सीनियर मीडिया ग्रुप का एस1 न्यूज चैनल भी हुआ बंद

सीनियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ग्रुप का न्यूज चैनल एस1 न्यूज चैनल का प्रसारण मार्च महीने से बंद है। अब प्रबंधन ने इस चैनल को पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया है। इस इस बाबत प्रबंधन से बात करने पर उच्च प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि चैनल का प्रसारण पिछले तीन महीने से बंद है। मैनेजमेंट ने चैनल को बंद करने का फैसला ग्रुप की आर्थिक स्थिती सही नहीं होने

Last Modified:
Tuesday, 19 June, 2012
s4m


सीनियर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ग्रुप का न्यूज चैनल एस1 न्यूज चैनल का प्रसारण मार्च महीने से बंद है। अब प्रबंधन ने इस चैनल को पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया है। इस इस बाबत प्रबंधन से बात करने पर उच्च प्रबंधन अधिकारी ने बताया कि चैनल का प्रसारण पिछले तीन महीने से बंद है। मैनेजमेंट ने चैनल को बंद करने का फैसला ग्रुप की आर्थिक स्थिती सही नहीं होने पर लिया है। प्रबंधन का कहना है कि ग्रुप की आर्थिक स्थिती सही होने पर चैनल का प्रसारण दोबारा से शुरू करने की कोशिश की जायेगी। और चैनल से जुड़े सभी कर्मचारियों का भुगतान प्रबंधन की ओर से जल्द ही किया जायेगा। दिल्ली और एनसीआर बेस्ड इस चैनल की शुरुआत छह अगस्त 2005 में की गई थी। इस ग्रुप के चेयरमैन विजय दीक्षित हैं। ग्रुप की हिंदी पाक्षिक मैगजीन सीनियर इंडिया भी प्रकाशित होती थी। ग्रुप ने अपना एक मीडिया स्कूल भी सितंबर 2008 में शुरू किया था। यह ग्रुप मीडिया के अलावा इंफ्रास्टक्चर डवलपमेट, रियल एस्टेट, होस्पिटेलिटी इंडस्ट्री, इंटरटेनमेंट एंड केपटिव पावर प्लांट में भी अपनी दखल रखता है। समाचार4मीडिया देश के प्रतिष्ठित और नं.1 मीडियापोर्टल exchange4media.com की हिंदी वेबसाइट है। समाचार4मीडिया.कॉम में हम आपकी राय और सुझावों की कद्र करते हैं। आप अपनी राय, सुझाव और ख़बरें हमें mail2s4m@gmail.com पर भेज सकते हैं या 01204007700 पर संपर्क कर सकते हैं। आप हमें हमारे फेसबुक पेज पर भी फॉलो कर सकते हैं।
TAGS media
न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

AI के दौर में भी Animation क्यों बना हुआ है करोड़ों का करियर मार्केट?

वर्ष 2026 में जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के डर से नौकरियों की चिंता में डूबी है, भारत का एक सेक्टर उलटी दिशा में चल रहा है।

Vikas Saxena by
Published - Wednesday, 10 June, 2026
Last Modified:
Wednesday, 10 June, 2026
AI48589

वर्ष 2026 में जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के डर से नौकरियों की चिंता में डूबी है, भारत का एक सेक्टर उलटी दिशा में चल रहा है। एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और Extended Reality, यानी AVGC-XR, का यह उद्योग न सिर्फ टिका हुआ है, बल्कि रफ्तार से दौड़ रहा है।

फरवरी 2026 में बेंगलुरु में आयोजित GAFX-2026 के उद्घाटन पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जो आंकड़ा पेश किया, वह चौंकाने वाला था, GAFX सेक्टर अकेले अगले पांच साल में 20 लाख नौकरियां पैदा कर सकता है। यह सिर्फ एक राज्य की बात थी। राष्ट्रीय स्तर पर तस्वीर और बड़ी है।

कितना बड़ा है मार्केट?

आज भारत का AVGC-XR सेक्टर 2.5 से 3 अरब डॉलर (करीब 25,000 करोड़ रुपये) का है। 2030 तक इसके 26 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, यानी करीब नौ गुना की छलांग। अगर सिर्फ एनिमेशन और VFX की बात करें, तो CII-GT की रिपोर्ट के अनुसार यह सेगमेंट 2026 तक 2.2 अरब डॉलर तक पहुंचने की राह पर है।

एनिमेशन मार्केट पर लंबी नजर डालें तो, भारत का एनिमेशन मार्केट 2025 में 2.4 अरब डॉलर था और 2034 तक 13.95 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, यानी 21.6% सालाना वृद्धि दर (CAGR)।

गेमिंग अकेला एक उदाहरण है: भारतीय गेमिंग मार्केट 2025 में 5.91 अरब डॉलर था और 2034 तक 16.72 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, यानी 14.6% CAGR।

इससे भी बड़ी बात, इस पूरे सेक्टर में अभी सिर्फ 2.6 लाख प्रोफेशनल काम कर रहे हैं, जबकि मांग इससे कहीं ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत फिलहाल वैश्विक AVGC-XR मार्केट में सिर्फ 0.5% हिस्सेदारी रखता है, यानी संभावना अपार है।

नौकरियों का विस्फोट: संख्याएं क्या कहती हैं?

केंद्र सरकार के AVGC Promotion Task Force की रिपोर्ट के अनुसार, यह सेक्टर आने वाले दस साल में 20 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करेगा। ORF (Observer Research Foundation) की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट इस अनुमान को और ऊपर रखती है, 2032 तक 23 लाख नौकरियां। स्क्लि इंडिया मिशन का लक्ष्य अगले दस वर्षों में इस सेक्टर के लिए 20 लाख प्रोफेशनल तैयार करना है।

हर साल, अकेले एनिमेशन और VFX सेक्टर में 1.6 लाख नए पद बनने का अनुमान है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ रिटायरमेंट और करियर बदलाव की वजह से हर साल करीब 6,700 एनिमेशन पद रिक्त होते हैं, और यह मार्केट विस्तार से अलग है।

मार्च 2026 में तमिलनाडु ने अपनी AVGC-XR Policy 2026 जारी की, जिसका लक्ष्य 2030 तक 200 नए स्टार्टअप खड़े करना और राष्ट्रीय AVGC-XR मार्केट का 20% हिस्सा, यानी करीब 2 लाख नौकरियां, हासिल करना है। जनवरी 2026 में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की कि राजधानी में AVGC-XR का पहला National Centre of Excellence (NCoE) का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किया जाएगा।

AI का खतरा, असलियत क्या है?

यहां सबसे बड़ा सवाल है जो हर छात्र और प्रोफेशनल पूछता है: क्या AI मेरी नौकरी ले लेगा?

उत्तर जटिल है, हां और नहीं, दोनों।

एनिमेशन Guild (IATSE Local 839) द्वारा कराए गए CVL Economics अध्ययन के अनुसार, वैश्विक स्तर पर फिल्म, टेलीविजन और एनिमेशन सेक्टर में करीब 1,18,500 नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं, यानी खत्म होंगी, समेकित होंगी, या बदल जाएंगी। यही आंकड़ा बताता है कि 21.4% Film, TV और एनिमेशन नौकरियों पर AI का सीधा असर पड़ेगा।

कौन-सी नौकरियां सबसे ज्यादा खतरे में हैं?

2D एनिमेशन में In-betweening, Rotoscoping, Background Generation और Lip-sync जैसे काम AI तेजी से करने लगा है। Luminate Intelligence की एनिमेशन + AI Special Report (2025) में Concept Artists, Storyboard Artists, VFX Artists और Game Developers को सबसे अधिक प्रभावित होने वाली भूमिकाओं में गिना गया है।

लेकिन भारत की कहानी अलग है।

भारतीय एनिमेशन स्टूडियो AI टूल्स को वर्कफोर्स घटाने के लिए नहीं, बल्कि प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, स्टूडियो अधिक काम ले रहे हैं, कम लोग नहीं रख रहे। नतीजा: नेट हायरिंग बढ़ रही है।

कौन-सी नई नौकरियां बन रही हैं?

AI के आने से कुछ नई भूमिकाएं तेजी से उभर रही हैं, AI एनिमेशन Tool Specialist, Technical Director (TD), VFX Supervisor और Generative AI Pipeline Engineer। जो प्रोफेशनल Adobe Firefly, Runway ML, Houdini और Unreal Engine जैसे AI टूल्स के साथ काम कर सकते हैं, उनकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

Generative AI का एनिमेशन सेगमेंट वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है, विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार यह मार्केट 2023 में लगभग 1.3 से 1.8 अरब डॉलर का था और 2033 तक 36–40% CAGR की दर से बढ़ने का अनुमान है। यह वृद्धि नौकरियां हटाने की नहीं, नए अवसर बनाने की कहानी है।

सैलरी: कितना मिलता है?

2026 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

3D एनिमेशन में Fresher को ₹2.5–4.5 LPA मिलते हैं, जबकि अनुभवी 3D Animator ₹10 LPA से अधिक कमा सकते हैं। VFX Supervisor जैसे पदों पर ₹25 LPA से ऊपर के पैकेज सामान्य होते जा रहे हैं।

किन स्किल्स की सबसे अधिक मांग है?

2026 में इंडस्ट्री इन्हें तलाश रही है: Unreal Engine, Houdini, Maya, Nuke, Python Scripting, AI-assisted एनिमेशन workflows, Real-time Rendering, और AR/VR Development। सिर्फ डिग्री नहीं, पोर्टफोलियो ही असली पहचान है।

छोटे शहरों का नया करियर

"एनिमेशन के लिए मुंबई या बेंगलुरु ही जाना होगा", यह धारणा तेजी से टूट रही है।

5G नेटवर्क के विस्तार और सस्ते स्मार्टफोन की बदौलत टियर-2 और टियर-3 शहरों में गेमिंग और Digital Content तेजी से फैल रहे हैं। AIGDF (All India Game Developers Forum) के सर्वे के अनुसार, अहमदाबाद, कोच्चि, सूरत और राजकोट जैसे शहर नए Game Development Hub बन रहे हैं। महाराष्ट्र की AVGC-XR Policy 2025 में Nashik, Kolhapur और Nagpur जैसे टियर-2 शहरों में भी AVGC-XR Park बनाने की योजना है। मुरादाबाद, कानपुर, इंदौर, या जयपुर जैसे शहरों में बैठकर Freelancing, Work From Home और Remote Project लेना अब व्यावहारिक हकीकत है।

Freelancing प्लेटफॉर्म्स पर भारतीय Animators और VFX Artists की मांग इसलिए बढ़ रही है क्योंकि भारत वैश्विक स्तर पर 40 से 60% सस्ती एनिमेशन और VFX सेवाएं देता है, और यह आंकड़ा सरकार की NewsOnAir रिपोर्ट (नवंबर 2025) में भी दर्ज है।

सरकार क्या कर रही है?

सरकारी तंत्र इस बार पीछे नहीं है:

केंद्र स्तर पर: AVGC Promotion Task Force (अप्रैल 2022) ने रोडमैप तैयार किया। 2024 में मुंबई में Indian Institute of Creative Technologies (IICT) को National Centre of Excellence के रूप में स्थापित किया गया, Google, YouTube, Meta, Adobe, Microsoft, NVIDIA और Netflix ने इसके पाठ्यक्रम में साझेदारी की है। Union Budget 2026-27 में ₹250 करोड़ की राशि से 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में AVGC Content Creator Labs खोलने की घोषणा की गई।

राज्य स्तर पर: कर्नाटक की AVGC-XR Policy 2024–2029 पहले से लागू है। महाराष्ट्र ने सितंबर 2025 में ₹3,268 करोड़ के वित्तीय समर्थन के साथ AVGC-XR Policy 2025 पारित की, लक्ष्य 25 साल में ₹50,000 करोड़ का निवेश और 2 लाख नौकरियां। तमिलनाडु की AVGC-XR Policy 2026 में ₹50 करोड़ की लागत से ELCOT Viyan AVGC-XR Centre of Excellence का ऐलान हुआ। दिल्ली में जनवरी 2026 में NCoE का क्षेत्रीय केंद्र बनाने की घोषणा हुई।

स्किल गैप: सबसे बड़ी चुनौती

यहां एक कड़वी सच्चाई है। भारत वैश्विक AVGC-XR मार्केट में महज 0.5% हिस्सेदारी रखता है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है प्रशिक्षित प्रतिभा की कमी।

IICT मुंबई जैसे संस्थान इस गैप को भरने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अधिकांश कॉलेज वही पाठ्यक्रम पढ़ाते हैं जो इंडस्ट्री की जरूरतों से पिछड़ा है। Unreal Engine, AI-powered workflows और Real-time Rendering, जिनकी इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा जरूरत है, वे अभी भी ज्यादातर कॉलेजों में नदारद हैं।

हॉलीवुड से Netflix तक, भारतीय Animators की बढ़ती मांग

भारतीय Animators की वैश्विक मांग इसलिए है क्योंकि यहां तीन चीजें एक साथ मिलती हैं, कुशल कार्यबल, कम लागत, और बड़े प्रोजेक्ट्स संभालने की क्षमता। Brahmastra जैसी फिल्म में 4,500 से अधिक VFX Shots थे और बजट का 25–30% हिस्सा VFX पर खर्च हुआ। FICCI-EY रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय VFX स्टूडियो का करीब 70% राजस्व अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों से आता है।

एनिमेशन, भारत का अगला IT सेक्टर?

IT इंडस्ट्री ने 1990 के दशक में जो किया, लाखों युवाओं को घर बैठे वैश्विक मार्केट से जोड़ा, वही AVGC-XR सेक्टर 2020 के दशक में कर सकता है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार माध्यम Code नहीं, Creativity है।

आंकड़े साफ बोलते हैं कि मार्केट बढ़ रहा है, सरकार सक्रिय है, वैश्विक मांग है, और नौकरियां आ रही हैं। AI खतरा नहीं बल्कि नई स्किल की मांग है। टियर-2 शहरों के युवाओं के लिए यह फील्ड अब दूर नहीं।

बस एक काम बाकी है, स्किल गैप भरना। जो युवा आज Unreal Engine, Houdini और AI एनिमेशन Tools सीख रहे हैं, वही कल की इस इंडस्ट्री की रीढ़ बनेंगे।

 

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

जल्द ‘Times Now Navbharat’ की स्क्रीन पर नजर आएंगी रुबिका लियाकत

विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, वह यहां चैनल के फ्लैगशिप शो ‘न्यूज की पाठशाला’ (News Ki Pathshala) को होस्ट करेंगी। इसके अलावा भी उन्हें यहां प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 08 June, 2026
Last Modified:
Monday, 08 June, 2026
Rubika Liyaquat.....

‘नेटवर्क18’ (Network18) से इस्तीफा देने के बाद लोकप्रिय न्यूज एंकर रुबिका लियाकत जल्द ही ‘टाइम्स नेटवर्क’ (Times Network) के साथ नई पारी की शुरुआत करने जा रही हैं। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, वह यहां चैनल के फ्लैगशिप शो ‘न्यूज की पाठशाला’ (News Ki Pathshala) को होस्ट करेंगी। इसके अलावा भी उन्हें यहां प्रमुख जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। हालांकि, चैनल की ओर से अभी तक इस बारे में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

वहीं, न्यूज की पाठशाला को लेकर चैनल की ओर से हाल ही में एक प्रोमो भी जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है, ‘खबरें तो सब बताएंगे, लेकिन उन्हें समझाएगा कौन? इसीलिए... मैडम आ रही हैं! क्लास मिस मत कीजिएगा, यहां आपकी अटेंडेंस जरूरी है! ‘न्यूज की पाठशाला’ सिर्फ TIMES NOW नवभारत पर।’

प्रोमो में ‘मैडम’ और ‘न्यूज की पाठशाला’ का जिक्र सामने आते ही मीडिया गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है। इस प्रोमो को रुबिका लियाकत की संभावित एंट्री से जोड़कर देखा जा रहा है।

चैनल की ओर से न तो ‘मैडम’ की पहचान का खुलासा किया गया है और न ही शो के नए होस्ट को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने आई है। ऐसे में फिलहाल दर्शकों और मीडिया जगत की निगाहें टाइम्स नाउ नवभारत की अगली घोषणा पर टिकी हैं।

बता दें कि रुबिका लियाकत ने हाल ही में ‘नेटवर्क18’ के हिंदी न्यूज चैनल ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18 India) में कंसल्टिंग एडिटर के पद से इस्तीफा दे दिया था। इस चैनल पर उनका शाम पांच बजे प्रसारित होने वाला शो ‘गूंज’ दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा।

मीडिया इंडस्ट्री में रुबिका लियाकत को एक मजबूत और प्रभावशाली महिला एंकर के तौर पर देखा जाता है। अपनी तेज-तर्रार एंकरिंग, धारदार सवालों और बेबाक प्रस्तुति शैली की वजह से उन्होंने हिंदी टीवी पत्रकारिता में अलग पहचान बनाई है। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़, तथ्यों के साथ तैयारी और स्पष्ट सवाल पूछने की शैली उन्हें अन्य एंकर्स से अलग बनाती है। यही कारण है कि टीवी के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी उनकी बड़ी फैन फॉलोइंग है।

रुबिका लियाकत का पत्रकारिता सफर भी काफी शानदार रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2007 में ‘लाइव इंडिया’ चैनल से की थी। इसके बाद वह ‘न्यूज24’ से जुड़ीं और फिर ‘जी न्यूज’ में रिपोर्टिंग और एंकरिंग के जरिए खास पहचान बनाई। ‘जी न्यूज’ के चर्चित शो ‘ताल ठोक के’ ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया।

इसके बाद उन्होंने ‘एबीपी न्यूज’ में प्राइम टाइम शो ‘मास्टर स्ट्रोक’ के जरिए दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई। साल 2022 में वह ‘भारत24’ से वाइस प्रेसिडेंट और एंकर के तौर पर जुड़ीं। जनवरी 2024 में उन्होंने ‘न्यूज18 इंडिया’ जॉइन किया था, जहां वह कंसल्टिंग एडिटर की भूमिका निभा रही थीं।

मूल रूप से राजस्थान के उदयपुर से ताल्लुक रखने वाली रुबिका हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषा पर शानदार पकड़ रखती हैं। उनकी दमदार भाषा शैली, आत्मविश्वास और बेबाक राय उन्हें हिंदी न्यूज इंडस्ट्री के प्रमुख चेहरों में शामिल करती है।

अब टाइम्स नाउ नवभारत के साथ उनकी नई पारी को हिंदी न्यूज इंडस्ट्री में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। समाचार4मीडिया की ओर से रुबिका लियाकत को उनकी आगामी पारी के लिए अग्रिम रूप से ढेरों बधाई और शुभकामनाएं।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

ZEE5 में तेजकरण सिंह बजाज की वापसी, निभाएंगे बड़ी जिम्मेदारी

बता दें कि तेजकरण सिंह पूर्व में भी ZEE5 में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

Samachar4media Bureau by
Published - Monday, 08 June, 2026
Last Modified:
Monday, 08 June, 2026
Tejkaran Singh ..

‘ओवर द टॉप’ (OTT) इंडस्ट्री से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेजकरण सिंह बजाज ने ZEE5 में वापसी कर ली है। उन्होंने यहां आठ जून को जॉइन कर लिया है। वह इस प्लेटफॉर्म में बिजनेस हेड (AI और इनोवेशन) के पद पर अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। बता दें कि तेजकरण सिंह पूर्व में भी ZEE5 में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।

गौरतलब है कि तेजकरण सिंह बजाज ने कुछ समय पूर्व ही ‘जियो स्टूडियोज’ (Jio Studios) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड (ओरिजिनल्स) के पद से इस्तीफा दिया था। इसके साथ ही Jio Studios में उनकी करीब साढ़े सात साल लंबी पारी समाप्त हो गई थी।

Jio Studios में अपने कार्यकाल के दौरान बजाज ने मल्टी-लैंग्वेज ओरिजिनल कंटेंट के विकास, प्रोडक्शन, पार्टनरशिप, लाइसेंसिंग और मोनेटाइजेशन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभाली। उनके नेतृत्व में कंपनी ने स्ट्रीमिंग क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। इस दौरान उन्होंने कंपनी के प्रीमियम ओरिजिनल कंटेंट बिजनेस की क्रिएटिव, रणनीतिक और व्यावसायिक दिशा का नेतृत्व किया।

तेजकरण सिंह बजाज को कंटेंट, ऑडियंस स्ट्रैटेजी और बिजनेस ग्रोथ के क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। वह इससे पहले ZEE5 में हेड (ओरिजिनल कंटेंट) के पद पर भी कार्य कर चुके हैं। उस दौरान उन्होंने विभिन्न भाषाओं में कंटेंट स्ट्रैटेजी तैयार करने और कई प्रमुख ओरिजिनल प्रोजेक्ट्स को आकार देने में अहम भूमिका निभाई थी।

ZEE5 में उनकी संभावित वापसी को कंपनी की स्ट्रैटेजिक तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। OTT सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच प्लेटफॉर्म कंटेंट, दर्शकों की भागीदारी और नए बिजनेस अवसरों पर फोकस बढ़ा रहे हैं। ऐसे में तेजकरण सिंह बजाज जैसे अनुभवी प्रोफेशनल की एंट्री ZEE5 के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ZEE5 और Jio Studios से पहले बजाज Maxus के साथ भी काम कर चुके हैं। इसके अलावा वह NDTV Metronation के लॉन्च से जुड़ी टीम का हिस्सा भी रहे हैं। डिजिटल कंटेंट और मीडिया बिजनेस में उनकी गिनती इंडस्ट्री के अनुभवी और प्रभावशाली प्रोफेशनल्स में होती है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

खान सर की बढ़ीं मुश्किलें, अंजना ओम कश्यप व TV Today Network ने ठोका 2 करोड़ का मुकदमा

चर्चित टीवी न्यूज एंकर अंजना ओम कश्यप और टीवी टु़डे नेटवर्क ने मशहूर शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दायर किया है।

Samachar4media Bureau by
Published - Sunday, 07 June, 2026
Last Modified:
Sunday, 07 June, 2026
AnjanaOmKashyap845

चर्चित टीवी न्यूज एंकर अंजना ओम कश्यप और टीवी टु़डे नेटवर्क (TV Today Network) ने मशहूर शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में 2 करोड़ रुपये का मानहानि (Defamation) का मुकदमा दायर किया है। यह जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मुकदमा अंजना ओम कश्यप की ओर से “स्टार टीचर्स” और ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी उनकी कवरेज को लेकर खान सर द्वारा की गई कथित मानहानिकारक टिप्पणियों से संबंधित है।

बताया जा रहा है कि यह विवाद NEET परीक्षा प्रणाली पर आयोजित एक लाइव डिबेट के दौरान शुरू हुआ। इस बहस में अंजना ओम कश्यप ने कुछ ऑनलाइन शिक्षकों की आलोचना की थी। उन्होंने कथित तौर पर ऐसे शिक्षकों को “फ्रॉड” और “एक्सप्लेनर” बताया था, जो केवल व्यूज बटोरने पर ध्यान देते हैं।

इसके बाद खान सर की ओर से की गई कुछ टिप्पणियों को अंजना ओम कश्यप और टीवी टु़डे नेटवर्क ने मानहानिकारक बताया है। इसी को आधार बनाते हुए दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि कथित मानहानिकारक सामग्री को सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से हटाने का निर्देश दिया जाए।

इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट की अवकाशकालीन पीठ में जस्टिस नीना बंसल कृष्णा के समक्ष होने वाली है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

आशीष सहगल: भारतीय मीडिया में तीन दशक के शानदार नेतृत्व का जश्न

भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में कुछ ही ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी छाप उतनी गहराई से छोड़ी है, जितनी आशीष सहगल ने छोड़ी है।

Samachar4media Bureau by
Published - Saturday, 06 June, 2026
Last Modified:
Saturday, 06 June, 2026
AshishSahgal8754

भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री में कुछ ही ऐसे नाम हैं जिन्होंने अपनी छाप उतनी गहराई से छोड़ी है, जितनी आशीष सहगल ने छोड़ी है। तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने खुद को सिर्फ एक रेवेन्यू लीडर के रूप में नहीं, बल्कि मीडिया कारोबार के सबसे प्रभावशाली ग्रोथ आर्किटेक्ट्स में से एक के रूप में स्थापित किया है।

टेलीविजन इंडस्ट्री के सबसे प्रतिस्पर्धी दौर में उसके व्यावसायिक विकास को नई दिशा देने से लेकर देश की बड़ी मीडिया कंपनियों को बदलाव के दौर में आगे बढ़ाने तक, आशीष सहगल का सफर आधुनिक भारतीय ब्रॉडकास्टिंग की कहानी को भी बयां करता है।

वर्तमान में आशीष सहगल 'टाइम्स टीवी नेटवर्क' (Times TV Network) के सीईओ और Times Media & Entertainment के चीफ ग्रोथ ऑफिसर हैं। इस भूमिका में वह देश के सबसे प्रभावशाली मीडिया समूहों में से एक के विकास, नवाचार और रणनीतिक विस्तार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में कंपनी की ग्रोथ को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का दायित्व उनके कंधों पर है।

इस पद पर आने से पहले सहगल ने करीब दो दशक तक Zee Entertainment में काम किया, जहां उन्होंने खुद को इंडस्ट्री के सबसे सम्मानित बिजनेस लीडर्स में शामिल किया। इस दौरान उन्होंने ब्रॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंपनी के कई महत्वपूर्ण रेवेन्यू और ग्रोथ विभागों का नेतृत्व किया। बिखरते और लगातार बदलते मीडिया बाजार में उन्होंने कारोबार को बड़े स्तर पर विस्तार देने में अहम भूमिका निभाई।

आशीष सहगल की सबसे बड़ी खासियत हमेशा बदलाव को पहले से भांप लेने की रही है। चाहे निचे टेलीविजन चैनलों का बढ़ता दौर हो, डिजिटल वीडियो का उभार, इंटीग्रेटेड एडवरटाइजिंग सॉल्यूशंस का विकास या फिर दर्शकों की भागीदारी की बढ़ती अहमियत- उन्होंने हर बदलाव को समय रहते समझा और उसके अनुसार रणनीति बनाई। उनकी व्यावसायिक समझ और उपभोक्ताओं के व्यवहार की गहरी जानकारी ने उन्हें हमेशा दूसरों से अलग बनाया।

इंडस्ट्री के सहयोगी और साथी उन्हें ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जो बड़े विजन को मजबूत क्रियान्वयन के साथ जोड़ते हैं। उनकी नेतृत्व शैली की पहचान हमेशा से बेहतरीन टीमों का निर्माण, नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना और ऐसी कार्य संस्कृति विकसित करना रही है, जो ग्रोथ, जवाबदेही और नवाचार पर आधारित हो।

Times Network में भी आशीष सहगल ने एक नई ग्रोथ स्टोरी लिखनी शुरू कर दी है। उनका फोकस बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन, दर्शकों से मजबूत जुड़ाव और भविष्य के लिए तैयार मीडिया रणनीतियों पर है। उनका मानना है कि मीडिया का भविष्य उन्हीं संगठनों का होगा जो कंटेंट, टेक्नोलॉजी, डिस्ट्रीब्यूशन और मोनेटाइजेशन को सहज रूप से एक साथ जोड़ पाएंगे।

अपने जीवन का एक और वर्ष पूरा करने के साथ ही आशीष सहगल सिर्फ अपनी उपलब्धियों का जश्न नहीं मना रहे हैं, बल्कि पूरी मीडिया इंडस्ट्री ऐसे नेता का सम्मान कर रही है, जिसका प्रभाव बैलेंस शीट और रेटिंग्स से कहीं आगे तक जाता है। उनकी असली विरासत लगातार नए तरीके से ग्रोथ को परिभाषित करने, टीमों को प्रेरित करने और भारतीय मीडिया के भविष्य को आकार देने की उनकी क्षमता में छिपी है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

एंकर शिवांगी ठाकुर ने ‘जी न्यूज’ से दिया इस्तीफा

जानी मानी टीवी न्यूज एंकर शिवांगी ठाकुर (Shivangi Thakur) ने ‘जी न्यूज’ (Zee News) से इस्तीफा दे दिया है। वह चैनल में असिसटेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थीं और जल्द ही अपना कार्यकाल पूरा करेंगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
shivangi

जानी मानी टीवी न्यूज एंकर शिवांगी ठाकुर (Shivangi Thakur) ने ‘जी न्यूज’ (Zee News) से इस्तीफा दे दिया है। वह चैनल में असिसटेंट एडिटर के पद पर कार्यरत थीं। सूत्रों के अनुसार, वह जल्द ही चैनल में अपना कार्यकाल समाप्त करेंगी। शिवांगी ठाकुर ‘जी न्यूज’ (Zee News) के प्रमुख संपादकीय चेहरों में शामिल रही हैं। उन्होंने न्यूज बुलेटिन और प्राइम टाइम प्रोग्रामिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अपनी प्रभावशाली एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पहचान बनाने वाली शिवांगी पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। ‘जी न्यूज’ (Zee News) से पहले वह ‘आजतक’ (Aaj Tak), ‘इंडिया टुडे’ (India Today), ‘टीवी9’ (TV9) और ‘न्यूज18 इंडिया’ (News18 India) जैसे प्रमुख हिंदी न्यूज नेटवर्क्स के साथ काम कर चुकी हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने राजनीति, अपराध, प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय महत्व की कई बड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग की है।

शिवांगी ठाकुर संघर्ष क्षेत्रों से की गई अपनी रिपोर्टिंग के लिए भी जानी जाती हैं। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और हमास-इजराइल संघर्ष सहित तीन बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों की कवरेज की है। चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों से उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग को व्यापक सराहना मिली है।

अपने पूरे करियर में उन्होंने स्टूडियो एंकरिंग और फील्ड रिपोर्टिंग के बीच संतुलन बनाए रखते हुए कई महत्वपूर्ण घटनाओं को कवर किया। फिलहाल शिवांगी ठाकुर के अगले कदम को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

'प्रसार भारती’ और ‘महाराष्ट्र सरकार’ का बड़ा प्रोजेक्ट: मुंबई में बनेगा मीडिया हब

‘महाराष्ट्र सरकार’ और ‘प्रसार भारती’ मुंबई के मलाड इलाके में करीब 150 एकड़ में एकीकृत मीडिया हब विकसित करेंगे। इसमें स्टूडियो, प्रशिक्षण संस्थान, पर्यटन और तकनीकी सुविधाएं शामिल होंगी।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
prasarbharti

मुंबई को वैश्विक मीडिया और एंटरटेनमेंट केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ‘महाराष्ट्र सरकार’ और ‘प्रसार भारती’ ने मलाड में करीब 150 एकड़ क्षेत्र में एक एकीकृत फिल्म और टेलीविज़न मीडिया हब विकसित करने की योजना का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने इस परियोजना के लिए राज्य सरकार और ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के बीच एक विशेष उद्देश्य वाहन (SPV) के गठन को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना ‘दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी’ (Dadasaheb Phalke Chitranagari) यानी फिल्म सिटी के पास विकसित की जाएगी।

प्रस्तावित हब को केवल फिल्म निर्माण केंद्र तक सीमित नहीं रखा जाएगा। यहां अत्याधुनिक स्टूडियो, साउंड स्टेज, होटल और हॉस्पिटैलिटी सुविधाएं, पर्यटन परियोजनाएं, IT और ITES सुविधाएं तथा फिल्म, टेलीविज़न और संगीत शिक्षा से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान स्थापित करने की योजना है।

इस परियोजना की नींव अप्रैल 2025 में ‘महाराष्ट्र सरकार’, ‘महाराष्ट्र फिल्म, स्टेज एंड कल्चरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन’ (MFSCDC) और ‘प्रसार भारती’ (Prasar Bharati) के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) से पड़ी थी।

बुधवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार (Ashish Shelar), ‘प्रसार भारती’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौरव द्विवेदी (Gaurav Dwivedi) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

सरकार ने परियोजना के लिए प्री-फिजिबिलिटी स्टडी, इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को जून के अंत तक परियोजना का विस्तृत खाका पेश करने को भी कहा गया है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

खुली अदालत में सुनाए गए आदेश की खबर छापना अवमानना नहीं: पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी जज ने खुली अदालत में कोई आदेश सुना दिया है, तो उसकी खबर प्रकाशित करना अदालत की अवमानना नहीं माना जा सकता

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
PunjabHaryanaCourt541

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि अगर किसी जज ने खुली अदालत में कोई आदेश सुना दिया है, तो उसकी खबर प्रकाशित करना अदालत की अवमानना नहीं माना जा सकता, भले ही उस आदेश पर अभी जज के हस्ताक्षर न हुए हों।

जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह और जस्टिस अमरजोत भट्टी की खंडपीठ ने The Tribune, Hindustan Times और Times of India के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को खत्म करते हुए यह फैसला सुनाया।

अदालत ने कहा कि अगर किसी न्यायिक कार्यवाही की खबर सही और निष्पक्ष तरीके से प्रकाशित की गई है, तो उसे अवमानना नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि जैसे ही कोई फैसला अदालत में सुनाया जाता है, वह प्रभावी हो जाता है।`मामला 9 अप्रैल का है, जब जस्टिस त्रिभुवन दहिया ने पंजाब पुलिस के कुछ पूर्व अधिकारियों से जुड़े एक केस की सुनवाई को फरीदकोट से चंडीगढ़ स्थानांतरित करने का आदेश खुली अदालत में सुनाया था।

अगले दिन The Tribune, Hindustan Times और Times of India ने इस फैसले से जुड़ी खबरें प्रकाशित कर दीं। हालांकि उस समय तक आदेश पर जज के हस्ताक्षर नहीं हुए थे।

इसके बाद 11 अप्रैल को जस्टिस दहिया ने कहा था कि इस तरह की रिपोर्टिंग अदालत की प्रक्रिया में दखल देने जैसी लगती है। इसी आधार पर The Tribune की एडिटर-इन-चीफ ज्योति मल्होत्रा समेत अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की गई थी।

बाद में इस मामले की सुनवाई करते हुए डिवीजन बेंच ने पाया कि फैसला वास्तव में खुली अदालत में सुनाया गया था और अखबारों ने उसकी सही रिपोर्टिंग की थी। अदालत ने कहा कि प्रकाशित खबरों में कोई गलत या भ्रामक जानकारी नहीं थी।

इसी आधार पर कोर्ट ने अवमानना की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।

ौवैसे इस फैसले को मीडिया की न्यायिक रिपोर्टिंग और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

AI कितना भी आगे बढ़ जाए, इंसानी समझ की जगह नहीं ले सकता: SPIEF 2026 में बोलीं कली पुरी

‘The Limits of AI in the Media’ विषय पर आयोजित सत्र में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी समेत कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।

Samachar4media Bureau by
Published - Friday, 05 June, 2026
Last Modified:
Friday, 05 June, 2026
KalliPuri96523

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जिस तेजी से मीडिया और पत्रकारिता समेत कई क्षेत्रों को बदल रहा है, उसी के साथ एक बड़ा सवाल भी सामने आ रहा है- AI के फायदों का इस्तेमाल कैसे किया जाए, बिना इंसानी रचनात्मकता और समझ को कमजोर किए? इसी मुद्दे पर रूस में आयोजित सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम (SPIEF) 2026 में विस्तार से चर्चा हुई।

‘The Limits of AI in the Media’ विषय पर आयोजित सत्र में इंडिया टुडे ग्रुप की वाइस चेयरपर्सन और एग्जिक्यूटिव एडिटर-इन-चीफ कली पुरी समेत कई विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि AI और इंसानी हस्तक्षेप के बीच संतुलन बनाना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।

कली पुरी ने कहा कि पत्रकारिता में नैतिकता, फैक्ट-चेकिंग और इंसानी निर्णय क्षमता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, न्यूजरूम और एल्गोरिदम के बीच सबसे बड़ा अंतर यही है कि न्यूजरूम में खबरों का संतुलन और मॉडरेशन किया जाता है, जबकि एल्गोरिदम ऐसा नहीं करते।

उन्होंने कहा, “न्यूजरूम मॉडरेशन और कैलिब्रेशन करते हैं, लेकिन एल्गोरिदम ऐसा नहीं करते, क्योंकि वे मुख्य रूप से मुनाफे और एंगेजमेंट पर आधारित होते हैं।”

‘Handcrafted by Editors’ पहल की शुरुआत

कली पुरी ने बताया कि मौलिक रिपोर्टिंग और इंसानी सोच को बचाए रखने के लिए इंडिया टुडे ग्रुप ने Handcrafted by Editors’ नाम से एक विशेष पहल शुरू की है।

उन्होंने कहा, “हमने एडिटर्स और रिपोर्टर्स द्वारा तैयार की गई खबरों के लिए एक अलग सेक्शन बनाया है, जहां इस बात पर फोकस किया जाता है कि पत्रकार ने क्या देखा, क्या सुना और क्या अनुभव किया। यह सामान्य रिपोर्टिंग से अलग है।”

उनके मुताबिक, इस तरह की रिपोर्टिंग खबरों को अधिक गंभीरता देती है और पाठकों के साथ बेहतर जुड़ाव भी बनाती है।

क्या है ‘AI Sandwich’ मॉडल?

कली पुरी ने कहा कि भविष्य में AI और इंसानी रचनात्मकता साथ-साथ काम करेंगे। इसी सोच के तहत इंडिया टुडे ग्रुप के न्यूजरूम में ‘AI Sandwich’ मॉडल अपनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मॉडल में संपादकीय प्रक्रिया की शुरुआत इंसान करता है, बीच में AI का इस्तेमाल दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाता है और आखिर में अंतिम फैसला फिर इंसान ही लेता है।

उन्होंने कहा, “हमारे न्यूजरूम में AI Sandwich मॉडल काम करता है। शुरुआत इंसान से होती है, बीच में AI काम को तेज और बेहतर बनाता है, लेकिन अंत में अंतिम मंजूरी इंसान ही देता है। अंतिम निर्णय हमेशा इंसानी हाथों में रहता है।”

कली पुरी ने यह भी कहा कि भारत केवल AI का बड़ा उपभोक्ता ही नहीं है, बल्कि बड़ी टेक कंपनियों द्वारा विकसित AI मॉडल्स के आधार पर नए और उपयोगी समाधान विकसित करने की भी मजबूत स्थिति में है।

‘AI के पास अंतरात्मा नहीं होती’

रूस के विदेश मंत्रालय के प्रेस विभाग की निदेशक मारिया जाखारोवा ने भी कली पुरी की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि AI को इंसानों की मदद करने वाले उपकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि इंसानों की जगह लेने वाले विकल्प के रूप में। AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता के खतरों की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि AI के पास अंतरात्मा नहीं होती।

उन्होंने कहा, “AI के पास अंतरात्मा नहीं है। अगर इंसानी विकास में अंतरात्मा और मानवीय मूल्यों का महत्व कम हो गया, तो इसके बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं।”

डेटा सुरक्षा भी बड़ी चुनौती

इस सत्र में चाइना मीडिया ग्रुप के यूरेशियन ब्यूरो के निदेशक वांग बिन ने AI से जुड़ी डेटा सुरक्षा चिंताओं पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कई AI टूल्स को काम करने के लिए सिस्टम तक व्यापक पहुंच की जरूरत होती है, जिससे साइबर सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ जाती हैं।

वांग बिन के अनुसार, “दक्षता और साइबर सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आज एक बड़ी चुनौती है।” उन्होंने बताया कि चीन मीडिया क्षेत्र के लिए विशेष AI मॉडल विकसित करने पर काम कर रहा है और राष्ट्रीय AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

इंसानी निगरानी अभी भी जरूरी

SPIEF 2026 की इस चर्चा से एक बात साफ निकलकर सामने आई कि AI अब हमारे जीवन और कामकाज का स्थायी हिस्सा बन चुका है। हालांकि, तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, पत्रकारिता और मीडिया जैसे क्षेत्रों में इंसानी समझ, नैतिकता, विवेक और अंतिम निर्णय की भूमिका अभी भी उतनी ही महत्वपूर्ण बनी हुई है।

 यहां देखें वीडियो:

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए

फीफा वर्ल्ड कप 2026: जी के प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनदाताओं की बढ़ी दिलचस्पी

फीफा वर्ल्ड कप 2026 को दुनिया के सबसे प्रभावशाली खेल आयोजनों में गिना जाता है। यह टूर्नामेंट वैश्विक स्तर पर करोड़ों दर्शकों को एक साथ जोड़ता है और ब्रांड्स को उच्च स्तर की सहभागिता प्रदान करता है।

Samachar4media Bureau by
Published - Thursday, 04 June, 2026
Last Modified:
Thursday, 04 June, 2026
fifaworldcup2026

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने में अब केवल कुछ ही दिन शेष हैं और इसी के साथ ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ज़ी) को विज्ञापनदाताओं से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित खेल आयोजनों में से एक माने जाने वाले इस टूर्नामेंट को लेकर विभिन्न श्रेणियों के ब्रांड्स ज़ी के साथ जुड़ने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।

48 टीमों, 104 मुकाबलों और 39 दिनों तक चलने वाले इस मेगा फुटबॉल टूर्नामेंट को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। इसी को देखते हुए कई प्रमुख ब्रांड्स ज़ी के लीनियर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रीमियम स्पॉन्सरशिप अवसरों को सुरक्षित करने के लिए आगे आ रहे हैं। कंपनी द्वारा हाल ही में लॉन्च किए गए समर्पित स्पोर्ट्स नेटवर्क- यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1, यूनाइट8 स्पोर्ट्स 1 एचडी, यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 और यूनाइट8 स्पोर्ट्स 2 एचडी ने भी विज्ञापनदाताओं के बीच खासा आकर्षण पैदा किया है।

कंपनी के अनुसार, यह कदम उसकी दीर्घकालिक खेल रणनीति को और मजबूत करता है तथा ब्रांड्स को व्यापक पहुंच और बेहतर दर्शक सहभागिता प्रदान करने में मदद करेगा। सिर्फ टेलीविज़न ही नहीं, बल्कि कंपनी के डिजिटल एंटरटेनमेंट प्लेटफॉर्म ज़ी5 पर भी विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। ज़ी5 की बढ़ती पहुंच और लक्षित एवं प्रभावशाली विज्ञापन समाधान उपलब्ध कराने की क्षमता इसे ब्रांड्स के लिए एक आकर्षक मंच बना रही है।

फीफा वर्ल्ड कप 2026 को दुनिया के सबसे प्रभावशाली खेल आयोजनों में गिना जाता है। यह टूर्नामेंट वैश्विक स्तर पर करोड़ों दर्शकों को एक साथ जोड़ता है और ब्रांड्स को उच्च स्तर की दृश्यता एवं सहभागिता का अवसर प्रदान करता है। टूर्नामेंट के नजदीक आते ही कंपनियां शुरुआती भागीदारी के महत्व को समझते हुए प्रीमियम विज्ञापन इन्वेंट्री और कस्टमाइज्ड पार्टनरशिप पैकेज बुक करने में जुट गई हैं।

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (एडवर्टाइजमेंट रेवेन्यू) संदीप मेहरोत्रा ने कहा कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर विज्ञापनदाताओं की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही है। उन्होंने बताया कि कई प्रमुख ब्रांड्स पहले ही उन्नत स्तर की बातचीत में हैं और टूर्नामेंट से काफी पहले महत्वपूर्ण अवसरों को सुरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि ज़ी का ओम्नीचैनल दृष्टिकोण इस बार की सबसे बड़ी ताकत है। टेलीविज़न, डिजिटल, ओटीटी, सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स और ऑन-ग्राउंड एक्टिवेशंस को एकीकृत कर ब्रांड्स को एक समग्र मंच उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे अपनी पहुंच, सहभागिता और प्रभाव को अधिकतम कर सकें।

ज़ी का मानना है कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 ब्रांड्स को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगा और कंपनी अपने बहु-प्लेटफॉर्म इकोसिस्टम के जरिए प्रभावशाली विज्ञापन समाधान उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

न्यूजलेटर पाने के लिए यहां सब्सक्राइब कीजिए