Pitch CMO Summit में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स ने बदलते उपभोक्ता व्यवहार के बीच मजबूत ब्रैंड बनाने की चुनौतियों पर चर्चा की।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारत के उपभोक्ताओं को समझना कभी आसान नहीं रहा, लेकिन अब जिस तेजी से वे प्लेटफॉर्म, भौगोलिक क्षेत्रों, भाषाओं और जीवन के अलग-अलग चरणों में बंट रहे हैं, उसने मार्केटर्स के लिए चुनौती को और बढ़ा दिया है। Pitch CMO Summit में आयोजित "Brand Strategies: Turning Audience Complexity Into Loyalty and Impact" नामक पैनल चर्चा में मार्केटिंग एक्सपर्ट्स ने इस बात पर विस्तार से चर्चा की कि ऐसे माहौल में एक मजबूत ब्रैंड बनाना वास्तव में कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है
इस पैनल में IndiGo की Vice President–Marketing and Digital दीप्ति संपत, LT Foods के India और Far East के Chief Marketing Officer रितेश सूद, pladis India के Head of Marketing पवन जगनिक, Motorola India की Marketing Head इप्शिता चौधरी और Footprynt के Co-Founder प्रतीक गौर शामिल थे। चर्चा का संचालन ShareChat और Moj की National Sales Head–Agency and Government सीमा वालिया ने किया।
चर्चा की शुरुआत करते हुए सीमा वालिया ने कहा कि आज का ग्राहक पहले की तरह सीधी और सरल खरीदारी यात्रा नहीं अपनाता। चाहे मोबाइल फोन खरीदना हो या कोई खाद्य उत्पाद, ग्राहक अब कई प्लेटफॉर्म पर जाकर कीमतों की तुलना करता है, रिव्यू पढ़ता है और उसके बाद निर्णय लेता है। यह जटिलता सभी जानते हैं, लेकिन असली सवाल यह है कि ब्रैंड इससे कैसे निपट रहे हैं।
वालिया ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए पूछा कि क्या मार्केटर्स संस्कृति और भाषा, व्यक्तिगत और रिलेटेबल जैसे विषयों को जरूरत से ज्यादा सरल बनाकर देख रहे हैं?
इस पर इप्शिता चौधरी ने कहा कि "संस्कृति" शब्द का अक्सर गलत इस्तेमाल किया जाता है। उनके मुताबिक कोई ट्रेंड या कुछ समय के लिए लोकप्रिय हो जाने वाली चीज संस्कृति नहीं होती। संस्कृति वह होती है जिसकी जड़ें किसी समुदाय के सामाजिक और आर्थिक इतिहास में गहराई तक मौजूद होती हैं।
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि अक्सर टियर-2 शहरों को एक जैसा मान लिया जाता है। उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत का टियर-2 शहर और दक्षिण भारत का टियर-2 शहर एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। उनकी सोच, खरीदारी की क्षमता और जीवनशैली अलग है। अगर कोई चीज समान है तो वह है आकांक्षा। आज भारत एक युवा और महत्वाकांक्षी देश है। लेकिन यह आकांक्षा किस बिंदु से शुरू होती है, यह संस्कृति तय करती है। इसलिए भाषा, संवाद का तरीका और कहानी कहने की शैली भी उसी के अनुसार होनी चाहिए।
रितेश सूद ने इस विषय पर एक वास्तविकता सामने रखी। उन्होंने कहा कि अधिकांश मार्केटिंग ब्रीफ मेट्रो शहरों में बैठी टीमें तैयार करती हैं और उपभोक्ता शोध भी प्रायः दिल्ली या मुंबई में ही किया जाता है। उन्होंने स्वीकार किया कि हम सभी इस गलती के दोषी हैं। उन्हें याद नहीं कि आखिरी बार ग्रामीण भारत में बड़े स्तर पर उपभोक्ता शोध कब किया गया था।
उन्होंने कहा कि गोरखपुर और दिल्ली के 28 वर्षीय युवा दोनों इंस्टाग्राम इस्तेमाल कर सकते हैं और एक जैसी श्रेणी के उत्पाद खरीद सकते हैं, लेकिन उनकी प्रेरणाएं पूरी तरह अलग होती हैं। सबसे जरूरी यह है कि उन्हें ब्रैंड से जुड़ाव महसूस हो और यही वह हिस्सा है जो अक्सर छूट जाता है।
चर्चा इसके बाद भोजन और क्षेत्रीय पहचान पर पहुंची। सूद ने बताया कि उनकी कंपनी के पोर्टफोलियो में हैदराबादी, कोलकाता और लखनवी बिरयानी शामिल हैं और ये सिर्फ भोजन नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि बिरयानी केवल एक डिश नहीं बल्कि एक क्षेत्रीय पहचान और भावना है। किसी कोलकाता के व्यक्ति से हैदराबादी बिरयानी के साथ जश्न मनाने को कहना वैसा ही है जैसे किसी RCB प्रशंसक से दिल्ली की जर्सी पहनकर चीयर करने को कहना।
उन्होंने कहा कि जनसांख्यिकीय आंकड़े यह बताते हैं कि कोई व्यक्ति कागज पर कौन है, लेकिन संस्कृति यह बताती है कि वह क्या महसूस करता है, उसे क्या पसंद है, उसे क्या प्रेरित करता है और वह किस तरह जश्न मनाता है। यही वह स्तर है जहां ब्रैंड उपभोक्ता के दिल तक पहुंचते हैं और खरीदारी के वास्तविक फैसले प्रभावित करते हैं।
विज्ञापनों में स्टीरियोटाइपिंग यानी पूर्वाग्रह आधारित प्रस्तुति के जोखिम पर बात करते हुए सूद ने कहा कि इसकी जड़ में अनुमान होता है। जब आप किसी उपभोक्ता समूह के बारे में पहले से धारणा बना लेते हैं और उसे उन पर थोप देते हैं, तब स्टीरियोटाइपिंग होती है।
उनके अनुसार इसका समाधान सिर्फ रिसर्च रिपोर्ट्स नहीं हैं, बल्कि बाजार में जाकर लोगों के बीच रहना है। उन्होंने कहा कि खाने की परंपराएं, त्योहार मनाने के तरीके और संगीत जैसी चीजें ही असली सांस्कृतिक समझ देती हैं। पंजाब का संगीत और दक्षिण भारत का संगीत बिल्कुल अलग है। यही वे जगहें हैं जहां संस्कृति की असली बारीकियां मौजूद हैं।
सूद की बात से सहमति जताते हुए पवन जगनिक ने कहा कि भारत की विविधता सिर्फ रचनात्मक चुनौती नहीं बल्कि एक बड़ा व्यावसायिक अवसर भी है। उन्होंने कहा कि भारत अनेक संस्कृतियों का देश है और यही ब्रैंड्स के लिए अवसर बनाता है। बिस्किट उद्योग जैसे 50-60 हजार करोड़ रुपये के बाजार में अगर कोई ब्रैंड केवल एक राज्य पर ध्यान देकर उपभोक्ताओं की जरूरतों और उनकी भाषा को सही समझ ले, तो भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर पहुंच और डिजिटल माध्यमों ने छोटे ब्रैंड्स के लिए भी अपनी जगह बनाने के अवसर बढ़ा दिए हैं।
प्रतीक गौर ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक पॉडकास्ट "Teen Taal" में सुना था कि भले ही हम 2026 में रह रहे हों, लेकिन झारखंड का कोई जिला व्यवहारिक रूप से अभी भी 1996 या 2006 जैसी परिस्थितियों में जी रहा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा खतरा यह मान लेना है कि इंटरनेट सबके हाथ में होने का मतलब है कि सभी लोग एक जैसा कंटेंट देख रहे हैं। वास्तविकता यह है कि एक ही इलाके में रहने वाले लोगों और 150 किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों की कंटेंट खपत पूरी तरह अलग हो सकती है।
गौर के अनुसार भारत में काम करने वाला हर ब्रैंड मैनेजर दुनिया के किसी भी बाजार में काम करने की क्षमता रखता है, क्योंकि वह एक साथ कई संस्कृतियों को समझने और संभालने का काम करता है।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके एक पुराने क्लाइंट Emami ने उनकी एजेंसी से काम इसलिए हटा लिया था क्योंकि उनकी टीम में भले ही चार बंगाली भाषी लोग थे, लेकिन दो दिल्ली के CR Park से और दो मुंबई से थे। जबकि क्लाइंट को कोलकाता के लोगों की समझ रखने वाली टीम चाहिए थी।
इसी तरह एक OTT प्लेटफॉर्म, जो बंगाली कंटेंट का प्रचार कर रहा था, चाहता था कि प्रचार सामग्री उसी तरह की भाषा में हो जैसी लोग वास्तव में बोलते हैं, न कि उसका कोई शुद्ध या कृत्रिम संस्करण। गौर ने कहा कि जैसे-जैसे संचार विशिष्ट दर्शकों तक पहुंचता है, उसे उनकी वास्तविक दुनिया से जुड़ा होना चाहिए, न कि किसी मेट्रो शहर की टीम की कल्पना से।
दीप्ति संपत ने बताया कि यह सोच ग्राहक अनुभव में कैसे दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि IndiGo में क्षेत्रीय भोजन परोसना केवल मेन्यू का निर्णय नहीं बल्कि ब्रैंड का निर्णय है। जब किसी यात्री को उसके क्षेत्र का भोजन मिलता है तो उसे अपनापन महसूस होता है और तुरंत भावनात्मक जुड़ाव बन जाता है। उनके अनुसार उड़ान का अनुभव भी एक तरह की कहानी कहने की प्रक्रिया है, जो विज्ञापन अभियानों के साथ-साथ स्वतंत्र रूप से भी काम करती है।
इसके बाद चर्चा ब्रैंड संचार के बदलते तरीकों और सेलिब्रिटी इन्फ्लुएंसर्स से क्षेत्रीय कंटेंट क्रिएटर्स की ओर बढ़ते रुझान पर केंद्रित हुई।
इप्शिता चौधरी ने कोलकाता के एक बाजार दौरे का अनुभव साझा किया। उन्होंने एक गृहिणी से मुलाकात की जो अपने Motorola फोन से रोज खाना बनाने के वीडियो रिकॉर्ड करती थीं और यूट्यूब पर उनके 35,000 फॉलोअर्स थे।
उन्होंने कहा कि जब हम मार्केटिंग अभियान बनाते हैं, तब अक्सर यह नहीं समझ पाते कि एक डिवाइस किसी व्यक्ति को कितना सशक्त बना सकता है। लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत कभी सेलिब्रिटी होते हैं तो कभी उनके आसपास के साधारण लोग, जिनकी अपनी दिलचस्प कहानी होती है। यही चीज आज की Creator Economy को आगे बढ़ा रही है।
उनके अनुसार क्षेत्रीय क्रिएटर्स ऐसी प्रामाणिकता लेकर आते हैं जिसे बड़े अभियान अक्सर तैयार नहीं कर पाते और ब्रैंड्स को इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए।
इस पर रितेश सूद ने कहा कि सेलिब्रिटी आपको पहुंच यानी Reach दे सकते हैं, लेकिन क्षेत्रीय क्रिएटर्स और इन्फ्लुएंसर्स आपको अपनापन यानी Belonging देते हैं। आखिरकार उपभोक्ता यह जानना चाहता है कि उसके जैसे और लोग भी इस ब्रैंड पर भरोसा करते हैं।
उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स को जरूरत से ज्यादा स्क्रिप्ट देने की प्रवृत्ति का भी विरोध किया। उनका कहना था कि उन्हें ब्रैंड की भावना समझने दें और फिर अपनी शैली में उसे प्रस्तुत करने दें। वरना हर जगह एक जैसी रील्स दिखाई देने लगती हैं।
प्रतीक गौर ने बताया कि लगभग छह साल पहले उन्होंने Asian Paints के साथ काम किया था, जब माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स का चलन इतना लोकप्रिय नहीं था। कंपनी देश के अलग-अलग हिस्सों के पेंटर्स और कारीगरों को तलाश रही थी, जो स्थानीय भाषा और अंदाज में यूट्यूब वीडियो बनाते थे और लोगों को उत्पादों के इस्तेमाल और उपलब्धता की जानकारी देते थे।
गौर ने कहा कि तभी उन्हें समझ आया कि क्षेत्रीय क्रिएटर्स लोगों में अपनापन पैदा करते हैं। यदि Asian Paints मेरे जैसे किसी व्यक्ति के साथ काम कर रही है, तो मुझे भी लगता है कि मैं उस ब्रैंड के साथ जुड़ सकता हूं। यह वह जुड़ाव है जिसे कई बार बड़े विज्ञापन अभियान भी नहीं बना पाते।
पैनल ने माइक्रो-ड्रामा और नए कंटेंट फॉर्मेट्स पर भी चर्चा की। दीप्ति संपत ने कहा कि मार्केटर्स का काम प्रयोग करना है। दर्शक अब छोटे-छोटे समूहों में बंटते जा रहे हैं और रणनीति इस बात पर निर्भर करती है कि वह समूह कहां मौजूद है और ब्रैंड का व्यावसायिक उद्देश्य क्या है। उदाहरण के लिए बिजनेस क्लास यात्रियों को लक्ष्य बनाना या टियर-2 शहर के पहली बार उड़ान भरने वाले यात्रियों तक पहुंचना।
रितेश सूद ने बताया कि सत्र से लगभग छह महीने पहले वह खुद माइक्रो-ड्रामा देखने के आदी हो गए थे। उनके अनुसार FMCG और खाद्य उत्पादों के लिए यह फॉर्मेट ब्रैंड को कहीं अधिक स्वाभाविक तरीके से कहानी में शामिल करने का अवसर देता है, जो पारंपरिक 30 सेकंड के विज्ञापन में संभव नहीं होता।
पवन जगनिक ने इसे बजट के नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि यदि आपके अगले ग्राहक माइक्रो-ड्रामा देख रहे हैं, तो आपको वहां मौजूद होना चाहिए। यदि वे नहीं देख रहे, तो वहां निवेश करने का कोई मतलब नहीं है।
मापन यानी Measurement पर चर्चा करते हुए पैनल ने इस बात पर सहमति जताई कि आंकड़े जरूरी हैं, लेकिन उनका अत्यधिक दबाव रचनात्मकता को नुकसान पहुंचा सकता है।
प्रतीक गौर ने कहा कि एंगेजमेंट के आंकड़े झूठ नहीं बोलते और CFO हमेशा खर्च का हिसाब मांगेंगे। लेकिन अगर मार्केटिंग को सिर्फ आंकड़ों तक सीमित कर दिया जाए तो उसकी रचनात्मकता खत्म हो जाती है। उनके अनुसार किसी अभियान की असली सफलता यह है कि लोग उसे पांच साल बाद भी याद रखें।
पवन जगनिक ने कहा कि उनकी रणनीति यह होती है कि किसी अभियान की शुरुआत से पहले CEO और CFO के साथ लक्ष्य स्पष्ट कर लिए जाएं और हर छह महीने में उनकी समीक्षा की जाए। उनके मुताबिक अंतिम मापदंड राजस्व यानी Revenue ही होता है।
इप्शिता चौधरी ने भी इस बात से सहमति जताई, लेकिन उन्होंने यह मानने से इनकार किया कि रचनात्मकता और जवाबदेही एक-दूसरे के विरोधी हैं। उनका कहना था कि यदि रणनीति स्पष्ट हो और दिशा तय हो, तो रचनात्मक तरीके से लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
रितेश सूद ने इस विषय को एक उदाहरण के जरिए समझाया। उन्होंने कहा कि किसी अभियान की सफलता को सिर्फ एक मीट्रिक से जोड़ना ऐसा है जैसे किसी ऐसे व्यंजन का श्रेय वेटर को दे देना, जिसे बनाने में शेफ ने तीन घंटे लगाए हों। उपभोक्ता के निर्णय का क्षण कहीं भी आ सकता है, चाहे वह पड़ोसी का व्हाट्सऐप संदेश हो या किसी क्रिएटर का वीडियो। इसलिए पूरी तस्वीर को देखना जरूरी है।
चर्चा का समापन ब्रैंड लॉयल्टी पर हुआ, जो पूरे सत्र का सबसे चर्चित विषय रहा।
दीप्ति संपत के अनुसार लॉयल्टी एक क्रमिक प्रक्रिया है जिसमें पहले अच्छा अनुभव आता है, फिर निरंतरता और उसके बाद भरोसा बनता है। विमानन क्षेत्र में जहां उत्पाद और कीमत में ज्यादा अंतर नहीं होता, वहां ग्राहक अनुभव ही असली पहचान बनता है। उन्होंने कहा कि यदि यात्रा का अनुभव अच्छा होगा तो ग्राहक दोबारा उसी एयरलाइन को चुनेगा। हर टचपॉइंट पर ब्रैंड के वादे को निभाना ही लंबे समय में भरोसा बनाता है।
प्रतीक गौर ने कहा कि आज के दौर में, जब लोगों का ध्यान कम समय तक टिकता है, तब पहली और आखिरी छाप सबसे ज्यादा मायने रखती है। चाहे वह विज्ञापन पर पहली क्लिक हो या स्टोर में पहला कदम, और अंत में उत्पाद या सेवा का अनुभव। यदि दोनों अच्छे हों तो ग्राहक लंबे समय तक ब्रैंड के साथ बना रहता है।
पवन जगनिक ने कहा कि किसी ब्रैंड की वास्तविक लॉयल्टी तब समझ में आती है जब कीमत बढ़ने के बाद भी ग्राहक वापस लौटकर आए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि McVitie's जैसे ब्रैंड के लिए, जहां एक पैक की कीमत सिर्फ 10 रुपये है, लॉयल्टी हासिल करना मुश्किल और उसे बनाए रखना उससे भी कठिन है। उनका सुझाव था कि ब्रैंड को किसी एक क्षेत्र में अपनी पहचान बनानी चाहिए और हर टचपॉइंट पर एक जैसी स्थिरता बनाए रखनी चाहिए।
इप्शिता चौधरी ने सबसे स्पष्ट और ईमानदार टिप्पणी करते हुए कहा कि आज की दुनिया में लॉयल्टी बहुत मायावी हो गई है। हर ब्रैंड इसके पीछे भाग रहा है, लेकिन क्या यह वास्तव में मौजूद भी है?
उन्होंने कहा कि क्विक कॉमर्स के दौर में ग्राहक अक्सर उसी ब्रैंड को चुनता है जो उस समय उसकी समस्या हल कर दे। हालांकि कुछ अपवाद जरूर होते हैं। यदि कोई ब्रैंड आधी रात को किसी माता-पिता की जरूरत पूरी कर दे, तो वह अनुभव लंबे समय तक याद रहता है।
उनके मुताबिक ऐसे छोटे लेकिन अर्थपूर्ण अनुभव ही शायद वास्तविक लॉयल्टी पैदा करते हैं। लेकिन इसके बावजूद लॉयल्टी आज भी एक ऐसी चीज बनी हुई है, जिसे हर ब्रैंड पाना चाहता है, लेकिन जिसे हासिल करना आसान नहीं है।
यही विचार इस चर्चा का सबसे उपयुक्त निष्कर्ष साबित हुआ। इसमें यह स्वीकार किया गया कि उपभोक्ताओं की बदलती दुनिया में ब्रैंड लॉयल्टी बनाना पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो गया है, फिर भी हर ब्रैंड उसी लक्ष्य की ओर लगातार प्रयास कर रहा है।
दुबई की एयरलाइन 'फ्लाईदुबई' (flydubai) ने सिद्धार्थ बुटालिया को कॉरपोरेट ब्रैंड, मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस का सीनियर वाइस प्रेजिडेंट नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
दुबई की एयरलाइन 'फ्लाईदुबई' (flydubai) ने सिद्धार्थ बुटालिया को कॉरपोरेट ब्रैंड, मार्केटिंग और कम्युनिकेशंस का सीनियर वाइस प्रेजिडेंट नियुक्त किया है। सिद्धार्थ बुटालिया ने यह जिम्मेदारी इसी महीने संभाली है। वह करीब दो दशक तक Tata Group के साथ काम करने के बाद 'फ्लाईदुबई' से जुड़े हैं। Tata Group में वह 2019 से Air India Express और AirAsia India के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर (CMO) के तौर पर काम कर रहे थे।
'फ्लाईदुबई' में अपनी नई भूमिका में बुटालिया कंपनी की मार्केटिंग, पब्लिक रिलेशंस, इंटरनल कम्युनिकेशंस और ब्रैंड मैनेजमेंट से जुड़े कामों को रणनीतिक दिशा देंगे।
कंपनी की ओर से LinkedIn पर पहले साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस भूमिका में एयरलाइन की प्रतिष्ठा मजबूत करने, अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ बेहतर संबंध बनाने और कंपनी के बड़े कारोबारी लक्ष्यों के साथ कम्युनिकेशन को जोड़ने की जिम्मेदारी होगी। इसके साथ ही कंपनी की प्रतिष्ठा, नीतियों पर प्रभाव और इंडस्ट्री में विचार नेतृत्व (Thought Leadership) से जुड़े मामलों को भी रणनीतिक तरीके से संभालना होगा।
Tata Group में दो दशक का अनुभव
बुटालिया को ब्रैंड, मार्केटिंग, कम्युनिकेशन और कॉरपोरेट अफेयर्स के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। उन्होंने Tata Group में TAS Officer के तौर पर भी काम किया और यूरोप व भारत में कई प्रमुख ब्रैंड्स की जिम्मेदारी संभाली। इनमें Tetley, Taj Group of Hotels, AirAsia और Air India Express शामिल हैं।
Tata Group के साथ अपने कार्यकाल के दौरान वह एयरलाइन की लीडरशिप टीम का हिस्सा रहे। इस दौरान Tata Group ने अपने एविएशन कारोबार के निजीकरण और एकीकरण के बाद एयरलाइन बिजनेस में बड़े बदलाव किए।
Air India Express के ब्रैंड को नया रूप देने में निभाई भूमिका
Air India Express में बुटालिया ने एयरलाइन के ब्रैंड को नए सिरे से तैयार करने, ग्राहक वफादारी बढ़ाने और कम्युनिकेशन को मजबूत करने में भूमिका निभाई। इस दौरान एयरलाइन ने अपना नेटवर्क बढ़ाया और Tata Group के एविएशन पोर्टफोलियो में अपनी स्थिति को और मजबूत किया।
अब 'फ्लाईदुबई' में बुटालिया दुनियाभर में एयरलाइन के कॉरपोरेट ब्रैंड, मार्केटिंग और कम्युनिकेशन से जुड़े कामों की देखरेख करेंगे।
56 देशों में 125 से ज्यादा डेस्टिनेशन
'फ्लाईदुबई' लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है। एयरलाइन का नेटवर्क अब 56 देशों में 125 से ज्यादा डेस्टिनेशन तक पहुंच चुका है। इनमें अफ्रीका, एशिया, GCC और मिडिल ईस्ट के साथ यूरोप के डेस्टिनेशन भी शामिल हैं।
बुटालिया की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र की एयरलाइंस नेटवर्क विस्तार के साथ-साथ ब्रैंड बनाने और ग्राहकों के साथ जुड़ाव बढ़ाने पर भी निवेश कर रही हैं। ऐसे में कॉरपोरेट कम्युनिकेशन एयरलाइन की छवि और दूसरी एयरलाइंस से अलग पहचान बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
100 से ज्यादा विमानों तक बढ़ेगा बेड़ा
'फ्लाईदुबई' ने अपनी ग्रोथ स्ट्रैटेजी के अगले चरण की भी जानकारी दी है। इसके तहत एयरलाइन अपने बेड़े को 100 से ज्यादा विमानों तक बढ़ाने की योजना पर आगे बढ़ रही है। एयरलाइन अपने विमानों के केबिन को नए सिरे से तैयार करने का कार्यक्रम भी शुरू कर रही है, जिसमें पूरी तरह सपाट होने वाली बिजनेस क्लास सीटें लगाई जाएंगी।
'फ्लाईदुबई' को 2026 में 11 अतिरिक्त विमान मिलने की उम्मीद है। इसके बाद एयरलाइन की क्षमता में और बढ़ोतरी होगी। भविष्य की योजना में 30 Boeing 787 Dreamliner विमान शामिल हैं। इसके बाद 2031 से 150 Airbus A321neo विमानों की डिलीवरी शुरू होने की योजना है।
बुटालिया की नई भूमिका ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब 'फ्लाईदुबई' अपने नेटवर्क, बेड़े और ग्राहक अनुभव का विस्तार कर रही है और इसके साथ अपनी कॉरपोरेट ब्रैंडिंग व कम्युनिकेशन को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
Netflix ने प्रतिस्पर्धी पिच प्रक्रिया के बाद Dentsu को यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका (EMEA) क्षेत्र में अपना एकमात्र होल्डिंग-कंपनी मीडिया एजेंसी पार्टनर नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
नेटफ्लिक्स (Netflix) ने प्रतिस्पर्धी पिच प्रक्रिया के बाद Dentsu को यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका (EMEA) क्षेत्र में अपना एकमात्र होल्डिंग-कंपनी मीडिया एजेंसी पार्टनर नियुक्त किया है। EMEA में यूरोप, मध्य पूर्व और अफ्रीका के बाजार शामिल हैं।
यह नियुक्ति ब्रिटेन में Netflix के साथ Dentsu की मौजूदा साझेदारी को आगे बढ़ाती है। अब यह साझेदारी EMEA क्षेत्र के 21 अतिरिक्त बाजारों तक पहुंच गई है।
Netflix का मीडिया अकाउंट Dentsu की Media Practice और Dentsu Lab की टीमें संभालेंगी। यह काम Dentsu ENTS के तहत किया जाएगा।
इस नियुक्ति पर खुशी जताते हुए Dentsu की iProspect UK की प्रेजिडेंट ऐमी वाट (Amy Watt) ने कहा कि यह Dentsu के लिए गर्व का पल है। उन्होंने कहा कि उनकी टीमों ने यह दिखाया है कि क्षेत्रीय स्तर पर बड़े पैमाने और स्थानीय रणनीतिक सोच को साथ लेकर किस तरह बेहतर काम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कंपनी ब्रिटेन में Netflix के साथ बनी मजबूत साझेदारी को आगे बढ़ाने और पूरे EMEA क्षेत्र में Netflix के लिए बेहतर काम करने को लेकर उत्साहित है।
इस विस्तारित साझेदारी के तहत Dentsu को नियुक्ति में शामिल EMEA के सभी बाजारों में Netflix का मीडिया अकाउंट संभालने की जिम्मेदारी मिलेगी।
FMCG कंपनी Emami Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 17 सितंबर 2026 को होने जा रही है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
FMCG कंपनी Emami Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक 17 सितंबर 2026 को होने जा रही है। इस बैठक में कंपनी के पूरी तरह चुकता (Fully Paid-up) इक्विटी शेयरों के बायबैक के प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा।
कंपनी ने इस बैठक की जानकारी 14 सितंबर 2026 को शेयर बाजारों को दी है। बोर्ड बैठक में शेयर बायबैक से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा और विचार किया जाएगा।
यह प्रस्ताव Companies Act, 2013 की धारा 68, 69 और 70 के प्रावधानों के तहत रखा गया है। इसके साथ ही यह SEBI (Buy-back of Securities) Regulations, 2018, जिसमें समय-समय पर बदलाव किए गए हैं, के अनुरूप भी होगा।
Emami ने यह सूचना SEBI (Listing Obligations and Disclosure Requirements) Regulations, 2015 के Regulation 29 के तहत जारी की है। कंपनी ने कहा है कि 17 सितंबर को बोर्ड बैठक खत्म होने के बाद बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को दी जाएगी।
BW Disrupt की ओर से BW Disrupt Founders’ Forum और BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 का आयोजन 15 सितंबर को नई दिल्ली के The Park में किया जाएगा।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
BW Disrupt की ओर से BW Disrupt Founders’ Forum और BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 का आयोजन 15 सितंबर को नई दिल्ली के The Park में किया जाएगा। BW Businessworld के सहयोग से होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे से होगी। इस बार कार्यक्रम की थीम “Towards India’s Next Growth Decade” रखी गई है।
कार्यक्रम में देश के कई स्टार्टअप फाउंडर्स, निवेशक और बिजनेस लीडर्स एक साथ जुटेंगे। फोरम की शुरुआत BW Businessworld के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ और Exchange4media Group के फाउंडर डॉ. अनुराग बत्रा के संबोधन से होगी। वह इस बात पर चर्चा करेंगे कि क्या भारत की स्टार्टअप अर्थव्यवस्था 2030 तक देश की GDP में 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दे सकती है।
स्टार्टअप और ग्रोथ पर चर्चा
फोरम में भारत में बदलते बिजनेस और ग्रोथ के माहौल पर कई अहम चर्चाएं होंगी। “The New Grammar of Growth: Capital, Conviction and Companies That Endure” सेशन में फाउंडर्स और बिजनेस लीडर्स इस बात पर चर्चा करेंगे कि बदलते माहौल में लंबे समय तक टिकने वाली कंपनियां खड़ी करने के लिए किन चीजों की जरूरत है।
इसके बाद “Bharat’s Billion-Consumer Opportunity” सेशन में भारत में तेजी से बदलते कंज्यूमर मार्केट और नई पीढ़ी के ब्रांड्स के लिए मौजूद अवसरों पर चर्चा होगी। इस सेशन में Digio के को-फाउंडर और CEO अभिनव पाराशर, Globizera Services FZCO की फाउंडर और CEO स्वाति बाबेल, Dogsee Chew की को-फाउंडर और CMO स्नेह शर्मा, Cumin Co की को-फाउंडर और CMO निहारिका जोशी और WickedGud के फाउंडर और CEO भुमन दानी समेत अन्य वक्ता शामिल होंगे।
दोपहर के सत्रों में भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और निवेश के अवसरों पर फोकस रहेगा। “Inside India’s Manufacturing Moment: Founders, Factories and The Future” सेशन में मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी और इंडस्ट्रियल बिजनेस से जुड़े अवसरों पर चर्चा की जाएगी।
निवेश के बदलते दौर पर भी चर्चा
इसके बाद “The Great Capital Reset” सेशन में निवेश के बदलते पैटर्न और वेंचर कैपिटल के अगले दौर पर चर्चा होगी। इसमें Fundamentum के को-फाउंडर और जनरल पार्टनर आशीष कुमार, Orios Venture Partners की को-फाउंडर सुखमनी बेदी, VG Capital की को-फाउंडर और मैनेजिंग पार्टनर Ntasha और 247VC के फाउंडर और जनरल पार्टनर शशांक रांदेव शामिल होंगे।
फोरम का अंतिम सेशन “The Decade-Builders: What Will India’s 40 Under 40 Leave Behind?” होगा। इसमें अगली पीढ़ी के उद्यमियों की ओर से बनाई जा रही कंपनियों और उनकी क्षमताओं पर चर्चा की जाएगी।
40 Under 40 Awards का 10वां संस्करण
कार्यक्रम का समापन BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 के 10वें संस्करण के साथ होगा। इन पुरस्कारों के जरिए उन युवा लीडर्स को सम्मानित किया जाएगा, जो नए बिजनेस खड़े कर रहे हैं, नई कैटेगरी बना रहे हैं और भारत के बदलते उद्यमिता के माहौल में योगदान दे रहे हैं।
इस बार का आयोजन खास है क्योंकि यह 40 Under 40 Awards का 10वां संस्करण है। कार्यक्रम में एक दशक के दौरान उभरते बिजनेस लीडर्स की उपलब्धियों को सेलिब्रेट किया जाएगा और इस बात पर भी फोकस रहेगा कि भारत के अगले विकास दशक में उद्यमियों और कंपनियों से किस तरह की भूमिका की उम्मीद होगी।
BW Disrupt और BW Businessworld के सहयोग से BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 के 10वें संस्करण का आयोजन नई दिल्ली के 'दि पार्क' होटल में आज कर रहा है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
BW Disrupt और BW Businessworld के सहयोग से BW Disrupt 40 Under 40 Awards 2026 के 10वें संस्करण का आयोजन नई दिल्ली के 'दि पार्क' होटल में आज कर रहा है। यह संस्करण खास है, क्योंकि इसके साथ युवा उद्यमियों और उभरते बिजनेस लीडर्स को पहचान देने के इस मंच को एक दशक पूरा हो जाएगा।
एक दशक से उभरती प्रतिभाओं की पहचान
BW Disrupt 40 Under 40 Awards की शुरुआत से ही कोशिश रही है कि ऐसे युवा लीडर्स को पहचान दी जाए, जो अपने करियर या बिजनेस के शुरुआती दौर में कुछ अलग कर रहे हैं। यह मंच उन लोगों को सामने लाता है, जिनके बिजनेस, आइडिया और नेतृत्व में लंबे समय तक असर डालने की क्षमता दिखाई देती है।
10वें संस्करण में भी अलग-अलग सेक्टर में काम कर रहे युवा लीडर्स पर फोकस किया जाएगा। ये ऐसे लोग हैं जो भारत के बदलते उद्यमिता के माहौल में अपने काम के जरिए योगदान दे रहे हैं।
कई स्तरों पर होता है मूल्यांकन
BW Disrupt 40 Under 40 Awards के लिए उम्मीदवारों का चयन एक से ज्यादा स्तरों वाली ज्यूरी और मूल्यांकन प्रक्रिया के जरिए किया जाता है। इसमें सिर्फ किसी बिजनेस का आकार या उसकी लोकप्रियता ही नहीं देखी जाती, बल्कि कई दूसरे पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
इस प्रक्रिया में बिजनेस की गुणवत्ता, उद्यमी का सफर, इनोवेशन, नेतृत्व, प्रभाव और आगे लंबे समय तक ग्रोथ की क्षमता जैसे पहलुओं का आकलन किया जाता है। इसके बाद कई चरणों के मूल्यांकन के आधार पर अंतिम विजेताओं का चयन किया जाता है।
इसका मकसद सिर्फ सफल युवा प्रोफेशनल्स और उद्यमियों को चुनना नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों की पहचान करना है, जिनके काम में अपने सेक्टर को आगे बढ़ाने, प्रभाव डालने और भविष्य को आकार देने की क्षमता दिखाई देती है।
कई नाम बना चुके हैं पहचान
पिछले एक दशक में BW Disrupt 40 Under 40 भारत में उभरते उद्यमियों और बिजनेस लीडर्स को पहचान देने वाला एक प्रमुख मंच बन गया है। इसके पहले के संस्करणों में boAt के अमन गुप्ता, Mamaearth की गजल अलघ, Libas के सिद्धार्थ केशवानी, Porter के प्रणव गोयल, InsuranceDekho के अंकित, iQOO India के निपुण मरिया और Blue Tokai Coffee के शिवम शाही जैसे नाम शामिल रहे हैं।
इनमें से कई लोगों को उनके शुरुआती दौर में पहचान मिली थी और बाद में उन्होंने अपने बिजनेस को आगे बढ़ाया, नई कैटेगरी में अपनी जगह बनाई और भारत के स्टार्टअप व बिजनेस इकोसिस्टम में प्रमुख नाम बने।
10वें संस्करण के साथ BW Disrupt 40 Under 40 Awards इसी विरासत को आगे बढ़ाएगा। इस बार भी फोकस ऐसे युवा लीडर्स की पहचान करने पर रहेगा, जिनमें आगे बढ़ने की क्षमता है और जिन्हें सही पहचान और मंच मिलने से उनके सफर को और गति मिल सकती है।
रूपल शाह ने यूआईपाथ में हेड ऑफ मार्केटिंग-इंडिया के रूप में नई जिम्मेदारी संभाली है। वह क्लाउडफ्लेयर से यहां पहुंची हैं और भारत में कंपनी की मार्केटिंग स्ट्रैटेजी मजबूत करेंगी।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
रूपल शाह (Roopal Shah) ने ऑटोमेशन कंपनी यूआईपाथ (UiPath) में हेड ऑफ मार्केटिंग-इंडिया (Head of Marketing, India) के तौर पर नई पारी शुरू की है। वह क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) से यूआईपाथ में आई हैं, जहां उन्होंने चार साल से ज्यादा समय तक काम किया।
शाह ने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई भूमिका की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यूआईपाथ भारत में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है और ऐसे में उनका फोकस कंपनी की पोजिशनिंग मजबूत करने पर रहेगा। कंपनी एजेंटिक ऑटोमेशन (Agentic Automation) के क्षेत्र में अपने विस्तार पर काम कर रही है।
यूआईपाथ से पहले शाह क्लाउडफ्लेयर में हेड ऑफ मार्केटिंग-इंडिया एंड सार्क (Head of Marketing - India & SAARC) थीं। उन्होंने कंपनी के साथ साढ़े चार साल से ज्यादा समय बिताया।
शाह के पास बी2बी टेक्नोलॉजी मार्केटिंग (B2B Technology Marketing) में 14 साल से ज्यादा का अनुभव है। उनके अनुभव में डिजिटल मार्केटिंग (Digital Marketing), डिमांड जनरेशन (Demand Generation), गो-टू-मार्केट स्ट्रैटेजी (Go-to-Market Strategy) और मार्केट एक्सपेंशन (Market Expansion) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
क्लाउडफ्लेयर से पहले उन्होंने मैकाफी (McAfee) में सात साल काम किया। इसके अलावा वह सोनी गल्फ एफजेडई (Sony Gulf FZE) के साथ भी तीन साल जुड़ी रही हैं।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 10 सितंबर 2026 से दिवेश सेहरा को अपने बोर्ड में डायरेक्टर नियुक्त किया है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 10 सितंबर 2026 से दिवेश सेहरा को अपने बोर्ड में डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के बाद डी. आनंदन डायरेक्टर पद पर नहीं रहेंगे। यानी दिवेश सेहरा ने डी. आनंदन की जगह ली है।
बैंक ने यह नियुक्ति Banking Companies (Acquisition and Transfer of Undertakings) Act, 1970 की धारा 9(3)(b) के तहत की है। यह नियुक्ति भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) की 10 सितंबर 2026 की अधिसूचना के बाद की गई है।
वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव हैं दिवेश सेहरा
दिवेश सेहरा फिलहाल भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में संयुक्त सचिव (Joint Secretary) के पद पर कार्यरत हैं। PNB के बोर्ड में उनका कार्यकाल अगले आदेश तक जारी रहेगा।
बैंक ने बताया है कि दिवेश सेहरा और बैंक के दूसरे डायरेक्टरों के बीच कोई आपसी पारिवारिक या अन्य संबंध (inter se relationship) नहीं है। इसके अलावा, किसी SEBI आदेश या किसी अन्य प्राधिकरण की ओर से उन्हें किसी पद पर रहने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। बैंक ने यह भी कहा है कि दिवेश सेहरा की विस्तृत प्रोफाइल बाद में उपलब्ध कराई जाएगी।
डिजिटल भुगतान, इंटरनेट और ऑनलाइन व्यवहार ने भारतीय ब्रांडों के लिए ग्राहकों की पसंद समझना आसान किया है। अब मार्केटिंग रणनीति में डिजिटल संकेतों और खरीदारी की मंशा अहम हो गई है।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय ब्रांडों के लिए ग्राहकों तक पहुंचने का तरीका तेजी से बदल रहा है। पिछले एक दशक में मार्केटिंग (Marketing) का फोकस ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच बनाने पर रहा, लेकिन डिजिटल भुगतान (Digital Payments), इंटरनेट और ऑनलाइन व्यवहार ने अब उपभोक्ताओं की पसंद और खरीदारी की मंशा समझने के नए रास्ते खोल दिए हैं।
पहले रोजमर्रा के कई लेनदेन नकद में होते थे। सब्जी विक्रेता या किराना दुकानदार को दिए गए पैसे की जानकारी किसी ब्रांड के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं होती थी। ऐसे में कंपनियां सीमित सैंपल (Sample) के आधार पर करोड़ों उपभोक्ताओं के व्यवहार का अनुमान लगाती थीं।
अब स्थिति बदल चुकी है। यूपीआई भुगतान (UPI Payments), ऑनलाइन सर्च (Online Search), वेबसाइट पर दोबारा आना या रात में छोड़े गए कार्ट (Cart) को अगली सुबह पूरा करना जैसे व्यवहार डिजिटल रिकॉर्ड (Digital Record) छोड़ते हैं। मार्च 2026 को समाप्त तिमाही में भारत में इंटरनेट सब्सक्राइबर (Internet Subscribers) की संख्या 1.09 अरब से ज्यादा हो गई। इसकी अहमियत सिर्फ इंटरनेट की पहुंच तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उपयोगकर्ताओं की पसंद और खरीदारी की मंशा को तेजी से समझा जा सकता है।
इस बदलाव का असर विज्ञापन बाजार (Advertising Market) पर भी दिखाई दे रहा है। एफआईसीसीआई-ईवाई मीडिया एंड एंटरटेनमेंट रिपोर्ट 2026 (FICCI-EY Media & Entertainment Report 2026) के मुताबिक, 2025 में ई-कॉमर्स और पॉइंट-ऑफ-सेल विज्ञापन (Point-of-Sale Advertising) 50 प्रतिशत बढ़कर 22,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वहीं, डेंट्सु-ई4एम डिजिटल रिपोर्ट (Dentsu-e4m Digital Report) के अनुसार भारत में डिजिटल विज्ञापन खर्च का 42 प्रतिशत हिस्सा प्रोग्रामेटिक तरीके (Programmatic) से खरीदा जा रहा है। इसमें रियल टाइम संकेतों (Real-Time Signals) के आधार पर विज्ञापन खरीदने का काम किया जाता है।
हालांकि, ज्यादा डेटा (Data) मिलने का मतलब हमेशा उपभोक्ताओं को बेहतर तरीके से समझ लेना नहीं है। कंपनियां आसानी से मापे जा सकने वाले आंकड़ों पर ज्यादा ध्यान दे सकती हैं और वास्तविक कारोबारी नतीजे पीछे छूट सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि ब्रांड पहले यह तय करें कि किन परिणामों के लिए मार्केटिंग बजट खर्च करना सही है।
आज भारतीय उपभोक्ता किसी ब्रांड के उसके पास पहुंचने का इंतजार नहीं कर रहा। वह अपनी जरूरत और सुविधा के हिसाब से तेजी से फैसला ले रहा है और उसके फैसले का डिजिटल रिकॉर्ड भी बन रहा है। ऐसे में ब्रांडों के लिए सिर्फ ज्यादा शोर पैदा करना नहीं, बल्कि सही समय पर उपयोगी साबित होना ज्यादा जरूरी हो गया है।
राहुल सेनगुप्ता को कर्मिक सॉल्यूशंस में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड मार्केटिंग नियुक्त किया गया है। इससे पहले वह प्रमोटएज में सेल्स और मार्केटिंग के हेड पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
राहुल सेनगुप्ता (Rahul Sengupta) को कर्मिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (Karmick Solutions Pvt Ltd) में वाइस प्रेसिडेंट-सेल्स एंड मार्केटिंग (Vice President - Sales & Marketing) नियुक्त किया गया है। उन्होंने लिंक्डइन (LinkedIn) पोस्ट के जरिए अपनी नई जिम्मेदारी की जानकारी साझा की।
अपनी पोस्ट में सेनगुप्ता ने कहा कि वह कंपनी के साथ नई भूमिका शुरू करने को लेकर खुश हैं। उन्होंने इसे अपने प्रोफेशनल जर्नी (Professional Journey) का अगला कदम बताया।
कर्मिक सॉल्यूशंस से जुड़ने से पहले सेनगुप्ता प्रमोटएज (PromotEdge) में हेड ऑफ सेल्स एंड मार्केटिंग (Head of Sales and Marketing) के पद पर थे। इस भूमिका में उन्होंने सेल्स इनिशिएटिव्स (Sales Initiatives) और मार्केटिंग गतिविधियों को आगे बढ़ाने के साथ कंपनी की बिजनेस ग्रोथ (Business Growth) और क्लाइंट एंगेजमेंट (Client Engagement) में योगदान दिया।
नई भूमिका में सेनगुप्ता का फोकस कंपनी के सेल्स और मार्केटिंग फंक्शंस (Sales and Marketing Functions) को मजबूत करने और ग्रोथ प्लान (Growth Plan) को आगे बढ़ाने पर रहेगा। सेल्स और मार्केटिंग लीडरशिप में उनके अनुभव से कंपनी को बिजनेस विस्तार और मार्केट रिलेशनशिप (Market Relationships) मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
करिश्मा राणे ने गोदरेज प्रॉपर्टीज में डिप्टी जनरल मैनेजर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस का पद संभाला है। इससे पहले वह शापूरजी पालोनजी रियल एस्टेट के साथ चार साल तक जुड़ीं रही थीं।
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समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
करिश्मा राणे (Karishma Rane) ने गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड (Godrej Properties Limited) ज्वाइन की है। उन्हें कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर-कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Deputy General Manager - Corporate Communications) की जिम्मेदारी दी गई है। इस नई भूमिका के साथ वह कम्युनिकेशंस करियर (Communications Career) के अगले फेज में पहुंच गई हैं।
गोदरेज प्रॉपर्टीज से जुड़ने से पहले करिश्मा राणे शापूरजी पालोनजी रियल एस्टेट (Shapoorji Pallonji Real Estate) के साथ करीब चार साल तक काम कर चुकी हैं। उनके पास कम्युनिकेशंस के क्षेत्र में 17 साल से ज्यादा का अनुभव है।
अपने करियर के दौरान उन्होंने कई बड़े कारोबारी समूहों के साथ काम किया है। उनका अनुभव कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस (Corporate Communications), ब्रांड बिल्डिंग (Brand Building), नैरेटिव डेवलपमेंट (Narrative Development) और स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस (Strategic Communications) जैसे क्षेत्रों में रहा है।
गोदरेज प्रॉपर्टीज में करिश्मा कंपनी की कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस लीडरशिप (Corporate Communications Leadership) का हिस्सा होंगी। नई भूमिका में उनका पिछला अनुभव और बड़े व अलग-अलग बिजनेस पोर्टफोलियो के साथ काम करने का अनुभव कंपनी के लिए काम आएगा।