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देश में तेजी से बढ़ रहे हैं ‘Ad Fraud’ के मामले, पढ़ें ये रिपोर्ट...
भारतीय उपमहाद्वीप में विज्ञापन घोटाले (ऐड फ्रॉड) की बात करें तो यह अकेले 32 प्रतिशत है और यदि इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो ...
समाचार4मीडिया ब्यूरो 8 years ago
समाचार4मीडिया ब्यूरो ।।
भारतीय उपमहाद्वीप में विज्ञापन घोटाले (ऐड फ्रॉड) की बात करें तो यह अकेले 32 प्रतिशत है और यदि इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो डिजिटल ऐड पर खर्च किए गए 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर में भारतीय मार्केटर्स को 350 मिलियन डॉलर का भारी नुकसान उठना पड़ सकता है।
यदि भारत को छोड़ दिया जाए तो ग्लोबल ऐड फ्रॉड का औसत सिर्फ 13.6 प्रतिशत है जबकि उसकी तुलना में भारत में यह औसत 15 प्रतिशत है। मोबाइल प्लेटफार्म कंपनी ‘TUNE’ ने पाया है कि भारत में मोबाइल ऐड फ्रॉड ग्लोबल औसत के मुकाबले 50 प्रतिशत ज्यादा है और यह पूरी दुनिया के मुकाबले 2.4 गुना ज्यादा भी है।
‘TUNE’ ने 702 ऐड नेटवर्क्स पर 24.3 बिलियन क्लिक की जांच की। इसके अलावा 131 देशों में इंस्टॉल किए गए 437 मिलियन मोबाइल एप का भी अध्ययन किया गया। इस जांच में पाया गया कि ग्लोबल स्तर पर इन सभी ऐड नेटवर्क्स पर 15.17 प्रतिशत फ्रॉड हुआ है। आठ ऐड नेटवर्क्स पर 100 प्रतिशत फ्रॉड और 35 प्रतिशत ऐड नेटवर्क्स पर यह 50 प्रतिशत अथवा इससे ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि मोबाइल एप इंस्टॉल की बात करें तो इनमें से 10 प्रतिशत तो पूरी तरह फ्रॉड हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में मोबाइल एप इंस्टॉल फ्रॉड काफी गंभीर समस्या बन चुका है। यहां पर स्मार्टफोन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। एप पब्लिशर्स तेजी से आगे बढ़ना चाहते हैं और फ्रॉड करने वाले सिस्टम के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
‘TUNE’ के वैज्ञानिकों ने जनवरी से मई 2017 के बीच इंस्टॉल किए गए 437 मिलियन मोबाइल एप के सैंपल की जांच की। इनमें 131 देशों में इंस्टॉल किए गए एप शामिल थे। सबसे ज्यादा मोबाइल एप इंस्टॉल फ्रॉड अमेरिका के गौतमाला में पाए गए। यहां पर 23.65 प्रतिशत मोबाइल एप में फ्रॉड के चिह्न मिले। मोबाइल एप इंस्टॉल करने के मामले में भारत के लोग भी काफी एक्टिव हैं। वर्ष 2016 में यहां अमेरिका से ज्यादा मोबाइल एप डाउनलोड किए गए और वर्ष 2015 के मुकाबले इनमें 71 प्रतिशत की जबर्दस्त बढ़ोतरी देखने को मिली। सबसे खराब स्थिति यह है कि 100 मिलियन एप में 16.2 प्रतिशत में धोखाधड़ी के संकेत मिले।
ग्लोबल स्तर पर देखा जाए तो पिछली साल ऐड फ्रॉड की बात करें तो यह सात बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा था। ‘Adloox’ का अनुमान है कि इस साल यह दोगुने से भी ज्यादा होगा और ऐडवर्टाइजर्स को 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की लागत आएगी।
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