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मीडिया को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में दिखने लगा ये बड़ा बदलाव...
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता (अम्मा) के निधन के बाद अब उनकी पार्टी ‘AIADMK’ के नेता उनकी छाया (shadow) से बाहर निकलने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसको लेकर अब कई नेताओं ने आगे बढ़कर मीडिया से बातचीत भी शुरू कर दी है और इंटरव्यू भी दे रहे हैं। तमिलनाडु की राजनीति में
समाचार4मीडिया ब्यूरो 9 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता (अम्मा) के निधन के बाद अब उनकी पार्टी ‘AIADMK’ के नेता उनकी छाया (shadow) से बाहर निकलने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसको लेकर अब कई नेताओं ने आगे बढ़कर मीडिया से बातचीत भी शुरू कर दी है और इंटरव्यू भी दे रहे हैं। तमिलनाडु की राजनीति में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। कई साल पहले जब एमजी रामचंद्रन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थे तो उनकी कैबिनेट के एक सहयोगी ने मंत्रियों की तुलना ‘शून्य’ (zero) से की थी जहां पर उन्हें वैल्यू तभी मिलती थी जब वो ‘नंबर वन’ अर्थात मुख्यमंत्री का अनुसरण करते थे। यही परंपरा उस समय चरम पर पहुंच गई थी जब जयललिता ‘AIADMK’ की जनरल सेक्रेटरी और राज्य की मुख्यमंत्री बन गईं। उस दौरान उनसे उम्र और अनुभव में काफी वरिष्ठ नेता भी जयललिता के सामने काफी पीछे हो गए थे। यही नहीं, जयललिता की कैबिनेट में शामिल मंत्री और पार्टी की अग्रिम पंक्ति (frontline) के नेता भी हमेशा उनके सामने लोप्रोफाइल ही रहे। ये नेता हमेशा मीडिया से दूर रहते थे और सभी सफलताओं के लिए जयललिता के ही गुणगान करते थे। लेकिन अब जयललिता के निधन के बाद पार्टी में हो रहा बदलाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। कई मंत्री और पार्टी की दूसरी पंक्ति (second-line) के नेताओं ने भी मीडिया से बातचीत शुरू कर दी है और विभिन्न इंटरव्यू के द्वारा वे अपनी राजनीतिक छवि चमकाने में लगे हुए हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या इस तरह के बर्ताव से कुछ बदलाव आएगा। क्या ये मंत्री और नेता इस तरह से अपनी छवि चमका पाएंगे अथवा वे चाहते हैं कि जयललिता की सहयोगी और विश्वासपात्र शशिकला को पार्टी और सरकार का नेतृत्व करना चाहिए और वे इसी की पैरोकारी कर रहे हैं। पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक ज्ञानी शंकरन (Gnani Sankaran) का कहना है कि यह वास्तव में अच्छे संकेत हैं कि मंत्रियों ने अब अपने विचारों को व्यक्त करना शुरू कर दिया है, चाहे उसके पीछे कारण जो भी हो। इन मंत्रियों ने अब तक खुद को जयललिता की शैडो (shadow) के पीछे छिपा रखा था। यह उनके लिए सही भी था, क्योंकि उन्हें किसी के प्रति जवाबदेह होने की जरूरत नहीं थी। ‘Dravidar Viduthalai Kazhagam’ (DVK) के जनरल सेक्रेटरी विदुथलाई राजेंद्रन का कहना है, ‘जयललिता के निधन के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नया बदलाव देखने को मिल रहा है। अब मंत्री मीडिया से भी बात कर रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए काफी अच्छी बात है और इस कदम का स्वागत किया जाना चाहिए।’ मद्रास यूनिवर्सिटी में पॉलिटिक्स और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के प्रोफसर रामू मणिवन्ना (Ramu Manivannan) को AIADMK नेताओं, मंत्रियों और विधायकों के कैरेक्टर में कोई बदलाव जैसी बात दिखाई नहीं दे रही है। हालांकि उन्होंने यह बात मानी कि जयललिता के आगे इनका व्यक्तित्व दब सा गया था। प्रोफेसर रामू ने कहा, ‘वे अब ऐसे नेता के पक्ष में बोल रहे हैं जो प्रभावशाली तो है लेकिन वह जनप्रिय नेता नहीं है।’ समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
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