होम / साक्षात्कार / Exclusive: अमर उजाला के कंसल्टिंग एडिटर यशंवत व्यास से खास बातचीत...

Exclusive: अमर उजाला के कंसल्टिंग एडिटर यशंवत व्यास से खास बातचीत...

हिंदी पत्रकारिता की दुनिया का मशहूर अखबार 'अमर उजाला' ने पिछले पखवाड़े में...

समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago

अभिषेक मेहरोत्रा

संपादकीय प्रभारी, समाचार4मीडिया डॉट कॉम ।।

हिंदी पत्रकारिता की दुनिया का मशहूर अखबार 'अमर उजाला' ने पिछले पखवाड़े में अपने प्रारूप यानी लेआउट में एक बड़ा परिवर्तन किया है। नए प्रारूप को लेकर पाठकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं हैं। अखबार को नया स्वरूप देने का श्रेय जाता है संस्थान के सलाहकार संपादक यशवंत व्यास को

समाचार4मीडिया से बात करते हुए यशवंत व्यास कहते हैं कि अखबार कंटेंट और लेआउट के तालमेल का ऐसा स्वरूप होता है जो पाठकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। जिस तरह हम बॉडीमांइडसोल(Body, Mind. Soul) के तारतम्य बात करते हैं उसी तरह अखबार के लिए कंटेंटलेआउट और फॉन्ट का तालमेल जरूरी होता है। वे कहते हैं कि लेआउट को सिर्फ अखबार की सौंदर्यता से नहीं जोड़ना चाहिए। अखबार का लेआउट इस तरह का होना चाहिए कि वो पाठक की प्यास को पूरा कर सके। 

यशवंत कहते हैं कि अपने शुरुआती करियर के जमानें से ही वह कंटेंट के साथ-साथ लेआउट और डिजाइनिंग को भी बारिकी से समझते रहे हैं। वे कहते हैं कि अखबार के लेआउट में बदलाव का मतलब ये नहीं होता है कि फलां लेआउट खराब था और फलां बहुत अच्छा। अखबार के लेआउट में बदलाव समकालीन(Comtemporary) होता है। एथिक्स, वैल्यूज के साथ जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। किसी भी अखबार का फॉन्ट एक डिजायन नहीं एक एक्सप्रेशन है। एक अच्छा फॉन्ट आखों को अपनी ओर खींचता है। कॉलम साइज की डिजाइनिंग विजुअलाइजेशन का एक हिस्सा है। अमर उजाला की नई स्टाइल की और फॉन्ट पर बात करते हुए बताते हैं कि कई दिनों तक इस पर काम किया और इसको डेवलेप कराया तब जाकर इसका वर्तमान स्वरूप मिल सका है।

यशवंत पुरजोर तरीके से कहते हैं कि अभी तक के अनुभव से पाया है कि डिजायन को एडिटोरियल का ही हिस्सा मानना चाहिए। एक संपादक से उम्मीद की जाती है कि वे डिजायन सेंस को समझें उसमें दिलचस्पी लें। आजकल डिजायन के कई सॉफ्टवेयर हैं जिनकी जानकारी भी समय-समय पर काफी मददगार साबित होती है।

वे कहते हैं कि इस नए लेआउट की खासियत है कि इसमें गटर स्पेस में कोई बदलाव नहीं किया गया है फिर भी अखबार का कंटेंट खुला-खुला सा दिखता है। एक बड़ी बात ये है कि आजकल जब बड़े अखबारों का प्रारूप अंतरराष्ट्रीय डिजायनर्स तय करते हैं तो ऐसे में हमारे नए प्रारूप को हमारे ही यंग डिजायनर्स ने भरपूर मेहनत और क्रिएटिबिलिटी के साथ तैयार किया है कि वे पाठकों के साथ अपनी फ्रिक्वेंसी मैच कर सकें। अखबार के प्रारूप में परिवर्तन के प्रमोशन के बारे में यशवंत बताते हैं कि हमनें कोई बड़ा प्रमोशनल प्लान तय नहीं किया है। हम सिर्फ वैचारिक तौर पर अपने पाठकों के साथ संवाद कर रहे हैं। मसलन हाल ही में हमारे दो कैंपेन खटिया या ख्वाबऔर गोली या पत्थरकाफी लोकप्रिय हुए। पाठकों ने हमें इस पर जमकर प्रतिक्रियाएं दी और हमने पूरा पेज पाठकों के नाम कर दिया। हम अपने रविवार परिशिष्ट पर भी खास काम कर रहे हैं। हमारे कोशिश है कि इसके तहत हम पाठकों को संडे के दिन वो सामग्री दें, जो उनके काम की हो। मसलन विभिन्न तरह के व्यंजनों की जानकारी इत्यादि।

एक सवाल के जवाब में यशवंत बताते हैं कि उपलब्ध संशाधनों और मौजूदा कर्मियों से बेहतर आउटपुट निकालना एक लीडर की क्वॉलिटी है। वे अपने स्टाइल में कहते हैं कि 'सही जूते में सही पैर जाएगा' तो संतुलन अपने आप में बना रहेगा। अखबारों में बढ़ रहे सरकारी परिशिष्टों और खबरों के बीच के भेद के कम होने के सवाल पर वे तपाक से बोलते हैं कि अब अखबारों ने इतने सरकारी परिशिष्ट प्रकाशित कर दिए हैं कि पाठक सबकुछ स्वयं समझ जाता है। वे कहते हैं कि अखबार में खबरों और विज्ञापनों का एक तय अनुपात होना चाहिए। पैन्ट की कीमत पर जेब दी ही नहीं जा सकती। किसी भी अखबार का संपादकीय पेज बहुत ही अहम पेज है और पाठकों की एक निश्चित संख्या के साथ पेज की ट्यूनिंग होती है। यशवंत कहते हैं कि संपादकिय पेज को हल्का नहीं मानना चाहिए, लेकिन इस पर बौद्धिकता का भार भी नहीं उड़ेल देना चाहिए। वे बताते हैं कि उनकी संपादकीय पेज की टीम संपादकीय के शीर्षक पर काफी चर्चा करती है। हाल ही में इस पेज के प्रारूप में भी बदलाव किया गया है। सरकार और जनता के बीच नीतियों पर संवाद के महत्व को समझते हुए अमर उजाला अब हर हफ्ते देश के प्रमुख राज्य के मुख्यमंत्री का एक लेख प्रकाशित करता है, जिसमें मुख्यमंत्री अपने राज्य की नीतियों और जनता के साथ अपने सरोकारों पर बात करते हैं। अमर उजाला के संपादकीय पेज पर कई विदेशी और अंग्रेजी के लेखकों का बोलबाला रहता है, इस आरोप पर यशवंत कहते हैं कि ऐसा नहीं है। हिंदी के कई बड़े लेखक भी हमारे यहां प्रकाशित होते हैं। हां, ये जरूर है कि हमारी कोशिश रहती है कि संबंधित विषय पर उस विषय को ढंग से समझने वाले किसी विशेषज्ञ से ही लेख लिखवाया जाए। ऐसे में हम विदेशी और अंग्रेजी लेखकों के प्रति कोई दुराग्रह नहीं रखते हैं। हमारा पाठक किसी अमुक विषय पर कई आयाम के साथ विचार जानना चाहता है बजाय परम्परागत लेख के। उन्होंने कहा कि भाषा नहीं विचार का महत्व है। बड़ी संख्या में आज भी युवा वर्ग अंग्रेजी की हिंदी में डब फिल्में देखता है इसलिए लेख के विचारों में ताजगी होना जरूरी है बजाय हिंदी-अंग्रेंजी के द्वंद के। पाठकों को विचारों का विस्तार चाहिए, बोझ नहीं।

साहित्य और पत्रकारिता में कैसे सामंजस्य होता है, इस पर यशवंत जवाब देते हैं कि साहित्य अभिव्यक्ति का एक माध्यम है। साथ ही यशवंत ये भी स्पष्ट करते हैं कि वे मूलतौर पर एक पत्रकार हैं और बाद में एक साहित्यकार। बॉटनी की पढ़ाई करने वाले यशवंत बताते हैं कि साहित्य अभिव्यक्ति का ही एक मूड है।पत्रकार होने के साथ अगर आप साहित्यकार भी है, तो आप समाज की  संवेदना को भलीभांति समझ पाते है। एक अच्छा पत्रकार जरूरी नहीं कि एक अच्छा साहित्यकार हो और एक अच्छा साहित्यकार जरूरी नहीं कि एक अच्छा पत्रकार हो।

व्यंग्य पर यशवंत कहते हैं कि ये बहुत जरूरी विधा है जो बहुत कुछ ऐसा कह देती है जो आप सीधे शब्दों में नहीं कह सकते हैं। वे हरिशंकर परिसाई के व्यंग्यों की तरीफ करते हुए कहते हैं कि केंचुए ने पीढ़ियों के अनुभव से ये जान लिया था कि रीढ़ की हड्डी नहीं होनी चाहिए। बताइए, इससे बेहतर व्यंग्य क्या हो सकता है।

यशवंत कहते हैं कि हमारे जमाने के हीरो तो विनोद मेहता और प्रीतिश नंदी हुआ करते थे, मैंने उनको बहुत ऑब्जर्व किया है। किस तरह इन महान संपादकों ने कई स्वरूपों के अखबार और मैगजीन के साथ नए और लोकप्रिय प्रयोग किए।  अखबार में फोटो से किस तरह से पेश करना है कि इसके लिए संपादकीय दृष्टि होना बहुत जरूरी है।

यशवंत व्यास दिल्ली के पत्रकार नहीं हैं, लुटियन दिल्ली से उनका नाता नहीं है। इस सवाल पर वे मुस्कुराते हुए कहते हैं कि दिल्ली आता-जाता रहता हूं, वैसे भी दिल्ली किसकी हुई है? मनमोहन सिंह भी असम से थे।

समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।


टैग्स
सम्बंधित खबरें

सिर्फ सत्ता नहीं, बदलाव की कहानी है ‘Revolutionary Raj’: आलोक मेहता

वरिष्ठ संपादक (पद्मश्री) और जाने-माने लेखक आलोक मेहता ने अपनी कॉफी टेबल बुक “Revolutionary Raj: Narendra Modi’s 25 Years” से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर समाचार4मीडिया से खास बातचीत की है।

19-February-2026

पत्रकारिता में इन बातों पर फोकस जरूरी, बाकी सब अपने आप संभल जाएगा: संकेत उपाध्याय

समाचार4मीडिया से बातचीत में जाने-माने पत्रकार संकेत उपाध्याय का कहना था- ईको सिस्टम बंटोरने के इस सिस्टम में जागरूक हो जाना ही एक ईको सिस्टम है।

17-February-2026

अब ‘मैड मेन’ नहीं, ‘मशीन माइंड्स’ का है जमाना: सर मार्टिन सोरेल

S4 Capital के फाउंडर व एग्जिक्यूटिव चेयरमैन सर मार्टिन सोरेल ने डॉ. अनुराग बत्रा से बातचीत में बताया कि एआई के दौर में विज्ञापन जगत में कैसे आगे बढ़ें और कौन-सी बड़ी कंपनियां पिछड़ रही हैं।

17-February-2026

टीवी व डिजिटल में मुकाबले की बहस गलत, प्लेटफॉर्म की सीमाओं से आगे बढ़ें: आशीष सहगल

टाइम्स टेलीविजन नेटवर्क के नए CEO और मीडिया व एंटरटेनमेंट के चीफ ग्रोथ ऑफिसर आशीष सहगल ने कहा कि टीवी और डिजिटल के बीच मुकाबले की चर्चा एक गलत धारा है।

18-December-2025

सफलता के लिए बदलाव की रफ्तार पकड़नी होगी: उदय शंकर

जियोस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने CII बिग पिक्चर समिट में भारतीय मीडिया के भविष्य पर SPNI के एमडी व सीईओ गौरव बनर्जी से बातचीत की।

03-December-2025


बड़ी खबरें

‘समाचार4मीडिया 40 अंडर 40’: विजेताओं के चयन के लिए जूरी मीट 14 मार्च को

एक्सचेंज4मीडिया (exchange4media) समूह की हिंदी वेबसाइट 'समाचार4मीडिया' पत्रकारिता जगत से जुड़े 40 प्रतिभाशाली युवाओं ‘40 अंडर 40’ की लिस्ट एक बार फिर तैयार करने जा रही है।

14 hours ago

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वेबिनार: मीडिया में AI के सही उपयोग पर विशेषज्ञों की चर्चा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष वेबिनार में मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई।

12 hours ago

खुद को नया रूप देकर आगे बढ़ेगा इंडियन न्यूज इकोसिस्टम, भविष्य रहेगा मजबूत: हर्ष भंडारी

भारतीय न्यूज इकोसिस्टम में इस हफ्ते चार हफ्तों के लिए TRP को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। इसके बाद कई मीडिया वॉचर्स ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।

12 hours ago

क्या दुनिया वैसी नहीं रहेगी जैसी हम जानते हैं?

मैं जब विज्ञापन इंडस्ट्री में चल रहे बड़े बदलावों की खबरें देख रहा था, तो मेरे मन में एक सवाल आया कि इन बदलावों से क्लाइंट्स को आखिर क्या फायदा होगा।

12 hours ago

पीएम 9 मार्च को पोस्ट बजट वेबिनार को करेंगे संबोधित, AVGC-क्रिएटर इकोनॉमी पर होगी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 मार्च को बजट के बाद आयोजित एक खास वेबिनार को संबोधित करेंगे।

2 days ago