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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर वेबिनार: मीडिया में AI के सही उपयोग पर विशेषज्ञों की चर्चा
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष वेबिनार में मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई।
Vikas Saxena 1 hour ago
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष वेबिनार में मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। इस वेबिनार में मीडिया, कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन और अकादमिक जगत से जुड़ी कई विशेषज्ञ महिलाओं ने हिस्सा लिया और यह बताया कि मीडिया उद्योग में AI का उपयोग किस तरह जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ किया जाना चाहिए। वेबिनार का संचालन पंकज शर्मा ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में पंकज शर्मा ने कहा कि आज के दौर में AI तेजी से मीडिया और पत्रकारिता के काम करने के तरीके को बदल रहा है। कंटेंट क्रिएशन, न्यूज एनालिसिस और डिजिटल प्रोडक्शन जैसे क्षेत्रों में AI नए अवसर लेकर आया है, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या AI का इस्तेमाल जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ किया जा रहा है।
वेबिनार में एक्सचेंज4मीडिया में सीनियर डायरेक्टर व कॉरपोरेट कम्युनिकेशन एवं PR कम्युनिटी की बिजनेस हेड पारुल बत्रा ने कहा कि आज AI हर क्षेत्र में तेजी से फैल रहा है और मीडिया भी इससे अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि AI को पूरी तरह नजरअंदाज करना संभव नहीं है, लेकिन इसके उपयोग के लिए स्पष्ट नियम और सुरक्षा व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, मीडिया संस्थानों की जिम्मेदारी है कि अगर कोई कंटेंट AI से बनाया गया है तो उसे स्पष्ट रूप से बताया जाए, क्योंकि आम दर्शक के लिए असली और AI से बने कंटेंट में अंतर करना मुश्किल होता जा रहा है।
इस चर्चा में लंबे समय तक ‘एनडीटीवी’ से जुड़ी रहीं और वर्तमान में ‘सिंजेंटा ग्रुप’ में कम्युनिकेशंस स्पेशलिस्ट के रूप में कार्यरत तहसीन जैदी ने कहा कि पत्रकारिता केवल तकनीक पर आधारित नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि AI पत्रकारों की मदद जरूर कर सकता है, लेकिन यह मानवीय संवेदनशीलता और समझ की जगह नहीं ले सकता। उनके मुताबिक, AI का इस्तेमाल रिसर्च, ट्रांसक्रिप्शन और डेटा विश्लेषण जैसे कामों में सहायक के रूप में किया जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय और जिम्मेदारी इंसान के पास ही रहनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया संस्थानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि AI से बने कंटेंट को स्पष्ट रूप से लेबल किया जाए और उसे बिना जांच-परख के प्रकाशित न किया जाए।
कॉरपोरेट कम्युनिकेशन एक्सपर्ट और पूर्व पत्रकार अपूर्वा.एन ने इस दौरान कहा कि AI पत्रकारों के लिए एक उपयोगी टूल है, लेकिन पत्रकारिता की असली ताकत मानव निर्णय क्षमता और सहानुभूति में होती है। उन्होंने कहा कि AI कुछ सेकंड में खबर की हेडलाइन लिख सकता है, लेकिन दर्शकों का भरोसा बनाने में वर्षों लगते हैं। इसलिए मीडिया संस्थानों को तेजी से खबर देने की होड़ में विश्वसनीयता से समझौता नहीं करना चाहिए।
डिजिटल कंटेंट क्रिएटर, पॉडकास्टर और स्टोरीटेलर राशि खन्ना ने कहा कि AI के कारण कंटेंट बनाना पहले से कहीं आसान हो गया है, लेकिन इससे एक नई समस्या भी पैदा हो रही है- दोहराव वाला कंटेंट। उनके अनुसार, AI से बने अधिकांश कंटेंट एक जैसे लगते हैं, इसलिए क्रिटिकल थिंकिंग और मौलिकता पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में AI की निगरानी के लिए भी नए तकनीकी टूल विकसित किए जाएंगे, जो फेक या भ्रामक कंटेंट को रोकने में मदद करेंगे।
एमिटी यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. देबजानी रॉय चौधरी ने शिक्षा के क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि आज छात्र AI टूल्स की मदद से बहुत तेजी से जानकारी जुटा लेते हैं, लेकिन इससे उनकी सोचने और समझने की क्षमता कमजोर हो सकती है। उन्होंने कहा कि AI को केवल सहायक के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए, न कि उसे पूरी तरह ज्ञान का स्रोत मान लेना चाहिए। विश्वविद्यालयों में भी अब AI के जिम्मेदार उपयोग को लेकर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
इसी चर्चा के दौरान वक्ता टीवी अभिनेत्री व मॉडल अदा खान ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करते समय सावधानी और सही दिशा बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि एआई मूल रूप से दिए गए प्रॉम्प्ट पर काम करता है, इसलिए अगर यूजर्स गलत या भ्रामक निर्देश देगा तो एआई भी उसी आधार पर जवाब देगा। उनके मुताबिक एआई के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम और नियमन (रेगुलेशन) होना बहुत जरूरी है, क्योंकि कई बार यह संवेदनशील या खतरनाक सवालों के जवाब भी दे देता है, जो समाज के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
अदा खान ने यह भी कहा कि एआई कई बार यूजर्स की बात से तुरंत सहमति जताने की प्रवृत्ति दिखाता है, जिससे यह भ्रामक भी हो सकता है। उनके अनुसार यह स्थिति लोगों को गलत दिशा में भी ले जा सकती है, इसलिए एआई से मिलने वाली जानकारी को अंतिम सत्य मानने के बजाय सावधानी से परखना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई एक उपयोगी तकनीकी टूल जरूर है, लेकिन इसका इस्तेमाल जिम्मेदारी और समझदारी के साथ होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि आज कई क्षेत्रों में एआई के कारण नौकरियों को लेकर चिंता बढ़ रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पहले जिन कामों के लिए बड़ी टीम की जरूरत होती थी, अब वही काम कम लोगों के साथ और एआई टूल्स की मदद से किए जा रहे हैं। इसके कारण कई पेशेवरों में नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना भी देखी जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई पूरी तरह इंसानों की जगह नहीं ले सकता, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भावनात्मक समझ और मानवीय संवाद की जरूरत होती है।
अदा खान ने एक उदाहरण साझा करते हुए बताया कि कई लोग अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को लेकर भी एआई से बातचीत करने लगे हैं, लेकिन एआई भावनात्मक स्तर पर इंसानों की तरह प्रतिक्रिया नहीं दे सकता। उनके अनुसार एआई जानकारी दे सकता है या सुझाव दे सकता है, लेकिन इंसानी संवेदनशीलता और अनुभव की जगह नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि एआई को एक सहायक तकनीक के रूप में देखना चाहिए, न कि मानव क्षमता का विकल्प मानना चाहिए।
चर्चा के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि एआई को एक ऐसे टूल की तरह इस्तेमाल किया जाना चाहिए जो काम को आसान बनाए, लेकिन अंतिम नियंत्रण और रचनात्मकता हमेशा इंसानों के पास ही रहनी चाहिए। उनके मुताबिक तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए, मानव बुद्धि, अनुभव और भावनात्मक समझ का कोई विकल्प नहीं हो सकता।
वेबिनार में यह भी चर्चा हुई कि AI के बढ़ते उपयोग से नौकरियों पर क्या असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना था कि AI कुछ शुरुआती स्तर की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है, जैसे ट्रांसक्रिप्शन या डेटा एंट्री से जुड़े काम। हालांकि, पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों में मानवीय संवेदनशीलता, विश्लेषण क्षमता और सवाल पूछने की कला की जगह AI नहीं ले सकता।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भविष्य में मीडिया और AI का संबंध सहयोग का होगा, प्रतिस्पर्धा का नहीं। AI पत्रकारों के लिए एक सहायक टूल की तरह काम करेगा, लेकिन खबरों की विश्वसनीयता, तथ्य जांच और नैतिक जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के हाथ में ही रहेगी।
चर्चा के अंत में यह निष्कर्ष निकला कि AI का उपयोग पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, इसलिए इसका जिम्मेदार और पारदर्शी उपयोग ही सबसे बड़ा समाधान है। मीडिया संस्थानों को स्पष्ट नीतियां बनानी चाहिए, AI से बने कंटेंट को चिन्हित करना चाहिए और पत्रकारों को AI टूल्स के उपयोग की उचित ट्रेनिंग भी देनी चाहिए।
वेबिनार के समापन पर सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, पत्रकारिता की असली ताकत मानवीय संवेदनशीलता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी में ही निहित है। इसी संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया और सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं दी गईं।
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