चालान कटने का डर दिखा मीडियाकर्मी के साथ कर दी बड़ी वारदात

पहले भी अन्य लोगों को चपत लगा चुके हैं आरोपित, मामले की जांच में जुटी पुलिस

पंकज शर्मा by
Published - Wednesday, 07 August, 2019
Last Modified:
Wednesday, 07 August, 2019
Arrest


चालान कटने का डर दिखाकर कुछ शातिरों ने मीडियाकर्मी की जेब में रखे 50 हजार रुपए उड़ा लिए। मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर है। राहत की बात यह है कि पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपितों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल ऑटो व 45 हजार रुपए भी बरामद हुए हैं।

बताया जाता है कि नरसिंहपुर निवासी मीडियाकर्मी राजेन्द्र नायक किसी कार्य से संजय जैन के साथ एक अगस्त को जबलपुर आए थे। मदनमहल स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर वे ऑटो में बैठे। ऑटो में उनके साथ दो अन्य युवक भी बैठे थे। प्रेम मंदिर तिराहे पर ऑटो पहुंचने के बाद चालक ने कहा कि आगे पुलिस की डायल 100 गाड़ी खड़ी है और उसके ऑटो का चालान हो जाएगा। इसके बाद वह सभी को उतारकर तेज गति से वहां से ऑटो लेकर निकल गया। इस बीच संजय जैन ने जब अपनी जेब देखी तो उसमें से 50 हजार रुपए गायब थे।

इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर मदनमहल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन के बाहर ऑटो को पकड़ लिया। पूछताछ में चालक मोहम्मद तोहीद ने बताया कि उसने अपने साथी इरफान और इमरान के साथ मिलकर 50 हजार रुपए चुराए थे। तोहीद ने यह भी स्वीकार किया कि मदनमहल में ही उन्होंने एक यात्री से 1500 रुपए तथा माढ़ोताल में 40 हजार रुपए चुराए थे। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 45 हजार रुपए बरामद कर लिए हैं।

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बशीर बद्र को याद कर भावुक हुए प्रसून जोशी, बोले- उनकी शायरी पीढ़ियों तक जिंदा रहेगी

कवि और लेखक प्रसून जोशी ने भी बशीर बद्र के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक कविता साझा करते हुए कहा कि बशीर बद्र की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 29 May, 2026
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Friday, 29 May, 2026
PrasoonJoshi512

पद्मश्री से सम्मानित मशहूर उर्दू शायर बशीर बद्र का गुरुवार को भोपाल में निधन हो गया। वह 91 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। डिमेंशिया की बीमारी के बाद उन्होंने कई साल पहले सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी। उनके निधन से साहित्य और शायरी की दुनिया में शोक की लहर है।

‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए’ जैसे कालजयी शेर लिखने वाले बशीर बद्र अपनी सादगी भरी लेकिन दिल को छू लेने वाली शायरी के लिए जाने जाते थे। उनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी और बातचीत का हिस्सा बन गईं।

15 फरवरी 1935 को फैजाबाद, अब अयोध्या, में जन्मे बशीर बद्र ने बहुत छोटी उम्र से शायरी लिखना शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने महज सात साल की उम्र में लिखना शुरू कर दिया था। उनका मशहूर शेर ‘उजाले अपनी यादों के…’ भी उन्होंने किशोरावस्था में लिखा था।

बशीर बद्र की शायरी की सबसे बड़ी खासियत उसकी सरल भाषा और गहरी भावनाएं थीं। उन्होंने उर्दू शायरी को ऐसी बोलचाल की भाषा दी, जिसे हर वर्ग के लोग आसानी से महसूस कर सकें। उनकी रचनाओं में मोहब्बत, अकेलापन, जुदाई और इंसानी रिश्तों की गर्माहट साफ दिखाई देती थी।

उनके बेटे सैयद बद्र ने कहा कि ‘उजाले अपनी यादों के…’ सिर्फ एक शेर नहीं, बल्कि उनके पिता की पहचान है। उन्होंने कहा कि लोग उनकी शायरी को हमेशा याद रखें, क्योंकि वह जिंदगी और मोहब्बत की शायरी थी।

कवि और लेखक प्रसून जोशी ने भी बशीर बद्र के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने एक कविता साझा करते हुए कहा कि बशीर बद्र की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी।  

अधूरी है तेरी रचना ज़रा तू पूरा करने दे 

यहाँ एक चोट रखने दे वहाँ एक घाव भरने दे

यहीं काग़ज़ पे ये अल्फ़ाज़ सारे सूख जाएँगे

ज़रा सा फैल जाने दे ज़रा बूँदें बिखरने दे 

अभी अंगूर में हूँ और मुझे ख़ामोश रहना है 

सुराही में ज़रा शीशों में तू मुझको उतरने दे 

कहाँ बुझने का डर मुझको मैं कोई शमा थोड़े हूँ 

ज़रा सी ज़ुल्फ़ हूँ मुझको तू झोंकों से सँवरने दे

सुनी हैं धड़कनें उसकी कई चुपचाप कानों से 

यही उम्मीद है शायद मुझे बाँहों में मरने दे 

सुने तू बैठ कर मुझको नहीं ऐसी तमन्ना है 

मैं हूँ ट्रक पर लिखा एक शेर तू मुझको गुज़रने दे 

बशीर बद्र ने अपनी शायरी में जिंदगी के छोटे-छोटे एहसासों को बेहद खूबसूरती से शब्द दिए। यही वजह रही कि उनकी पंक्तियां संसद से लेकर कॉलेज कैंटीन तक हर जगह सुनाई देती थीं। उनके जाने से उर्दू अदब की दुनिया ने एक बड़ा नाम खो दिया है, लेकिन उनकी शायरी हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहेगी।

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ज्ञान परंपरा और साहित्य लेखन को नया आयाम दे रहा ‘हिंदी हैं हम’ अभियान: हरिवंश नारायण सिंह

दैनिक जागरण की ओर से ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित ‘ज्ञानवृत्ति सम्मान’ और ‘कृति सम्मान’ समारोह में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह शामिल हुए।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 29 May, 2026
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Friday, 29 May, 2026
Harivansh Narayan Singh Dainik Jagran

हिंदी दैनिक ‘दैनिक जागरण’ (Dainik Jagran) की ओर से ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में ‘ज्ञानवृत्ति सम्मान’ और ‘कृति सम्मान’ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने हिस्सा लिया और इस पहल की सराहना की।

हरिवंश नारायण सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कार्यक्रम को लेकर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि ज्ञान परंपरा, शोध परंपरा और साहित्य-लेखन को नया आयाम देने के उद्देश्य से आयोजित यह पहल सार्थक और सराहनीय है। उन्होंने कार्यक्रम के लिए जागरण परिवार का आभार भी जताया।

उन्होंने अपने एक अन्य पोस्ट में बताया कि इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस समारोह में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें हिंदी पत्रकारिता के वर्तमान और भविष्य को लेकर चर्चा हुई।

गौरतलब है कि ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के जरिए ‘दैनिक जागरण’ लगातार हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े विषयों को मंच देने और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहा है।

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‘कृषि जागरण’ को बड़ी राहत, कोर्ट ने जागरण प्रकाशन का ट्रेडमार्क मुकदमा किया खारिज

‘कृषि जागरण’ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण पत्रकारिता के लिए लगभग तीन दशक से किए जा रहे कार्यों की मान्यता है।

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Published - Thursday, 28 May, 2026
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Thursday, 28 May, 2026
Krishi Jagran

 

दिल्ली की साकेत जिला अदालत ने ‘जागरण प्रकाशन लिमिटेड’ (Jagran Prakashan Limited) द्वारा कृषि आधारित मैगजीन ‘कृषि जागरण’ (Krishi Jagran) के खिलाफ दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन और पासिंग ऑफ से जुड़ा मुकदमा खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में ‘कृषि जागरण’ को वर्ष 1996 से संबंधित नाम का पूर्व और वैध उपयोगकर्ता माना है।

जिला न्यायाधीश अरुल वर्मा की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वादी द्वारा दायर मुकदमा अनावश्यक और लंबी कानूनी लड़ाई साबित हुआ, जिससे प्रतिवादियों को सार्वजनिक अपमान और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अदालत ने जागरण प्रकाशन लिमिटेड को ‘कृषि जागरण’ को 10 लाख रुपये बतौर जुर्माना देने का निर्देश भी दिया।

इसके साथ ही अदालत ने 29 सितंबर 2020 को जारी अंतरिम इंजंक्शन आदेश को भी निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ‘कृषि जागरण’ को पूर्व उपयोगकर्ता होने के बावजूद इस आदेश के कारण नुकसान उठाना पड़ा।

यह मामला सितंबर 2019 में शुरू हुआ था, जब जागरण प्रकाशन लिमिटेड ने अदालत में दावा किया था कि ‘जागरण’ शब्द और उससे जुड़े ट्रेडमार्क पर उसका विशेष अधिकार है। कंपनी ने आरोप लगाया था कि ‘कृषि जागरण’ अपने प्रिंट प्रकाशनों, वेबसाइट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ‘जागरण’ शब्द का इस्तेमाल कर उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा कर रहा है और ‘दैनिक जागरण’ समूह की प्रतिष्ठा का लाभ उठा रहा है।

वहीं, ‘कृषि जागरण’ ने अदालत में कहा कि वह सितंबर 1996 से लगातार प्रकाशित हो रही कृषि क्षेत्र की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका है और वर्षों से स्वतंत्र पहचान के साथ कार्य कर रही है। प्रतिवादियों की ओर से शुरुआती संस्करणों, आरएनआई पंजीकरण, ट्रेडमार्क दस्तावेजों और विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित संस्करणों समेत कई दस्तावेज अदालत में पेश किए गए।

अदालत ने अपने फैसले में माना कि ‘कृषि जागरण’ लंबे समय से कृषि पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय है और उसे पूर्व उपयोगकर्ता का अधिकार प्राप्त है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जागरण प्रकाशन यह साबित नहीं कर पाया कि ‘कृषि जागरण’ की वजह से पाठकों या बाजार में वास्तविक भ्रम की स्थिति पैदा हुई।

फैसले में अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि ‘कृषि जागरण’ एक कृषि विषयक मासिक पत्रिका है, जबकि ‘दैनिक जागरण’ सामान्य समाचार पत्र है। दोनों की प्रकृति, पाठक वर्ग और प्रकाशन शैली अलग-अलग हैं।

कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी टिप्पणी की कि किसी पूर्व उपयोगकर्ता के खिलाफ बाद में ट्रेडमार्क अधिकार के आधार पर रोक लगाने की कोशिश न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसे मुकदमे प्रतिस्पर्धा को सीमित करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करने जैसे प्रतीत होते हैं।

‘कृषि जागरण’ की ओर से जारी बयान में कहा गया कि यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं, बल्कि भारतीय कृषि, किसानों और ग्रामीण पत्रकारिता के लिए लगभग तीन दशक से किए जा रहे कार्यों की मान्यता है। ‘कृषि जागरण’ के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ एम.सी. डॉमिनिक ने कहा कि कठिन कानूनी लड़ाई के बावजूद उसने अपने पेशेवर मूल्यों और कृषि समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता को बनाए रखा। संस्था ने मीडिया जगत, कृषि क्षेत्र और शुभचिंतकों का आभार जताते हुए कहा कि ‘कृषि जागरण’ आगे भी भारतीय कृषि और ग्रामीण भारत की आवाज को मजबूती से उठाता रहेगा।

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जन्मदिन विशेष: मीडिया और डिजिटल इनोवेशन का मजबूत चेहरा हैं कैलाशनाथ अधिकारी

वर्तमान में वह श्री अधिकारी ब्रदर्स नेटवर्क के पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म ‘गवर्नेंस नाउ’ का नेतृत्व कर रहे हैं, साथ ही कंपनी के ब्रॉडकास्टिंग और कंटेंट डिवीजन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

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Published - Thursday, 28 May, 2026
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Thursday, 28 May, 2026
Kailashnath Adhikari

श्री अधिकारी ब्रदर्स नेटवर्क (Sri Adhikari Brothers Network) के मैनेजिंग डायरेक्टर कैलाशनाथ अधिकारी का नाम आज मीडिया, पब्लिक पॉलिसी और डिजिटल कंटेंट की दुनिया में एक मजबूत पहचान बन चुका है। 26 मई को उनके जन्मदिन पर कैलाशनाथ अधिकारी को मीडिया और कॉरपोरेट जगत से जुड़े लोगों ने उनकी बहुआयामी उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमता के लिए शुभकामनाएं दीं।

कैलाशनाथ अधिकारी ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कम उम्र में की थी। प्रतिष्ठित लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (London School of Economics) से अकाउंटिंग में डबल पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में योजना आयोग (Planning Commission) में डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर काम किया। उस दौर में उनकी कार्यशैली और पॉलिसी समझ को लेकर ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ ने भी उन्हें युवा पॉलिसी प्रोफेशनल्स में प्रमुखता से जगह दी।

समय के साथ कैलाशनाथ अधिकारी ने पब्लिक पॉलिसी से मीडिया और बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और श्री अधिकारी ब्रदर्स नेटवर्क की विरासत को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। वर्तमान में वह समूह के पब्लिक पॉलिसी प्लेटफॉर्म ‘गवर्नेंस नाउ’ (Governance Now) का नेतृत्व कर रहे हैं, साथ ही कंपनी के ब्रॉडकास्टिंग और कंटेंट डिवीजन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।

उनके नेतृत्व में ‘गवर्नेंस नाउ’ ने 12 साल पूरे किए हैं और यह प्लेटफॉर्म देश के पॉलिसी, प्रशासन और गवर्नेंस क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम बन चुका है। इस मंच ने नीति निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।

कैलाशनाथ अधिकारी की महत्वपूर्ण पहलों में ‘Governance Now PSU IT Casebook’ भी शामिल है, जिसका विमोचन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। इसके अलावा उनकी ‘Visionary Talk’ सीरीज को भी काफी सराहना मिली, जिसमें गवर्नेंस, बिजनेस और पब्लिक अफेयर्स से जुड़े कई प्रभावशाली लोगों ने हिस्सा लिया।

मीडिया और पॉलिसी के अलावा कैलाशनाथ अधिकारी साहित्य और रचनात्मक लेखन से भी गहरा जुड़ाव रखते हैं। वह एक लेखक और कवि के रूप में भी पहचान रखते हैं और छात्र जीवन में साहित्यिक उपलब्धियों के लिए सम्मानित हो चुके हैं।

मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें Happii Digital की ग्रोथ और समूह की डिजिटल कंटेंट रणनीति को नई दिशा देने के लिए भी जाना जाता है। ऐसे समय में जब मीडिया इंडस्ट्री तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुजर रही है, कैलाशनाथ अधिकारी ने आधुनिक मीडिया सोच और संस्थागत अनुभव का संतुलित उदाहरण पेश किया है।

उनके काम और नेतृत्व को देखते हुए उन्हें Exchange4Media Content 40 Under 40 जैसे प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं। मीडिया, गवर्नेंस, उद्यमिता और डिजिटल इनोवेशन के संगम पर काम करने वाले कैलाशनाथ अधिकारी को आज इंडस्ट्री में दूरदर्शी मीडिया लीडर के तौर पर देखा जाता है। समाचार4मीडिया की ओर से कैलाशनाथ अधिकारी को उनके जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

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जन्मदिन विशेष: मीडिया इंडस्ट्री के ‘टर्नअराउंड मैन’ वरुण कोहली

मीडिया इंडस्ट्री में कुछ नाम केवल पदों से नहीं, बल्कि अपने काम, नेतृत्व क्षमता और मुश्किल हालात में भी संस्थानों को नई दिशा देने की कला से पहचाने जाते हैं। वरुण कोहली ऐसा ही एक नाम हैं।

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Published - Thursday, 28 May, 2026
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Thursday, 28 May, 2026
Varun Kohli Birthday Wishes

मीडिया इंडस्ट्री में कुछ नाम केवल पदों से नहीं, बल्कि अपने काम, नेतृत्व क्षमता और मुश्किल हालात में भी संस्थानों को नई दिशा देने की कला से पहचाने जाते हैं। वरुण कोहली ऐसा ही एक नाम हैं। करीब तीन दशकों से मीडिया जगत में सक्रिय वरुण कोहली हर उस जिम्मेदारी को मजबूती से निभाते आ रहे हैं, जहां विजन, रणनीति और परिणाम देने की जरूरत होती है। 24 मई को उनका जन्मदिन मनाया गया और इस मौके पर मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।

वरुण कोहली हाल तक हिंदी न्यूज चैनल ‘भारत एक्सप्रेस’ में डायरेक्टर और ग्रुप सीईओ के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने हाल ही में इस पद से इस्तीफा दिया है। मीडिया इंडस्ट्री में 30 साल से ज्यादा के अनुभव वाले वरुण कोहली की ‘भारत एक्सप्रेस’ के साथ यह दूसरी पारी थी। वह सितंबर 2025 में दोबारा चैनल से जुड़े थे। इससे पहले जनवरी 2023 में भी वह चैनल में सीईओ और डायरेक्टर की भूमिका निभा चुके थे।

‘भारत एक्सप्रेस’ से पहले वरुण कोहली टाइम्स नेटवर्क में COO (News Broadcast Business) के पद पर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वहां उन्होंने न्यूज ब्रॉडकास्टिंग बिजनेस के ऑपरेशंस, रणनीति और ग्रोथ से जुड़े कई अहम बदलावों का नेतृत्व किया था। इंडस्ट्री में उन्हें ऐसे लीडर के रूप में देखा जाता है, जो चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी संस्थानों को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक वरुण कोहली ने अपने करियर के दौरान बेनेट कोलमैन, टीवी18, आईटीवी नेटवर्क, एचटी मीडिया, अमर उजाला, Mogae Media और डेक्कन क्रॉनिकल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। CEO, COO और Chief Monetization Officer जैसे शीर्ष पदों पर रहते हुए उन्होंने बिजनेस ग्रोथ, टीम मैनेजमेंट और ऑपरेशनल बदलावों में उल्लेखनीय योगदान दिया।

मीडिया इंडस्ट्री में वरुण कोहली को अक्सर “टर्नअराउंड मैन” कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने कई संस्थानों को नई ऊर्जा देने और बिजनेस को लाभकारी दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके साथ काम कर चुके लोग उन्हें मजबूत टीम लीडर और परिणाम देने वाले प्रोफेशनल के तौर पर देखते हैं।

आईटीवी नेटवर्क में ग्रुप सीईओ के रूप में उन्होंने करीब आठ वर्षों तक 10 चैनलों, दो प्रकाशनों और डिजिटल वेंचर्स का नेतृत्व किया। इसके अलावा प्रो रेसलिंग लीग और बिग बाउट बॉक्सिंग लीग जैसे खेल आयोजनों से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वह एक सशक्त टीम लीडर भी माने जाते हैं, जो हर सदस्य से बेहतरीन काम निकलवाने में विश्वास रखते हैं। वह संगठनों में ऑपरेशनल बदलाव, टीमों को एकजुट करने और ठोस परिणाम देने में माहिर हैं और यही वजह है कि कॉर्पोरेट दुनिया में उन्हें भरोसे और सम्मान की निगाह से देखा जाता है।

साफ-सुथरी कार्यशैली, अनुशासन और संगठन को प्राथमिकता देने वाले वरुण कोहली को इंडस्ट्री में ‘पीपल्स पर्सन’ के रूप में भी जाना जाता है। ब्रैंड लॉन्चिंग, बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन और न्यूज प्लेटफॉर्म्स को नई पहचान देने की उनकी क्षमता उन्हें मीडिया इंडस्ट्री के प्रभावशाली चेहरों में शामिल करती है।

वरुण कोहली नोएडा में अपनी पत्नी श्रीमती एकता वाही के साथ रहते हैं। उनकी बेटी अमेरिका से लॉ में पोस्टग्रेजुएट हैं और वहीं काम कर रही हैं। उनका बेटा बेनेट कोलमैन यूनिवर्सिटी में स्नातक शिक्षा प्राप्त कर रहा है। 

समाचार4मीडिया की ओर से वरुण कोहली को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं और उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों बधाई।

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प्रेस की आजादी और मीडिया के सवालों पर एडिटर्स गिल्ड का बड़ा बयान

गिल्ड ने कहा है कि भारतीय सरकारी अधिकारियों और यूरोपीय पत्रकारों के बीच हुआ टकराव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 25 May, 2026
Last Modified:
Monday, 25 May, 2026
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देश में संपादकों की शीर्ष संस्था एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया नॉर्वे और नीदरलैंड यात्रा के दौरान मीडिया से जुड़े घटनाक्रम को लेकर चिंता जताई है। गिल्ड ने कहा है कि भारतीय सरकारी अधिकारियों और यूरोपीय पत्रकारों के बीच हुआ टकराव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने जारी बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रेस ब्रीफिंग के बाद स्थानीय पत्रकारों के सवाल नहीं लिए, जिसके बाद यूरोपीय मीडिया और भारतीय अधिकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। गिल्ड ने इसे “असहज टकराव” बताया।

बयान में कहा गया कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नॉर्वे और नीदरलैंड क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर हैं, जबकि भारत 180 देशों में 157वें स्थान पर है। गिल्ड ने माना कि पश्चिमी देशों और भारत की सांस्कृतिक परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, लेकिन लोकतंत्र में पत्रकारों द्वारा सवाल पूछना बेहद जरूरी है।

गिल्ड ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक दशक से अधिक लंबे कार्यकाल में अब तक एक भी खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है, जहां स्वतंत्र रूप से पत्रकार सवाल पूछ सकें। गिल्ड के मुताबिक, सरकार के विभिन्न स्तरों पर सवाल पूछे जाने को लेकर असहिष्णुता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।

बयान में कहा गया कि मीडिया पर बढ़ती पाबंदियां केवल पत्रकारिता को ही नहीं, बल्कि समाज और अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाती हैं। प्रेस की स्वतंत्रता पर अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग की पद्धति या पक्षपात पर बहस हो सकती है, लेकिन भारत की स्थिति चिंता का विषय है और यह मीडिया के लिए सीमित होती जगह को दिखाती है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने सरकार से अपील की कि मीडिया को दुश्मन की तरह न देखा जाए। गिल्ड ने कहा कि पत्रकारों का काम सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछना और उन्हें जवाबदेह बनाना है, जो लोकतंत्र का अहम हिस्सा है।

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‘भारतीय टीवी पत्रकारिता की बेबाक और बुलंद आवाज हैं राजदीप सरदेसाई’

भारतीय टीवी पत्रकारिता में कुछ पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं दिखाते, बल्कि खुद राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन जाते हैं। राजदीप सरदेसाई ऐसे ही पत्रकारों में शामिल हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Sunday, 24 May, 2026
Last Modified:
Sunday, 24 May, 2026
Rajdeep Sardesai Birthday

गणपति विश्वनाथन, इंडिपेंडेंट कम्युनिकेशन कंसल्टेंट और लेखक।।

भारतीय टीवी पत्रकारिता में कुछ पत्रकार सिर्फ खबरें नहीं दिखाते, बल्कि खुद राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन जाते हैं। राजदीप सरदेसाई ऐसे ही पत्रकारों में शामिल हैं। आज 61 साल के हुए राजदीप सरदेसाई पिछले तीन दशक से ज्यादा समय से भारतीय टीवी पत्रकारिता का एक चर्चित, प्रभावशाली और लगातार बहस में रहने वाला चेहरा बने हुए हैं।

बदलते राजनीतिक दौर, मीडिया के बदलते स्वरूप और लगातार सार्वजनिक आलोचनाओं के बीच भी राजदीप सरदेसाई ने अपनी अलग पहचान कायम रखी है। भारतीय न्यूज टेलीविजन में वह आज भी सबसे ज्यादा पहचाने और चर्चा में रहने वाले चेहरों में गिने जाते हैं।

मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से पढ़ाई करने वाले राजदीप ने उस समय पत्रकारिता में कदम रखा, जब भारत में टीवी न्यूज अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा था। समय के साथ उन्होंने अपनी ऐसी शैली विकसित की, जिसे दर्शक तुरंत पहचान लेते थे। तेज, धारदार, सवाल पूछने वाली और राजनीति की गहरी समझ रखने वाली पत्रकारिता उनकी खास पहचान बनी।

राजदीप सरदेसाई की सबसे बड़ी ताकत हमेशा टीवी स्टूडियो से बाहर भारतीय राजनीति को समझने की उनकी क्षमता रही। उनकी पत्रकारिता सिर्फ डिबेट और हेडलाइंस तक सीमित नहीं रही। उन्होंने देशभर का लगातार दौरा किया, जमीनी स्तर पर चुनावी कवरेज की, गांवों और शहरों में जाकर मतदाताओं से बातचीत की और यह समझने की कोशिश की कि राजनीति आम लोगों की जिंदगी को किस तरह प्रभावित करती है। यही ग्राउंड रिपोर्टिंग उनके विश्लेषण को मजबूती देती रही और दर्शकों से उनका जुड़ाव भी बढ़ाती रही।

कई दर्शकों के लिए चुनावी कवरेज राजदीप सरदेसाई के बिना अधूरी सी लगती है। चुनावी नतीजों के दिन की हलचल हो या देश की बड़ी राजनीतिक घटनाओं की रिपोर्टिंग, उन्होंने हमेशा अपनी अलग ऊर्जा और आक्रामक शैली से दर्शकों का ध्यान खींचा। उन्होंने देश के कई बड़े राजनीतिक नेताओं के इंटरव्यू किए और कई बार ऐसे सवाल पूछे, जिन्हें दूसरे लोग उठाने से बचते नजर आए।

हालांकि, उनका सफर आलोचनाओं से दूर नहीं रहा। राजदीप हमेशा खुलकर अपनी बात रखने वाले पत्रकार रहे हैं और ऐसे पत्रकारों को स्वाभाविक तौर पर तीखी प्रतिक्रियाओं का सामना भी करना पड़ता है। लेकिन शायद यही वजह भी है कि वह इतने लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहे। ऐसे दौर में जब मीडिया की कई आवाजें एक जैसी लगने लगी हैं, राजदीप ने अपनी अलग पहचान बनाए रखी।

उनकी एक और बड़ी खासियत बदलते समय के साथ खुद को ढालने की क्षमता रही है। टीवी न्यूज के शुरुआती दौर से लेकर आज के डिजिटल और तेज रफ्तार मीडिया वातावरण तक पत्रकारिता में बड़ा बदलाव आया है। दर्शकों के खबरें देखने का तरीका बदला है, बहसें ज्यादा आक्रामक हुई हैं और लोगों का ध्यान पहले से कम समय तक टिकता है। इसके बावजूद राजदीप सरदेसाई आज भी प्रभावशाली और सक्रिय बने हुए हैं, क्योंकि उन्हें राजनीति के साथ-साथ लोगों की भी गहरी समझ है।

टेलीविजन के अलावा लेखक के रूप में भी उन्होंने मजबूत पहचान बनाई है। राजनीति और सार्वजनिक जीवन पर लिखी उनकी किताबों में वर्षों की रिपोर्टिंग, अनुभव और राजनीतिक व्यवस्था की गहरी समझ साफ दिखाई देती है।

क्रिकेट भी हमेशा उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है। वह भारत के पूर्व क्रिकेटर दिलीप सरदेसाई के बेटे हैं, इसलिए क्रिकेट से उनका जुड़ाव स्वाभाविक माना जाता है। क्रिकेट पर उनकी लेखनी में जानकारी के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी दिखाई देता है। उनकी किताब ‘द ग्रेट इंडियन क्रिकेट स्टोरी’ इसका बड़ा उदाहरण मानी जाती है।

61 साल की उम्र में भी राजदीप सरदेसाई उसी ऊर्जा और जुनून के साथ सक्रिय हैं, जिसने उन्हें वर्षों पहले अलग पहचान दिलाई थी। वह आज भी कठिन सवाल पूछते हैं, स्थापित धारणाओं को चुनौती देते हैं और सार्वजनिक बहसों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यही निरंतरता उन्हें खास बनाती है।

कई मायनों में राजदीप सरदेसाई उस दौर की पत्रकारिता का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहां व्यक्तित्व, रिपोर्टिंग और राजनीतिक समझ का मजबूत मेल देखने को मिलता था। कई बार तेज, कई बार बेहद आक्रामक, लेकिन शायद ही कभी नजरअंदाज किए जाने वाले राजदीप आज भी बड़ी संख्या में दर्शकों के बीच अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए हैं।

उनके जन्मदिन पर हम सिर्फ एक पत्रकार का नहीं, बल्कि भारतीय मीडिया जगत की एक मजबूत और लंबे समय से प्रभावशाली आवाज का भी जश्न मना रहे हैं। राजदीप सरदेसाई को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं।

(यह लेखक के निजी विचार हैं)

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वरिष्ठ पत्रकार राजेश अवस्थी का निधन, मेरठ में पेड़ के नीचे मिला शव

बताया जा रहा है कि वह गुरुवार को घर से निकले थे, जिसके बाद उनका शव माधवपुरम सेक्टर एक स्थित ग्रीन बेल्ट में एक पेड़ के नीचे मिला। मौके से सल्फास की गोलियां भी बरामद होने की बात कही जा रही है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 23 May, 2026
Last Modified:
Saturday, 23 May, 2026
Rajesh Awasthi

लंबे समय तक ‘दैनिक जागरण’ मेरठ में कार्यरत रहे वरिष्ठ पत्रकार राजेश अवस्थी का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन हो गया। उनके निधन की खबर के बाद पत्रकारों और शुभचिंतकों में शोक की लहर है।

जानकारी के अनुसार माधवपुरम सेक्टर-1 निवासी राजेश अवस्थी (66) पिछले काफी समय से आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। बताया जा रहा है कि वह गुरुवार को घर से निकले थे, जिसके बाद उनका शव माधवपुरम सेक्टर एक स्थित ग्रीन बेल्ट में एक पेड़ के नीचे मिला। मौके से सल्फास की गोलियां भी बरामद होने की बात कही जा रही है।

पुलिस प्रारंभिक तौर पर मामले को आत्महत्या के एंगल से जांच रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटनास्थल से एक पत्र भी बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अपने परिवार का जिक्र करते हुए भावुक बातें लिखी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार पत्र में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी अन्य को जिम्मेदार नहीं ठहराया। हालांकि पुलिस ने अभी मामले में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।

करीबी पत्रकार साथियों का कहना है कि राजेश अवस्थी अपने शांत, मृदुभाषी और सहयोगी स्वभाव के लिए जाने जाते थे। पत्रकारिता जगत में उनकी पहचान एक संवेदनशील और सरल व्यक्तित्व के रूप में थी। उन्होंने अपने करियर का लंबा समय ‘दैनिक जागरण’ मेरठ के साथ बिताया था।

बताया जाता है कि वर्षों तक संस्थान से जुड़े रहने के बावजूद बाद में वह छंटनी का शिकार हो गए थे। कठिन परिस्थितियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उन्होंने लंबे समय तक संघर्ष किया। उनके साथ काम कर चुके कई पत्रकारों ने उन्हें मददगार, मिलनसार और संवेदनशील इंसान बताया।

तमाम पत्रकारों और उनके परिचितों ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राजेश अवस्थी हमेशा अपने सहयोगियों के सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले व्यक्ति थे। उनके निधन को पत्रकारिता जगत के लिए बड़ी क्षति बताया जा रहा है।

पत्रकार समुदाय ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे परिवार की सहायता के लिए भी साथियों और शुभचिंतकों से आगे आने की अपील की जा रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार राजशेखर त्रिपाठी का निधन, मीडिया जगत में शोक की लहर

राजशेखर त्रिपाठी का अंतिम संस्कार शुक्रवार, 22 मई 2026 को दोपहर एक बजे नोएडा के सेक्टर-94 स्थित ‘अंतिम निवास’ में किया जाएगा।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 22 May, 2026
Last Modified:
Friday, 22 May, 2026
Raj Shekhar

वरिष्ठ पत्रकार, साहित्य और रंगकर्म से जुड़े चर्चित व्यक्तित्व राजशेखर त्रिपाठी का शुक्रवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर से मीडिया, साहित्य और सामाजिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। करीब 53 वर्षीय राज शेखर त्रिपाठी कुछ समय से बीमार थे।

राजशेखर त्रिपाठी का अंतिम संस्कार शुक्रवार, 22 मई 2026 को दोपहर एक बजे नोएडा के सेक्टर-94 स्थित ‘अंतिम निवास’ में किया जाएगा।

राजशेखर त्रिपाठी लंबे समय तक पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रहे और अपनी बेबाक लेखनी, सहज व्यक्तित्व और जिंदादिल अंदाज के लिए पहचाने जाते थे। उन्होंने अखबार, टेलीविजन और साहित्य की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। बीमार होने से पहले वह ‘इंडिया टीवी’ में जिम्मेदार पद पर कार्यरत थे।

पत्रकारिता के साथ-साथ रंगकर्म और साहित्य में भी उनकी गहरी रुचि थी। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक विषयों पर उनकी समझ और अंतर्दृष्टि की काफी सराहना होती थी। मीडिया जगत के कई वरिष्ठ पत्रकारों और उनके करीबी साथियों ने राजशेखर त्रिपाठी के निधन को व्यक्तिगत क्षति बताया है।

‘The Swatantra’ ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि राजशेखर त्रिपाठी के साथ कई महत्वपूर्ण बातचीतें और मुलाकातें रहीं। उनकी बेबाक पत्रकारिता, खिलंदड़ा अंदाज़ और ज़िंदादिल ठहाके हमेशा याद किए जाएंगे।

उनके एक करीबी मित्र राजीव ओझा ने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि रंगकर्म की दुनिया से पत्रकारिता में आए राजशेखर त्रिपाठी ने हर क्षेत्र में अपनी अलग छाप छोड़ी। साहित्य, समाज और राजनीति समेत तमाम विषयों पर उनकी गहरी पकड़ थी और लोग उनकी विचारशीलता के कायल थे।

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सरकार ने इस तरह की खबरों को बताया फर्जी, कहा- आधिकारिक सूचनाओं पर करें भरोसा

देशभर में मंदिरों के सोने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है।

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Published - Wednesday, 20 May, 2026
Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
Gold54877

देशभर में मंदिरों के सोने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही चर्चाओं पर केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने साफ कहा है कि मंदिरों के पास मौजूद सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने या मंदिरों के गोल्ड रिजर्व को मॉनेटाइज करने की कोई योजना नहीं है।

सरकार ने उन सभी दावों को पूरी तरह गलत, भ्रामक और बेबुनियाद बताया है, जिनमें कहा जा रहा था कि देश के मंदिरों में जमा सोने को “Strategic Gold Reserves of India” माना जाएगा या फिर सरकार मंदिरों के सोने को किसी नई योजना के तहत इस्तेमाल करने जा रही है।

सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा था कि मंदिरों के शिखरों, दरवाजों या अन्य हिस्सों में लगे सोने को सरकार अपने रणनीतिक गोल्ड रिजर्व का हिस्सा मान सकती है। सरकार ने इन सभी बातों को सिरे से खारिज कर दिया है।

सरकार ने कहा कि मंदिर ट्रस्टों या किसी भी धार्मिक संस्था के पास मौजूद सोने के लिए किसी तरह की मॉनेटाइजेशन स्कीम लाने का कोई प्रस्ताव न तो तैयार किया गया है और न ही मंजूर हुआ है।

केंद्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अफवाहों पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि वाली जानकारी को आगे शेयर करने से बचें। सरकार का कहना है कि गलत और अपुष्ट जानकारी फैलने से लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी नई नीति, योजना या सरकारी फैसले की जानकारी केवल आधिकारिक प्रेस रिलीज, सरकारी वेबसाइट और अधिकृत प्लेटफॉर्म्स के जरिए ही दी जाएगी। इसलिए नागरिकों को सिर्फ आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।

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