समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। जनसत्ता के पूर्व सहायक संपादक व साहित्यिक पत्रकार प्रभात रंजन को भास्कर ग्रुप ने पहला द्वारका प्रसाद साहित्य सम्मान प्रदान किया। जयपुर लिटरेटर फेस्टिवल में रविवार को उन्हें यह सम्मान उनकी पुस्तक ‘कोठागोई’ के लिए दिया गया। अवॉर्ड का मुख्य उद्देश्य हिंदी भाषा को नई पहचान देने के साथ ही हिंदी साहित्य को अ
by
समाचार4मीडिया ब्यूरो
समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया)’ (NUJI) का राष्ट्रीय सम्मेलन 6 और 7 जून को आगरा में आयोजित होगा। सम्मेलन में 25 राज्यों के 200 से अधिक प्रतिनिधि और कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
by
Samachar4media Bureau
‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया)’ (NUJI) का राष्ट्रीय सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 6 और 7 जून 2026 को आगरा में आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम का आयोजन जेपी ऑडिटोरियम, खंदारी परिसर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में होगा।
सम्मेलन में ‘एनयूजेआई’ (NUJI) की 25 राज्य इकाइयों के 200 से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष रास बिहारी (Ras Bihari) करेंगे।
‘एनयूजेआई’ (NUJI) के महासचिव प्रदीप तिवारी (Pradeep Tiwari) ने बताया कि सम्मेलन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मीडिया जगत से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही संगठन के आगामी चुनाव कार्यक्रम की घोषणा भी इसी सम्मेलन में की जाएगी।
सम्मेलन को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya), केंद्रीय राज्यमंत्री एसपी सिंह बघेल (SP Singh Baghel), उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह (Dayashankar Singh), उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय (Yogendra Upadhyay), विधायक धर्मपाल सिंह (Dharampal Singh) और विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी (Prof. Ashu Rani) संबोधित करेंगी।
राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रमोद गोस्वामी (Pramod Goswami) के अनुसार, सम्मेलन का पहला सत्र 6 जून को दोपहर 3 बजे होगा, जिसमें एसपी सिंह बघेल और दयाशंकर सिंह मुख्य अतिथि रहेंगे। वहीं दूसरा सत्र 7 जून को सुबह 11 बजे आयोजित होगा, जिसमें उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 4 जून 2026 को निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे।
by
Samachar4media Bureau
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के वरिष्ठ निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 4 जून 2026 को निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहलाज निहलानी पिछले कुछ समय से लिवर सिरोसिस की बीमारी से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। बताया जा रहा है कि निधन से पहले वह करीब एक महीने तक अस्पताल में भर्ती भी रहे थे।
पहलाज निहलानी ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत वर्ष 1982 में निर्माता के तौर पर फिल्म ‘हाथकड़ी’ से की थी। इसके बाद उन्होंने 1985 में ‘आंधी-तूफान’ और 1986 में ‘इल्जाम’ जैसी फिल्मों का निर्माण किया। फिल्म ‘इल्जाम’ के जरिए अभिनेता गोविंदा ने बॉलीवुड में अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी।
फिल्म निर्माण के अलावा पहलाज निहलानी ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इसके साथ ही उन्होंने एसोसिएशन ऑफ पिक्चर्स एंड टीवी प्रोग्राम प्रोड्यूसर्स का 29 वर्षों तक नेतृत्व किया और वर्ष 2009 में इस पद से इस्तीफा दिया था।
उनके निधन पर मौजूदा CBFC अध्यक्ष और प्रसार भारती के पूर्व CEO शशि शेखर वेम्पति ने शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “पूर्व CBFC चेयरमैन श्री पहलाज निहलानी के निधन पर पूरे CBFC परिवार की ओर से हार्दिक संवेदनाएं।”
Heartfelt condolences from the entire CBFC family on the demise of former CBFC Chairperson Shri Pahlaj Nihalani ? https://t.co/bJhvLHapYB
— Shashi Shekhar Vempati शशि शेखर वेम्पटि (@shashidigital) June 4, 2026
पहलाज निहलानी का निधन भारतीय फिल्म उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने निर्माता और प्रशासक, दोनों भूमिकाओं में फिल्म जगत को महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ऑनलाइन ग्राहकों को गुमराह करने वाले 'डार्क पैटर्न' इस्तेमाल करने के आरोप में CCPA ने PhysicsWallah और McAfee Software India पर जुर्माना लगाया है।
by
Samachar4media Bureau
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने ऑनलाइन ग्राहकों को गुमराह करने वाले तथाकथित "डार्क पैटर्न" इस्तेमाल करने के मामले में एडटेक कंपनी PhysicsWallah और साइबर सुरक्षा कंपनी McAfee Software India पर जुर्माना लगाया है।
नियामकीय जांच के बाद CCPA ने PhysicsWallah पर 5 लाख रुपये और McAfee Software India पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही दोनों कंपनियों को अपने ऐप और वेबसाइट से ऐसे सभी भ्रामक और ग्राहकों को प्रभावित करने वाले डिजाइन फीचर्स तुरंत हटाने का निर्देश दिया गया है।
यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम 2020 और डार्क पैटर्न की रोकथाम एवं नियमन संबंधी 2023 के दिशा-निर्देशों के तहत की गई है।
CCPA ने PhysicsWallah के प्लेटफॉर्म की स्वतः संज्ञान (Suo Motu) जांच शुरू की थी। जांच में तीन ऐसे मामले सामने आए, जो मुख्य रूप से कम उम्र के छात्रों को प्रभावित करने वाले पाए गए।
जांच में पता चला कि कोर्स खरीदने के दौरान PhysicsWallah अपने ग्राहकों की स्पष्ट अनुमति लिए बिना PW Foundation के लिए 10 रुपये का दान (Donation) पहले से ही जोड़ देता था। यदि कोई ग्राहक इस दान को हटाने की कोशिश करता था, तो स्क्रीन पर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और शादी जैसे भावनात्मक संदेश दिखाए जाते थे, जिससे ग्राहक पर दान जारी रखने का मानसिक दबाव बनाया जाता था।
CCPA ने यह भी पाया कि कंपनी कई कोर्स को मुफ्त (Free) बताकर प्रचारित कर रही थी, लेकिन उन कोर्स तक पहुंचने से पहले छात्रों को अपना मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी जैसी महत्वपूर्ण व्यक्तिगत जानकारी देना अनिवार्य था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि अलग-अलग प्रोफाइल पर कोर्स की सामग्री समान थी। इससे यह साबित हुआ कि शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए इतनी व्यक्तिगत जानकारी लेना जरूरी नहीं था और यह केवल डेटा जुटाने का तरीका था।
वहीं McAfee Software India के मामले में CCPA ने उसके सब्सक्रिप्शन रिन्यूअल सिस्टम की जांच की और उसमें उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाले डिजाइन तत्व पाए।
जांच में पता चला कि सब्सक्रिप्शन रिन्यू करने के दौरान ग्राहकों को कोई निष्पक्ष विकल्प नहीं दिया जा रहा था। स्क्रीन पर सिर्फ दो विकल्प दिखाई देते थे- "Renew Now" और "Accept Risk"।
CCPA का कहना है कि इस डिजाइन में रिन्यूअल के विकल्प को प्रमुखता से दिखाया गया था, जबकि रिन्यूअल न करने को सीधे साइबर सुरक्षा जोखिम के रूप में पेश किया गया। नियामक के अनुसार, McAfee यह साबित नहीं कर सका कि रिन्यूअल न करने पर ग्राहक को तत्काल साइबर सुरक्षा खतरा जरूर होगा।
CCPA की मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ता की सहमति हमेशा स्पष्ट, स्वैच्छिक और किसी भी तरह के डिजाइन-आधारित दबाव से मुक्त होनी चाहिए।
प्राधिकरण ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ग्राहकों को भ्रमित करने या मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर निर्णय लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
यह कार्रवाई भारत में 2023 के डार्क पैटर्न दिशानिर्देशों को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। इन दिशानिर्देशों के तहत 13 तरह की भ्रामक और उपभोक्ताओं को प्रभावित करने वाली डिजिटल तकनीकों को अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) घोषित किया गया है।
हर सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की एक ऐसी यात्रा होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है। शलभ मणि त्रिपाठी की यात्रा भी ऐसी ही है।
by
Samachar4media Bureau
हर सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की एक ऐसी यात्रा होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है। शलभ मणि त्रिपाठी की यात्रा भी ऐसी ही है। यह सफर सत्ता के गलियारों से नहीं, बल्कि हिंदी पत्रकारिता के व्यस्त न्यूजरूम से शुरू हुआ था, जहां हर दिन डेडलाइन का दबाव होता था, खबरें तेजी से तैयार की जाती थीं और देश की नब्ज अक्सर सुर्खियां बनने से पहले ही महसूस कर ली जाती थी।
1 दिसंबर 1977 को उत्तर प्रदेश के देवरिया में जन्मे शलभ मणि त्रिपाठी एक मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। ऐसे माहौल में उनका पालन-पोषण हुआ, जहां शिक्षा, अनुशासन और सार्वजनिक सेवा को बहुत महत्व दिया जाता था। पढ़ाई में उनका विषय गणित था, लेकिन आगे चलकर कहानी कहने और लोगों तक उनकी बात पहुंचाने का हुनर ही उनकी असली पहचान बना।
साल 1998 में उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। इसके साथ ही शुरू हुआ लगभग दो दशक लंबा करियर, जिसने उन्हें जिलों, कस्बों और राजनीतिक मैदानों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने देश को बदलते हुए बहुत करीब से देखा। चाहे स्थानीय मुद्दों की रिपोर्टिंग हो या राष्ट्रीय घटनाक्रम की कवरेज, उन्होंने आम लोगों की उम्मीदों और चिंताओं को समझने की एक अलग पहचान बनाई। उनके लिए पत्रकारिता सिर्फ एक पेशा नहीं थी, बल्कि तेजी से बदलते भारत की हकीकत को समझने का एक माध्यम थी।
दैनिक जागरण, अमर उजाला और कई टीवी न्यूज नेटवर्क जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम करते हुए उनका सफर आधुनिक भारत के कई बड़े राजनीतिक और सामाजिक बदलावों का गवाह बना। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने सवाल पूछना, जवाबदेही तय करना और स्पष्ट तरीके से अपनी बात रखना सीखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके सार्वजनिक जीवन की सोच और कार्यशैली का आधार बने। फिर उनकी जिंदगी में एक बड़ा मोड़ आया।
साल 2016 में राजनीति, प्रशासन और जननीतियों पर वर्षों तक रिपोर्टिंग करने के बाद शलभ मणि त्रिपाठी ने खुद राजनीति में उतरने का फैसला किया। यह ऐसा बदलाव था, जिसे बहुत कम लोग सफलतापूर्वक कर पाते हैं। सत्ता को बाहर से देखने और फिर खुद जिम्मेदारी संभालने के लिए अलग तरह के विश्वास और संकल्प की जरूरत होती है। लेकिन यह फैसला उन मुद्दों पर सीधे काम करने की उनकी इच्छा को दर्शाता था, जिन पर वह वर्षों तक रिपोर्टिंग करते रहे थे।
उनकी इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय साल 2022 में सामने आया, जब वे देवरिया से उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए। कई लोगों के लिए यह उस लंबे करियर की उपलब्धि थी, जो जनता से जुड़ाव और जमीनी समझ पर आधारित था। वहीं शलभ मणि त्रिपाठी के लिए यह उन लोगों के प्रति एक नई जिम्मेदारी की शुरुआत थी, जिनकी कहानियां वह कभी पत्रकार के रूप में दुनिया तक पहुंचाते थे।
उनकी कहानी को खास बनाती है सिर्फ उनके पद नहीं, बल्कि वह बदलाव जो उनकी यात्रा में दिखाई देता है। उन्होंने सार्वजनिक जीवन को अलग-अलग नजरियों से देखा है। एक तरफ वह पत्रकार रहे, जिन्होंने बदलावों को दर्ज किया और दूसरी तरफ विधायक बने, जो उन बदलावों का हिस्सा हैं।
आज जब शलभ मणि त्रिपाठी अपना जन्मदिन मना रहे हैं, तो उनका सफर यह याद दिलाता है कि करियर हमेशा सीधी रेखा में नहीं चलता। कई बार जीवन के एक अध्याय में सीखे गए कौशल ही अगले और बड़े उद्देश्य की नींव बनते हैं। न्यूजरूम की चर्चाओं से लेकर विधानसभा की बहसों तक, उनकी कहानी खुद को नए रूप में ढालने, लगातार प्रयास करते रहने और सार्वजनिक जीवन से गहरे जुड़ाव की कहानी है।
संबित मोहंती (Sambit Mohanty) ने ‘मैककैन’ (McCann) छोड़ दिया है। वह कंपनी के बेंगलुरु ऑफिस में बिजनेस लीडर और क्रिएटिव हेड की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
by
Samachar4media Bureau
संबित मोहंती (Sambit Mohanty) ने ‘मैककैन’ (McCann) छोड़ दिया है। मई 2025 में उन्हें ‘मैककैन बेंगलुरु’ (McCann Bangalore) में विस्तारित भूमिका दी गई थी। इसके तहत वह बेंगलुरु ऑफिस में बिजनेस लीडर और क्रिएटिव हेड की दोहरी जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
संबित मोहंती को विज्ञापन इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। वह अपनी मजबूत ब्रांड की समझ और कम्युनिकेशन स्किल्स के लिए जाने जाते हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई बड़े ब्रांड्स और कैम्पेन पर काम किया है। इंडस्ट्री में उन्हें क्रिएटिव और बिजनेस दोनों क्षेत्रों में मजबूत पकड़ रखने वाले प्रोफेशनल के तौर पर देखा जाता है। हालांकि फिलहाल उन्होंने अपने अगले कदम का खुलासा नहीं किया है।
बिजनेस न्यूज चैनल ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर और देश के प्रमुख शेयर बाजार विश्लेषकों में से एक अनिल सिंघवी का आज जन्मदिन है।
by
Samachar4media Bureau
बिजनेस न्यूज चैनल ‘जी बिजनेस’ (Zee Business) के मैनेजिंग एडिटर और देश के प्रमुख शेयर बाजार विश्लेषकों में से एक अनिल सिंघवी का आज जन्मदिन है। अपनी गहन विश्लेषण क्षमता, जटिल बाजार अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाने की कला और निवेशकों को सटीक सलाह देने के लिए मशहूर अनिल सिंघवी ने न केवल बिजनेस पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाई, बल्कि लाखों निवेशकों के दिलों में भी खास जगह बनाई है।
राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले अनिल सिंघवी ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी और कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई पूरी की और शेयर बाजार में अपने करियर की शुरुआत की। पत्रकारिता में उनका प्रवेश संयोगवश हुआ, जब 35 साल की उम्र में उन्हें सीएनबीसी आवाज के लिए चुना गया।
अपने जुनून और मेहनत से उन्होंने बिजनेस पत्रकारिता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनका लोकप्रिय शो DNA ऑफ मार्केट आज लाखों निवेशकों की सुबह का अभिन्न हिस्सा है, जो उनकी सादगी और स्पष्ट संवाद शैली को दर्शाता है।
अनिल सिंघवी ने साबित किया है कि शेयर बाजार केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और भावनाओं का संगम है। उनकी सलाह ने अनगिनत निवेशकों को वित्तीय स्वतंत्रता की राह पर आगे बढ़ाया है। जी बिजनेस के अनुसार, आज अपने जन्मदिन पर भी उन्होंने लोगों को निवेश करने के तमाम टिप्स दिए हैं, जिससे उनकी निवेशकों के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण झलकता है।
सोशल मीडिया पर आज सुबह से ही उन्हें शुभकामनाओं का तांता लगा हुआ है। सहयोगी, इंडस्ट्री के साथी और लाखों प्रशंसक उन्हें ‘मार्केट गुरु’, ‘निवेशकों का साथी’ और ‘आर्थिक शिक्षक’ जैसे शब्दों से सम्मानित कर रहे हैं। उनकी सहजता और सटीक विश्लेषण ने उन्हें हर वर्ग के दर्शकों का चहेता बनाया है।
वित्तीय जागरूकता के दौर में अनिल सिंघवी का नाम उस बदलाव का प्रतीक है, जिसने बिजनेस पत्रकारिता को क्लासरूम से निकालकर हर घर तक पहुंचाया। हम उन्हें उनके जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हैं और कामना करते हैं कि वे यूं ही निवेशकों का मार्गदर्शन करते रहें और देश की आर्थिक समझ को नई ऊंचाइयों तक ले जाएं।
राज कुमार अग्रवाल ने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (ZEEL) जॉइन किया है। उन्हें 'ज़ी टीवी' (Zee TV), 'ज़ी अनमोल' (Zee Anmol) और '&TV' के मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है।
by
Samachar4media Bureau
राज कुमार अग्रवाल (Rahj Kumar Agarwal) ने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (Zee Entertainment Enterprises Limited) जॉइन किया है। उन्हें 'ज़ी टीवी' (Zee TV), 'ज़ी अनमोल' (Zee Anmol) और '&TV' के लिए सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केटिंग प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने अपने LinkedIn पोस्ट के जरिए इस नई भूमिका की जानकारी साझा की। राज कुमार अग्रवाल ने लिखा, “नई भूमिका, नई ऊर्जा और नई शुरुआत। यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैंने 'ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड' (ZEEL) में नई जिम्मेदारी संभाली है।”
उन्होंने अपने करियर के दौरान साथ देने वाले सहयोगियों और टीम का भी आभार जताया। साथ ही कहा कि वह आने वाले समय में नई चीजें सीखने, टीम के साथ काम करने और कंपनी की तरक्की में योगदान देने को लेकर उत्साहित हैं। राज कुमार अग्रवाल की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब 'ज़ी एंटरटेनमेंट' (ZEEL) अपने टेलीविजन नेटवर्क में content और audience engagement strategy को और मजबूत करने पर फोकस कर रहा है।
इससे पहले वह करीब सात वर्षों तक 'जियोस्टार' (JioStar) के साथ जुड़े रहे। वहां वह आखिरी बार सीनियर डायरेक्टर - मार्केटिंग, 'कलर्स' (Colors) की भूमिका निभा रहे थे।
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि मीडिया को समाज में हो रहे अच्छे और सकारात्मक कामों को ज्यादा प्रमुखता से दिखाना चाहिए।
by
Samachar4media Bureau
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि मीडिया को समाज में हो रहे अच्छे और सकारात्मक कामों को ज्यादा प्रमुखता से दिखाना चाहिए। उनका मानना है कि अगर सकारात्मक गतिविधियों की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं होगी, तो युवाओं तक सही जानकारी नहीं पहुंचेगी और वे गलत दिशा में जा सकते हैं।
रविवार को मलयालम दैनिक ‘दीपिका’ के 140वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि रचनात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता समाज को सही दिशा देने और लोगों का भरोसा मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा, “सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी रिपोर्टिंग होनी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी। अन्यथा वे रुचि खो देंगे और ‘कॉकरोच’ का अनुसरण करने लगेंगे।”
उपराष्ट्रपति का यह बयान हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर चर्चा में आए व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें अचानक चर्चा में आ जाती हैं, लेकिन उनका प्रभाव लंबे समय तक नहीं रहता। अगर कोई काम वास्तव में अच्छा है तो लोग एक सप्ताह, दस दिन या एक महीने बाद भी उसकी सराहना करेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब समाज का हर वर्ग इसमें योगदान दे। उन्होंने कहा कि देश का विकास किसी एक व्यक्ति, पार्टी या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
राधाकृष्णन ने कहा कि पत्रकारिता का धर्म है कि वह अच्छे कामों की सराहना करे और गलत कामों की निडर होकर आलोचना भी करे। हालांकि, समाचारों की रिपोर्टिंग तथ्यात्मक और निष्पक्ष होनी चाहिए, जबकि राय और विचारों के लिए संपादकीय पृष्ठ उचित स्थान है।
उन्होंने मीडिया के सामने बढ़ती चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक आज गलत सूचनाएं, जनता का घटता भरोसा, व्यावसायिक दबाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का तेजी से बढ़ता प्रभाव मीडिया के लिए बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं।
उपराष्ट्रपति ने चिंता जताई कि आज लोग किसी मुद्दे को गहराई से समझने के बजाय सिर्फ हेडलाइन और कैप्शन देखकर ही राय बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया को समाज में करुणा, वैज्ञानिक सोच, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय उपलब्धियों जैसी सकारात्मक कहानियों को आगे लाना चाहिए, ताकि पत्रकारिता सामाजिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन सके।
इस मौके पर उन्होंने ‘दीपिका’ अखबार की भी सराहना की और कहा कि इसने सामाजिक सौहार्द, शिक्षा के प्रसार, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और सकारात्मक जनचर्चा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अपनी प्रभावशाली एंकरिंग, भाषा पर मजबूत पकड़ और सहज व्यक्तित्व के कारण वे सहकर्मियों और दर्शकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे।
by
Samachar4media Bureau
वरिष्ठ पत्रकार और 'एमपी तक' में एंकर रहे अमित तिवारी का कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया है। उनके परिवार में पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। अमित तिवारी के असामयिक निधन की खबर से पत्रकारिता जगत में शोक की लहर है। सहयोगियों, राजनीतिक हस्तियों, पत्रकारों और शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
मूल रूप से मध्य प्रदेश के सागर जिले के जैसीनगर क्षेत्र स्थित देवलचौरी गांव के निवासी अमित तिवारी ने पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने 'एमपी तक' सहित कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं। अपनी प्रभावशाली एंकरिंग, भाषा पर मजबूत पकड़ और सहज व्यक्तित्व के कारण वे सहकर्मियों और दर्शकों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अमित तिवारी के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनका निधन अत्यंत दुखद है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारतीय ने भी अमित तिवारी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके निधन से बुंदेलखंड और पत्रकारिता जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। उन्होंने कहा कि अमित तिवारी का असमय जाना बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाला है।
पत्रकारिता जगत से जुड़े कई वरिष्ठ पत्रकारों और सहयोगियों ने भी उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया। सहकर्मियों ने उन्हें सरल, सहज, मिलनसार और पेशे के प्रति समर्पित पत्रकार बताया। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोकाकुल परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
कवि और लेखक प्रसून जोशी ने भी बशीर बद्र के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक कविता साझा करते हुए कहा कि बशीर बद्र की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।
by
Samachar4media Bureau
पद्मश्री से सम्मानित मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र का गुरुवार को भोपाल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। डिमेंशिया की बीमारी के बाद उन्होंने कई साल पहले सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी। उनके निधन से साहित्य और शायरी की दुनिया में शोक की लहर है।
‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए’ जैसे कालजयी शेर लिखने वाले बशीर बद्र अपनी सादगी भरी लेकिन दिल को छू लेने वाली शायरी के लिए जाने जाते थे। उनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी और बातचीत का हिस्सा बन गईं।
15 फरवरी 1935 को फैजाबाद, अब अयोध्या, में जन्मे बशीर बद्र ने बहुत छोटी उम्र से शायरी लिखना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने महज सात साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। उनका मशहूर शेर ‘उजाले अपनी यादों के…’ भी उन्होंने किशोरावस्था में लिखा था।
बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी खासियत उसकी सरल भाषा और गहरी भावनाएं थीं। उन्होंने उर्दू शायरी को ऐसी बोलचाल की भाषा दी, जिसे हर वर्ग के लोग आसानी से महसूस कर सकें। उनकी रचनाओं में मोहब्बत, अकेलापन, जुदाई और इंसानी रिश्तों की गर्माहट साफ दिखाई देती थी।
उनके बेटे सैयद बद्र ने कहा कि ‘उजाले अपनी यादों के…’ सिर्फ एक शेर नहीं, बल्कि उनके पिता की पहचान है। उन्होंने कहा कि लोग उनकी शायरी को हमेशा याद रखें, क्योंकि वह जिंदगी और मोहब्बत की शायरी थी।
कवि और लेखक प्रसून जोशी ने भी बशीर बद्र के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक कविता साझा करते हुए कहा कि बशीर बद्र की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।
अधूरी है तेरी रचना ज़रा तू पूरा करने दे
यहाँ एक चोट रखने दे वहाँ एक घाव भरने दे
यहीं काग़ज़ पे ये अल्फ़ाज़ सारे सूख जाएँगे
ज़रा सा फैल जाने दे ज़रा बूँदें बिखरने दे
अभी अंगूर में हूँ और मुझे ख़ामोश रहना है
सुराही में ज़रा शीशों में तू मुझको उतरने दे
कहाँ बुझने का डर मुझको मैं कोई शमा थोड़े हूँ
ज़रा सी ज़ुल्फ़ हूँ मुझको तू झोंकों से सँवरने दे
सुनी हैं धड़कनें उसकी कई चुपचाप कानों से
यही उम्मीद है शायद मुझे बाँहों में मरने दे
सुने तू बैठ कर मुझको नहीं ऐसी तमन्ना है
मैं हूँ ट्रक पर लिखा एक शेर तू मुझको गुज़रने दे
बशीर बद्र ने अपनी शायरी में जिंदगी के छोटे-छोटे एहसासों को बेहद खूबसूरती से शब्द दिए। यही वजह रही कि उनकी पंक्तियां संसद से लेकर कॉलेज कैंटीन तक हर जगह सुनाई देती थीं। उनके जाने से उर्दू अदब की दुनिया ने एक बड़ा नाम खो दिया है, लेकिन उनकी शायरी हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहेगी।