क्या ‘स्क्रॉलिंग कल्चर’ ने कम कर दी है अखबार पढ़ने की आदत?

आज की युवा पीढ़ी के लिए खबरों का मतलब अब अखबार नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन बन चुका है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 29 May, 2026
Last Modified:
Friday, 29 May, 2026
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आज की युवा पीढ़ी के लिए खबरों का मतलब अब अखबार नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन बन चुका है। Instagram Reels पर 60 सेकंड में न्यूज अपडेट मिल जाती है, WhatsApp पर खबरों के लिंक और फॉरवर्ड लगातार आते रहते हैं, YouTube पर पॉडकास्ट और एक्सप्लेनर वीडियो उपलब्ध हैं। ऐसे में घर के बाहर पड़ा अखबार अब पहले जैसी प्राथमिकता नहीं रह गया है।

यह बदलाव सिर्फ आदतों का नहीं, बल्कि पूरी मीडिया खपत के तरीके का संकेत है। भारत की 37.7 करोड़ Gen Z आबादी का बड़ा हिस्सा डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खबरें देख और समझ रहा है (BCG-Snapchat Report 2024)। यही वजह है कि प्रिंट मीडिया आज युवा पाठकों को अपने साथ जोड़ने की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है।

सुबह की आदत बदल चुकी है

Reuters Institute for the Study of Journalism की Digital News Report 2025  (जो करीब एक लाख लोगों पर 48 देशों में किए गए सर्वे पर आधारित है) में यह बात साफ सामने आई है। वैश्विक स्तर पर 18-24 आयु वर्ग के 44% युवा सोशल मीडिया और वीडियो नेटवर्क को अपना मुख्य न्यूज सोर्स मानते हैं। 25-34 आयु वर्ग में यह आंकड़ा 38% है।

भारत के लिए यह तस्वीर और भी साफ है। उसी रिपोर्ट के भारत-केंद्रित विश्लेषण के अनुसार, 18-34 आयु वर्ग के 41% भारतीय सोशल मीडिया और YouTube को अपना मुख्य न्यूज सोर्स बताते हैं, जबकि इसी उम्र के केवल 24% लोग पब्लिशर्स वेबसाइट पर जाते हैं। मतलब साफ है- खबर मिल रही है, लेकिन अखबार के जरिए नहीं और यह बदलाव सिर्फ "पढ़ने बनाम स्क्रॉल करने" तक सीमित नहीं है। Reuters की रिपोर्ट यह भी बताती है कि भारत उन देशों में शामिल है जहां लोग खबर पढ़ने की बजाय देखना ज्यादा पसंद करते हैं। सोशल वीडियो न्यूज की वैश्विक खपत 2020 में 52% थी, जो 2025 में 65% पर पहुंच चुकी है।

Gen Z न्यूज ले कहां से रही है?

DataReportal India 2025 के अनुसार, जनवरी 2025 तक भारत में 49.1 करोड़ सोशल मीडिया यूजर आइडेंटिटी हैं, जो कुल आबादी का 33.7% है। Gen Z (13-24 वर्ष) इस तबके में करीब 40% की हिस्सेदारी रखती है और रोजाना 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताती है।

इनकी पसंदीदा प्लेटफॉर्म्स हैं:

  • WhatsApp — 80.8% भारतीय इंटरनेट यूजर्स की पहुंच  
  • Instagram — 77.9% भारतीय इंटरनेट यूजर्स की पहुंच; भारत में 39.2 करोड़ यूजर  
  • YouTube — 50 करोड़ से ज्यादा यूजर, हर महीने 29 घंटे 37 मिनट की औसत खपत
  • Telegram और X — ब्रेकिंग न्यूज के लिए प्रमुख

यहां एक बड़ा सवाब उठता है: क्या ये प्लेटफॉर्म अब पब्लिशर बन चुके हैं? जवाब है- काफी हद तक, हां। Reuters की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 50% से ज्यादा अंग्रेजी भाषी इंटरनेट यूजर कभी-कभी खबरों से बचते हैं (news avoidance), और इसकी बड़ी वजह डिजिटल मीडिया का overwhelming volume है।

"हेडलाइंस" का दौर, "डीप रीडिंग" खत्म?

जब खबरें 15-30 सेकंड की Reels और Shorts में सिमटने लगें, तो गहराई से पढ़ने और समझने की आदत अपने आप कम होने लगती है। यही बड़ा बदलाव आज प्रिंट मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

Reuters Institute की मार्च 2026 में प्रकाशित रिपोर्ट ‘Understanding Young News Audiences’ के मुताबिक, दुनिया भर में 18-24 साल के करीब 73% युवा हर हफ्ते कम से कम एक शॉर्ट वीडियो के जरिए न्यूज देखते हैं। भारत में TikTok भले ही बंद हो, लेकिन Instagram Reels और YouTube Shorts ने उसकी जगह काफी हद तक ले ली है।

इसका असर साफ दिख रहा है। युवा अब खबरों को पढ़ने से ज्यादा “स्क्रॉल” कर रहे हैं। कौन-सी खबर लोगों तक पहुंचेगी, यह अब एडिटोरियल टीम से ज्यादा सोशल मीडिया एल्गोरिदम और व्यूज-लाइक्स तय कर रहे हैं।

प्रिंट के आंकड़े क्या कहते हैं?

FICCI-EY Media & Entertainment Report 2026 के मुताबिक, भारत का प्रिंट मीडिया सेक्टर 2025 में करीब ₹25,900 करोड़ पर लगभग स्थिर रहा। विज्ञापनों से होने वाली कमाई में सिर्फ 2% की मामूली बढ़त दर्ज की गई, जिसकी बड़ी वजह luxury products, real estate और सरकारी विज्ञापन रहे। वहीं अखबारों की बिक्री यानी circulation revenue में 1% की गिरावट आई। लगातार दूसरे साल ऐसा हुआ जब प्रिंट सर्कुलेशन से होने वाली कमाई घटी।

दूसरी तरफ डिजिटल मीडिया तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में डिजिटल विज्ञापन बाजार 26% बढ़कर ₹94,700 करोड़ तक पहुंच गया। कुल विज्ञापन खर्च में इसकी हिस्सेदारी 63% रही।

प्रिंट मीडिया की घटती हिस्सेदारी dentsu-e4m Digital Advertising Report के आंकड़ों में भी साफ दिखती है। 2024 में कुल विज्ञापन बाजार में प्रिंट की हिस्सेदारी 17% थी, जो 2025 में घटकर 15% रह गई। 2026 में इसके 13% तक आने का अनुमान है। dentsu-e4m Report 2026 के मुताबिक, 2025 में प्रिंट विज्ञापन बाजार ₹16,594 करोड़ का रहा, जो कुल विज्ञापन बाजार का करीब 14% है।

हालांकि सर्कुलेशन के आंकड़े एक मिली-जुली तस्वीर दिखाते हैं। Audit Bureau of Circulations (ABC) के जनवरी-जून 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में अखबारों की कुल दैनिक सर्कुलेशन करीब 2 करोड़ 97 लाख प्रतियां रही, जो पिछले छह महीनों की तुलना में 2.77% ज्यादा थी। इसमें Dainik Bhaskar सबसे आगे रहा, जिसके बाद Dainik Jagran और Amar Ujala का स्थान रहा। यह बढ़त मुख्य रूप से छोटे शहरों और Tier-2/Tier-3 बाजारों से आई।

लेकिन ABC के जुलाई-दिसंबर 2025 के नए आंकड़े बताते हैं कि Dainik Jagran, Amar Ujala और Rajasthan Patrika जैसे बड़े अखबारों की सर्कुलेशन में गिरावट देखने को मिली। वहीं Dainik Bhaskar और Hindustan को मामूली बढ़त मिली।

युवा अखबार से क्यों दूर हो रहे हैं?

इसके पीछे सिर्फ मोबाइल नहीं है-  कंटेंट मिसमैच भी एक बड़ी वजह है।

पहली बात, अखबारों की भाषा और लेआउट पुरानी पीढ़ी के लिए डिजाइन है। Gen Z को क्रिएटर इकनॉमी, पॉप कल्चर, मेंटल हेल्थ, क्लाइमेट और गेमिंग जैसे विषयों में ज्यादा रुचि है- अखबार इन्हें गहराई से कवर नहीं करते।

दूसरी बात, मॉर्निंग हैबिट का टूटना। जिस पीढ़ी ने घर में अखबार देखते हुए बड़े होने का अनुभव नहीं किया, वह इस आदत को खुद क्यों शुरू करेगी?

तीसरी बात, तीसरी बड़ी वजह है पर्सनलॉइजेशन। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम हर यूजर को उसकी पसंद और रुचि के हिसाब से खबरें दिखाते हैं। किसी को स्पोर्ट्स ज्यादा दिखता है, किसी को एंटरटेनमेंट, तो किसी को बिजनेस या पॉलिटिक्स। वहीं अखबार हर पाठक को लगभग एक जैसा कंटेंट देता है। Gen Z की बड़ी आबादी को यही बात अब कम जुड़ाव वाली और कई बार “इर्रेलिवेंट” लगने लगी है।

चौथी बात, AI की बढ़ती भूमिका। Reuters Institute Digital News Report 2025 के अनुसार भारत में 44% लोग AI से पर्सनलाइज्ड न्यूज पाने में सहज हैं- यह वैश्विक औसत से कहीं ज्यादा है (तुलना के लिए ब्रिटेन में सिर्फ 11%)। साथ ही, 18% भारतीय हर हफ्ते AI चैटबॉट्स के जरिए खबर पढ़ते हैं- वैश्विक स्तर पर यह औसत महज 7% है।

क्या खुद अखबार भी जिम्मेदार हैं?

एक हद तक हां। भारत के अधिकांश बड़े अखबार समूहों ने डिजिटल-फर्स्ट थिंकिंग को देर से अपनाया। जब तक वे Instagram Reels, podcasts और WhatsApp न्यूजलेटर्स पर सक्रिय हुए, तब तक क्रिएटर इकनॉमी के नए चेहरे लाखों सब्सक्राइबर्स बना चुके थे।

Reuters Institute की अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट 'मैपिंग न्यूज क्रिएटर्स व इन्फ्लुएंसर्स' (24 देशों पर आधारित) यह बताती है कि न्यूज क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स अब कई ट्रेडिशनल न्यूज ब्रैंड्स से ज्यादा ध्यान खींच रहे हैं, खासकर सोशल और वीडियो नेटवर्क्स पर। इसी रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में 21% वयस्क और 30 साल से कम उम्र के 37% युवा अब रेगुलेट्री क्रिएटर्स या इन्फ्लुएंसर्स से खबर लेते हैं।

भारत में भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है। YouTube पर ध्रुव राठी जैसे क्रिएटर्स के करोड़ों सब्सक्राइबर्स हैं। वहीं Instagram पर न्यूज एक्सप्लेनर और शॉर्ट न्यूज कंटेंट बनाने वाले कई अकाउंट्स की पहुंच अब कई रीजनल अखबारों के बराबर या उससे भी ज्यादा हो चुकी है। आसान भाषा, तेज फॉर्मेट और मोबाइल-फ्रेंडली कंटेंट की वजह से युवा तेजी से इन प्लेटफॉर्म्स की तरफ बढ़ रहे हैं। एक तरह से क्रिएटर इकनॉमी ने युवाओं के बीच वह जगह भर दी है, जहां प्रिंट मीडिया खुद को समय के साथ उतनी तेजी से नहीं बदल पाया।

लेकिन क्या सच में अखबार खत्म हो रहे हैं?

हालांकि कहानी का दूसरा पहलू भी है। Urban Gen Z यानी बड़े शहरों के युवा पूरे भारत की तस्वीर नहीं हैं।

TAM AdEx, RCS India और Excellent Publicity के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में प्रिंट विज्ञापनों में 26% की अच्छी बढ़त दर्ज की गई। इसमें छोटे शहरों और नॉन-मेट्रो मार्केट्स का बड़ा योगदान रहा। यानी देश के कई हिस्सों में अखबार अब भी मजबूत माध्यम बने हुए हैं।

वहीं WARC के आंकड़े बताते हैं कि 72% भारतीय उपभोक्ता डिजिटल विज्ञापनों की ज्यादा संख्या से परेशान महसूस करते हैं। इतना ही नहीं, 60% से ज्यादा लोग आज भी डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले प्रिंट और टीवी खबरों पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

यही भरोसा प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि प्रिंट मीडिया समय के साथ खुद को बदले और नए दौर के पाठकों की जरूरतों के हिसाब से खुद को फिर से तैयार करे।

Trust की लड़ाई: सोशल मीडिया बनाम अखबार

AI और एल्गोरिदम से चलने वाली न्यूज की दुनिया में सबसे बड़ी चुनौती यह बनती जा रही है कि सही और गलत खबर में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। Reuters की 2025 रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 58% लोग ऑनलाइन गलत जानकारी और फेक न्यूज को लेकर चिंतित हैं। भारत में यह चिंता और ज्यादा गंभीर है। करीब 11% भारतीय यूजर्स मानते हैं कि कई बार दोस्त और परिवार के लोग भी अनजाने में गलत जानकारी आगे बढ़ा देते हैं।

WhatsApp ग्रुप्स के जरिए फैली अफवाहों को लेकर पहले भी कई गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें हिंसा तक देखने को मिली। ऐसे माहौल में प्रिंट मीडिया की सबसे बड़ी ताकत उसकी एडिटोरियल अकाउंटबिलिटी, फैक्ट-चेकिंग और बाइलाइन जर्नलिज्म है, जहां खबरों की जिम्मेदारी तय होती है और जानकारी जांच-परख के बाद प्रकाशित की जाती है।

चुनौती बस इतनी है कि प्रिंट मीडिया इस भरोसे और विश्वसनीयता को नई पीढ़ी तक किस तरह पहुंचाता है।

प्रिंट मीडिया की नई रणनीति

अब न्यूजपेपर और मीडिया कंपनियां भी यह समझ चुकी हैं कि सिर्फ छपे हुए अखबार के जरिए Gen Z तक पहुंचना आसान नहीं है। यही वजह है कि अब कई न्यूजपेपर ब्रैंड्स शॉर्ट्स वीडियोज बना रहे हैं, AI आधारित वॉयस बुलेटिन शुरू कर रहे हैं, WhatsApp Channels पर सब्सक्राइबर्ट बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं और पॉडकास्ट स्टूडियो भी तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा इवेंट्स और ब्रैंडेट कंटेंट भी कमाई का नया जरिया बनते जा रहे हैं।

FICCI-EY 2026 की रिपोर्ट भी बताती है कि प्रिंट पब्लिशर्स अब सिर्फ अखबारों पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे इवेंट्स, ब्रैंडेट कंटेंट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपनी कमाई के नए रास्ते बना रहे हैं।

भविष्य क्या है?

आने वाले समय में भारत का प्रिंट मीडिया तीन रास्तों में से किसी एक दिशा में जाता दिख सकता है।

पहला रास्ता यह है कि प्रिंट धीरे-धीरे एक niche product बन जाए, यानी ऐसा माध्यम जो सिर्फ खास वर्ग के पाठकों तक सीमित रह जाए। इसमें premium readers, high-income वर्ग या UPSC और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले पाठक प्रमुख हो सकते हैं।

दूसरा रास्ता हाइब्रिड मॉडल का है, जहां अखबार सिर्फ प्रिंट तक सीमित न रहे, बल्कि वीडियो, ऑडियो, पॉडकास्ट्स, इवेंट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर एक नया मीडिया इकोसिस्टम तैयार करे।

तीसरा और सबसे मजबूत रास्ता हाइपर लोकल जर्नलिज्म का माना जा रहा है। यानी जिला, शहर और तहसील स्तर की खबरों पर फोकस करने वाले रीजनल अखबार अपनी अहमियत बनाए रख सकते हैं। वजह साफ है- नेशनल न्यूज अब लोगों को मोबाइल पर मुफ्त में मिल जाती है, लेकिन स्थानीय खबरों के लिए आज भी बड़ी संख्या में लोग अखबारों पर भरोसा करते हैं।

आंकड़े बताते हैं कि Gen Z ने खबर पढ़ना नहीं छोड़ा — बस फॉर्मेट बदल दिया है। Reuters Digital News Report 2025 के मुताबिक वैश्विक स्तर पर 18-24 आयु वर्ग के 44% और भारत में 18-34 आयु वर्ग के 41% युवा सोशल मीडिया को मुख्य न्यूज सोर्स मानते हैं। FICCI-EY 2026 बताती है कि प्रिंट का सर्कुलेशन रेवेन्यू लगातार दूसरे साल घटा है। dentsu-e4m के अनुसार 2025 में प्रिंट की कुल विज्ञापन हिस्सेदारी सिमटकर 14% पर आ गई।

लेकिन इस सबके बीच एक उम्मीद की किरण भी है- WARC के अनुसार 60% से ज्यादा भारतीय उपभोक्ता अभी भी प्रिंट को डिजिटल से ज्यादा भरोसेमंद मानते हैं। जिस दिन प्रिंट मीडिया इस ट्रस्ट को Gen Z की भाषा में ट्रांसलेट कर पाएगा- चाहे वो Reels हो, Podcast हो या WhatsApp न्यूजलेटर, उस दिन शायद अखबार फिर से दरवाजे से उठाया जाएगा।

फिलहाल तो यह कहना गलत नहीं होगा कि युवा पीढ़ी अखबार छोड़ रही है, लेकिन खबरों की भूख खत्म नहीं हुई, बस उसका फॉर्मेट बदल गया है।

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जागरण प्रकाशन में बढ़ा बोर्ड विवाद, स्वतंत्र निदेशकों ने हटाने के प्रस्ताव पर उठाए सवाल

देश की प्रमुख मीडिया कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) में चल रहा अंदरूनी विवाद अब और गहरा होता दिखाई दे रहा है।

Vikas Saxena by
Published - Monday, 25 May, 2026
Last Modified:
Monday, 25 May, 2026
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देश की प्रमुख मीडिया कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड (Jagran Prakashan Limited) में चल रहा अंदरूनी विवाद अब और गहरा होता दिखाई दे रहा है। कंपनी के सात स्वतंत्र निदेशकों (स्वतंत्र निदेशकों) और पूर्णकालिक निदेशक सतीश चंद्र मिश्रा को हटाने के प्रस्ताव के बीच इन निदेशकों ने शेयरधारकों को एक लंबा प्रतिनिधित्व पत्र भेजकर अपनी बात रखी है।

कंपनी ने 21 मई 2026 को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि 29 मई 2026 को होने वाली Extraordinary General Meeting (EGM) से पहले संबंधित स्वतंत्र निदेशकों ने Companies Act, 2013 की धारा 169(4) के तहत अपना लिखित पक्ष कंपनी को सौंपा है, जिसे अब शेयरधारकों के बीच प्रसारित किया गया है।

कंपनी ने यह भी साफ किया है कि यह पूरा मामला पहले से चल रहे प्रमोटर समूह के विवाद से जुड़ा हुआ है। यह विवाद फिलहाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), इलाहाबाद में लंबित है।

हमें हटाने की वजह प्रदर्शन नहीं, प्रमोटर विवाद”

निदेशकों ने अपने प्रतिनिधित्व में कहा है कि उन्हें हटाने का प्रस्ताव किसी खराब प्रदर्शन, भ्रष्टाचार, कदाचार या गवर्नेंस की कमी की वजह से नहीं लाया गया है। उनके मुताबिक, यह पूरा मामला कंपनी के प्रमोटर और प्रमोटर समूह के बीच चल रहे वोटिंग और कंट्रोल विवाद से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि Jagran Media Network Investment Private Limited (JMNIPL) की ओर से उनके पक्ष में डाले गए वोट को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि यही मामला पहले से NCLT में विचाराधीन है।

पत्र में कहा गया है कि स्वतंत्र निदेशकों ने हमेशा कंपनी, पब्लिक शेयरधारकों और सभी stakeholders के हित में काम किया है और उन्होंने Companies Act, SEBI नियमों और कॉरपोरेट गवर्नेंस स्टैंडर्ड का पूरी तरह पालन किया।

सतीश चंद्र मिश्रा की भूमिका पर भी जोर

निदेशकों ने अपने पत्र में कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक सतीश चंद्र मिश्रा का भी खास जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि मिश्रा 1986 से कंपनी से जुड़े हुए हैं और लंबे समय से कंपनी के प्रोडक्शन ऑपरेशंस संभाल रहे हैं।

पत्र में कहा गया है कि सतीश चंद्र मिश्रा लंबे समय से कंपनी के प्रोडक्शन और प्रिंटिंग कामकाज की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे कंपनी के 20 से ज्यादा प्रिंटिंग सेंटर से जुड़े काम देखते रहे हैं और कई वर्षों से कंपनी के संचालन में अहम भूमिका निभा रहे हैं। निदेशकों का कहना है कि ऐसे समय में उन्हें हटाने से कंपनी के कामकाज और स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

बोर्ड से बड़े पैमाने पर हटाना निवेशकों का भरोसा तोड़ सकता है”

स्वतंत्र निदेशकों ने कहा है कि अगर बोर्ड से बड़ी संख्या में लोगों को हटाया गया, तो इसका असर कंपनी की छवि, स्थिरता और निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि जब कंपनी पहले से प्रमोटर विवाद का सामना कर रही हो, तब स्वतंत्र निदेशकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है, क्योंकि वे आम शेयरधारकों और छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा करते हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि पिछले कुछ समय से बोर्ड बैठकों में कंपनी के कारोबार से जुड़े मुद्दों की बजाय प्रमोटर समूह के आपसी विवाद ज्यादा हावी रहने लगे हैं।

प्रमोटर समूह पर भी लगाए सवाल

निदेशकों ने कहा है कि जिन प्रमोटर समूह के सदस्यों ने अब उन्हें हटाने की मांग की है, उन्होंने पहले उनकी नियुक्ति का विरोध नहीं किया था। बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही उन्होंने निदेशक बनने की जिम्मेदारी स्वीकार की थी।

पत्र में कहा गया है कि अब अचानक उनका रुख बदलना समझ से बाहर है।

स्वतंत्र निदेशकों का यह भी कहना है कि कुछ प्रमोटर सदस्य बोर्ड पर अपनी बात मनवाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे कंपनी के कामकाज और फैसले लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

गवर्नेंस सुधार के प्रयासों का भी जिक्र

पत्र में यह भी कहा गया है कि स्वतंत्र निदेशकों ने कंपनी में निगरानी और गवर्नेंस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई सुझाव दिए थे।

इनमें पूर्णकालिक निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज की समीक्षा, जरूरत पड़ने पर बाहरी HR एजेंसी की मदद लेने और हर तिमाही बोर्ड बैठक से पहले कंपनी के कामकाज की समीक्षा जैसे प्रस्ताव शामिल थे।

निदेशकों का कहना है कि शुरुआत में प्रमोटर समूह के निदेशकों ने इन सुझावों का समर्थन किया था, लेकिन बाद में उन्होंने अपना रुख बदल लिया।

NCLT के आदेशों का भी दिया हवाला

स्वतंत्र निदेशकों ने अपने पत्र में NCLT के सितंबर और अक्टूबर 2023 के आदेशों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल ने कंपनी के बड़े फैसले बोर्ड के जरिए लेने को कहा था। इसी व्यवस्था के तहत सतीश चंद्र मिश्रा को कंपनी के रोजमर्रा के कामकाज की जिम्मेदारी दी गई थी। ऐसे में उन्हें हटाने का प्रस्ताव NCLT की तय व्यवस्था को कमजोर कर सकता है।

शेयरधारकों से भावुक अपील

अपने पत्र के आखिर में स्वतंत्र निदेशकों ने शेयरधारकों से अपील की कि वे वोटिंग से पहले पूरे मामले और इसके असर पर ध्यान से विचार करें। उन्होंने कहा कि वे हमेशा कंपनी में अच्छी गवर्नेंस बनाए रखने और सभी शेयरधारकों व जुड़े लोगों के हित में काम करते रहे हैं।

अब 29 मई को होने वाली EGM पर पूरे मीडिया और कॉरपोरेट जगत की नजर है, क्योंकि इस बैठक का फैसला कंपनी के भविष्य और बोर्ड की संरचना पर बड़ा असर डाल सकता है। 

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मीडिया के बदलते दौर में नई पहल, लॉन्च हुई ‘Galaxia Quest’ मैगजीन

तेजी से बदलती मीडिया दुनिया के बीच नई मैगजीन ‘Galaxia Quest’ लॉन्च की गई है। बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार भूपेन्द्र चौबे इस मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 23 May, 2026
Last Modified:
Saturday, 23 May, 2026
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तेजी से बदलती मीडिया दुनिया के बीच नई मैगजीन ‘Galaxia Quest’ लॉन्च की गई है। बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार भूपेन्द्र चौबे इस मैगजीन के एडिटर-इन-चीफ हैं। यह मैगजीन देश के कई एयरपोर्ट्स और दूसरी प्रमुख जगहों पर उपलब्ध कराई जा रही है।

भूपेंद्र चौबे ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे समय में जब पारंपरिक और मुख्यधारा की मीडिया कई चुनौतियों का सामना कर रही है, वहीं सोशल मीडिया के छोटे-छोटे प्रयोग भी राजनीति और जनमत को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे दौर में लोगों के भीतर भरोसेमंद और दिलचस्प जानकारी की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि ‘Galaxia Quest’ सिर्फ एक सामान्य मैगजीन नहीं है, बल्कि यह टेक्स्ट, वीडियो और ज्यादा इंटरैक्टिव कंटेंट का मिश्रण है। यानी पाठकों को इसमें सिर्फ खबरें ही नहीं, बल्कि ऐसी जानकारियां और अनुभव मिलेंगे जो उन्हें ज्यादा जोड़कर रखें।

चौबे के मुताबिक, इस मैगजीन का डिजिटल वर्जन भी लॉन्च कर दिया गया है, जिसे ऑनलाइन देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म लगातार अपडेट होता रहेगा और समय के साथ और बड़ा बनाया जाएगा।

उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल इसे खास लोगों के लिए ‘इनवाइट-ओनली’ मैगजीन के तौर पर पेश किया जा रहा है और चुनिंदा लोगों तक इसकी कॉपी पहुंचाई जाएगी। इसके लिए उन्होंने लोगों से अपना पता साझा करने का अनुरोध किया है ताकि मैगजीन की कॉपी भेजी जा सके।

मैगजीन का डिजिटल वर्जन वेबसाइट पर उपलब्ध है, जिसे आप Galaxia Quest पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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'हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स' की बोर्ड बैठक 28 मई को, नतीजों व डिविडेंड पर होगा फैसला

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स (Hindustan Media Ventures Limited) ने जानकारी दी है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 28 मई 2026 को होने जा रही है।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 22 May, 2026
Last Modified:
Friday, 22 May, 2026
HTMedia985

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स (Hindustan Media Ventures Limited) ने जानकारी दी है कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 28 मई 2026 को होने जा रही है। इस बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 और मार्च तिमाही के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों पर चर्चा की जाएगी।

कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा है कि बोर्ड स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड दोनों वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे सकता है। इसके साथ ही निवेशकों के लिए डिविडेंड देने की सिफारिश पर भी विचार किया जाएगा। हालांकि, डिविडेंड का अंतिम फैसला आगामी AGM में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद ही लागू होगा।

कंपनी ने यह भी बताया कि “ट्रेडिंग विंडो” 30 मई 2026 तक बंद रहेगी। यानी इस दौरान कंपनी से जुड़े निर्धारित अधिकारी और कर्मचारी कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री नहीं कर सकेंगे। यह कदम इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के तहत उठाया गया है।

हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर्स हिंदी मीडिया सेक्टर की बड़ी कंपनियों में गिनी जाती है। कंपनी ‘हिन्दुस्तान’ अखबार समेत कई मीडिया प्लेटफॉर्म्स का संचालन करती है। अब बाजार की नजर 28 मई की बोर्ड बैठक और कंपनी के वित्तीय नतीजों पर रहेगी, खासतौर पर इस बात पर कि कंपनी निवेशकों को कितना डिविडेंड देती है।

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‘दैनिक जागरण’ ने अर्पित त्रिपाठी को सौंपी ग्रेटर नोएडा ब्यूरो की कमान

दैनिक जागरण ने युवा पत्रकार अर्पित त्रिपाठी पर और अधिक भरोसा जताते हुए उन्हें ग्रेटर नोएडा ब्यूरो का इंचार्ज बनाया है। वह अब तक इस ब्यूरो में सेकेंड इंचार्ज के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

Samachar4media Bureau by
Published - Wednesday, 20 May, 2026
Last Modified:
Wednesday, 20 May, 2026
Arpit Tripathi

हिंदी अखबार दैनिक जागरण (Dainik Jagran) ने युवा पत्रकार अर्पित त्रिपाठी पर और अधिक भरोसा जताते हुए उन्हें ग्रेटर नोएडा ब्यूरो का इंचार्ज बनाया है। वह अब तक इस ब्यूरो में सेकेंड इंचार्ज के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे।

अर्पित त्रिपाठी को मीडिया में काम करने का करीब 14 वर्ष का अनुभव है। मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने अक्टूबर 2012 में नवभारत टाइम्स, दिल्ली में बतौर इंटर्न की। इस दौरान उन्होंने दिसंबर 2012 में निर्भया कांड के बाद हुए आंदोलन को कवर किया।

जनवरी 2014 में उन्होंने अमर उजाला, नोएडा में ट्रेनी के रूप में जॉइन किया और नोएडा व दिल्ली डेस्क पर करीब एक वर्ष तक काम किया। वर्ष 2015 में उन्हें जूनियर सब एडिटर के पद पर पदोन्नत किया गया। इसके बाद उन्होंने गुरुग्राम डेस्क के इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद मार्च 2016 में अर्पित त्रिपाठी ने अमर उजाला छोड़कर दैनिक जागरण नोएडा में रिपोर्टर के पद पर जॉइन कर लिया और कई प्रमुख बीट्स पर अपनी जिम्मेदारी संभाली।

अगस्त 2022 में उन्हें वरिष्ठ संवाददाता के पद पर पदोन्नत किया गया था। वर्तमान में वह ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, यूपीसीडा, एक्सपो मार्ट, जिम्स, जीएसटी और प्रदूषण विभाग जैसी प्रमुख बीट्स कवर कर रहे हैं और अब उन्हें ग्रेटर नोएडा ब्यूरो इंचार्ज की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

समाचार4मीडिया की ओर से अर्पित त्रिपाठी को नई जिम्मेदारी मिलने की ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

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तमाम चुनौतियों के बावजूद प्रिंट मीडिया अब भी मजबूत बिजनेस मॉडल: गिरीश अग्रवाल

कंपनी के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल और डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने कंपनी के प्रदर्शन, डिजिटल कारोबार, रेडियो बिजनेस और प्रिंट इंडस्ट्री की स्थिति पर विस्तार से बात की।

Vikas Saxena by
Published - Friday, 15 May, 2026
Last Modified:
Friday, 15 May, 2026
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दैनिक भास्कर के स्वामित्व वाली कंपनी डीबी कॉर्प (DB Corp Limited) ने 11 मई 2026 को निवेशकों और विश्लेषकों के साथ अपनी चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों को लेकर कॉन्फ्रेंस कॉल की। इस इंवेस्टर्स मीट में कंपनी के प्रमोटर डायरेक्टर गिरीश अग्रवाल और डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने कंपनी के प्रदर्शन, डिजिटल कारोबार, रेडियो बिजनेस और प्रिंट इंडस्ट्री की स्थिति पर विस्तार से बात की।

इस दौरान, पवन अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी का प्रिंट कारोबार लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा, रियल एस्टेट, हेल्थकेयर, ऑटोमोबाइल और सरकारी विज्ञापनों से अच्छा सपोर्ट मिला। कंपनी की कंसॉलिडेटेड विज्ञापन आय चौथी तिमाही में करीब 6 फीसदी बढ़कर 4067 मिलियन रुपये रही, जबकि सर्कुलेशन रेवेन्यू 1162 मिलियन रुपये पर स्थिर रहा। कुल रेवेन्यू 4 फीसदी बढ़कर 5896 मिलियन रुपये पहुंच गया। वहीं EBITDA में 15.6 फीसदी और PAT में 18.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

उन्होंने कहा कि अगर पिछले साल के चुनावी विज्ञापनों के असर को अलग कर दिया जाए तो कंपनी के प्रिंट विज्ञापन कारोबार में 6.3 फीसदी की अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है। EBITDA मार्जिन भी बढ़कर 28 फीसदी तक पहुंच गया।

न्यूजप्रिंट की बढ़ती कीमतों पर पवन अग्रवाल ने कहा कि कच्चे माल की लागत, ग्लोबल सप्लाई और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने की वजह से कीमतों में तेजी आई है। उनका मानना है कि यह स्थिति अगले कुछ तिमाहियों तक बनी रह सकती है।

डिजिटल कारोबार पर उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस लगातार इस क्षेत्र पर बना हुआ है। मार्च 2026 तक कंपनी के न्यूज ऐप्स पर करीब 2 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स रहे और दैनिक भास्कर हिंदी और गुजराती न्यूज ऐप कैटेगरी में नंबर-1 बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कंपनी हाई क्वालिटी कंटेंट, बेहतर यूजर एक्सपीरियंस और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म को मजबूत करने पर काम कर रही है। हाइपरलोकल कंटेंट, विजुअल स्टोरीटेलिंग और पर्सनलाइज्ड कंटेंट फॉर्मेट्स को पाठकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

रेडियो बिजनेस पर पवन अग्रवाल ने बताया कि माय एफएम ने साल के दौरान 7 नए स्टेशन शुरू किए हैं और अब कंपनी 37 शहरों में मौजूद है। उन्होंने कहा कि खुशी की बात यह है कि सभी नए स्टेशन सिर्फ तीन महीने में EBITDA पॉजिटिव हो गए। कंपनी श्रोताओं को जोड़ने के लिए इनोवेटिव कंटेंट और ग्राउंड एक्टिवेशन पर फोकस कर रही है।

वहीं गिरीश अग्रवाल ने कहा कि प्रिंट मीडिया को लेकर भले ही यह धारणा बनाई जाती हो कि यह गिरता हुआ माध्यम है, लेकिन कंपनी के लिए यह अब भी मजबूत और भरोसेमंद बिजनेस बना हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है। FY22 से FY25 के बीच विज्ञापन आय में करीब 13 फीसदी CAGR दर्ज किया गया, जबकि लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी की वजह से PAT CAGR करीब 38 फीसदी रहा।

उन्होंने कहा कि कंपनी का पाठकों से मजबूत जुड़ाव बना हुआ है और सर्कुलेशन रेवेन्यू भी स्थिर बना हुआ है। ग्राउंड एक्टिविटीज और कई पहलों के जरिए पाठकों के साथ लगातार जुड़ाव बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

संपादकीय मोर्चे पर गिरीश अग्रवाल ने कहा कि कंपनी जिम्मेदार और असरदार पत्रकारिता पर फोकस बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि कंपनी की खोजी पत्रकारिता ने कई राज्यों में भ्रष्टाचार, जनता से जुड़े मुद्दों और जनहित के मामलों को उजागर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के दो पत्रकारों को प्रतिष्ठित Ramnath Goenka Awards से सम्मानित किया गया है। उनके मुताबिक यह पहली बार है जब किसी हिंदी अखबार के पत्रकारों को यह सम्मान मिला है।

भविष्य के कारोबार को लेकर गिरीश अग्रवाल ने कहा कि अप्रैल 2026 में कंपनी को मजबूत डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है और भारतीय बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए आगे भी अच्छी ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि कंपनी 24 से 26 फीसदी EBITDA मार्जिन बनाए रखने को लेकर आश्वस्त है।

उन्होंने बताया कि कंपनी कई शहरों में किराये की प्रॉपर्टी खरीद रही है, ताकि भविष्य में किराया खर्च कम किया जा सके और प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ने का फायदा भी मिले। भोपाल, जयपुर, कोटा, औरंगाबाद, नासिक और जलगांव जैसे शहरों में यह निवेश किया जा रहा है।

डिजिटल बिजनेस को लेकर गिरीश अग्रवाल ने कहा कि कंपनी ने उत्तर प्रदेश बाजार में नई शुरुआत की है और वहां से अच्छे संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 23 करोड़ आबादी वाला उत्तर प्रदेश कंपनी के लिए बड़ा अवसर साबित हो सकता है।

प्रिंट सर्कुलेशन में हल्की गिरावट पर उन्होंने माना कि बाजार में चुनौतियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि सुबह अखबार बांटने वाले डिलीवरी बॉय की कमी भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है, क्योंकि अब उन्हें दूसरे कामों में ज्यादा कमाई मिलने लगी है। इसके बावजूद कंपनी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में सफल रही है।

गिरीश अग्रवाल ने यह भी कहा कि कंपनी फिलहाल किसी दूसरे मीडिया हाउस के अधिग्रहण की योजना नहीं बना रही है। साथ ही उन्होंने बताया कि गूगल और दूसरे प्लेटफॉर्म्स से रेवेन्यू शेयरिंग को लेकर मामला अभी भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के पास लंबित है।

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दैनिक भास्कर ग्रुप में प्रतिभा सिंह को मिली बड़ी जिम्मेदारी

दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) ने प्रतिभा सिंह को जनरल मैनेजर – ब्रांड एंड मार्केटिंग नियुक्त किया है। इससे पहले वह DGM – Brand & Marketing के पद पर कार्यरत थीं।

Samachar4media Bureau by
Published - Tuesday, 12 May, 2026
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Tuesday, 12 May, 2026
pratibhasingh

दैनिक भास्कर ग्रुप (Dainik Bhaskar Group) ने प्रतिभा सिंह को जनरल मैनेजर – ब्रांड एंड मार्केटिंग के पद पर पदोन्नत किया है। इससे पहले वह कंपनी में DGM – Brand & Marketing की जिम्मेदारी संभाल रही थीं।

इस नई भूमिका की जानकारी प्रतिभा सिंह ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए साझा की। उन्होंने अपने पेशेवर सफर को याद करते हुए बताया कि उन्होंने साल 2006 में मुंबई में डिप्टी मैनेजर – कॉर्पोरेट ब्रांड एंड मार्केटिंग के रूप में दैनिक भास्कर ग्रुप के साथ करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने इस नई जिम्मेदारी को अपने करियर का “फुल सर्कल मोमेंट” बताया।

प्रतिभा सिंह पिछले आठ वर्षों से अधिक समय से दैनिक भास्कर ग्रुप के साथ जुड़ी हुई हैं। इससे पहले अपने करियर के शुरुआती दौर में भी वह कुछ समय तक इस मीडिया समूह का हिस्सा रह चुकी हैं। दैनिक भास्कर ग्रुप में दोबारा शामिल होने से पहले उन्होंने करीब 11 वर्षों तक 94.3 MY FM के साथ काम किया। वह MY FM की फाउंडिंग टीम का हिस्सा थीं और उत्तर भारत के कई बाजारों में ब्रांड को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

ब्रांड और मार्केटिंग इंडस्ट्री में प्रतिभा सिंह को दो दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने B2B2C, B2B और B2C सेक्टर में उपभोक्ता व्यवहार, मार्केट स्ट्रेटेजी और ब्रांड ग्रोथ पर व्यापक काम किया है। अपने करियर के दौरान वह दैनिक जागरण (Dainik Jagran) और मेगा कॉरपोरेशन (Mega Corporation) जैसी कंपनियों से भी जुड़ी रही हैं।

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डी.बी. कॉर्प में मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल का कार्यकाल बढ़ाने पर बोर्ड की मुहर

हिंदी अखबार 'दैनिक भास्कर' के स्वामित्व वाली कंपनी डी.बी. कॉर्प (D. B. Corp Limited) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सोमवार को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी।

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Published - Tuesday, 12 May, 2026
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Tuesday, 12 May, 2026
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हिंदी अखबार 'दैनिक भास्कर' के स्वामित्व वाली कंपनी डी.बी. कॉर्प (D. B. Corp Limited) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सोमवार को हुई बैठक में कई अहम फैसलों को मंजूरी दी। कंपनी ने मार्च 2026 तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड वित्तीय नतीजों को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कंपनी ने अपने मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल की दोबारा नियुक्ति को भी मंजूरी दे दी है।

कंपनी के मुताबिक, सुधीर अग्रवाल को 1 जनवरी 2027 से 31 दिसंबर 2031 तक पांच साल के लिए फिर से मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी अभी बाकी है। यह फैसला बोर्ड की नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी की सिफारिश पर लिया गया।

डी. बी. कॉर्प ने बताया कि सुधीर अग्रवाल पिछले करीब 35 साल से अखबार प्रिंटिंग और पब्लिशिंग बिजनेस से जुड़े हुए हैं और कंपनी की शुरुआत से ही बोर्ड का हिस्सा हैं। कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति और बिजनेस विस्तार में उनकी अहम भूमिका रही है।

कंपनी के अनुसार, उनके नेतृत्व में डी. बी. कॉर्प ने एक राज्य से बढ़कर 12 राज्यों तक अपनी मौजूदगी बनाई। वहीं, 1997 में जहां कंपनी के सिर्फ 4 एडिशन थे, अब यह संख्या बढ़कर 61 हो गई है। कंपनी तीन भाषाओं में देशभर में अपना अखबार प्रकाशित करती है।

डी. बी. कॉर्प ने यह भी कहा कि सुधीर अग्रवाल द्वारा शुरू किया गया डोर-टू-डोर लॉन्च मॉडल काफी सफल रहा, जिस पर Indian Institute of Management Ahmedabad, Indian Institute of Management Bangalore और Harvard Business Review जैसे संस्थानों ने केस स्टडी भी की।

कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में यह भी साफ किया कि सुधीर अग्रवाल पर किसी भी नियामक संस्था की ओर से डायरेक्टर पद संभालने पर कोई रोक नहीं है।

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‘डी.बी. कॉर्प’ के विज्ञापन राजस्व में तेजी, चौथी तिमाही में दिखी मजबूत ग्रोथ

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) की पब्लिशिंग कंपनी डी.बी. कॉर्प लिमिटेड (D.B. Corp Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है।

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Published - Monday, 11 May, 2026
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Monday, 11 May, 2026
DB Corp Ltd

‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) की पब्लिशिंग कंपनी डी.बी. कॉर्प लिमिटेड (D.B. Corp Limited) ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी का विज्ञापन राजस्व सालाना आधार पर 6 फीसदी बढ़कर 406.7 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 384.1 करोड़ रुपये था।

कंपनी की कुल कंसोलिडेटेड आय भी 4 फीसदी बढ़कर करीब 589.6 करोड़ रुपये हो गई। वहीं EBITDA में 15.6 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 117.6 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) भी 18.8 फीसदी बढ़कर 62.2 करोड़ रुपये रहा।

कंपनी ने बताया कि FY2022 से FY2025 के बीच विज्ञापन राजस्व में 13 फीसदी की मजबूत CAGR ग्रोथ दर्ज की गई है। वहीं FY2026 में समान आधार (Like-to-Like Basis) पर प्रिंट विज्ञापन कारोबार में 6.3 फीसदी और EBITDA में 7.1 फीसदी की वृद्धि हुई।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो कंपनी की कंसोलिडेटेड कुल आय 2440.8 करोड़ रुपये रही, जबकि FY2025 में यह 2421.2 करोड़ रुपये थी। हालांकि पूरे साल का EBITDA घटकर 573.6 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष में 627 करोड़ रुपये था। इसी तरह PAT भी 371 करोड़ रुपये से घटकर 332 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

डिजिटल कारोबार भी कंपनी के लिए लगातार ग्रोथ का बड़ा माध्यम बना हुआ है। मार्च 2026 तक कंपनी के मासिक सक्रिय यूजर्स (MAUs) की संख्या 2 करोड़ तक पहुंच गई, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती यूजर एंगेजमेंट और कंटेंट खपत को दर्शाती है।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल ने नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कंपनी का प्रदर्शन उसके प्रमुख कारोबारों में मजबूत कामकाज का नतीजा है। उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया में विज्ञापन मांग और सर्कुलेशन स्थिर बना हुआ है, जिससे कंपनी को अपने प्रमुख बाजारों में मजबूती मिली है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी यूजर बेस और एंगेजमेंट लगातार बढ़ रहा है, जिससे कंपनी की ‘फिजिटल’ मौजूदगी और मजबूत हुई है। साथ ही लागत नियंत्रण और ऑपरेशनल एफिशिएंसी पर फोकस के चलते कंपनी स्थिर मार्जिन बनाए रखने में सफल रही है।

कंपनी के अनुसार कंपनी आने वाले समय में भी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत करने और दीर्घकालिक विकास के अवसरों का लाभ उठाने पर फोकस बनाए रखेगी।

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गुजराती मीडिया हाउस 'संदेश लिमिटेड' की सीनियर मैनेजर (HR) श्रीप्रधा मोरे ने दिया इस्तीफा

गुजरात के सबसे बड़े और प्रभावशाली मीडिया हाउस 'संदेश लिमिटेड' (The Sandesh Limited) की सीनियर मैनेजर (HR) श्रीप्रधा मोरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 4 मई 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा।

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Published - Wednesday, 06 May, 2026
Last Modified:
Wednesday, 06 May, 2026
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गुजरात के सबसे बड़ा और प्रभावशाली मीडिया हाउस 'संदेश लिमिटेड' (The Sandesh Limited) के सीनियर मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है। कंपनी की सीनियर मैनेजर (HR) श्रीप्रधा मोरे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने 4 मई 2026 को अपना इस्तीफा सौंपा।

फिलहाल, श्रीप्रधा मोरे तीन महीने के नोटिस पीरियड पर हैं और इसके तहत 3 अगस्त 2026 तक अपनी जिम्मेदारियां निभाती रहेंगी और उसी दिन उनका आखिरी वर्किंग डे होगा।

अपने इस्तीफे में श्रीप्रधा मोरे ने कहा है कि वह नए प्रोफेशनल मौके तलाशने के लिए यह फैसला ले रही हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि ट्रांजिशन पीरियड के दौरान वह कंपनी को पूरा सहयोग देंगी, ताकि कामकाज सुचारू रूप से चलता रहे। 

'संदेश लिमिटेड' गुजरात की एक बड़ी और पुरानी मीडिया कंपनी है, जो खासतौर पर रीजनल मीडिया में मजबूत पकड़ रखती है। यह कंपनी अखबार, टीवी न्यूज और डिजिटल मीडिया का काम करती है। इसका सबसे बड़ा प्रोडक्ट गुजराती अखबार ‘संदेश’ है, जो राज्य के प्रमुख अखबारों में गिना जाता है। कंपनी की शुरुआत 1923 में हुई थी, जबकि इसे पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में 1943 में स्थापित किया गया।

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जागरण प्रकाशन में बड़ा घटनाक्रम: 29 मई की EGM में 8 डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव

जागरण प्रकाशन (Jagran Prakashan Limited) 29 मई 2026 को एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) आयोजित करने जा रही है

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 06 May, 2026
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Wednesday, 06 May, 2026
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जागरण प्रकाशन (Jagran Prakashan Limited) 29 मई 2026 को एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) आयोजित करने जा रही है। यह बैठक दोपहर 12:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी।

कंपनी के मुताबिक, इस मीटिंग का नोटिस 5 मई 2026 को शेयरधारकों को ईमेल के जरिए भेज दिया गया है। जिन निवेशकों के ईमेल रजिस्टर हैं, उन्हें ही यह नोटिस भेजा गया है। वहीं, इस बैठक में वोटिंग के लिए 22 मई 2026 को कट-ऑफ डेट तय की गई है।

इस EGM में सबसे बड़ा मुद्दा कंपनी के बोर्ड से 8 डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव है। यह प्रस्ताव कंपनी के प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कंपनी Jagran Media Network Investment Private Limited की ओर से लाया गया है, जिसके पास करीब 67.97% हिस्सेदारी है।

बैठक में जिन डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है, उनमें सबसे पहले नाम दिव्या कराणी का है, जो कंपनी में स्वतंत्र निदेशक हैं। इसके अलावा शैलेन्द्र स्वरूप को भी बोर्ड से हटाने का प्रस्ताव है। तीसरा नाम अनीता नय्यर का है, जिन्हें भी हटाने की बात कही गई है। चौथा नाम केमिशा सोनी का है, जो स्वतंत्र निदेशक हैं। इसके बाद प्रमोद अग्रवाल को भी हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। छठे नंबर पर शालीन टंडन का नाम शामिल है। सातवें डायरेक्टर अरुण अनंत हैं, जिन्हें हटाने की बात कही गई है। वहीं आठवें नाम के तौर पर सतीश चंद्र मिश्रा को हटाने का प्रस्ताव है, जो कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक हैं।

कंपनी के मुताबिक, इन डायरेक्टर्स को हटाने का प्रस्ताव कंपनी अधिनियम 2013 के तहत लाया गया है और इसके लिए विशेष प्रस्ताव (Special Resolution) पास करना होगा, जबकि एक मामले में साधारण प्रस्ताव (Ordinary Resolution) रखा गया है।

इस पूरे मामले के पीछे कंपनी के अंदर चल रहा विवाद भी सामने आया है। प्रमोटर ग्रुप का कहना है कि इन डायरेक्टर्स की नियुक्ति सही तरीके से नहीं हुई थी। वहीं कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि यह मामला पहले से ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में चल रहा है।

दरअसल, इस मामले में कई याचिकाएं NCLT में दाखिल की गई थीं, जिसके चलते पहले EGM पर रोक लगा दी गई थी। बाद में NCLT ने अप्रैल 2026 में इस रोक को हटा दिया और कहा कि सभी पक्ष कानून के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। इसके बाद कंपनी ने अब EGM बुलाने का फैसला लिया है।

कंपनी ने यह भी साफ किया है कि शेयरधारक 26 मई से 28 मई 2026 के बीच ई-वोटिंग के जरिए अपने वोट डाल सकते हैं। इसके अलावा, जो सदस्य EGM में शामिल होंगे, वे भी वोट कर सकेंगे।

कुल मिलाकर, यह बैठक कंपनी के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें बोर्ड के बड़े बदलाव का फैसला हो सकता है। इससे कंपनी के मैनेजमेंट और भविष्य की रणनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है।

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