सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (SPNI) ने FY26 में 16% की मुनाफे की वृद्धि दर्ज की। एशिया कप 2025, मजबूत विज्ञापन आय और कंटेंट पर नियंत्रित खर्च ने कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बनाया।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India-SPNI) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अपने समेकित शुद्ध लाभ (Consolidated Net Profit) में 16 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की है। द इकोनॉमिक टाइम्स (The Economic Times) की रिपोर्ट के अनुसार, एशिया कप 2025 (Asia Cup 2025), विज्ञापन आय में बढ़ोतरी और कंटेंट पर अनुशासित खर्च ने कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को मजबूत किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ FY26 में बढ़कर 556 करोड़ रुपये हो गया, जो FY25 में 481 करोड़ रुपये था। वहीं परिचालन से प्राप्त राजस्व (Revenue from Operations) 9 प्रतिशत बढ़कर 6,830 करोड़ रुपये और कुल आय (Total Income) 9.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 7,064 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी के बेहतर प्रदर्शन में उसके स्पोर्ट्स पोर्टफोलियो (Sports Portfolio) की अहम भूमिका रही। विशेष रूप से एशिया कप 2025 (Asia Cup 2025), जिसमें भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच तीन मुकाबले खेले गए और भारत ने खिताब जीता, ने टेलीविजन विज्ञापन बाजार में मजबूत मांग पैदा की।
एसपीएनआई (SPNI) ने 2024 में एशियन क्रिकेट काउंसिल (Asian Cricket Council-ACC) के 2031 तक के मीडिया अधिकार लगभग 17 करोड़ डॉलर (170 million dollars) में हासिल किए थे। इससे कंपनी को इस अवधि के दौरान कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंटों के प्रसारण अधिकार प्राप्त हुए।
कंपनी ने अपने स्पोर्ट्स निवेश से बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए भारत (India) के क्रिकेट दौरों के डिजिटल स्ट्रीमिंग अधिकार जियोहॉटस्टार (JioHotstar) को सब-लाइसेंस भी किए। इस व्यवस्था में भारत-इंग्लैंड (India-England) टेस्ट सीरीज और बाद में जारी सीमित ओवरों की सीरीज भी शामिल रही। इससे कंपनी को स्पोर्ट्स अधिकारों पर होने वाले खर्च का एक हिस्सा वसूलने और डिजिटल दर्शकों तक व्यापक पहुंच बनाने में मदद मिली।
स्पोर्ट्स के अलावा कंपनी के नॉन-फिक्शन (Non-fiction) मनोरंजन कार्यक्रमों ने भी विज्ञापन आय बढ़ाने में योगदान दिया। कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati) और व्हील ऑफ फॉर्च्यून (Wheel of Fortune) जैसे कार्यक्रमों ने पूरे वर्ष विज्ञापनदाताओं को आकर्षित किया और नेटवर्क के टेलीविजन कारोबार को मजबूती दी।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सब्सक्रिप्शन आय (Subscription Revenue) पर दबाव बना हुआ है। बदलती दर्शक आदतों और डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स (Digital Streaming Platforms) की बढ़ती लोकप्रियता के कारण भारत का पेड-टीवी (Pay-TV) उद्योग लगातार चुनौतियों का सामना कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन (Sony Entertainment Television) सामान्य मनोरंजन (General Entertainment) श्रेणी में अपनी स्थिर मौजूदगी बनाए हुए है, लेकिन हिंदी फिक्शन (Hindi Fiction) कार्यक्रमों में उसे अभी भी बड़ी सफलता का इंतजार है, जहां प्रतिस्पर्धी ब्रॉडकास्टर्स का दबदबा बना हुआ है।
रिसर्च एंड मार्केट्स (Research and Markets) की रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक AI विज्ञापन बाजार 2025 के 11.17 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 36.34 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वैश्विक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित विज्ञापन बाजार आने वाले वर्षों में तेज़ी से बढ़ने वाला है। रिसर्च एंड मार्केट्स (Research and Markets) की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 11.17 अरब डॉलर का यह बाजार 2030 तक बढ़कर 36.34 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। इस दौरान बाजार 26.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (Compound Annual Growth Rate-CAGR) से बढ़ने का अनुमान है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में ही AI आधारित विज्ञापन बाजार 14.12 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इसका प्रमुख कारण ब्रांड्स द्वारा AI आधारित विज्ञापन टूल्स पर बढ़ता निवेश है, जिनका उपयोग मीडिया बाइंग (Media Buying) को स्वचालित करने, विज्ञापन अभियानों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और उपभोक्ताओं को अधिक व्यक्तिगत अनुभव (Personalised Experience) देने के लिए किया जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डिजिटल विज्ञापन खर्च (Digital Advertising Spend) में बढ़ोतरी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platforms) का विस्तार, उपभोक्ता डेटा की बढ़ती उपलब्धता और मार्केटिंग ऑटोमेशन (Marketing Automation) को अपनाने से इस बाजार को मजबूती मिल रही है। AI का उपयोग विज्ञापन निवेश पर बेहतर रिटर्न (Return on Advertising Spend-ROAS) हासिल करने और अभियानों की दक्षता बढ़ाने के लिए भी किया जा रहा है।
आने वाले वर्षों में प्राइवेसी-अनुरूप विज्ञापन समाधान (Privacy-compliant Advertising Solutions), AI आधारित क्रिएटिव ऑप्टिमाइजेशन (Creative Optimisation), ओम्नीचैनल मार्केटिंग (Omnichannel Marketing), प्रेडिक्टिव ऑडियंस एनालिटिक्स (Predictive Audience Analytics) और रियल-टाइम कैंपेन इंटेलिजेंस (Real-time Campaign Intelligence) इस बाजार की वृद्धि को और गति देंगे। साथ ही प्रोग्रामेटिक एडवरटाइजिंग (Programmatic Advertising) और पर्सनलाइज्ड कैंपेन (Personalised Campaigns) भी प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर बने रहेंगे।
रिपोर्ट में सेल्सफोर्स (Salesforce) के अध्ययन का हवाला देते हुए बताया गया है कि 81 प्रतिशत उपभोक्ता अधिक व्यक्तिगत अनुभव चाहते हैं। वहीं एसएपी (SAP) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका (United States) के 64 प्रतिशत खरीदारों का मानना था कि AI ने उनके रिटेल अनुभव को बेहतर बनाया है।
रिपोर्ट में प्रमुख टेक कंपनियों द्वारा किए जा रहे नवाचारों का भी उल्लेख किया गया है। अमेज़न (Amazon) ने 2025 में AI आधारित वीडियो जेनरेटर (Video Generator) का उन्नत संस्करण लॉन्च किया, जिससे विज्ञापनदाता तेजी से वीडियो विज्ञापन तैयार कर सकते हैं। वहीं ऐपियर (Appier) ने अपनी जेनरेटिव AI क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एडक्रिएटिव.एआई (AdCreative.ai) का 3.87 करोड़ डॉलर (38.7 million dollars) में अधिग्रहण किया।
रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में गूगल (Google), माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), मेटा (Meta), एडोबी (Adobe), अमेज़न (Amazon), अलीबाबा (Alibaba), सेल्सफोर्स (Salesforce), टिकटॉक (TikTok), द ट्रेड डेस्क (The Trade Desk) और नील्सन (Nielsen) जैसी कंपनियां प्रमुख भूमिका निभा रही हैं।
अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने दिवंगत अतुल हेगड़े (Atul Hegde) को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके साथ जुड़ी एक याद साझा की और कहा कि उन्होंने नेतृत्व का सबसे बड़ा सबक अतुल हेगड़े से सीखा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दिवंगत विज्ञापन जगत के वरिष्ठ पेशेवर अतुल हेगड़े (Atul Hegde) को याद करते हुए अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने एक भावुक पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा कि अतुल हेगड़े उन दुर्लभ नेताओं में से थे, जो किसी की गलती सुधारते थे, लेकिन सामने वाले को कभी छोटा महसूस नहीं होने देते थे।
अर्नब मित्रा (Arnab Mitra) ने 2007 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उस समय उनकी टीम एक महत्वपूर्ण डेडलाइन पूरी नहीं कर पाई थी। उस प्रोजेक्ट की जवाबदेही अतुल हेगड़े (Atul Hegde) को दुबई (Dubai) में देनी थी। उस समय अर्नब बिजनेस हेड थे और अतुल कंपनी के सीईओ (CEO) थे।
उन्होंने स्वीकार किया कि गलती की जिम्मेदारी लेने के बजाय उन्होंने अपने एक जूनियर सहयोगी को अतुल हेगड़े के पास भेज दिया। हालांकि, अतुल ने उस कर्मचारी को वापस भेज दिया और अर्नब को स्वयं बुलाया।
अर्नब ने लिखा कि उन्हें लगा था कि उन्हें कड़ी फटकार मिलेगी, लेकिन इसके बजाय अतुल हेगड़े ने केवल एक बात कही, जिसने उनके नेतृत्व के नजरिए को हमेशा के लिए बदल दिया। उन्होंने कहा, "अपने जूनियर्स को कभी अपने सीनियर्स के सामने मत छोड़ो। नाम, शोहरत और शर्म—तीनों की जिम्मेदारी नेता की होती है।"
अर्नब मित्रा के अनुसार, यह बात किसी डांट से कहीं अधिक प्रभावशाली थी, क्योंकि अतुल हेगड़े केवल डेडलाइन की बात नहीं कर रहे थे, बल्कि उन्हें एक बेहतर नेता बनने का अर्थ समझा रहे थे।
उन्होंने यह भी बताया कि उनका परिचय अतुल हेगड़े से केवल कॉरपोरेट दुनिया में नहीं था। दोनों मुंबई (Mumbai) के ओवल मैदान (Oval Maidan) में सीएजी शील्ड (CAG Shield) क्रिकेट टूर्नामेंट भी साथ खेलते थे। अर्नब जहां मीडियम फास्ट बॉलर थे, वहीं अतुल एक शांत और संयमित बल्लेबाज थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह अतुल क्रिकेट की पिच पर धैर्य और आत्मविश्वास के साथ खेलते थे, उसी तरह बोर्डरूम में भी उनका व्यक्तित्व संतुलित और प्रभावशाली रहता था।
अर्नब ने लिखा कि अतुल हेगड़े भारतीय विज्ञापन उद्योग के उस दौर का प्रतिनिधित्व करते थे, जब विचारों को समय देकर विकसित किया जाता था, काम की गुणवत्ता सर्वोपरि होती थी और नेतृत्व व्यवहार से सीखा जाता था।
अपनी श्रद्धांजलि के अंत में अर्नब मित्रा ने लिखा कि उन्होंने वर्षों तक अतुल हेगड़े की उस सीख को अपने हर संगठन और हर टीम में अपनाने की कोशिश की, लेकिन कभी उन्हें यह बता नहीं पाए कि उनके शब्दों ने उनके जीवन पर कितना गहरा प्रभाव डाला। उन्होंने भावुक शब्दों में लिखा, "आराम से विश्राम करो, मेरे दोस्त। तुमने एक शानदार पारी खेली। मेरे लिए तुम हमेशा 'नॉट आउट' रहोगे।"
अमितावा सिन्हा इससे पहले 2003 से 2015 तक रेडिफ्यूजन में विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाओं में कार्य कर चुके हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
जानी-मानी विज्ञापन एवं ब्रैंड कम्युनिकेशन कंपनी रेडिफ्यूजन ब्रैंड सॉल्यूशंस (Rediffusion Brand Solutions) ने विज्ञापन और मार्केटिंग कम्युनिकेशंस क्षेत्र के अनुभवी प्रोफेशनल अमितावा सिन्हा को मैनेजिंग पार्टनर नियुक्त किया है। इस भूमिका में वह कंपनी के पूर्वी भारत (ईस्ट) में संचालन और कारोबार बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।
अमितावा सिन्हा को मार्केटिंग कम्युनिकेशंस क्षेत्र में करीब चार दशक का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1980 के दशक के मध्य में एफएमसीजी कंपनी रेकिट कोलमैन (अब रेकिट बेंकाइज़र) में मार्केटिंग से की थी। इसके बाद उन्होंने JWT, मैककैन एरिक्सन (McCann Erickson) और बेट्स (Bates) जैसी प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों में वरिष्ठ पदों पर अपनी सेवाएं दीं।
अमितावा सिन्हा इससे पहले 2003 से 2015 तक रेडिफ्यूजन में विभिन्न नेतृत्वकारी भूमिकाओं में कार्य कर चुके हैं। वर्ष 2011 से 2015 के दौरान वह कंपनी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) रहे और इस दौरान उन्होंने दिवान अरुण नंदा के साथ मिलकर काम किया। रेडिफ्यूजन से अलग होने के बाद उन्होंने ब्रैंडिंग, कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस और पब्लिक रिलेशंस (PR) के क्षेत्र में स्वतंत्र सलाहकार (इंडिपेंडेंट कंसल्टेंट) के रूप में विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों के साथ काम किया।
रेडिफ्यूजन के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. संदीप गोयल ने कहा, ‘’रेडिफ्यूजन अपने राष्ट्रीय विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में अमितावा जैसे अनुभवी पेशेवर का हमारी टीम से जुड़ना हमारे लिए खुशी की बात है। बड़े ब्रैंड्स के साथ काम करने, क्लाइंट्स के साथ मजबूत रिश्ते बनाने और प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का उनका अनुभव हमारी सेवाओं को और मजबूत करेगा। पूर्वी भारत के बाजारों से अच्छी मांग देखने को मिल रही है और इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस क्षेत्र में कारोबार बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।’
अपनी नियुक्ति पर अमितावा सिन्हा ने कहा, ‘रेडिफ्यूजन में वापसी मेरे लिए घर लौटने जैसी है और यह मेरे लिए बेहद भावुक क्षण है। मैं एक बार फिर एजेंसी इकोसिस्टम में काम करने को लेकर उत्साहित हूं, जो मेरे पिछले कार्यकाल के बाद काफी बदल चुका है। मैं डॉ. संदीप गोयल के साथ मिलकर रेडिफ्यूजन को अगले स्तर तक ले जाने के लिए उत्सुक हूं।’
कंपनी ने बताया कि श्रीपर्णा सेनगुप्ता, जो वर्तमान में रेडिफ्यूजन कोलकाता का नेतृत्व कर रही हैं, आगे भी अपनी जिम्मेदारी निभाती रहेंगी और अमितावा सिन्हा के साथ मिलकर काम करेंगी।
सस्टेनेबल फैशन ब्रैंड VIRGIO ने हंसा निगम को अपना नया चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सस्टेनेबल फैशन ब्रैंड VIRGIO ने हंसा निगम को अपना नया चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) नियुक्त किया है। अपनी नई और विस्तारित जिम्मेदारी में वह कंपनी की मार्केटिंग और ग्रोथ रणनीति का नेतृत्व करेंगी। कंपनी अब अपने विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रही है।
हंसा निगम साल 2023 में VIRGIO से जुड़ी थीं। तब से उन्होंने कंपनी की ब्रैंड पहचान मजबूत करने और ग्राहकों के साथ बेहतर जुड़ाव बनाने में अहम भूमिका निभाई है। अब उनकी नई जिम्मेदारी में कंपनी की बाजार में मौजूदगी को और मजबूत करना, नए ग्राहकों को जोड़ना और फैशन, टेक्नोलॉजी तथा सस्टेनेबिलिटी के मेल के रूप में VIRGIO की पहचान को और मजबूत करना शामिल होगा।
VIRGIO से पहले हंसा निगम ने ब्रैंड रणनीति, डिजिटल मार्केटिंग और कंज्यूमर ग्रोथ के क्षेत्र में लंबा अनुभव हासिल किया है। वह पहले OnePlus में काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने भारत और वैश्विक बाजारों में OnePlus Nord पोर्टफोलियो की मार्केटिंग रणनीतियों का नेतृत्व किया। इसके बाद उन्होंने Glance में कई सेलिब्रिटी-आधारित ब्रैंड्स के लिए डिजिटल मार्केटिंग की जिम्मेदारी संभाली। इससे पहले वह The Glitch में स्ट्रैटेजिक प्लानिंग टीम का हिस्सा रहीं, जहां उन्होंने कई प्रमुख कंज्यूमर ब्रैंड्स के लिए ब्रैंड रणनीति तैयार की।
ग्लोबल ब्रैंड बनाने के अनुभव और स्टार्टअप्स के साथ काम करने का अनुभव हंसा निगम की ऐसी मार्केटिंग सोच को विकसित करने में मददगार रहा है, जो ग्राहकों से जुड़ने के साथ-साथ कारोबार पर भी सकारात्मक असर डालती है।
अपनी नियुक्ति पर हंसा निगम ने कहा, "VIRGIO की इस रोमांचक यात्रा के दौरान यह नई जिम्मेदारी मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है। पिछले कुछ वर्षों में हमने ऐसा ब्रैंड तैयार किया है, जो सिर्फ यह नहीं समझता कि आज ग्राहक कैसे खरीदारी करते हैं, बल्कि यह भी नई सोच के साथ काम कर रहा है कि फैशन को कैसे खोजा जाए, कैसे अनुभव किया जाए और कैसे तैयार किया जाए। मैं इस गति को आगे बढ़ाने के लिए उत्साहित हूं। मेरा लक्ष्य ऐसी मार्केटिंग करना है जो लोगों को प्रेरित करे, हमारे समुदाय को और मजबूत बनाए और जिम्मेदार व टिकाऊ फैशन के भविष्य को आकार देने में योगदान दे।"
स्पोर्ट्स बिजनेस इंडस्ट्री से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। TCM Sports Management ने श्वेता मेहरा को क्रिकेट के स्पॉन्सरशिप सेल्स का हेड नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
स्पोर्ट्स बिजनेस इंडस्ट्री से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। TCM स्पोर्ट्स मैनेजमेंट (TCM Sports Management) ने श्वेता मेहरा को क्रिकेट के स्पॉन्सरशिप सेल्स का हेड नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ कंपनी ने अपने कमर्शियल लीडरशिप को और मजबूत किया है। कंपनी अंतरराष्ट्रीय, घरेलू और फ्रेंचाइजी क्रिकेट से जुड़े अपने कारोबार का लगातार विस्तार कर रही है।
श्वेता मेहरा ने Procam International में करीब छह साल तक काम किया। यहां वह बिजनेस डेवलपमेंट और रेवेन्यू की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इस दौरान उन्होंने भारत के कई बड़े रनिंग इवेंट्स जैसे टाटा मुंबई मैराथन, वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन, TCS वर्ल्ड 10K बेंगलुरु और टाटा स्टील वर्ल्ड 25K कोलकाता के लिए लंबे समय तक चलने वाली ब्रांड पार्टनरशिप तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने खेल के जरिए ब्रैंड्स को उपभोक्ताओं से बेहतर तरीके से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
श्वेता मेहरा के पास स्पोर्ट्स, मीडिया, एंटरटेनमेंट और इंटीग्रेटेड मार्केटिंग के क्षेत्र में दो दशक से ज्यादा का अनुभव है। अपने करियर में उन्होंने Procam International, ESPN Star Sports, MTV, The Times of India और अब TCM Sports Management जैसी प्रमुख कंपनियों के साथ काम किया है।
इंडस्ट्री में श्वेता मेहरा की पहचान ऐसी प्रोफेशनल के रूप में है, जो ब्रैंड्स के लिए रणनीतिक साझेदारियां तैयार करती हैं। उनकी कोशिश हमेशा ऐसी पार्टनरशिप बनाने की रही है, जिससे कंपनियों को कारोबारी फायदा मिले और उपभोक्ताओं को बेहतर अनुभव भी मिल सके।
श्वेता मेहरा का मानना है कि स्पॉन्सरशिप सिर्फ ब्रांड की मौजूदगी दिखाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह कारोबार की चुनौतियों का समाधान भी बन सकती है। लंबे समय तक मजबूत रिश्ते बनाने और सफल साझेदारियां विकसित करने की उनकी क्षमता ने उन्हें स्पॉन्सरशिप इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित प्रोफेशनल्स में शामिल किया है।
TCM Sports Management में अपनी नई जिम्मेदारी के तहत श्वेता मेहरा कंपनी के क्रिकेट पोर्टफोलियो में स्पॉन्सरशिप सेल्स की अगुवाई करेंगी। वह ब्रैंड्स के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट, घरेलू प्रतियोगिताओं और उभरती क्रिकेट प्रॉपर्टीज के लिए नए और प्रभावी कमर्शियल अवसर तैयार करेंगी।
अपनी नियुक्ति पर श्वेता मेहरा ने कहा, "क्रिकेट आज भी भारत का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और कारोबारी मंच है, लेकिन अब ब्रैंड्स की अपेक्षाएं पहले से काफी बदल गई हैं। आज स्पॉन्सरशिप का मतलब सिर्फ लोगों के सामने दिखाई देना नहीं है, बल्कि ऐसे बिजनेस समाधान तैयार करना है, जिससे ब्रैंड्स, फैंस और राइट्स होल्डर्स सभी को फायदा मिले। TCM Sports Management के विकास के इस महत्वपूर्ण दौर में टीम का हिस्सा बनकर मैं बेहद उत्साहित हूं और ऐसी साझेदारियां बनाने के लिए उत्सुक हूं जो रणनीतिक, प्रभावशाली और लंबे समय तक सफल रहने वाली हों।"
आज ग्राहक सबसे पहले इंस्टाग्राम, यूट्यूब और कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए नए प्रोडक्ट्स के बारे में जानते हैं। खरीदारी के लिए वे एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे मार्केटप्लेस का इस्तेमाल करते हैं...
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
सुनिधि विजय, कॉरेस्पोंडेंट, एक्सचेंज4मीडिया ।।
एक समय था जब किसी भी ब्रैंड की वेबसाइट ही ग्राहकों के लिए सबसे अहम जगह होती थी। लोग वेबसाइट पर जाकर प्रोडक्ट देखते थे, अलग-अलग विकल्पों की तुलना करते थे और वहीं से खरीदारी भी पूरी कर लेते थे। लेकिन अब यह तस्वीर तेजी से बदल रही है।
आज ग्राहक सबसे पहले इंस्टाग्राम, यूट्यूब और कंटेंट क्रिएटर्स के जरिए नए प्रोडक्ट्स के बारे में जानते हैं। खरीदारी के लिए वे एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसे मार्केटप्लेस का इस्तेमाल करते हैं, जबकि किराना, ब्यूटी और रोजमर्रा के सामान के लिए ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट जैसे क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर निर्भर हैं। वहीं अब बड़ी संख्या में लोग प्रोडक्ट्स की जानकारी और सुझाव लेने के लिए ChatGPT जैसे AI असिस्टेंट का भी इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में कई बार ग्राहक बिना किसी ब्रैंड की वेबसाइट पर जाए ही पूरी खरीदारी कर लेते हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म बढ़ने के साथ अब कंपनियां अपनी वेबसाइट की भूमिका पर दोबारा विचार कर रही हैं। पहले वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य बिक्री करना था, लेकिन अब यह ब्रैंड की विश्वसनीयता बढ़ाने, प्रोडक्ट की जानकारी देने, ब्रैंड की कहानी बताने, ग्राहकों के साथ जुड़ाव बनाने और सीधे रिश्ते मजबूत करने का माध्यम बनती जा रही है।डस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बदलाव सोशल कॉमर्स के बढ़ते प्रभाव की वजह से भी आया है। अब सोशल मीडिया सिर्फ सामान बेचने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि लोगों को नए प्रोडक्ट्स से परिचित कराने का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। ग्राहक पहले किसी क्रिएटर, शॉर्ट वीडियो या AI की सलाह से किसी प्रोडक्ट के बारे में जानते हैं और बाद में किसी दूसरे प्लेटफॉर्म से उसे खरीद लेते हैं।
केवल किरण क्लोदिंग लिमिटेड (KKCL) के जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर हेमंत जैन का कहना है कि आज ग्राहक सोशल मीडिया, मार्केटप्लेस, क्विक कॉमर्स और AI जैसे कई प्लेटफॉर्म पर प्रोडक्ट खोजते हैं। इसलिए कंपनी की वेबसाइट अब सिर्फ खरीदारी का प्लेटफॉर्म नहीं रही, बल्कि यह ब्रैंड की सबसे भरोसेमंद डिजिटल पहचान बन गई है।
उन्होंने कहा कि वेबसाइट का मकसद दूसरे प्लेटफॉर्म से मुकाबला करना नहीं है। बल्कि यह एक ऐसा केंद्र है, जहां ग्राहक कंपनी के कलेक्शन देख सकते हैं, ब्रैंड की कहानी जान सकते हैं और उससे गहराई से जुड़ सकते हैं। वेबसाइट ग्राहकों को यह समझने में भी मदद करती है कि कंपनी के ब्रैंड की खासियत क्या है और उसके मूल्य क्या हैं। इससे ग्राहकों के साथ सीधे रिश्ते भी मजबूत होते हैं।
लिबर्टी शूज लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुपम बंसल भी इससे सहमत हैं। उनका कहना है कि 75 साल पुराने ब्रैंड के लिए यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि सोच-समझकर अपनाई गई रणनीति का हिस्सा है। उनके मुताबिक, जब खरीदारी और प्रोडक्ट खोजने का काम दूसरे प्लेटफॉर्म पर हो रहा है, तो उन प्लेटफॉर्म से मुकाबला करने का कोई मतलब नहीं है।
बंसल का कहना है कि कंपनी अपनी वेबसाइट पर सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर देती है कि ब्रैंड को ग्राहकों के सामने सही तरीके से पेश किया जाए। ऐसा कोई भी मार्केटप्लेस नहीं कर सकता। वेबसाइट के जरिए ग्राहक पूरे प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं, जो किसी एक प्रोडक्ट लिस्टिंग से संभव नहीं है।
इस बदलाव को AI ने और तेज कर दिया है। अब लोग कई वेबसाइट्स पर जाकर जानकारी जुटाने के बजाय सीधे AI असिस्टेंट से पूछते हैं कि कौन-सा प्रोडक्ट बेहतर है, कौन-सा ब्रैंड चुनना चाहिए या किस प्रोडक्ट के रिव्यू अच्छे हैं। इससे कई कंपनियों की वेबसाइट्स पर सीधे आने वाले ग्राहकों की संख्या कम हो रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इससे ब्रैंड वेबसाइट्स की अहमियत खत्म नहीं हुई है। बल्कि अब वेबसाइट पर सही, व्यवस्थित और विस्तार से दी गई जानकारी पहले से ज्यादा जरूरी हो गई है, क्योंकि AI भी इन्हीं वेबसाइट्स से जानकारी लेकर ग्राहकों को सुझाव देता है।
क्विक कॉमर्स ने भी इस बदलाव को और तेज कर दिया है। खासकर FMCG, ब्यूटी, पर्सनल केयर और घरेलू सामान खरीदने वाले ग्राहक अब सीधे डिलीवरी ऐप पर जाकर सामान खोजते हैं, बजाय किसी ब्रैंड की वेबसाइट पर जाने के। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन और होम कैटेगरी में मार्केटप्लेस अब भी सबसे पसंदीदा खरीदारी का माध्यम बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स लोगों को नए प्रोडक्ट्स से परिचित कराने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
इन बदलावों के चलते मार्केटर्स अब अपनी डिजिटल रणनीति भी बदल रहे हैं। पहले वेबसाइट की सफलता सिर्फ बिक्री के आधार पर मापी जाती थी, लेकिन अब यह देखा जा रहा है कि लोग वेबसाइट पर कितना समय बिता रहे हैं, कितने प्रोडक्ट्स देख रहे हैं, कितने लोग न्यूजलेटर से जुड़ रहे हैं, लॉयल्टी प्रोग्राम में हिस्सा ले रहे हैं और वेबसाइट पर मौजूद कंटेंट कितना पढ़ रहे हैं।
कई कंपनियों का कहना है कि इस बदलाव ने उनकी वेबसाइट की भूमिका पूरी तरह बदल दी है। BRND.ME (जो MyFitness, Majestic Pure, Botanic Hearth और PartyPropz जैसे ब्रैंड संचालित करती है) के प्रवक्ता ने कहा कि MyFitness के लिए हर डिजिटल प्लेटफॉर्म की अलग भूमिका है। कंपनी के लिए मार्केटप्लेस और क्विक कॉमर्स सबसे ज्यादा बिक्री लाते हैं, जबकि सोशल मीडिया और ChatGPT व Claude जैसे AI असिस्टेंट नए ग्राहकों तक पहुंचने का अहम माध्यम बन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी की वेबसाइट और ऐप अब सिर्फ खरीदारी का प्लेटफॉर्म नहीं हैं। यहां ग्राहकों को प्रोडक्ट्स की जानकारी, कंटेंट, सब्सक्रिप्शन और लॉयल्टी प्रोग्राम जैसी सुविधाएं मिलती हैं। इससे ग्राहकों के साथ जुड़ाव बढ़ता है और कंपनी को उनके बारे में सीधे जानकारी भी मिलती है। उनका कहना है कि अपनी वेबसाइट और ऐप पर कंपनी का पूरा नियंत्रण होता है, इसलिए भरोसा और लंबे समय के रिश्ते बनाने में इनकी भूमिका बेहद अहम है।
FTA Global के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर सेंथिल कुमार हरिराम का कहना है कि ब्रैंड वेबसाइट अब सिर्फ खरीदारी की जगह नहीं रह गई हैं। वे अब ऐसी जगह बन रही हैं, जहां से AI, सर्च इंजन, मार्केटप्लेस और सोशल मीडिया सभी सही जानकारी हासिल करते हैं। इसी वजह से कंपनियां अब ऐसी वेबसाइट बना रही हैं, जिन्हें AI आसानी से पढ़ सके और जिनमें ज्यादा से ज्यादा उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी मौजूद हो।
वे मानते हैं कि अब वेबसाइट्स का असली काम ग्राहकों का भरोसा जीतना, सही जानकारी देना और ब्रैंड की विश्वसनीयता बढ़ाना होगा। आने वाले समय में AI भी इन्हीं वेबसाइट्स के आधार पर ग्राहकों को सुझाव देगा। साथ ही ग्राहक खरीदारी से पहले वेबसाइट पर जाकर यह भी जांचेंगे कि ब्रैंड कितना भरोसेमंद है और उसके दावे कितने सही हैं।
ब्रैंड वेबसाइट अब ग्राहकों को ऐसे अनुभव भी देने लगी हैं, जो दूसरे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं होते। इनमें एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट लॉन्च, पर्सनलाइजेशन टूल, जानकारी देने वाला कंटेंट, सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी जानकारी, वारंटी रजिस्ट्रेशन और मेंबरशिप प्रोग्राम जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
हेमंत जैन का कहना है कि KKCL के लिए वेबसाइट अब भी बिक्री का एक अहम माध्यम है, लेकिन इसकी भूमिका अब उससे कहीं आगे बढ़ चुकी है। वेबसाइट अब ग्राहकों को प्रोडक्ट्स के बारे में विस्तार से जानकारी देने, ब्रैंड को बेहतर तरीके से समझाने और भरोसा मजबूत करने का काम कर रही है। उनके मुताबिक, जैसे-जैसे रिटेल कारोबार ओम्नीचैनल मॉडल की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ग्राहकों के साथ सीधे संपर्क का अपना प्लेटफॉर्म होना रणनीतिक रूप से और भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
लिबर्टी शूज भी इसी सोच के साथ अपनी D2C रणनीति पर काम कर रही है। अनुपम बंसल का कहना है कि कंपनी भले ही भविष्य में ज्यादातर बिक्री थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म से होने की उम्मीद करती हो, लेकिन वह अपनी वेबसाइट में निवेश जारी रखेगी। उनके मुताबिक, आज वेबसाइट का सबसे बड़ा काम ग्राहकों को यह भरोसा दिलाना है कि वे जिस ब्रैंड से खरीदारी करने जा रहे हैं, वह असली और विश्वसनीय है।
कुल मिलाकर, AI, सोशल मीडिया, मार्केटप्लेस और क्विक कॉमर्स के तेजी से बढ़ते दौर में ब्रैंड वेबसाइट्स की भूमिका पूरी तरह बदल रही है। अब उनका मकसद सिर्फ खरीदारी कराना नहीं, बल्कि ग्राहकों का भरोसा जीतना, सही जानकारी देना, ब्रैंड की पहचान मजबूत करना और हर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी को विश्वसनीय बनाए रखना है।
भारतीय मीडिया, विज्ञापन और पब्लिशिंग इंडस्ट्री में लगभग चार दशक का अनुभव रखने वाले सुरेश बालकृष्ण (Suresh Balakrishna) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय मीडिया, विज्ञापन और पब्लिशिंग उद्योग के वरिष्ठ पेशेवर सुरेश बालकृष्ण (Suresh Balakrishna) आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। यह अवसर उनके लगभग चार दशक लंबे उस पेशेवर सफर का भी प्रतीक है, जिसने देश की मीडिया इंडस्ट्री में कई महत्वपूर्ण बदलावों और सफल पहलों को दिशा दी।
सुरेश बालकृष्ण (Suresh Balakrishna) ने अपने करियर के दौरान देश के कई प्रमुख मीडिया संगठनों में नेतृत्व की जिम्मेदारियां निभाई हैं। इनमें द टाइम्स ऑफ इंडिया (The Times of India), हिंदुस्तान टाइम्स (Hindustan Times), ज़ी (Zee), मेल टुडे (Mail Today), लिंटास मीडिया ग्रुप (Lintas Media Group), काइनेटिक वर्ल्डवाइड (Kinetic Worldwide) और द हिंदू ग्रुप (The Hindu Group) शामिल हैं। वर्ष 2018 से वह द हिंदू ग्रुप (The Hindu Group) में चीफ रेवेन्यू ऑफिसर (Chief Revenue Officer) के रूप में कार्यरत हैं।
मीडिया उद्योग में उन्हें देश के प्रमुख रेवेन्यू रणनीतिकारों (Revenue Strategists) में गिना जाता है। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मीडिया ब्रांड्स और कारोबारों को स्थापित करने और उन्हें विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई।
डीएनए (DNA) के लॉन्च, मेल टुडे (Mail Today) के विस्तार, इनिशिएटिव मीडिया (Initiative Media) और रैपोर्ट (Rapport) की वृद्धि तथा काइनेटिक वर्ल्डवाइड (Kinetic Worldwide) के दक्षिण एशिया (South Asia) और मध्य पूर्व (Middle East) परिचालन को मजबूत बनाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
व्यावसायिक समझ और नवाचार के लिए पहचाने जाने वाले सुरेश बालकृष्ण (Suresh Balakrishna) ने ग्रामीण संचार (Rural Communication) से जुड़ी कई नई पहलों को भी आगे बढ़ाया। उन्होंने मार्केटर्स (Marketers) के लिए प्लानिंग टूल्स (Planning Tools) विकसित करने के साथ-साथ मीडिया और विज्ञापन उद्योग की नई पीढ़ी के अनेक पेशेवरों का मार्गदर्शन भी किया है।
उनके जन्मदिन के अवसर पर मीडिया और विज्ञापन जगत से जुड़े सहयोगी और उद्योग के कई वरिष्ठ पेशेवर उनके लंबे और प्रभावशाली करियर को याद कर रहे हैं। सुरेश बालकृष्ण (Suresh Balakrishna) का पेशेवर सफर भारतीय मीडिया उद्योग में नेतृत्व, नवाचार और व्यावसायिक उत्कृष्टता का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।
एमएसएम यूनिफाई (MSM Unify) ने भारत में MSM CampusOS कारोबार को मजबूत करने के लिए मुदित कालिया (Mudit Kalia) को एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
वैश्विक शिक्षा प्रौद्योगिकी और सेवाओं से जुड़ी कंपनी एमएसएम यूनिफाई (MSM Unify) ने भारत में अपने ''MSM CampusOS'' कारोबार को मजबूत करने के लिए मुदित कालिया (Mudit Kalia) को एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट (Associate Vice President) नियुक्त किया है। कंपनी का कहना है कि यह नियुक्ति भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों के डिजिटल परिवर्तन और संस्थागत विकास को गति देने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नई जिम्मेदारी के तहत मुदित कालिया (Mudit Kalia) देशभर के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर छात्र प्रवेश (Student Recruitment), संस्थागत ब्रांडिंग (Institutional Branding), शैक्षणिक सहयोग (Academic Support), पाठ्यक्रम डिजाइन (Curriculum Design), एआई (Artificial Intelligence-AI) आधारित मूल्यांकन प्रणाली और संस्थानों के समग्र संचालन को बेहतर बनाने पर काम करेंगे।
इसके अलावा वे रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) को मजबूत करने और आधुनिक तकनीक आधारित समाधान उपलब्ध कराने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएंगे। मुदित कालिया (Mudit Kalia) के पास उच्च शिक्षा (Higher Education), बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development), रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) और बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन (Business Transformation) के क्षेत्र में 14 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
अपनी नियुक्ति पर उन्होंने कहा कि भारत का उच्च शिक्षा क्षेत्र ऐसे दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां केवल विस्तार पर्याप्त नहीं होगा। संस्थानों को मजबूत संचालन प्रणाली, बेहतर छात्र परिणाम और ऐसी तकनीकी संरचना की आवश्यकता होगी, जो उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित होने में मदद करे। उन्होंने कहा कि ''MSM CampusOS'' शिक्षा, तकनीक और संस्थागत बदलाव का ऐसा मंच है, जो भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों को नई दिशा दे सकता है।
एमएसएम यूनिफाई (MSM Unify) के फाउंडिंग मेंबर एवं प्रेसिडेंट (India Campus Business) रोहित कुमार (Rohit Kumar) ने कहा कि आज उच्च शिक्षा संस्थान अलग-अलग समाधानों की बजाय ऐसे समग्र डिजिटल इकोसिस्टम (Digital Ecosystem) की तलाश में हैं, जो उनके दीर्घकालिक विकास में सहयोग कर सके।
1 जुलाई 1941 को बुलोवा (Bulova) का दुनिया का पहला कानूनी टीवी विज्ञापन प्रसारित हुआ था। महज 9 डॉलर का यह विज्ञापन आज वैश्विक टीवी विज्ञापन उद्योग की शुरुआत माना जाता है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
आज से 85 वर्ष पहले टेलीविजन (Television) के इतिहास में एक ऐसा क्षण आया जिसने विज्ञापन उद्योग (Advertising Industry) की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। 1 जुलाई 1941 को अमेरिका (United States) के न्यूयॉर्क (New York) स्थित एनबीसी (NBC) के टेलीविजन स्टेशन डब्ल्यूएनबीटी (WNBT) ने बुलोवा (Bulova) घड़ियों का 10 सेकंड का विज्ञापन प्रसारित किया। इसे दुनिया का पहला कानूनी और भुगतान किया गया टेलीविजन विज्ञापन (Television Advertisement) माना जाता है।
यह विज्ञापन बेहद साधारण था। स्क्रीन पर अमेरिका (United States) का नक्शा दिखाई देता था, जिसके बीच में बुलोवा (Bulova) घड़ी का डायल लगा था और उसकी सेकंड वाली सुई घूम रही थी। बैकग्राउंड में उद्घोषक रे फॉरेस्ट (Ray Forrest) की आवाज सुनाई देती थी—"अमेरिका रन्स ऑन बुलोवा टाइम" (America runs on Bulova Time)। इस विज्ञापन में न कोई अभिनेता था, न संगीत और न ही कोई कहानी, लेकिन इसी ने टीवी विज्ञापन उद्योग की नींव रखी।
उस समय टेलीविजन (Television) अपने शुरुआती दौर में था। अमेरिकी संचार नियामक फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (Federal Communications Commission-FCC) ने मई 1941 में पहली बार व्यावसायिक टीवी प्रसारण (Commercial Television Broadcasting) की अनुमति दी थी। शुरुआत में केवल 10 टीवी स्टेशनों को लाइसेंस मिला और पहले ही दिन भुगतान वाला विज्ञापन प्रसारित करने वाला एकमात्र स्टेशन डब्ल्यूएनबीटी (WNBT) था। इसी वजह से बुलोवा (Bulova) इतिहास का पहला आधिकारिक टीवी विज्ञापनदाता बन गया।
इस ऐतिहासिक विज्ञापन की कुल लागत केवल 9 अमेरिकी डॉलर (9 US Dollars) थी। इसमें 5 डॉलर स्टेशन शुल्क और 4 डॉलर प्रसारण समय के लिए खर्च किए गए थे। उस समय न्यूयॉर्क (New York) क्षेत्र में केवल कुछ हजार टेलीविजन सेट मौजूद थे, इसलिए इस विज्ञापन को देखने वाले दर्शकों की संख्या भी बेहद सीमित थी।
बुलोवा (Bulova) पहले से ही रेडियो (Radio) पर समय बताने वाले कार्यक्रमों के जरिए अपनी ब्रांडिंग करता था। इसलिए टीवी पर "बुलोवा टाइम" (Bulova Time) का संदेश देना उसके लिए स्वाभाविक विस्तार था। इसके केवल तीन दिन बाद एडम हैट्स (Adam Hats) ने पहला लाइव टीवी विज्ञापन (Live Television Advertisement) प्रसारित किया और इसके बाद टेलीविजन विज्ञापन उद्योग तेजी से विकसित होने लगा।
आज विज्ञापन पारंपरिक टेलीविजन (Television) से आगे बढ़कर ओटीटी (OTT), कनेक्टेड टीवी (Connected TV-CTV), स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म (Streaming Platforms) और डिजिटल मीडिया (Digital Media) तक पहुंच चुके हैं। इसके बावजूद 1941 का वह 10 सेकंड का बुलोवा (Bulova) विज्ञापन आज भी विज्ञापन उद्योग की ऐतिहासिक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। महज 9 डॉलर का यह निवेश आने वाले दशकों में अरबों डॉलर के वैश्विक टीवी विज्ञापन बाजार की नींव साबित हुआ।
ओम्निकॉम मीडिया ग्रुप (Omnicom Media Group) ने रिपोर्ट के मुताबिक करीब 512 मिलियन डॉलर मूल्य का एडिडास (Adidas) का ग्लोबल मीडिया अकाउंट अपने नाम कर लिया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
ओम्निकॉम मीडिया ग्रुप (Omnicom Media Group) ने स्पोर्ट्सवियर ब्रांड एडिडास (Adidas) का ग्लोबल मीडिया अकाउंट (Global Media Account) हासिल कर लिया है। एडकवीक (ADWEEK) की रिपोर्ट के अनुसार, इस अकाउंट की अनुमानित कीमत 512 मिलियन अमेरिकी डॉलर (512 Million US Dollars) है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मीडिया पिच (Media Pitch) में पब्लिसिस ग्रुप (Publicis Groupe) और मौजूदा एजेंसी डब्ल्यूपीपी (WPP) भी शामिल थे। डब्ल्यूपीपी (WPP) की एजेंसी एसेंसमीडियाकॉम (EssenceMediacom) वर्ष 2018 से इस अकाउंट को संभाल रही थी। उस समय यह जिम्मेदारी मीडियाकॉम (Mediacom) को मिली थी, जिसका 2023 में एसेंस (Essence) के साथ विलय होकर एसेंसमीडियाकॉम (EssenceMediacom) बना।
रिपोर्ट के अनुसार, एडिडास (Adidas) का ग्लोबल मीडिया बिजनेस अब ओम्निकॉम मीडिया ग्रुप (Omnicom Media Group) के मीडिया एजेंसी नेटवर्क पीएचडी (PHD) द्वारा संभाला जाएगा। पीएचडी (PHD) पहले से ही फॉक्सवैगन (Volkswagen), गूगल (Google) और 7-इलेवन (7-Eleven) जैसे प्रमुख ब्रांड्स के साथ काम कर रही है।