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200 एडिशंस लॉन्च करने की तैयारी में है ये मीडिया समूह

महाराष्‍ट्र और गोवा का बड़ा मीडिया ग्रुप ‘लोकमत’ (Lokmat) अपने विस्‍तार की तैयारियों में ...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago

समाचार4मी‍डिया ब्यूरो ।।


महाराष्‍ट्र और गोवा का बड़ा मीडिया ग्रुप लोकमत’ (Lokmat) अपने विस्‍तार की तैयारियों में जुटा हुआ है। महाराष्‍ट्र में अगले तीन साल में इस ग्रुप ने 200 नए एडिशंस खोलने की योजना बनाई है। इसके अलावा यह गोवा में भी आठ एडिशंस लॉन्‍च करने जा रहा है। इसके बाद गोवा में इस मीडिया ग्रुप के एडिशंस की संख्‍या बढ़कर 10 हो जाएगी।


यह ग्रुप जल्‍दी ही ऑटोमोबाइल्‍स पर एक मराठी वेबासइट भी लॉन्‍च करेगा। हमारी सहयोगी वेबसाइट एक्‍सचेंज4मीडिया (exchange4media) के साथ विशेष बातचीत में लोकमत मीडिया के जाइंट मैनेजिंग डायरेक्‍टर करन दर्डा ने भविष्‍य की योजनाओं के बारे में विस्‍तार से बातचीत की।

प्रस्‍तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश:


आने वाले वर्षों में आपने अखबार के विस्‍तार की क्‍या योजना बनाई है ?


हम महाराष्‍ट्र के कोने-कोने तक अपनी पहुंच बनाना चाहते हैं। हम चाहते हैं कि प्रत्‍येक पांच हजार लोगों पर हमारा एक रिपोर्टर और एक डिस्‍ट्रीब्‍यूटर हो। वहीं, हर 15000 लोगों पर हम अपना एक निहायत ही लोकल एडिशन (hyper local edition)  निकालना चाहते हैं। महाराष्‍ट्र की बात करें तो अभी हमारे पास 57 लोकल एडिशन और 11 फुल एडिशंस (full-fledged editions) हैं और 97-98 प्रतिशत तक हमारी यहां पहुंच है। हम इससे भी आगे बढ़ना चाहते हैं।


ऐसे समय में जब कई बड़े ग्रुप अपने प्रिंट एडिशंस बंद कर रहे हैं और इसके बजाय वे डिजिटल में जा रहे हैं। ऐसे में आप अपने प्रिंट को आगे बढ़ाना चाहते हैं?


हम डिजिटल पर भी बहुत काम कर रहे हैं लेकिन हमारा मानना है कि प्रिंट में अभी भी काफी स्‍कोप है। हमें लगता है कि महाराष्‍ट्र में हाइपर लोकल एडिशंस की काफी मांग है, जहां पर हमने कई जगह लॉन्‍च भी किया है। यहां से हमें काफी अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स मिला है। हमारे पुणे और कोल्‍हापुर एडिशंस में पिछले सालों में काफी सुधार हुआ है और इन दोनों शहरों में हम टॉप पोजीशन पर हैं। हमारे ग्रुप का सिद्धांत बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है कि या तो हमें नंबर वन बनना है अथवा इसके प्रतिद्वंद्वी के बराबर करीब पहुंच जाएं।   

 

आपने अभी कहा कि आप डिजिटल की दिशा में भी काफी काम कर रहे हैं, कृपया इसके बारे में थोड़ा विस्‍तार से बताएं ?


हम इस दीपावली तक तीन नई वेबसाइट लॉन्‍च करने जा रहे हैं। इनमें से एक वेबसाइट प्रादेशिक क्षेत्र में ऑटोमोबाइल्‍स पर होगी। हमारा मानना है कि भाषा कोई बाधा नहीं है और भाषा के आधार पर हमें अपने कदम पीछे नहीं खींचने चाहिए। एक मराठी पाठक की पहुंच भी ग्‍लोबल कंटेंट तक होनी चाहिए। इसलिए तीनों नई वेबसाइट मराठी में होंगी लेकिन कंटेंट के मामले में ये काफी व्‍यापक और ग्‍लोबल होंगी।


इसके अलावा हाल ही में हमने अपने पूरे डिजिटल सेटअप में भी काफी बदलाव किया है। Clickstartके बैनर तले काम कर रही हमारी डिजिटल टीम में फिलहाल 200 लोग काम कर रहे हें। हमारी वेबसाइट Lokmat.comऔर  CNXmastiअपने-अपने डोमेन में अच्‍छा काम कर रही हैं। इसके अलावा, हम छोटे शहरों और कस्‍बों तक पहुंच बढ़ाने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं।  

 

आप कंवर्जेंस (convergence) की बात कर रहे हैं, इसका क्‍या मतलब है ?


हम तहसील और तालुका (sub-district) के लोगों के साथ भी खुद को कनेक्‍ट करने का प्रयास कर रहे हैं। हम उन लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं जो तालुका स्‍तर पर प्रिंट रिपोर्टर हैं और वे वहां से स्‍टोरी लेकर डिजिटल के लिए भेजते हैं। जब आप प्रिंट के लिए लिखते हैं या डिजिटल के लिए लिखते हैं तो उसमें काफी अंतर होता है। उनकी भाषा अलग होती है, उसमें अलग तरह के पिक्‍चर इस्‍तेमाल होते हैं और सबसे ज्‍यादा खास बात यह है कि यह सब तय समय में करना है। इसके लिए हमने काफी मेहनत की है, समय और ससांधन भी लगाए हैं। इसके लिए हमने शुरुआत में ही बैंडविथ (bandwidth) लगाए हैं ताकि स्‍टोरी रात 12 बजे तक पहुंच जाए और दूसरे छोर पर उसे तुरंत एडिट किया जा सके और वहां से उसे ओके करने के बाद उसे पोस्‍ट किया जा सके। उसके लिए लगातार काम करना होता है और इसमें बहुत मेहनत होती है, इसलिए आप देख सकते हैं कि हमने अपनी बेवसाइट को निहायत ही लोकल बनाया है।   

 

नोटबंदी (demonitisation) के बाद प्रिंट इंडस्‍ट्री पर काफी असर पड़ा,  इसने आपको किस तरह प्रभावित किया ?


नोटबंदी का प्रभाव जैसा दूसरों पर पड़ा, वही हम पर भी रहा। लेकिन हमने इससे आसानी से पार पा ली। बिजनेस की बात करें तो दीपावली तक हमारी स्थिति बहुत अच्‍छी थी।

 

हाल के दिनों में क्‍या आपकी विज्ञापन दरों (ad rates) में कोई बदलाव हुआ है ?


हर साल की तरह हमने अप्रैल में अपने सभी एडिशंस के ऐड रेट में लगभग दस प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है।


वर्ष 2017 में आपके टॉपलाइन और बॉटमलाइन आंकड़े कैसे रहे ?


चूंकि हम सूचीबद्ध (listed) कंपनी नहीं हैं। इसलिए हम अपने आंकड़ों को शेयर नहीं करते हैं। हालांकि जैसा हमने कहा है कि यह मिले-जुले थे। पिछला साल अक्‍टूबर तक बहुत अच्‍छा था।  ‍

 

इंडियन रीडरशिप सर्वे’ (IRS) के आंकड़ों की बात करें तो क्‍या यह आपको प्रभावित करते हैं ?


बेशक, हम उनका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हमें विश्‍वास है कि पुणे और कोल्‍हापुर जैसे शहरों में जहां पर पिछले वर्षों में हमने काफी मेहनत की है, हम सबसे आगे हैं। एक बार आईआरएस के आंकड़े आ जाएं तो हम यही बात जोर-शोर से कह सकते हैं।


ग्रुप की किसी और योजना के बारे में आप कुछ कहना चाहते हैं ?

सिर्फ हमारा ग्रुप ही ऐसा है जिसने गो ग्रीनकी दिशा में कदम उठाया है और हम अपनी प्रिंटिंग प्रेस को सौर ऊर्जा (solar power) की दिशा में बदल रहे हैं। हमारी 11 प्रिंटिंग प्रेस में से नागपुर और औरंगाबाद सोलर पॉवर से चल रही हैं और आने वाले वर्षों में हमारी कोशिश है कि सभी 11 प्रिंटिंग प्रेस सोलर पॉवर से चलने लगें।


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