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मीडिया हाउस की 'डर्टी ट्रिक्स' रिपब्लिक (Republic) को रोक नहीं पाएगी: अरनब

नूर फातिमा वारसी एडिटर, मार्केटिंग एंड ऐडवर्टाइजिंग, बिजनेस

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

नूर फातिमा वारसी

एडिटर, मार्केटिंग एंड ऐडवर्टाइजिंग, बिजनेस वर्ल्ड ।।

अंग्रेजी न्यूज चैनल ‘टाइम्स नाउ’ (Times Now) और ईटी नाउ (ET Now)  के पूर्व एडिटर-इन-चीफ अरनब गोस्वामी का इंडिपेंडेंट मीडिया (independent media) की दिशा में बढ़ाया गया कदम काफी बड़े दर्शक वर्ग को प्रभावित करने वाला है। यह न सिर्फ पत्रकारिता के दृष्टिकोण से बल्कि उस हिसाब से भी काफी महत्वपूर्ण होगा, जिससे भारत ग्लोबल न्यूज इंडस्‍ट्री में अपनी अहम भूमिका निभा सकता है।

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इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि हाल ही में अरनब गोस्वामी द्वारा नए वेंचर ‘रिपब्लिक’ (Republic) की घोषणा के बाद से इसका काफी लोगों ने स्वागत किया है और इसे काफी जनसमर्थन मिला है। यही नहीं,  इसकी घोषणा के बाद कुछ दिनों तक इसने काफी ट्रेंड (trend) भी किया था। इस बीच, अरनब गोस्वामी और उनकी टीम अपने इस वेंचर के लिए दिन रात लगातार मेहनत कर रही है। इसे शुरुआती स्तर पर आने वाली काफी चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है।

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एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) के साथ बातचीत में अरनब गोस्वामी ने इनमें से कुछ मुद्दों पर बात की और बताया कि ‘रिपब्लिक’ के लिए कौन सी बातें प्राथमिकता (priority) पर होंगी।

प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश :

एंटरप्रिन्योर बनना कभी भी आसान नहीं रहा है, ऐसे में इंडिपेंडेंट मीडिया प्लेटफॉर्म की लॉन्चिंग को लेकर आपका अनुभव कैसा रहा?

हम जिस तरह की पत्रकारिता करते हैं, हमने इसमें उसी को आगे बढ़ाया है और इसमें किसी का कोई कॉरपोरेट हित (corporate interest) नहीं हो सकता है। जर्नलिज्म का हमारा ब्रैंड न सिर्फ इस देश के लोगों को अपील करता है लेकिन यह उससे भी कहीं ज्यादा विशिष्ट है। मैंने महसूस किया है कि इस तरह की प्रभावशाली प‍त्रकारिता को इंडिपेंडेंस होने की जरूरत है। ह‍में इस तरह की पत्रकारिता को जवाबदेह बनाने के लिए इसे संस्थागत (institutionalize) बनाने की जरूरत है। ‘रिपब्लिक’ बिल्‍कुल स्वतंत्र, इंडिपेंडेंट वेंचर होगा, जहां पर हम सीधे और आक्रामक तरीके से अपनी पत्रकारिता कर सकेंगे।

प्रत्येक मीडिया हाउस अपना बिजनेस भी चला रहा है, ऐसे में आप इनके बीच कैसे टिक पाएंगे ?

हम यहां आसानी से टिके रहेंगे क्योंकि हम किसी तरह से कंप्रोमाइज्ड (compromised) नहीं होंगे। यदि आप राजनीतिक दलों से मिलने वाले विज्ञापनों (advertising) पर निर्भर हैं अथवा उनसे अन्य किसी तरह का लाभ जैसे जमीन अथवा कैश की जरूरतें पूरी करते हैं तो आप इंडिपेंडेंट नहीं हो सकते हैं। आज के डिजिटल दौर में टीवी भी डेमोक्रेटाइज्ड (democratized) हो चुका है। यदि आपका कंटेंट बेहतर होगा तो जाहिर तौर पर आप सबसे आगे होंगे।

आज डिजिटल में ढेर सारे अवसर हैं लेकिन सिर्फ बेहतर कंटेंट के आधार पर ही सबसे आगे निकलना आसान नहीं है, खासकर मास मीडिया सेक्टर में। क्या आप इस बात से सहमत नहीं हैं ?

‘रिपब्लिक’ लोगों का ब्रैंड (people’s brand) है। देश भर के लाखों लोग चाहते हैं कि रिपब्लिक लॉन्च हो और यह होगा भी। मुझे पता है कि कुछ मीडिया ग्रुप इसकी साख पर धब्बा लगाने के लिए गंदी चाल (dirty tricks) चल रहे हैं। यदि मैं अपनी बात करूं तो वास्तव में मैं इससे बहुत खुश हूं, क्योंकि ऐसे लोगों ने ‘रि‍पब्लिक’ लॉन्‍च होने से पहले ही अपनी हार स्‍वीकार कर ली है। ऐसे लोग काफी इनसिक्योर (insecure) हो गए हैं।

ऐसे लोग जो कर रहे हैं, उन्हें करने दें, लेकिन हम अपना काम करते रहेंगे। हम ऐसे लोगों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और हम अपने कंटेंट पर ध्यान देंगे। बेशक ऐसे लोग इंडिपेंडेंट पत्रकारों को धमकाते अथवा डराते रहें, हम अपनी स्टोरी करेंगे।

: आप इस तरह की चीजों को कैसे डील कर रहे हैं ?

ऐसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि पिछले दो दशकों में देश में बड़े-बड़े घोटालेबाज,  आतंकी ग्रुप और माफिया मुझे नहीं रोक पाए हैं। इसलिए ऐसे मीडिया ग्रुप को मैं यही कहना चाहूंगा कि वे अपना काम करते रहें। देश की जनता मेरे साथ है। पैसा और धमकाने की रणनीति सिर्फ उन्हीं लोगों को एक्सपोज (expose) करेगी जो इसका इस्तेमाल करते हैं। यदि ऐसे लोगों के अंदर हिम्मत है तो वे सामने आएं और मैं ऐसे लोगों को टीवी और डिजिटल समेत किसी भी प्लेटफॉर्म पर इसका जवाब दूंगा। मैं ऐसे लोगों को जनता के बीच जाकर भी जवाब दूंगा।

‘रिपब्लिक’ लोगों के लिए है। इस देश में मेरे जैसे लोग किसी से नहीं डरते हैं। मुझे देश के लोगों का सपोर्ट मिल रहा है। इसलिए जब भी खुद को मीडिया कहलाने वाले ऐसे लोग पब्लिक के सामने आएंगे, लोग उन्‍हें करारा जवाब देंगे और ऐसे लोग मात खा जाएंगे। इसी सोच के साथ मैं ‘रिपब्लिक’ को इंडिपेंडेंट मीडिया प्‍लेटफॉर्म के रूप में शुरू करने जा रहा हूं जिसका स्वामित्व, नियंत्रण, प्रबंधन आदि सब इंडिपेंडेंट मीडिया प्रोफेशनल्स के हाथों में होगा।

'रिपब्लिक ' की लॉन्चिंग की रफ्तार इतनी सुस्त क्यों हैं, आप इसे कब लॉन्च करने जा रहे हैं ?

हमारी रफ्तार सुस्त नहीं है लेकिन हमें इसे तभी लॉन्च करेंगे जब हम इसके लिए तैयार होंगे। जब मैं इसके दूसरे पक्ष को देखता हूं तो मुझे काफी प्रेरणा मिलती है क्‍योंकि इससे मुझे पता चलता है कि मेरी सोच सही थी कि इंडिपेंडेंट मीडिया को अपने आप आगे बढ़ना चाहिए। मैं ऐसे सभी पत्रकारों का आह्वान करना चाहता हूं जिन्‍हें धमकाया जा रहा है। ऐसे लोगों को डरने की कोई जरूरत नहीं है और इसके लिए सामूहिक रूप से लड़ाई लड़नी है।

मैं ऐसे बिजनेस एग्जिक्‍यूटिव की स्‍टोरी सुनता है जो संपादकीय निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे लोग युवा पत्रकारों को कानून का भय दिखाकर धमकाने की कोशिश कर रहे हैं। इन सब वजहों से देश के पहले इंडिपेंडेंट न्‍यूज प्‍लेटफॉर्म को लेकर असुरक्षा (insecurity) की भावना बढ़ती है। ऐसे मीडिया हाउसों को मैं कहना चाहता हूं कि समय खराब करने की वजाय उन्हें अपनी न्‍यूज पर फोकस करना चाहिए क्योंकि न तो मैं और न ही मेरी टीम इस तरह के बेकार के कैंपेन से डरने वाली है और ही किसी भी तरह के अन्‍य हमले से।

इंडिपेंडेंट मीडिया प्‍लेटफार्म के रूप में आप कैसे खुद को लंबे समय तक टिकाकर रह पाएंगे ?

आप पर लोग कितना विश्‍वास करते हैं अथवा आपकी विश्‍वसीनयता कैसी है, इससे व्‍युअरशिप प्रभावित होगी है। आज के डिजिटल युग में इन चीजों को खरीदा नहीं जा सकता है। मैं ऐसे बिजनेस एग्जिक्यूटिव को जानता हूं जो डिस्ट्रीब्‍यूशन और टीआरपी खरदीने के लिए मीटिंग कर रहे हैं। वे ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्‍योंकि वे जानते हैं कि उन्‍हें नुकसान होने वाला है और वे इससे डरे हुए हैं। वे अपने आप को दिलासा दे रहे हैं कि इस तरह व्‍युअरशिप को खरीद सकते हैं लेकिन वे ऐसा नहीं कर सकते हैं।

पिछले दशक में हमने पत्रकारिता में क्या किया है, क्या हमने लोगों का विश्वास जीता है और क्या हमें कुछ ऐसा याद है जिससे हमें व्युअरशिप, क्रेडिबिलिटी, रेस्पेक्टस और कॉमर्शियल सपोर्ट की जरूरत नहीं होगी। इतिहास इस बात की गवाही देगा कि हम अपनी जगह सही हैं। हमारे देश में बड़ी संख्या युवाओं की है और उनका हमारे ऊपर भरोसा है। हाल ही में जयपुर की यूनिवर्सिटी व कॉलेजों में और आईआईटी बंबई में मुझे यह देखकर काफी खुशी मिली कि लोग ‘रिपब्लिक’ को लेकर कितने उत्साहित हैं। देश के लोग ऐसे मीडिया हाउसों को जरूर सबक सिखाएंगे जो इस तरह की गंदी चाल चलते हैं।

(मूल स्टोरी आप नीचे दिए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं )

http://businessworld.in/article/Republic-Is-Unstoppable-People-s-Movement-Dirty-Tricks-Won-t-Work-Arnab-Goswami/30-12-2016-110490/

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