Pitch CMO Summit में मार्केटिंग दिग्गजों ने बताए ब्रैंड लॉयल्टी के नए फॉर्मूले

Pitch CMO Summit में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स ने बदलते उपभोक्ता व्यवहार के बीच मजबूत ब्रैंड बनाने की चुनौतियों पर चर्चा की।

Last Modified:
Wednesday, 10 June, 2026
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भारत के उपभोक्ताओं को समझना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन अब जिस तेजी से वे प्लेटफॉर्म, भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं और जीवन के अलग-अलग चरणों में बंट रहे हैं, उसने मार्केटर्स के लिए चुनौती को और बढ़ा दिया है। Pitch CMO Summit में आयोजित "Brand Strategies: Turning Audience Complexity Into Loyalty and Impact" नामक पैनल चर्चा में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि ऐसे माहौल में एक मजबूत ब्रैंड बनाना वास्तव में कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है

इस पैनल में IndiGo की Vice President–Marketing and Digital दीप्ति संपत, LT Foods के India और Far East के Chief Marketing Officer रितेश सूद, pladis India के Head of Marketing पवन जगनिक, Motorola India की Marketing Head इप्शिता चौधरी और Footprynt के Co-Founder प्रतीक गौर शामिल थे। चर्चा का संचालन ShareChat और Moj की National Sales Head–Agency and Government सीमा वालिया ने किया।

चर्चा की शुरुआत करते हुए सीमा वालिया ने कहा कि आज का ग्राहक पहले की तरह सीधी और सरल खरीदारी यात्रा नहीं अपनाता। चाहे मोबाइल फोन खरीदना हो या कोई खाद्य उत्पाद, ग्राहक अब कई प्लेटफॉर्म पर जाकर कीमतों की तुलना करता है, रिव्यू पढ़ता है और उसके बाद निर्णय लेता है। यह जटिलता सभी जानते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि ब्रैंड इससे कैसे निपट रहे हैं।

वालिया ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए पूछा कि क्या मार्केटर्स संस्कृति और भाषा, व्यक्तिगत और रिलेटेबल जैसे विषयों को जरूरत से ज्यादा सरल बनाकर देख रहे हैं?

इस पर इप्शिता चौधरी ने कहा कि "संस्कृति" शब्द का अक्सर गलत इस्तेमाल किया जाता है। उनके मुताबिक कोई ट्रेंड या कुछ समय के लिए लोकप्रिय हो जाने वाली चीज संस्कृति नहीं होती। संस्कृति वह होती है जिसकी जड़ें किसी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक इतिहास में गहराई तक मौजूद होती हैं।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अक्सर टियर-2 शहरों को एक जैसा मान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत का टियर-2 शहर और दक्षिण भारत का टियर-2 शहर एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। उनकी सोच, खरीदारी की क्षमता और जीवनशैली अलग है। अगर कोई चीज समान है तो वह है आकांक्षा। आज भारत एक युवा और महत्वाकांक्षी देश है। लेकिन यह आकांक्षा किस बिंदु से शुरू होती है, यह संस्कृति तय करती है। इसलिए भाषा, संवाद का तरीका और कहानी कहने की शैली भी उसी के अनुसार होनी चाहिए।

रितेश सूद ने इस विषय पर एक वास्तविकता सामने रखी। उन्होंने कहा कि अधिकांश मार्केटिंग ब्रीफ मेट्रो शहरों में बैठी टीमें तैयार करती हैं और उपभोक्ता शोध भी प्रायः दिल्ली या मुंबई में ही किया जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि हम सभी इस गलती के दोषी हैं। उन्हें याद नहीं कि आखिरी बार ग्रामीण भारत में बड़े स्तर पर उपभोक्ता शोध कब किया गया था।

उन्होंने कहा कि गोरखपुर और दिल्ली के 28 वर्षीय युवा दोनों इंस्टाग्राम इस्तेमाल कर सकते हैं और एक जैसी श्रेणी के उत्पाद खरीद सकते हैं, लेकिन उनकी प्रेरणाएं पूरी तरह अलग होती हैं। सबसे जरूरी यह है कि उन्हें ब्रैंड से जुड़ाव महसूस हो और यही वह हिस्सा है जो अक्सर छूट जाता है।

चर्चा इसके बाद भोजन और क्षेत्रीय पहचान पर पहुंची। सूद ने बताया कि उनकी कंपनी के पोर्टफोलियो में हैदराबादी, कोलकाता और लखनवी बिरयानी शामिल हैं और ये सिर्फ भोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बिरयानी केवल एक डिश नहीं बल्कि एक क्षेत्रीय पहचान और भावना है। किसी कोलकाता के व्यक्ति से हैदराबादी बिरयानी के साथ जश्न मनाने को कहना वैसा ही है जैसे किसी RCB प्रशंसक से दिल्ली की जर्सी पहनकर चीयर करने को कहना।

उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय आंकड़े यह बताते हैं कि कोई व्यक्ति कागज पर कौन है, लेकिन संस्कृति यह बताती है कि वह क्या महसूस करता है, उसे क्या पसंद है, उसे क्या प्रेरित करता है और वह किस तरह जश्न मनाता है। यही वह स्तर है जहां ब्रैंड उपभोक्ता के दिल तक पहुंचते हैं और खरीदारी के वास्तविक फैसले प्रभावित करते हैं।

विज्ञापनों में स्टीरियोटाइपिंग यानी पूर्वाग्रह आधारित प्रस्तुति के जोखिम पर बात करते हुए सूद ने कहा कि इसकी जड़ में अनुमान होता है। जब आप किसी उपभोक्ता समूह के बारे में पहले से धारणा बना लेते हैं और उसे उन पर थोप देते हैं, तब स्टीरियोटाइपिंग होती है।

उनके अनुसार इसका समाधान सिर्फ रिसर्च रिपोर्ट्स नहीं हैं, बल्कि बाजार में जाकर लोगों के बीच रहना है। उन्होंने कहा कि खाने की परंपराएं, त्योहार मनाने के तरीके और संगीत जैसी चीजें ही असली सांस्कृतिक समझ देती हैं। पंजाब का संगीत और दक्षिण भारत का संगीत बिल्कुल अलग है। यही वे जगहें हैं जहां संस्कृति की असली बारीकियां मौजूद हैं।

सूद की बात से सहमति जताते हुए पवन जगनिक ने कहा कि भारत की विविधता सिर्फ रचनात्मक चुनौती नहीं बल्कि एक बड़ा व्यावसायिक अवसर भी है। उन्होंने कहा कि भारत अनेक संस्कृतियों का देश है और यही ब्रैंड्स के लिए अवसर बनाता है। बिस्किट उद्योग जैसे 50-60 हजार करोड़ रुपये के बाजार में अगर कोई ब्रैंड केवल एक राज्य पर ध्यान देकर उपभोक्ताओं की जरूरतों और उनकी भाषा को सही समझ ले, तो भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर पहुंच और डिजिटल माध्यमों ने छोटे ब्रैंड्स के लिए भी अपनी जगह बनाने के अवसर बढ़ा दिए हैं।

प्रतीक गौर ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पॉडकास्ट "Teen Taal" में सुना था कि भले ही हम 2026 में रह रहे हों, लेकिन झारखंड का कोई जिला व्यवहारिक रूप से अभी भी 1996 या 2006 जैसी परिस्थितियों में जी रहा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा खतरा यह मान लेना है कि इंटरनेट सबके हाथ में होने का मतलब है कि सभी लोग एक जैसा कंटेंट देख रहे हैं। वास्तविकता यह है कि एक ही इलाके में रहने वाले लोगों और 150 किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों की कंटेंट खपत पूरी तरह अलग हो सकती है।

गौर के अनुसार भारत में काम करने वाला हर ब्रैंड मैनेजर दुनिया के किसी भी बाजार में काम करने की क्षमता रखता है, क्योंकि वह एक साथ कई संस्कृतियों को समझने और संभालने का काम करता है।

उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके एक पुराने क्लाइंट Emami ने उनकी एजेंसी से काम इसलिए हटा लिया था क्योंकि उनकी टीम में भले ही चार बंगाली भाषी लोग थे, लेकिन दो दिल्ली के CR Park से और दो मुंबई से थे। जबकि क्लाइंट को कोलकाता के लोगों की समझ रखने वाली टीम चाहिए थी।

इसी तरह एक OTT प्लेटफॉर्म, जो बंगाली कंटेंट का प्रचार कर रहा था, चाहता था कि प्रचार सामग्री उसी तरह की भाषा में हो जैसी लोग वास्तव में बोलते हैं, न कि उसका कोई शुद्ध या कृत्रिम संस्करण। गौर ने कहा कि जैसे-जैसे संचार विशिष्ट दर्शकों तक पहुंचता है, उसे उनकी वास्तविक दुनिया से जुड़ा होना चाहिए, न कि किसी मेट्रो शहर की टीम की कल्पना से।

दीप्ति संपत ने बताया कि यह सोच ग्राहक अनुभव में कैसे दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि IndiGo में क्षेत्रीय भोजन परोसना केवल मेन्यू का निर्णय नहीं बल्कि ब्रैंड का निर्णय है। जब किसी यात्री को उसके क्षेत्र का भोजन मिलता है तो उसे अपनापन महसूस होता है और तुरंत भावनात्मक जुड़ाव बन जाता है। उनके अनुसार उड़ान का अनुभव भी एक तरह की कहानी कहने की प्रक्रिया है, जो विज्ञापन अभियानों के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से भी काम करती है।

इसके बाद चर्चा ब्रैंड संचार के बदलते तरीकों और सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर्स से क्षेत्रीय कंटेंट क्रिएटर्स की ओर बढ़ते रुझान पर केंद्रित हुई।

इप्शिता चौधरी ने कोलकाता के एक बाजार दौरे का अनुभव साझा किया। उन्होंने एक गृहिणी से मुलाकात की जो अपने Motorola फोन से रोज खाना बनाने के वीडियो रिकॉर्ड करती थीं और यूट्यूब पर उनके 35,000 फॉलोअर्स थे।

उन्होंने कहा कि जब हम मार्केटिंग अभियान बनाते हैं, तब अक्सर यह नहीं समझ पाते कि एक डिवाइस किसी व्यक्ति को कितना सशक्त बना सकता है। लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत कभी सेलिब्रिटी होते हैं तो कभी उनके आसपास के साधारण लोग, जिनकी अपनी दिलचस्प कहानी होती है। यही चीज आज की Creator Economy को आगे बढ़ा रही है।

उनके अनुसार क्षेत्रीय क्रिएटर्स ऐसी प्रामाणिकता लेकर आते हैं जिसे बड़े अभियान अक्सर तैयार नहीं कर पाते और ब्रैंड्स को इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए।

इस पर रितेश सूद ने कहा कि सेलिब्रिटी आपको पहुंच यानी Reach दे सकते हैं, लेकिन क्षेत्रीय क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स आपको अपनापन यानी Belonging देते हैं। आखिरकार उपभोक्ता यह जानना चाहता है कि उसके जैसे और लोग भी इस ब्रैंड पर भरोसा करते हैं।

उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को जरूरत से ज्यादा स्क्रिप्ट देने की प्रवृत्ति का भी विरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें ब्रैंड की भावना समझने दें और फिर अपनी शैली में उसे प्रस्तुत करने दें। वरना हर जगह एक जैसी रील्स दिखाई देने लगती हैं।

प्रतीक गौर ने बताया कि लगभग छह साल पहले उन्होंने Asian Paints के साथ काम किया था, जब माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स का चलन इतना लोकप्रिय नहीं था। कंपनी देश के अलग-अलग हिस्सों के पेंटर्स और कारीगरों को तलाश रही थी, जो स्थानीय भाषा और अंदाज में यूट्यूब वीडियो बनाते थे और लोगों को उत्पादों के इस्तेमाल और उपलब्धता की जानकारी देते थे।

गौर ने कहा कि तभी उन्हें समझ आया कि क्षेत्रीय क्रिएटर्स लोगों में अपनापन पैदा करते हैं। यदि Asian Paints मेरे जैसे किसी व्यक्ति के साथ काम कर रही है, तो मुझे भी लगता है कि मैं उस ब्रैंड के साथ जुड़ सकता हूं। यह वह जुड़ाव है जिसे कई बार बड़े विज्ञापन अभियान भी नहीं बना पाते।

पैनल ने माइक्रो-ड्रामा और नए कंटेंट फॉर्मेट्स पर भी चर्चा की। दीप्ति संपत ने कहा कि मार्केटर्स का काम प्रयोग करना है। दर्शक अब छोटे-छोटे समूहों में बंटते जा रहे हैं और रणनीति इस बात पर निर्भर करती है कि वह समूह कहां मौजूद है और ब्रैंड का व्यावसायिक उद्देश्य क्या है। उदाहरण के लिए बिजनेस क्लास यात्रियों को लक्ष्य बनाना या टियर-2 शहर के पहली बार उड़ान भरने वाले यात्रियों तक पहुंचना।

रितेश सूद ने बताया कि सत्र से लगभग छह महीने पहले वह खुद माइक्रो-ड्रामा देखने के आदी हो गए थे। उनके अनुसार FMCG और खाद्य उत्पादों के लिए यह फॉर्मेट ब्रैंड को कहीं अधिक स्वाभाविक तरीके से कहानी में शामिल करने का अवसर देता है, जो पारंपरिक 30 सेकंड के विज्ञापन में संभव नहीं होता।

पवन जगनिक ने इसे बजट के नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि यदि आपके अगले ग्राहक माइक्रो-ड्रामा देख रहे हैं, तो आपको वहां मौजूद होना चाहिए। यदि वे नहीं देख रहे, तो वहां निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।

मापन यानी Measurement पर चर्चा करते हुए पैनल ने इस बात पर सहमति जताई कि आंकड़े जरूरी हैं, लेकिन उनका अत्यधिक दबाव रचनात्मकता को नुकसान पहुंचा सकता है।

प्रतीक गौर ने कहा कि एंगेजमेंट के आंकड़े झूठ नहीं बोलते और CFO हमेशा खर्च का हिसाब मांगेंगे। लेकिन अगर मार्केटिंग को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित कर दिया जाए तो उसकी रचनात्मकता खत्म हो जाती है। उनके अनुसार किसी अभियान की असली सफलता यह है कि लोग उसे पांच साल बाद भी याद रखें।

पवन जगनिक ने कहा कि उनकी रणनीति यह होती है कि किसी अभियान की शुरुआत से पहले CEO और CFO के साथ लक्ष्य स्पष्ट कर लिए जाएं और हर छह महीने में उनकी समीक्षा की जाए। उनके मुताबिक अंतिम मापदंड राजस्व यानी Revenue ही होता है।

इप्शिता चौधरी ने भी इस बात से सहमति जताई, लेकिन उन्होंने यह मानने से इनकार किया कि रचनात्मकता और जवाबदेही एक-दूसरे के विरोधी हैं। उनका कहना था कि यदि रणनीति स्पष्ट हो और दिशा तय हो, तो रचनात्मक तरीके से लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

रितेश सूद ने इस विषय को एक उदाहरण के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि किसी अभियान की सफलता को सिर्फ एक मीट्रिक से जोड़ना ऐसा है जैसे किसी ऐसे व्यंजन का श्रेय वेटर को दे देना, जिसे बनाने में शेफ ने तीन घंटे लगाए हों। उपभोक्ता के निर्णय का क्षण कहीं भी आ सकता है, चाहे वह पड़ोसी का व्हाट्सऐप संदेश हो या किसी क्रिएटर का वीडियो। इसलिए पूरी तस्वीर को देखना जरूरी है।

चर्चा का समापन ब्रैंड लॉयल्टी पर हुआ, जो पूरे सत्र का सबसे चर्चित विषय रहा।

दीप्ति संपत के अनुसार लॉयल्टी एक क्रमिक प्रक्रिया है जिसमें पहले अच्छा अनुभव आता है, फिर निरंतरता और उसके बाद भरोसा बनता है। विमानन क्षेत्र में जहां उत्पाद और कीमत में ज्यादा अंतर नहीं होता, वहां ग्राहक अनुभव ही असली पहचान बनता है। उन्होंने कहा कि यदि यात्रा का अनुभव अच्छा होगा तो ग्राहक दोबारा उसी एयरलाइन को चुनेगा। हर टचपॉइंट पर ब्रैंड के वादे को निभाना ही लंबे समय में भरोसा बनाता है।

प्रतीक गौर ने कहा कि आज के दौर में, जब लोगों का ध्यान कम समय तक टिकता है, तब पहली और आखिरी छाप सबसे ज्यादा मायने रखती है। चाहे वह विज्ञापन पर पहली क्लिक हो या स्टोर में पहला कदम, और अंत में उत्पाद या सेवा का अनुभव। यदि दोनों अच्छे हों तो ग्राहक लंबे समय तक ब्रैंड के साथ बना रहता है।

पवन जगनिक ने कहा कि किसी ब्रैंड की वास्तविक लॉयल्टी तब समझ में आती है जब कीमत बढ़ने के बाद भी ग्राहक वापस लौटकर आए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि McVitie's जैसे ब्रैंड के लिए, जहां एक पैक की कीमत सिर्फ 10 रुपये है, लॉयल्टी हासिल करना मुश्किल और उसे बनाए रखना उससे भी कठिन है। उनका सुझाव था कि ब्रैंड को किसी एक क्षेत्र में अपनी पहचान बनानी चाहिए और हर टचपॉइंट पर एक जैसी स्थिरता बनाए रखनी चाहिए।

इप्शिता चौधरी ने सबसे स्पष्ट और ईमानदार टिप्पणी करते हुए कहा कि आज की दुनिया में लॉयल्टी बहुत मायावी हो गई है। हर ब्रैंड इसके पीछे भाग रहा है, लेकिन क्या यह वास्तव में मौजूद भी है?

उन्होंने कहा कि क्विक कॉमर्स के दौर में ग्राहक अक्सर उसी ब्रैंड को चुनता है जो उस समय उसकी समस्या हल कर दे। हालांकि कुछ अपवाद जरूर होते हैं। यदि कोई ब्रैंड आधी रात को किसी माता-पिता की जरूरत पूरी कर दे, तो वह अनुभव लंबे समय तक याद रहता है।

उनके मुताबिक ऐसे छोटे लेकिन अर्थपूर्ण अनुभव ही शायद वास्तविक लॉयल्टी पैदा करते हैं। लेकिन इसके बावजूद लॉयल्टी आज भी एक ऐसी चीज बनी हुई है, जिसे हर ब्रैंड पाना चाहता है, लेकिन जिसे हासिल करना आसान नहीं है।

यही विचार इस चर्चा का सबसे उपयुक्त निष्कर्ष साबित हुआ। इसमें यह स्वीकार किया गया कि उपभोक्ताओं की बदलती दुनिया में ब्रैंड लॉयल्टी बनाना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है, फिर भी हर ब्रैंड उसी लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास कर रहा है।

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'Sutherland' ने पूजा घाटे को 'Director-Corporate Marketing' नियुक्त किया

सुथरलैंड (Sutherland) ने पूजा घाटे (Pooja Ghate) को Director - Corporate Marketing नियुक्त किया है। वह कंपनी की वैश्विक मार्केटिंग रणनीति, ब्रांड विजिबिलिटी और CXO एंगेजमेंट को मजबूत करेंगी।

Last Modified:
Saturday, 25 July, 2026
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सुथरलैंड (Sutherland) ने पूजा घाटे (Pooja Ghate) को डायरेक्टर–कॉरपोरेट मार्केटिंग (Director - Corporate Marketing) नियुक्त किया है। वह कंपनी की कॉरपोरेट मार्केटिंग रणनीति और वैश्विक ब्रांड निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगी।

पूजा घाटे (Pooja Ghate) इससे पहले डेटामैटिक्स (Datamatics) में सीनियर फील्ड मार्केटिंग मैनेजर (Senior Field Marketing Manager) के पद पर कार्यरत थीं। वहां उन्होंने भारत (India) और यूरोप, मध्य पूर्व एवं अफ्रीका (Europe, Middle East and Africa-EMEA) क्षेत्र के लिए इंटीग्रेटेड मार्केटिंग (Integrated Marketing) रणनीतियों का नेतृत्व किया।

मार्केटिंग क्षेत्र में 14 वर्षों का अनुभव रखने वाली पूजा घाटे को वैश्विक मार्केटिंग रणनीतियां तैयार करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने अपने करियर के दौरान राजस्व वृद्धि (Revenue Growth), ब्रांड विजिबिलिटी (Brand Visibility) बढ़ाने और CXO एंगेजमेंट (CXO Engagement) को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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R K Swamy ने FY26 में दर्ज की मजबूत वित्तीय वृद्धि : मुनाफा 39% बढ़ा

आर के स्वामी (R K Swamy) ने FY26 में कुल आय 15% बढ़ाकर ₹352 करोड़ दर्ज की, जबकि EBITDA में 32% और चौथी तिमाही के शुद्ध लाभ में 39% की वृद्धि हुई।

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
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आर के स्वामी (R K Swamy) ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए कुल आय (Total Income) में 15% की वृद्धि दर्ज करते हुए इसे 352 करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है। कंपनी ने इस दौरान EBITDA में 32% की बढ़ोतरी हासिल की है।

कंपनी के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4 FY26) में परिचालन से राजस्व (Revenue from Operations) 150.66 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 119.55 करोड़ रुपये की तुलना में 26% अधिक है। वहीं, कर पश्चात लाभ (Profit After Tax-PAT) 39% बढ़कर 18.81 करोड़ रुपये हो गया।

कंपनी के एग्जीक्यूटिव ग्रुप चेयरमैन (Executive Group Chairman) श्रीनिवासन के. स्वामी (Srinivasan K Swamy) ने कहा कि वैश्विक और घरेलू मार्केटिंग सर्विसेज उद्योग संरचनात्मक बदलावों के दौर से गुजर रहा है, जिससे नए अवसरों के साथ कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग ने ब्रांड्स और एजेंसियों के काम करने के तरीके को बदल दिया है। उनके अनुसार, जो संस्थान AI को एक प्रभावी उपकरण के रूप में अपनाएंगे, वे आगे बढ़ेंगे, जबकि इसे मानवीय बुद्धिमत्ता का विकल्प मानने वाले पीछे रह जाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि सप्लाई चेन (Supply Chain) में व्यवधान और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण कंपनियां अब दीर्घकालिक ब्रांड निर्माण की बजाय त्वरित परिणाम देने वाले डिजिटल मार्केटिंग मेट्रिक्स पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

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कविता पांडा बनीं आसियान बिजनेस पार्टनर्स की 'Chief Partnerships Officer'

आसियान बिजनेस पार्टनर्स ने कविता पांडा को 'Chief Partnerships Officer' नियुक्त किया है। वह कंपनी के वैश्विक टेक्नोलॉजी पार्टनर इकोसिस्टम और रणनीतिक साझेदारियों का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Friday, 24 July, 2026
kavitai

आसियान बिजनेस पार्टनर्स (ASEAN Business Partners) ने कविता पांडा (Kavita Panda) को पदोन्नत कर मुख्य साझेदारी अधिकारी (Chief Partnerships Officer) नियुक्त किया है। उन्होंने अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए साझा की।

कविता पांडा (Kavita Panda) पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से ASEAN Business Partners से जुड़ी हुई हैं। पदोन्नति से पहले वह कंपनी में मुख्य परिचालन अधिकारी (Chief Operating Officer-COO) के रूप में कार्यरत थीं।

अपने लिंक्डइन पोस्ट में कविता पांडा ने कहा कि वह नई भूमिका को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने बताया कि दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) में कंपनी के विस्तार के साथ उनकी प्राथमिकता वैश्विक टेक्नोलॉजी पार्टनर इकोसिस्टम (Global Technology Partner Ecosystem) का विस्तार करना, रणनीतिक साझेदारियां (Strategic Alliances) विकसित करना और सलाहकारों (Advisors) के साथ मिलकर ऐसे सहयोग स्थापित करना होगा, जो कंपनी, उसके साझेदारों और ग्राहकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करें।

उन्होंने कहा कि वह मौजूदा और नए साझेदारों के साथ मिलकर ASEAN Business Partners के लिए एक मजबूत और विशिष्ट पार्टनर इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में काम करेंगी। कंपनी को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

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रस्क मीडिया ने अमित गोखले को बनाया नेशनल रेवेन्यू हेड

रस्क मीडिया ने अमित गोखले (Amit Gokhale) को National Revenue Head – Mid Market Business नियुक्त किया है, जो स्पॉन्सरशिप सेल्स, बिजनेस डेवलपमेंट और ब्रांड साझेदारियों का नेतृत्व करेंगे।

Last Modified:
Thursday, 23 July, 2026
ruskmedia

रस्क मीडिया (Rusk Media) ने अमित गोखले (Amit Gokhale) को नेशनल रेवेन्यू हेड–मिड मार्केट बिजनेस (National Revenue Head – Mid Market Business) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी के कंटेंट आईपी (Content IP) पोर्टफोलियो के लिए स्पॉन्सरशिप सेल्स (Sponsorship Sales) और बिजनेस डेवलपमेंट (Business Development) का नेतृत्व करेंगे।

अमित गोखले (Amit Gokhale) भारत के सुपर फाउंडर्स (Bharat Ke Super Founders), जिसकी मेजबानी सुनील शेट्टी (Suniel Shetty) करते हैं, और iPOPSTAR जैसे बड़े ओरिजिनल कंटेंट प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ Rusk Media के तेजी से बढ़ते माइक्रो-ड्रामा (Micro-drama) कारोबार की व्यावसायिक रणनीति को आगे बढ़ाएंगे। इसके अलावा वह Alright TV! को एक उपभोक्ता ब्रांड और ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूत करने पर भी काम करेंगे।

डिजिटल मीडिया और विज्ञापन उद्योग में दो दशकों से अधिक के अनुभव वाले अमित गोखले इससे पहले टायरू (Tyroo) में कनेक्टेड टीवी (Connected TV) विज्ञापन कारोबार का नेतृत्व कर रहे थे। अपने करियर के दौरान उन्होंने चैनल फैक्ट्री (Channel Factory), कारदेखो (CarDekho), टाइम्स इंटरनेट (Times Internet), कोंडे नास्ट–जीक्यू इंडिया (Condé Nast – GQ India), याहू (Yahoo), लिंक्डइन (LinkedIn), रेडियो वन (Radio One) और सीएनबीसी-टीवी18 (CNBC-TV18) जैसी कंपनियों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाई हैं।

अमित गोखले (Amit Gokhale) ने अपने करियर में मल्टी-करोड़ ओईएम (OEM) और ब्रांड साझेदारियों का पीएंडएल (P&L) प्रबंधन किया है। साथ ही नेटिव और ब्रांडेड कंटेंट कारोबार को सफलतापूर्वक विस्तार देते हुए कंटेंट रणनीति और ऑडियंस एंगेजमेंट को राजस्व वृद्धि में बदलने का मजबूत अनुभव भी हासिल किया है।

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फ्लाइटा ग्रीन ने 'Wing Communications' को सौंपा पीआर का जिम्मा

फ्लाइटा ग्रीन (Flytta Green) ने अपनी पीआर, मीडिया आउटरीच और ब्रांड कम्युनिकेशन को मजबूत करने के लिए विंग कम्युनिकेशंस (Wing Communications) के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।

Last Modified:
Wednesday, 22 July, 2026
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दिल्ली स्थित सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स कंपनी फ्लाइटा ग्रीन (Flytta Green) ने हैदराबाद स्थित पीआर और डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी विंग कम्युनिकेशंस (Wing Communications) के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है। इस साझेदारी के तहत Wing Communications कंपनी की पब्लिक रिलेशंस (PR), मीडिया आउटरीच, कंटेंट रणनीति और ब्रांड कम्युनिकेशन का प्रबंधन करेगी।

इस सहयोग का उद्देश्य फ्लाइटा ग्रीन (Flytta Green) की राष्ट्रीय स्तर पर बिजनेस, सस्टेनेबिलिटी और औद्योगिक मीडिया में मौजूदगी मजबूत करना है। साथ ही कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ राहुल कनुगंती (Rahul Kanuganti) को भारत में क्लीन मोबिलिटी (Clean Mobility) और फ्रेट इलेक्ट्रिफिकेशन (Freight Electrification) के क्षेत्र में एक विश्वसनीय आवाज के रूप में स्थापित करना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।

फ्लाइटा ग्रीन (Flytta Green) तकनीक आधारित लॉजिस्टिक्स प्लेटफॉर्म संचालित करती है, जो सीमेंट, स्टील, माइनिंग, पोर्ट्स, मैन्युफैक्चरिंग और सार्वजनिक उपक्रमों सहित विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के लिए हैवी-ड्यूटी इलेक्ट्रिक फ्रेट मूवमेंट पर केंद्रित है। कंपनी अब तक 120 से अधिक भारतीय शहरों में अपनी सेवाएं दे चुकी है और अपने परिचालन के जरिए 3.2 लाख टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन कम करने का दावा करती है।

इस साझेदारी के तहत Wing Communications टियर-1 बिजनेस प्रकाशनों, सस्टेनेबिलिटी प्लेटफॉर्म्स और उद्योग-विशेष मीडिया में Flytta Green की मीडिया रणनीति, थॉट लीडरशिप कंटेंट, राहुल कनुगंती की एग्जीक्यूटिव प्रोफाइलिंग और डिजिटल ब्रांड उपस्थिति को भी मजबूत करेगी।

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'Info Edge' की 'Aisle' ने चांदनी गगलानी को सौंपी नई जिम्मेदारी

इंफो एज (Info Edge) की सहायक कंपनी ऐसल (Aisle) ने चांदनी गगलानी (Chandni Gaglani) को Executive Vice President और Head नियुक्त किया है, जो AI आधारित नवाचार और बिजनेस विस्तार का नेतृत्व करेंगी।

Last Modified:
Wednesday, 22 July, 2026
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इंफो एज (Info Edge) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी ऐसल (Aisle) ने चांदनी गगलानी (Chandni Gaglani) को एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट (Executive Vice President) और हेड (Head) नियुक्त किया है। नई भूमिका में वह कंपनी की समग्र बिजनेस रणनीति और विकास एजेंडा का नेतृत्व करेंगी।

चांदनी गगलानी (Chandni Gaglani) का प्रमुख फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence-AI) आधारित नवाचार को गति देना, ट्रस्ट एंड सेफ्टी (Trust & Safety) को मजबूत करना, प्रमुख बाजारों में विस्तार करना और भारतीय यूजर्स के लिए बेहतर डेटिंग अनुभव विकसित करना होगा।

एक दशक से अधिक के अनुभव के साथ चांदनी गगलानी (Chandni Gaglani) ने कंज्यूमर टेक्नोलॉजी (Consumer Technology) और डिजिटल बिजनेस (Digital Business) के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (Indian School of Business-ISB) की पूर्व छात्रा चांदनी ने Aisle में प्रोडक्ट (Product), मार्केटिंग (Marketing), ऑपरेशंस (Operations), पार्टनरशिप (Partnerships) और बिजनेस एक्सपेंशन (Business Expansion) का नेतृत्व करते हुए कंपनी की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

Aisle से पहले वह फ्लिपकार्ट (Flipkart), मिंत्रा (Myntra) और उदान (Udaan) में नेतृत्वकारी भूमिकाओं में कार्य कर चुकी हैं, जहां उन्होंने कंज्यूमर ग्रोथ (Consumer Growth) और डिजिटल प्रोडक्ट्स (Digital Products) के विस्तार का नेतृत्व किया।

अपनी नियुक्ति पर चांदनी गगलानी (Chandni Gaglani) ने कहा कि वह इस नई जिम्मेदारी को लेकर सम्मानित महसूस कर रही हैं और Aisle के नेतृत्व का विश्वास जताने के लिए आभार व्यक्त करती हैं। उनका लक्ष्य जिम्मेदारी के साथ Aisle का विस्तार करना और ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है, जो वास्तविक और लंबे समय तक चलने वाले संबंधों को बढ़ावा दे।

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Havas ने SportVibes का किया अधिग्रहण, स्पोर्ट्स मार्केटिंग में बढ़ाई अपनी ताकत

ग्लोबल कम्युनिकेशन कंपनी 'हवास' (Havas) ने लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए नीदरलैंड की स्पोर्ट्स मार्केटिंग एजेंसी SportVibes का अधिग्रहण कर लिया है।

Last Modified:
Wednesday, 22 July, 2026
HavasMedia541

ग्लोबल कम्युनिकेशन कंपनी 'हवास' (Havas) ने लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए नीदरलैंड की स्पोर्ट्स मार्केटिंग एजेंसी SportVibes का अधिग्रहण कर लिया है। इस सौदे के साथ Havas ने Benelux (बेल्जियम, नीदरलैंड और लक्ज़मबर्ग) क्षेत्र में अपनी स्पोर्ट्स मार्केटिंग क्षमताओं को और मजबूत किया है। कंपनी का मानना है कि आज के दौर में ब्रैंड्स खेल, मनोरंजन और फैन एंगेजमेंट पर पहले से ज्यादा निवेश कर रहे हैं।

अधिग्रहण के बाद यह एजेंसी SportVibes by Havas Play के नाम से काम करेगी। एजेंसी की कमान पहले की तरह इसके मैनेजिंग पार्टनर्स फ्रांस व्लेगेर्ट (Frans Vleggeert) और इमरे वैन लीयूवेन (Imre van Leeuwen) के हाथों में ही रहेगी, ताकि कारोबार में निरंतरता बनी रहे।

20 साल से ज्यादा पुरानी एजेंसी

साल 2003 में स्थापित SportVibes ने स्पोर्ट्स मार्केटिंग के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। एजेंसी खेल आयोजनों, लाइव इवेंट्स, डिजिटल कंटेंट, इन्फ्लुएंसर प्रोग्राम और अपनी बौद्धिक संपदा (IP) के जरिए ब्रैंड्स, खेल प्रेमियों और समुदायों को जोड़ने का काम करती है।

इसके ग्राहकों में Gillette, Dash, DHL, Action और Lexus जैसे बड़े ब्रैंड शामिल हैं।

Track Record भी बना Havas का हिस्सा

इस सौदे के तहत SportVibes की डिजिटल कॉमर्स एजेंसी Track Record भी अब Havas समूह का हिस्सा बन गई है।

मैनेजिंग पार्टनर्स ट्यून वेरहाइज (Teun Verheij) और टिम नोमे (Tim Nome) के नेतृत्व वाली यह एजेंसी डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल मार्केटिंग और क्रिएटिव स्टोरीटेलिंग की मदद से फैन एंगेजमेंट को बिजनेस ग्रोथ में बदलने का काम करती है।

स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट मार्केटिंग पर रहेगा फोकस

Havas का कहना है कि इस अधिग्रहण से Havas Play का नेटवर्क और मजबूत होगा। इससे कंपनी खेल, मनोरंजन, गेमिंग, फैशन, संगीत और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में ब्रैंड्स को बेहतर मार्केटिंग समाधान उपलब्ध करा सकेगी।

कंपनी का मानना है कि इससे नीदरलैंड और बेल्जियम में ग्राहकों को अपने दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाने और बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद मिलेगी।

फॉर्मूला-1 जैसे बड़े आयोजनों का अनुभव

SportVibes की सबसे बड़ी उपलब्धियों में जैंडवूर्ट (Zandvoort) में आयोजित Formula 1 Heineken Dutch Grand Prix का सह-आयोजन भी शामिल है।

एजेंसी को पहले Formula 1 Promoter of the Year का सम्मान भी मिल चुका है। इससे Havas Play के पोर्टफोलियो में बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों का अनुभव भी जुड़ गया है।

स्पोर्ट्स मार्केटिंग पर बढ़ रहा कंपनियों का फोकस

यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब दुनियाभर की मार्केटिंग एजेंसियां स्पोर्ट्स, लाइव इवेंट्स और फैन कम्युनिटीज़ के बढ़ते व्यावसायिक महत्व को देखते हुए इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब केवल विज्ञापन दिखाना ही काफी नहीं है, बल्कि ब्रैंड्स को ऐसे अनुभव तैयार करने होंगे जो लोगों की रुचियों और जुनून से सीधे जुड़ें। Havas का यह कदम भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए कंपनी भविष्य की ब्रैंड मार्केटिंग में अपनी स्थिति और मजबूत करना चाहती है।

 

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'एडफैक्टर्स पीआर' संभालेगी 'AU Small Finance Bank' की पैन-इंडिया कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) ने अपनी रणनीतिक संचार जरूरतों के लिए एडफैक्टर्स पीआर (Adfactors PR) को पैन-इंडिया कम्युनिकेशन पार्टनर नियुक्त किया है।

Last Modified:
Tuesday, 21 July, 2026
mediadeal

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank-AU SFB) ने एडफैक्टर्स पीआर (Adfactors PR) को अपना रणनीतिक संचार (Strategic Communications) साझेदार नियुक्त किया है। इस साझेदारी के तहत एडफैक्टर्स पीआर देशभर में बैंक की कॉर्पोरेट प्रतिष्ठा (Corporate Reputation), लीडरशिप पोजिशनिंग (Leadership Positioning), थॉट लीडरशिप (Thought Leadership), ब्रांड स्टोरीटेलिंग (Brand Storytelling) और रणनीतिक मीडिया एंगेजमेंट (Strategic Media Engagement) का नेतृत्व करेगा।

बैंक के अनुसार, इस नियुक्ति का उद्देश्य एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) की ब्रांड पहचान को और मजबूत बनाना, उसकी विकास यात्रा को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना, ग्राहक-केंद्रित (Customer-Centric) और डिजिटल-फर्स्ट (Digital-First) रणनीति को प्रमुखता देना तथा समावेशी बैंकिंग (Inclusive Banking) को बढ़ावा देने में उसकी भूमिका को प्रभावी ढंग से सामने लाना है।

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) अपने बैंकिंग संचालन के 10वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) से यूनिवर्सल बैंक (Universal Bank) में बदलाव के लिए सैद्धांतिक मंजूरी (In-Principle Approval) प्राप्त करने वाले चुनिंदा संस्थानों में शामिल होने के बाद बैंक अब अपने अगले विकास चरण की तैयारी कर रहा है। ऐसे में रणनीतिक संचार को संस्थागत विश्वास बढ़ाने, ब्रांड की पहचान मजबूत करने और बैंक की दीर्घकालिक रणनीति को विभिन्न हितधारकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

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सीएफए इंस्टीट्यूट में सचिन छाबड़ा की नई पारी : बने सीनियर डायरेक्टर-मार्केटिंग

सीएफए इंस्टीट्यूट ने सचिन छाबड़ा को 'Senior Director-Marketing India' नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए इस नई भूमिका की जानकारी साझा की।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2026
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सचिन छाबड़ा (Sachin Chhabra) ने सीएफए इंस्टीट्यूट (CFA Institute) में सीनियर डायरेक्टर – मार्केटिंग, इंडिया (Senior Director - Marketing - India) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने इस नियुक्ति की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा करते हुए अपनी नई भूमिका को लेकर उत्साह व्यक्त किया।

लिंक्डइन पोस्ट में सचिन छाबड़ा (Sachin Chhabra) ने लिखा कि वह सीएफए इंस्टीट्यूट (CFA Institute) से जुड़कर बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि भारत और वैश्विक स्तर पर मौजूद सहयोगियों के साथ काम करते हुए वह दुनिया के सबसे गतिशील बाजारों में से एक भारत में संस्थान की पहुंच और प्रभाव को और मजबूत बनाने की दिशा में योगदान देने के लिए उत्साहित हैं।

सचिन छाबड़ा (Sachin Chhabra) इससे पहले रिलैक्सो फुटवियर्स (Relaxo Footwears) में वाइस प्रेसिडेंट (Vice President) और चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (Chief Marketing Officer-CMO) के पद पर कार्यरत थे। वहां उन्होंने ब्रांड रणनीति, मार्केटिंग और बिजनेस ग्रोथ से जुड़े कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया।

नई भूमिका में सचिन छाबड़ा (Sachin Chhabra) भारत में सीएफए इंस्टीट्यूट (CFA Institute) की मार्केटिंग रणनीतियों, ब्रांड सुदृढ़ीकरण और संस्थान की पहुंच बढ़ाने पर फोकस करेंगे। कंपनी को उम्मीद है कि उनके अनुभव और नेतृत्व से भारतीय बाजार में संगठन की मौजूदगी और प्रभाव को नई गति मिलेगी।

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प्रज्ञा मेहरा ने जॉइन किया 'Johnson’s Baby' : संभालेंगी ग्लोबल कम्युनिकेशंस

जॉनसन्स बेबी (Johnson’s Baby) ने प्रज्ञा मेहरा को Global Equity & Communications Manager नियुक्त किया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पर इस नई भूमिका की जानकारी साझा की।

Last Modified:
Monday, 20 July, 2026
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प्रज्ञा मेहरा (Pragya Mehra) ने जॉनसन्स बेबी (Johnson’s Baby) में ग्लोबल इक्विटी एंड कम्युनिकेशंस मैनेजर (Global Equity & Communications Manager) के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। उन्होंने इस नियुक्ति की जानकारी लिंक्डइन (LinkedIn) पर साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक बड़ा और खास पेशेवर कदम है।

अपने पोस्ट में प्रज्ञा मेहरा (Pragya Mehra) ने लिखा कि वह अब ऐसे ब्रांड के साथ काम कर रही हैं, जो हर माता-पिता के जीवन के शुरुआती वर्षों से जुड़ा होता है। उन्होंने इस नई भूमिका को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस नई जिम्मेदारी को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

प्रज्ञा मेहरा (Pragya Mehra) के पास भारत (India) और दक्षिण-पूर्व एशिया (Southeast Asia) में वैश्विक और क्षेत्रीय मार्केटिंग भूमिकाओं का लगभग एक दशक का अनुभव है। अपने करियर के दौरान उन्होंने ब्रांड मैनेजमेंट (Brand Management), ई-कॉमर्स (E-commerce), डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing) और इनोवेशन (Innovation) जैसे क्षेत्रों में काम किया है।

जॉनसन्स बेबी (Johnson’s Baby) से जुड़ने से पहले प्रज्ञा मेहरा (Pragya Mehra) लॉरियल (L'Oréal), सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया (Sony Pictures Networks India) और एऑन हेविट (Aon Hewitt) जैसी कंपनियों में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। इन संगठनों में उन्होंने ब्रांड रणनीति, मार्केटिंग और उपभोक्ता संचार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर कार्य किया।

नई भूमिका में प्रज्ञा मेहरा (Pragya Mehra) जॉनसन्स बेबी (Johnson’s Baby) के वैश्विक ब्रांड इक्विटी और कम्युनिकेशन रणनीतियों को आगे बढ़ाने तथा ब्रांड की वैश्विक पहचान को मजबूत करने पर काम करेंगी।

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