजिंग एंड पेमेंट्स के कंट्री डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

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Published - Friday, 09 October, 2026
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Friday, 09 October, 2026
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मेटा (Meta) में रवि गर्ग को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। वॉट्सऐप में भारत के बिजनेस मैसेजिंग और पेमेंट्स बिजनेस का पांच साल से ज्यादा समय तक नेतृत्व करने के बाद अब वह Meta में एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र में एंटरप्राइज बिजनेस के मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका संभालेंगे।

रवि गर्ग ने जुलाई 2021 से सितंबर 2026 तक वॉट्सऐप में बिजनेस मैसेजिंग एंड पेमेंट्स के कंट्री डायरेक्टर के तौर पर काम किया। इस दौरान उन्होंने भारत में प्लेटफॉर्म की बिजनेस मैसेजिंग और पेमेंट्स सेवाओं को शुरू करने और उनका विस्तार करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस कारोबार को शुरुआती स्तर से खड़ा किया और आगे बढ़ाया।

अपनी नई भूमिका में रवि गर्ग का मुख्य ध्यान एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में Meta के एंटरप्राइज बिजनेस का विस्तार करने पर होगा। कंपनियां अपने उत्पादों, सेवाओं और बाजार तक पहुंचने की रणनीतियों में बदलाव लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को तेजी से अपना रही हैं। ऐसे में वह इस क्षेत्र के कारोबारों के बीच Meta की सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ाने पर काम करेंगे।

उनकी जिम्मेदारी में बिजनेस मैसेजिंग, Meta Business Agents और Muse APIs सहित Meta की सेवाओं को क्षेत्र की कंपनियों तक पहुंचाना शामिल होगा।

Meta और वॉट्सऐप से पहले रवि गर्ग ने Microsoft में 13 साल तक वरिष्ठ पदों पर काम किया। वहां उन्होंने सेल्स, रणनीति, बिजनेस प्लानिंग और चैनल मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में जिम्मेदारियां संभालीं। इसके अलावा, वह Nazara Technologies में चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (Chief Operating Officer) के पद पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने Sify में भी जनरल मैनेजमेंट से जुड़ी जिम्मेदारी निभाई है।

 

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Yaap Digital को 25 करोड़ रुपये की कर्ज सुविधा मंजूर, नए ऑडिटर की भी नियुक्ति

Yaap Digital Limited के बोर्ड ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है।

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Published - Friday, 09 October, 2026
Last Modified:
Friday, 09 October, 2026
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Yaap Digital Limited के बोर्ड ने 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। कंपनी ने HSBC Bank से 25 करोड़ रुपये तक की वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन/ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने को मंजूरी दी है। इसके साथ ही कंपनी ने 25 करोड़ रुपये तक की रकम उधार लेने को भी मंजूरी दी है।

कंपनी ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड को दी जानकारी में बताया कि बोर्ड की बैठक 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे शुरू हुई और 12:50 बजे खत्म हुई। यह जानकारी सेबी के लिस्टिंग नियमों के तहत साझा की गई है।

25 करोड़ रुपये तक उधार लेने की मंजूरी

बोर्ड ने HSBC Bank से 25 करोड़ रुपये तक की वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन/ओवरड्राफ्ट सुविधा लेने को मंजूरी दी है। इसके अलावा, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 179 के तहत कंपनी ने 25 करोड़ रुपये तक की रकम उधार लेने को भी मंजूरी दी है।

पुराने ऑडिटर Shweta Jain & Co LLP ने दिया इस्तीफा

बोर्ड ने M/s Shweta Jain & Co LLP, Chartered Accountants के वैधानिक ऑडिटर के पद से इस्तीफे को भी संज्ञान में लिया है। कंपनी के मुताबिक, यह इस्तीफा 23 सितंबर 2026 से तत्काल प्रभाव से लागू हुआ। फर्म का रजिस्ट्रेशन नंबर 127673W/W101149 है।

कंपनी के मुताबिक, ऑडिटर ने इस्तीफे की वजह दूसरे पेशेवर कामों में व्यस्तता बताई है। ऑडिटर ने यह भी पुष्टि की है कि बताए गए कारण के अलावा इस्तीफा देने की कोई अन्य महत्वपूर्ण वजह नहीं है।

NGPC & Co. को नया वैधानिक ऑडिटर बनाया

ऑडिट कमेटी की 8 अक्टूबर 2026 को हुई बैठक में की गई सिफारिश के आधार पर बोर्ड ने M/s NGPC & Co., Chartered Accountants को कंपनी का नया वैधानिक ऑडिटर नियुक्त करने की मंजूरी दी है। यह नियुक्ति Shweta Jain & Co LLP के इस्तीफे से पैदा हुई आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए की गई है। हालांकि, यह नियुक्ति कंपनी के सदस्यों की मंजूरी के अधीन है।

NGPC & Co. का फर्म रजिस्ट्रेशन नंबर 145474W और पीयर रिव्यू सर्टिफिकेट नंबर 017777 है। कंपनी ने बताया कि इसकी नियुक्ति 8 अक्टूबर 2026 से की गई है।

2017 में हुई थी फर्म की शुरुआत

कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, NGPC & Co. की स्थापना 2017 में सीए नवनीत एस. गज्जा और सीए पुष्पा यू. चांडवानी ने की थी। दोनों के पास 20 साल से ज्यादा का पेशेवर अनुभव है। सीए चंपा पुरोहित 1 अप्रैल 2024 को फर्म में पार्टनर के तौर पर शामिल हुई थीं।

यह फर्म ऑडिट एंड एश्योरेंस, अकाउंटिंग, इनकम टैक्स, जीएसटी, कंपनी कानून से जुड़े मामले, मैनेजमेंट कंसल्टेंसी, फिक्स्ड एसेट्स वेरिफिकेशन, स्टॉक वेरिफिकेशन, इंफॉर्मेशन सिस्टम ऑडिट और फेमा जैसी सेवाएं देती है।

कंपनी के अनुसार, फर्म के पास अलग-अलग क्षेत्रों में अनुभवी प्रोफेशनल्स और एसोसिएट्स हैं। यह लागू कानूनी और नैतिक नियमों के तहत गुणवत्तापूर्ण, समय पर और प्रभावी पेशेवर सेवाएं देने पर ध्यान देती है।

NGPC & Co. ने कंपनी के वैधानिक ऑडिटर के रूप में काम करने के लिए अपनी सहमति भी दे दी है। फर्म ने पुष्टि की है कि वह इस नियुक्ति के लिए योग्य है और कंपनी अधिनियम, 2013 और उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार उसकी नियुक्ति पर कोई अयोग्यता लागू नहीं होती।

Gozoop Online के शेयरों के अधिग्रहण से जुड़ा फैसला

बोर्ड ने Gozoop Online Private Limited के शेयरों के Tranche 2 Acquisition के लिए शेयर बेचने वाले शेयरधारकों को नकद भुगतान करने को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही इस संबंध में संशोधन समझौता यानी Amendment Agreement करने को भी मंजूरी दी गई है।

कंपनी ने कहा है कि 30 मार्च 2026 को किए गए Share Purchase and Shareholders’ Agreement (SPSHA) में प्रस्तावित संशोधन समझौते से जुड़ी जानकारी संबंधित पक्षों द्वारा उस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद साझा की जाएगी।

यह संशोधन समझौता Yaap Digital Limited यानी खरीदार, शेयर बेचने वाले शेयरधारकों और Gozoop Online Private Limited के बीच प्रस्तावित है। कंपनी ने कहा कि संशोधन समझौते के निष्पादित होने के बाद उससे जुड़ी जरूरी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी।

Yaap Digital Limited पहले Yaap Digital Private Limited के नाम से जानी जाती थी। कंपनी की ओर से यह जानकारी कंपनी सचिव और अनुपालन अधिकारी शिवानी शिवशंकर तिवारी ने दी है।  

 

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सर्वम एआई में शशिकुमार श्रीधरन की एंट्री : ग्लोबल बिजनेस विस्तार पर रहेगा फोकस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन को सर्वम एआई में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर नियुक्त किया गया है। वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी और ग्लोबल एआई ग्रोथ को आगे बढ़ाएंगे।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शशिकुमार श्रीधरन (Shashikumar Sridharan) को सर्वम एआई (Sarvam AI) में प्रेसिडेंट और चीफ बिजनेस ऑफिसर (President and Chief Business Officer) नियुक्त किया गया है। नई भूमिका में वह कंपनी की बिजनेस स्ट्रैटेजी को आगे बढ़ाने और ग्रोथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालेंगे। कंपनी भारत और ग्लोबल मार्केट्स में अपनी एआई (AI) पेशकशों का विस्तार कर रही है।

शशिकुमार श्रीधरन हाल ही में गूगल क्लाउड इंडिया (Google Cloud India) के मैनेजिंग डायरेक्टर (Managing Director) पद से हटे हैं। उनकी जगह गूगल क्लाउड इंडिया में डिजिटल नेटिव्स बिजनेस (Digital Natives Business) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कुमार (Amit Kumar) को अंतरिम लीडर नियुक्त किया गया है। गूगल क्लाउड के एशिया पैसिफिक प्रेसिडेंट करण बाजवा (Karan Bajwa) ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए नेतृत्व में बदलाव की जानकारी दी थी।

सर्वम एआई हाल ही में अपनी फंडिंग को लेकर भी चर्चा में रहा है। कंपनी ने 300 मिलियन डॉलर की सीरीज बी (Series B) फंडिंग के पहले चरण में 234 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। इस निवेश के बाद कंपनी का पोस्ट-मनी वैल्यूएशन 1.5 बिलियन डॉलर हो गया है।

इस फंडिंग राउंड में एचसीएलटेक (HCLTech) और बेसमर वेंचर पार्टनर्स (Bessemer Venture Partners) ने निवेश किया है। कंपनी के मौजूदा निवेशकों खोसला वेंचर्स (Khosla Ventures) और पीक XV पार्टनर्स (Peak XV Partners) ने भी इस राउंड में अपना समर्थन जारी रखा है। नई भूमिका में श्रीधरन का फोकस सर्वम एआई की बिजनेस स्ट्रैटेजी को मजबूत करने और भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंपनी के एआई बिजनेस के विस्तार को गति देने पर रहेगा।

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क्विंट डिजिटल के बोर्ड की बैठक 9 अक्टूबर को, 82.61 लाख वारंट्स पर होगा फैसला

क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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क्विंट डिजिटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक 9 अक्टूबर 2026 को होने जा रही है। कंपनी ने 6 अक्टूबर को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि इस बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट से जुड़ी फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी पर विचार किया जाएगा।

कंपनी के मुताबिक, ये वारंट 10 रुपये अंकित मूल्य के हैं और इन्हें 11 सितंबर 2026 को राइट्स आधार पर जारी और आवंटित किया गया था। इन वारंट का आवंटन कंपनी की 19 अगस्त 2026 की लेटर ऑफ ऑफर के तहत किया गया था।

रिकॉर्ड डेट भी तय हो सकती है

क्विंट डिजिटल ने बताया कि बोर्ड बैठक में इन वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी नोटिस पर विचार कर उसे मंजूरी दी जा सकती है। इसके साथ ही बोर्ड रिकॉर्ड डेट तय करने पर भी विचार करेगा। इसके अलावा कॉल मनी के भुगतान का कार्यक्रम और इससे जुड़े अन्य जरूरी व इससे जुड़े मामलों पर भी फैसला लिया जाएगा।

82.61 लाख वारंट पर होगी कॉल मनी

कंपनी ने अपनी सूचना में बताया है कि बैठक में 82,61,401 आंशिक रूप से चुकता वारंट के लिए फर्स्ट एंड फाइनल कॉल मनी से जुड़े मामलों पर विचार किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने इस सूचना में यह नहीं बताया है कि प्रति वारंट कितनी कॉल मनी देनी होगी।  

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डीबी कॉर्प के शेयरों को लेकर बड़ी अपडेट, तिमाही में नहीं मिली कोई डिमैट रिक्वेस्ट

डीबी कॉर्प लिमिटेड ने 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए शेयरों से जुड़ी एक अहम जानकारी शेयर बाजार को दी है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 07 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 07 October, 2026
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डीबी कॉर्प लिमिटेड ने 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए शेयरों से जुड़ी एक अहम जानकारी शेयर बाजार को दी है। कंपनी ने बताया कि इस तिमाही के दौरान उसे शेयरों को डिमैट कराने से जुड़ी कोई भी रिक्वेस्ट नहीं मिली।

कंपनी ने 6 अक्टूबर 2026 को बीएसई और एनएसई को दी जानकारी में बताया कि उसने सेबी के डिपॉजिटरीज एंड पार्टिसिपेंट्स रेग्युलेशन, 2018 के रेग्युलेशन 74(5) के तहत जरूरी प्रमाणपत्र जमा किया है।

यह प्रमाणपत्र कंपनी के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट केफिन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड ने जारी किया है।

सभी शेयर पहले से इलेक्ट्रॉनिक रूप में हैं

केफिन टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी प्रमाणपत्र में कहा गया है कि 30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही के दौरान डिमैट रिक्वेस्ट प्रोसेसिंग के लिए कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ। इसका कारण यह बताया गया है कि डीबी कॉर्प के सभी शेयर पहले से ही इलेक्ट्रॉनिक यानी डिमैट रूप में रखे गए हैं।

इसलिए तिमाही के दौरान किसी शेयर को भौतिक रूप से इलेक्ट्रॉनिक रूप में बदलने के लिए कोई डिमैट अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ।

कंपनी ने शेयर बाजार को सौंपा प्रमाणपत्र

डीबी कॉर्प ने केफिन टेक्नोलॉजीज की ओर से जारी इस पुष्टि प्रमाणपत्र को बीएसई और एनएसई के रिकॉर्ड में लेने का अनुरोध किया है। कंपनी ने यह जानकारी सेबी के डिपॉजिटरीज एंड पार्टिसिपेंट्स रेग्युलेशन, 2018 के रेग्युलेशन 74(5) के तहत दी है। कंपनी के शेयर बीएसई पर 533151 और एनएसई पर DBCORP नाम से सूचीबद्ध हैं।

 

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9 अक्टूबर से जेमिनी में बदलेगा मॉडल एक्सेस : फ्री और AI प्लस यूजर्स पर असर

गूगल जेमिनी में 9 अक्टूबर से मॉडल एक्सेस प्लान के हिसाब से बदलेगा। फ्री यूजर्स को फ्लैश-लाइट, AI प्लस यूजर्स को फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल मिलेंगे। प्रो मॉडल के लिए प्लान होगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
Google Gemini

गूगल जेमिनी (Google Gemini) इस्तेमाल करने वालों के लिए 9 अक्टूबर 2026 से बड़ा बदलाव होने वाला है। कंपनी अलग-अलग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल (AI Models) का एक्सेस यूजर के प्लान के हिसाब से तय करेगी। इसका असर फ्री यूजर्स के साथ एआई प्लस सब्सक्राइबर्स पर भी पड़ेगा।

नए नियमों के बाद फ्री यूजर्स को सिर्फ फ्लैश-लाइट मॉडल (Flash-Lite Model) मिलेगा। वहीं, एआई प्लस यूजर्स फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल (Flash Model) इस्तेमाल कर सकेंगे। एआई प्लस यूजर्स को प्रो मॉडल (Pro Model) का एक्सेस नहीं मिलेगा।

भारत में एआई प्लस प्लान की कीमत 399 रुपये प्रति महीना है। इस प्लान में यूजर्स फ्लैश-लाइट और फ्लैश मॉडल इस्तेमाल कर पाएंगे, लेकिन जेमिनी प्रो जैसे ज्यादा पावरफुल मॉडल उपलब्ध नहीं होंगे। बड़े और ज्यादा पावरफुल जेमिनी मॉडल इस्तेमाल करने के लिए यूजर्स को गूगल एआई प्रो (Google AI Pro) या गूगल एआई अल्ट्रा (Google AI Ultra) लेना होगा।

गूगल एआई प्रो की कीमत 1,950 रुपये और गूगल एआई अल्ट्रा की शुरुआती कीमत 6,500 रुपये प्रति महीना है। इन दोनों प्लान में यूजर्स को फ्लैश-लाइट, फ्लैश और प्रो मॉडल का एक्सेस मिलता रहेगा।

कंपनी जेमिनी ऐप में मॉडल चुनने के तरीके में भी बदलाव कर रही है। यूजर्स हर उपलब्ध मॉडल के लिए कम, मीडियम और ज्यादा एफर्ट लेवल (Effort Level) चुन सकेंगे। ज्यादा एफर्ट लेवल पर मॉडल किसी काम को पूरा करने और बेहतर जवाब देने के लिए ज्यादा क्षमता इस्तेमाल करेगा। हालांकि, इससे यूजर्स की इस्तेमाल सीमा भी जल्दी खत्म हो सकती है।

गूगल के मुताबिक, नए एफर्ट लेवल से जेमिनी ऐप में काम करने का तरीका गूगल एआई स्टूडियो (Google AI Studio) और एंटिग्रिटी के विकल्पों जैसा होगा।

ये बदलाव कंपनी के नए जेमिनी 4 आर्गन (Gemini 4 Argon) मॉडल की घोषणा के कुछ दिनों बाद आ रहे हैं। गूगल ने आर्गन को अपना अब तक का सबसे पावरफुल एआई मॉडल बताया है। हालांकि, फिलहाल यह मॉडल कुछ खास साझेदारों के लिए उपलब्ध है। एआई प्लस यूजर्स को बदलाव की जानकारी ईमेल से मिलेगी।

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न्यूजरूम के लिए YouTube ने लॉन्च किए नए टूल्स, कमाई से लेकर AI सेफ्टी तक पर फोकस

नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 03 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 03 October, 2026
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यूट्यूब (YouTube) ने न्यूज ऑर्गनाइजेशंस और न्यूजरूम के लिए कई नए टूल्स पेश किए हैं। इनका मकसद न्यूज स्टोरी को बेहतर तरीके से तैयार करने, दर्शकों के व्यवहार को समझने, नियमित कमाई बढ़ाने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए पत्रकारों की पहचान और कंटेंट के गलत इस्तेमाल से सुरक्षा देने में मदद करना है।

इन नए फीचर्स की घोषणा न्यूयॉर्क में आयोजित YouTube के 14वें न्यूज वर्किंग ग्रुप में की गई। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के 100 से ज्यादा न्यूज पार्टनर्स शामिल हुए और डिजिटल पत्रकारिता के भविष्य पर चर्चा की गई।

YouTube के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर न्यूज देखने का चलन लगातार बढ़ रहा है। 2025 में दुनियाभर के यूजर्स ने 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज कंटेंट देखा। इनमें से 12 अरब घंटे से ज्यादा कंटेंट कनेक्टेड टीवी पर देखा गया। इससे पता चलता है कि लोग अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर पर ही नहीं, बल्कि टीवी पर भी YouTube के जरिए न्यूज देख रहे हैं।

YouTube Studio में मिलेंगे ज्यादा डेटा और इनसाइट्स

नए अपडेट का एक बड़ा हिस्सा YouTube Studio को न्यूजरूम के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने पर केंद्रित है। YouTube अपने Insights और Research फीचर्स को बढ़ा रहा है। इससे एडिटोरियल टीम यह समझ सकेगी कि उनकी कवरेज को दर्शकों का कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है और किन विषयों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

इसका इस्तेमाल सिर्फ वीडियो के लाइव होने के बाद व्यूज देखने तक सीमित नहीं रहेगा। न्यूजरूम यह समझ सकेंगे कि दर्शक किस तरह की खबरों और कंटेंट पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसके आधार पर वे आगे की कवरेज और एडिटोरियल संसाधनों को लेकर फैसले ले सकेंगे।

वीडियो तैयार करते समय भी मिलेगा AI फीडबैक

YouTube वीडियो तैयार करने के दौरान भी फीडबैक देने वाले फीचर्स ला रहा है। ये टूल्स नैरेटिव फ्लो, पेसिंग और स्टोरीटेलिंग स्ट्रक्चर जैसे पहलुओं पर इनपुट दे सकेंगे। यानी वीडियो पब्लिश होने से पहले ही न्यूजरूम को यह समझने में मदद मिल सकती है कि कहानी को किस तरह और बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है।

थंबनेल की भी होगी टेस्टिंग

YouTube ने थंबनेल को लेकर भी नए फीचर्स पेश किए हैं। डायनेमिक थंबनेल के जरिए ऑडियंस के अलग-अलग हिस्सों को प्रदर्शन के आधार पर अलग वर्जन दिखाए जा सकेंगे। इससे हर दर्शक को एक ही थंबनेल दिखाने के बजाय अलग-अलग विकल्पों को आजमाया जा सकेगा।

इसके अलावा आने वाले वीडियो A/B टेस्टिंग टूल के जरिए न्यूज ऑर्गनाइजेशन अलग-अलग हुक, स्टोरीटेलिंग फॉर्मेट और विजुअल्स को टेस्ट कर सकेंगे। इससे यह तुलना करने में मदद मिलेगी कि किस तरीके से दर्शकों की बेहतर प्रतिक्रिया मिल रही है।

पुरानी खबरों को फिर से सामने लाने में मदद करेगा Ask Studio

YouTube अपने AI-पावर्ड Ask Studio का इस्तेमाल पुरानी कवरेज को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने के लिए भी कर रहा है। यह पुराने वीडियो को देखकर नए थंबनेल जैसे बदलाव सुझा सकता है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन की पुरानी और उपयोगी रिपोर्टिंग को दोबारा ऑडियंस के सामने लाने में मदद मिल सकती है, बजाय इसके कि नई वीडियो के आने के बाद पुरानी स्टोरी पीछे छूट जाए।

मेंबरशिप के जरिए नियमित कमाई पर भी जोर

YouTube ने न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए कमाई से जुड़े फीचर्स पर भी ध्यान दिया है। प्लेटफॉर्म के मुताबिक, Channel Memberships के जरिए पिछले पांच साल में क्रिएटर्स को 1.5 अरब डॉलर से ज्यादा का भुगतान किया गया है। अब YouTube में मेंबर्स के लिए एक अलग इन-ऐप हब भी जोड़ा जा रहा है। इसमें सदस्य सिर्फ मेंबर्स के लिए उपलब्ध कंटेंट आसानी से खोज सकेंगे।

संभावित सदस्य सब्सक्राइब करने से पहले members-only वीडियो का प्रीव्यू भी देख सकेंगे। इसके अलावा YouTube members-only communities भी शुरू कर रहा है। इससे न्यूज ऑर्गनाइजेशन अपने दर्शकों के साथ ज्यादा सीधा और नियमित जुड़ाव बना सकेंगे।

AI से पत्रकारों की आवाज और चेहरे की सुरक्षा

नए अपडेट का सबसे संवेदनशील हिस्सा पत्रकारों और क्रिएटर्स की डिजिटल पहचान से जुड़ा है। जनरेटिव AI की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज की नकल करना आसान हो गया है। ऐसे में YouTube पत्रकारों और क्रिएटर्स को उनकी पहचान के गलत इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण देने की दिशा में काम कर रहा है।

YouTube के पास पहले से Likeness Detection फीचर है। इसके जरिए क्रिएटर्स अपनी दृश्य पहचान यानी चेहरे के अनधिकृत इस्तेमाल को पहचान और मैनेज कर सकते हैं।

अब YouTube Speaking-Voice Detection को Facial Detection के साथ जोड़ने की योजना बना रहा है। इसका मकसद ऐसे कंटेंट को पहचानना आसान बनाना है जिसमें किसी क्रिएटर या पत्रकार के चेहरे और आवाज की नकल की गई हो।

Likeness Detection को YouTube के मोबाइल ऐप में भी लाया जाएगा। इसके बाद न्यूज क्रिएटर्स मोबाइल से ही सिस्टम सेट कर सकेंगे, अपनी पहचान के संभावित इस्तेमाल की समी`क्षा कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उस पर कार्रवाई कर सकेंगे।

एक ही जगह पर न्यूज के कई पहलुओं पर फोकस

YouTube के नए टूल्स न्यूज बिजनेस के कई हिस्सों को कवर करते हैं। इनमें ऑडियंस की पसंद समझना, स्टोरी को बेहतर बनाना, अलग-अलग पैकेजिंग को टेस्ट करना, पुराने कंटेंट को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाना, मेंबरशिप से कमाई बढ़ाना और पत्रकारों की डिजिटल पहचान की सुरक्षा शामिल है।

2025 में YouTube पर 35 अरब घंटे से ज्यादा न्यूज देखे जाने और इनमें 12 अरब घंटे से ज्यादा कनेक्टेड टीवी पर देखे जाने के आंकड़ों के बीच इन नए फीचर्स का न्यूज ऑर्गनाइजेशन के लिए महत्व बढ़ जाता है।

अब न्यूज संस्थानों के सामने इन टूल्स को एक साथ इस्तेमाल करने की चुनौती होगी- दर्शकों की पसंद समझने से लेकर खबर को बेहतर तरीके से पेश करने, उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने, दर्शकों को दोबारा जोड़ने, कुछ दर्शकों को पेड मेंबर बनाने और AI के दौर में पत्रकारों की डिजिटल पहचान को सुरक्षित रखने तक।

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